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“‘अगर वो ग्लोबल टैरिफ लगाना ही चाहते हैं तो…’, नील कत्याल ने ट्रंप को जमकर सुनाया, दी ये नसीहत”

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टैरिफ को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से डोनाल्ड ट्रंप बौखला गए हैं और उन्होंने पूरी दुनिया पर फिर से टैरिफ बम फोड़ दिया है. ट्रंप ने पहले अतिरिक्त 10 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया था लेकिन महज 24 घंटे के अंदर ही इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है.

ट्रंप के इस फैसले पर भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल ने सवाल उठाए हैं.

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि अमेरिकी तत्काल प्रभाव से दुनिया भर के देशों पर लागू 10 फीसदी टैरिफ को बढ़ाते हुए 15 प्रतिशत करने जा रहा है. पुराना दावा दोहराते हुए उन्होंने कहा है कि तमाम देश दशकों से अमेरिका का फायदा उठाते आ रहे हैं और टैरिफ से जुड़ा ये फैसला उसी का जवाब है. साथ ही ये भी कहा कि टैरिफ हाइक पूरी तरह से कानून के दायरे में है और इसकी जांच-परख की जा चुकी है.

इससे पहले ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 10 फीसदी का टैरिफ लगाया था लेकिन अगले ही दिन शनिवार को टैरिफ बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया. इसे लेकर भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल ने वैश्विक टैरिफ पर कई सवाल उठाए हैं.

क्या बोले नील कत्याल

नील कत्याल ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के लिए धारा 122 पर भरोसा करते हुए इसका सहारा लेना मुश्किल नजर आता है, क्योंकि इसी मामले में अमेरिकी न्याय विभाग ने सुप्रीम कोर्ट को इसके विपरीत बताया था. साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि धारा 122 का कोई स्पष्ट अनुप्रयोग नहीं है, क्योंकि ट्रंप ने जिस आपातकालीन स्थिति का हवाला दिया था, वह व्यापार घाटे से जुड़ी है और 122 धारा Balance-of-Payments Deficit जैसी अलग परिस्थिति के लिए है.

‘उन्हें अमेरिकी तरीका अपनाना चाहिए’

उन्होंने आगे कहा कि अगर राष्ट्रपति बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाना ही चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए अमेरिकी तरीका अपनाना चाहिए और कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के पास जाना चाहिए. हमारा संविधान भी यही कहता है कि अगर टैरिफ को लेकर ट्रंप के विचार इतने ही अच्छे हैं तो फिर उन्हें मानने में कांग्रेस को कोई भी दिक्कत नहीं होनी चाहिए.

कौन हैं नील कत्याल

वो भारतीय-अमेरिकी वकील हैं. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में उनकी दलीलों ने टैरिफ के मामले में ट्रंप को चित कर दिया था. उन्होंने कोर्ट में कहा कि अमेरिकी संसद के पास व्यापार को विनियमित करने की शक्ति है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप इस शक्ति को मनमाने ढंग से इस्तेमाल नहीं कर सकते. इनका जन्म शिकागो में हुआ था और वो भारतीय अप्रवासी परिजन के बेटे हैं. कात्याल ने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से ग्रेजुएट हैं.

सिर्फ 55 मिनट में दिल्ली से पहुंच जाएंगे मेरठ, PM मोदी ने नमो भारत ट्रेन को दिखाई हरी झंडी, जानें क्या-क्या खास…

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अब दिल्ली से मेरठ पहुंचना और भी आसान हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल की पूरी लाइन को हरी झंडी दिखा दी है. 22 फरवरी शाम 6 बजे से यह ट्रेन आम लोगों के लिए शुरू हो जाएगी.

सराय काले खां से मोदीपुरम तक करीब 80 किलोमीटर का सफर अब सिर्फ 55 मिनट में पूरा होगा. यह सुविधा लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है.

पूरा 82 किलोमीटर कॉरिडोर तैयार

दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की कुल लंबाई 82 किलोमीटर है. अब यह पूरा रूट चालू हो गया है. दिल्ली में सराय काले खां से न्यू अशोक नगर तक का हिस्सा भी जोड़ दिया गया है. उत्तर प्रदेश में मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम तक 21 किलोमीटर लंबा मेट्रो ट्रैक भी शुरू हो गया है. इस ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 180 किलोमीटर प्रति घंटा है, हालांकि इसे 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलाया जाएगा. यह रेल सेवा साहिबाबाद, गाजियाबाद, मोदीनगर और मेरठ जैसे शहरों को तेजी से दिल्ली से जोड़ेगी.

देश की सबसे तेज मेरठ मेट्रो

प्रधानमंत्री ने मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम के बीच मेरठ मेट्रो सेवा का भी उद्घाटन किया. खास बात यह है कि मेट्रो और नमो भारत ट्रेन एक ही ट्रैक पर चलेंगी. मेरठ मेट्रो की अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. यह सभी स्टेशनों पर रुकते हुए पूरी दूरी लगभग 30 मिनट में तय करेगी. इसे देश की सबसे तेज मेट्रो सेवाओं में से एक माना जा रहा है.

नमो भारत ट्रेन की खास बातें

नमो भारत ट्रेन पूरी तरह एयर कंडीशन्ड है और इसमें छह कोच हैं. यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का खास ध्यान रखा गया है. ट्रेन में दो तरह के कोच हैं – प्रीमियम और स्टैंडर्ड.

प्रीमियम कोच में सुविधाएं:

आरामदायक सीटें

मोबाइल चार्जिंग और USB पॉइंट

फायर एक्सटिंग्विशर

लगेज रखने की जगह

ट्रेन की स्पीड और अगले स्टेशन की जानकारी देने वाली स्क्रीन

वेंडिंग मशीन से रिफ्रेशमेंट की सुविधा

स्टैंडर्ड कोच में भी जरूरी सुविधाएं दी गई हैं, लेकिन वेंडिंग मशीन जैसी सुविधा नहीं होगी.

गाजियाबाद, मेरठ और बागपत को फायदा

इस कॉरिडोर से गाजियाबाद, मेरठ और बागपत जैसे शहरों को सीधा फायदा मिलेगा. लोगों को रोजाना सफर में कम समय लगेगा. व्यापार और रोजगार के नए मौके भी बढ़ेंगे. ट्रेन मेरठ मोदीपुरम से शुरू होकर दिल्ली के सराय काले खां तक जाएगी और 13 स्टेशनों से होकर गुजरेगी.

IND vs SA: दक्षिण अफ्रीका के ये 4 खतरनाक खिलाड़ी, टीम इंडिया को रहना होगा सावधान; आज है सुपर-8 का मैच…

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भारत और दक्षिण अफ्रीका की टीम आज टी20 वर्ल्ड कप 2026 में आमने सामने होंगी. ये सुपर-8 राउंड में ग्रुप 1 का पहला मैच है, जो अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा. दोनों टीमें लीग स्टेज में अपने-अपने ग्रुप की टॉपर थी.

सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया लगातार 4 मैच जीतकर आ रही है, एडन मार्क्रम एंड टीम भी विजयी रथ पर सवार है. चलिए आपको बताते हैं दक्षिण अफ्रीका के वो 4 प्लेयर्स कौन से हैं, जिनसे भारत को सावधान रहने की जरुरत है. ये मैच विनर प्लेयर्स आज भारत के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं.

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 राउंड में भारत और दक्षिण अफ्रीका ग्रुप 1 में है, इस ग्रुप में जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज भी हैं. सभी टीमें लीग स्टेज में एक भी मैच नहीं हारी, इसी वजह से इसे ग्रुप और डेथ कहा जा रहा है. दक्षिण अफ्रीका के कप्तान एडन मार्क्रम खुद भी शानदार फॉर्म में हैं, वह जारी संस्करण में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में चौथे नंबर पर हैं.

एडन मार्क्रम

मार्क्रम शानदार फॉर्म में हैं, जो बड़े मैच के प्लेयर कहे जाते हैं. दक्षिण अफ्रीका के कप्तान अभी तक इस संस्करण में 2 अर्धशतकीय पारियां खेल चुके हैं. उन्होंने कनाडा के खिलाफ 59 रन बनाए थे. न्यूजीलैंड के खिलाफ मार्क्रम ने नाबाद 86 रन बनाए थे. आज भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा वह बन सकते हैं, भारतीय गेंदबाजों को चाहिए कि उन्हें जल्दी आउट करे.

रयान रिकेल्टन

रिकेल्टन तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आते हैं, इसलिए उनका रोल और भी ज्यादा महत्वपूर्ण रहता है. वह ऐसे बल्लेबाज हैं, जो कंडीशन और स्थिति को देखकर बल्लेबाजी करते हैं. उन्होंने इस टूर्नामेंट में अफगानिस्तान के गेंदबाजों को अच्छे से खेला था. इससे पता चलता है कि वह अच्छी फॉर्म में हैं. अफगानिस्तान के खिलाफ उन्होंने 61 रन बनाए थे. न्यूजीलैंड और यूएई के खिलाफ उन्होंने क्रमश 30 और 21 रन बनाए. उन्होंने भारत के खिलाफ 4 फरवरी को हुए अभ्यास मैच में 44 रन बनाए थे.

मार्को यानसेन

यानसेन ने न्यूजीलैंड के खिलाफ लीग स्टेज में 40 रन देकर 4 विकेट लिए थे. उन्हें भारत के खिलाफ गेंदबाजी का अच्छा अनुभव है, जिसका आज वह फायदा उठा सकते हैं. वह अभी तक टी20 वर्ल्ड कप 2026 में खेले 3 मैचों में 7 विकेट ले चुके हैं. वह बल्लेबाजी भी ठीक ठाक कर लेते हैं.

लुंगी एनगिडी

एनगिडी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका के टॉप विकेट टेकर हैं, जिन्होंने 3 मैचों में 8 विकेट लिए हैं. कनाडा के खिलाफ 4 विकेट लेने वाले एनगिडी ने अफगानिस्तान के खिलाफ 3 विकेट लिए थे. पिछले साल दिसंबर में भारत दौरे पर लुंगी एनगिडी ने शानदार गेंदबाजी की थी, वह पॉवरप्ले में विकेट चटका रहे थे. आज भारत के बल्लेबाजों को उनसे सावधान रहना होगा.

European vs Indian Liver Health: शराब पीने वाले विदेशी का लिवर हेल्दी, न पीने वाले भारतीय को ‘फैटी लिवर’! क्या है इसकी वजह?

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इंसानों और शराब के बीच का रिश्ता हमेशा सीधा-सादा नहीं रहा है. इसमें संस्कृति, सामाजिक आदतें और शरीर की बनावट, तीनों की भूमिका होती है.

हम में से कई लोग सीमित मात्रा में शराब का सेवन करते हैं, लेकिन देश में बड़ी आबादी फैटी लिवर की समस्या से जूझ रही है. अक्सर यह सवाल उठता है कि यूरोपीय लोग हमसे ज्यादा शराब पीते हैं, फिर भी उन्हें इससे उनको दिक्कत कम क्यों होती है? इसी विषय पर डॉक्टर हर्ष व्यास ने एक दिलचस्प जानकारी शेयर की है.

सोशल मीडिया पर शेयर किया जानकारी

इंस्टाग्राम पर शेय एक वीडियो में उन्होंने 37 साल के एक इटालियन और 37 साल के एक भारतीय व्यक्ति की लिवर अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट की तुलना दिखाई, हैरानी की बात यह थी कि जो यूरोपीय व्यक्ति हफ्ते में दो-तीन बार शराब पीता था, उसका लिवर ज्यादा स्वस्थ दिखा, जबकि भारतीय व्यक्ति शराब नहीं पीता था, फिर भी उसके लिवर में फैटी बदलाव नजर आए, डॉ. व्यास के अनुसार इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. सबसे पहला कारण जेनेटिक्स है, उन्होंने बताया कि यूरोपीय लोगों में शराब को तोड़ने वाले एंजाइम, अल्कोहल डिहाइड्रोजनेज और एल्डिहाइड डिहाइड्रोजनेज की सक्रियता बेहतर होती है. इसका मतलब यह है कि शराब से बनने वाले जहरीले तत्व उनके शरीर से जल्दी बाहर निकल जाते हैं. जबकि एशियाई आबादी में ये एंजाइम उतने प्रभावी नहीं होते, जिससे ये हानिकारक तत्व शरीर में ज्यादा समय तक बने रह सकते हैं और धीरे-धीरे बाहर निकलते हैं.

लाइफस्टाइल का भी अहम रोल

दूसरा बड़ा कारण खानपान है. यूरोपियन डाइट में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, मछली और सी-फूड के रूप में हेल्दी फैट, ऑलिव ऑयल और पर्याप्त प्रोटीन शामिल होता है. यानी उनका भोजन संतुलित और पोषण से भरपूर होता है. इसके मुकाबले भारतीय आहार में अक्सर रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है, जबकि हेल्दी फैट और प्रोटीन अपेक्षाकृत कम होते हैं. यह अंतर लिवर की सेहत पर असर डाल सकता है. तीसरा अहम पहलू है फिजिकल एक्टिविटी. डॉक्टर ने बताया कि उनके इटालियन मरीज रोज 5 से 6 किलोमीटर पैदल चलता था और इसके अलावा 30 से 40 मिनट एक्सरसाइज भी करता था. वहीं भारत में बड़ी संख्या में लोग रेगुलर एक्सरसाइज नहीं कर पाते और रोज 5 किलोमीटर चलना भी मुश्किल हो जाता है.

डॉ. व्यास का कहना है कि भले ही यूरोपीय लोग शराब पीते हों, लेकिन उनकी लाइफस्टाइल संतुलित और सक्रिय होती है. बेहतर डाइट, नियमित व्यायाम और अनुकूल जेनेटिक कारक मिलकर शरीर को हुए नुकसान की भरपाई करने में मदद करते हैं. जबकि यदि लाइफस्टाइल असंतुलित हो, तो बिना शराब के भी लिवर से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं.

“एक तरफ जंग की आहट, दूसरी ओर टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला… क्या फिर से बढ़ेगा सोने का भाव?”

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अमेरिका-ईरान के बीच जंग होने को लेकर चर्चाएं जोरो पर है. ऊपर से टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अनिश्चितता का माहौल और गहरा गया है. ऐसे में सेफ हेवेन के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है.

इससे कीमतों में आने वाले समय में उछाल आने की संभावना है.

MCX पर सोने का भाव इस हफ्ते थोड़ा बढ़कर 156,993 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. जबकि पिछले हफ्ते MCX पर इसका बंद भाव 156200 रुपये था. इसी तरह से COMEX पर सोने की कीमत 5080 डॉलर प्रति आउंस पर बंद हुआ, जबकि पिछले शुक्रवार को यह 5043 डॉलर प्रति आउंस पर बंद हुआ था.

फोकस में रहेंगे सोने-चांदी के भाव

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दुनियाभर पर लगाए गए टैरिफ को गैर-कानूनी मानते हुए इसे रद्द कर दिया. इस पर मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से व्यापार को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है. इसके अलावा, US-ईरान के बीच जंग छिड़ने की बढ़ती चर्चा के बीच भू-राजनीतिक तनाव और मैक्रोइकोनॉमिक हालात सोने और चांदी की कीमतों के लिए स्ट्रक्चरल रूप से सपोर्टिव बैकग्राउंड दे रहे हैं.

शनिवार को भी सोने-चांदी की कीमतों मे तेजी देखने को मिली थी. 24-कैरेट से लेकर 22-कैरेट और 18-कैरेट सोने के रेट में मजबूत ट्रेंड रिवर्सल देखने को मिला. 23 फरवरी से शुरू हो रहे नए हफ्ते में निवेशकों की नजर इन्हीं डेवलपमेंट्स पर रहेगी. इनमें थोड़ी सी भी हलचल सोने-चांदी की कीमतों में असर डाल सकते हैं.

US फेड के रेट कट पर अनिश्चितता

अमेरिकी फेड रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती को लेकर भी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं. Live Mint की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पर बात करते हुए सुगंधा सचदेवा ने कहा कि 2025 की चौथी तिमाही में अमेरिका में जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार सुस्त रही, जो 1.4 परसेंट पर आ गई, जबकि उम्मीद 3 परसेंट की थी.फेडरल रिजर्व के रेट में कटौती की बात को और मजबूती मिली. वहीं, जनवरी में PCE प्राइस इंडेक्स सालाना 2.9 परसेंट बढ़ा, जो 2.8 परसेंट के अनुमान से थोड़ा ज्यादा है, जिससे पता चलता है कि महंगाई का दबाव बना हुआ है.

हालांकि, US फेड के सदस्य अभी ‘वेटएंड वॉच’ के मोड पर हैं. चूंकि महंगाई अभी फेड के 2 परसेंट के लक्ष्य के ऊपर बनी हुई है और रोजगार के आंकड़े भी स्थिर है इसलिए जल्दबाजी में कटौती का फैसला अभी नहीं लिया जा सकता. ऐसे में हो सकता है कि मार्च में फेड रिजर्व ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 3.50-3.75 की सीमा पर स्थिर रखें.

सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट को बढ़ाकर महंगाई को काबू में रखता है. पॉलिसी रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए सेंट्रल बैंक से कर्ज लेना महंगा हो जाता है. ऐसे में ग्राहकों को भी महंगे रेट पर लोन दिया जाता है. इससे बाजार में पैसों का बहाव कम हो जाता है, सामानों की मांग घटती है और महंगाई कम हो जाती है. सुगंधा ने आगे यह भी कहा, “धीमी ग्रोथ और लगातार महंगाई का यह मेल एसेट क्लास में, खासकर कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ा रहा है.”

क्या पीक पर पहुंचेगी सोने की कीमतें?

US-ईरान युद्ध की चर्चा और टैरिफ पर US सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रेड को लेकर अनिश्चितता के बीच क्या सोने की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच जाएंगी? इस पर सुगंधा सचदेवा ने कहा, “टेक्निकली, घरेलू बाजार में सोना 4880 डॉलर प्रति औंस और 1,49,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास अच्छा सपोर्टेड बना हुआ है. अभी इस पर 5100 डॉलर से 5120 डॉलर प्रति औंस और 1,61,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है. इन लेवल से ऊपर लगातार ब्रेक होने पर कीमतें इंटरनेशनल लेवल पर 5350 डॉलर और डोमेस्टिक लेवल पर 1,75,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती हैं.

AI समिट में शर्टलैस प्रदर्शन पर PM मोदी कांग्रेस पर जमकर बरसे…

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देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में इंडियन यूथ कांग्रेस के शर्टलैस प्रदर्शन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस पर जमकर बरसे. पीएम मोदी ने निशाना साधते हुए कहा, ‘कांग्रेस ने वैश्विक आयोजन को अपनी गंदी और नंगी राजनीति का अखाड़ा बना दिया.

देश की जनता जानती हैं कि आप पहले से ही नंगे हैं.’

क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने कहा, ‘देश में ही कुछ राजनीतिक दल हैं, जो भारत की सफलता को पचा नहीं पा रहे हैं. अभी आपने देखा कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा AI सम्मेलन हुआ. मेरठ के लोगों से पूछना चाहता हूं कि ये जो AI सम्मेलन हुआ, आपको गर्व हुआ कि नहीं हुआ?…पूरा देश गर्व से भर गया, लेकिन कांग्रेस और इसके इको सिस्टम ने क्या किया. कांग्रेस ने भारत के एक वैश्विक आयोजन को अपनी गंदी और नंगी राजनीति का अखाड़ा बना दिया. समारोह स्थल पर विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस के नेता कपड़े उतारकर पहुंच गए. मैं कांग्रेस वालों को पूछता हूं कि देश जानता है कि आप पहले से ही नंगे हो, फिर कपड़े उतारने की जरूरत क्यों पड़ी?’

कांग्रेस देश को ही बदमान करने में जुटी – पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘कांग्रेस नेताओं ने जो कुछ किया वो दिखाता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी वैचारिक रूप से कितनी दरिद्र हो गई है. कोई कल्पना नहीं कर सकता है. हम तो वो लोग हैं, जो गांव में किसी के यहां शादी होती है तो पूरा गांव उसे सफल बनाने में जी जान से जुट जाता है, ताकि मेहमान गांव की अच्छी छवि लेकर जाए, लेकिन कांग्रेस तो अपने ही देश को बदनाम करने में जुटी है.

‘ये लोग मेरी कब्र खोदना चाहते’

उन्होंने निशाना साधते हुए कहा, ‘कांग्रेस के नेताओं को मोदी से नफरत है. ये लोग मेरी कब्र खोदना चाहते हैं. मेरी मां को गाली देने से कोई परहेज नहीं है. उन्हें बीजेपी-एनडीए से विरोध है. आपकी राजनीति में यही करना जरूरी है. हम इसको भी सहन कर लेंगे. कांग्रेस को याद करना चाहिए था कि AI समिट बीजेपी का समारोह नहीं था और न ही बीजेपी का कोई नेता वहां मौजूद था. ये देश का कार्यक्रम था. कांग्रेस ने परसों सारी मर्यादाएं तोड़ दीं, पूरा देश इस कांग्रेस की रीति, नीति पर थू थू कर रहा है. इतनी बड़ी पार्टी के नेता लाजने के बजाए गाजते हैं, देश की बेइज्जती करने वालों का जयकारा कर रहे हैं.’

क्या है पूरा मामला?

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान शुक्रवार (20 फरवरी) को यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अंदर घुसकर प्रोटेस्ट किया और कथित बेरोजगारी, महंगाई और भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की थी. कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान अपनी शर्ट उताकर इंडिया एआई समिट के डिस्प्ले बोर्ड के सामने खड़े होकर नारेबाजी करते हुए तस्वीरें खिंचवाईं. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था.

26% से 50% और फिर 15%. एक साल कैसे चला अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ का खेल? ये है पूरी टाइमलाइन…

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अमेरिका और भारत के बीच चल रहे ‘टैरिफ युद्ध’ में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया के बाजार को चौंका दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त व्यापारिक नीतियों को वहां की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है.

इस कानूनी उथल-पुथल के बीच भारत के लिए राहत और चिंता की खबरें एक साथ आई हैं. शनिवार, 21 फरवरी 2026 को ट्रंप ने घोषणा की कि वे भारत सहित वैश्विक आयात पर अब 15% शुल्क लगाएंगे. यह फैसला उस वक्त आया जब सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की असीमित शक्तियों पर लगाम कस दी. एक समय पर 50% तक पहुंच चुका यह शुल्क अब 15% के स्तर पर आकर टिक गया है, लेकिन इसके पीछे की कहानी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया पूरा खेल

इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला रहा, जिसमें 63 के बहुमत से राष्ट्रपति के अधिकारों को सीमित कर दिया गया. अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) राष्ट्रपति को आपातकालीन शक्तियों के तहत मनमाने ढंग से वैश्विक टैरिफ थोपने की अनुमति नहीं देता. कोर्ट के इस फैसले ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए देश-विशिष्ट करों को अवैध घोषित कर दिया.

हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने भी हार नहीं मानी. कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 122 (Section 122) का सहारा लिया. इसके तहत वे बिना कांग्रेस की मंजूरी के 150 दिनों के लिए वैश्विक टैरिफ लागू कर सकते हैं. पहले उन्होंने इसे 10% रखने की बात कही थी, लेकिन कुछ ही समय बाद इसे बढ़ाकर 15% कर दिया गया.

26% से 50% और फिर 15%…. टैरिफ का ‘रोलर कोस्टर’

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर साल 2025 से 2026 तक काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. कभी टैरिफ बढ़ा, कभी घटा, कभी बातचीत तेज हुई तो कभी तनाव बढ़ गया.

13 फरवरी 2025- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तय किया कि दोनों देश मिलकर 2030 तक आपसी व्यापार को 500 अरब डॉलर से ज्यादा तक पहुंचाएंगे. इरादा साफ था, व्यापार बढ़ाना है. लेकिन जमीन पर हालात इतने आसान नहीं थे. दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर मतभेद बने रहे.

46 मार्च 2025- तनाव कम करने के लिए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल वॉशिंगटन डीसी पहुंचे. वहां उन्होंने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की. मकसद था – व्यापारिक मुद्दों को बातचीत से सुलझाना और टकराव से बचना.

2 अप्रैल 2025- अमेरिका ने भारतीय सामान पर कुल 26% टैरिफ लगा दिया. इसमें 10% सामान्य (बेसलाइन) ड्यूटी थी और 16% अतिरिक्त रेसिप्रोकल यानी जवाबी टैरिफ. यह फैसला सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि कई देशों पर लागू व्यापक टैरिफ नीति का हिस्सा था. लेकिन भारत के लिए यह बड़ा झटका माना गया.

9 अप्रैल 2025- सिर्फ एक हफ्ते बाद 16% वाला अतिरिक्त टैरिफ 90 दिनों के लिए रोक दिया गया. इससे भारत पर असर घटकर सिर्फ 10% रह गया. यह संकेत था कि बातचीत के दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं.

26 जून 2025- समयसीमा नजदीक आते ही भारत का एक प्रतिनिधिमंडल फिर अमेरिका पहुंचा. कोशिश यही थी कि मामला और न बिगड़े और किसी समझौते की जमीन तैयार हो सके.

31 जुलाई 2025- अमेरिका ने घोषणा की कि भारतीय वस्तुओं पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा, जो 7 अगस्त से लागू होना था. यह साफ इशारा था कि अमेरिका सख्त रुख अपनाए हुए है.

6 अगस्त 2025- इसके बाद हालात और गंभीर हो गए. अमेरिका ने भारत की रूसी तेल खरीद का हवाला देते हुए 25% अतिरिक्त टैरिफ और जोड़ दिया. कुल मिलाकर टैरिफ 50% तक पहुंच गया. यह 27 अगस्त 2025 से लागू हुआ और पूरे विवाद के दौरान यह सबसे ऊंचा स्तर था.

1517 अक्टूबर 2025- वॉशिंगटन में फिर कई दौर की बातचीत हुई. इस समय तक छह औपचारिक वार्ता दौर पूरे हो चुके थे. दोनों देश समाधान की कोशिश में थे, लेकिन सहमति तुरंत बनती नहीं दिख रही थी.

31 जनवरी 2026- वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है. इस बयान से संकेत मिला कि टैरिफ में कुछ राहत मिल सकती है.

2 फरवरी 2026- आखिरकार एक अंतरिम व्यापार समझौता हुआ. अमेरिका ने टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया. बदले में भारत ने कुछ चुनिंदा अमेरिकी सामान पर टैरिफ शून्य कर दिया. इसे दोनों देशों के बीच एक संतुलित कदम माना गया.

2021 फरवरी 2026- सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत पहले 10% का वैश्विक टैरिफ लागू किया. 21 फरवरी को उन्होंने घोषणा की कि यह दर बढ़ाकर 15% की जाएगी. हालांकि यह 150 दिन की कानूनी सीमा के अधीन रहेगा.

IDFC First Bank में 590 करोड़ का महाघोटाला, कर्मचारियों ने ही उड़ा लिए हरियाणा सरकार के पैसे, मचा हड़कंप!

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चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की एक प्रमुख शाखा में करोड़ों रुपये का महाघोटाला पकड़ा गया है.बैंक ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि उसकी इस शाखा में 590 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धोखाधड़ी हुई है.

सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस पूरे वित्तीय घपले का सीधा संबंध हरियाणा सरकार के खातों से है. इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस 590 करोड़ रुपये के बड़े मामले का खुलासा किसी जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि एक सामान्य सी लगने वाली प्रक्रिया के दौरान हुआ.

18 फरवरी 2026 के बाद से, हरियाणा सरकार के कुछ संबंधित संस्थाओं ने चंडीगढ़ स्थित इस बैंक शाखा से संपर्क साधना शुरू किया. उनका मुख्य उद्देश्य अपने आधिकारिक खातों को बंद करवाना और वहां जमा पूरी धनराशि को किसी अन्य बैंक में स्थानांतरित (ट्रांसफर) करना था. यह एक बेहद नियमित प्रक्रिया थी, लेकिन जब कागजी कार्रवाई आगे बढ़ी, तो एक बड़ा झोल सामने आया. सरकार द्वारा बताए गए बैलेंस और बैंक के सिस्टम में मौजूद असल बैलेंस के बीच भारी अंतर पाया गया. जिस पैसे को सुरक्षित माना जा रहा था, वह वहां था ही नहीं. कागजों और हकीकत की इसी विसंगति ने इस पूरे घोटाले की परतें खोल दीं.

बैंक का कड़ा एक्शन, 4 कर्मचारी सस्पेंड

घोटाले की भनक लगते ही आईडीएफसी फर्स्ट बैंक प्रबंधन तुरंत हरकत में आ गया है. इस गंभीर मामले में प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़ शाखा के चार संदिग्ध अधिकारियों को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है.

स्टॉक एक्सचेंज को दी गई अपनी आधिकारिक फाइलिंग में बैंक ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक यह निलंबन जारी रहेगा. प्रबंधन ने यह भी साफ कर दिया है कि इस धोखाधड़ी में शामिल किसी भी बैंक कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. उनके खिलाफ लागू कानूनों के तहत सख्त अनुशासनात्मक, दीवानी (सिविल) और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी. स्थानीय पुलिस प्रशासन के पास भी औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी गई है.

इसके साथ ही, बैंक ने उन अन्य बैंकों को भी अलर्ट भेजा है जहां यह पैसा ट्रांसफर हुआ था. बैंक ने मांग की है कि इन संदिग्ध खातों के बैलेंस पर तुरंत रोक (lien mark) लगाई जाए ताकि पैसे को आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सके. मामले की तह तक जाने और पारदर्शी जांच के लिए एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी से फोरेंसिक ऑडिट भी करवाया जा रहा है.

रिफंड के नाम पर ‘डिजिटल डकैती’: 1.5 लाख की ठगी ने उड़ाए होश, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की बड़ी चेतावनी…

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हाल ही में एक टैक्सपेयर को एक फेक डिले रिफंड मैसेज का जवाब देने के बाद 1.5 लाख रुपये का नुकसान हुआ, जिसके बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने नई चेतावनी दी है. यह अलर्ट ऐसे समय में आया है जब पिछले एक साल से कई टैक्सपेयर रिफंड में देरी को लेकर पहले से ही परेशान हैं – इस चिंता का फायदा धोखेबाज अब फिशिंग मैसेज और नकली पोर्टल के जरिए उठा रहे हैं.

पिछले एक साल से, रिफंड की टाइमलाइन टैक्सपेयर के बीच चर्चा का विषय रही है. कई लोगों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की कि जल्दी फाइल करने के बावजूद रिफंड मिलने में देरी हो रही है.

जवाब में, सरकार ने कहा कि रिफंड सही वेरिफिकेशन और डेटा के मैचिंग के बाद प्रोसेस किया जाता है, खासकर जहां गड़बड़ियों को फ्लैग किया जाता है. अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि ज़्यादातर रिफंड हफ्तों के अंदर जारी कर दिए जाते हैं, लेकिन मिसमैच, स्क्रूटनी या पेंडिंग वेरिफिकेशन वाले मामलों में ज़्यादा समय लग सकता है. देरी से रिफंड को लेकर इसी चिंता का फायदा अब स्कैमर्स उठा रहे हैं.

कैसे हो रहा है स्कैम

टैक्स एडवाइजरी प्लेटफ़ॉर्म टैक्सबडी के X पर एक सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, फ्रॉड आमतौर पर एक मैसेज से शुरू होता है जिसमें दावा किया जाता है कि आपका रिफंड पेंडिंग है और उसे तुरंत वेरिफिकेशन की जरूरत है. मैसेज में एक लिंक होता है जो ऑफिशियल लगता है.

आपको इनकम टैक्स पोर्टल जैसी दिखने वाली एक नकली वेबसाइट पर रीडायरेक्ट कर दिया जाता है. आपसे PAN, लॉगिन ID और पासवर्ड डालने के लिए कहा जाता है. वेरिफिकेशन के नाम पर एक OTP मांगा जाता है. कुछ मामलों में, बैंक डिटेल्स भी मांगी जाती हैं. जैसे ही ये डिटेल्स शेयर की जाती हैं, फ्रॉड करने वाले आपके अकाउंट का एक्सेस पा लेते हैं. हाल ही में सामने आए मामले में, टैक्सपेयर को 1.5 लाख रुपए का नुकसान हुआ.

टैक्सपेयर इसके झांसे में क्यों आ रहे हैं?

रिफंड से जुड़ी बातचीत हमेशा ध्यान खींचती है. जब कोई मैसेज डिले रिफंड कहता है या चेतावनी देता है कि रकम लैप्स हो सकती है, तो यह अर्जेंटनेस पैदा करता है. धोखेबाज़ जानबूझकर डराने वाली भाषा, आखिरी रिमाइंडर टोन, रिफंड कैंसल करने की धमकी, तुरंत एक्शन लेने के लिए कहना, पैटर्न आसान है जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं. जिसकी वजह से घबराहट में जल्दी क्लिक होते हैं, और जल्दी ने से कॉम्प्रोमाइज होता है.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट क्या नहीं करता?

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने साफ़ किया है कि वह SMS से रिफंड वेरिफिकेशन लिंक नहीं भेजता, फोन कॉल या मैसेज पर OTP नहीं मांगता, रैंडम ईमेल से पासवर्ड या बैंकिंग डिटेल्स नहीं मांगता. रिफंड स्टेटस सिर्फ ऑफिशियल इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर सीधे लॉग इन करके ही चेक किया जा सकता है. टैक्सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी एम्बेडेड लिंक पर ने के बजाय खुद वेबसाइट का एड्रेस टाइप करें.

आपको क्या करना चाहिए

स्टेटस चेक करने के लिए सीधे ऑफिशियल पोर्टल पर लॉग इन करें

अर्जेंट वेरिफिकेशन मांगने वाले मैसेज को इग्नोर करें

OTP, पासवर्ड या लॉगिन क्रेडेंशियल कभी शेयर न करें

सस्पीशियस मैसेज की तुरंत रिपोर्ट करें

आप फिशिंग की कोशिशों की रिपोर्ट डिपार्टमेंट के ऑफिशियल ग्रीवांस चैनल और इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) को भी कर सकते हैं ताकि आगे फ्रॉड को रोकने में मदद मिल सके.

CG: भाजपा केंद्रीय संगठन की नई टीम बनाने की कवायद तेज, छत्तीसगढ़ के नेताओं को मिल सकती है जगह, उम्मीदें व हलचल बढ़ी…

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छत्तीसगढ़ के नेताओं को जगह दे सकते हैं। साथ ही राजनीतिक और सामाजिक समीकरण का भी विशेष ख्याल रखा जाएगा। इसके अलावा जिन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव होंगे वहां के लिए विशेष समीकरण बिठाते हुए वहां के वरिष्ठ नेताओं को केंद्रीय टीम में जगह दी जाएगी।

भाजपा केंद्रीय संगठन की नई टीम बनाने की कवायद तेजी से चल रही है। नितिन नबीन के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नई कार्यकारिणी के लिए शीर्ष नेतृत्व में मंथन चल रहा है। पिछली बार की तरह इस बार भी छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेताओं को केंद्रीय टीम में प्रमुख पदों पर जगह मिल सकती है। वैसे भी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का छत्तीसगढ़ से गहरा संबंध रहा है। इसलिए वे अपनी पसंद के हिसाब से ही छत्तीसगढ़ के नेताओं को जगह दे सकते हैं। साथ ही राजनीतिक और सामाजिक समीकरण का भी विशेष ख्याल रखा जाएगा। इसके अलावा जिन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव होंगे वहां के लिए विशेष समीकरण बिठाते हुए वहां के वरिष्ठ नेताओं को केंद्रीय टीम में जगह दी जाएगी।

इस बार बढ़ाया जा सकता है राज्य का प्रतिनिधित्व

भाजपा के सूत्रों के अनुसार नितिन नबीन की नई टीम में इस बार छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है। युवा वर्ग से राजनीतिक और सामाजिक पकड़ वाले नेता केंद्रीय टीम में शामिल किए जा सकते हैं। वैसे भी भाजपा बहुत चौंकाने वाले फैसले लेती है। भाजपा शीर्ष नेतृत्व छत्तीसगढ़ के लिहाज से युवा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को ज्यादा तवज्जो दे रहा है। इसलिए केंद्रीय टीम में भी युवा नेताओं को जगह मिलने की उम्मीद की जा रही है।

अभी ये हैं केंद्रीय टीम में शामिल

बता दें कि छत्तीसगढ़ से अभी दो वरिष्ठ नेता सरोज पांडेय और लता उसेंडी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में शामिल किया गया है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अजय चंद्राकर,अरुण साव और धरमलाल कौशिक के भी नाम हैं। जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव सिंह और संगठन महामंत्री पवन साय पदेन राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बने रहेंगे। अब देखना यही है कि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में लता उसेंडी और सरोज पांडेय का नाम यथावत रहता है या नहीं या शीर्ष नेतृत्व कोई चौंकाने वाला नया नाम शामिल करता है।

मिल सकता है प्रदेश प्रभारी भी नया

नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद प्रदेश प्रभारी के लिए कवायद की जा रही है। बता दें कि छत्तीसगढ़ को खुद नितिन नबीन ही देखते रहे हैं। अभी क्षेत्रीय संगठन मंत्री के रूप में अजय जामवाल छत्तीसगढ़ का कामकाज देख रहे हैं। उनके पास मध्य प्रदेश का भी प्रभार है। नई टीम के साथ छत्तीसगढ़ को नया प्रदेश प्रभारी भी मिल सकता है। प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति के वक्त छत्तीसगढ़ के आगामी विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव को भी ध्यान में रखा जाएगा।