23 जून को ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (INDIA) की पिछली बैठक में 21 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। हालांकि, आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़कम (DMK) ने उस बैठक से दूरी बनाई थी।
अब, ये दोनों दल फिर से INDIA गठबंधन के साथ नजर आ रहे हैं। इस गठबंधन ने भारत के चीफ जस्टिस (CJI) को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव से संबंधित मुद्दों पर एक पत्र भेजा है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि इस पत्र पर DMK और AAP ने भी हस्ताक्षर किए हैं, जो दर्शाता है कि ये दल चाहकर भी गठबंधन से अलग नहीं हो पा रहे हैं।
पत्र की जानकारी
इस पत्र में क्या लिखा गया है और CJI से क्या मांग की गई है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। केवल इतना बताया गया है कि यह SIR और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि CJI को पत्र लिखने का निर्णय 8 जून को हुई बैठक में लिया गया था, जिसमें 21 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक निर्दलीय सदस्य भी शामिल थे। अब इस संयुक्त पत्र पर कुल 23 दलों ने हस्ताक्षर किए हैं और इसे आज CJI को भेजा जाएगा.
DMK और AAP का समर्थन
जयराम रमेश के X पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने लिखा है कि ‘INDIA की ओर अच्छी शुरुआत हुई है और इस बार CJI को लिखी गई चिट्ठी पर AAP और DMK ने भी दस्तखत किए हैं।’ इसका अर्थ है कि भले ही ये दोनों दल खुद को INDIA से अलग बता रहे हों, लेकिन मुद्दों के आधार पर वे एकजुट हैं.
DMK की प्रतिक्रिया
DMK के प्रवक्ता सर्वनन अन्नादुराई ने कहा कि ‘DMK ने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं क्योंकि SIR की प्रक्रिया एकतरफा है। यह लोकतंत्र के खिलाफ है और लोगों को वोटिंग प्रक्रिया से बाहर करती है। लोकतंत्र का आधार यूनिवर्सल अडल्ट फ्रैंचाइज है, लेकिन SIR के माध्यम से मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर किया जा रहा है। हमने इसके दुष्परिणाम बिहार, बंगाल और अन्य राज्यों में देखे हैं। इसलिए हमने इस पर हस्ताक्षर किए हैं कि SIR जैसी प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए।’
AAP और DMK का गठबंधन
आम आदमी पार्टी (AAP) ने लोकसभा चुनाव 2024 के बाद यह घोषणा की थी कि वह INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। वहीं, तमिलनाडु में चुनाव परिणामों के तुरंत बाद DMK और कांग्रेस का गठबंधन टूट गया। DMK अब कांग्रेस से नाराज है और उसने लोकसभा में अपने सांसदों को कांग्रेस से अलग बैठाने की व्यवस्था कर ली है। फिर भी, दोनों दलों का इस पत्र पर हस्ताक्षर करना यह दर्शाता है कि अभी भी कुछ उम्मीद बाकी है और भविष्य में इन दलों के साथ रहने की संभावना बनी हुई है.



