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Heat Wave; ”स्वास्थ्य विभाग की सलाह, धूप व गर्मी को लेकर न बरते लापरवाही यह है दिशा निर्देश’

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Heat Wave: चलने लगी तेज गर्म हवाएं, लू से बचने डाक्टरों ने दी सलाह…

”मई माह के शुरूआत से ही सूर्य तपने लगा है। तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस तक चल रहा है। ऐसे में झुलसा देने वाली गर्मी में निकलना मतलब बीमारी को बुलावा देने के बराबर है। खासतौर से उस समय जब तेज धूप के साथ गर्म हवाएं भी चलती हो।”

”स्वास्थ्य विभाग की सलाह, धूप व गर्मी को लेकर न बरते लापरवाही यह है दिशा निर्देश’

”सरकारी अस्पतालों में किया दवाओं का स्टाक’…

”मई माह के पहले दिन से सूरज ने अपने तेवर दिखाने चालू कर दिए है। दोपहर के वक्त भले ही कम रफ्तार में पर गर्म हवाएं भी चलने लगी है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने भी लू से बचने के लिए दिशा निर्देश जारी कर दिए है।”

”इन दिनों तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। ऐसे में आने वाले कुछ ही दिनों में तापमान 43 डिग्री से पार होने के बाद तेज गति से गर्म हवाएं चलने से लू का प्रकोप और भी बढ़ जाएगा। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होगी। लापरवाही के दशा में लोग लू के चपेट में आकर स्वास्थ्यगत परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। डाक्टरों का कहना है कि खासतौर से यह पूरा माह बेहद संवेदनशील रहेगा। मई माह के शुरूआत से ही सूर्य तपने लगा है। तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस तक चल रहा है। ऐसे में झुलसा देने वाली गर्मी में निकलना मतलब बीमारी को बुलावा देने के बराबर है। खासतौर से उस समय जब तेज धूप के साथ गर्म हवाएं भी चलती हो। ऐसे स्थिति में लापरवाही बरतने पर लोग आसानी से लू के चपेट में आ जाते है। वैसे भी तेज धूप के साथ इन दिनों गर्म हवाएं चल रही है। जो संपर्क में आने वालों को तत्काल लू से ग्रसित कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में लापरवाही करने की दशा में लू के चपेट में आ सकते है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने लू को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। उनके मुताबिक धूप में न निकले। इसके साथ ही जारी दिशा निर्देश का पालन कर लू से बचा जा सकता है।”

”यह है दिशा निर्देश – अनावश्यक धूप में न निकले। – निकलना जरूरी हो तो चेहरे व कान को कपड़े से ढांक कर निकले। – घर से निकलने के पहले पानी पिएं। – खाली पेट न निकले। – धूप में कमजोरी, सिर दर्द, चक्कर आने की स्थिति में तत्काल डाक्टर से संपर्क। – बच्चों और बुजुर्ग को घर से न निकलने दें। – रोजाना कम से कम तीन से चार लीटर पानी का सेवन करें।”

”सरकारी अस्पतालों में किया दवाओं का स्टाक”

”आने वाले कुछ ही दिनों में लू के मामले सामने आने लगेंगे। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाओं को स्टाक में रखा गया है। इसमें ओआरएस, ग्लूकोज के साथ अन्य दवाएं मुख्य तौर पर रखें गए हैं। सिम्स, जिला अस्पताल के साथ ही जिले के पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ ही सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दवा पहुंचाया गया है।”

”जानिए क्‍या है कांग्रेस प्रवक्ता राधिका खेरा के साथ विवाद का मामला”

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”जानिए क्‍या है कांग्रेस प्रवक्ता राधिका खेरा के साथ विवाद का मामला”

;इशारों इशारों में राधिका खेड़ा ने भूपेश बघेल पर साधा निशाना, X पर लिखा, लड़की हूं, लड़ रही हूं, राम के ननिहाल में दीदी का स्वागत है’

”छत्‍तीसगढ़ कांग्रेस मुख्यालय में स्‍थानीय नेताओं के दुर्व्यवहार से नाराज कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता राधिका खेड़ा ने एक्‍स हैंडल पर एक और पोस्‍ट किया है। राष्ट्रीय प्रवक्ता राधिका खेड़ा ने इशारों-इशारों में इस पोस्‍ट के जरिए शीर्ष नेताओं पर सवाल उठाए हैं।”

;विवाद के बाद राधिका खेड़ा ने दिए पार्टी छोड़ने के दिए संकेत, राधिका ने इशारों-इशारों में पूर्व CM भूपेश बघेल पर भी साधा निशाना,

”कांग्रेस राष्ट्रीय महिला प्रवक्ता से दुर्व्यवहार पर भाजपा ने कांग्रेस को घेरा छत्तीसगढ़ के कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में मंगलवार को राधिका खेड़ा के साथ हुए दुर्व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।”

”राधिका खेड़ा ने घटना के दो दिन बाद सोशल मीडिया एक्स पर फिर एक पोस्‍ट कर इशारों-इशारों में कका (पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल) पर निशाना साधा है।”

”साथ ही लड़कियों के लिए लड़ने वाली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का ध्‍यान इस विवाद की ओर आ‍कर्षित करने की बात कही है। उन्होंने एक्‍स पोस्‍ट में लिखा है कि दुशील (कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला) को लेकर कका का मोह एक लड़की की इज्जत से बढ़कर है, लेकिन लड़की हूं… लड़ सकती हूं। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम जी के ननिहाल में दीदी (प्रियंका गांधी) का स्वागत है…।”

”इस पोस्‍ट के बाद एक बार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जरिए राधिका ने कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला पर निशाना साधा है।”

एक लड़की की इज़्ज़त से बढ़कर है लेकिन, लड़की हूँ, “लड़ रही हूँ” “मर्यादा पुरुषोत्तम” प्रभु श्री राम जी के ननिहाल में दीदी का स्वागत है. 

”जानिए क्‍या है कांग्रेस प्रवक्ता राधिका खेरा के साथ विवाद का मामला”

”राजधानी स्थित कांग्रेस मुख्यालय में कांग्रेस प्रवक्ता आपस में भिड़ गए। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता राधिका खेड़ा ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।”

”इस मामले को लेकर राधिका खेड़ा ने ट्वीट कर कहा- कौशल्या माता के मायके में बेटियां सुरक्षित नहीं है। खेड़ा के इस ट्वीट के बाद उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं।”

”राधिका के ट्वीट के बाद इस मामले पर सियासी घमासान तेज हो चुका है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा है कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में उनकी राष्ट्रीय स्तर की महिला प्रवक्ता ही सुरक्षित नहीं है ताे क्या कांग्रेस के राज में महिलाएं सुरक्षित रह पाएंगी?”

”कांग्रेस अपने महिला प्रवक्ता के साथ न्याय नहीं कर सकती तो देश की महिलाओं को क्या न्याय देगी। भाजपा प्रवक्ता केदार गुप्ता ने कहा, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता के ट्वीट से हम दुखी है। राधिका आप कांग्रेस से बच लीजिए। बाकी मोदी की गारंटी, कौशल्या माता की धरती पर आप सुरक्षित हैं।”

”इस पूरे मामले में राधिका खेड़ा ने कोई जवाब नहीं दिया। वह घटनाक्रम से अगले दिन कांग्रेस मुख्यालय भी नहीं पहुंची। इधर सुशील आनंद ने इस मामले पर कहा है कि मैं किसी पर आरोप नहीं लगाऊंगा, बल्कि पार्टी पूछे तो पार्टी के भीतर जवाब दूंगा।”

”भाजपा ने कांग्रेस को घेरा”

”राधिका खेरा को प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। नईदिल्ली पार्टी मुख्यालय के निर्देश के बाद वह विधानसभा चुनाव से प्रदेश में हैं। वह छत्तीसगढ़ की मीडिया प्रभारी हैं। कई राज्यों में वह मीडिया समन्वयक भी रह चुकी है।”

”राष्ट्रीय महिला प्रवक्ता के ट्वीट के बाद भाजपा के कई बड़े नेताओं ने कांग्रेस को घेरा है।”

”भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने एक्स पोस्ट पर लिखा कि चलो कांग्रेस के भीतर प्रियंका गांधी के नारे लड़की हूं लड़ सकती हूं… को किसी ने तो चरितार्थ किया… डरो मत राधिका बहन,कांग्रेस में व्याप्त घृणा के भाव से डटकर मुकाबला करो। गौरीशंकर श्रीवास ने लिखा कि कांग्रेस में जौनपुरिया की गुंडागर्दी चल रही है।”

”वीडियो में यह आवाज”

”इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो में राधिका खेरा का चेहरा तो नहीं दिख रहा। नईदुनिया इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन बैकग्राउंड से यह आवाज आ रही है, जिसमें एक महिला कह रही है कि सर, ऐसा नहीं है मैं पार्टी छोड़कर जा रही हूं। आज जो मेरे साथ बदतमीजी हुई है। कभी आपने 40 साल के लाइफ में मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ है। जो मेरी इनसल्ट हुई है मेरे ऊपर चिल्लाया गया है। उसका वीडियो भी बनाया गया। मुझे गेट- आउट होने को बोला गया। मैं जब उससे (सुशील आनंद के संदर्भ में) बात करती हूं। वो मेरे पे चिल्लाता है। कंटीन्यूअसली मैंने पहले भी बताया था। मैं पार्टी से भी इस्तीफा दे रही हूं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले रायपुर के रेल्वे स्टेशन में दीपक बैज के एक कार्यक्रम बैज के मीडिया प्रभारी व वरिष्ठ प्रवक्ता विनोद तिवारी के साथ भी सुशील आनंद की बहसबाजी की वीडियो सामने आया था।”

”आरक्षण के मुद्दे पर पीएम मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी”

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”आरक्षण के मुद्दे पर पीएम मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी”

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ”नरेंद्र मोदी के आरक्षण हटाओ अभियान का मंत्र है, न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी, मतलब न रहेगी सरकारी नौकरी, न मिलेगा आरक्षण. ”भाजपा सरकार अंधे निजीकरण से सरकारी नौकरियों को ख़त्म कर चुपके-चुपके दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों से आरक्षण छीन रही है. 2013 में पब्लिक सेक्टर में 14 लाख स्थायी पद थे, जो 2023 तक आते आते सिर्फ 8.4 लाख ही बचे.”

”बीएसएनएल, एसएआईएल, बीएचईएल आदि जैसे टॉप पीएसयू को बर्बाद कर लगभग 6 लाख पक्की नौकरियां सिर्फ पब्लिक सेक्टर से ही ख़त्म कर दी गई, ये वही पद हैं जहां आरक्षण का लाभ मिलता.”

राहुल गांधी ने कहा, ”सरकारी कार्यों को ठेके पर देकर रेलवे जैसे संस्थानों में जो नौकरियां बैक डोर से ख़त्म की जा रही हैं उनकी तो कोई गिनती ही नहीं है. मोदी मॉडल देश के संसाधनों की लूट है, जिसके ज़रिए वंचितों का आरक्षण छीना जा रहा है.”

”पीएम मोदी ने क्या कहा”

बुधवार को एक सभा में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, ”मैं कांग्रेस पार्टी को चुनौती देता हूं, अगर उनमें हिम्मत है तो घोषणा करें कि धर्म के आधार पर किसी को आरक्षण नहीं देंगे. वो ये घोषणा नहीं करेंगे, क्योंकि दाल में कुछ काला है. ”पीएम मोदी ने कहा है कि, ”ये मोदी की गारंटी है, जब तक बीजेपी है तब तक एससी, एसटी, ओबीसी और सामान्य वर्ग को जो आरक्षण दिया गया है उसकी पूरी रक्षा की जाएगी.”

‘भारतीय जासूसों के निष्कासन’ से जुड़ी रिपोर्टों पर ऑस्ट्रेलिया ने क्या कहा?

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‘भारतीय जासूसों के निष्कासन’ से जुड़ी रिपोर्टों पर ऑस्ट्रेलिया ने क्या कहा?

”ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने भारत के साथ अपने निकट संबंधों पर बात की है. इससे पहले ये रिपोर्टें आई थीं कि ऑस्ट्रेलिया ने कथित रूप से भारत के दो जासूसों को साल 2020 में देश से निष्कासित किया था. साल 2021 में ऑस्ट्रेलिया की ख़ुफ़िया एजेंसी के प्रमुख ने कहा था कि कुछ विदेशी एजेंट देश में सक्रिय हैं. हालांकि उन्होंने उन एजेंटों की राष्ट्रीयता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी. ख़ुफ़िया एजेंसी के प्रमुख का ये बयान साल 2020 के मामले से जुड़ा था. कई मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने इस हफ़्ते अपनी रिपोर्ट में ये दावा किया है कि वे विदेशी एजेंट भारत के थे. ऑस्ट्रेलिया ने न तो इन रिपोर्टों की पुष्टि की है और न ही खंडन किया है. हालांकि ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेन्नी वॉन्ग ने ये ज़रूर कहा है कि उनकी सरकार किसी भी विदेशी दखलंदाज़ी से निपटने के लिए तैयार है. ट्रेज़रर (वित्त मंत्री) जिम चार्ल्मर्स ने बुधवार को एबीसी न्यूज़ से कहा, “मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहता हूं.” उन्होंने कहा, “भारत के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं… ये एक महत्वपूर्ण आर्थिक संबंध है. दोनों ही पक्षों के प्रयासों के परिणामस्वरूप हाल के सालों में दोनों देश क़रीब आए हैं.” तीन साल पहले ऑस्ट्रेलियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस ऑर्गनाइज़ेशन (एएसआईओ) के प्रमुख माइक बर्गेस ने कहा था, “जासूसों के एक नेटवर्क ने कुछ मौजूदा और पूर्व राजनेताओं, एक इम्बैसी और स्टेट पुलिस सर्विस के साथ साल 2020 में पूरे साल योजनाबद्ध तरीके से संबंध बनाए थे.” बर्गेस ने बताया कि एजेंटों ने ‘भारतीय समुदाय की निगरानी की’ और सरकारी अधिकारी से ‘एयरपोर्ट पर सुरक्षा प्रोटोकॉल के विषय में’ बात की और ऑस्ट्रेलिया के व्यापार से जुड़ी गुप्त जानकारियां हासिल’ करनी की कोशिश की. उन्होने ये भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया की संवेदनशील डिफ़ेंस टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी रखने वाले एक अधिकारी को भी जानकारी इकट्ठा करने के लिए तैयार किया गया था. सोमवार को अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा था कि ऑस्ट्रेलिया ने साल 2020 में एक काउंटर इंटेलिजेंस ऑपरेशन के तहत दो भारतीयों को देश से निष्कासित कर दिया था. उस वक्त एबीसी न्यूज़ ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारतीय एजेंटों के एक ग्रुप ने ऑस्ट्रेलिया के व्यापार, सुरक्षा और रक्षा प्रोजेक्ट्स से जुड़ी गोपनीय जानकारी को टार्गेट किया था. ऑस्ट्रेलियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस ऑर्गेनाइजेशन के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया है कि एजेंसी गोपनीय मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं करती है. कैनबरा स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी बात करने के निवेदन का कोई जवाब नहीं दिया है. ये दावे उस वक्त सामने आए हैं जब पश्चिमी देशों ने भारत पर विदेश ज़मीन पर ख़ुफ़िया कार्रवाइयों में संलिप्त होने का आरोप लगाया है. इन दावों में पिछले साल जून में कनाडा में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का मामला भी शामिल है. भारत इन आरोपों का पुरज़ोर खंडन करता रहा है. हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया और भारत ने आपसी संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की दिशा में प्यापार, ऊर्जा और अप्रवासन के क्षेत्र में कई समझौते किए हैं. अमेरिका और जापान के साथ भारत और ऑस्ट्रेलिया क्वाड नाम के एक सामरिक अलायंस का भी हिस्सा हैं. चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच क्वाड का उद्देश्य इंडो-पैसेफ़िक क्षेत्र में सिक्योरिटी को मज़बूत करना बताया जाता है. ऑस्ट्रेलिया भारत का छठा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. करीब 750,000 ऑस्ट्रेलिया नागरिकों की जड़ें भारत में हैं.”

”वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट पर भारत की प्रतिक्रिया”

”खालिस्तान समर्थक नेता और अमेरिकी नागरिक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की नाकाम कोशिश के मामले में भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी के शामिल होने के दावे से जुड़ी वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट को भारत ने ‘निराधार’ बताया है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी थी. मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट पर बयान जारी कर कहा था, “रिपोर्ट एक गंभीर मामले पर अनुचित और निराधार आरोप लगा रही है.” बयान में कहा गया, “संगठित अपराधियों, आतंकवादियों के नेटवर्क पर अमेरिकी सरकार की ओर से साझा की गई सुरक्षा चिंताओं के बाद भारत सरकार ने उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है जो मामले की जांच कर रही है. इसे लेकर अटकलें लगाना और ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयान देना मददगार साबित नहीं होगा.”

”अमेरिकी प्रतिक्रिया”

”अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने भी इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी है. अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वेदांत पटेल से सवाल पूछा गया कि वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट कहती है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘इनर सर्कल को पन्नू की हत्या की कोशिश की जानकारी थी’, इसे अमेरिका कैसे देखता है? इसके जवाब में उन्होंने कहा, “हम भारत सरकार से भारतीय जांच कमेटी के नतीजों के आधार पर जवाबदेही की उम्मीद करते हैं. हम लगातार उनके साथ काम कर रहे हैं और अतिरिक्त जानकारियां भारत से मांग रहे हैं. हम भारत सरकार के साथ उच्च स्तर पर अपनी चिंताएं साझा करना जारी रखेंगे. इससे ज़्यादा हम इस मामले पर बात नहीं कर सकेंगे.”

”वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में क्या है?”

”वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बीते साल 22 जून को अमेरिका के व्हाइट हाउस में पीएम मोदी का स्वागत किया जा रहा था उस समय भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ के एक अधिकारी अमेरिका में किराये के हत्यारों को खालिस्तान समर्थक नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या करने के निर्देश दे रहे थे. अख़बार ने लिखा है कि रॉ के एक अधिकारी विक्रम यादव ने इस हत्या को ‘प्रायरिटी नाउ’ यानी ‘सबसे अहम प्रथामिकता’ बताया था. कुछ अधिकारियों के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि यादव ने पन्नू के न्यूयॉर्क स्थित आवास के बारे में जानकारी सुपारी लेने वालों को दी थी. कहा गया था कि जैसे ही अमेरिकी नागरिक पन्नू अपने घर पर होंगे –”हमारी तरफ़ से काम को आगे बढ़ाने का आदेश मिल जाएगा.” रिपोर्ट दावा करती है कि यादव की पहचान और इस मामले से जुड़े उनके तार अब तक सामने नहीं आए थे. उनके नाम का सामने आना अब तक का सबसे स्पष्ट सबूत है कि हत्या की योजना जिसे अमेरिकी अधिकारियों ने फेल कर दिया- उसके लिए रॉ ने निर्देश दिए थे.
वर्तमान और पूर्व पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, सीआईए, एफबीआई और अन्य एजेंसियों की व्यापक जांच में कुछ हाई रैंकिंग रॉ अधिकारी भी तफ़्तीश के दायरे में आए हैं.”

”लेबनान के वो लोग, जिनके घरों को इसराइल बना रहा है खंडहर”

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”लेबनान के वो लोग, जिनके घरों को इसराइल बना रहा है खंडहर”

”लगातार बढ़ते तनाव और सीमा पार से होने वाले हमलों में लेबनान में अब तक 70 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो गई है.”

”इन हमलों ने दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों को लगभग बर्बाद सा कर दिया है. यहां रहने वाले लोग भाग गए हैं. छोड़े गए घर खंडहर में बदल सकते हैं. लेकिन लोग इसका जोखिम लिए इन्हें छोड़ गए हैं. संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षक दल के साथ बीबीसी इन इलाकों में ये देखने के लिए पहुंचा कि आख़िर यहां हुआ क्या है. इलाके में घुसते ही हमें बड़े गड्ढे में एक गद्दा दिखा. धूल और पत्थरों में दबा. ये गद्दा कुछ दिनों पहले यहां मौजूद एक बिल्डिंग के बाईं ओर पड़ा था.”

”यारिन में एक लेबनानी सेना के एक अफसर ने कहा, ”हम इसे ‘द पूल’ कहते हैं.” यारिन संघर्ष वाले इलाके में मोर्चे के नज़दीक बसा शहर है. यारिन संयुक्त राष्ट्र की ओर से निर्धारित ब्लू लाइन से एक किलोमीटर दूर है. ये बेहद अशांत, संघर्ष से घिरा इलाका है और इसराइल- लेबनान के बीच आधिकारिक सीमा भी. ब्लू लाइन के नजदीक शहर में एक ही जैसा मंज़र है. इमारतें पूरी तरह धूल में मिल गई हैं या फिर बड़े-बड़े गड्ढों में समा गई हैं. कुछ इमारतें ध्वस्त हो गई हैं. कुछ बची हुई हैं. इसके बाद आगे बढ़ने पर गड्ढे ही गड्ढे दिखाई पड़ रहे हैं.”

”इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच संघर्ष का नतीजा”

”यारिन से चार किलोमीटर पश्चिम में अलमान अल शाब है. यहां स्थित एक विला पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है. सामने खड़ी कारें भी ध्वस्त हो गई हैं. सिर्फ़ एक बाड़ा बच गया है जिसके चारों ओर पत्थरों के ढेर लगे हैं. विस्फोट से अगल-बगल के घरों की खिड़कियां पूरी तरह टूट गई हैं. विला के 75 वर्षीय मालिक नदीम साया कहते हैं, ”हम सब इसकी कीमत चुका रहे हैं.” नदीम साया ने कहा कि वो इस उम्मीद में हर वक़्त बत्ती जलाए रखते थे कि इससे उनका ये पारिवारिक घर शायद हमले से बच जाए. वो कहते हैं, ”लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया है. घर में रखा सामान और यहां खड़ी कारें. लेकिन मैं जितनी जल्दी हो सके लौटूंगा, भले ही मुझे टेंट में रहना पड़े.” एक सैनिक ने उस तरफ इशारा करते हुए कहा,” एक मिसाइल ने ये सब कर दिया.” हिज़बुल्लाह ने हमास के समर्थन में इसराइल पर रॉकेट दागने शुरू कर दिए थे. इसके बाद से ही इसराइल ने दक्षिण लेबनान पर हमले शुरू कर दिए थे. ये हमले रोज़ हो रहे थे. इसके बाद दोनों ओर से हमले तेज़ हो गए थे. इन हमलों की वजह से ये पूरा इलाका बेहद ख़तरनाक हो गया है. ख़तरे का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि तीन रिपोर्टर यहां मारे जा चुके हैं. इनमें एक रिपोर्टर रॉयटर्स के थे और दो मयादीन के. दोनों मीडिया संगठनों ने इसके लिए इसराइल को दोषी ठहराया है.”

”इसराइली सेना का ‘कहर’

”इसराइल ने 1978 में इस इलाके पर हमला किया था और फिर लौट गया था. लेकिन यूनिफिल तभी से यहां तैनात है. अभी हाल तक यूनिफिल इस बात पर गर्व करता था कि यहां उसने लेबनान और इसराइल के बीच सबसे लंबे समय तक शांति देखी. हिज़बुल्लाह और इसराल के बीच 2006 में लड़ाई हुई थी और तब से लेकर अब तक यानी लगभग 16 साल से अधिक समय तक शांति रही. कुछ ही देर बाद थोड़ी दूरी से धुएं का विशाल गुबार उठता दिखा. साफ था कि ये इसराइली हमला है. ये देखना मुश्किल था कि किस चीज पर हमला किया गया. इसराइली सेना का कहना है कि वो हिज़बुल्लाह के लड़ाकों और उनके इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले कर रही है. उसका ये भी कहना है कि वह उत्तरी इसराइल के अपने सैनिक अड्डों पर हो रहे हमले का जवाब दे रही है. लेकिन कुछ लेबनानी अधिकारियों का कहना है कि इसराइली सेना इस इलाके में ‘स्कॉर्च्ड अर्थ टेक्टिक्स’ का इस्तेमाल कर रही है. इस रणनीति के तहत किसी इलाके में पानी, जानवरों, पेड़-पौधे से लेकर सब कुछ कुछ खत्म कर दिया जाता है ताकि दुश्मन की सेना लड़ ही ना पाए. इस वजह से ऐसे इलाके लोगों के रहने लायक नहीं रहते. जिन लोगों ने इस तरह के आरोप लगाए हैं उनमें लेबनान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री और पार्लियामेंट के स्पीकर शामिल हैं. फिलहाल दक्षिण लेबनान के कई गांवों में ज़िंदगी का कोई निशान नहीं दिखाई देता. लोग इन गांवों को छोड़ कर भाग गए हैं. ये गांव अब बिल्कुल वीरान हैं.”

”अब तक 90 हज़ार लेबनानी विस्थापित हो चुके हैं”

”इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ माइग्रेशन (आईओएम) के मुताबिक़ अब तक 90 हजार लेबनानी विस्थापित हो चुके हैं. इसराइल की तरफ़ 80 हजार लोगों को उनके घरों से कहीं और ले जाया गया है. इसराइल के रक्षा मंत्री ने कहा है कि उत्तरी इलाकों में रहने वाले इसराइली लोग तब तक अपने घरों में नहीं लौट सकते, जब तक हिजबुल्लाह लड़ाके सीमा से पीछे नहीं धकेले जाते. लेबनानी शहर आइता-अल-शाब इसराइल से सिर्फ 700 मीटर की दूरी पर है. इस संघर्ष में अब तक सबसे ज्यादा नुकसान इसी शहर को हुआ है. जिस दिन हम इस शहर में थे, उस दिन इसराइल ने कहा था कि उसने यहां 40 हमले किए हैं. आइता-अल-शाब के हुसैन जवाद कहते हैं, ”हमें पता है कि हमारा घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है लेकिन अभी भी अपनी जगह खड़ा है.” कंस्ट्रक्शन वर्कर पत्नी और अपने सात बच्चोंं के साथ उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में ही घर छोड़ दिया था. अब वो बेरूत के बाहरी इलाके एक अपार्टमेंट में रह रहे हैं. वो कहते हैं, ”हमें मालूम नहीं था कि ये सब इतना लंबा चलेगा. हमने सोचा था कि ये सब चंद दिनों की बात है. सब जल्दी सुलझ जाएगा. उनकी पत्नी मरियम कहती हैं,’’हमें पता है कि ये सब अभी और चलेगा.’’ हमने हुसैन को उनके शहर का वो वीडियो दिखाया, जिसे हमने कुछ दिनों पहले बनाया था. उन्होंने कुछ जगहों की पहचान की. वीडियो देखते हुए वो बोले, ”ये मकान अब पूरी तरह ध्वस्त हो गया है. वो वाला अब खत्म ही हो गया समझो. इस लाइन की सारी दुकानें तो अब पूरी तरह जमीन में मिल गई हैं,’’ इस बीच वो एक बार अपने शहर गए थे. हफ्तों पहले वो एक शख़्स को दफनाए जाने के समय वहां थे.”

”उजड़े हुए लोगों की घर वापसी सबसे बड़ी चुनौती”

”सिविल डिफेंस स्टाफ या मेयर से वो जब-तब अपने घर के बारे में अपडेट लेते रहते हैं. मेयर ने अभी शहर नहीं छोड़ा है. अमेरिका स्थित मॉनटरिंग संगठन आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट (एसीएलईडी) के मुताबिक़, पिछले साल अक्टूबर से इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच सीमा के दोनों ओर से 5400 हमले हो चुके हैं. उसका कहना है कि इनमें से 80 फीसदी हमले इसराइल ने किए हैं. इसराइली सेना ने पिछले महीने कहा कि उसने हिज़बुल्लाह के 4300 से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं. सेना ने कहा है कि 2 अप्रैल को लेबनान की धरती से इसराइल पर 3100 रॉकेट गए. लेबनान की ओर से हुए इस हमले में नौ नागरिक मारे गए. हुसैन को उम्मीद नहीं है कि निकट भविष्य में वो अपने घर लौट पाएंगे. अब हम इस सड़क पर हैं, जहां यूनिफिल के इटली के सैनिकों के दल कर्नल अल्बर्टो सल्वाडोर कहते हैं कि शांति रक्षक दल की भूमिका काफी अहम है. उनका कहना है कि यहां चल रही हिंसा के बीच शांति रक्षक दल की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है. वो कहते हैं, ”हम देख रहे हैं कि सीमा के दोनों ओर लोग इस हालात से थक चुके हैं. अब शांति की ज़रूरत है.” वो कहते हैं, ”यूनिफिल की अगली चुनौती स्थानीय आबादी को उनके घरों में लौटने में मदद करने की है.” लेकिन इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच संघर्ष जिस स्तर पर है, वहां फिलहाल ये संभावनाएं धूमिल ही लगती हैं.”

chhatisgarh : श्रम कार्यालय मे 1 लाख 88 हजार मजदूरों का पंजीयन किया गया है.

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chhatisgarh : विभाग से मिले रिकॉर्ड की बात करें तो श्रम कार्यालय मे 1 लाख 88 हजार मजदूरों का पंजीयन किया गया है. इनमें भवन निर्माण कर्मकार मंडल के 1 लाख 11 हजार मजदूर पंजीकृत हैं, जो विभिन्न निर्माण कार्यों में लगे रहते हैं.

1 मई को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है. मगर जिनके लिए खास दिन का आयोजन किया जाता है, इसकी जानकारी उन मजदूरों को भी नहीं होती. उन्हें सिर्फ अपने घर का चूल्हा जलने की फिक्र होती है. इन मेहनतकश मजदूरों को उनका हक मिल सके, इसके लिए श्रम विभाग के माध्यम से एक सूत्र में पिराने का प्रयास किया जा रहा है. श्रम विभाग ने भवन संनिर्माण में 1 लाख 11 हजार व असंगठित कर्मकार में 77 हजार श्रमिकों का पंजीयन किया है. सरकारी योजना का लाभ पंजीकृत श्रमिक उठा सकते हैं. देश में कोरबा की पहचान औद्योगिक नगरी के रूप में की जाती है. यहां एसईसीएल की कोयले की खदानों के अलावा कई विद्युत संयंत्र सहित छोटे बड़े कारखाने संचालित हैं, जहां हजारों की तादाद में मजदूर काम करते हैं. इससे परे एक ऐसा भी वर्ग है, जो खेतीहर मजदूर का काम करते हैं. कई मजदूर विभिन्न निर्माण कार्यों में रोजी मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं. उनकी हित का हनन न हो, इसके लिए श्रम विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है. श्रम विभाग मेx माध्यम से कई योजनाओं का क्रियांवयन किया जा रहा है, ताकि मजदूरों को उनका हक मिल सके. उनके बच्चे बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधा हासिल कर सकें. उन्हें शिक्षा के लिए किसी के सामने गिड़गिड़ाने की जरूरत न पड़ सके, लेकिन जानकारी के अभाव में मजदूरों को अभाव से जूझना पड़ता है. इस समस्या का हल श्रम विभाग ने निकाल लिया है. विभाग की ओर से उन मजदूरों का पंजीयन किया जा रहा है, जो निजी और ठेका कंपनी में नियोजित हैं. उनके द्वारा खुद का व्यवसाय और रोजी मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण किया जाता है.

बच्चों के भविष्य के लिए भटकने की जरूरत नहीं

विभाग से मिले रिकॉर्ड की बात करें तो श्रम कार्यालय में 1 लाख 88 हजार मजदूरों का पंजीयन किया गया है. इनमें भवन निर्माण कर्मकार मंडल के 1 लाख 11 हजार मजदूर पंजीकृत हैं, जो विभिन्न निर्माण कार्यों में लगे रहते हैं. इसी तरह असंगठित मजदूरों की संख्या 77 हजार है. इनमें रिक्शा चालक, कारपेंटर नाई, धोबी जैसे 40 प्रकार के कार्य करने वाले मजदूर शामिल हैं. श्रम विभाग की ओर से पंजीकृत मजदूरों को सरकारी योजना से लाभांवित करने का प्रयास किया जा रहा है. खास तो यह है कि उन्हें अपने बच्चों के भविष्य के लिए भटकने की जरूरत नहीं है. वे श्रम विभाग के माध्यम से बच्चों की छात्रवृत्ति सहायता योजना, कोचिंग के लिए स्कॉलरशिप, दुर्घटना में मृत्यु और अपंगता की स्थिति में सहायता हासिल कर सकते हैं. इन तमाम योजनाओं की जानकारी श्रम विभाग की ओर से समय-समय पर शिविर आयोजित कर दी जा रही है.

जिले में 72 मजदूर ऐसे हैं, जिन्हें बंधक का प्रमाण पत्र दिया गया है. वे पड़ोसी राज्यों में बेहतर तनख्वाह के लालच में गए हुए थे. उन्हें श्रम विभाग की टीम ने प्रशासन के सहयोग से लाने में सफलता पाई है. विभाग की ओर बंधक मजदूरों को बतौर सहायता राशि 20-20 हजार रुपए प्रदान किए गए हैं. हालांकि, नियम में बदलाव के बाद बंधक बनाए जाने के मामले में एसडीएम कोर्ट में प्रकरण प्रस्तुत किया जाता है, जहां सुनवाई के बाद ही बंधक मजदूर घोषित किया जाता है.

कोरबा में जनसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह

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कोरबा में जनसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस के लिए वोटबैंक ही सबसे जरूरी है. भूपेश सरकार ने नक्सलवाद को बढ़ावा दिया. 5 साल में कई राज्यों से नक्सलवाद को समाप्त किया है. फिर भी भूपेश बघेल फेक एनकाउंटर कहते हैं.

लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी धुआंधार प्रचार कर रही है. राज्य में तीसरे चरण के मतदान से पहले केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह बुधवार को राज्य के दौरे पर पहुंचे. कोरबा के कटघोरा में उन्होंने जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर यहां 830 सुरक्षा बल तैनात किए गए थे. सभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सबसे पहले बता देता हूं कि जब चुनाव होता है तब प्रत्याशी कहते हैं प्रचार करने आइएगा. लेकिन मैंने सरोज पांडेय से कहा था मैं कोरबा जरूर आऊंगा. मैं भगवान राम के ननिहाल आया हूं. कांग्रेस 70 साल से राम जन्मभूमि के मसले को लटकाती रही. 22 जनवरी को हमने प्राणप्रतिष्ठा करके जय श्रीराम कर दिया. 500 साल के बाद हमारे जीवन में वह दिन आया जब हमने सूर्यतिलक देखा. कांग्रेस के नेताओं को हमने प्राणप्रतिष्ठा का निमंत्रण भेजा, लेकिन उन्होंने उसे आने से इनकार कर दिया. कांग्रेस आए तो पूछना किस मुंह से अब वोट मांगने आए हो. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कांग्रेस के लिए वोटबैंक ही सबसे जरूरी. भूपेश सरकार ने नक्सलवाद को बढ़ावा दिया. 5 साल में कई राज्यों से बीजेपी ने नक्सलवाद को समाप्त किया है. भूपेश बघेल फेक एनकाउंटर कहते हैं. नक्सलियों ने खुद इस बात को स्वीकर कर लिया कि हमारा नुकसान हुआ है. अब आप चिंता न करें. बीजेपी नक्सलवाद को खत्म कर देगी. नक्सलवाद को जाना ही जाना है. उन्होंने कहा कि कोरबा कठिन सीट है. पिछले बार आपने आशीर्वाद नहीं दिया था. अब सरोड पांडेय यहां से लड़ रही हैं. हर इलाके वाले कहते हैं हमारे सांसद को बड़ा बनाइए. हमने तो इतनी बड़ी नेता आपके लिए भेजा है. गृह मंत्री अमित शाह ने पीएम मोदी के 10 साल का रिकॉर्ड और 25 साल का एजेंडा भी है. छत्तीसगढ़ आदिवासियों का क्षेत्र है. पीएम मोदी ने कहा था हमारी सरकार गरीबों की होगी. हमनें गरीबों को घर दिया, नल से जल, गैस सिलेंडर, 5 लाख तक का बीमा, 5 किलो चावल, शौचालय दिया है. कोरोना का टीका मुफ्त में दिया. उस वक्स कांग्रेस इसे मोदी टीका कहते थे. देश के गरीब की चिंता करना और छत्तीसगढ़ को नंबर बन राज्य बनाने का लक्ष्य बीजेपी का है. बीजेपी ने कई महत्वपूर्व फैसले किए हैं. हमने कश्मीर से धारा 370 हटाया. कोरबा का बच्चा-बच्चा कश्मीर के लिए जान देने के लिए तैयार है. कांग्रेस 70 साल से 370 को बच्चों की तरह गोद में खिलाती रही. पीएम मोदी ने 2019 को 370 को समाप्त कर दिया. 70 साल के बाद कश्मीर में तिरंगा लहराया. कांग्रेस कहती है पीएम मोदी आरक्षण हटा देंगे. आरक्षण न हटाया न हटेगा. पीएम मोदी ने अगर हटाया है तो 370 हटाया, नक्सलवाद हटाया है. कांग्रेस को हम आरक्षण हटाने नहीं देंगे, यह मोदी की गारंटी है. आदिवासियों के कल्याण के लिए बीजेपी ने काफी काम किए.

कनाडा स्थित गैंगस्टर गोल्डी बरार गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत ‘नामित आतंकवादी’ की हत्या!

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मुख्य संदिग्ध गोल्डी बराड़ को अमेरिका में गोली मार दी गई है. अमेरिकी समाचार चैनलों के हवाले से एशियानेट की रिपोर्ट के मुताबिक गृह मंत्रालय से आतंकवादी घोषित किए गए बरार पर मंगलवार शाम को फेयरमोंट और होल्ट एवेन्यू में हमला किया गया था. बहरहाल इस खबर की अभी तक किसी आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है. गौरतलब है कि इसी साल 1 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को कनाडा स्थित गैंगस्टर गोल्डी बरार को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत ‘नामित आतंकवादी’ घोषित किया था. बराड़ ने पिछले साल मई में लोकप्रिय पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी ली थी. केंद्र ने एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा कि 11 अप्रैल 1994 को जन्मे शमशेर सिंह और प्रीतपाल कौर के बेटे सतविंदर सिंह उर्फ ​​गोल्डी बराड़, जो वर्तमान में कनाडा के ब्रैम्पटन में रहता है, खालिस्तान समर्थक आतंकवादी समूह बब्बर खालसा से जुड़ा है. कहा गया था कि एक सीमा पार एजेंसी द्वारा समर्थित बराड़ कई हत्याओं में शामिल है और कट्टरपंथी विचारधारा का दावा करता है, जो राष्ट्रवादी नेताओं को धमकी भरे कॉल करने, फिरौती मांगने और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर हत्याओं के दावों को पोस्ट करने में शामिल है. केंद्र सरकार की अधिसूचना में कहा गया कि बब्बर खालसा इंटरनेशनल को आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. अधिसूचना में कहा गया है कि बराड़ शार्प-शूटरों की आपूर्ति के अलावा सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से अत्याधुनिक हथियारों, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री की तस्करी और हत्याओं को अंजाम देने के लिए आपूर्ति करने में भी शामिल है. उसके सहयोगी नापाक मंसूबों के जरिए पंजाब में शांति, सांप्रदायिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था को बाधित करने की साजिश रच रहे हैं, जिसमें तोड़फोड़, आतंकी मॉड्यूल को खड़ा करना, लक्षित हत्याएं करना और अन्य राष्ट्र-विरोधी गतिविधियां शामिल हैं.

सरकार ने 3 मई को 28 हजार करोड़ रुपये के बॉन्‍ड बाजार में उतारने का ऐलान किया है.

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ई दिल्‍ली. सुरक्षित निवेश और ज्‍यादा ब्‍याज वाले विकल्‍प की तलाश कर रहे हैं तो जल्‍द ही आपकी यह खोज पूरी होने वाली है. सरकार ने 3 मई को 28 हजार करोड़ रुपये के बॉन्‍ड बाजार में उतारने का ऐलान किया है.

वित्‍त मंत्रालय ने बताया है कि 3 मई शुक्रवार से 3 लॉट में बॉन्‍ड की बिक्री की जाएगी. इसमें छोटी अवधि से लेकर लंबी अवधि तक निवेश करने का मौका मिलेगा. खास बात ये है कि इस बॉन्‍ड में छोटे निवेशक भी पैसे लगा सकते हैं, जिस पर सरकार की ओर से सुरक्षा की पूरी गारंटी मिलेगी. वित्‍त मंत्रालय के अनुसार, बॉन्‍ड का पहला लॉट 2 साल के लिए है, जिस पर निवेशक को 7.33 फीसदी का एकमुश्‍त रिटर्न दिया जाएगा. यह लॉट 6 हजार करोड़ रुपये का होगा. दूसरा लॉट 15 साल के निवेश के लिए है, जिस पर 7.23 फीसदी का रिटर्न मिलेगा और इसके तहत सरकार 10 हजार करोड़ रुपये का बॉन्‍ड बेच रही है. तीसरा लॉट 12 हजार करोड़ रुपये का है जो 40 साल यानी 2064 तक के लिए है. इस पर आपको 7.34 फीसदी का रिटर्न दिया जाएगा. इसके अलावा 2000 करोड़ का अतिरिक्‍त सब्‍सक्रिप्‍शन भी दिया जाएगा. ब्रोकरेज फर्म जिरोधा के फाउंडर निखिल कामत ने भी बॉन्‍ड को भरोसेमंद निवेश बताया है, जो एफडी का विकल्‍प बन सकता है.

आरक्षित रहेगा कुछ भाग
सरकार यह बॉन्‍ड मुंबई में आरबीआई के जरिये बेचेगी. निवेशक इसमें ऑनलाइन माध्‍यम से भी पैसे लगा सकते हैं. कुल बॉन्‍ड का 5 फीसदी एलिजिबल इंडीविजुअल और संस्‍थागत निवेशकों के लिए आरक्षित रखा गया है. इस पार्ट को नॉन कम्‍पीटेटिव के तहत रखा गया है, जिसमें सिर्फ योग्‍य निवेशकों को ही पैसे लगाने का मौका दिया जाएगा.

कैसे कर सकते हैं निवेश
आरबीआई कोर बैंकिंग सॉल्‍यूशंस (E-Kuber) के जरिये आम निवेशक भी इस ऑक्‍शन में पैसे लगा सकता है. सभी निवेश इलेक्‍ट्रॉनिक फॉर्मेट में ही होते हैं. 3 मई, 2024 को इसका ऑक्‍शन खुलेगा. नॉन कम्‍पीटेटिव बिड्स को सुबह 10.30 से 11 के बीच लगाया जा सकता है, जबकि कम्‍पीटेटिव बिड्स सुबह 10.30 से 11.30 बजे तक खुलेगी.

कब पता चलेगा रिजल्‍ट
वित्‍त मंत्रालय ने बताया कि बॉन्‍ड खरीदने वालों के नाम की घोषणा 3 कई को ही शाम तक कर दी जाएगी. इसका भुगतान 6 मई, 2024 को किया जाएगा. जिन्‍हें भी निवेश करने के बाद बॉन्‍ड अलॉट किए जाएंगे, उन्‍हें 6 मई को इसका भुगतान किया जाएगा और उनके नाम पर बॉन्‍ड जारी कर दिए जाएंगे. इस पर एफडी से ज्‍यादा ब्‍याज मिलने के साथ यह पूरी तरह सरकारी सुरक्षा की गारंटी में रहेगा.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनावों के शुरू होने से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्षी दल संविधान को लेकर गंभीर आरोप…

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ई दिल्ली: लोकसभा चुनावों के शुरू होने से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्षी दल संविधान को लेकर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। कांग्रेस समेत लगभग सभी विपक्षी दलों का आरोप है कि अगर प्रधानमंत्री लगातार तीसरी बार सत्ता में आते हैं तो वह संविधान को बदलकर रख देंगे।

बता दें कि मध्य प्रदेश के भिंड जिले में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि अगर बीजेपी केंद्र की सत्ता में लौटती है तो वह गरीबों, दलितों, आदिवासियों और ओबीसी को अधिकार देने वाले संविधान को फाड़ कर फेंक देगी। हालांकि देश का संविधान लागू होने के 60 साल पूरे होने के मौके पर पीएम मोदी ने जो किया था, वह कुछ अलग ही तस्वीर पेश करता है।

हाथी पर संविधान की प्रति रखकर निकाली गई थी भव्य सवारी

संविधान लागू होने के 60 साल पूरे होने के मौके पर गुजरात के सुरेंद्रनगर में संविधान की प्रति को हाथी पर रखकर एक भव्य यात्रा निकाली गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो कि तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, भी इस यात्रा में शामिल हुए थे। प्रधानमंत्री ने इस घटना को याद करते हुए एक बार कहा था, ‘2010 में, संविधान के 60 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में, हमने गुजरात के सुरेंद्रनगर में संविधान गौरव यात्रा का आयोजन किया। संविधान की प्रतिकृति को एक हाथी पर रखा गया था और जुलूस ने शहर के कुछ हिस्सों को कवर किया। मैं भी उस जुलूस में चला। यह एक अनोखी श्रद्धांजलि थी!’ इस घटना से पता चलता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान को किस हद तक महत्व देते हैं।

‘संविधान के 75 वर्ष का उत्सव व्यापक स्तर पर मनाएंगे’

तेलंगाना में मंगलवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सरकार चलाने के लिए संविधान को ‘धर्म ग्रंथ’ बताते हुए याद दिलाया कि पदभार संभालने के बाद 2014 में संसद में प्रवेश करते समय उन्होंने इसे नमन किया था। मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का ‘शाही परिवार’ पार्टी के संविधान को भी मानने के लिए तैयार नहीं था और तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी को ‘बाथरूम में बंद कर दिया गया’ और ‘फुटपाथ पर फेंक दिया गया’ तथा ‘शाही परिवार’ ने कांग्रेस के संविधान की परवाह किये बिना पार्टी पर कब्जा कर लिया। रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने भरोसा जताया कि वह (केंद्र में) अपने तीसरे कार्यकाल में, संविधान के 75 वर्ष का उत्सव व्यापक स्तर पर मनाएंगे।