Home Blog Page 103

” राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल-बंटवारे पर सहमति” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे…”

0

राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल-बंटवारे पर सहमति के बाद सोमवार को दोनों राज्य दिल्ली में समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

इस दौरान, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी उपस्थित होंगे।

इस समझौते से दोनों राज्यों के बीच तीन दशक से चला आ रहा गतिरोध खत्म होने की उम्मीद है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, रविवार को हुई एक लंबी बैठक में दोनों राज्यों के अधिकारियों की ओर से रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। अभी राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समझौते को औपचारिक रूप देंगे।

सीएमओ अधिकारियों ने सोमवार को पुष्टि की कि भजनलाल शर्मा सुबह 8.30 बजे जयपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुए। यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का समारोह नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-3 में आयोजित किया जाएगा।

यमुना जल परियोजना राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के तीन जिलों सीकर, चूरू और झुंझुनू को सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराएगी। अधिकारियों ने कहा, “समझौते पर हस्ताक्षर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय गृह सचिव और केंद्र सरकार के साथ-साथ राजस्थान और हरियाणा सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में होंगे।”

दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में बीते दिन दो घंटे चली बैठक के बाद दोनों राज्यों के अधिकारियों में यह सहमति बनी। राजस्थान का प्रतिनिधित्व मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार और जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता भुवन भास्कर ने किया। हरियाणा का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल और मुख्य अभियंता वीरेंद्र सिंह ने किया, जबकि मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

सहमति के अनुसार, हरियाणा कई तय जगहों से पानी लेगा। इसमें दनोदा कलां से 10 क्यूसेक, नयागांव के पास सरसौद डिस्ट्रीब्यूटरी से 80 क्यूसेक, चौधरी माइनर पर हिंडवान से 70 क्यूसेक, सरसाना माइनर पर पट्टन से 20 क्यूसेक, सेगा नरार से 2 क्यूसेक, कैथल के पास प्योदा से 43 क्यूसेक और कैथल के पास चंदना-मानस रोड से 41.83 क्यूसेक पानी लिया जाएगा। इसके अलावा, हरियाणा को एक और तय इनटेक पॉइंट का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी और जरूरत पड़ने पर हसियावास के तीन अन्य जलाशयों में से किसी एक से पानी लेने की इजाजत होगी।

इस प्रोजेक्ट का आर्थिक बोझ राजस्थान सरकार उठाएगी, साथ ही केंद्र सरकार से भी आर्थिक मदद पाने की कोशिश की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि यही पाइपलाइन नेटवर्क भविष्य के किशाऊ, लखवार और रेणुकाजी प्रोजेक्ट्स से राजस्थान के हिस्से का पानी पहुंचाने में भी मदद करेगा।

हालांकि, हरियाणा ने 1994 के समझौते के बाद बदलती जरूरतों को देखते हुए पानी के बंटवारे पर फिर से विचार करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन दोनों राज्य फिलहाल मूल समझौते को लागू करने पर सहमत हो गए हैं। समझौते के तहत राजस्थान को यमुना का 1,917 क्यूसेक पानी मिलेगा।

पानी की सप्लाई को आसान बनाने के लिए हथिनीकुंड से हसियावास तक तीन पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी, जिनमें से हर एक का व्यास 3.6 मीटर होगा। प्रस्तावित पाइपलाइन हरियाणा के पांच जिलों यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और हिसार से होकर गुजरेगी।

अधिकारियों ने कहा कि समझौते को औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद, पाइपलाइन कॉरिडोर के साथ जमीन अधिग्रहण का काम शुरू होगा। टेंडर जारी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा।

“PMRC स्कीम क्या है?? सरकार देगी 14 करोड़ रुपये तक सहायता, जानें पूरी डिटेल…” 

0

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने ‘प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर’ (PMRC) स्कीम 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल का मकसद उन भारतीयों को देश लौटने और यहीं अपना रिसर्च करने के लिए प्रोत्साहित करना है जो अभी दुनिया की बड़ी यूनिवर्सिटीज़ और रिसर्च सेंटर्स में काम कर रहे हैं।

अगर आप किसी रिसर्च सेंटर में काम कर रहे हैं और सरकारी फेलोशिप के ज़रिए अपना रिसर्च करना चाहते हैं, तो PMRC स्कीम आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। आप PMRC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 1 जून से शुरू हो गई है और आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 15 जुलाई, 2026 है।

PMRC स्कीम क्या है?

PMRC स्कीम शिक्षा मंत्रालय की एक बड़ी पहल है, जिसे खास तौर पर विदेशों में काम कर रहे भारतीय मूल के वैज्ञानिकों, रिसर्चर्स और विशेषज्ञों को भारत के शिक्षा और रिसर्च इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए बनाया गया है। इस स्कीम के लिए चुने गए लोगों को भारत के प्रमुख संस्थानों में रिसर्च करने का मौका मिलेगा और सरकार उन्हें ₹14 करोड़ तक की आर्थिक मदद देगी।

कौन आवेदन कर सकता है?

भारतीय मूल के रिसर्चर्स, वैज्ञानिक और प्रोफेशनल्स ‘प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर’ (PMRC) स्कीम के तहत आवेदन करने के पात्र हैं।

विदेशों में काम कर रहे भारतीय नागरिक

OCI कार्डधारक

भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO)

आवेदन कैसे करें?

सबसे पहले, PMRC के आधिकारिक पोर्टल pmrc.education.gov.in पर जाएं।

होमपेज पर, अपना प्रपोज़ल जमा करने या “Apply Now” (अभी आवेदन करें) का विकल्प चुनें। अकाउंट बनाने और अपनी ईमेल का इस्तेमाल करके रजिस्ट्रेशन पूरा करने के लिए “Fellows” सेक्शन में जाएं। फॉर्म में अपनी एकेडमिक, प्रोफेशनल और रिसर्च बैकग्राउंड से जुड़ी ज़रूरी जानकारी भरें और उसे अपलोड करें।

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) में करियर बनाने का सपना देखने वाले युवा उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी खबर…

0

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) में करियर बनाने का सपना देखने वाले युवा उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी खबर है। ISRO के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (ISTRAC) ने कई पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है।

योग्य उम्मीदवारों को टेक्निकल, साइंटिफिक और अन्य सपोर्ट स्टाफ़ जैसे पदों के लिए चुना जाएगा। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 27 जून, 2026 को शुरू हुई और उम्मीदवार 20 जुलाई, 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। चुने गए उम्मीदवारों को संगठन की ज़रूरतों के आधार पर देश भर के विभिन्न ISRO केंद्रों पर तैनात किया जाएगा।

भर्ती अभियान

इस ISRO ISTRAC भर्ती अभियान के तहत कई अलग-अलग भूमिकाओं के लिए नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें टेक्निकल असिस्टेंट, साइंटिफिक असिस्टेंट, लाइब्रेरी असिस्टेंट-A, टेक्नीशियन-B, ड्राफ्ट्समैन-B और कुक-A शामिल हैं। चुने गए उम्मीदवारों को संगठन की ज़रूरतों के अनुसार देश भर के विभिन्न ISRO केंद्रों पर तैनात किया जा सकता है।

अंतिम तिथि

इस भर्ती अभियान के लिए ऑनलाइन आवेदन 27 जून, 2026 को सुबह 10:00 बजे शुरू हुए। उम्मीदवार 20 जुलाई, 2026 को रात 11:55 बजे तक अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।

आवेदन शुल्क क्या है?

आवेदन शुल्क पद के आधार पर अलग-अलग है। टेक्निकल असिस्टेंट और साइंटिफिक असिस्टेंट पदों के लिए कुल शुल्क ₹750 है; इस राशि में आवेदन शुल्क और प्रोसेसिंग शुल्क दोनों शामिल हैं। टेक्नीशियन-B, ड्राफ्ट्समैन-B और कुक-A पदों के लिए कुल शुल्क ₹500 तय किया गया है। ISRO ने कहा है कि नियमों के अनुसार परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को प्रोसेसिंग शुल्क वापस कर दिया जाएगा।

भर्ती आवेदन

इस भर्ती के लिए पात्र होने के लिए, उम्मीदवारों की आयु 20 जुलाई, 2026 को 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी। शैक्षणिक योग्यता हर पद के लिए अलग-अलग है। ज़रूरतों में ITI सर्टिफिकेट, इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, B.Sc. जैसी योग्यताएं शामिल हैं। लाइब्रेरी साइंस में डिग्री या मास्टर डिग्री और कुक के पद के लिए संबंधित अनुभव।

चरण प्रक्रिया

कैंडिडेट्स का सिलेक्शन कई चरणों वाली प्रक्रिया से किया जाएगा। सबसे पहले, लिखित परीक्षा या कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) होगा। इसके बाद, ज़रूरी पदों के लिए स्किल टेस्ट होगा। आखिरी चरण में, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल जांच के बाद मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी।

ऑनलाइन आवेदन

  • कैंडिडेट्स सबसे पहले ISRO की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं।
  • ‘Careers’ सेक्शन में जाएं और ‘ISTRAC Recruitment 2026’ लिंक खोलें।
  • रजिस्टर करें, लॉग इन करें और एप्लीकेशन फॉर्म भरें।
  • ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें, एप्लीकेशन फीस भरें और फॉर्म सबमिट करें।
  • एप्लीकेशन प्रोसेस पूरा होने के बाद, एप्लीकेशन फॉर्म का प्रिंटआउट या PDF सेव कर लें और रजिस्ट्रेशन नंबर सुरक्षित रखें।

मध्य पूर्व तनाव से निपटने की भारत की प्रक्रिया कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर…

0

मध्य पूर्व तनाव से निपटने की भारत की प्रक्रिया कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर थी। इसकी वजह देश में पिछले एक दशक में बनाया गया इन्फ्रास्ट्रक्चर था, जिससे हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद भी पेट्रोल पंप और एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी रही।

यह जानकारी सरकार की ओर से दी गई।

पेट्रोलियम मंत्रालय के कहा, भारत कच्चे तेल की अपनी स्थिति को सिर्फ स्टॉक के भरोसे नहीं, बल्कि अलग-अलग स्रोतों से तेल मंगाकर सुरक्षित रखता है। देश को तेल आपूर्ति करने वाले देशों की संख्या 27 से बढ़कर 41 हो गई है; इसमें लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देश शामिल हुए हैं, साथ ही अमेरिका और रूस से भी तेल की आपूर्ति बढ़ाई गई है।

मंत्रालय ने बताया कि इसके साथ ही रूटिंग भी बदल गई है, जिससे अब भारत का बहुत कम कच्चा तेल होर्मुज से होकर गुजरता है। आईएसपीआरएल के तहत स्ट्रैटेजिक रिजर्व में लगभग 5.33 मिलियन टन तेल है, जो लगभग तीन हफ्ते की जरूरत को पूरी कर सकता है।

भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल था जो इस हॉर्मुज स्ट्रेट से अपने कार्गो की आवाजाही जारी रख पाए और किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कोई कमी नहीं हुई।

इसके अलावा, एथेनॉल ब्लेंडिंग का 20 प्रतिशत तक पहुंचना एक और संरचनात्मक राहत देता है, जिससे हर साल कच्चे तेल के आयात की भारी मात्रा की बचत होती है।

कच्चे तेल की कीमत गिरकर लगभग 74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है, जो मध्य पूर्व संकट के पहले के स्तर के करीब है। स्ट्रेट से टैंकरों की आवाजाही फिर से शुरू होने के साथ कीमतें और कम हो रही हैं।

मंत्रालय ने कहा कि आवाजाही के पूरी तरह सामान्य होने में समय लगेगा, क्योंकि अभी भी बारूदी सुरंगों को हटाने और बड़े जहाजों के जमावड़े को निपटाने का काम बाकी है, लेकिन आपूर्ति में रुकावट का सबसे बुरा दौर अब बीत चुका है।

पेट्रोल और डीजल के मामले में, झटके का असर ग्राहकों पर नहीं डाला गया, बल्कि उसे खुद संभाला गया। केंद्र सरकार ने 27 मार्च, 2026 को पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की। इसके तहत पेट्रोल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज को 13 रुपए से घटाकर 3 रुपए और डीजल पर 10 रुपए से घटाकर शून्य कर दिया गया। इस कदम से सरकार को लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ।

इसके बाद मार्केटिंग कंपनियों ने दो महीने से अधिक समय तक रिटेल कीमतें नहीं बढ़ाईं, जबकि कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर से भी ऊपर चली गई थीं और उन्हें रोजाना लगभग एक हजार करोड़ रुपए का नुकसान (अंडर-रिकवरी) हो रहा था।

जब कीमतों में बदलाव करना जरूरी हो गया, तो 15 मई को प्रति लीटर 3 रुपए की एक ही बार बढ़ोतरी की गई, जो किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे कम थी।

संकट शुरू होने के समय से तुलना करें तो, भारत में पेट्रोल पंप की कीमतों में हुई बढ़ोतरी किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे कम रही है। भारत में पेट्रोल की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई।

एलपीजी का मामला सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ी कामयाबी थी। भारतीय रसोई तक पहुंचने वाली आधी से अधिक कुकिंग गैस खाड़ी देशों से आती थी, और आपूर्ति में रुकावट के कारण इसका एक बड़ा हिस्सा लगभग रातों-रात बंद हो गया।

आपूर्ति में रुकावट के आठ दिनों के भीतर ही एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर जारी किया गया। इसमें सभी रिफाइनरियों को प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपलीन और ब्यूटीन स्ट्रीम्स का इस्तेमाल करके अधिक से अधिक प्रोडक्शन करने का निर्देश दिया गया।

मंत्रालय ने बताया, “सात दिनों के भीतर, घरेलू प्रोडक्शन 35,000 टन से बढ़कर 54,000 टन प्रतिदिन हो गया। यह मात्रा लगभग 30,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन की बची हुई आयात की जरूरत से कहीं अधिक थी, जिससे कमी को काफी हद तक घरेलू प्रोडक्शन से ही पूरा कर लिया गया। जिन रिफाइनरियों में पहले कभी एलपीजी का प्रोडक्शन नहीं होता था, उन्हें इसके प्रोडक्शन के लिए तैयार किया गया।”

कीमत के मामले में भी ग्राहकों का ध्यान रखा गया। 14.2 किलो वाले सिलेंडर की इंपोर्ट-लिंक्ड लागत 1,600 रुपए से अधिक होने के बावजूद, किसी भी घर के लिए तय कीमत 942 रुपए ही रखी गई। वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए रिफिल पर 300 रुपए का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर मिलने के बाद प्रभावी कीमत 642 रुपए रही। इस योजना के तहत 10.58 करोड़ से अधिक कनेक्शन दिए गए हैं और यह एक आम घर की सालाना जरूरत को पूरा करती है।

7 जून को घरेलू कुकिंग गैस (एलपीजी) की कीमतों में प्रति सिलेंडर सिर्फ 29 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी।

आपूर्ति की स्थिति बेहतर होने पर, सरकार ने 25 जून को कमर्शियल और बल्क एलपीजी पर लगी पाबंदियां हटा लीं और नॉन-डोमेस्टिक सप्लाई को संकट से पहले के स्तर पर बहाल कर दिया।

टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट का त्वरित सुनवाई से इनकार…

0

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर त्वरित सुनवाई की मांग को दूसरी बार खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आंखों के इलाज के लिए विदेश यात्रा की अनुमति मांगी थी।

गौरतलब है कि 23 जून को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की एकल पीठ में आंखों के इलाज के लिए विदेश यात्रा की अनुमति मांगने संबंधी याचिका दायर की थी।

विदेश में सात दिनों की यात्रा की अनुमति मांगने वाली याचिका के साथ-साथ मामले की त्वरित सुनवाई के लिए भी अपील की गई थी।

हालांकि, 24 जून को न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा था कि त्वरित सुनवाई देने का कोई कारण नहीं है और यह भी कहा कि मामले की सुनवाई सामान्य प्रक्रिया के तहत होगी।

सोमवार को अभिषेक के वकील ने मामले की त्वरित सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की एकल पीठ के समक्ष पुनः याचिका दायर की। हालांकि, न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने याचिका को फिर से खारिज कर दिया और स्पष्ट रूप से कहा कि मामले की सुनवाई निर्धारित समय सारणी के अनुसार ही होगी।

हाल ही में कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक अन्य एकल पीठ के आदेश के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) के अधिकारियों ने हस्ताक्षर मिलान मामले में चल रही ​​जांच के सिलसिले में अभिषेक से दो बार पूछताछ की। इस मामले में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी पदों पर नियुक्तियों से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों के हस्ताक्षर जाली होने का आरोप लगाया गया था।

इसके बाद न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल पीठ ने अभिषेक को इस मामले में गिरफ्तारी सहित पुलिस की जबरदस्ती कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। इसके साथ कुछ शर्तें भी लगाईं गईं, जिनमें से एक शर्त अदालत की पूर्व अनुमति के बिना उनकी विदेश यात्रा पर रोक थी।

उस प्रतिबंध के बीच अभिषेक बनर्जी ने इलाज के उद्देश्य से विदेश यात्रा की अनुमति और मामले की त्वरित सुनवाई के लिए एकल पीठ के समक्ष एक याचिका दायर की।

अक्टूबर 2016 में अभिषेक बनर्जी मुर्शिदाबाद जिले में एक पार्टी कार्यक्रम से कोलकाता लौटते समय एक दुर्घटना का शिकार हो गए। इस दुर्घटना में उनकी आंख में गंभीर चोटें आईं। उन्होंने पहले देश के कई अस्पतालों में इलाज कराया और बाद में विदेश में भी उपचार कराया था।

गर्मी की लहर का प्रभाव स्वास्थ्य पर बढ़ते खतरे….

0

यूरोप इस समय अपने सबसे खतरनाक गर्मियों में से एक का सामना कर रहा है, जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 21 जून से अब तक 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतों को बढ़ती तापमान से जोड़ा है।

जैसे-जैसे देश इस अभूतपूर्व गर्मी से निपटने की कोशिश कर रहे हैं, जर्मनी ने 41.7°C का रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया है, जो जलवायु परिवर्तन से जुड़े स्वास्थ्य खतरों को उजागर करता है। WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने चेतावनी दी है कि गर्मी का तनाव एक “चुपा हुआ हत्यारा” है, जो विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, पुरानी बीमारियों से ग्रस्त लोगों और बाहरी कामकाजी लोगों को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि यूरोप अब पृथ्वी का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जो जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक औसत से लगभग दोगुना तेजी से गर्म हो रहा है.

गर्मी का खतरा क्यों है?” गर्मी का खतरा क्यों है? |

तूफानों या बाढ़ों के विपरीत, गर्मी की लहरें अक्सर चुपचाप जान ले लेती हैं। उच्च तापमान के लंबे समय तक संपर्क में रहने से शरीर की प्राकृतिक ठंडक प्रणाली पर दबाव पड़ता है, जिससे निर्जलीकरण, गर्मी थकावट, और गंभीर मामलों में गर्मी का स्ट्रोक हो सकता है – यह एक चिकित्सा आपात स्थिति है जो मस्तिष्क, हृदय, गुर्दे और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। गर्मी मौजूदा स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हृदय रोग, मधुमेह, गुर्दे की बीमारी और श्वसन रोगों को भी बढ़ा सकती है। बुजुर्ग विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनके शरीर तापमान को नियंत्रित करने में कम सक्षम होते हैं। फ्रांसीसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने वर्तमान गर्मी की लहर के दौरान लगभग 1,000 अतिरिक्त मौतों की सूचना दी है, जिसमें 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में घर पर होने वाली मौतों में वृद्धि देखी गई है.

यूरोप में रिकॉर्ड तापमान” यूरोप में रिकॉर्ड तापमान “

गर्मी की लहर ने कई देशों में तापमान के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जर्मनी ने पूर्वी ब्रांडेनबर्ग में ऐतिहासिक 41.7°C दर्ज किया, जबकि चेक गणराज्य ने 41.1°C का तापमान रिकॉर्ड किया। पोलैंड ने भी अपने सबसे गर्म दिन का अनुभव किया, जिसमें तापमान 40.5°C तक पहुंच गया। मौसम विज्ञानी इन चरम तापमानों को एक शक्तिशाली गर्मी डोम से जोड़ते हैं, जो एक मौसम पैटर्न है जिसमें उच्च दबाव वाली हवा गर्म हवा को पृथ्वी की सतह के निकट फंसा देती है। यह बादरहित आसमान, तीव्र धूप और खतरनाक गर्मी के लंबे समय तक रहने की स्थिति पैदा करता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन ऐसे चरम मौसम की घटनाओं को अधिक सामान्य, लंबे समय तक चलने वाला और तीव्र बना रहा है.

स्वास्थ्य प्राधिकरणों की चेतावनी” स्वास्थ्य प्राधिकरणों की चेतावनी “

यूरोप भर में सरकारों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आपातकालीन उपाय लागू किए हैं। कई बाहरी कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है, कुछ क्षेत्रों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं, और अधिकारियों ने निवासियों से दिन के सबसे गर्म हिस्से में घर के अंदर रहने की अपील की है। WHO देशों से गर्मी स्वास्थ्य कार्य योजनाओं को मजबूत करने, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में सुधार करने और कमजोर जनसंख्या की रक्षा करने का आह्वान कर रहा है क्योंकि चरम गर्मी बढ़ती जा रही है.

गर्मी की लहर के दौरान सुरक्षित रहने के उपाय” गर्मी की लहर के दौरान सुरक्षित रहने के उपाय “

स्वास्थ्य विशेषज्ञ निम्नलिखित सावधानियों की सिफारिश करते हैं:

  • पानी का भरपूर सेवन करें, भले ही आपको प्यास न लगे।
  • दोपहर की चरम गर्मी के दौरान बाहरी गतिविधियों से बचें।
  • हल्के, ढीले कपड़े पहनें।
  • संभव हो तो एयर-कंडीशंड या अच्छी तरह हवादार स्थानों में रहें।
  • बुजुर्ग परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और अकेले रहने वाले लोगों की नियमित रूप से जांच करें।
  • कभी भी बच्चों या पालतू जानवरों को पार्क की गई गाड़ियों के अंदर न छोड़ें।

जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन रिकॉर्ड तोड़ तापमान को बढ़ाता है, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि गर्मी की लहरें अब दुर्लभ मौसम की घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक बढ़ती हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति हैं। गर्मी से संबंधित बीमारियों के प्रारंभिक संकेतों को पहचानना और निवारक उपाय करना जीवन बचाने में मदद कर सकता है क्योंकि यूरोप और दुनिया के अधिकांश हिस्से गर्म गर्मियों का सामना कर रहे हैं.

चाय की गुणवत्ता पर गंभीर चिंताएँ….

0

एक चौंकाने वाले खुलासे में, पिछले दो वर्षों में परीक्षण किए गए लगभग आधे राष्ट्रीय चाय पैकेट खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।

एक आरटीआई आवेदन के जवाब में, चाय बोर्ड ने बताया कि 2024-25 के दौरान 1,423 निगरानी नमूनों का परीक्षण किया गया, जिनमें से 711 असफल रहे। 2025-26 में 1,764 नमूनों का परीक्षण किया गया, जिसमें 835 गुणवत्ता जांच में फेल हुए।

आरटीआई ने उन ब्रांडों और पैकेटर्स के नाम भी मांगे जिनके उत्पाद परीक्षण में असफल रहे। हालांकि, चाय बोर्ड ने जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि यह तीसरे पक्ष से संबंधित है।

बोर्ड ने अपने जवाब में कहा, “आवश्यक ब्रांड/पैकेटर्स/निर्माता का नाम तीसरे पक्ष से संबंधित है। इसलिए, ऐसी जानकारी साझा करना आरटीआई अधिनियम की धारा 8 के तहत छूट प्राप्त है।”

जब असफल नमूनों के निर्माताओं और पैकेटर्स के खिलाफ उठाए गए कदमों के बारे में पूछा गया, तो बोर्ड ने केवल संक्षिप्त उत्तर दिया, “नियंत्रण आदेशों के अनुसार कार्रवाई की गई है।” कोई और विवरण नहीं दिया गया।

ये निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये उन चिंताओं के बीच आए हैं जो कुछ निर्माताओं द्वारा उत्पादित चाय की गुणवत्ता और कुछ पैकेटर्स द्वारा अपनाए गए अनैतिक प्रथाओं को लेकर हैं, जबकि उद्योग और नियामकों द्वारा गुणवत्ता मानकों में सुधार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

भारतीय चाय के निर्यात में अक्सर अत्यधिक कीटनाशक अवशेषों और निम्न गुणवत्ता के कारण अस्वीकृति का सामना करना पड़ता है।

आधिकारिक स्रोतों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा परीक्षणों में असफल होने के मुख्य कारणों में कीटनाशक अवशेषों का अनुमेय सीमा से अधिक होना, गैर-स्वीकृत रसायनों की उपस्थिति और भ्रामक लेबलिंग दावे शामिल हैं।

उद्योग के स्रोतों ने आरोप लगाया कि कुछ बेईमान पैकेटर्स CTC चाय को निम्न गुणवत्ता की पत्तियों और धूल चाय के साथ मिलाकर विभिन्न ब्रांड नामों के तहत उत्पाद का विपणन करते हैं।

गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र के माध्यम से व्यापार की जाने वाली चाय का 20 प्रतिशत से अधिक, जिसमें धूल ग्रेड शामिल हैं, भारत की दो प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों और उनके संबंधित विक्रेताओं द्वारा खरीदी जाती है।

इन कंपनियों द्वारा गुवाहाटी नीलामी में चाय के लिए औसत नीलामी मूल्य 2024 में 202.93 रुपये से 248.56 रुपये और 2025 में 144.82 रुपये से 226.77 रुपये के बीच रहा।

पिछले दो वर्षों में, चाय उद्योग के सभी हितधारकों – खरीदारों, विक्रेताओं, खरीदी गई पत्तियों के कारखाना (BLF) संघों, छोटे चाय उत्पादकों, चाय अनुसंधान संगठनों और नियामक एजेंसियों – ने चाय की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकार के अधिकारियों के साथ कई परामर्श किए हैं, जिसमें चाय बोर्ड और खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) शामिल हैं।

उद्योग के स्रोतों ने कहा कि सरकार ने हाल ही में कीटनाशकों इमिडाक्लोप्रिड और एसेटामिप्रिड के लिए अधिकतम अवशेष सीमाओं (MRLs) को संशोधित करने पर सहमति व्यक्त की है, जो चाय नमूनों की असफलता का एक बड़ा हिस्सा बनाते हैं। यह कदम खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप अधिक चाय consignments लाने की उम्मीद है। संशोधित सीमाओं की औपचारिक अधिसूचना का इंतजार है।

” तेलंगाना सरकार की नई उपलब्धि” पल्स पोलियो अभियान की सफलता” 38 लाख बच्चों को मिली खुराक “

0

तेलंगाना सरकार ने पल्स पोलियो अभियान में एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अभियान के पहले दिन ही निर्धारित लक्ष्य का 95 प्रतिशत से अधिक पूरा कर लिया गया।

राज्यभर में फैले टीकाकरण केंद्रों के व्यापक नेटवर्क के कारण लाखों बच्चों को सुरक्षित रूप से पोलियो की खुराक दी गई।

पहले दिन का टीकाकरण आंकड़ा

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना में लगभग 41 लाख बच्चे पोलियो की दवा लेने के लिए योग्य हैं। पहले दिन, राज्य के विभिन्न बूथों पर 38,95,550 बच्चों (पांच वर्ष से कम आयु) को पोलियो की खुराक दी गई, जिससे कुल लक्ष्य का 95.1 प्रतिशत हासिल हुआ।

स्वास्थ्य मंत्री द्वारा अभियान का शुभारंभ

इस राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत तेलंगाना के स्वास्थ्य मंत्री सी. दामोदर राजनरसिम्हा और अन्य मंत्रियों ने बोराबंडा स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) में बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स देकर की। इस दौरान मंत्रियों ने स्वास्थ्यकर्मियों की सराहना की और जनता से इस अभियान को सफल बनाने की अपील की।

घर-घर दस्तक अभियान का अगला चरण

पहले दिन के रिकॉर्ड टीकाकरण के बाद, स्वास्थ्य विभाग अब बाकी बचे बच्चों तक पहुँचने की योजना बना रहा है। विज्ञप्ति के अनुसार, अगले दो दिनों तक स्वास्थ्यकर्मी और एएनएम (ANM) की टीमें घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करेंगी कि कोई भी पात्र बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे।

मिजोरम में मतदाता पुनरीक्षण का निष्कर्ष एक मतदाता वोट डालते हुए।

0

मिजोरम में 46,000 से अधिक मतदाता हटाए गए, विशेष पुनरीक्षण पूरा”

मिजोरम के चुनावी रजिस्टर से 46,000 से अधिक मतदाताओं को हटा दिया गया है, जैसा कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया 20 मई को शुरू हुई थी और रविवार को समाप्त हुई, जिसमें सभी नामांकन फॉर्म पूरी तरह से डिजिटाइज किए गए, मिजोरम के संयुक्त मुख्य चुनाव अधिकारी एथेल रोथंगपुई ने बताया।

कुल 46,191 नामों को विभिन्न कारणों से हटाया गया, जिनमें मृत्यु, अनट्रेसेबल स्थिति, स्थायी प्रवास और डुप्लिकेट नामांकन शामिल हैं।

हटाए गए मतदाताओं में से 21,290 मृतक थे, 8,352 का पता नहीं चल सका, 13,992 ने अन्य राज्यों या विदेशों में स्थायी रूप से स्थानांतरित कर लिया था, और 2,245 को डुप्लिकेट नामांकन के रूप में पाया गया।

रोथंगपुई ने कहा कि 312 योग्य मतदाताओं ने धार्मिक विश्वासों के कारण नामांकन या पुनः नामांकन से इनकार कर दिया। ये लोग या तो 2025 के चुनावी रजिस्टर में शामिल थे या उनके रिश्तेदार पिछले SIR के दौरान नामांकित थे।

पुनरीक्षण के बाद, मिजोरम के मतदाता अब 8,28,877 हैं, जो 2025 के चुनावी रजिस्टर में दर्ज 8.75 लाख मतदाताओं का 94.72 प्रतिशत दर्शाते हैं।

प्रारंभिक चुनावी रजिस्टर 4 जुलाई को प्रकाशित किया जाएगा, जिसके बाद मतदाता 5 जुलाई से 4 अगस्त के बीच दावे और आपत्तियाँ दाखिल कर सकते हैं।

यह SIR उस समय हो रहा है जब MZP ने दक्षिण मिजोरम के चकमा-प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में चुनावी रजिस्टर की पूरी जांच की मांग की है।

“भारत की समग्र दृष्टि पर मोहन भागवत का बयान…”

0

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को वैश्विक चुनौतियों के समाधान पर एक महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पास एक समग्र दृष्टिकोण है, जिसमें वर्तमान समय में दुनिया के सामने उपस्थित सभी संकटों का स्थायी समाधान निहित है।

भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्व को पूर्णता प्रदान करना और उसे सही दिशा में ले जाना भारत की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि भारत की भूमिका दुनिया को पूर्णता प्रदान करने में महत्वपूर्ण है। एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में भागवत ने कहा कि सभी प्राणियों के कल्याण के लिए भारत की आवाज को सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘दुनिया को पूर्णता देने के लिए हमारी समग्र दृष्टि के आधार पर भारत की बात सुनना अनिवार्य है।’

भागवत ने यह भी बताया कि मौजूदा वैश्विक ढांचे केवल आंशिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं और समय की चुनौतियों का समाधान नहीं कर सकते। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय शिक्षण मंडल (बीएसएम) की नई वेबसाइट का उद्घाटन भी किया।

इस सम्मेलन में देशभर से लगभग 380 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसका उद्घाटन कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने शुक्रवार को किया था।

नई वेबसाइट का उद्घाटन

नई वेबसाइट की शुरुआत और सम्मेलन का विवरण

इस विशेष अवसर पर मोहन भागवत ने ‘भारतीय शिक्षण मंडल’ (BSM) की नई आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ किया।

इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 380 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

विज्ञप्ति के अनुसार, इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा किया गया था।