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cg” ग्राम सभाओं एवं कृषक चौपाल के माध्यम से किसानों को दी जा रही योजनाओं की जानकारी…”

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**”ग्राम सभाओं एवं कृषक चौपाल के माध्यम से किसानों को दी जा रही योजनाओं की जानकारी”**

” राजनांदगांव जिले की ग्राम पंचायतों में किसानों को शासन की कृषि एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम सभा एवं कृषक चौपाल का आयोजन किया जा रहा है।”

“कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने किसानों को शासन की योजनाओं से अधिक से अधिक लाभान्वित करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए पात्र हितग्राहियों को लाभ लेने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए है।”

“जिसके तहत डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम सम्बलपुर में आयोजित ग्राम सभा में फसल परिवर्तन एवं फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के संबंध में जानकारी दी गई। किसानों को शासन द्वारा धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर प्रति एकड़ 15 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि, संतुलित उर्वरक उपयोग, बीजीए टांका निर्माण, फसल बीमा योजना तथा अन्य कृषि संबंधी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई।”

“इसी प्रकार ग्राम पंचायत सिवनीकला में आयोजित कृषक चौपाल में फसल विविधीकरण के अंतर्गत धान के स्थान पर अन्य फसलों की खेती करने पर शासन द्वारा दिए जाने वाले प्रोत्साहन तथा पीएम-आशा योजना के तहत दलहन एवं तिलहन की खरीदी संबंधी जानकारी किसानों को दी गई।”

“साथ ही रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग एवं उनके लाभों के बारे में भी विस्तार से अवगत कराया गया।”

“छुरिया विकासखंड के ग्राम पंचायत दैहान, कुहीकला, साल्हे एवं रतनभाट में भी कुषक चौपाल आयोजित कर किसानों को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं, फसल विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा शासकीय प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी दी गई।”

“कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में कृषकों ने भाग लिया। इस अवसर पर संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, कृषि विकास अधिकारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी उपस्थित रहे।”

cg” खनिज विभाग की कार्रवाई – चूना पत्थर (गिट्टी) का अवैध परिवहन करने पर 3 वाहन को किया गया जप्त…”

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राजनांदगांव*। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार खनिज विभाग द्वारा जिले में खनिज का अवैध उत्खनन, भण्डारण एवं परिवहन करने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में खनिज विभाग की टीम द्वारा अर्जुनी, रायतापायली, बीजेभांठा, डोंगरगांव, खुज्जी, कुमरदा, लक्ष्मणभरदा, किरगी, सुरगी, सिंघोला, तुमड़ीबोड़, इन्दामारा, सोमनी सहित अन्य क्षेत्र का आकस्मिक निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान चूना पत्थर (गिट्टी) का अवैध परिवहन करने पर 3 वाहनों को जप्त किया गया।

इसके तहत ग्राम करेली में कोटगुल महाराष्ट्र निवासी चंदन शेखावत के स्वामित्व के हाईवा एमएच 33 टी 5852 से बिजरावन मध्यप्रदेश निवासी वाहन चालक बहादुर सिंह एवं ग्राम खुर्सीपार में डोंगरगांव निवासी गोविन्द देवांगन के स्वामित्व के माजदा सीजी 08 एएन 8053 से बाजार नवागांव निवासी वाहन चालक उमेश यादव द्वारा चूना पत्थर (गिट्टी) का अवैध परिवहन करने पर कार्रवाई करते हुए जप्त कर थाना डोंगरगांव को सुपुर्द किया गया।

इसी तरह ग्राम फरहद में दुर्ग निवासी अमर इन्फ्रा के स्वामित्व के हाईवा सीजी 07 एएक्स 9196 से अज्ञावबाजार निवासी वाहन चालक अभिषेक पाण्डे द्वारा चूना पत्थर (गिट्टी) का अवैध परिवहन करने पर कार्रवाई करते हुए जप्त कर थाना पुलिस लाईन राजनांदगांव को सुपुर्द किया गया।

प्रकरणों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण की रोकथाम के लिए लगातार गस्त व निगरानी की जा रही है।

cg” खेल प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराएगी हमारी सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय…”

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति की बैठक, उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन प्रक्रिया में 156 खिलाड़ी पात्र”

अधिसूचना के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी जाएगी सूची”

उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में नियुक्त करने की होगी व्यवस्था, प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को निखारने में निभाएंगे अहम भूमिका”

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज उनके निवास कार्यालय में उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव सहित समिति के सदस्यों ने वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 के लिए प्राप्त आवेदनों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया तथा सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन को अंतिम स्वरूप प्रदान किया। इनमें 20 अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं।

बैठक में अनुमोदित 156 खिलाड़ियों की सूची को सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इसे अधिसूचित करने के बाद खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में लेने के लिए आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ होगी। राज्य के खिलाड़ी लंबे समय से इस सूची की प्रतीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री साय की अध्यक्षता में आज हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद खिलाड़ियों का यह इंतजार जल्द समाप्त हो जाएगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए पारदर्शी, समयबद्ध और प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि चयनित उत्कृष्ट खिलाड़ियों को पात्रता के अनुरूप उन्हें शासकीय सेवा में नियुक्ति दिलाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया और व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन खिलाड़ियों का अनुभव और उपलब्धियां प्रदेश की नई खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, इसलिए उनकी सेवाओं का उपयोग खेल प्रशिक्षण, प्रतिभा संवर्धन और खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में भी किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत खेल व्यवस्था विकसित करना है, जहां गांव से लेकर राज्य स्तर तक प्रतिभाओं की समय रहते पहचान हो, उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने अधिकारियों से खेल गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने तथा खेल प्रतिभाओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेलों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। खेल अधोसंरचना के विस्तार, आधुनिक सुविधाओं के विकास तथा नई खेल अकादमियों की स्थापना की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य ऐसे उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार करना है जो राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आज चयनित खिलाड़ी भविष्य में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर प्रदेश में खेल संस्कृति को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बैठक में बताया गया कि राज्य में अब तक 182 उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किए जा चुके हैं। इसी क्रम में वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 के लिए पूर्व में विज्ञापन जारी कर आवेदन आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त आवेदनों के परीक्षण और निर्धारित मानकों के आधार पर 156 खिलाड़ियों को पात्र पाया गया।

बैठक में वन मंत्री श्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती तनुजा सलाम उपस्थित थीं।

cg” मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा का अनुपम संगम” ” फॉरेस्ट रेस्ट हाउस “राम वाटिका में स्थापित भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन कर प्राप्त किया आशीर्वाद”

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मुख्यमंत्री ने आमजन से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का किया आह्वान, भगवान श्री राम के आदर्श पथ पर चलने का दिया संदेश”

“एक पेड़ माँ के नाम 3.0” अभियान के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण का दिया प्रेरक संदेश

: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय**

“मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  आज अपने सरगुजा प्रवास के दौरान विकासखंड उदयपुर स्थित रामगढ़ के फॉरेस्ट रेस्ट हाउस “राम वाटिका” में स्थापित भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की, इसके साथ ही उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम 3.0″ अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधारोपण किया।”

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा तथा आत्मीय जुड़ाव का प्रतीक बताया।

“उन्होंने कहा कि माँ के नाम पर लगाया गया एक पौधा न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित भविष्य की सुदृढ़ आधारशिला भी है।”

“उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक पौधे लगाएँ तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लें, ताकि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करते हुए प्रकृति के संतुलन को बनाए रखा जा सके।”

“भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्री राम का जीवन मर्यादा, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता का अनुपम आदर्श है, जो युगों-युगों से समस्त मानवता का मार्गदर्शन करता आ रहा है।”

“उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से प्रभु श्री राम द्वारा प्रशस्त आदर्श पथ पर चलते हुए सेवा, सद्भाव एवं समर्पण के भाव से समाज एवं राष्ट्र के उत्थान में सहभागी बनने का आह्वान किया।”

“इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज, सीतापुर विधायक श्री रामकुमार टोप्पो सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।”

वर्षाकाल में आकाशीय बिजली से बचाव हेतु स्वास्थ्य विभाग ने जारी की जन-जागरूकता अपील….

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वर्षाकाल में आकाशीय बिजली (Lightning) गिरने की अत्यधिक संभावनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आमजन से सतर्कता बरतने एवं सुरक्षा संबंधी उपायों का पालन करने की अपील की गई है।

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आकाशीय बिजली एक प्राकृतिक आपदा है, जिससे थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर जनहानि एवं गंभीर दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। मौसम खराब होने, बादल गरजने या बिजली चमकने की स्थिति में नागरिकों को खुले मैदान, खेत, पहाड़ी, जलाशय, पेड़ के नीचे तथा ऊँचे स्थानों पर रुकने से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी पक्के भवन अथवा बंद चारपहिया वाहन में सुरक्षित आश्रय लेना चाहिए।

बिजली कड़कने के दौरान नदी, तालाब अथवा अन्य जल स्रोतों से दूर रहें तथा धातु के कृषि उपकरण, लोहे की रॉड, तार अथवा अन्य धातु की वस्तुओं के साथ खुले स्थान पर न रहें। साथ ही, मौसम विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी चेतावनियों का पालन करें।

यदि कोई व्यक्ति खुले में फँस जाए तो जमीन पर पूरी तरह लेटने के बजाय दोनों पैरों को साथ रखकर नीचे झुक जाए, सिर नीचे रखें तथा अन्य लोगों से कुछ दूरी बनाए रखें। इससे आकाशीय बिजली गिरने की स्थिति में जोखिम कम किया जा सकता है।

यदि किसी व्यक्ति पर आकाशीय बिजली गिर जाए तो घबराएँ नहीं। प्रभावित व्यक्ति को छूना पूरी तरह सुरक्षित होता है। उसे तत्काल सुरक्षित स्थान पर ले जाएँ तथा 108 एम्बुलेंस सेवा अथवा निकटतम स्वास्थ्य संस्थान से तुरंत संपर्क करें तथा तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाएं।

यदि व्यक्ति श्वास नहीं ले रहा हो अथवा नाड़ी नहीं चल रही हो तो प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा सीपीआर (CPR) प्रारंभ किया जा सकता है तथा शीघ्र अस्पताल पहुँचाना चाहिए।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वर्षाकाल के दौरान स्वयं सुरक्षित रहें, अपने परिवार एवं आसपास के लोगों को भी आकाशीय बिजली से बचाव के उपायों की जानकारी दें तथा मौसम संबंधी चेतावनियों का गंभीरता से पालन करें।

“जब गरज सुनाई दे, तो तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाएँ। आपकी सतर्कता ही आपका जीवन बचा सकती है।”

” जुलाई 2026 में महत्वपूर्ण धार्मिक त्योहारों की सूची” जुलाई 2026 का धार्मिक महत्व…”

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जुलाई 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने कई प्रमुख तीज-त्योहार मनाए जाएंगे। इसलिए, इन व्रतों और त्योहारों की तिथियों को पहले से ही नोट कर लेना उचित होगा।

इस बार जुलाई में देवशयनी एकादशी, जगन्नाथ यात्रा और सावन की शुरुआत भी होगी। पूरे महीने में हर दूसरे-तीसरे दिन कोई न कोई त्योहार मनाया जाएगा। इसके अलावा, इस महीने गुप्त नवरात्रि भी मनाई जाएगी। इस लेख में हम आपको जुलाई महीने में आने वाले व्रत-त्योहारों की जानकारी देंगे।

व्रत और त्योहारों की तिथियाँ” व्रत त्योहारों की लिस्ट “

  • -03 जुलाई 2026 – संकष्टी गणेश चतुर्थी, संत थॉमस डे
  • -10 जुलाई 2026 – योगिनी एकादशी
  • -12 जुलाई 2026 – रोहिणी व्रत, मास शिवरात्रि, प्रदोष व्रत
  • -14 जुलाई 2026 – भौमवती अमावस्या
  • -15 जुलाई 2026 – गुप्त नवरात्रि प्रारंभ
  • -16 जुलाई 2026 – मुहर्रम समाप्त, पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा
  • -17 जुलाई 2026 – वरद चतुर्थी
  • -19 जुलाई 2026 – कौमार षष्ठी
  • -25 जुलाई 2026 – देवशयनी एकादशी
  • -26 जुलाई 2026 – जाया पार्वती व्रत, प्रदोष व्रत
  • -29 जुलाई 2026 – गुरु पूर्णिमा, व्यास पूजा
  • -30 जुलाई 2026 – कांवड़ यात्रा प्रारंभ

योगिनी एकादशी का विवरण” योगिनी एकादशी डेट और टाइम

योगिनी एकादशी का व्रत शुक्रवार, 10 जुलाई को होगा। इसका पारण 11 जुलाई को दोपहर 1:50 बजे से शाम 4:36 बजे के बीच किया जा सकता है। जो लोग गौण योगिनी एकादशी का पालन करते हैं, वे 11 जुलाई, शनिवार को भी यह व्रत रख सकते हैं।

देवशयनी एकादशी का विवरण” देवशयनी एकादशी डेट और टाइम

जुलाई में देवशयनी एकादशी 25 तारीख को मनाई जाएगी। इसकी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9:12 बजे से शुरू होगी और 25 जुलाई को सुबह 11:34 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, एकादशी का व्रत शनिवार को रखा जाएगा और इसका पारण 26 जुलाई, रविवार को सुबह 5:39 बजे से 8:22 बजे के बीच किया जा सकता है।

गुरु पूर्णिमा का विवरण” गुरु पूर्णिमा डेट और टाइम

आषाढ़ महीने में आने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। यह पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा। पूर्णिमा की शुरुआत 28 जुलाई, मंगलवार को शाम 6:18 बजे होगी और बुधवार को रात 8:05 बजे समाप्त होगी। पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय का समय रात 7:21 बजे होगा।

मानसून का आगमन: 26 राज्यों में बारिश की संभावना…

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समझें, मानसून ट्रफ क्या होती है?

नई दिल्ली। मंगलवार दोपहर तक, मानसून ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर लिया है। अब तक यह देश के 26 राज्यों को कवर कर चुका है। इससे पहले, 24 जून को यह मध्य प्रदेश और गुजरात में पहुंचा था, लेकिन इसके बाद यह छह दिन तक रुका रहा, जिससे कई क्षेत्रों में गर्मी और उमस बनी रही। दिल्ली और उत्तर भारत के लिए राहत की खबर है। सैटेलाइट इमेज में लगभग 1,500 किमी लंबी मानसून ट्रफ (कम दबाव की पट्टी) बनती हुई दिखाई दे रही है, जो उत्तरी बंगाल की खाड़ी से लेकर जम्मू-कश्मीर तक फैली हुई है।भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून ट्रफ बन चुकी है, लेकिन यह अभी हिमालय की तलहटी के करीब स्थित है। यह ट्रफ धीरे-धीरे दक्षिण की ओर बढ़ेगी और 1 से 4 जुलाई के बीच उत्तर भारत के बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश की संभावना है।

 

” भारत की कृषि स्थिति” क्या इसका वैश्विक व्यापार में भी समान योगदान है?

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भारत कृषि उत्पादन के मामले में विश्व के प्रमुख देशों में से एक है, लेकिन क्या इसका वैश्विक व्यापार में भी समान योगदान है? आंकड़े इस बात का समर्थन नहीं करते। नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) के अनुसार, भारत के कुल कार्यबल का 43.0% कृषि और उससे संबंधित क्षेत्रों में कार्यरत है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-2026 के अनुसार, वैश्विक कृषि निर्यात में भारत की हिस्सेदारी केवल 2.2% है। जबकि देश में खाद्यान्न और बागवानी उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, भारत अभी तक ‘सुपरपावर’ नहीं बन सका है। यह स्थिति भारत की कृषि क्षमता और उसके वैश्विक प्रदर्शन के बीच एक बड़ा अंतर दर्शाती है.

भारत की कृषि उत्पादन में प्रगति

भारत में कृषि उत्पादन की स्थिति संतोषजनक है। 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन 3,577 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष से 254 लाख टन अधिक है। बागवानी उत्पादन भी 362-367 मिलियन टन तक पहुंच गया है। चीन की कृषि अर्थव्यवस्था लगभग 1270 अरब अमेरिकी डॉलर है, जबकि भारत की कृषि अर्थव्यवस्था 639 अरब अमेरिकी डॉलर है.

भारत की ताकतें

भारत प्याज का सबसे बड़ा उत्पादक है और सब्जियों, फलों और आलू के उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी जैसे सहायक क्षेत्रों में भी भारत ने प्रगति की है। कुल कृषि और संबंधित क्षेत्रों की वृद्धि दर औसतन 4.4% रही है। हालांकि, वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत नहीं है। वित्त वर्ष 2025 में कृषि और खाद्य निर्यात लगभग 49.43 अरब डॉलर रहा, जो कुल निर्यात का केवल 11.2% है.

भारत की चुनौतियाँ

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-2026 के अनुसार, कई प्रमुख फसलों की उपज अभी भी वैश्विक औसत से कम है। छोटे और बिखरे खेत, भंडारण और कोल्ड चेन की कमी, कटाई के बाद होने वाले नुकसान, उत्पादन की गुणवत्ता, बीजों और उर्वरकों तक सीमित पहुंच और असमान सिंचाई सुविधाएं कुछ प्रमुख बाधाएं हैं, जिनका सामना भारत कर रहा है.

निर्यात की स्थिति

  • संयुक्त राज्य अमेरिका: 172.36 बिलियन डॉलर
  • ब्राजील: 141.89 बिलियन डॉलर
  • नीदरलैंड: 133.90 बिलियन डॉलर
  • जर्मनी: 102.21 बिलियन डॉलर
  • चीन: 84.33 बिलियन डॉलर
  • फ्रांस: 83.45 बिलियन डॉलर
  • स्पेन: 74.30 बिलियन डॉलर
  • इटली: 70.53 बिलियन डॉलर
  • कनाडा: 65.30 बिलियन डॉलर
  • बेल्जियम: 62.42 बिलियन डॉलर
  • पोलैंड: 53.84 बिलियन डॉलर
  • इंडोनेशिया: 49.86 बिलियन डॉलर
  • मेक्सिको: 49.45 बिलियन डॉलर
  • ऑस्ट्रेलिया: 46.13 बिलियन डॉलर
  • थाईलैंड: 45.32 बिलियन डॉलर

भारत इस सूची में 15वें स्थान पर है। ये आंकड़े ‘फूड एंड एंग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन ऑफ यूनाइटेड नेशंस’ पर आधारित हैं.

मिट्टी की सेहत पर चिंता

भारत में रसायनों और उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के कारण मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। फसलों के विकास के लिए आवश्यक तीन तत्वों का आदर्श अनुपात 4:2:1 होना चाहिए, लेकिन यह अब बिगड़कर 10.9:4 हो गया है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि यूरिया सब्सिडी के कारण नाइट्रोजन का अत्यधिक उपयोग हो रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है.

सरकार की पहल

सरकार ने पीएम किसान, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, एकीकृत बागवानी विकास मिशन, और डिजिटल कृषि मिशन जैसी योजनाएं शुरू की हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य को 1.5 गुना लागत पर तय करने, सूक्ष्म सिंचाई और मृदा की सेहत पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, लेकिन इन योजनाओं का बड़े स्तर पर कार्यान्वयन अभी भी बाकी है.

निर्यात में बाधाएं

  • घरेलू सुरक्षा: भारत की प्राथमिकता अपनी जरूरतों को पूरा करना है, जिसके कारण निर्यात पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
  • कमजोर प्रॉसेसिंग: भारत कच्चे माल का निर्यात करता है, लेकिन पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में पीछे है।
  • वैश्विक मानकों में चूक: अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार भारत की खेती कीटनाशक और उर्वरक पर निर्भर है।
  • खराब कोल्ड स्टोरेज: भारत में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज की कमी है, जिससे उत्पादों का रखरखाव महंगा हो जाता है।

आंकड़ों में पिछड़ना

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, 2000 में भारत की वैश्विक कृषि साझेदारी 1.1% थी, जो 24 साल बाद केवल 2.2% तक पहुंची है। 2020 में 34.5 बिलियन डॉलर से 2025 में 51.1 बिलियन डॉलर के बीच निर्यात बढ़ा है, लेकिन 2023 से 2025 तक भारत का कृषि निर्यात स्थिर रहा है।

अमेरिका और भारत के उच्च स्तरीय अधिकारियों ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी…

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भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग

अमेरिका और भारत के उच्च स्तरीय अधिकारियों ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में बढ़ते विश्वास का संकेत देते हुए कहा है कि लंबे समय से प्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में है।

दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, रक्षा निर्माण और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।

अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम (यूएसआईएसपीएफ) की लीडरशिप समिट में इस पर सहमति बनी, जहां दोनों सरकारों के प्रतिनिधियों, विधायकों और व्यापारिक नेताओं ने बताया कि यह संबंध तकनीकी, निवेश और साझा रणनीतिक हितों से प्रेरित होकर एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है।

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है।

भारत में अमेरिका के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने बताया कि भारत का आर्थिक परिवर्तन इसे वैश्विक विकास, स्थिरता और विश्वसनीय साझेदारी का एक महत्वपूर्ण आधार बना रहा है। उन्होंने कहा कि निरंतर सुधार, मैन्युफैक्चरिंग में वृद्धि और उच्च तकनीक में निवेश ने भारत को इस दशक के अंत तक 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर किया है।”

क्वात्रा ने बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक को भारत-अमेरिका सहयोग के अगले क्षेत्रों के रूप में पहचाना और कहा कि 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य आपूर्ति श्रृंखला, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और कुशल प्रतिभा के करीबी एकीकरण पर निर्भर करेगा।”

समिट में चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा पर विशेष चर्चा हुई। अमेरिका के आर्थिक विकास, ऊर्जा और पर्यावरण के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने भारत को इंजीनियरिंग प्रतिभा में एकमात्र ऐसा देश बताया जो वास्तव में चीन को चुनौती दे सकता है और इसे विश्वसनीय तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण दीर्घकालिक साझेदार बताया।”

हेलबर्ग ने कहा कि वाशिंगटन चीन से आगे निकलने के लिए आवश्यक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाना चाहता है और भारत के साथ मिलकर एक साझा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेवलपर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की योजना बना रहा है।”

यूएसआईएसपीएफ के अध्यक्ष मुकेश अघी ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि अमेरिकी कंपनियां धीरे-धीरे चीन पर निर्भरता कम कर रही हैं और भारत में मैन्युफैक्चरिंग और अनुसंधान संचालन को बढ़ा रही हैं।”

समिट में नई दिल्ली के साथ करीबी संबंधों के लिए वाशिंगटन में दोनों पक्षों के समर्थन पर भी जोर दिया गया। रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेन्स ने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर एकमात्र ऐसा संयोजन हैं जो नवाचार में चीन के स्तर की बराबरी कर सकते हैं।”

डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वार्नर ने भारत को अमेरिका के शीर्ष दो या तीन रणनीतिक साझेदारों में से एक बताया। डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि रो खन्ना ने कहा कि यह संबंध अंततः साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ-साथ बढ़ते रक्षा और आर्थिक सहयोग पर आधारित होना चाहिए।”

पूर्व अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर ने मौजूदा संबंधों को ऐतिहासिक संदर्भ में रखते हुए लोगों के बीच के जुड़ाव को ‘गुप्त सामग्री’ बताया, जिसने दशकों तक दोनों देशों के संबंधों को बनाए रखा। उन्होंने यूएसआईएसपीएफ की यादगार कॉफी टेबल बुक, ‘हम लोग: 250 आवाजें जिन्होंने यूएस-भारत संबंधों को आकार दिया’ का भी विमोचन किया।”

बातचीत में यह स्पष्ट हुआ कि भारत-अमेरिका के संबंध अब पारंपरिक कूटनीति और रक्षा पर ध्यान केंद्रित करने से आगे बढ़ चुके हैं। अधिकारियों और व्यापारिक नेताओं ने बार-बार तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश को संबंध के अगले चरण की प्राथमिकता बताया।”

पीएम मोदी ने सेशेल्स दौरे पर भेंट किए अनोखे उपहार…

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प्रधानमंत्री मोदी का सेशेल्स दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन दिवसीय सेशेल्स यात्रा के बाद सोमवार को भारत लौटे। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने राष्ट्रपति, स्पीकर और उपराष्ट्रपति को विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों में भारत की सांस्कृतिक विविधता की झलक देखने को मिली।

राष्ट्रपति को भेंट किया गया कछुआ

सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी को मुरादाबाद के शिल्पकारों द्वारा निर्मित एक कलात्मक कछुआ भेंट किया गया। यह कछुआ भारत की हस्तशिल्प परंपरा का प्रतीक है और इसे ज्ञान, स्थिरता और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है। यह उपहार सेशेल्स के एल्डाब्रा जायंट टॉर्टॉइज से भी जुड़ता है, जो दोनों देशों के बीच मित्रता और प्रकृति संरक्षण के मूल्यों को दर्शाता है।

स्पीकर को मिली टोडा कढ़ाई वाली शॉल

प्रधानमंत्री मोदी ने संसद की स्पीकर अजारेल अर्नेस्टा को टोडा जनजाति की पारंपरिक कढ़ाई से बनी शॉल भेंट की। यह शॉल सफेद कपड़े पर लाल और काले डिजाइनों से सुसज्जित है, जो टोडा समुदाय की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है।

उपराष्ट्रपति को दी गई ऑर्किड पेंटिंग

सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्लई को सिक्किम की ऑर्किड पेंटिंग भेंट की गई। इस चित्रकला में भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर को ऑर्किड के फूलों के बीच दर्शाया गया है, जो दोनों देशों की जैव विविधता और सांस्कृतिक सौहार्द का प्रतीक है।

प्रथम महिला को भेंट किए गए उपहार

राष्ट्रपति हर्मिनी की पत्नी वेरोनिक हर्मिनी को पीएम मोदी ने महेश्वरी सिल्क स्टोल और बिदरी शिल्प का बॉक्स भेंट किया। महेश्वरी स्टोल हल्के वजन और आकर्षक डिजाइन के लिए प्रसिद्ध है, जबकि बिदरी बॉक्स भारतीय धातुकला की अनूठी परंपरा का उदाहरण है।

कांचीवरम सिल्क का उपहार

प्रधानमंत्री मोदी ने उपराष्ट्रपति की पत्नी लीना पिल्लई को कांचीवरम सिल्क फैब्रिक भेंट किया। यह रेशमी वस्त्र अपनी चमक और जरी के बारीक काम के लिए जाना जाता है, जो भारतीय वस्त्र कला की समृद्ध विरासत को दर्शाता है।