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भारत में गैरकानूनी तरीके से घुसने वाले एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद से जुड़े सख्त कानून ‘यूएपीए’ के आरोप…

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भारत में गैरकानूनी तरीके से घुसने वाले एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ जांच को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, इन विदेशी नागरिकों पर से आतंकवाद से जुड़े सख्त कानून ‘यूएपीए’ के आरोप वापस नहीं लिए गए हैं और इस मामले में एजेंसी की जांच अभी भी जारी है। वहीं NIA ने विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में इन सातों आरोपियों के खिलाफ अप्रवासन और विदेशी अधिनियम (IFA) की धाराओं 21 और 23 के तहत अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है।

NIA ने दाखिल की चार्जशीट

एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि इन विदेशी नागरिकों के न्यायिक हिरासत में 180 दिन 8 सितंबर को पूरे होने वाले थे। अगर तय समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती, तो आरोपियों को कानूनी प्रावधान के तहत ‘डिफॉल्ट बेल’मिल जाती। चूंकि विदेशी अधिनियम के तहत अपराध पूरी तरह साबित हो चुके थे, इसलिए NIA ने समयसीमा खत्म होने से पहले पहली चार्जशीट दाखिल करना बेहतर समझा।

क्या यूएपीए के आरोप खत्म हो गए हैं?

इस मामले को लेकर भ्रम की स्थिति से बचते हुए सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि चार्जशीट में यूएपीए की धाराएं न होने का यह कतई मतलब नहीं है कि आतंकवाद के आरोप हटा दिए गए हैं या जांच बंद कर दी गई है। कानून के मुताबिक, पहली चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी आगे की जांच जारी रखी जा सकती है। जैसे-जैसे नए सबूत सामने आएंगे, एजेंसी अदालत में सप्लीमेंट्री (पूरक) चार्जशीट दाखिल कर सकती है।

अब समझिए क्या है पूरा मामला?

बता दें कि NIA ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वान डिक और छह यूक्रेनी नागरिकों कामियांस्की विक्टर, हर्बा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमनोवस्की, स्टेफनकीव मारियान और गोंचारुक मैक्सिम को 13 मार्च को गिरफ्तार किया था। इन पर आरोप है कि ये सभी म्यांमार के रास्ते अवैध तरीके से भारत में घुसे थे और देश के विभिन्न घरेलू हवाई अड्डों पर पकड़े गए। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि यह पूरा समूह भारत में किराये के सैनिकों के रूप में सक्रिय था। शुरुआत में NIA ने इनके खिलाफ UAPA और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

अमेरिकी राजनयिकों की दखल पर क्या कहा?

गौरतलब है कि इस मामले में अमेरिकी नागरिक की गिरफ्तारी के बाद वहां के राजनयिकों द्वारा उठाए गए कदमों पर सूत्रों ने कहा कि यह एक सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया है। जिस तरह विदेश में किसी भारतीय के पकड़े जाने पर भारतीय दूतावास कांसुलर एक्सेस और कानूनी सहायता मांगते हैं, वही प्रक्रिया यहां भी अपनाई जा रही है, जिसे वियना कन्वेंशन के तहत मान्यता प्राप्त है।