12-13 सितंबर को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में BRICS summit 2026 की मेजबानी करने के लिए भारत पूरी तरह से तैयार है। 18वें ब्रिक्स लीडर्स समिट से पहले राजधानी दिल्ली में विदेशी मेहमानों का तांता लगा हुआ है।
शहर के कई नामी होटलों में आयोजन से जुड़े मेहमानों के ठहरने की व्यवस्था के बीच रुकने के किराए में तगड़ी बढ़ोतरी हो गई है, फिर भी आलम ये है कि शहर के लग्जरी होटलों में रूम की कमी देखी जा रही है।
बता दें कि भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले तीन बार साल 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण की। इस बड़े आयाजोन से पहले दिल्ली के होटलों की कीमतें रॉकेट बन चुकी हैं।
₹2-₹3 लाख में मिल रहे रूम
बुकिंग चेक से पता चला कि नई दिल्ली में ताज महल और द ओबेरॉय में 11-12 सितंबर के लिए सारे कमरे बुक हो चुके हैं। इसके साथ ही प्रसिद्ध होटल चेन ताज पैलेस में भी 10-12 सितंबर के लिए सारे कमरे बुक हो चुके हैं। इसके साथ ही फेमस द लीला पैलेस में भी 10 से 12 सितंबर के लिए अब कोई बुकिंग नहीं ली जा रही है। इन सब के अलावा फेमस होटल चेन ITC मौर्य में 10 से13 सितंबर के लिए कमरे तो खाली मिल जाएंगे, लेकिन उनका प्रति रात का किराया ₹2 से ₹3 लाख तक है।
आम जनता के लिए बुकिंग बंद
ब्रिक्स की बैठक भारत में होना देश के लिए एक ऐतिहासिक आयोजन है। इस दौरान कई देशों के प्रतिनिधिमंडल कार्यक्रम से 2 दिन पहले ही दिल्ली पहुंच रहे हैं, इसके साथ ही बैठक के बाद भी कई अतिथि रुक सकते हैं, जिससे 10 से 14 सितंबर के बीच ‘पीक क्रंच’ की स्थिति बनी हुई है। कई विदेशी डेलिगेशंस और बड़े अधिकारियों की आवाजाही के चलते सरकार और विदेशी दूतावासों ने सुरक्षा कारणों से कई होटलों को पूरा का पूरा ब्लॉक कर दिया है, जिससे आम जनता के लिए बुकिंग बंद है।
क्या है BRICS?
सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर BRICS क्या है, जिसको लेकर इतनी जोर-शोर की तैयारी की जा रही है। बता दें कि यह समारोह कई मायने में ऐतिहासिक है क्योंकि इस साल ब्रिक्स समूह के गठन होने के 20 साल पूरे हो रहे हैं। साल 2006 में सिर्फ चार देशों (BRIC – ब्राजील, रूस, भारत, चीन) के साथ शुरू हुआ यह संगठन आज काफी ताकतवर बन चुका है। साल 2011 में दक्षिण अफ्रीका जुड़ा। अब ब्रिक्स ग्रुप में कुल 11 देश हैं, इनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।



