बांग्लादेश एक ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रहा है जिसके तहत वह रूसी कच्चे तेल को भारत में रिफाइन करवाएगा और फिर उस रिफाइंड फ्यूल को इंपोट करेगा. ऐसा करके वह पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई में आई रुकावटों से निपटना चाहता है.
इस योजना के तहत, जिस पर अभी विचार चल रहा है, कच्चे तेल के इंपोर्ट, भारत में उसकी रिफाइनिंग और फिर रिफाइंड फ्यूल के ट्रांसपोर्ट का पूरा खर्च बांग्लादेश ही उठाएगा. ईटी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इस सप्ताह बांग्लादेश के ऊर्जा और खनिज संसाधन विभाग ने इस संबंध में बिजली और ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू को एक प्रस्ताव भेजा है. इस प्रस्ताव में विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर ‘सरकार-से-सरकार’ (G2G) लेवल का समझौता करने की अनुमति मांगी गई है.
बांग्लादेश के लिए क्यों जरूरी बनी भारत की रिफाइनरी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चटगांव में स्थित बांग्लादेश की एकमात्र सरकारी रिफाइनरी रूसी कच्चे तेल को रिफाइन करने के लिए ज्यादा उपयुक्त नहीं है. रूसी कच्चा तेल ज्यादातर ‘हेवी ग्रेड’ (भारी श्रेणी) का होता है, जिसके कारण बांग्लादेश को रिफाइंड फ्यूल के इंर्पोट पर ही पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता है. इस रिफाइनरी की वार्षिक क्षमता 1.5 मिलियन टन है और इसे मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट देशों से आने वाले कच्चे तेल को रिफाइन करने के लिए ही तैयार किया गया है.
इस सप्ताह बांग्लादेश के विदेश मंत्री की भारत यात्रा के दौरान, भारत से डीजल का आयात बढ़ाने का मुद्दा एजेंडे में सबसे ऊपर रहा. बांग्लादेश पहले से ही भारत के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बनाए हुए है. इसके लिए सिलीगुड़ी से लेकर दिनाजपुर के पार्वतीपुर तक एक सीमा-पार डीजल पाइपलाइन बिछाई गई है. यह पाइपलाइन ‘नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड’ से डीजल आयात करने में सहायक है. इस इंपोर्ट के लिए वर्ष 2023 में दोनों देशों के बीच 15 साल का एक समझौता हुआ था.
रूस के सामने रखा ये प्रस्ताव
रूसी तेल के निर्यात पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों में मिली अस्थायी छूट के कारण, बांग्लादेश को ‘इनडायरेक्ट इंपोर्ट’ के विकल्पों को तलाशने का एक सीमित अवसर मिल गया है. करीब दो हफ्ते पहले मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि बांग्लादेश, रूस से 600,000 टन तक डीजल आयात करने का प्रस्ताव भी रख रहा है. पिछले महीने, बांग्लादेश में रूस के राजदूत अलेक्जेंडर खोजिन ने बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के दौरान दोनों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को लेकर चर्चा हुई थी.



