पिछले कुछ महीनों में सिल्वर ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में तेज गिरावट देखने को मिली है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. सिर्फ दो महीनों में करीब 15% तक नुकसान हुआ है. इसके साथ ही 1 अप्रैल से लागू हुए नए वैल्यूएशन नियम ने भी निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है.
अगर आप भी इंवेस्टर हैं तो आपको जरूर जानना चाहिए कि ऐसे समय में आपको अपने पोर्टफोलियों को बेहतर करने के लिए क्या करना चाहिए.
क्या है गिरावट की वजह?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं. चीन में सिल्वर ट्रेडिंग पर सख्ती के बाद बड़े स्तर पर बिकवाली हुई. इसके अलावा ग्लोबल सिल्वर ETF से पैसा निकलना, मजबूत अमेरिकी डॉलर और कमजोर इंडस्ट्रियल डिमांड ने भी कीमतों पर दबाव बनाया. हाल ही में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार को प्रभावित किया है.
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय भावनाओं में आकर फैसले लेने के बजाय एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना चाहिए. 360 ONE एसेट के राहुल खेतावत के अनुसार, निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना चाहिए. वहीं आनंद राठी वेल्थ के हृषिकेश पालवे का कहना है कि लंबी अवधि के लिए इक्विटी सबसे बेहतर विकल्प है और धीरे-धीरे सिल्वर में निवेश कम करना चाहिए.
गोल्ड बन सकता है बेहतर विकल्प
एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा समय में गोल्ड, सिल्वर के मुकाबले ज्यादा स्थिर निवेश है. पोर्टफोलियो में 510% हिस्सा गोल्ड का रखना फायदेमंद हो सकता है, जबकि सिल्वर में फिलहाल निवेश से बचने की सलाह दी जा रही है. सिल्वर की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है.
नए नियम का क्या होगा असर?
1 अप्रैल से लागू नए नियम के तहत अब गोल्ड और सिल्वर ETF की वैल्यूएशन घरेलू स्पॉट प्राइस के आधार पर होगी. पहले यह लंदन के बेंचमार्क पर आधारित थी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे निवेशकों को ज्यादा पारदर्शिता मिलेगी और रिटर्न भारतीय बाजार के हिसाब से दिखेंगे.
आगे क्या करें निवेशक?
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन निवेशकों के पास पहले से सिल्वर ETF हैं, वे तुरंत बेचने के बजाय धीरे-धीरे अपने निवेश को इक्विटी और गोल्ड की ओर शिफ्ट कर सकते हैं. FY27 में सिल्वर की कीमतों में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है, इसलिए सतर्क रहकर निवेश करना ही समझदारी होगी.



