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जनसंपर्क विभाग की फोटो प्रदर्शनी में वन्देमातरम् एवं राष्ट्र ध्वज तिरंगे के गौरवशाली इतिहास एवं विकास को जानने का मिला अवसर…

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– जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, स्कूली बच्चों, युवाओं एवं नागरिकों ने फोटो प्रदर्शनी की प्रशंसा की**

– जनसंपर्क विभाग की पत्रिका छत्तीसगढ़ जनमन एवं शासन की योजनाओं से संबंधित पाम्पलेट्स तथा किताबों का किया गया नि:शुल्क वितरण**

राजनांदगांव। जनसंपर्क विभाग द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर घर तिरंगा, वंदे मातरम् एवं भारत विभाजन की विभीषिका स्मरण दिवस थीम पर नगर पालिक निगम राजनांदगांव के टाऊन हाल में विशेष फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

फोटो प्रदर्शनी में वंदेमातरम् का उद्घोष करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की गाथा एवं उपलब्धियों को संजोया गया। अध्यक्ष नगर पालिक निगम राजनांदगांव श्री पारस वर्मा ने फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

उन्होंने कहा कि वन्देमातरम् पर आधारित यह प्रदर्शनी बहुत अच्छी है। प्रदर्शनी के माध्यम से वन्देमातरम् एवं राष्ट्र ध्वज तिरंगे के गौरवशाली इतिहास एवं इसके विकास को जानने का अवसर मिला।

पार्षद श्री अरूण साहू ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर प्रशंसा की। पूर्व पार्षद श्री किशुन यदु ने कहा कि तिरंगे के इतिहास और स्वरूप में हुए बदलावों के बारे में जानने का अवसर मिला। श्री संतोष निर्मलकर ने कहा कि फोटो प्रदर्शनी देखकर अच्छा लगा।

प्रदर्शनी के माध्यम से आमजनों को वन्देमातरम् एवं राष्ट्र ध्वज तिरंगे के इतिहास को करीब से जानने का अवसर मिला है। फोटो प्रदर्शनी में जनसंपर्क विभाग की पत्रिका छत्तीसगढ़ जनमन एवं शासन की योजनाओं से संबंधित पाम्पलेट्स एवं किताबों का नि:शुल्क वितरण किया गया।

ग्राम गठुला निवासी श्रीमती दुर्गा बाई ने फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा शासकीय योजनाओं से संबंधित पाम्पलेट्स एवं किताबें नि:शुल्क प्राप्त कीं।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी के माध्यम से वंदे मातरम् एवं राष्ट्रध्वज तिरंगे के बारे में रोचक जानकारी मिली। साथ ही जनकल्याणकारी योजनाओं एवं राज्य के विभिन्न स्थलों की जानकारी भी प्राप्त हुई।

उल्लेखनीय है कि विशेष फोटो प्रदर्शनी में हर घर तिरंगा अभियान के तहत वंदेमातरम् की भावना का आह्वान करते हुए देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साहस एवं बलिदान का स्मरण करते हुए वंदेमातरम् के गौरवशाली 150 वर्षों की झांकी प्रस्तुत की गई है।

प्रदर्शनी में जानकारी देते हुए बताया गया कि कलकत्ता ध्वज जिसे वंदेमातरम् ध्वज के नाम से भी जाना जाता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई रूपों में बनाया गया और संस्करण में वंदेमातरम् अंकित किया गया।

देश का भाग्य बदलने वाले वीर गीत वंदेमातरम् की रचना 7 नवम्बर 1875 को अक्षय नवमी को हुई थी।

आजादी के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के संघर्ष एवं देशवासियों में आजादी के लिए अलख जगाने वाले राष्ट्रगीत वंदेमातरम् की अक्षुण्य कथा को फोटो प्रदर्शनी मेें सहेजा गया।

फोटो प्रदर्शनी में हर घर तिरंगा अभियान तथा वंदेमातरम् के उत्साह एवं ऊर्जा को चिर स्मरणीय बनाएं रखने के लिए सेल्फी जोन भी बनाया गया, जहां नागरिक अपनी सेल्फी ली।

विशेष फोटो प्रदर्शनी का पार्षद श्री शिव वर्मा, नगर निगम आयुक्त श्री जीआर मरकाम सहित अन्य पार्षदों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, स्कूली बच्चों, युवाओं एवं नागरिकों ने अवलोकन किया और प्रदर्शनी की प्रशंसा की।

राजनांदगांव जिले में अब तक 4405 मिमी वर्षा दर्ज – जिले में आज 71.8 मिमी बारिश हुई…

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राजनांदगांव। राजनांदगांव जिले में इस वर्ष चालू मानसून वर्ष में 1 जून 2026 से अब तक जिले के सभी 7 तहसीलों में 4405 मिमी बारिश एवं औसत 71.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है।

भू-अभिलेख से प्राप्त जानकारी अनुसार डोंगरगढ़ तहसील में 642.2 मिमी, लाल बहादुर नगर तहसील में 706.5 मिमी, राजनांदगांव तहसील में 753.8 मिमी, घुमका तहसील में 387 मिमी, छुरिया तहसील में 602.4 मिमी, कुमरदा तहसील में 754.9 मिमी, डोंगरगांव तहसील में 558.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है।

अब तक सर्वाधिक वर्षा कुमरदा तहसील में 754.9 मिमी दर्ज की गई है। इसी तरह आज राजनांदगांव जिले के सभी 7 तहसीलों में 71.8 मिमी एवं औसत 10.3 मिमी बारिश दर्ज की गई है।

डोंगरगढ़ तहसील में 14.2 मिमी, लाल बहादुर नगर तहसील में 6 मिमी, राजनांदगांव तहसील में 16.6 मिमी, घुमका तहसील में 19 मिमी, छुरिया तहसील में 4.9 मिमी, कुमरदा तहसील में 4 मिमी, डोंगरगांव तहसील में 7.1 मिमी बारिश दर्ज की गई है। सर्वाधिक वर्षा घुमका तहसील में 19 मिमी दर्ज की गई है।

जागरूक उपभोक्ता ही सशक्त उपभोक्ता, राजनांदगांव में विद्युत शिकायत निवारण एवं उपभोक्ता अधिकारों पर मंथन…

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Tier-1 से CGRF, विद्युत लोकपाल और स्मार्ट मीटर तक विशेषज्ञों ने दी विस्तृत जानकारी; बिजली उत्पादन से उपभोक्ता तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया भी समझाई**

राजनांदगांव: विद्युत उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों, शिकायत निवारण की प्रक्रिया, आधुनिक विद्युत तकनीक तथा उपलब्ध शिकायत निवारण मंचों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित “विद्युत उपभोक्ता जागरूकता एवं शिकायत निवारण प्रक्रिया संबंधी सेमिनार” बुधवार को एबिस ग्रीन होटल, राजनांदगांव में सम्पन्न हुआ।

सेमिनार में विशेषज्ञों ने उपभोक्ताओं को शिकायत दर्ज कराने से लेकर उसके समाधान तक की प्रक्रिया के साथ-साथ बिजली उत्पादन से लेकर पारेषण, वितरण और अंततः उपभोक्ता के घर तक बिजली पहुंचने की पूरी व्यवस्था को विस्तारपूर्वक समझाया।

विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (CGRF), राजनांदगांव के संयोजन एवं छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, राजनांदगांव के सौजन्य से आयोजित इस सेमिनार में CSERC के सदस्यगण, विद्युत लोकपाल, CGRF के अध्यक्षगण, विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ एवं विद्युत उपभोक्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उपभोक्ता केवल बिजली का बिल चुकाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्युत व्यवस्था का महत्वपूर्ण और जागरूक हितधारक है।

इसलिए उपभोक्ता को अपने अधिकारों के साथ-साथ यह जानकारी भी होनी चाहिए कि बिजली किस प्रकार उत्पादित होती है, किस तरह पारेषित एवं वितरित होकर उसके घर तक पहुंचती है तथा विद्युत सेवा से संबंधित शिकायत होने पर उसका समाधान किस व्यवस्था के माध्यम से कराया जा सकता है।

सेमिनार में अतिथियों एवं विशेषज्ञों ने विद्युत व्यवस्था की पूरी श्रृंखला पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विद्युत का उत्पादन विद्युत उत्पादन केंद्रों में होता है, जिसके बाद उच्च वोल्टेज के माध्यम से इसका पारेषण किया जाता है।

पारेषण व्यवस्था के बाद विद्युत वितरण तंत्र के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों, उपकेंद्रों एवं वितरण लाइनों तक पहुंचती है और अंततः घरेलू, कृषि, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं तक विद्युत आपूर्ति की जाती है।

वक्ताओं ने यह भी बताया कि उपभोक्ता के घर तक निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाने के पीछे उत्पादन, पारेषण एवं वितरण से जुड़े अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों, ग्रिड, उपकेंद्रों, ट्रांसफार्मरों एवं वितरण नेटवर्क की एक व्यापक एवं समन्वित व्यवस्था कार्य करती है। इस पूरी प्रक्रिया को समझाते हुए उपभोक्ताओं को विद्युत सेवा के तकनीकी पक्ष से भी परिचित कराया गया।

सेमिनार में ईडी ओएंडएम, रायपुर श्री संजय खंडेलवाल ने स्मार्ट मीटर की विशेषताओं एवं उपयोगिता पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली, इसकी आधुनिक तकनीकी विशेषताओं तथा उपभोक्ताओं के लिए इसके महत्व को बारीकी से समझाया।

उन्होंने बताया कि स्मार्ट मीटर आधुनिक विद्युत वितरण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो विद्युत खपत से संबंधित जानकारी को अधिक व्यवस्थित एवं तकनीकी रूप से सक्षम तरीके से उपलब्ध कराने में सहायक है। स्मार्ट मीटर के माध्यम से विद्युत खपत की निगरानी, मीटर रीडिंग की आधुनिक व्यवस्था तथा वितरण प्रणाली को अधिक तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है।

श्री खंडेलवाल ने स्मार्ट मीटर से जुड़ी उपभोक्ताओं की सामान्य जिज्ञासाओं और भ्रांतियों को भी स्पष्ट करते हुए इसकी उपयोगिता एवं आधुनिक विद्युत वितरण व्यवस्था में इसकी भूमिका को समझाया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई तकनीक का उद्देश्य विद्युत वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता, दक्षता और उपभोक्ता सुविधा को बढ़ाना है।

सेमिनार में Tier-1 Grievance Redressal, विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (CGRF) एवं विद्युत लोकपाल (Ombudsman) की भूमिका और कार्यप्रणाली को सरल भाषा में समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि शिकायत के प्रारंभिक स्तर पर समाधान नहीं होने की स्थिति में उपभोक्ता निर्धारित प्रक्रिया के तहत अगले शिकायत निवारण मंच का उपयोग कर सकता है।

इसके साथ ही निर्धारित समय-सीमा में शिकायत का निराकरण नहीं होने की स्थिति में उपलब्ध क्षतिपूर्ति के प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। CSERC के सदस्य (विधि) श्री विवेक गनोदवाले ने अध्यक्षीय उद्बोधन में उपभोक्ता हितों की रक्षा तथा विद्युत क्षेत्र में नियामकीय व्यवस्था की भूमिका पर प्रकाश डाला।

CSERC के सदस्य (तकनीकी) श्री अजय कुमार सिंह ने “CSERC की भूमिका एवं CSERC द्वारा विवाद समाधान” विषय पर जानकारी देते हुए नियामक आयोग की भूमिका एवं विवाद समाधान की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। CSERC के निदेशक (इंजीनियरिंग) श्री कमलेश कुमार दिलीवार ने सौर ऊर्जा से संबंधित समस्याओं एवं तकनीकी पहलुओं पर उपभोक्ताओं को मार्गदर्शन दिया।

मुख्य अभियंता (राजनांदगांव क्षेत्र) श्री हर्ष कुमार मेश्राम ने “Tier-1 Grievance Redressal एवं इसकी प्रक्रिया” विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्युत संबंधी शिकायतों को प्रारंभिक स्तर पर किस प्रकार दर्ज कराया जा सकता है और शिकायतों के समयबद्ध निराकरण के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों आवश्यक है।

उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि शिकायत दर्ज कराते समय सही उपभोक्ता विवरण एवं समस्या से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि शिकायत का परीक्षण एवं निराकरण प्रभावी ढंग से किया जा सके। CGRF राजनांदगांव के अध्यक्ष श्री अश्वनी कुमार गौराहा ने शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, क्षतिपूर्ति के प्रावधान तथा CGRF द्वारा विवाद समाधान की प्रकृति पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

सेमिनार के महत्वपूर्ण सत्र “Know Your Bill” में CGRF दुर्ग के अध्यक्ष श्री पी.वी. सजीव ने विद्युत बिल में दर्ज विभिन्न विवरणों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने उपभोक्ताओं को अपने बिल की जानकारी ध्यानपूर्वक देखने तथा बिलिंग से संबंधित किसी भी विसंगति की स्थिति में समय पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। विद्युत लोकपाल (Ombudsman) श्री एस.के. सोनी ने “उपभोक्ताओं के अधिकार” विषय पर संबोधित करते हुए उपभोक्ताओं के वैधानिक अधिकारों एवं शिकायत निवारण के उच्चतर मंच की जानकारी दी। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा उपलब्ध वैधानिक शिकायत निवारण व्यवस्था का उचित उपयोग करने का आग्रह किया। सेमिनार के प्रश्नोत्तर सत्र में उपभोक्ताओं ने बिलिंग, स्मार्ट मीटर, विद्युत आपूर्ति, शिकायत निवारण, क्षतिपूर्ति, सौर ऊर्जा एवं अन्य विद्युत संबंधी विषयों पर विशेषज्ञों से सीधे प्रश्न किए। विशेषज्ञों ने उपभोक्ताओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए संबंधित प्रक्रिया एवं तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। इस संवाद ने सेमिनार को केवल व्याख्यान तक सीमित न रखते हुए उपभोक्ताओं और विशेषज्ञों के बीच सार्थक एवं प्रत्यक्ष संवाद का मंच बना दिया। सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि विद्युत व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं उपभोक्ता-केंद्रित बनाने के लिए जागरूक उपभोक्ता और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था दोनों आवश्यक हैं। उत्पादन से लेकर पारेषण, वितरण और उपभोक्ता तक बिजली पहुंचाने की पूरी व्यवस्था के बारे में जानकारी मिलने से उपभोक्ताओं को विद्युत प्रणाली की व्यापकता और उसमें अपनी भूमिका को समझने का अवसर मिला। वहीं शिकायत निवारण की प्रक्रिया की जानकारी से उपभोक्ता अपनी समस्याओं को उचित मंच पर प्रभावी ढंग से रख सकेंगे।
कार्यक्रम के अंत में राजनांदगांव वृत्त के अधीक्षण अभियंता श्री शंकेश्वर कंवर ने आभार प्रदर्शन किया। उन्होंने CSERC के सदस्यगण, विद्युत लोकपाल, CGRF के अध्यक्षगण, ईडी ओएंडएम रायपुर श्री संजय खंडेलवाल, विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों, उपभोक्ताओं एवं आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम उपभोक्ताओं और विद्युत वितरण व्यवस्था के बीच संवाद, विश्वास एवं पारदर्शिता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे विद्युत संबंधी किसी भी समस्या के समाधान के लिए निर्धारित शिकायत निवारण प्रक्रिया का उपयोग करें तथा अपने अधिकारों एवं दायित्वों के प्रति जागरूक रहें। राष्ट्रगान के साथ सेमिनार का गरिमापूर्ण समापन हुआ।

माय भारत की समीक्षा बैठक में युवाओं को राष्ट्र निर्माण और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर…

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने माय भारत की समीक्षा बैठक में युवाओं को राष्ट्र निर्माण और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया। देश में 2.65 करोड़ से अधिक और छत्तीसगढ़ में 6.60 लाख से ज्यादा युवा माय भारत से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने बस्तर के युवाओं के लिए नेतृत्व और विकास के नए अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है। युवाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप अवसर देकर राष्ट्र निर्माण से जोड़ना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित ‘मेरा युवा भारत’ (माय भारत) की प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक में यह बात कही।

युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री साय ने माय भारत की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को इस मंच से जोड़ने और विभिन्न विभागों की गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं को राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभाने के लिए व्यापक मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। युवा शक्ति को विकसित भारत के संकल्प का प्रमुख आधार माना गया है।

सही दिशा और अवसर मिलने पर बदल सकती है तस्वीर

सीएम साय ने कहा कि आज का युवा तकनीक और डिजिटल माध्यमों के जरिए पूरी दुनिया से जुड़ा है। उसकी सोच व्यापक है और वह तेजी से बदलाव को आत्मसात करने के साथ नवाचार करने की क्षमता रखता है। युवाओं की ऊर्जा सकारात्मक और राष्ट्रहित के कार्यों में लगे, इसके लिए उन्हें सही दिशा, अवसर और मंच उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में यही युवा देश और प्रदेश का नेतृत्व करेंगे।

हर क्षेत्र में बढ़ेगी युवाओं की भागीदारी

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, खेल, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन, कौशल विकास, कृषि, तकनीकी शिक्षा, आपदा प्रबंधन और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में युवाओं की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां युवा शक्ति का सहयोग उपयोगी हो सकता है, वहां माय भारत के माध्यम से उन्हें अवसर दिए जाएं। इससे युवाओं को व्यावहारिक अनुभव मिलने के साथ उनकी रचनात्मकता का समाज के हित में उपयोग होगा।

उन्होंने ‘सशक्त युवा-सशक्त छत्तीसगढ़’ की भावना के अनुरूप ग्राम से राज्य स्तर तक मजबूत युवा नेटवर्क विकसित करने के निर्देश दिए। डिजिटल डिटॉक्स, सेवा भाव, सामाजिक जुड़ाव और सामुदायिक उत्तरदायित्व से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा देने को कहा।

देश में 2.65 करोड़ से ज्यादा युवा जुड़े

बैठक में बताया गया कि ‘मेरा युवा भारत’ युवाओं को सरकार, समाज और राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ने वाला डिजिटल एवं भौतिक मंच है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2023 को इसका शुभारंभ किया था। वर्तमान में देशभर में 2.65 करोड़ से अधिक युवा माय भारत प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में 6.60 लाख से अधिक युवा इससे जुड़ चुके हैं।

बस्तर के युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर

मुख्यमंत्री ने बस्तर के युवाओं को माय भारत से व्यापक स्तर पर जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बस्तर हिंसा और भय के दौर को पीछे छोड़कर शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में वहां के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि माय भारत के माध्यम से बस्तर के युवाओं की प्रतिभा को पहचान और अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।

यंग लीडर्स डायलॉग को बताया अहम पहल

मुख्यमंत्री ने विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग को युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने की महत्वपूर्ण पहल बताया। बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2025 में इसमें 30 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ में भी ‘विकसित छत्तीसगढ़ यंग लीडर्स डायलॉग’ आयोजित करने पर चर्चा हुई। इसके जरिए खेल, स्वास्थ्य, पंचायत, कौशल विकास, पर्यटन, कृषि और आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

बेरोजगार युवाओं के लिए शानदार मौका, 500 से अधिक पदों पर होगी बंपर भर्ती…

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छत्तीसगढ़ में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है।

युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई), बेमेतरा में 20 अगस्त 2026, दिन गुरुवार को रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है।

रोजगार मेले में विभिन्न निजी क्षेत्र की संस्थाओं द्वारा 500 से अधिक विभिन्न पदों पर भर्ती की जाएगी।

जिला रोजगार कार्यालय द्वारा निजी क्षेत्र के नियोजकों एवं रोजगार के इच्छुक आवेदकों के बीच एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाता है।

रोजगार मेले के माध्यम से होने वाली नियुक्तियां निजी क्षेत्र की संस्थाओं में रोजगार के लिए होंगी।

विभिन्न पदों के लिए निर्धारित योग्यता, कार्य की प्रकृति, वेतनमान, संस्था एवं अन्य आवश्यक जानकारी अभ्यर्थियों को रोजगार मेले में उपस्थित नियोजक अथवा उनके प्रतिनिधियों से प्राप्त होगी।

ये है जरुरी दस्तावेज

रोजगार के इच्छुक अभ्यर्थी अधिसूचित रिक्त पदों पर अवसर प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ रोजगार मेले में शामिल हो सकते हैं। अभ्यर्थियों को रोजगार कार्यालय का पंजीयन पत्रक, छत्तीसगढ़ निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र तथा समस्त शैक्षणिक मूल प्रमाण पत्र साथ लाना अनिवार्य है। (CG Job News)

कितने बजे से आयोजित होगा रोजगार मेला?

रोजगार मेला 20 अगस्त 2026 को सुबह 10ः00 बजे से दोपहर 3ः00 बजे तक शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था, बेमेतरा में आयोजित होगा।

जिला रोजगार कार्यालय ने निजी क्षेत्र में रोजगार की तलाश कर रहे जिले के इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थियों से अधिक से अधिक संख्या में रोजगार मेले में उपस्थित होकर इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की है।

“Police Transfer: रायपुर ग्रामीण पुलिस में थाना और चौकी प्रभारियों का बड़ा फेरबदल”

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“Police Transfer: एक साथ कई थाना-चौकी के प्रभारियों का ट्रांसफर… रेंज SP मुख्यालय ने जारी किया आदेश”

रायपुर ग्रामीण पुलिस में थाना और चौकी प्रभारियों का बड़ा फेरबदल हुआ है। पुलिस अधीक्षक श्वेता सिन्हा ने नई तैनाती के आदेश जारी किए।

ग्रामीण पुलिस रायपुर में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को मजबूत करने और अफसर-कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने रायपुर ग्रामीण पुलिस की पुलिस अधीक्षक श्वेता सिन्हा के द्वारा महकामने में बड़ा बदलाव किया गया है।

रेंज पुलिस मुख्यालय के द्वारा करी छह थाने और चौकी के प्रभारियों को हटते हुए उन्हें नई जगहों पर पदस्थापित किया गया है। इस संबंध में सूची के साथ आदेश भी जारी कर दिया है।

इन अफसरों का किया गया तबादला

जारी आदेश के मुताबिक़ पुलिस लाइन में पदस्थ निरीक्षक प्रेमप्रकाश अवधिया को राखी थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी तरह राखी के प्रभारी आशीष सिंह को पुलिस लाइन भेज दिया गया है।

आदेश में खरोरा थाने के प्रभारी कृष्ण कुमार कुशवाहा को भी पुलिस लाइन भेजा गया है।

प्रदीप बिसेन को उपरवारा चौकी का प्रभारी बनाया गया है। विद्याभूषण भारद्वाज को खरोरा थाना जबकि कमलेश कुमार को सिलतरा चौकी का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

सीएम साय ने स्रोत महोत्सव 2026 का किया शुभारंभ…

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इन 5 आधारों के जरिए छत्तीसगढ़ की नदियों को किया जाएगा संरक्षित**

सीएम साय ने स्रोत महोत्सव 2026 का किया शुभारंभ**

नीर-नारी-निधि पुस्तक का भी विमोचन**

नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, कृषि और समृद्धि की जीवनधारा हैं। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा बनाने में प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

जिन नदियों ने हमारी सभ्यता को पोषित किया और हमें समृद्धि दी, उनका संरक्षण हम सभी का साझा दायित्व है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के ओमाया गार्डन में आयोजित ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम स्थलों एवं जलग्रहण क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण, जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने तथा नदी संरक्षण को व्यापक जन अभियान का स्वरूप देना है।

कार्यशाला में जल संरक्षण, नदी पुनरुद्धार और जल प्रबंधन से जुड़े विषय विशेषज्ञों के साथ राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य तथा विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा मंथन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा।

इसी भावना के साथ राज्य सरकार नदियों के उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के समन्वय से व्यापक कार्ययोजना पर आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान नदियों से गहराई से जुड़ी हुई है। महानदी सहित प्रदेश की अनेक नदियों ने कृषि, आजीविका और सामाजिक जीवन को समृद्ध किया है। नदियों का अस्तित्व उनके उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के स्वास्थ्य पर निर्भर है। इसलिए नदी संरक्षण का कार्य केवल उसके प्रवाह क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता।

हमें नदी के स्रोत से लेकर उसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को समझकर संरक्षण की समग्र योजना बनानी होगी।

उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। स्रोत महोत्सव में विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों के आधार पर ऐसी ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसे धरातल पर समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।

पांच प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ेगा नदी संरक्षण अभियान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में नदी संरक्षण के लिए मानचित्रण, संरक्षण, पुनर्भरण, जनभागीदारी और कार्ययोजना के पांच प्रमुख स्तंभों पर काम किया जाएगा। प्रत्येक नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से मानचित्रण किया जाएगा। नदी का उद्गम कहां है, उसके प्रवाह क्षेत्र की प्रकृति कैसी है, भू-उपयोग में किस प्रकार के बदलाव हुए हैं और किन कारणों से नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रभाव पड़ रहा है – इन सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक मानचित्रण और अध्ययन के आधार पर नदी के पूरे इकोसिस्टम के संरक्षण की योजना तैयार की जाएगी। इसमें वन एवं वनस्पति संरक्षण, मृदा क्षरण की रोकथाम, पारंपरिक जल संरचनाओं का संरक्षण एवं पुनर्जीवन, आवश्यकतानुसार नई जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और भू-जल पुनर्भरण जैसे कार्य शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षाजल हमारे नदी तंत्र और भू-जल का मूल आधार है। इसलिए बारिश के पानी को तेजी से बहकर निकल जाने देने के बजाय उसे अधिक से अधिक मात्रा में धरती के भीतर पहुंचाने के उपाय करने होंगे। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा, जल स्रोतों को पुनर्जीवन मिलेगा और नदियों में लंबे समय तक जल प्रवाह बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

नदी संरक्षण को बनाना होगा जन आंदोलन

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जल संरक्षण का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। नदियों के किनारे बसे गांवों और वहां रहने वाले लोगों का नदी से सीधा संबंध है, इसलिए उन्हें नदी संरक्षण की प्रक्रिया का प्रमुख भागीदार बनाना होगा।

उन्होंने जिला स्तरीय समितियों के सदस्यों से कहा कि नदियों के किनारे बसे गांवों में स्थानीय समितियां गठित कर पंचायतों के सहयोग से नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्य आगे बढ़ाए जाएं। स्थानीय समुदाय को नदी की स्थिति, उसके महत्व और संरक्षण के उपायों की जानकारी दी जाए। जब समाज स्वयं अपनी नदी और जल स्रोतों के संरक्षण की जिम्मेदारी लेता है, तब ऐसे प्रयास अधिक प्रभावी और स्थायी होते हैं।

मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से भी आग्रह किया कि जल संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान को सरल एवं सहज भाषा में लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका लाभ धरातल पर दिखाई दे और आम नागरिक उसे समझकर अपने जीवन में अपना सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ है।

नदियों ने पीढ़ियों से मानव जीवन को जल, भोजन और आजीविका प्रदान की है। इसलिए एक सभ्य समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए नदियों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्रोत महोत्सव 2026 से निकलने वाले निष्कर्ष छत्तीसगढ़ में नदी संरक्षण और जल सुरक्षा की दिशा में एक प्रभावी रोडमैप तैयार करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।

जल संरक्षण और आधुनिक तकनीक के लिए दो महत्वपूर्ण एमओयू

कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की संस्थागत और तकनीकी क्षमता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण एमओयू किए गए। नेशनल वाटर एकेडमी, पुणे के साथ हुए एमओयू के माध्यम से जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और मैदानी अमले के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

इससे आधुनिक जल प्रबंधन, नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इसी प्रकार एंट्रिक्स कॉरपोरेशन, बेंगलुरु के साथ हुए एमओयू के माध्यम से इसरो की विशेषज्ञता और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग जल संसाधनों के वैज्ञानिक विश्लेषण एवं निगरानी में किया जाएगा।

प्रारंभिक चरण में कुनकुरी तहसील के लगभग 1540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उन्नत भू-स्थानिक तकनीक के माध्यम से जल संसाधनों की स्थिति का अध्ययन, निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक से प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़ों को स्थानीय अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़कर जल संरक्षण की अधिक प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकती हैं। इससे क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुरूप समाधान तैयार करने और उनके परिणामों की निगरानी करने में भी मदद मिलेगी।

‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में जल संरक्षण पर आधारित ‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक नीर की रक्षा, नारी की भागीदारी और जल संपदा के संरक्षण की अवधारणा को रेखांकित करती है। पुस्तक में जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न अनुभवों, प्रयासों और नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया गया है।

जलस्रोतों की पहचान और संरक्षण भविष्य की जल सुरक्षा के लिए जरूरी : डॉ. विनोद तारे

सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नदियों के उद्गम और उन्हें पोषित करने वाले जल स्रोतों की पहचान एवं संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। बारिश का पानी ही नदियों और भू-जल का प्रमुख आधार है।

वर्षाजल के तेज बहाव को नियंत्रित कर उसे अधिक से अधिक मात्रा में जमीन के भीतर पहुंचाना होगा, जिससे भू-जल स्तर बढ़े और भविष्य के लिए जल सुरक्षित किया जा सके। डॉ. तारे ने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्राचीन ज्ञान, स्थानीय एवं पारंपरिक अनुभव और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के बीच समन्वय जरूरी है। इन तीनों को एक साथ जोड़कर तैयार की गई कार्ययोजना ही जल स्रोतों के दीर्घकालिक संरक्षण और जल के सतत उपयोग का आधार बन सकती है।

साइंस बेस्ड और साइट स्पेसिफिक समाधान तैयार होंगे : जल संसाधन विभाग सचिव

जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने कहा कि स्रोत महोत्सव 2026 का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम और कैचमेंट एरिया के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक, व्यवहारिक और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करना है। नदी संरक्षण में केवल डाउनस्ट्रीम फ्लो का अध्ययन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सोर्स एरिया, भूमि उपयोग, मिट्टी की नमी, भू-जल रिचार्ज, वनस्पति और मृदा क्षरण सहित नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को एक साथ समझना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि कार्यशाला में नौ नदी समूहों पर अलग-अलग चर्चा की जा रही है। इन समूहों में क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों के अनुरूप साइट स्पेसिफिक और साइंस बेस्ड समाधान तैयार किए जाएंगे।

इसमें समस्या की स्पष्ट पहचान के साथ समाधान, क्रियान्वयन की जिम्मेदारी और परिणामों के आकलन की समय-सीमा भी निर्धारित करने पर जोर रहेगा। टोप्पो ने कहा कि जल संरक्षण केवल अधोसंरचना निर्माण का विषय नहीं है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी ही संरक्षण कार्यों की दीर्घकालिक सफलता और स्थायित्व की कुंजी है।

कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और निष्कर्षों के आधार पर छत्तीसगढ़ के लिए समयबद्ध रिवर सोर्स रेस्टोरेशन रोडमैप तैयार करने की दिशा में आगे कार्य किया जाएगा।

कार्यशाला में सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे, नमामि गंगे मिशन से जुड़े विषय विशेषज्ञ, एनआईटी रायपुर के प्राध्यापक, राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य, विभिन्न जिलों के कलेक्टर एवं अधिकारी तथा जल एवं नदी संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञ उपस्थित थे।

Public Holiday: छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक अवकाश का ऐलान!

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Public Holiday on 28 August रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर छत्तीसगढ़ सरकार ने शुक्रवार 28 अगस्त 2026 को प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार इस दिन राज्य के सभी शासकीय कार्यालयों एवं संस्थाओं के साथ-साथ कोषालय और बैंकों में भी अवकाश रहेगा।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में बताया गया है कि राज्य शासन ने रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर 28 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। इसके तहत प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालयों और संस्थाओं में कामकाज बंद रहेगा। अवकाश के कारण स्कूल-कॉलेज समेत अन्य सरकारी संस्थानों में भी नियमित गतिविधियां संचालित नहीं होंगी।

बैंकों में भी रहेगी छुट्टी

अधिसूचना में भारत सरकार, गृह मंत्रालय की अधिसूचना तथा परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act), 1881 की धारा 25 के स्पष्टीकरण के तहत प्रदत्त शक्तियों का उल्लेख करते हुए 28 अगस्त 2026 को कोषालय एवं बैंकों के लिए भी सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।

सरकार के इस निर्णय से रक्षाबंधन के दिन प्रदेशवासियों को सार्वजनिक अवकाश का लाभ मिलेगा। बैंक और कोषालय बंद रहने के कारण लोगों को बैंकिंग से जुड़े जरूरी कार्यों की योजना अवकाश को ध्यान में रखकर बनाने की सलाह दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद खत्म हुआ इंतजार: जानिए यह कब सिनेमाघरों में आएगी…’महाप्रभु जगन्नाथ’

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एनिमेटेड फ़िल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ को 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज़ किया जाना था, लेकिन कानूनी दिक्कतों के कारण इसे टाल दिया गया था। अब, सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद, इस बहुप्रतीक्षित एनिमेटेड फ़ीचर फ़िल्म की देशभर में रिलीज़ का रास्ता साफ़ हो गया है।

जानिए यह कब सिनेमाघरों में आएगी। ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ कब रिलीज़ होगी?

ओडिशा की पहली एनिमेटेड फ़ीचर फ़िल्म कही जाने वाली ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ अब 28 अगस्त, 2026 को सिनेपोलिस (Cinepolis) के ज़रिए पूरे भारत में रिलीज़ होने के लिए तैयार है। एक काल्पनिक कहानी के तौर पर बनाई गई इस फ़िल्म का मकसद युवाओं में भक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों को जगाना है। गौरतलब है कि यह फ़िल्म लोकप्रिय एनिमेटेड सीरीज़ ‘जय जगन्नाथ’ का ही एक बड़ा सिनेमाई रूप है, जिसे YouTube पर एक अरब (100 करोड़) से ज़्यादा बार देखा जा चुका है।

‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज़ क्यों टाल दी गई थी?

इस फ़िल्म को मूल रूप से 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज़ किया जाना था; लेकिन ओडिशा हाईकोर्ट ने फ़िल्म के कंटेंट की कानूनी समीक्षा की मांग करने वाली एक जनहित याचिका (PIL) के बाद इसकी देशभर में रिलीज़ पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए फ़िल्म निर्माता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। अपनी याचिका में उन्होंने CBFC से मिले ‘U’ सर्टिफ़िकेट और देश भर के 300 से ज़्यादा सिनेमाघरों में बुकिंग के कारण हुए भारी वित्तीय नुकसान का ज़िक्र किया।

अब जब सुप्रीम कोर्ट ने फ़िल्म की देशभर में रिलीज़ को मंज़ूरी दे दी है, तो निर्माता और डिस्ट्रीब्यूटर एक नई रिलीज़ रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। पूरे भारत में इसकी पहुँच को ध्यान में रखते हुए, प्रमुख थिएटर चेन सिनेपोलिस ने 28 अगस्त, 2026 को फ़िल्म रिलीज़ करने का फ़ैसला किया है।

एनिमेटेड फ़िल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ के बारे में

इस फ़िल्म को ‘एले एनिमेशन’ (Elle Animation) के संस्थापक दुर्गा प्रसाद दलाई ने प्रोड्यूस किया है और इसका निर्देशन श्रीपाद वारखेड़कर ने किया है। फ़िल्म की कहानी और पटकथा पल्लवी शर्मा ने लिखी है। इसके ओरिजिनल गाने अरिजीत श्रीवास्तव ने कंपोज़ किए हैं, जबकि बैकग्राउंड स्कोर अविरल कुमार ने दिया है और गाने के बोल अतुल कुमार वर्मा ने लिखे हैं।

जंतर-मंतर प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर लगाई रोक…

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जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को छोड़कर बाकी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई की। एक याचिका में मांग की गई है कि जंतर-मंतर की जगह धरना-प्रदर्शन के लिए कोई और जगह तय की जाए।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “जिन प्रदर्शनकारियों के आपराधिक रिकॉर्ड में हत्या, रेप, पॉक्सो जैसे गंभीर अपराध के मुकदमे हैं, उन्हें छोड़कर बाकी के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।” सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इस बात से सहमति जताई।

सीजेआई ने कहा कि जहां तक छात्रों की बात है, वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रोटेस्ट में हिस्सा ले रहे थे। उनका मकसद कुछ मुद्दों पर कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना था। हम शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि आदतन आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की ही जांच होनी चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि पुलिस ने अब तक 2873 ऐसे लोगों की पहचान की है जिनके आपराधिक रिकॉर्ड हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस झड़प में 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

सीजेआई ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “प्रदर्शनकारियों में निर्दोष छात्र भी थे। उन्होंने अपना भविष्य बनाने के लिए जी-तोड़ मेहनत की है। उनके अभिभावकों ने अपनी जी-तोड़ मेहनत और खून-पसीने की कमाई उनकी पढ़ाई में लगाई है।”

पूरे मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक हाईपावर कमेटी बनाने का ऐलान किया। कोर्ट ने कहा कि यह कमेटी पूर्व जजों और डीजीपी स्तर के रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों की देखरेख में काम करेगी। यह कमेटी स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्णायक जांच करेगी।

सीजेआई ने कहा कि कमेटी सिर्फ एक गोपनीय रिपोर्ट जमा नहीं करेगी। जैसे-जैसे नए मामले सामने आएंगे, कमेटी उनकी जांच करेगी और समय-समय पर रिपोर्ट देगी, ताकि कोर्ट आगे के निर्देश दे सके। जरूरत पड़ने पर अंतरिम निर्देश भी जारी किए जा सकेंगे।

सीजेआई ने बताया कि कमेटी में सीबीआई के एक पूर्व डायरेक्टर जनरल, जो कुछ साल पहले रिटायर हुए हैं और एक राज्य के पूर्व डीजीपी को शामिल करने की सहमति ली गई है। दोनों का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हम अभी ओपन कोर्ट में नाम नहीं बताना चाहते, ताकि किसी अधिकारी को दिक्कत न हो। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह बुधवार को कमेटी की आधिकारिक घोषणा कर देगा।

कोर्ट ने दोनों पक्षों से कहा कि वे एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें। सभी सबूत और सामग्री नोडल अधिकारी को सौंपी जाए, जो उसे कोर्ट तक पहुंचाएगा। इससे सुनवाई आसान हो जाएगी।

याचिकाकर्ताओं की वकील वृंदा ग्रोवर ने पैलेट गन से घायल हुए और अन्य लोगों का जिक्र किया। वहीं घायल पुलिसकर्मियों की वकील ने कहा कि पुलिस पर पथराव किया गया था। एक याचिकाकर्ता ने पूर्व सैनिक की पत्नी सुदेश के साथ हुई प्रताड़ना का मुद्दा भी उठाया। याचिकाकर्ता के वकील रिजवान अहमद ने बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल और वृंदा ग्रोवर दोनों ने अपनी बातें स्पष्टता से रख दी हैं। अब आगे की कार्यवाही तय की जाए।

सुनवाई के दौरान एक वकील ने सरकार के उस प्रस्ताव का जिक्र किया जिसमें जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल को शिफ्ट करने की बात कही गई है। इस पर सीजेआई ने कहा कि यह असल में एक एडमिनिस्ट्रेटिव मुद्दा है। एक्सपर्ट देख सकते हैं कि यह मुमकिन है या नहीं।

सीजेआई ने कहा कि कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। वहीं गाइडलाइन और प्रोटोकॉल बनाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार करना होगा। अब कोर्ट बुधवार को कमेटी के गठन और उसके सदस्यों के नामों की घोषणा करेगा।