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कचरे से बनाई कांतारा की झांकी, राज्योत्सव में स्वच्छता दीदियों का स्टॉल बना आकर्षण

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राजनांदगांव। राज्योत्सव में इस बार नगर निगम की स्वच्छता दीदियों ने अपनी रचनात्मकता से लोगों का ध्यान खींचा। पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में आयोजित जिला स्तरीय राज्योत्सव में ‘कबाड़ से जुगाड़’ थीम पर तैयार निगम का स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहा। यहां अनुपयोगी वस्तुओं से बनाई गई कांतारा फिल्म की झांकी और आकर्षक खिलौनों को देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। स्कूल शिक्षा मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री गजेंद्र यादव ने भी इस नवाचार की सराहना की।

स्वच्छता दीदियों ने बेकार समझकर फेंक दी जाने वाली वस्तुओं का इस्तेमाल कर आकर्षक कलाकृतियां तैयार कीं। कांतारा फिल्म की झांकी बनाने में पुरानी गुड़िया, कार्टून, बोतल, थर्माकोल, फूल और गजरे का उपयोग किया गया। वहीं, पुरानी बोतलों और डिब्बों से छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिकृति के साथ टॉय बाइसिकल, डोरेमोन, जिराफ, शेर, मगरमच्छ और केकड़े जैसे खिलौने बनाए गए।

प्रदर्शनी के जरिए ‘वेस्ट टू आर्ट’ और रिड्यूस, रीयूज व रिसाइकिल की अवधारणा को सामने रखा गया। स्वच्छता दीदियों ने बताया कि सही सोच और रचनात्मकता से कचरे को भी उपयोगी वस्तुओं में बदला जा सकता है। स्टॉल के माध्यम से लोगों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। संदेश दिया गया कि स्वच्छ शहर बनाने की जिम्मेदारी केवल सफाई कर्मचारियों की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है।

नगर निगम क्षेत्र के 51 वार्डों में 17 एसएलआरएम सेंटर संचालित हैं। यहां 442 स्वच्छता दीदियां काम कर रही हैं। ये प्रतिदिन घर-घर जाकर कचरा एकत्र करती हैं और गीले-सूखे कचरे को अलग कर उसका उचित प्रबंधन करती हैं। इन केंद्रों में कबाड़ और जैविक खाद की बिक्री से अतिरिक्त आय भी अर्जित की जा रही है।

राज्योत्सव में स्वच्छता दीदियों की प्रदर्शनी ने उनकी मेहनत और हुनर को मंच देने के साथ यह भी दिखाया कि कचरा केवल निस्तारण की समस्या नहीं, बल्कि सही प्रबंधन से उपयोगी संसाधन बन सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ आय के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।