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पति जान ले लेंगे. सुनीता विलियम्स ने क्यों कहा ऐसा? भारत को लेकर…

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NASA की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स भारत आई हुई हैं. मंगलवार को दिल्ली में उन्होंने दिवंगत कल्पना चावला की 90 साल की मां मुलाकात की. दोनों ने इस मुलाकात में पुरानी यादों को ताजा किया.

भारत में जन्मी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री चावला उन सात क्रू मेंबर्स में से एक थीं, जिनकी फरवरी 2003 में स्पेस शटल कोलंबिया दुर्घटना में मौत हो गई थी, जब अंतरिक्ष यान पृथ्वी आने से पहले दुर्घटना का शिकार हो गया था.

सुनीता विलियम्स की जड़े भी भारत से जुड़ी हैं, उनके पिता गुजरात से आते हैं. मंगलवार को 60 साल की विलियम्स ने दिल्ली में अमेरिकन सेंटर में आयोजित ‘आंखें सितारों पर, पैर ज़मीन पर’ नाम के एक इंटरैक्टिव सेशन में हिस्सा लिया. जहां उन्होंने कहा भारत आना घर वापसी जैसा है.

भारत आना घर वापसी जैसा- सुनीता विलियम्स

इंटरैक्टिव सेशन में हिस्सा लेने के दौरान सुनीता विलियम्स ने अपनी करियर से जुड़ी कई खास बातें शेयर की. उन्होंने भारत के लिए कहा कि भारत आना उनके लिए घर वापसी जैसा हैं. उन्होंने बताया कि उनके पिता ने उन्हें भारतीय कल्चर से रू-बा-रू कराया और वह भगवान गणेश में विश्वास रखती हैं.

वहीं भारत के चंद्रयान के बारे में सुनीता ने कहा कि वह इसको लेकर काफी आशावादी हैं और अमेरिका और भारत के स्पेस में बढ़ते सहयोग को भी सकारात्मक रूप में देखती हैं. उन्होंने उम्मीद जताई की भारतीय स्पेस एजेंसी जल्द ही बड़े और खास मिशन पूरा करेंगी.

चांद पर जाना चाहती हैं, लेकिन पति ‘मार’ देंगे!

सुनीता विलियम्स से जब चांद पर जाने की इच्छा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह चांद पर जाना चाहती हैं, लेकिन उनके पति उनकी जान ले लेंगे. उन्होंने कहा कि अब वह अपनी फैमिली को वक्त देना चाहती हैं और मां का ध्यान रखना चाहती हैं.

स्टारलाइनर मिशन में फंसने पर क्या बोली सुनीता?

सुनीता विलियम्स ने बोइंग के स्टारलाइनर पर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में अपने अप्रत्याशित रूप से 9.5 महीने लंबे मिशन के बारे में बात करते हुए, इस दावे को खारिज कर दिया कि वह फंस गई थीं और NASA ने उन्हें छोड़ दिया था. विलियम्स ने कहा कि क्रू के पास हमेशा घर लौटने का रास्ता था और उन्हें NASA के स्टेप-बाय-स्टेप सेफ्टी प्रोसेस पर भरोसा था.

BUDGET 2026-27: किसानों और ग्रामीणों की होगी मौज, बजट में सरकार कर रही

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केंद्र सरकार इस बार बजट 2026-27 में किसानों और ग्रामीण इलाकों के विकास पर फोकस कर सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार 2026-27 के आने वाले बजट में बड़ी योजनाओं के लिए डबल-डिजिट की बढ़त के साथ ग्रामीण इलाकों पर अपना ध्यान और मजबूत करने की तैयारी में है.

इस वित्तीय वर्ष में ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए 1.88 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 8% ज्यादा है. लोगों ने बताया कि एक नए कानून के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए 2026-27 में मौजूदा साल के संशोधित अनुमान से करीब 11% ज्यादा पैसा दिया जा सकता है. वहीं, ग्रामीण आवास और ग्रामीण सड़कों की योजनाओं में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना है.

ग्रामीण क्षेत्र के लिए मौजूदा बजट

मौजूदा वित्तीय वर्ष में सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) के लिए 86,000 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के लिए 54,832 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के लिए 19,000 करोड़ रुपये का बजट रखा था. कुल मिलाकर, इन तीनों योजनाओं का हिस्सा इस साल ग्रामीण विकास मंत्रालय के कुल बजट का लगभग 85% था.

हाई मल्टीप्लायर प्रभाव

विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G योजना, जिसके लिए 2026-27 में 95,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च का अनुमान है, को MGNREGS की जगह लाने का प्रस्ताव है. ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए बजट में अच्छी बढ़ोतरी की मांग की है. अगले साल अहम योजनाओं के बजट में इस साल के संशोधित अनुमान के मुकाबले डबल-डिजिट बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

इन योजनाओं के तहत ग्रामीण इलाकों में ज्यादा खर्च से अंदरूनी क्षेत्रों में स्थायी संपत्तियां बनेंगी, जिससे आर्थिक विकास को रफ्तार मिलेगी और ग्रामीण मांग को भी सहारा मिलेगा. ग्रामीण आवास और सड़क जैसी योजनाओं का आर्थिक फायदा ज्यादा होता है, जबकि रोजगार गारंटी योजना से अकुशल ग्रामीण मजदूरों की आमदनी बढ़ती है.

कैसा होगा ग्रामीण बजट?

रिपोर्ट के मुताबिक, उम्मीद से कम खर्च होने के कारण मौजूदा वित्तीय वर्ष के संशोधित अनुमान में PMAY-G और PMGSY के बजट में काफी कटौती की जाएगी. कैबिनेट ने 2024 में देशभर में पांच साल में 3 करोड़ नए घर बनाने के लिए 3.06 लाख करोड़ रुपये मंजूर किए थे. इनमें से 2 करोड़ घर PMAY-G के तहत ग्रामीण इलाकों में बनाए जाने हैं.

इस वित्तीय वर्ष में नए सर्वे के जरिए पात्र लाभार्थियों की पहचान में ज्यादा समय लगने के कारण नए चरण में घरों के निर्माण पर असर पड़ा है. ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस साल 3.51 मिलियन घर पूरे करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक केवल 1.8 मिलियन घर ही बन पाए हैं. आने वाले महीनों में निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है, क्योंकि लाभार्थियों की सूची को लगभग अंतिम रूप दे दिया गया है. इसके लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत होगी.

ग्रामीण सड़कों की बात करें तो, इस वित्तीय वर्ष में इस योजना के तहत खर्च उम्मीद से कम रहा है, क्योंकि नए चरण में शामिल किए जाने वाले गांवों की सूची तैयार करने में अधिक समय लगा. सरकार ने सितंबर 2024 में मौजूदा योजना में बदलाव करते हुए PMGSY के चौथे और नए चरण के लिए पांच साल का 70,125 करोड़ रुपये का पैकेज मंजूर किया था.

ईरान में कैसे जाएगी खामेनेई की सत्ता? पेंटागन ने तैयार कर लिया तख्तापल…

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अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने ईरान में अली खामेनेई सरकार के तख्तापलट का प्लान तैयार कर लिया है. जल्द ही इसे राष्ट्रपति ट्रंप के सामने पेश किया जाएगा. पेंटागन ने व्हाइट हाउस के अधिकारियों के साथ मिलकर यह प्लान तैयार किया है.

ट्रंप ने 14 जनवरी को एक हाईलेवल मीटिंग में अधिकारियों से निर्णायक प्लान तैयार करने के लिए कहा था.

वॉल स्ट्रीट जनरल के मुताबिक

ईरान

में अब शांति है. सरकार ने सड़कों पर हो रहे विरोध को कंट्रोल कर लिया है. इसके बावजूद पेंटागन के अधिकारी तेहरान को लेकर माथापच्ची कर रहे हैं. अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पेंटागन के अधिकारियों ने काफी मशक्कत के बाद एक प्लान तैयार किया है.

पेंटागन के इस प्लान में क्या है?

वॉल स्ट्रीट जनरल ने अपनी इस रिपोर्ट में बताया है कि जो ईरान को लेकर जो प्लान तैयार किया गया है, उसमें ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड के कुछ ठिकानों पर हमला भी है. यह रिपोर्ट हवाई और जमीनी दोनों हमले के मद्देनजर तैयार किया गया है. ईरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड को काफी अहम माना जाता है. इसके पास 1.5 लाख एक्टिव सदस्य हैं, जिसका मुख्य काम इस्लामिक गणराज्य व्यवस्था को बनाए रखना है.

यह प्लान ऐसे वक्त में तैयार किया गया है, जब सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अंडरग्राउंड हो गए हैं. बीबीसी फारसी के मुताबिक 17 जनवरी को आखिरी बार खामेनेई को देखा गया था. इसके बाद वे अंडरग्राउंड हो गए हैं. खामेनेई को जून 2025 में भी अंडरग्राउंड कर दिया गया था.

ईरान में तख्तापलट की कोशिश क्यों?

ईरान मिडिल ईस्ट का सबसे अहम देश है. यहां दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा तेल और नेचुरल गैस का भंडार है. इसके अलावा ईरान का होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा है, जो व्यापारिक दृष्टिकोण से सबसे अहम माना जाता है. दुनियाभर का 20 प्रतिशत तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है. 1979 के बाद से ही यहां अमेरिका का कंट्रोल खत्म हो गया है. अमेरिका इसे किसी भी सूरत में वापस पाना चाहता है.

इसके अलावा ईरान के वर्तमान सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अमेरिका के धुर-विरोधी हैं. कई मौकों पर खामेनेई अमेरिका पर सीधा हमला कर चुके हैं. वहीं मिडिल ईस्ट के देशों का कहना है कि ईरान लगातार प्रॉक्सी संगठनों के जरिए पूरे इलाके को कंट्रोल करना चाहता है. हिजबुल्लाह, हमास और हूती को ईरान का प्रमुख प्रॉक्सी संगठन माना जाता है.

ईरान में तख्तापलट क्यों नहीं आसान?

ईरान की शासन व्यवस्था काफी जटिल है. एक तरफ सुप्रीम लीडर खामेनेई के पास सेना और न्यायपालिका से जुड़े सभी अधिकार हैं. वहीं दूसरी तरफ वहां पर राष्ट्रपति चुनकर आते हैं, जिनके जिम्मे आर्थिक हालात को सुधारना और नीति तैयार करना है.

ईरान में कैबिनेट और संसद की भी व्यवस्था है. यानी वहां पर सिर्फ खामेनेई को खत्म कर तख्तापलट नहीं किया जा सकता है.

New Rules for AIBE: लॉ स्टूडेंट्स के लिए बड़ी राहत, अब एक बार AIBE छूट…

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BCI New Rules for AIBE: बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी BCI ने लॉ स्टूडेंट्स को लंबे समय से परेशान कर रही एक बड़ी समस्या का समाधान निकाल लिया है. अब कानून की पढ़ाई कर रहे लास्टर ईयर के छात्र भी ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) में बैठ सकेंगे.

इस बारे में बीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि नए नियम बना दिए गए हैं जिसके तहत फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स एग्जाम में शामिल हो पाएंगे. इस नियम के साथ एक और बड़ा बदलाव इस टेस्ट में किया गया है जिसके तहत AIBE अब साल में दो बार आयोजित की जाएगी. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने बीसीआई के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए 2024 में दायर हुई याचिका का निपटारा कर दिया.

पूरा मामला उन छात्रों की परेशानी से जुड़ा है जिन्हें सिर्फ इसलिए AIBE देने से रोका जा रहा था क्योंकि वे फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स हैं और ऑफिशियली ग्रेजुएट नहीं हैं. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि AIBE पास किए बिना कोई भी लॉ ग्रेजुएट स्टेट बार काउंसिल में वकील के रूप में अपना नामांकन नहीं करा सकता है. आसान शब्दों में समझे तो अगर कोई लॉ स्टूडेंट ग्रेजुएट होने के बाद AIBE क्लीयर नहीं करता है तो वह किसी भी कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू नहीं कर सकता है. ऐसे में अगर किसी स्टूडेंट का AIBE एक साल छूट जाए तो उसे अगली साल का इंतजार पड़ता था. इस दौरान याचिकाकर्ता ने कहा था कि ग्रेजुएट होने के बाद पहला साल काफी अहम होता है.

2024 में दायर हुई थी याचिका

छात्रों ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि इस तरह के नियम उनके प्रोफेशनल जीवन में बिना वजह लेटलतीफी पैदा कर रहे हैं. ऐसे में जिन छात्रों को यह इंतजार करना पड़ता था उनका कीमती समय बर्बाद होता था. सुप्रीम कोर्ट भी इस समस्या से पहले से वाकिफ था. 2024 में अदालत ने अंतरिम आदेश देते हुए फाइनल ईयर के छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी थी. इससे पहले 2023 में कोर्ट ने बीसीआई को इस मुद्दे पर स्पष्ट नियम बनाने का निर्देश भी दिया था.

20 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि फाइनल ईयर के छात्रों को असहाय स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता. कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि यदि उन्हें AIBE देने से रोका गया तो उनका पूरा एक साल बर्बाद हो जाएगा.

क्या है BCI नियम 2026

अब बीसीआई ने बीसीआई नियम 2026 के तहत इस समस्या का स्थायी समाधान निकाल लिया है. नए नियमों के मुताबिक छात्र परीक्षा दे सकते हैं लेकिन उन्हें अपनी फाइल एलएलबी एग्जाम पास करना होगा. यानी योग्यता के मानक से कोई समझौता नहीं किया गया है बल्कि समय-सीमा को अधिक व्यावहारिक बनाया गया है.

AIBE साल में दो बार होने से छात्रों को अब पूरे साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा. एक परीक्षा छूटने पर दूसरा मौका जल्द ही मिल सकेगा. बता दें कि BCI द्वारा किया गया ये बदलाव लॉ स्टूडेंट्स के लिए बड़ी राहत है. यह सुधार कानून की पढ़ाई को आसान नहीं बनाएगा बल्कि स्टूडेंट्स के कीमती वक्त को बचाएगा.

नितिन नबीन का पहला फैसला, बिहार की जीत से उत्साहित तावड़े को कमान और….

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब अपने नए अध्यक्ष (नितिन नबीन) के साथ अपने अगले मिशन पर निकल गई है. पार्टी अध्यक्ष के रूप में नबीन ने कल मंगलवार को पदभार ग्रहण कर लिया. जिम्मेदारी संभालते ही उन्होंने केरल जैसे राज्य के लिए चुनाव प्रभारी का ऐलान कर दिया.

बिहार चुनाव और महाराष्ट्र में निकाय चुनाव में जीत के बाद बीजेपी को उम्मीद है कि इस दक्षिण राज्य में भी कमल जरूर खिलेगा. चुनाव प्रभारी के ऐलान के साथ ही अब पीएम मोदी भी यहां का दौरा करने जा रहे हैं.

केरल उन राज्यों में शामिल है जहां पर काफी प्रयास के बाद बीजेपी को अब तक अपेक्षित जीत नहीं मिल सकी. बीजेपी यहां पर जीत हासिल करने के लिए लंबे समय से अपने मिशन में जुटी है, लेकिन वह कामयाबी से काफी दूर है. बीजेपी में अब नितिन दौर की शुरुआत हो चुकी है, नबीन के नवीन दौर का आगाज भी पार्टी ने केरल में चुनाव प्रभारी के ऐलान के साथ किया है.

अब केरल में कमल खिलाने की कोशिश

बीजेपी ने कल मंगलवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को केरल में अगले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का प्रभारी नियुक्त किया. बिहार चुनाव में बीजेपी की जीत के नायकों में से एक विनोद तावड़े को यह जिम्मेदारी दी गई है. उनके साथ केंद्रीय मंत्री और पड़ोसी राज्य कर्नाटक की बेंगलुरु नॉर्थ से लोकसभा सांसद शोभा करंदलाजे को रखा गया है. वह केरल चुनाव में पार्टी की सह-प्रभारी बनाई गई हैं.

केरल में विधानसभा चुनाव अप्रैल में कराए जाने हैं, और इसमें अभी थोड़ा वक्त है. ऐसे में केरल में बिजी होने से पहले तावड़े को एक और जिम्मेदारी दी गई है. पार्टी के नए अध्यक्ष ने केरल जाने से पहले तावड़े को चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए पार्टी का पर्यवेक्षक बनाया. यहां अगले हफ्ते 29 जनवरी को मेयर के लिए चुनाव होना है और तावड़े पार्टी के पर्यवेक्षक के रूप में अपना काम करेंगे.

तिरुवनंतपुरम में जीत के बाद बढ़ा उत्साह

नए अध्यक्ष के कमान संभालने के साथ ही बीजेपी अपने फॉर्म में आ गई है. केरल और चंडीगढ़ मेयर चुनाव के अलावा कर्नाटक और तेलंगाना में निकाय चुनाव के लिए अपने प्रभारियों के नाम का ऐलान कर दिया. लेकिन 3 जगहों को छोड़ दिया जाए तो केरल में विधानसभा चुनाव होने हैं और बीजेपी यहां पर जीत हासिल करना चाहती है. उसका उत्साह इस बार थोड़ा बढ़ा हुआ है क्योंकि पिछले महीने उसे केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के निकाय चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल हुई थी.

बीजेपी तिरुवनंतपुरम के निकाय चुनाव में मिली जीत के सिलसिले को केरल में आगे बढ़ाना चाहती है. अब पीएम नरेंद्र मोदी भी पार्टी की इस कवायद में शामिल होने जा रहे हैं. 2 दिन बाद पीएम मोदी शुक्रवार (23 जनवरी) को तिरुवनंतपुरम का दौरा करने वाले हैं, इस दौरान वह एक बड़ा रोड शो भी करेंगे. हालांकि इससे पहले राजधानी पहुंचने पर उनके भव्य स्वागत की तैयारी भी की जा रही है.

तिरुवनंतपुरम के जरिए आगे बढ़ने की चाह

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में जीत हासिल करने के बाद पीएम मोदी की यह पहली केरल यात्रा है. बीजेपी ने नगर निकाय में इस बड़ी जीत के साथ वहां चार दशकों से अधिक समय से चल रहे वामपंथी शासन को खत्म किया था. बताया जा रहा है कि इस दौरे के दौरान पीएम मोदी तिरुवनंतपुरम के विकास को लेकर एक योजना मेयर वीवी राजेश को सौंपेंगे. यह योजना 2030 तक शहर के विकास की खाका पेश करती है.

इसके अलावा पीएम केरल के लिए स्वीकृत 4 नई ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाएंगे. स्थानीय नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान किए गए वादे को पूरा करता है. साथ ही रोड शो के जरिए पीएम मोदी स्थानीय लोगों को भी साधने की कोशिश करेंगे.

तावड़े को जिम्मा, भविष्य की नबीन टीम

नितिन नबीन को अभी अपनी नई टीम बनानी है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने कुछ नियुक्तियां की हैं वह पार्टी के भविष्य की ओर इशारा भी करती हैं. महासचिव विनोद तावड़े को केरल चुनावों के लिए चुनाव प्रभारी बनाया गया है. वह बिहार में पार्टी के प्रभारी भी हैं, जहां नवंबर में पार्टी को बंपर जीत मिली थी. बिहार में बीजेपी के साथ ही NDA को भी बड़ी जीत हासिल हुई और नीतीश कुमार की अगुवाई में फिर से सरकार बनी.

ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि महाराष्ट्र से नाता रखने वाले तावड़े को आगे चलकर पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. केरल में उनकी मदद के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे को लगाया गया है, उन्हें सह प्रभारी नियुक्त किया गया है.

केरल में बीजेपी का कैसा रहा प्रदर्शन

बीजेपी के लिए केरल देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है, जहां कमल अब तक खिल नहीं पाया है. दक्षिण भारत में तमिलनाडु की तरह केरल भी वो राज्य है जहां बीजेपी अपनी स्थिति मजबूत नहीं कर सकी है. 2021 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने केरल में 140 में से 115 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे. उसके खाते में कुल पड़े वोटों में से 11.4 फीसदी (23,54,468) वोट मिले थे. लेकिन वह खाता नहीं खोल सकी थी. जबकि 9 सीटों पर वह दूसरे नंबर पर रही थी. 100 सीटों पर तीसरे नंबर पर रही थी.

इससे पहले 2016 के चुनाव में भी बीजेपी का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था. हालांकि वह खाता खोलने में कामयाब रही थी. एक सीट (नेमोम) पर उसे जीत मिली तो 7 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही. जबकि 88 सीटों पर पार्टी को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा. पार्टी ने 98 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे जिसमें उसे 10.6% (21,29,726) वोट मिले थे.

धीरे-धीरे केरल में आगे बढ़ रही BJP

केंद्र में नरेंद्र मोदी युग की शुरुआत से पहले केरल में बीजेपी की स्थिति कुछ खास नहीं थी. पीएम मोदी और अमित शाह ने 2014 के बाद यहां पर अपनी गतिविधियां काफी तेज की. इसका फायदा भी उसे मिल रहा है, हालांकि बड़ी जीत अभी भी दूर है. साल 2011 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 138 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन उसका खाता तक नहीं खुला. उसे महज 6 फीसदी (10,53,654) वोट ही आए. 3 सीटों पर नंबर 2 भी रही थी.

केरल वो राज्य है जहां सत्ता पर संघर्ष कम्युनिस्ट पार्टी की अगुवाई वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के बीच ही रहा है. और बीजेपी एनडीए के रूप में यहां पर अपनी पैठ बनाना चाहती है. बीजेपी को 2016 में केरल से पहला विधायक (नेमोम) मिला तो 2024 के लोकसभा चुनाव में उसे पहली जीत (त्रिशुर) हासिल हुई.

बीजेपी को धीरे-धीरे यहां पर कामयाबी मिल रही है, लेकिन सत्ता की दहलीज तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष करना होगा. सत्तारुढ़ एलडीएफ 10 सालों से सत्ता में है और वह सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है. कांग्रेस का फ्रंट भी वापसी की कोशिशों में लगा है, लेकिन वह अंदरुनी लड़ाई से जूझ रहा है. ऐसे में बीजेपी के लिए तिरुवनंतपुरम नगर निगम में मिली जीत संजीवनी बूटी की तरह काम कर सकती है, और अमित शाह के बाद अब पीएम मोदी भी अब यहां का दौरा कर बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं.

SIR: अधिकारियों को धमकी, लोगों को डराया जा रहा. EC ने CM ममता पर क्या-

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चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कड़ी आलोचना की है. चुनाव आयोग ने कहा कि ममता ने भड़काऊ भाषणों और गलत जानकारी से पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया को बाधित किया है.

राज्य में ECI अधिकारियों के खिलाफ हिंसा और धमकियों का माहौल है, जिससे निष्पक्ष चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण है.

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कड़ी आलोचना की है.चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से हलफनामे में कहा कि ममता ने एसआईआर को नुकसान पहुंचाने के लिए भड़काऊ भाषण दिए हैं. उन्होंने डर फैलाने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस की और भ्रामक व गलत जानकारी लोगों तक पहुंचाई है.

आयोग ने कहा कि अन्य राज्यों के विपरीत पश्चिम बंगाल में बहुत अधिक धमकियां और बाधाएं हैं. हलफनामे में चुनाव आयोग ने कहा कि लोगों को एसआईआर की प्रक्रिया के प्रति गलत जानकारी देकर भड़काया जा रहा है. हलफनामे में कहा गया कि राज्य में ईसीआई अधिकारियों के खिलाफ हिंसा और धमकियों का माहौल है.

चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में क्या- क्या कहा?

चुनाव आयोग ने जो सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है, उसमें कहा है कि ममता बनर्जी ने बयानों से लोगों को भड़काया है. इस दौरान उन्होंने सीधे तौर पर अधिकारियों को निशाना बनाया है. जिसके कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ा है. आयोग ने कहा कि सीएम के बयानों के कारण निचले स्तर पर बीएलओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. इसके साथ ही कई तरह के हमले भी हुए हैं.

बंगाल की पुलिस व्यवस्था पर आयोग ने उठाए सवाल

आयोग ने कहा कि इस तरह के बयानों के कारण हमारे साथ काम करने वाले अधिकारियों में डर था. यही वजह है कि अधिकारियों ने मिलकर इस्तीफा पेश किया था. उन्होंने बताया था कि सुरक्षा के कारण वह इस्तीफा दे रहे हैं.आयोग ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस बीएलओ की शिकायतों पर एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी कर रही है. यही वजह है कि आयोग ने बंगाल की पुलिस व्यवस्था पर भी कई तरह के सवाल खड़े किए हैं.

UAE के साथ भारत की एकेडमिक पार्टनरशिप होगी मजबूत, बढ़ेगा टेक्नोलॉजी

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भारत और संयुक्त अरब अमीरात दोनों देश अपने बाइलैटरल रिश्तों को और मज़बूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान 19 जनवरी 2026 को दिल्ली दौरे पर रहे जहां पर दोनों देशों के बीच शिक्षा, डिजिटल फाइनेंस और टेक्नोलॉजी के फील्ड में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है.

दोनों देशों के बीच हुई बातचीत में एजुकेशन और फाइनेंस सिस्टम्स को आपस में जोड़ने के साथ-साथ लोगों के लिए इन्हें आसान और सुलभ बनाने पर ज़ोर दिया गया.

भारत और यूएई ने यूनिवर्सिटीज और

एकेडमिक इंस्टीट्यूट्स

के बीच सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है. यूएई में पहले से चल रहे आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद के ऑफशोर कैंपस इस सहयोग की मजबूत नींव बने हुए हैं. आने वाले समय में स्टूडेंट्स एक्सचेंज प्रोग्राम्स को बढ़ावा दिया जाएगा. जिससे दोनों देशों के छात्रों को एक-दूसरे की शिक्षा प्रणाली और संस्कृति को समझने का मौका मिलेगा. इसे नॉलेज और इनोवेशन का एक मजबूत ब्रिज माना जा रहा है.

डिजिलॉकर भी जोड़ा जाएगा

इसके अलावा स्कूलों और कॉलेजों में इनोवेशन और टिंकरिंग लैब्स का विस्तार करने का प्लान भी है. ताकि छात्रों में तकनीकी सोच और क्रिएटिविटी को बढ़ावा मिल सके. एक अहम प्रस्ताव यह भी है कि भारत की डिजिलॉकर प्रणाली को यूएई के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए. इससे इंडियन एकेडमिक डिग्रियों और डॉक्यूमेंट्स का वैरिफिकेशन आसानी से हो सकेगा. छात्रों व पेशेवरों को शिक्षा और रोज़गार के मौके पाने में आसानी होगी.

फाइनेंस फील्ड में भी दोनों देशों ने डिजिटल सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है. भारत और यूएई के नेशनल पेमेंट प्लेटफॉर्म को आपस में जोड़ने की योजना बनाई जा रही है. इससे सीमा-पार भुगतान तेज़, सुरक्षित और कम लागत में संभव हो सकेगा. इसका सीधा लाभ व्यापारियों, प्रवासी भारतीयों और आम लोगों को मिलेगा.

तकनीक, ऊर्जा और सांस्कृतिक रिश्ते

शिक्षा और फाइनेंस के अलावा साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर भी चर्चा हुई. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुपरकंप्यूटिंग और स्पेस जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने की योजना है. एनर्जी सिक्योरिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे स्पेशल इनवेस्टमेंट रीजन्स, स्मार्ट अर्बन टाउनशिप्स और ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी में भी हिस्सेदारी की बात पर फोकस किया गया.

कई और अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

सांस्कृतिक रिश्तों और लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करना भी प्राथमिकता में है. युवाओं और शिक्षाविदों के लिए विनिमय कार्यक्रमों के साथ-साथ अबू धाबी में हाउस ऑफ इंडिया की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है. रक्षा, सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे भी बातचीत का अहम हिस्सा रहे. कुल मिलाकर, यह वार्ता भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है जो दोनों देशों के लंबे समय में और मज़बूत रिश्तों को नई ऊंचाई देगी.

BMC मेयर पद पर सस्पेंस बरकरार, दिल्ली में बैठक बेनतीजा, अब कौन …

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महाराष्ट्र में मुंबई नगर निगम (BMC) के मेयर पद को लेकर सस्पेंस बरकरार है. चुनाव में महायुति की सहयोगी पार्टियों भाजपा और शिवसेना (शिंदे) को बहुमत मिलने के बावजूद अभी तक मेयर पद को लेकर फैसला नहीं हुआ है.

शिवसेना (शिंदे) ने उनकी पार्टी के नेता को मेयर बनाने की मांग की है. इसी मांग को लेकर गतिरोध बना हुआ है. इस गतिरोध को दूर करने के लिए दिल्ली में एकनाथ शिंदे गुट के पूर्व सांसद राहुल शेवाले और बीजेपी के मुंबई अध्यक्ष अमित साटम के बीच प्रारंभिक चर्चा शुरू हुई.

सूत्रों के अनुसार इस बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला. इस चर्चा के बाद

BMC मेयर पद को लेकर बना अंतिम राजनीतिक गतिरोध अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के स्तर पर सुलझाया जाएगा.

मुंबई के मेयर पद को लेकर चल रही यह बातचीत राज्य की सियासत में अहम मानी जा रही है और आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला होने की संभावना है.

जानें बैठक में क्या हुआ

सूत्रों के अनुसार बीजेपी और शिवसेना नेताओं के बीच बैठक में गठबंधन को मजबूत करने पर जोर दिया गया, लेकिन मेयर पद पर दोनों पार्टियों के बीच समाजस्य नहीं बन पाया.

शिवसेना का मानना है कि मुंबई में उन्होंने लंबे समय तक शासन किया और उनके पार्षद को मेयर बनाया जाना चाहिए, जबकि बीजेपी भी मुंबई में अपनी पकड़ बढ़ाना चाहती है. सूत्रों का कहना है कि भाजपा की ओर से यह प्रस्ताव दिया गया है कि मेयर पद के बदले अन्य नगर निकायों में शिवसेना को समर्थन दे सकती है, हालांकि अभी इस पर फैसला नहीं हुआ है.

मेयर पद को लेकर गतिरोध कायम

मुंबई नगर निगम के चुनाव में 227 सदस्यीय बीएमसी में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) को 29 सीटें मिली हैं. दोनों पार्टियों ने गठबंधन के लिए आवश्यक 114 का आंकड़ा पार कर गया. इस बीच शिवसेना (शिंदे गुट) ने ढाई-ढाई साल मेयर पद की मांग की और इसे लेकर दोनों में गतिरिध चल रहा है.

शिंदे गुट के नवनिर्वाचित पार्षदों को एक पांच सितारा होटल में रखा गया. इसे लेकर आरोप लगे थे कि टूट के डर से पार्षदों को कैद में रखा गया है. हालांकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 29 नवनिर्वाचित नगरसेवकों ने मंगलवार को बांद्रा के एक होटल से चेक आउट किया, जब उनके निर्वाचन को औपचारिक रूप से मान्यता देने वाला गजट अधिसूचना जारी की गई.

शिवसेना (शिंदे गुट) ने उठाए ये कदम

शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद 17 जनवरी से ताज लैंड्स एंड में रुके हुए थे. बीएमसी के नतीजों के तुरंत बाद, क्योंकि पार्टी लीगल फॉर्मैलिटीज पूरी होने और अलायंस के अंदर गतिरोध समाप्त होने का इंतजार कर रही थी.

गजट नोटिफिकेशन जारी होने के साथ पार्षदों को अब ऑफिशियली काउंसलर के तौर पर मान्यता मिल गई है, जिससे शिवसेना अपने म्युनिसिपल पार्टी ग्रुप के रजिस्ट्रेशन के साथ आगे बढ़ सकती है और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ग्रुप का ग्रुप लीडर अपॉइंट कर सकती है.

‘छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की ओर से बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन को बधाई… सीएम साय’

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BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव और पदभार ग्रहण समारोह से लौटे छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय। साथ में दोनों उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा भी थे।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव और नितिन नबीन के पदभार ग्रहण समारोह में शामिल होकर 20 जनवरी को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नई दिल्ली से लौटे।

सीएम साय ने रायपुर में कहा कि भाजपा का संगठन महापर्व चल रहा था। अंतिम चरण में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव था, जिसमें हम सभी सहभागिता देने गए थे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।

नितिन नबीन लंबे समय से संगठन में रहे हैं और जनप्रतिनिधि भी रहे हैं। इसका लाभ देश और बीजेपी को मिलेगा। बता दें कि छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम द्वय अरुण साव और विजय शर्मा भी दिल्ली गए थे।

CG TET Admit Card 2026 : छत्तीसगढ़ टीईटी एडमिट कार्ड जारी, यहां दिए लिंक से करें डाउनलोड…

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सीजी व्यापम की ओर से शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड (CG TET 2026 Admit Card) जारी कर दिए गए हैं जिसे अभ्यर्थी ऑफिशियल वेबसाइट या इस पेज पर…

छत्तीसगढ़ टीईटी एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड जारी, परीक्षा 1 फरवरी को दो शिफ्ट में होगी आयोजित।

छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा (CG TET 2026) के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल की ओर से एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड (Chhattisgarh TET Admit Card) डाउनलोड के लिए उपलब्ध करवा दिए गए हैं। प्रवेश पत्र का डायरेक्ट लिंक vyapamcg.cgstate.gov.in पर उपलब्ध करवाया गया है जहां से आप लॉग इन डिटेल दर्ज करके इसे डाउनलोड कर सकते हैं।

यहां दिए लिंक से भी कर सकते हैं डाउनलोड

सभी अभ्यर्थी ध्यान रखें कि सीजी व्यापम की ओर से एडमिट कार्ड केवल ऑनलाइन ही उपलब्ध करवाए गए हैं। किसी भी उम्मीदवार को डाक या अन्य माध्यम से प्रवेश पत्र नहीं भेजे जायेंगे। उम्मीदवार वेबसाइट के साथ ही नीचे दिए जा रहे डायरेक्ट लिंक पर क्लिक करके हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं।

एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की स्टेप्स

  • छत्तीसगढ़ टीईटी एडमिट कार्ड 2026 डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइटcgstate.gov.in पर विजिट करें।
  • वेबसाइट के होम पेज पर आपको एडमिट कार्ड पर क्लिक करना होगा।
  • इसके बाद आपको रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर एवं पासवर्ड दर्ज करके लॉग इन बटन पर क्लिक करना होगा।
  • अब आपका प्रवेश पत्र स्क्रीन पर ओपन हो जायेगा जहां से आप इसे डाउनलोड करके इसका प्रिंटआउट निकाल सकते हैं।

CGTET Admit Card 2026 Download Link;परीक्षा तिथि एवं शिफ्ट टाइमिंग…

छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन 1 फरवरी 2026 को राज्य के 20 जनपदों में करवाया जायेगा। परीक्षा दो शिफ्ट में संपन्न होगी। पहली शिफ्ट में कक्षा 1 से लेकर 5वीं तक के लिए परीक्षा का आयोजन होगा जिसके लिए टाइमिंग सुबह 9:30 से दोपहर 12:15 बजे तक रहेगी। इसके अलावा दूसरी शिफ्ट में कक्षा 6 से लेकर 8वीं तक के लिए एग्जाम का आयोजन होगा जिसके लिए टाइमिंग अपरान्ह 3 से शाम 5:45 तक रहेगी।