UPI को लेकर केंद्र सरकार के नए नोटिफिकेशन के बाद सियासी घमासान शुरू हो गया है। वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर बैंक या पेमेंट सिस्टम कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकते।
विवाद की असली वजह ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट हैं। सरकार ने इन पर अभी कोई निश्चित चार्ज घोषित नहीं किया है, लेकिन मौजूदा बदलाव ने भविष्य में चुनिंदा बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने की गुंजाइश खोल दी है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 0.4% तक MDR पर चर्चा चल रही है, हालांकि अंतिम दर तय नहीं हुई है।
इसी मुद्दे को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने UPI पर चार्ज लगाने का रास्ता खोलकर अमेरिकी पेमेंट कंपनियों के दबाव के आगे एक बार फिर समझौता किया है। राहुल का तर्क है कि बड़े मर्चेंट पेमेंट पर शुल्क लगाया गया तो उसका बोझ अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों तक पहुंच सकता है।
राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन संख्या में भले कम हों, लेकिन कुल UPI लेनदेन की वैल्यू में उनका हिस्सा काफी बड़ा है। इसलिए उनका कहना है कि मामला सिर्फ कुछ बड़े भुगतान तक सीमित नहीं रहेगा और इसका असर डिजिटल पेमेंट व्यवस्था पर पड़ सकता है।
हालांकि सरकार और BJP ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। BJP का कहना है कि आम ग्राहक से UPI ट्रांजैक्शन फीस लेने की बात गलत है। सरकार की तरफ से भी कहा गया है कि भविष्य में अगर MDR लागू होता है तो वह चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर होगा, जबकि Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होने वाले UPI पेमेंट मुफ्त बने रहेंगे।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ₹2,000 से ऊपर के बड़े मर्चेंट UPI पेमेंट पर आखिर कितना MDR लगाया जाएगा और उसका बोझ कौन उठाएगा। NPCI, RBI और पेमेंट कंपनियों के बीच इस पर बातचीत चल रही है, लेकिन अंतिम दर और व्यवस्था अभी तय नहीं हुई है। यानी UPI को लेकर जिस ‘चार्ज’ की चर्चा ने हलचल मचाई है, उसकी पूरी तस्वीर अभी सामने आना बाकी है।



