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सुरक्षित बचपन अभियान शुरू, विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट और साइबर अपराधों की दी जानकारी

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राजनांदगांव। बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण, उनके कानूनी अधिकारों और ऑनलाइन खतरों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिले में सोमवार को सुरक्षित बचपन अभियान की शुरुआत की गई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशन और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत विद्यालयों में विशेष विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार होता के निर्देशन में अभियान का प्रथम चरण 26 से 31 अक्टूबर तक संचालित होगा।

अभियान के तहत 26 अक्टूबर को ठाकुर प्यारे लाल सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राजनांदगांव में विशेष विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। इसमें व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी पार्थ दुबे वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों को व्यक्तिगत सीमाओं तथा सुरक्षित और असुरक्षित व्यवहार के बारे में जागरूक किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में बच्चों को डरने या चुप रहने के बजाय तत्काल अपने अभिभावकों अथवा शिक्षकों को इसकी जानकारी देनी चाहिए। ऑनलाइन खतरों और साइबर अपराधों से सतर्क रहने के साथ किसी भी गलत आचरण या उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।

न्यायाधीश पार्थ दुबे ने कहा कि अभियान का उद्देश्य बच्चों के मन से डर दूर करना और उन्हें यह विश्वास दिलाना है कि किसी ऐसी बात को छिपाने की जरूरत नहीं है, जिससे वे भयभीत या असहज महसूस करते हैं। अभिभावक और शिक्षक उनकी सुरक्षा के लिए साथ हैं। अनुचित व्यवहार की जानकारी समय पर मिलने से आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

उन्होंने आपातकालीन स्थिति में विधिक सहायता के लिए नालसा हेल्पलाइन नंबर **15100** और चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर **1098** पर संपर्क करने की जानकारी भी दी।

सुरक्षित बचपन अभियान के तहत डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बसंतपुर में भी विधिक साक्षरता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां विधि सारथी एवं युवा अधिवक्ता नितिन साहू और रवि पित्रोड़ा ने छात्र-छात्राओं को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के प्रावधानों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि पॉक्सो एक्ट 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करता है और यह कानून जेंडर न्यूट्रल है। बच्चों की कथित सहमति यौन अपराध को वैध नहीं बनाती। अधिवक्ताओं ने कानून के तहत सजा के प्रावधानों के साथ साइबर अपराधों से बचाव के उपाय भी बताए।

कार्यक्रम के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजनांदगांव की ओर से अधिकार मित्र हेमन कुमार जामुरिया उपस्थित रहे। अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, सुरक्षा के उपायों और जरूरत पड़ने पर सहायता प्राप्त करने के तरीकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।