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छत्तीसगढ़ के सबसे हाई प्रोफाइल सीट कहे जाने वाले बस्तर लोकसभा सीट में बीजेपी के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 अप्रैल को बस्तर पहुंच रहे हैं.

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छत्तीसगढ़ : बस्तर लोकसभा सीट में प्रथम चरण में 19 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं. ऐसे में बीजेपी-कांग्रेस दोनों ही पार्टी के बड़े नेता जोर-जोर से चुनावी प्रचार में जुट गए हैं…

”दोनों ही प्रत्याशी बस्तर लोकसभा के अंतर्गत आने वाले 8 विधानसभा का धुंआधार दौरा कर रहे हैं और जगह-जगह आमसभा भी कर रहे हैं.”

छत्तीसगढ़ के सबसे हाई प्रोफाइल सीट कहे जाने वाले बस्तर लोकसभा सीट में बीजेपी के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 अप्रैल को बस्तर पहुंच रहे हैं.

”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बस्तर जिले के छोटे आमाबाल गांव में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे. इसके लिए बीजेपी के साथ-साथ जिला प्रशासन और बस्तर पुलिस ने भी तैयारी शुरू कर दी है.”

”बताया जा रहा है आमाबाल गांव बस्तर संभाग के 6 विधानसभा का बॉर्डर एरिया है. इस वजह से इस सभा में पूरे 6 विधानसभा के जनता को जुटाने का प्रयास बीजेपी द्वारा किया जा रहा है, पीएम मोदी छोटे आमाबाल में करीब 1 घंटे समय बिताएंगे और यहां चुनावी सभा को संबोधित करेंगे.”

”बीजेपी के छत्तीसगढ़ चुनाव प्रभारी नितिन नवीन ने 8 अप्रैल को प्रधानमंत्री के बस्तर दौरे को देखते हुए छोटे आमाबाल गांव का दौरा किया और यहां होने वाले पीएम सभा स्थल की तैयारी का जायजा लिया. उनके साथ प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप भी मौजूद रहे.”

”छत्तीसगढ़ चुनाव प्रभारी नीतिन नवीन ने बताया कि लोकसभा चुनाव के घोषणा के बाद प्रधानमंत्री का यह पहला छत्तीसगढ़ दौरा है और छत्तीसगढ़ में एकमात्र बस्तर लोकसभा सीट में प्रथम चरण में 19 अप्रैल को मतदान होना है. ऐसे में चुनावी प्रचार में खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बस्तर पहुंच रहे हैं.”

”नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री के सभा को देखते हुए लाखों लोगों की भीड़ जुटाने की तैयारी की जा रही है और बस्तर लोकसभा सीट के पूरे 8 विधानसभा के लोगों को इस सभा में जुटाने की बीजेपी की तैयारी है.”

”इधर माना जा रहा है कि छोटे आमाबाल गांव में प्रधानमंत्री की सभा करने के पीछे बीजेपी द्वारा आदिवासी वोटरों को साधने की कोशिश की जा रही है. छोटे आमाबाल से लगे बस्तर संभाग के 8 में से 6 विधानसभा में आदिवासी वोटरों की संख्या ज्यादा है, इस वजह से इस बार इस इलाके को पीएम मोदी के चुनावी सभा के लिए चुना गया है.”

प्रधानमंत्री के बस्तर दौरे को देखते हुए बस्तर पुलिस ने भी सुरक्षा के तगड़े इंतजाम करने की तैयारी में जुट गई है,

”बस्तर के आईजी सुंदरराज पी का कहना है कि प्रधानमंत्री के बस्तर दौरा और आमाबाल गांव में चुनावी सभा को देखते हुए कोंडागांव, दंतेवाड़ा, बस्तर और नारायणपुर जिले के बॉर्डर पर साथ ही सभा स्थल के पूरे 5 किलोमीटर के दायरे तक चप्पे चप्पे पर जवानों की तैनाती की जाएगी. इसके अलावा ड्रोन से भी पूरे इलाके में नजर रखी जाएगी. पीएम के प्रवास को देखते हुए हजारो की संख्या में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी.”

मोदी-शाह युग की शुरुआत के बाद मुसलमानों के संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रणनीति…

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भाजपा का संकेत मुसलमानों में पैठ बनाने के लिए पार्टी दशकों से चली आ रही प्रतीकात्मक राजनीति का सहारा नहीं लेगी. इस वर्ग को उन मुश्किल सीटों पर अपनी प्रासंगिकता साबित करनी होगी, जहां उनके वोट निर्णायक स्थिति में हैं.

भाजपा ने प्रभाव वाले राज्यों में मुसलमानों पर दांव लगाने से परहेज बरतने का स्पष्ट संदेश दिया है

400 से अधिक उम्मीदवार घोषित कर चुकी है भाजपा

आम चुनाव के लिए भाजपा अब तक 405 सीटों पर उम्मीदवार की घोषणा कर चुकी है. केरल की मल्लपुरम सीट एकमात्र ऐसी सीट है, जहां से पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवार अब्दुल सलाम को उतारा है. कभी पार्टी का मुस्लिम चेहरा रहे शाहनवाज हुसैन, मुख्तार अब्बास नकवी जैसे नेताओं को उम्मीदवारों की सूची में जगह नहीं मिली है. वह भी तब, जब देश की 65 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की भागीदारी 30 से 65 फीसदी, तो करीब 35 सीटों पर प्रभावशाली उपस्थिति है.

मुसलमानों के संदर्भ में बदली है भाजपा की रणनीति

दरअसल, बीते एक दशक में पार्टी में मोदी-शाह युग की शुरुआत के बाद मुसलमानों के संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रणनीति में बड़ा बदलाव आया है. पार्टी अब वोट की कीमत पर ही इस समुदाय को टिकट देना चाहती है. दो साल पूर्व जब हैदराबाद में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पीएम नरेंद्र मोदी ने पसमांदा मुसलमानों तक पहुंच बनाने का आह्वान किया, तब एकबारगी लगा कि इस बार पार्टी प्रभाव वाले राज्यों में इस वर्ग मौका देगी.

  • 100 सीटों पर मुस्लिमों का व्यापक असर
  • 65 सीटों पर 30 से 65 फीसदी मुस्लिम आबादी
  • 14 सीटें यूपी की तो 13 सीटें पश्चिम बंगाल की
  • 8 केरल, 7 असम, 5 जम्मू-कश्मीर, 4 बिहार, 3 मध्यप्रदेश, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, महाराष्ट्र, तेलंगाना की 2-2 और तमिलनाडु की एक सीट

भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने आयोजित किए कई कार्यक्रम

इस आह्वान के बाद पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने इस वर्ग में पहुंच के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश में भाईचारा, सूफी सम्मेलन सहित कई कार्यक्रमों का आयोजन किया था. इस दौरान जब करीब 18 लाख मोदी मित्र बनाये गये, तब उम्मीदवारी में मुसलमानों को मौका मिलने की धारणा को मजबूती मिली थी.

कोशिश तो खूब हुई, पर नहीं बनी मजबूत पैठ

साल 1980 में स्थापना के बाद पार्टी ने मुस्लिम वर्ग के कई चेहरों को महत्व देकर इस वर्ग में पैठ बनाने की कोशिश की. इस वर्ग के नेताओं को बार-बार राज्यसभा और सत्ता मिलने पर सरकार में मौका दिया गया. बावजूद इसके पार्टी इन नेताओं के जरिये इस वर्ग में अपनी पैठ मजबूत करने में नाकाम रही.

पहली बार भाजपा मंत्रिमंडल में दो मुस्लिम मंत्री बनाए

यहां तक कि साल 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आयी, तब पहली बार पार्टी ने इस समुदाय के दो नेताओं एमजे अकबर और नजमा हेपतुल्ला को मंत्रिमंडल में जगह दी. हालांकि, पार्टी के सात मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीतने में असफल रहे थे.

2019 में पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शून्य प्रतिनिधित्व

साल 2019 के आम चुनाव में भी पार्टी ने मुस्लिम बिरादरी को छह टिकट दिये. सभी उम्मीदवारों की हार के बाद मुख्तार अब्बास नकवी को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया. हालांकि बदली रणनीति का अहसास तब हुआ, जब नकवी को राज्यसभा का नया कार्यकाल नहीं मिलने पर आजाद भारत में पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया.

पैटर्न को ऐसे समझें

  • भाजपा ने 2019 में 6 और 2014 में 7 मुस्लिमों को टिकट दिया, पर एक भी टिकट यूपी, बिहार या पार्टी के प्रभाव वाले राज्यों में नहीं दिये गये.
  • ज्यादातर पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर और लक्षद्वीप से मुस्लिम उम्मीदवार उतारे, क्योंकि यहां इस समुदाय के वोट निर्णायक हैं.
  • संकेत साफ है, भाजपा में आने के लिए अब इस समुदाय के नेताओं को अपने समुदाय में पैठ साबित करनी होगी.

भाजपा में मुस्लिम चेहरे

नयी दिल्ली में सिकंदर बख्त जनता पार्टी के टिकट पर एक बार चांदनी चौक से लोकसभा का चुनाव जीते. भाजपा की स्थापना के बाद इन्हें कई बार राज्यसभा भेजा गया. बख्त राज्यसभा में पार्टी के नेता भी रहे थे.

1977 और 1989 में चुनाव जीते आरिफ बेग

उन्हीं की तरह आरिफ बेग 1977 और 1989 में लोकसभा चुनाव जीते. कई बार राज्यसभा सदस्य और मंत्री रहे मुख्तार अब्बास नकवी बस एक बार लोकसभा चुनाव जीते. सैयद शाहनवाज हुसैन इकलौते मुस्लिम चेहरा हैं, जिन्होंने तीन बार लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है.

सिकंदर बख्त, शाहनवाज हुसैन और नकवी कई बार बने मंत्री

भाजपा के सत्ता में आने पर बख्त, शाहनवाज और नकवी कई बार मंत्री भी बने. इसके अतिरिक्त एमजे अकबर और नजमा हेपतुल्ला भी मंत्रिमंडल में रह चुके हैं. बख्त और नकवी ने संगठन में भी उच्च पद संभाला.

Table of Contents

  • 400 से अधिक उम्मीदवार घोषित कर चुकी है भाजपा
  • मुसलमानों के संदर्भ में बदली है भाजपा की रणनीति
  • भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने आयोजित किए कई कार्यक्रम
  • कोशिश तो खूब हुई, पर नहीं बनी मजबूत पैठ
  • पहली बार भाजपा मंत्रिमंडल में दो मुस्लिम मंत्री बनाए
  • 2019 में पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शून्य प्रतिनिधित्व
  • पैटर्न को ऐसे समझें
  • भाजपा में मुस्लिम चेहरे
  • 1977 और 1989 में चुनाव जीते आरिफ बेग
  • सिकंदर बख्त, शाहनवाज हुसैन और नकवी कई बार बने मंत्री

छत्तीसगढ़ : अंतरराष्ट्रीय बाजार के प्रभाव से सोने-चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी

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छत्तीसगढ़ : सोने के बाद चांदी ने रचा इतिहास, पहली बार सिल्‍वर 78 हजार रुपये किलो पार, अंतरराष्ट्रीय बाजार के प्रभाव से सोने-चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का क्रम जारी है। सोने के बाद अब चांदी की कीमत ने भी इतिहास रच दिया।

रायपुर में 1,350 रुपये की उछाल के साथ चांदी पहली बार 78,200 रुपये प्रति किलो हो गई।

सोना 850 रुपये महंगा होकर 71,350 रुपये प्रति दस ग्राम (स्टैंडर्ड) । इससे पहले एक अप्रैल को सोना उच्चतम स्तर 77,400 रुपये पर पहुंच गया था, हालांकि कुछ ही देर में कीमत में गिरावट आ गई थी।

सराफा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में दोनों कीमती धातुओं में तेजी के ही आसार हैं। सोने-चांदी की महंगाई के चलते इन दिनों सराफा बाजार से ग्राहकी भी  कीमतों को लेकर टेंसन बढ़ने लगी है।

कारोबारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं को खरीदारी के लिए कीमतों में गिरावट का इंतजार है। कीमतों में तेजी के कारण इन दिनों बिकवाली जोर पकड़ती जा रही है। सराफा कारोबारियों के साथ ही ज्वेलर्स कंपनियों द्वारा भी अगले महीने पड़ने वाले अक्षय तृतीया को लेकर योजनाएं बनाई जा रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा चुनाव के लिए ‘घर-घर गारंटी’ अभियान की शुरुआत की…

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”खरगे ने ‘घर-घर गारंटी’ अभियान की शुरुआत की, कहा- हमारी सरकार हमेशा गरीबों के लिए काम करेगी”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा चुनाव के लिए बुधवार को उत्तर पूर्वी दिल्ली से पार्टी के ‘घर-घर गारंटी’ अभियान की शुरुआत की और दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘गारंटी’ लोगों को नहीं मिली, लेकिन उनकी पार्टी जो गारंटी दे रही है, उन पर वह अमल करेगी।

taiwan Earthquake: इमारतें गिरीं, बिजली गुल, 7.5 की तीव्रता वाले झटकों से हिला ताइवान, 25 साल में आया सबसे भीषण भूकंप

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taiwan Earthquake: इमारतें गिरीं, बिजली गुल, 7.5 की तीव्रता वाले झटकों से हिला ताइवान, 25 साल में आया सबसे भीषण भूकंप

Japan Tsunami Alert: ताइवान की राजधानी ताइपे में बुधवार (3 अप्रैल) सुबह भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.5 मापी गई, जो खतरनाक कैटेगरी में आती है.

”Independent Artist Day 2024: क्यों मनाया जाता है स्वतंत्र कलाकार दिवस? जानें इस दिन का इतिहास”

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”Independent Artist Day 2024: क्यों मनाया जाता है स्वतंत्र कलाकार दिवस? जानें इस दिन का इतिहास”

Independent Artist Day 2024: अपनी कला के माध्यम से जो कहना चाहते हैं, उसे स्वतंत्र रूप से करना स्वतंत्र कलाकार या इन्डिपेन्डेन्स आर्टिस्ट कहलाता है. इसमें किसी और की राय या व्यावसायिक दबावों से बंधे रहने की जरूरत नहीं है.

Arvind Kejriwal Arrest: दिल्ली की मुख्यमंत्री सीएम केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली सरकार के सभी मंत्री, विधायक, सांसद 7 अप्रैल को जंतर-मंतर पर करेंगे ‘भूख हड़ताल…

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Arvind Kejriwal Arrest: दिल्ली की मुख्यमंत्री सीएम केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली सरकार के सभी मंत्री, विधायक, सांसद 7 अप्रैल को जंतर-मंतर पर सामूहिक उपवास रखेंगे. वहीं इसको लेकर दिल्ली सरकार के मंत्री और AAP नेता गोपाल राय ने लोगों से अपील की है कि जो लोग CM अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ हैं और लोकतंत्र को बचाना चाहते हैं, वे भी अपने घरों, गांवों, ब्लॉकों पर ‘सामूहिक उपवास’ कर सकते हैं.

Ramadan 2024 Day 23; रमजान का 23वां रोजा 03 अप्रैल, नेकी-ईमान के साथ रोजा रखने का कारवां अब तेईसवें रोजे तक…

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Ramadan 2024 Day 23; रमजान का 23वां रोजा 03 अप्रैल को, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद समेत अन्य शहरों में जानें सहरी-इफ्तार का समय…

पाक-ए-माह रमजान का बाइसवां रोजा 2 अप्रैल को पूरा हुआ. अब रोजेदार बुधवार 03 अप्रैल को रमजान का तेईसवां रोजा रखेंगे. बता दें कि मुल्क भारत में मुबारक माह रमजान की शुरुआत 11 मार्च को हुई थी और रोजेदार 12 मार्च से लगातार रोजा रख रहे हैं.”

”नेकी-ईमान के साथ रोजा रखने का कारवां अब तेईसवें रोजे तक पहुंच चुका है.”

बुधवार को रमजान का 23वां रोजा

”इस्लाम के पवित्र किताब कुरआने पाक की सूरह हूद की 23वीं अध्याय में जाहिर किया गया है कि, जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए और अपने परवरदिगार के आगे आजिजी करे, उन्हें साहिबे जन्नत नसीब होती है.”

”साथ ही ऐसे लोग हमेशा जन्नत में रहेंगे. वहीं कुरआने पाक की सूरह लैल की 5,6 और 7वें आयत में अल्लाह का आदेश है, तो जिनसे दिया और परहेजगारी की और नेक बात को सच जाना, उसे आसान तरीके सी तौफीक मिलेगी.”

”रमजान का 23वां रोजा अल्लाह को याद करने और दोजख यानी जहन्नुम की आग से निजात पाने के लिए अल्लाह से फरियाद है.”

”रोजा रखने की प्रकिया में जो चीज सबसे ज्यादा जरूरी होती है, वह है वक्त पर सहरी और इफ्तार करना. क्योंकि तय समय पर सहरी और इफ्तर करने से ही रोजा का सवाब मिलता है और रोजा मुक्कमल होता है.”

”इसलिए माह-ए-रमजान में रोजेदारों को सभी नियमों का पालन करते हुए इस बात’ का भी ध्यान रखना चाहिए कि, हर दिन सही समय पर सहरी और इफ्तार करें.”

”लेकिन रमजान के अलग-अलग दिनों और अलग-अलग शहरों में सहरी-इफ्तार के वक्त में अंतर होता है. आइये जानते हैं रमजान के 23वें रोजे यानी बुधवार, 03 अप्रैल को मुंबई, दिल्ली, आगरा, लखनऊ, नागपुर, कोलकाता, हैदराबाद, जयपुर, पटना और रांची समेत अन्य शहरों में क्या है शहरी-इफ्तार का समय -”

रोजा 03 अप्रैल 2024, सहरी-इफ्तार का समय (Ramadan 2024 Sehri-Iftar Timing 3 April in India)
शहर का नाम (City Name) सहरी का समय (Sehri Time) इफ्तार का समय (Iftar Time)
मुंबई (Mumbai) सुबह 05:17 शाम 06:54
दिल्ली (Delhi) सुबह 04:48 शाम 06:43
आगरा (Agra) सुबह 04:47 शाम 06:39
लखनऊ (Lucknow) सुबह 04:36 शाम 06:26
जयपुर (Jaipur) सुबह 04:56 शाम 06:49
कोलकाता (Kolkata) सुबह 04:11 शाम 05:54
हैदराबाद (Hyderabad) सुबह 04:58 शाम 06:45
मेरठ (Meerut) सुबह 04:46 शाम 06:41
कानपुर (Kanpur) सुबह 04:38 शाम 06:29
बेंगलुरु (Bengaluru) सुबह 05:03 शाम 06:36
अहमदाबाद(Ahmedabad) सुबह 05:14 शाम 06:57
चेन्नई (Chennai) सुबह 04:52 शाम 06:22
पटना (Patna) सुबह 04:20 शाम 06:08
रांची (Ranchi) सुबह 04:22 शाम 06:09

 

सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर हमला, करीब आधा दर्जन लोगों के मारे जाने की खबर, हमले का जिम्मेदार इजरायल को माना जा रहा है…

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सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर सोमवार यानी 1 अप्रैल को हमला हुआ है. इसमें करीब आधा दर्जन लोगों के मारे जाने की खबर है और हमले का जिम्मेदार इजरायल को माना जा रहा है.

हालांकि, इजरायल की ओर से कहा गया कि है कि वो विदेशी मीडिया की खबरों पर कुछ नहीं बोलेगा, वहीं ईरान ने कहा है कि वो सोचेगा कि उसका जवाब उसे किस प्रकार से देना है.

सीरिया, ईरान और इजरायल को देखे तो एक तरह से ये त्रिकोण है जो सभ्यताओं के संघर्ष की बात है, उसके हिसाब से ये एक युद्ध की तरह है, जो इजरायल के बनने के समय से, 1948 के साल से ही, गोल्डा मायर के शासनकाल से ही जारी है.

युद्ध अब पारंपरिक नहीं रहे : ”आजकल जो युद्ध की नीति है वो पारंपरिक और औपचारिक नहीं होता, बल्कि अनौपचारिक होता है. पिछले दल सालों में विश्व के राजनीतिक पटल को देखें तो पाएंगे कि विभिन्न देशों के आपसी संबंधों में काफी कुछ बदलाव आए हैं.

भारत, इजरायल और अमेरिका की एक त्रिकोणीय एकता है और अंतरराष्ट्रीय वर्चस्व को बढ़ावा देने में काम करते हैं. अमेरिका ने सुलेमानी को अपने टॉम हॉक मिसाइल से खत्म किया तो सोचा जा रहा था कि ईरान इसमें हस्तक्षेप करेगा और ईरान करता भी था. वह कोई बड़े हमले नहीं करता था, बल्कि इराक में अमेरिका के अड्डों पर, छोटे-छोटे बमों से हमला करता था.

अभी जो इजरायल ने दमिश्क पर मिसाइल से अटैक किया है वो एक तरह से डेटरेंस (पूर्व-आक्रमण) ही है ताकि ईरान को किसी बड़ी सैन्य कार्रवाई करने से डराया जा सके, रोका जा सके. जो ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड के के दो सदस्यों की मौत हुई है, उनके बारे में ईरान जरूर कुछ न कुछ करेगा. लेकिन एक तरह से यह डेटरेंट ही है, यह समझ में आता है.

जवाबी कार्रवाई कर सकता है ईरान : इजरायल बीते कुछ समय से सीरिया में दर्जनों हमले कर रहा था और उसकी वो जिम्मेदारी भी लेता रहा है. गाजा में हमास का युद्ध शुरू हुआ, तब से ईरान के समर्थन से हिजबुल्ला ने लेबनान और सीरिया से लगे इजरायल के सीमाई इलाके में हमले किए.

एक तरह से गाजा को इजरायल ने समतल कर दिया है तो क्या वो इस युद्ध को ईरान की ओर ले जा रहा है?इस मामले को अमेरिका के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर के बयान के नजरिए से देखें तो उनका कहना है कि ये एक तरह का डेटरेंट है, लेकिन कहीं इसका बढ़ावा इजरायल और हमास के बीच ना हो जाए.

ईरान अगर मिसाइल और ड्रोन अटैक के बाद कहीं अपने आप को शामिल करता है तो उसे बदले की कार्रवाई के तौर पर देखा जा सकता है. अभी हमास में जो युद्ध है या सीरिया में जो कुर्द और बशीर के बीच में तकरार है, तो लगता था कि इन बड़े मामलों में अमेरिका, ईरान या इजरायल इसमें हस्तक्षेप करेगा.

देखा जाए तो ये एक तरह से चेतावनी है, जिसमें इजरायल ने अपनी सैन्य ताकत को दिखाया है. इसकी जवाबी कार्रवाई कहीं बम अटैक, ड्रोन अटैक आदि भी हो सकती है.

इजरायल दरअसल ईरान की नब्ज जांच रहा है. जिस तरह अमेरिका और विश्व के जहाजों को जिस तरह से हूती समुद्री लुटेरे आक्रमण कर नुकसान पहुंचा रहे हैं. अगर ये पहले की बात होती तो लगता कि अमेरिका इस पर कार्रवाई करता, लेकिन आज के समय में अनौपचारिक और हाइब्रिड वॉर में ऐसा नहीं होता.

यह एक तरह से ईरान को धमकी भी है. ईरान कितना बड़ा और धमाकेदार जवाब देगा इसके बारे में भी इजरायल सोच रहा होगा. इस्लामिक दुनिया के नेतृत्व के लिए सऊदी अरब और ईरान के रिश्ते प्रतिद्वंद्वी के तौर पर रहे हैं.

इजरायल ने कतर, सउदी अरब और यूएई के साथ रिश्ते बना लिए है. ईरान एक तरह से अलग प्रकार का राष्ट्र है. जिस तरह से इराक में सद्दाम हुसैन वैश्विक आतंक को बढ़ावा देते थे, उसी प्रकार ईरान अभी के समय में वैश्विक आतंकवाद का प्रायोजक है, जिसकी रोकथाम का प्रयास अमेरिका लगातार करता रहा है और इजरायल अपनी संप्रभुता और आत्मरक्षा की दृष्टि से करता है. लेकिन यहां दोनों अलग बातें है अमेरिका वर्चस्व के लिए और इजरायल अस्तित्व के लिए करता है.

अमेरिका अपना रहा है दोहरी नीति  : अमेरिका को ये बात पता है और अब वो कह रहा है कि इजरायल को संभलना होगा. पिछली बार यूएन में मामला आया तो अमेरिका ने वीटो भी नहीं किया. अमेरिका अभी आंख मूदे हुए है.

पश्चिम एशिया की राजनीति में अमेरिका अपना एक तरह से वर्चस्व चाह रहा है. अभी अमेरिका के वर्चस्व और सत्ता के प्रभाव को को चीन, रूस, ईरान ने कमजोर कर दिया है. अब अमेरिका का पहले जैसा वर्चस्व नहीं रहा है.

लेकिन फिर भी अगर इजरायल, यूएई, कतर और सऊदी अरब के पीछे से अमेरिका सपोर्ट हट जाए तो इन देशों के पास इतनी संपन्नता नहीं है कि रूस, चीन और ईरान को अकेले देख सकें.

विश्व स्तर पर राय लेकिन इजरायल के खिलाफ बनते जा रही है. अब तक अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने भी कहा है कि अब इजरायल को राफा में नहीं जाना चाहिए.

गाजा पट्टी में जो कुछ हुआ वहीं तक मामले को सीमित कर देना चाहिए. कतर और दोहा में कई बार बात हो चुकी है. हमास और इजरायल के डिप्लोमेट्स ने अहिंसा को नकार दिया है. एक तरह से अमेरिका इजरायल को सपोर्ट कर भी रहा है और नहीं भी कर रहा है, वो दोहरी नीति अपना रहा है.

इसी के कारण जो वैश्विक स्तर पर अमेरिका को सपोर्ट पहले मिलता था अब वो नहीं मिल रहा है. हालांकि, युद्ध का विस्तार होने के आसार कम हैं. हो सकता है ये एक मात्र धमकी हो. नेतन्याहू ने एक रेड लाइन खींची थी, और उस समय कहा था कि अगर कोई राष्ट्र उस लाइन को क्रॉस करता है तो इजरायल अपने फायर पावर का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र हो जाएगा.

हालांकि इस घटना पर बात करें तो युद्ध के आसार नहीं बन रहे हैं. हिजबुल्ला और ईरान या दमिश्क की ओर से भी माना जा सकता है कि इजरायल पर कोई छोटा अटैक करेंगे. ये अटैक इजरायल या इराक या अमेरिका के किसी डिपो पर हो सकता है.

लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने उम्मीदवारों की एक और सूची जारी कर दी है. कांग्रेस की इस नई लिस्ट में 17 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं.

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लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने उम्मीदवारों की एक और सूची जारी कर दी है. कांग्रेस की इस नई लिस्ट में 17 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं.

”कांग्रेस की तरफ से जारी इस लिस्ट में बिहार, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और बंगाल के उम्मीदवारों के नाम हैं.”

”कांग्रेस वाईएस शर्मिला रेड्डी को आंध्रप्रदेश के कडपा से मैदान में उतारा है. ”

”तारिक अनवर को एक बार फिर बिहार के कटिहार से टिकट दिया गया है. पार्टी ने बिहार में अपने एकमात्र सांसद मोहम्मद जावेद पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए किशनगंज से मैदान में उतारा है. भागलपुर से अजीत शर्मा को टिकट दिया है.”

”कांग्रेस बिहार की कुल 40 लोकसभा सीटों में से 9 पर चुनाव लड़ रही है. वहीं, 26 सीट पर उसकी सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और 5 सीट पर वाम दल चुनाव लड़ रहे हैं.”

”बिहार में गठजोड़ के तहत कांग्रेस के हिस्से में 9 सीट- किशनगंज, कटिहार, पटना साहिब, भागलपुर, सासाराम, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पश्चिम चंपारण और महाराजगंज आई हैं.”

पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू को आंध्र प्रदेश की काकीनाड़ा लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया है. ”शर्मिला रेड्डी को आंध्र प्रदेश के कडप्पा से उम्मीदवार बनाया गया है.”

”ओडिशा के कोरापुट से वर्तमान सांसद सप्तगिरि उलाका को फिर से उम्मीदवार बनाया गया है. पार्टी अब तक कुल 231 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है.” इससे पहले कांग्रेस ने 10 अलग-अलग सूचियों में 214 उम्मीदवार घोषित किए थे.”

देश में 18 वीं लोकसभा के लिए चुनाव 19 अप्रैल से शुरू होंगे. इसके बाद 6 और चरणों में 26 अप्रैल, सात मई, 13 मई, 20 मई, 25 मई और एक जून को मतदान होगा. मतगणना चार जून को होगी.