17 सितंबर 2026 को सूर्यदेव कन्या राशि में प्रवेश करने वाले हैं। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, अधिकार, करियर, मान-सम्मान और वरिष्ठ व्यक्तियों के साथ संबंधों का प्रतीक माना जाता है। कन्या राशि का स्वामी बुध है, जो सोच-विचार, कार्य और व्यवस्था से जुड़ा होता है।
सूर्य के गोचर का प्रभाव
सूर्य के इस गोचर का प्रभाव विभिन्न राशियों पर भिन्न-भिन्न होगा। कुछ जातकों को कार्य और अवसरों में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं, जबकि तुला, कुंभ और मीन राशि के लोगों को खर्च, आर्थिक लेन-देन, साझेदारी और व्यक्तिगत संबंधों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
तुला राशि: खर्चों में वृद्धि और निवेश में सावधानी
तुला राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर बारहवें भाव में होगा। यह स्थिति खर्च और आर्थिक दायित्वों को सक्रिय कर सकती है। यात्रा, स्वास्थ्य, घर की जरूरतों या अन्य आवश्यकताओं पर अधिक धन खर्च हो सकता है। इस दौरान विदेश से जुड़े संपर्क या दूरस्थ स्थानों से मिलने वाले अवसर लाभकारी हो सकते हैं। हालांकि, जातकों को यह महसूस हो सकता है कि मेहनत का फल अपेक्षा के अनुसार जल्दी नहीं मिल रहा है। इस समय बिना सोचे-समझे खरीदारी और जोखिम भरे निवेश से बचने की सलाह दी गई है। खर्चों की योजना बनाना और आवश्यक आर्थिक दायित्वों को प्राथमिकता देना फायदेमंद रहेगा।
उपाय: हर रविवार सूर्यदेव को जल अर्पित करें और किसी जरूरतमंद को भोजन दान करें।
कुंभ राशि: कर्ज, टैक्स और साझे धन पर ध्यान
कुंभ राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर आठवें भाव में होगा। यह स्थिति अचानक बदलावों और साझे धन तथा लंबी अवधि की आर्थिक जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकती है। कर्ज, टैक्स, बीमा, निवेश और साझे पैसों से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बड़े आर्थिक निर्णय लेने से पहले सभी दस्तावेजों और शर्तों की अच्छी तरह जांच करना आवश्यक है। व्यापारियों को भी किसी अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। इस अवधि में जल्दबाजी और भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय सोच-समझकर निर्णय लेना अधिक महत्वपूर्ण है।
उपाय: रविवार को सूर्यदेव को जल चढ़ाएं और गेहूं या गुड़ का दान करें।
मीन राशि: पार्टनरशिप और रिश्तों में अहंकार से बचें
मीन राशि के जातकों के लिए सूर्य सातवें भाव में गोचर करेंगे। यह भाव विवाह, साझेदारी, व्यापारिक रिश्तों, ग्राहकों और जनता से जुड़े कार्यों का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए इस अवधि में इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। व्यापार करने वाले लोगों को किसी नई साझेदारी में शामिल होने से पहले सभी शर्तों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। केवल मौखिक भरोसे पर बड़ा निर्णय लेने से बचना बेहतर रहेगा। निजी रिश्तों में अहंकार टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है। अपनी बात मनवाने की जिद करने के बजाय पार्टनर की बात सुनना रिश्ते में तनाव कम करने में मदद कर सकता है। वहीं व्यापार और जनता से जुड़े कार्यों में नए अवसर भी मिल सकते हैं।
उपाय: हर रविवार सूर्यदेव को जल अर्पित करें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
सूर्य के कन्या राशि में गोचर का मुख्य प्रभाव
वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य को आत्मविश्वास, अधिकार, करियर, मान-सम्मान और वरिष्ठ व्यक्तियों से जुड़े संबंधों का कारक माना जाता है। कन्या राशि बुध के स्वामित्व वाली राशि है, जिसे कार्य, व्यवस्था और सोच-विचार से जोड़ा जाता है। इसलिए इस गोचर के दौरान आर्थिक निर्णयों, कार्यशैली, साझेदारी और व्यक्तिगत संबंधों में व्यावहारिक सोच रखने पर जोर दिया गया है। तुला, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए ऊपर बताए गए उपाय और सावधानियां ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।



