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CG: रोजगार कार्यालय में प्लेसमेंट कैम्प 8 अप्रैल को…

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राजनांदगांव: जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र राजनांदगांव में 8 अप्रैल 2026 को सुबह 10.30 बजे से दोपहर 3 बजे तक प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन किया गया है। प्लेसमेंट कैम्प में वेदांता स्कील स्कूल कोरबा द्वारा ट्रेनिंग (सोलर) के 30 पद, ट्रेनिंग (सिलाई मशीन ऑपरेटर) के 40 पद, ट्रेनिंग (होटल मैनेजमेंट) के 40 पद, ट्रेनिंग (वेल्डर) के 40 पद एवं हयूमिलिटी फाइनेशियल सोल्योशन द्वारा प्रोबेशनरी बिजनेस एसोसियेट के 10 पद, लाईफ प्लानर के 15 पद, वेल्थ मैनेजर के 15 पद तथा क्वीस काप लिमिटेड द्वारा नेप्स ट्रेनी के 500 पद पर भर्ती की जाएगी। प्लेसमेंट में शामिल होने वाले आवेदकों को शैक्षणिक योग्यता के सम्पूर्ण प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, 2 पासपोर्ट साईज फोटो, रोजगार पंजीयन कार्ड लाना अनिवार्य है।

CG: जिला पंचायत साधारण सभा की बैठक 15 अप्रैल को…

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राजनांदगांव: जिला पंचायत साधारण सभा की बैठक 15 अप्रैल 2026 को दोपहर 12 बजे जिला पंचायत राजनांदगांव के सभाकक्ष में आयोजित की गई है। बैठक में विभिन्न विभागीय योजनाओं की प्रगति की प्रस्तुत जानकारी पर चर्चा की जाएगी। बैठक में सदस्यों को उपस्थित होने का आग्रह किया गया है तथा अधिकारियों को आवश्यक जानकारी सहित बैठक में उपस्थित होने कहा गया है।

राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) कार्यक्रम अंतर्गत जिले के 7 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिर को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाण पत्र के लिए किया गया चयनित…

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राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) कार्यक्रम अंतर्गत जिले के 7 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिर को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाण पत्र के लिए किया गया चयनित…

राजनांदगांव” राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) कार्यक्रम अंतर्गत जिले के 7 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का चयन राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाण पत्र हेतु किया गया है। चयनित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में राजनांदगांव विकासखंड के सहसपुर दल्ली, पनिया एवं रेंगाकठेरा, छुरिया विकासखंड के आमगांव, हालेकोसा एवं भेजराटोला तथा डोंगरगांव विकासखंड के कम्हेरा शामिल हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने बताया कि राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) कार्यक्रम के तहत शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से यह प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक कुल 42 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को एनक्यूएएस प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है, जबकि 83 स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा तैयारी पूर्ण कर प्रमाण पत्र हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया है। इनमें से 24 स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण किया जा चुका है, जिनके प्रमाण पत्र प्राप्त होना शेष है। इस उपलब्धि पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जिले के सलाहकार डॉ. विकास राठौर, डॉ. स्नेहा जैन, डॉ. निहारिका टोपनो, खंड चिकित्सा अधिकारियों तथा चयनित स्वास्थ्य केंद्रों के समस्त कर्मचारियों को बधाई दी है।

CG: जनदर्शन में प्राप्त आवेदन पर की गई त्वरित निराकरण…

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जनदर्शन में प्राप्त आवेदन पर की गई त्वरित निराकरण – श्रमिकों को किया गया 25056 रूपए का भुगतान

राजनांदगांव: कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों पर त्वरित एवं प्रभावी निराकरण किया जा रहा है। जिससे आवेदकों को समयबद्ध तरीके से राहत मिल सके। इसी कड़ी में राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम सोमनी के श्री बुधराम पटेल एवं अन्य श्रमिकों द्वारा लंबित मजदूरी भुगतान दिलाने के संबंध में साप्ताहिक जनदर्शन में आवेदन किया था। कलेक्टर ने जनदर्शन में प्राप्त आवेदन पर तत्काल संज्ञान लिया और संबंधित विभाग को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करते हुए श्रमिकों को मजदूरी भुगतान दिलाने के निर्देश दिए। जनदर्शन में प्राप्त आवेदन पर जनपद पंचायत राजनांदगांव द्वारा तत्काल आवश्यक कार्रवाई की गई और श्रमिकों को  कुल 25056 रूपए का भुगतान बैंक खातों के माध्यम से किया गया। जिसमें श्री बुधराम पटेल को 9 हजार 657 रूपए, श्री टकेश्वरी बंजारे को 9 हजार 657 रूपए एवं योगेश्वरी पटेल को 9 हजार 657 रूपए मजदूरी भुगतान किया गया। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए है कि जनदर्शन में प्राप्त सभी आवेदनों का त्वरित, पारदर्शी और नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रत्येक नागरिक को समय पर न्याय और समाधान मिल सके।

जंग के बीच इन 3 देशों के लिए संकटमोचक बना भारत, अपनी मुसीबत भूल जमकर पहुंचाई मदद…

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कुछ महीने पहले तक भारत को अपने पड़ोस में विरोध का सामना करना पड़ रहा था. कुछ देशों में तो भारत के खिलाफ अभियान भी चलाए जा रहे थे. लेकिन ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट ने पूरी तस्वीर को बदलकर रख दिया है.

इसने दक्षिण एशिया में एक खामोश बदलाव को बढ़ावा दिया है. वही पड़ोसी देश बांग्लादेश, श्रीलंका ईंधन के लिए भारत की ओर देख रहे हैं. भारत ने पुरानी कड़वाहट को भुलाकर मदद का हाथ बढ़ाया है, जिससे उसकी ‘पड़ोसी पहले’ (Neighbourhood First) की नीति और मजबूत हुई है. हिंदुस्तान ने अफगानिस्तान की भी मदद की, जो इस वक्त भूकंप और बाढ़ के कारण संकट का सामना कर रहा है.

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले 90% कच्चे तेल की मंजिल एशिया होती है. हिंदुस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देश तेल के लिए इस मार्ग पर निर्भर रहते हैं. ईरान ने इस रास्ते को बंद कर रखा है, लेकिन हिंदुस्तान के जहाजों को वहां से निकलने की अनुमति है. यही वजह है कि अन्य देशों के मुकाबले भारत कम मुसीबत में है.

मुसीबत भूल की मदद

संकट के बावजूद, भारत बांग्लादेश और श्रीलंका को कई टन ईंधन भेज चुका. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफ्रिंग के दौरान बताया था कि इन देशों ने भारत से मदद मांगी थी. उन्होंने कहा कि घरेलू उपलब्धता और उत्पादन के स्तर का आकलन करने के बाद हर मामले पर अलग से फैसला लिया जाएगा. फिलहाल भारत में घबराहट जैसी कोई स्थिति नहीं है, क्योंकि उसके पास लगभग दो महीने का ईंधन उपलब्ध है.

ईरान जंग से हिला बांग्लादेश

ईरान जंग के कारण पैदा हुआ संकट बांग्लादेश में साफ दिखाई दे रहा है. वो अपने तेल का 95% और गैस का 30% हिस्सा आयात करता है. गैस की आपूर्ति लगभग ठप हो जाने के कारण बांग्लादेश को बिजली की व्यापक कटौती का सामना करना पड़ा. गारमेंट सेक्टर उसकी अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है. डीजल की कमी के कारण भी ये भी खतरे में है. बिजली की खपत कम करने के लिए देश भर के सभी विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया गया.

भारत ने दिखाया बड़ा दिल

संकट के बीच तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार ने मदद के लिए भारत से संपर्क किया. भारत ने तेजी से कदम उठाते हुए, भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के जरिए हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति बढ़ा दी. इस पाइपलाइन को 2017 में चालू किया गया था. इसका ज्यादातर हिस्सा असम की नुमालीगढ़ रिफ़ाइनरी से भेजा जा रहा है.

10 मार्च को भारत ने 5,000 टन डीजल भेजा था. इसके बाद इसमें इजाफा ही हुआ और लगातार मदद पहुंचाई जा रही है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार ने भारत के साथ संबंधों को नए सिरे से शुरू करने का संकेत दिया है.

अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे. हालांकि BNP सरकार की भारत के प्रति पहल ने दोनों देशों के संबंधों को फिर से पटरी पर ला दिया है. बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान भी दिल्ली आने वाले हैं. उनकी यात्रा पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी.

श्रीलंका की भी मदद

श्रीलंका के लिए मौजूदा हालात ने उसके 2022 के आर्थिक संकट की यादें ताजा कर दी हैं. उस दौरान श्रीलंका ने चीनी निवेश पर बहुत ज़्यादा निर्भरता दिखाई थी. इसी वजह से कोलंबो ने कभी-कभी चीनी जासूसी जहाज़ों को अपने बंदरगाहों पर रुकने की इजाजत देकर भारत की सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज किया.

ईरान युद्ध ने एक बार फिर श्रीलंका की पटरी पर लौट रही अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है. देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का 60% हिस्सा आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है. देश ने यह भी साफ कर दिया है कि उसके पास एक महीने से ज़्यादा का स्टोरेज नहीं है, जिसकी वजह से उसे ईंधन की कीमतों में 33% की बढ़ोतरी करनी पड़ी है.

इस संकट के बीच, राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने मार्च के मध्य में प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात की. भारत ने रिएक्ट करते हुए 28 मार्च को तुरंत 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल श्रीलंका भेज दिया. इसके बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके ने आभार जताया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, भारत के त्वरित समर्थन के लिए आभारी हूं.

अफगानिस्तान के लिए भी संकटमोचक

ऐसा नहीं है कि हिंदुस्तान जंग से संकट में आए देशों को ही मदद पहुंचा रहा है. उसने अफगानिस्तान की भी सहायता की है. उस अफगानिस्तान की जो हाल ही में आई बाढ़ और भूकंप के कारण मुश्किल हालात का सामना कर रहा है. भारत ने उसको मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी है.

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि इस सहायता सामग्री में किचन सेट, हाइजीन किट, प्लास्टिक शीट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग और अन्य ज़रूरी चीज़ें शामिल हैं. मंत्रालय ने कहा कि भारत अफ़गानिस्तान के लोगों के साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है और इस मुश्किल समय में मानवीय सहायता और समर्थन देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.

EPFO 3.0 Update: ATM और UPI से PF निकासी होगी शुरू! एक बार में निकाल सकेंगे इतनी रकम, ये रही पूरी डिटेल…

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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने पिछले साल EPFO 3.0 शुरू किया था, ताकि रिटायरमेंट संस्था के डिजिटल सिस्टम और काम करने के तरीकों को आसान और आधुनिक बनाया जा सके. उम्मीद है कि EPFO 3.0, 2026 के मध्य तक पूरी तरह लागू हो जाएगा, जिसका मकसद लोगों को आसान और बिना परेशानी वाली सुविधा देना है.

ईपीएफओ 3.0 के तहत कई सारे नए बदलाव प्रस्तावित हैं कुछ हो लागू हो गए हैं और कुछ के लागू होने की उम्मीद है. उन्हीं बदलावों में से एक है यूपीआई और एटीएम से पीएफ से निकासी करने का नियम. आइए आपको इसके बारे में डिटेल से बताते हैं.

EPFO 3.0 के तहत कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें प्रोविडेंट फंड तक आसान पहुंच, ऑटो-क्लेम सेटलमेंट, ATM और UPI से तुरंत PF निकालना, और कर्मचारी की पसंद के बैंक खाते में आसानी से पैसा ट्रांसफर करना शामिल है. EPFO 3.0 के तहत सदस्य UPI पर अपना PF बैलेंस भी देख सकेंगे. EPFO 3.0 के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ATM और UPI से PF का पैसा निकालने का विकल्प मिलेगा. इससे लोगों को अपना पैसा पाने के लिए बैंक या EPFO ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. हालांकि, कुछ सीमाएं और शर्तें हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है.

इतना निकाल सकेंगे पैसा?

EPFO, UPI या ATM से PF बैलेंस निकालने की अधिकतम सीमा खाते में जमा कुल रकम के 50% तक तय कर सकता है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि सदस्य कुछ पैसा बचाकर रख सकें और जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल कर सकें. कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, EPFO सदस्यों के लिए ATM कार्ड भी जारी कर सकता है, जिससे वे सीधे ATM से पैसा निकाल सकेंगे. ये कार्ड PF खाते से जुड़े होंगे.

ATM और UPI से PF बैलेंस कौन निकाल सकता है?

EPFO के सदस्यों को PF का पैसा आसानी से निकालने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी. सदस्य के पास एक्टिव यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) होना चाहिए. मोबाइल नंबर और UAN दोनों चालू होने चाहिए. इसके अलावा, UAN का Aadhaar, PAN, बैंक खाता संख्या और IFSC कोड से जुड़ा होना जरूरी है. बिना किसी परेशानी के सेवा देने के लिए, EPFO ने 32 सरकारी और निजी बैंकों के साथ समझौता किया है, ताकि कंपनियां सीधे बैंकों में PF का पैसा जमा कर सकें और PF क्लेम प्रोसेस होने में लगने वाला समय कम हो सके.

सऊदी अरब में फंसे महाराष्ट्र के 41 भारतीय, सुप्रिया सुले ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से लगाई मदद की गुहार…

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सऊदी अरब की राजधानी रियाद से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जहां महाराष्ट्र के जालना जिले के भोकरदन के रहने वाले 41 भारतीय नागरिक पिछले कुछ समय से फंसे हुए हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई है।

क्या है पूरा मामला?

सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ये सभी यात्री महाराष्ट्र के भोकरदन क्षेत्र के निवासी हैं। वे रियाद से मुंबई लौटने के लिए तैयार थे, लेकिन अंतिम समय पर अकासा एयर (Akasa Air) की उनकी उड़ान अचानक रद्द कर दी गई। विमान सेवा रद्द होने के कारण इन यात्रियों के पास न तो घर लौटने का कोई विकल्प बचा है और न ही वहां रुकने की कोई ठोस व्यवस्था है।

सुप्रिया सुले का सरकार को संदेश

सांसद सुले ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, सऊदी अरब में स्थित भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल को टैग करते हुए ट्वीट किया। उन्होंने मांग की है कि इन नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें जल्द से जल्द भारत वापस लाने के लिए तत्काल राजनयिक कदम उठाए जाएं। सुप्रिया सुले ने जोर देते हुए कहा कि यह केवल एक फ्लाइट कैंसिल होने का तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि हमारे नागरिकों की सुरक्षा और उनके मानवाधिकारों का सवाल है। प्रशासन को सभी बाधाओं को हटाकर उन्हें सुरक्षित स्वदेश लाना चाहिए।

प्रभावित यात्रियों की सूची

सांसद सुप्रिया सुले ने पारदर्शिता और पहचान के लिए यात्रियों की पूरी सूची भी सार्वजनिक की है। फंसे हुए लोगों में आफरीन बेगम, शेख तालेब, सिकंदर खान, हसीना बेगम, शेख अनवर, अमजद खान, आसमा शेख, सुरेय्या बी, सीमा बेगम, जमीला बेगम, रफीक सईद कादरी और कई अन्य शामिल हैं। सूची में महिलाएं और छोटे बच्चे (जैसे एमएसटीआर जकवान और मिस आयशा) भी शामिल हैं, जो इस स्थिति में सबसे अधिक परेशान हो रहे हैं।

परिजनों की बढ़ी चिंता

इधर महाराष्ट्र में इन यात्रियों के परिजनों की नींद उड़ी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विदेशी जमीन पर इस तरह अचानक फंस जाना डरावना है। परिजनों ने सरकार से अपील की है कि उनके अपनों को रियाद से निकालने के लिए वैकल्पिक फ्लाइट या विशेष व्यवस्था की जाए। फिलहाल, हर किसी की नजरें विदेश मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हैं।

Assam Chunav 2026: शाही परिवार की हार की सेंचुरी लगेगी, असम में PM मोदी का कांग्रेस पर वार, जनता से की ये अपील…

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PM Modi Assam Visit: असम विधानसभा चुनाव(Assam Chunav) में मतदान को अब कुछ ही दिन बाकी हैं, और इस मौके पर हर पार्टी अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। असम के बारापेटा जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि शाही परिवार की हार की सेंचुरी लगेगी।

बारापेटा जिले के भवानीपुर-सोरभोग में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस हमेशा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए संकीर्ण दृष्टिकोण अपना रही है, जबकि भाजपा की योजना दीर्घकालिक विकास की है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा जो कहती है, वो करके दिखाती है, और असम की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

असम की पहचान को विश्वभर में ऊंचा करना है: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 10 सालअसम की पहचान को बचाने के लिए थे, और अब हमें असम की पहचान को दुनिया में बुलंद करना है। उन्होंने कहा, “आपका वोट(Assam Chunav) इस बार विकसित असम के निर्माण की नींव को मजबूत करेगा।” प्रधानमंत्री ने असम के विकास के लिए भाजपा की योजनाओं और प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए जनता से भाजपा को समर्थन देने की अपील की।

कांग्रेस पर बोला हमला

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि कांग्रेस के पास जनता के बीच जाने और अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करने की हिम्मत नहीं है। “देश के जिन एक-दो राज्यों में कांग्रेस की सरकारें बची हैं, वहां पर कांग्रेस कभी जनता के बीच अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर नहीं जाती है।”

उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, भाजपा सरकार साफ नीयत से जनता को बताती है कि हमने जनता की सेवा के लिए क्या किया। इस चुनावी रैली (Assam Chunav) में पीएम मोदी ने भाजपा की योजनाओं और असम के विकास के मुद्दे पर जोर देते हुए कांग्रेस को उसके भ्रष्टाचार और विकासहीनता के लिए जिम्मेदार ठहराया।

BJP Foundation Day: स्थापना दिवस पर PM Modi ने दिया बड़ा संदेश, 2047 के लक्ष्य पर टिकी नजर, जानें क्या कहा…

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PM Modi on BJP Foundation Day: भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को अपना स्थापना दिवस मना रही है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर के पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आगामी लक्ष्यों की रूपरेखा शेयर की।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भाजपा की पूरी कार्यप्रणाली ‘इंडिया फर्स्ट’ के सिद्धांत पर आधारित है।

उन्होंने बताया कि केंद्र और कई राज्यों में पार्टी की सरकारों ने अपने दृष्टिकोण के केंद्र में हमेशा जनकल्याण को रखा है। प्रधानमंत्री के अनुसार, पार्टी का सामूहिक संकल्प भारत को प्रगति और समृद्धि की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

‘इंडिया फर्स्ट’ और विकसित भारत का संकल्प: पीएम मोदी

स्थापना दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने पार्टी की वैचारिक यात्रा और उसकी कार्यक्षमता पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि समाज सेवा में अग्रणी एक संगठन है जो हमेशा राष्ट्र को सर्वोपरि रखता है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि पार्टी की नीतियों का प्रभाव धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

दृढ़ संकल्प वह शक्ति है, जो कठिन से कठिन चुनौती को भी आसान बना देती है। हमारे परिश्रमी कार्यकर्ता इसके जीवंत उदाहरण हैं, जिन्होंने अपने समर्पण और सेवा-भाव से भाजपा को इस ऐतिहासिक ऊंचाई तक पहुंचाया है। पार्टी के स्थापना दिवस पर उन्हें मेरी ढेरों शुभकामनाएं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘विकसित भारत’ का संकल्प ही वह शक्ति है जो देश को आने वाले दशकों में एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगी। इस संदेश के जरिए उन्होंने भविष्य की उन योजनाओं का संकेत दिया, जो आम जनता के जीवन स्तर को सुधारने से जुड़ी हैं।

जनसंघ के दौर से दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनने तक का सफर

भाजपा के वर्तमान स्वरूप को समझने के लिए इसके इतिहास पर गौर करना आवश्यक है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस अवसर पर जनसंघ काल की चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि शून्य से शुरू होकर दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनने तक की यह यात्रा आसान नहीं थी। यह सफर उन अनगिनत कार्यकर्ताओं के त्याग, तपस्या और बलिदान की कहानी है जिन्होंने दशकों तक विपरीत परिस्थितियों में काम किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी उन कार्यकर्ताओं को याद किया जिनकी निष्ठा और संघर्ष ने पार्टी के विकास को आकार दिया है। उन्होंने जमीनी स्तर पर अथक परिश्रम करने वाले कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए उन्हें सुशासन के प्रति समर्पित बताया।

क्या बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत को अपनी सरकारों की सफलता का मूल मंत्र बताया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा आज भारतीय राजनीति के शिखर पर है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी समाज के सभी वर्गों के विकास और उनके कल्याण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस पर मैं सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूं। प्रधानमंत्री श्री के नेतृत्व में आज न केवल विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है बल्कि वह भारतीय राजनीति के शिखर पर भी स्थापित हो चुकी है।…

राजनाथ सिंह के अनुसार, लोक कल्याण के प्रति यह समर्पण सरकार की नीतियों और कामकाज में पूरी तरह झलकता है। वहीं, नितिन नवीन ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने जिस ‘अंत्योदय’ यानी अंतिम व्यक्ति के उदय का स्वप्न देखा था, उसे वर्तमान नेतृत्व धरातल पर साकार कर रहा है।

चांदी की चमक फीकी होते ही सिल्वर ETF का हुआ बुरा हाल, 2 महीने में 15% तक गिरे शेयर्स…

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पिछले कुछ महीनों में सिल्वर ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में तेज गिरावट देखने को मिली है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. सिर्फ दो महीनों में करीब 15% तक नुकसान हुआ है. इसके साथ ही 1 अप्रैल से लागू हुए नए वैल्यूएशन नियम ने भी निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है.

अगर आप भी इंवेस्टर हैं तो आपको जरूर जानना चाहिए कि ऐसे समय में आपको अपने पोर्टफोलियों को बेहतर करने के लिए क्या करना चाहिए.

क्या है गिरावट की वजह?

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं. चीन में सिल्वर ट्रेडिंग पर सख्ती के बाद बड़े स्तर पर बिकवाली हुई. इसके अलावा ग्लोबल सिल्वर ETF से पैसा निकलना, मजबूत अमेरिकी डॉलर और कमजोर इंडस्ट्रियल डिमांड ने भी कीमतों पर दबाव बनाया. हाल ही में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार को प्रभावित किया है.

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय भावनाओं में आकर फैसले लेने के बजाय एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना चाहिए. 360 ONE एसेट के राहुल खेतावत के अनुसार, निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना चाहिए. वहीं आनंद राठी वेल्थ के हृषिकेश पालवे का कहना है कि लंबी अवधि के लिए इक्विटी सबसे बेहतर विकल्प है और धीरे-धीरे सिल्वर में निवेश कम करना चाहिए.

गोल्ड बन सकता है बेहतर विकल्प

एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा समय में गोल्ड, सिल्वर के मुकाबले ज्यादा स्थिर निवेश है. पोर्टफोलियो में 510% हिस्सा गोल्ड का रखना फायदेमंद हो सकता है, जबकि सिल्वर में फिलहाल निवेश से बचने की सलाह दी जा रही है. सिल्वर की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है.

नए नियम का क्या होगा असर?

1 अप्रैल से लागू नए नियम के तहत अब गोल्ड और सिल्वर ETF की वैल्यूएशन घरेलू स्पॉट प्राइस के आधार पर होगी. पहले यह लंदन के बेंचमार्क पर आधारित थी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे निवेशकों को ज्यादा पारदर्शिता मिलेगी और रिटर्न भारतीय बाजार के हिसाब से दिखेंगे.

आगे क्या करें निवेशक?

विशेषज्ञों के अनुसार, जिन निवेशकों के पास पहले से सिल्वर ETF हैं, वे तुरंत बेचने के बजाय धीरे-धीरे अपने निवेश को इक्विटी और गोल्ड की ओर शिफ्ट कर सकते हैं. FY27 में सिल्वर की कीमतों में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है, इसलिए सतर्क रहकर निवेश करना ही समझदारी होगी.