Home Blog Page 11

बच्चों में बढ़ती सांस संबंधी समस्याओं के बीच योग को स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनाने का प्रयास…

0

“बच्चों को ब्रोंकियल अस्थमा से कैसे बचाएं, विशेषज्ञों ने योग से श्वसन क्षमता बढ़ाने पर दिए महत्वपूर्ण सुझाव”

बच्चों में बढ़ती सांस संबंधी समस्याओं के बीच योग को स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

इसी उद्देश्य से पीएम ई-विद्या पर एक विशेष कार्यक्रम ‘योगशक्ति-बच्चों में ब्रोंकियल अस्थमा का योगिक प्रबंध’ आयोजित किया गया है।

इस लाइव सत्र में योग विशेषज्ञों ने बच्चों में ब्रोंकियल अस्थमा के प्रबंधन में योग की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की तथा उपयोगी योगाभ्यासों का प्रदर्शन भी किया गया।

एनसीईआरटी के अनुसार कार्यक्रम का आयोजन 7 जुलाई 2026 की सुबह पीएम ई-विद्या चैनल 6 से 12 पर किया गया। यह सत्र विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक सभी लोगों के लिए उपयोगी रहा। इस कार्यक्रम में योग विशेषज्ञ कृष्ण कुमार गुप्ता, योग प्रशिक्षक एवं एमडीएनआईवाई के पूर्व छात्रों ने स्कूली बच्चों के लिए उपयुक्त योग पद्धतियों और उनके लाभों की जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों के साथ बच्चों को संवाद का अवसर भी मिला।

गौरतलब है कि योग को समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। विभिन्न अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि चिकित्सकीय उपचार के साथ पूरक रूप में अपनाए जाने पर योग बच्चों में अस्थमा से जुड़े कुछ लक्षणों और फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार लाने में सहायक हो सकता है।

यह पहल विद्यार्थियों और अभिभावकों को योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कार्यक्रम से जुड़कर प्रतिभागी यह जान सके कि नियमित योगाभ्यास किस प्रकार बच्चों के समग्र स्वास्थ्य, श्वसन क्षमता और मानसिक संतुलन को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

अभी 21 जून को ही अंतरराष्ट्रीय योग दिवस दुनियाभर में मनाया गया था। इस अवसर पर देशभर में बड़े पैमाने पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस वर्ष की थीम के अनुरूप लोगों ने स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक संतुलन के लिए योग अपनाने का संकल्प लिया। बड़ी संख्या में छात्रों के सामूहिक योग सत्र आयोजित हुए।

योग प्रशिक्षकों ने प्राणायाम, आसन और ध्यान के महत्व पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों के मुताबिक कि नियमित योग अभ्यास तनाव कम करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने बहरीन के उप प्रधानमंत्री से की मुलाकात, द्विपक्षीय सहयोग पर हुई चर्चा…

0

विदेश मंत्री एस. जयशंकर छह देशों की अहम यात्रा पर हैं। दौरे के तीसरे दिन वह बहरीन के उप प्रधानमंत्री खालिद बिन अब्दुल्ला अल खलीफा से मिले। मंगलवार सुबह हुई इस मुलाकात के दौरान दोनों ने भारत और बहरीन के बीच विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

एस जयशंकर ने एक्स पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा,” मंगलवार सुबह बहरीन के उप प्रधानमंत्री महामहिम खालिद बिन अब्दुल्ला अल खलीफा से मिलकर खुशी हुई। हमने विभिन्न क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। साथ ही क्षेत्रीय स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।”

उन्होंने आगे लिखा कि बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत-बहरीन संबंधों को और मजबूत करने तथा आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा की।

विदेश मंत्री 5 जुलाई को कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, बेल्जियम और अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। दस दिवसीय यात्रा का मकसद इन देशों के साथ अपने रिश्तों को और सुदृढ़ करना है।

विदेश मंत्री की खाड़ी देशों की यात्रा की टाइमिंग काफी अहम है। यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद पश्चिम एशिया की राजनीतिक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है।

यात्रा से पहले खाड़ी देशों की यात्रा को लेकर विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक बयान जारी किया। जिसके मुताबिक, “विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 5 से 10 जुलाई तक कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इन देशों की यात्रा के दौरान, वे अपने समकक्षों और वहां के नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। यात्रा का फोकस इन चार देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने पर होगा और साथ ही क्षेत्रीय घटनाक्रमों और आपसी हित के मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान का अवसर भी मिलेगा।”

इसके बाद, विदेश मंत्री 13 जुलाई को न्यूयॉर्क जाएंगे, जहां वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। फिर वे 14-15 जुलाई को ब्रुसेल्स में तीसरी भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की बैठक में शामिल होंगे और यूरोपीय संघ और बेल्जियम में समकक्षों से बातचीत करेंगे।

शिवराज चौहान ने लॉन्च किया ‘प्रगति’ प्रोजेक्ट, बोले-विकसित भारत बिना कृषि और समृद्ध गांव संभव नहीं…

0

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को ‘प्रगति’ नामक एक राष्ट्रीय पहल का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी बनाकर देशभर के 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय, उत्पादकता और आजीविका में व्यापक सुधार लाना है।

यह बहु-साझेदार पहल भारत में समावेशी, टिकाऊ और जलवायु-संवेदनशील कृषि परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत का सपना विकसित कृषि और समृद्ध गांवों के बिना संभव नहीं है। सरकार का फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लागत घटाकर किसानों की आय बढ़ाना, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और कृषि को लाभकारी बनाना है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि छोटे जोत वाले किसानों के लिए पारंपरिक खेती पर्याप्त नहीं है, इसलिए वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि ‘प्रगति’ इसी सोच का विस्तार है जो किसानों को तकनीक, मशीनीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और बाजार से जोड़कर उनकी वास्तविक आय बढ़ाने का रास्ता तैयार करेगा।

यह पहल देश के प्रमुख कृषि राज्यों- मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड में लागू की जाएगी। कार्यक्रम के तहत तैयार किए जाने वाले कृषि-उद्यमी गांव स्तर पर सलाह, मिट्टी परीक्षण, मशीन सेवाएं, वित्तीय लिंक, बाजार कनेक्ट और वैकल्पिक आय के अवसर उपलब्ध कराएंगे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल खेती करने से काम नहीं चलेगा, हमें वैल्यू एडिशन और विविधीकरण की ओर बढ़ना होगा- बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों से किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि संभव है। उन्होंने तकनीक के उपयोग, ड्रोन, डिजिटल सलाह और वैज्ञानिक खेती को भविष्य का आधार बताया।

कार्यक्रम में महिला भागीदारी को विशेष महत्व देते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि बड़ी संख्या में ‘कृषि सखी’ और महिला उद्यमी इस बदलाव की धुरी बनेंगी और एक-एक उद्यमी पूरे गांव की तस्वीर बदल सकता है। ‘प्रगति’ केवल एक योजना नहीं, बल्कि परिवर्तन का संकल्प है। यह गांवों को आत्मनिर्भर, रोजगारयुक्त और सशक्त बनाने का माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि राज्यवार कृषि रोडमैप और वैज्ञानिक आधार पर फसल योजना के जरिए सरकार कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव की दिशा में काम कर रही है।

cg” केबिनेट बैठक 08 जुलाई को शाम 4 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में होगी…”

0

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद् (केबिनेट) की बैठक बुधवार, 08 जुलाई को शाम 4.00 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में होगी।

 

लगातार चार सत्रों की तेजी के बाद भारतीय शेयर बाजार में मुनाफावसूली, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद…

0

लगातार चार सत्रों की तेजी के बाद भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को मुनाफावसूली देखने को मिली।

दिन के अंत में सेंसेक्स 104.35 अंक या 0.13 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 78,180.72 और निफ्टी 31.65 अंक या 0.13 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,398.70 पर था।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 186.20 अंक या 0.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 62,285.30 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 105.70 अंक या 0.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,213.40 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स पैक में एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टाइटन, इटरनल, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, आईटीसी और एसबीआई गेनर्स थे। ट्रेंट, बीईएल, एलएंडटी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, टाटा स्टील, सन फार्मा, पावर ग्रिड, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमएंडएम, इंडिगो, एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल लूजर्स थे।

सूचकांकों में निफ्टी आईटी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी मिड स्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम हरे निशान में बंद हुए। निफ्टी ऑटो, निफ्टी मीडिया, निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑयलएंडगैस लाल निशान में थे।

बाजार के जानकारों ने कहा कि सत्र के दूसरे हिस्से में मुनाफा वसूली देखने को मिली। इसकी वजह एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी फेड के मिनट्स से पहले निवेशकों का सतर्क होना है।

उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, आईटी शेयरों ने बाजार को सहारा देना जारी रखा और जून तिमाही के नतीजों के सीजन से पहले अपनी बढ़त बनाए रखी। अमेरिका-ईरान विवाद और ट्रेड टैरिफ को लेकर चिंताएं कम होने के साथ, बाजार का ध्यान अब वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के नतीजों और मानसून की प्रगति पर जा रहा है। इस बीच, विदेशी निवेश में सुधार और रुपए में स्थिरता से बाजार के सेंटीमेंट को निकट भविष्य में सहारा मिलने की उम्मीद है।

पीएम मोदी को मिला इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान…

0

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की सूची में एक और प्रतिष्ठित सम्मान जुड़ गया है। इंडोनेशिया ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किया है।”

इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को मिले वैश्विक सम्मानों की संख्या बढ़कर 35 हो गई है।

“बिंतांग आदिपूर्णा,” जिसे “मेडल ऑफ ऑनर” भी कहा जाता है, इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने इंडोनेशिया गणराज्य की एकता, निरंतरता और समृद्धि के लिए असाधारण योगदान दिया हो।”

”इस सम्मान के साथ प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2016 से अब तक एशिया, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के देशों से 35 अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर चुके हैं, जो किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री को मिले सम्मानों में सबसे अधिक हैं।”

इनमें से कई सम्मान सदियों पुराने इतिहास और परंपराओं से जुड़े हुए हैं।

”हाल ही में सेशेल्स ने प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया था। यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में उनके नेतृत्व को मान्यता देते हुए दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान को जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे सभी देशों को समर्पित किया था।”

”प्रधानमंत्री मोदी को मिले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में भूटान का ‘ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो’ भी शामिल है, जो भूटान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। वह यह सम्मान पाने वाले पहले विदेशी शासनाध्यक्ष बने।”

”इसके अलावा, नाइजीरिया ने उन्हें ‘ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजर’ से सम्मानित किया। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के बाद वह यह सम्मान पाने वाले दूसरे विदेशी नेता बने।”

इजरायल ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘मेडल ऑफ द नेसेट’ प्रदान किया, जिससे वह इस सम्मान को पाने वाले पहले व्यक्ति बने।”

मिस्र ने उन्हें देश के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द नाइल’ से नवाजा, जिसे राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने प्रदान किया।”

वहीं, अमेरिका ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘लीजन ऑफ मेरिट’ सम्मान दिया। यह सम्मान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रदान किया गया था।”

रूस ने भी प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च राजकीय सम्मानों में शामिल ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से सम्मानित किया, जो भारत-रूस रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान की मान्यता थी।”

इनमें से कई प्रतिष्ठित सम्मान पहले दुनिया के प्रमुख नेताओं जैसे बराक ओबामा, नेल्सन मंडेला, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय, शी जिनपिंग और विंस्टन चर्चिल को दिए जा चुके हैं।”

इंडोनेशिया का यह नया सम्मान प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक पहचान को और मजबूत करता है। उनके सम्मान में विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा दिए गए राजकीय पुरस्कार, शैक्षणिक सम्मान और पर्यावरण संबंधी पुरस्कार शामिल हैं।”

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का प्रस्ताव आईपीओ पर उठ रहे सवाल…

0

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का प्रस्तावित 30,000 करोड़ रुपए का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा शेयर इश्यू माना जा रहा है।

हालांकि यह आईपीओ करीब एक दशक की देरी के बाद सामने आ रहा है। इस देरी की मुख्य वजह को-लोकेशन विवाद रही।

अब जब एक्सचेंज लिस्टिंग की तैयारी कर रहा है, तब डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर हाल में लगाए गए नियामकीय प्रतिबंधों के कारण उसकी आय, मुनाफे और बाजार हिस्सेदारी पर असर पड़ा है, जिससे इस बहुप्रतीक्षित आईपीओ को लेकर नए सवाल भी खड़े हो गए हैं। यह जानकारी वैल्यू रिसर्च की रिपोर्ट में दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा मामला वर्ष 2010 से 2014 के बीच सामने आए को-लोकेशन विवाद से जुड़ा है। आरोप था कि कुछ ब्रोकर्स एनएसई के डेटा सेंटर में बैकअप सर्वर से पहले जुड़ जाते थे, जिससे उन्हें अन्य निवेशकों की तुलना में कुछ मिलीसेकेंड पहले बाजार संबंधी जानकारी मिल जाती थी। फॉरेंसिक ऑडिट में इस पैटर्न की पुष्टि हुई, जिसके बाद सेबी ने जांच शुरू की।

जब एनएसई ने वर्ष 2016 में अपना ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया, तब तक यह मामला पूरी तरह सुलझा नहीं था। नियामकीय अनिश्चितता के कारण आईपीओ की प्रक्रिया रोक दी गई और इसके बाद मामला कई वर्षों तक सेबी की कार्रवाई, अपीलीय न्यायाधिकरण और अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब यह मामला अंतिम चरण में है। एनएसई ने सेबी के साथ 1,491 करोड़ रुपए के संशोधित सेटलमेंट का प्रस्ताव रखा है, जिसे मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद आईपीओ का रास्ता साफ होता दिख रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2022 में आशीष चौहान की एनएसई में वापसी ने आईपीओ प्रक्रिया को फिर से गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चौहान एनएसई की संस्थापक टीम का हिस्सा रहे हैं और बाद में उन्होंने बीएसई की 2017 की लिस्टिंग का नेतृत्व भी किया था। उनकी वापसी से एक्सचेंज की नियामकीय विश्वसनीयता मजबूत हुई और लंबे समय से अटका आईपीओ दोबारा पटरी पर आया।

इस दौरान, जबकि एनएसई सूचीबद्ध नहीं हो सका, उसके कारोबार में तेज विस्तार हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में एक्सचेंज की आय लगभग 9 गुना बढ़ी। वर्ष 2016 में कुल आय में ट्रांजैक्शन चार्ज की हिस्सेदारी 49.5 प्रतिशत थी, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 78.7 प्रतिशत हो गई। इसका सबसे बड़ा कारण डेरिवेटिव्स, खासकर ऑप्शंस ट्रेडिंग में आई जबरदस्त वृद्धि रही।

आज एनएसई की कुल परिचालन आय का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा ऑप्शंस ट्रेडिंग से आता है। लेकिन यही क्षेत्र अब नियामकीय निगरानी में है। सेबी के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में 91 प्रतिशत रिटेल फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडर्स को शुद्ध नुकसान हुआ, जिसकी कुल राशि करीब 1.1 लाख करोड़ रुपए रही।

इसी को देखते हुए सेबी ने वर्ष 2024 से डेरिवेटिव्स बाजार में कई बदलाव लागू किए, जिनमें दोनों एक्सचेंजों के सात साप्ताहिक एक्सपायरी दिनों को घटाकर एक करना, एनएसई के निफ्टी की एक्सपायरी मंगलवार और बीएसई के सेंसेक्स की एक्सपायरी गुरुवार तय करना, कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाना और एक्सपायरी के समय अतिरिक्त मार्जिन लागू करना शामिल है।

वित्त वर्ष 2026 इन नए नियमों के तहत पूरा संचालन करने वाला पहला साल रहा। इस दौरान एनएसई की परिचालन आय में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि समायोजित शुद्ध लाभ 17 प्रतिशत घटकर 9,101 करोड़ रुपए रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 10,978 करोड़ रुपए था।

इसी अवधि में इक्विटी ऑप्शंस बाजार में एनएसई की हिस्सेदारी भी 97 प्रतिशत से घटकर 75 प्रतिशत पर आ गई।

रिपोर्ट के अनुसार, इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि एनएसई की आय अभी भी काफी हद तक ऑप्शंस कारोबार पर निर्भर है। अन्य व्यवसायिक गतिविधियां इतनी बड़ी नहीं हैं कि वे इस गिरावट की भरपाई कर सकें।

हालांकि एक्सचेंज की कुल आय का शेष 21 प्रतिशत हिस्सा डेटा फीड्स, लिस्टिंग फीस, इंडेक्स लाइसेंसिंग और को-लोकेशन चार्जेज से आता है। ये अपेक्षाकृत स्थिर और नियमित आय के स्रोत हैं और इनमें लगातार वृद्धि भी देखी जा रही है।

ब्रिक्स 2026 के अध्‍यक्ष के तौर पर भारत 11 और 12 जुलाई को नागपुर में ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक…

0

ब्रिक्स 2026 के अध्‍यक्ष के तौर पर भारत 11 और 12 जुलाई को नागपुर में ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की तीसरी बैठक की मेजबानी करेगा। इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी परिवहन क्षेत्र में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के स्‍थायित्‍व और आवागमन से संबंधित प्रमुख प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ आएंगे।

यह बैठक भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के विषय “अनुकूलन, नवाचार, सहयोग और स्‍थायि‍त्‍व के लिए निर्माण (ब्रिक्स)” के तहत आयोजित की जा रही है, जो तकनीकी नवाचार और बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 11 जुलाई को ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें अन्य सदस्य देशों के मंत्री भी भाग लेंगे।

ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच परिवहन क्षेत्र में नीतिगत संवाद और सहयोग के प्रमुख मंच के रूप में स्थापित, परिवहन कार्य समूह सदस्य देशों में सुदृढ़ और कुशल परिवहन प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण तंत्र के रूप में उभरा है। रूस और ब्राजील द्वारा आयोजित परिवहन कार्य समूह की पहली दो महत्वपूर्ण बैठकों के बाद, इस तीसरे आयोजन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय परिवहन सहयोग को और अधिक मजबूत करना है।

यह थीम भारत के विकसित भारत 2047 विजन के साथ निकटता से मेल खाती है, जो डेटा-संचालित, जलवायु-जागरूक और आपदा-प्रतिरोधी परिवहन इकोसिस्‍टम का समर्थन करता है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सर्कुलर अर्थव्यवस्था संबंधी समाधानों को एकीकृत करके, भारत का लक्ष्य रसद लागत को कम करना और साथ ही एक टिकाऊ, बहुआयामी नेटवर्क स्थापित करना है जो हरित आवागमन को गति प्रदान करता है।

इन दो दिनों के दौरान, वरिष्ठ अधिकारी रूस और ब्राजील की अध्यक्षता के बाद से हासिल परिवहन सहयोग की प्रगति की समीक्षा करेंगे, अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रणालियों का आदान-प्रदान करेंगे और सहयोग के उभरते क्षेत्रों पर विचार-विमर्श करेंगे, जिनमें सतत विमानन ईंधन (एसएएफ), शहरी आवागमन, बहु-मोडल परिवहन, टिकाऊ साजो-सामान की आपूर्ति श्रृंखलाएं, डीकार्बोनाइजेशन और विस्तारित एआई-आधारित प्रौद्योगिकियों को अपनाना शामिल है।

आज, विस्तारित ब्रिक्स समूह में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। यह समूह विश्व की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है। ब्रिक्स देशों के बीच परिवहन सहयोग को मजबूत करने से कारोबारी सुगमता बनाने, क्षेत्रीय और अंतरमहाद्वीपीय संपर्क में सुधार करने, रसद दक्षता बढ़ाने और अधिक सशक्‍त वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में योगदान देने की उम्मीद है।

नागपुर में आयोजित होने वाली ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की तीसरी बैठक से ब्रिक्स देशों के बीच परिवहन सहयोग को और मजबूत करने, रूस और ब्राजील द्वारा आयोजित बैठकों में उत्पन्न गति को तेज करने और नवाचार-संचालित विकास के लिए ब्लॉक की सामूहिक प्रतिबद्धता को सशक्‍त होने की उम्मीद है।

cg” कृषि विभाग के मार्गदर्शन से बढ़ा उत्साह धान के स्थान पर कुछ हिस्से में गेंदा फूल की करेंगे खेती…”

0

प्रगतिशील किसान वीरेंद्र साहू ने अपनाया फसल विविधीकरण…

– कम पानी में गेंदा फूल की खेती से बेहतर आय की उम्मीद
– धान के स्थान पर कुछ हिस्से में गेंदा फूल की करेंगे खेती
– कृषि विभाग के मार्गदर्शन से बढ़ा उत्साह

राजनांदगांव” जिले के ग्राम जंगलेश्वर के प्रगतिशील किसान श्री वीरेंद्र कुमार साहू ने इस खरीफ मौसम में परंपरागत धान की खेती के स्थान पर कम पानी में होने वाली गेंदा फूल की खेती अपनाकर फसल परिवर्तन की दिशा में सराहनीय पहल की है।

उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और जल की कमी को देखते हुए कम पानी वाली फसलों की खेती किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती है।

किसान श्री साहू के पास लगभग 20 एकड़ कृषि भूमि है।**

इस वर्ष उन्होंने अपनी कृषि भूमि के कुछ हिस्से में धान के स्थान पर गेंदा फूल की खेती करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने बताया कि पिछले खरीफ सीजन में धान की खेती के दौरान अल्प वर्षा एवं बेमौसम बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ, जिससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।”

यही कारण है कि इस बार उन्होंने कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसल को चुना है। उन्होंने बताया कि गेंदा फूल की खेती का निर्णय कृषि विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में लिया गया है।”

इसके लिए उन्होंने कृषि विभाग से मृदा परीक्षण भी कराया है तथा समय-समय पर तकनीकी सलाह प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने ग्राम मोहड़ में पिछले वर्ष गेंदा फूल की सफल खेती देखकर प्रेरणा ली, जहां किसानों को अच्छी आय प्राप्त हुई थी।”

किसान श्री वीरेन्द्र साहू ने बताया कि गेंदा फूल की मांग वर्षभर विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में बनी रहती है।

निकटवर्ती दुर्ग जिले में इसका बड़ा बाजार उपलब्ध होने से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने की संभावना रहती है।”

उनका विश्वास है कि गेंदा फूल की खेती से कम पानी, कम लागत और बेहतर मुनाफा प्राप्त होगा।’

उन्होंने अन्य किसानों से भी अपील की कि जल संकट की स्थिति को देखते हुए वे भी धान के साथ-साथ कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को अपनाने पर विचार करें।’

उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ जल संरक्षण में भी मदद मिलेगी।’

किसान श्री वीरेंद्र कुमार साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए 15 हजार रूपए की आदान सहायता राशि किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी और बेहद उत्साहवर्धक है।’

इससे अधिक से अधिक किसान फसल विविधीकरण की ओर प्रेरित होंगे और उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।’

इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया है।’

cg” पीएम अजय योजना के लिए आवेदन आमंत्रित…”

0

“पीएम अजय योजना” 

राजनांदगांव। प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम अजय) योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले को 217 का लक्ष्य दिया गया है।

राजनांदगांव ” योजना के तहत लघु उद्योग एवं व्यापार के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण स्वीकृत कराया जाता है।**

“इसके तहत किराना, मनिहारी, कपड़ा, नाई सेलून, ब्यूटी पार्लर, टेलरिंग, फैंसी, मोटर मैकेनिक, सायकिल मरम्मत, टीवी-मोबाईल-रेडियो रिपेयरिंग, वाइंडिंग, मुर्गीपालन, बकरी पालन, सब्जी व्यवसाय, दोना पत्तल निर्माण, लघु एवं कुटीर उद्योग, स्थानीय परिस्थिति अनुसार अन्य आवश्यकता जनित व्यवसाय के लिए ऋण प्रदान किया जाता है।”

“इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी ऋण आवेदन फार्म एवं इस संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए कार्यालय जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति मर्यादित राजनांदगांव एवं मोबाईल नंबर 9406012226 से संपर्क कर सकते है।”