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CG: राज्यसभा सीटों पर चुनाव का ऐलान, इन नेताओं का खत्म होगा कार्यकाल…

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छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव का ऐलान हो गया है. कांग्रेस के दो राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है.

छत्तीसगढ़ में दो सीटों पर होगा राज्यसभा चुनाव

छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं, जिनके लिए चुनाव का ऐलान हो गया है. 16 मार्च 2026 को देश के अलग-अलग राज्यों से खाली हो रही राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ की भी दो सीटें हैं, जिन पर चुनाव होगा. राज्यसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ में सुगबुगाहट पहले से ही शुरू हो चुकी थी. बता दें कि बीजेपी और कांग्रेस विधायकों की संख्या को देखते हुए एक-एक राज्यसभा सीट बीजेपी और कांग्रेस को मिल सकती है. इसके लिए अब सुगबुगाहट और तेज होने वाली है.

इन नेताओं का कार्यकाल पूरा 

छत्तीसगढ़ से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. दोनों नेताओं का कार्यकाल अप्रैल में ही खत्म हो रहा है, ऐसे में मार्च में सीटों को भरने के लिए राज्यसभा चुनाव होंगे. दोनों नेताओं का कार्यकाल खत्म होने के बाद छत्तीसगढ़ में नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं, क्योंकि अब एक सीट बीजेपी के खातें में जाने वाली है, ऐसे में बीजेपी के नेता भी सक्रिए हो रहे हैं, जबकि कांग्रेस के नेता भी एक सीट के लिए एक्टिव हो रहे हैं. क्योंकि यह देखना भी दिलचस्प होगा कि बीजेपी और कांग्रेस स्थानीय नेताओं को राज्यसभा भेजेगी या बाहरी नेताओं को भी मौका मिलेगा.

छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की पांच सीटें 

बता दें कि छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की पांच सीटें आती है. वर्तमान में कांग्रेस के पास चार और बीजेपी के पास एक सीट है. कांग्रेस से केटीएस तुलसी, फूलोदेवी नेताम, राजीव शुक्ला, रंजीता रंजन हैं, जबकि बीजेपी से देवेंद्र प्रताप सिंह राज्यसभा सांसद हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की वापसी के बाद अब राज्यसभा के समीकरण भी बदलते दिख रहे हैं, जहां छत्तीसगढ़ में बीजेपी के राज्यसभा सांसदों की संख्या बढ़ सकती है. क्योंकि बीजेपी के पास 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 विधायक हैं, इसके अलावा एक विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हैं, ऐसे में अब बीजेपी के राज्यसभा सांसदों की संख्या 3 हो सकती है, जबकि कांग्रेस के सांसदों की संख्या 2 हो सकती है.

CG: आदिवासी क्षेत्रों में मतांतरण को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम सभाओं के अधिकारों पर लगाई मुहर, धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव…

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छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में मतांतरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने ग्राम सभाओं के अधिकारों को मजबूती दी है।

16 फरवरी 2026 को दिए गए निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ‘पेसा’ कानून के तहत ग्राम सभाओं को अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा का पूर्ण अधिकार है।

इस फैसले के बाद बस्तर से सरगुजा तक जनजातीय समाज को अपनी परंपराओं की सुरक्षा के लिए कानूनी आधार मिल गया है। मामला कांकेर जिले की उन ग्राम पंचायतों से जुड़ा था, जिन्होंने बाहरी धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया था। ग्रामीणों ने गांवों में सूचना पट्ट लगाकर इस संबंध में स्पष्ट संदेश भी दिया था।

हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट की मुहर

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पहले ही ग्राम पंचायतों के इस निर्णय को वैध माना था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे बरकरार रखते हुए कहा है कि अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए ग्राम सभाओं द्वारा उठाए गए एहतियाती कदम पूरी तरह वैधानिक हैं। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि ग्राम सभाएं केवल औपचारिक संस्था नहीं, बल्कि वास्तविक स्वशासन की इकाई हैं।

फैसले पर सियासी प्रतिक्रिया

निर्णय के बाद प्रदेश की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने धर्म प्रचारकों से सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने की बात कही। वहीं आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के चेयरमैन विकास मरकाम ने इसे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान की बड़ी जीत बताया।

गांव-गांव जनजागरण अभियान

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा और अन्य संगठनों ने गांवों में जनजागरण अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। पूर्व मंत्री और जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने कहा कि अब जब सर्वोच्च न्यायालय ने ग्राम सभाओं के अधिकारों को मान्यता दे दी है, तो समाज को जागरूक कर परंपराओं की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

इस निर्णय ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संरचना की रक्षा के लिए व्यापक अधिकार प्राप्त हैं।

CG: 7 अधिकारियों को मिला प्रमोशन, बनाए गए IAS, आप भी देखें लिस्ट…

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छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के 7 अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में प्रमोशन मिला है। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) ने 17 फरवरी 2026 मंगलवार की शाम इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। यह नियुक्तियां वर्ष 2024 की चयन सूची के तहत 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2024 के बीच उत्पन्न रिक्तियों के आधार पर की गई हैं। सभी अधिकारियों को प्रोबेशन पर नियुक्त करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल किया गया है और उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित किया गया है।

इन अधिकारियों को मिला प्रमोशन

  • तीरथराज अग्रवाल
  • लीना कोसम
  • सौमिल रंजन चौबे
  • बीरेंद्र बहादुर पंचभाई
  • सुमित अग्रवाल
  • संदीप कुमार अग्रवाल
  • आशीष कुमार टिकारिहा

यह प्रमोशन राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अब ये अधिकारी आईएएस के रूप में नई जिम्मेदारियां संभालेंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, आशीष टिकरिया वित्त मंत्री ओ पी चौधरी के ओएसडी है और तीरथ राज अग्रवाल मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी है।

CG: जन्म-मृत्यु पंजीयन योजना का कार्यान्वयन, जिला स्तरीय अन्तर्विभागीय समन्वय समिति का गठन…

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राजनांदगांव: भारत सरकार के जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969, संशोधित अधिनियम 2023 तथा छत्तीसगढ़ राज्य जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जन्म-मृत्यु पंजीयन योजना के कार्यान्वयन में किसी भी स्तर पर उत्पन्न गतिरोध को दूर करने एवं कार्यान्वयन एजेंसी को मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए राज्य शासन द्वारा जिला स्तरीय अन्तर्विभागीय समन्वय समिति का गठन किया गया है।

समिति में कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव अध्यक्ष है। समिति मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, सिविल सर्जन जिला चिकित्सालय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, उप संचालक पंचायत विभाग, उप संचालक जनसंपर्क विभाग, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), स्थानीय रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) नगरीय सदस्य है तथा जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं उप संचालक जिला योजना एवं सांख्यिकी
सदस्य-सचिव बनाया गया है।

जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 के क्रियान्वयन के संबंध में 31 दिसम्बर 2007 तक ग्रामीण क्षेत्रों में घटित जन्म व मृत्यु की घटनाओं को संबंधित थानों द्वारा जन्म-मृत्यु पंजीयन का कार्य किया जाता था एवं नगरीय निकाय की स्थापना दिवस से जन्म-मृत्यु पंजीयन का कार्य किया जाता है।

राज्य शासन द्वारा इस व्यवस्था में परिवर्तन किया गया एवं 1 जनवरी 2008 से ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत द्वारा जन्म-मृत्यु पंजीयन का कार्य किया जा रहा है, जबकि नगरीय क्षेत्रों में अब भी संबंधित नगरीय निकायों द्वारा यह कार्य यथावत जारी है। वर्ष 2014 से जिले के समस्त शासकीय अस्पतालों (सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और उप स्वास्थ्य केन्द्र) में संस्था में हुए जन्म-मृत्यु की घटना का पंजीयन का कार्य किया जा रहा है।

CG: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एवं लीड बैंक कार्यालय द्वारा वित्तीय साक्षरता शिविर का किया गया आयोजन…

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राजनांदगांव: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एवं लीड बैंक कार्यालय द्वारा 13 फरवरी 2026 को होटल एबिस ग्रीन में जिले में वरिष्ठ नागरिकों के लिए वित्तीय साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कीर्तन सिंह राठौर उपस्थित थे। आरबीआई के एजीएम श्री सत्येन्द्र कुमार राठौर ने बताया कि वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 के विषय एवं उप विषयों के संबंध में बताया। उन्होंने केवायसी मानदंड, सीकेवायसी, खाता स्वच्छता एवं अनुशासन के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

शिविर में मनी म्युल खाते एवं केवायसी के बारे में जागरूक किया गया। आरबीआई के प्रबंधक श्री अविनाश टोप्पो, अग्रणी बैंक प्रबंधक श्री मुनीश शर्मा सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक उपस्थित थे।

CG: बिजली उपभोक्ताओं ने टैरिफ याचिकाओं पर जन-सुनवाई में दी अपनी सहभागिता…

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‘विडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से इस जन-सुनवाई में शामिल 04 जिलों के घरेलू, गैर घरेलू, कृषक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं ने नये टैरिफ के लिए दिए सुझाव’

राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) द्वारा विडियो कॉफ्रेसिंग के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2029-30 के लिए बिजली दरों (टैरिफ) के निर्धारण और राजस्व आवश्यकताओं से संबंधित याचिकाओं पर शहर के पार्रीनाला स्थित कार्यपालक निदेशक कार्यालय में राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई एवं कबीरधाम जिले के घरेलु, गैर घरेलु, कृषक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए सार्वजानिक जन-सुनवाई आयोजित की गई। इस जन-सुनवाई का मुख्य उद्देश्य बिजली की नई दरों से निर्धारण से पूर्व आम जनता, कृषक उपभोक्ताओं एवं औद्योगिक संगठनों के सुझावों एवं आपत्तिओं को चिन्हाकित किया जाना था।

राज्य विद्युत नियामक आयोग के सदस्यों ने उपस्थितजनों को भरोसा दिलाया कि टैरिफ का निर्धारण उपभोक्ताओं के हितों और बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाकर किया जायेगा।

जनसुनवाई में विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने अपनी मांग रखी। औद्योगिक एचवी-3 एवं एचवी-05 एबीस कंपनी के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि क्रॉस सब्सिडी का निर्धारण वोल्टेज के आधार पर करने, लो-लोड फेक्टर में प्रोत्साहन देने और न्यूनतम उपयोग के समय डिमांड चार्जेस को कॉन्ट्रैक्ट डिमांड का 50 प्रतिशत रखने का मांग/सुझाव दिया। उन्होंने बिजली बिल का एडवांस पेमेंट करने पर मिलने वाले सवा प्रतिशत की छूट को भविष्य में भी यथावत रखे जाने का सुझाव दिया। ताकि उपभोक्ताओं समय पर भुगतान के लिए प्रोत्साहन मिल सके।

चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स राजनांदगांव के अध्यक्ष श्री कमलेश बैद ने कहा कि औद्योगिक जगत को राहत देने के लिए प्रचलित टैरिफ को यथावत रखा जाए। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के हितग्राहियों की उत्पादित बिजली के लिए उचित दर मिल सके इसका प्रावधान भी होना चाहिए। जैसे एलवी-4 के उपभोक्ताओं को छुट का प्रावधान है, वैसे ही एचवी-3 एवं एचवी-05 कैटेगरी के उपभोक्ता को लाभ दिया जाए, जिससे औद्योगिक गतिवधियांे को बढ़ावा मिल सके।

घरेलू उपभोक्ता श्री रूपचंद भीमनानी ने बढती महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि टैरिफ में बढोत्तरी से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढेगा अतः दरों में वृद्धि नहीं की जानी चाहिए। घरेलु उपभोक्ताओं के बिजली बिलों को आसान और सुस्पष्ट बनाया जाए, ताकि उन्हे बिजली बिल में अपने खपत की जानकारी के प्रत्येक खण्ड सरलता से समझ आ सके।

इस जनसुनवाई के दौरान विभिन्न घरेलू, गैर घरेलू, कृषक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं के अनेक सुझावों को आयोग ने रिकॉर्ड पर लिया। इन सुझावों का विस्तृत अध्ययन करने पर आयोग अगले कुछ महीनों के भीतर अपना अंतिम टैरिफ आदेश जारी करेगा। आयोग ने जनता को आश्वस्त किया है कि अंतिम निर्णय पूरी तरह से निष्पक्ष और न्यायसंगत होगा। इस अवसर पर उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष श्री ए0के0 ग्राहक, अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री मंगल तिर्की, राजनांदगांव वृत्त के अधीक्षण अभियंता श्री शंकेश्वर कंवर, कार्यपालन अभियंता श्री एन0के0 साहू, श्रीमती सीमा ढील, पीआरओ श्री डी0एस0 मंडावी, चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स से श्री राजकुमार बाफना, श्री राजेश जैन, श्री नेमीचंद जैन सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहें।

भारत से इस टूर्नामेंट की मेजबानी छीनेगी ICC? टी20 वर्ल्ड कप विवाद के बाद चौंकाने वाला दावा…

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करीब एक हफ्ते तक चले विवाद के बाद आखिरकार टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत-पाकिस्तान का मैच हो ही गया. कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में रविवार 15 फरवरी को दोनों टीम के बीच ग्रुप स्टेज का ये मैच खेला गया, जिसे टीम इंडिया ने जीता.

ये मुकाबला तो बिना किसी विवाद के खत्म हो गया लेकिन इससे पूरे घटनाक्रम ने टेंशन जरूर बढ़ा दी है और इसका असर आने वाले टूर्नामेंट्स पर दिख सकता है. ऑस्ट्रेलिया से आ रही एक रिपोर्ट में तो यही कहा जा रहा है, जिसमें ये भी दावा किया गया है कि ICC कुछ साल बाद भारत में होने वाले टूर्नामेंट की मेजबानी छीन सकती है.

15 फरवरी को खेले गए मुकाबले से पहले पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ इस मैच का बहिष्कार कर दिया था. इसके बाद ICC के समझाने और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने फैसले पर पलटी मारते हुए मैच खेलने का ऐलान किया था. मगर इस विवाद की असली जड़ में बांग्लादेश था. मुस्तफिजुर रहमान को IPL से बाहर करने के बाद बांग्लादेशी सरकार ने अपनी टीम को वर्ल्ड कप के लिए भारत भेजने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते वो टूर्नामेंट से ही बाहर हो गई थी.

भारत से छिनेगी इन टूर्नामेंट्स की मेजबानी?

इस पूरे घटनाक्रम और विवाद ने करीब एक महीने तक विश्व क्रिकेट को गरमाए रखा. फिलहाल तो काफी चर्चा और समझौते के बाद ये विवाद थम गया है लेकिन क्या आगे ये मुद्दा दोबारा नहीं उठेगा? इसको लेकर संदेह जताया जा रहा है. ऑस्ट्रेलियाई अखबार ‘सिडनी मॉर्निंग हेरल्ड‘ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश के राजनीतिक तनाव को देखते हुए ICC एक बड़ा कदम उठा सकती है. इसके तहत 2029 में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी और फिर 2031 के वनडे वर्ल्ड कप की मेजबानी भारत से छिन सकती है.

ऑस्ट्रेलिया को बैकअप वेन्यू बनाने की तैयारी

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत के साथ इन दोनों देशों के रिश्ते आगे भी ऐसे ही रहते हैं और पाकिस्तान-बांग्लादेश आगे भी भारत जाने से मना करते हैं, तो इन दोनों टूर्नामेंट के लिए ऑस्ट्रेलिया को मेजबान बनाया जा सकता है. इसमें भी चैंपियंस ट्रॉफी 2029 में ऐसा होने की ज्यादा संभावना है क्योंकि 8 टीमों वाला ये टूर्नामेंट सिर्फ भारत में आयोजित होगा. वर्ल्ड कप 2031 में शायद इसकी जरूरत न पड़े क्योंकि ये टूर्नामेंट भारत और बांग्लादेश संयुक्त रूप से होस्ट करेंगे.

भारत-फ्रांस के संबंध बहुत गहरे. राष्ट्रपति मैक्रों का स्वागत करके खुशी हुई: PM मोदी…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि मैक्रों का स्वागत करके बहुत खुशी हुई. उन्होंने फ्रांस को यूरोप का प्रमुख गेटवे बताया.

पीएम मोदी ने कहा कि साल 2026 भारत और यूरोप के संबंध में एक टर्निंग पॉइंट है. कुछ दिन पहले हमने यूरोपीय यूनियन के साथ भारत के इतिहास का सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस के संबंध बहुत ही गहरे हैं.

उन्होंने कहा कि फ्रांस भारत के सबसे पुराने स्ट्रैटेजिक पार्टनर्स में से एक है. प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर हमने इस स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को अभूतपूर्व गहराई और ऊर्जा दी है. पीएम मोदी ने कहा कि इंडिया फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन से हम अपनी स्ट्रैटेजिक साझेदारी को पार्टनरशिप ऑफ द पीपल बनाने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्टार्टअप और एमएसएमई के बीच मजबूत नेटवर्क बनाएंगे. स्टूडेंट के लिए सिस्टम और सुगम होगा. क्रिटिकल मिनरल्स बायोटेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैटेरियल्स में अपना सहयोग और प्रबल कर रहे हैं.

शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करते रहेंगे

पीएम मोदी ने कहा कि हम इंडो फ्रेंच सेंटर फॉर AI इन और हेल्थ इंडो सेंटर फॉर डिजिटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी लॉन्च करने का रहे हैं. Multilateralism Dialogue और Diplomacy से स्थिरता और समृद्धि के प्रयासों को बल देते रहेंगे.

पीएम मोदी ने कहा कि यूक्रेन, पश्चिम एशिया या फिर इंडो पेसिफिक… हम हर क्षेत्र में शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करते हैं. आतंकवाद के हर रूप और स्वरूप को जड़ से मिटाना हमारी सांझी प्रतिबद्धता है. नेशनल मैरिटाइम हेरिटेज परिसर में भी हम फ्रांस के साथ सहयोग करने जा रहे हैं. हम जल्द फ्रांस में स्वामी विवेकानंद कल्चरल सेंटर खोलने जा रहे हैं. हम अपने संबंधों का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं.

भारत-फ्रांस की दोस्ती से दुनिया में स्थिरता आएगी

पीएम मोदी ने कहा कि रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई तक ले जाएंगे. उन्होंने कहा कि इनोवेशन आइसोलेशन से नहीं कोलोबोरेशन से होता है. ज्वाइंट इनोवेशन के नए सेंटर तैयार करेंगे. रिसर्च सेक्टर में सहयोग पर सहमित बनेगी. इससे भारत और फ्रांस की दोस्ती और बढ़ेगी. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों की दोस्ती से दुनिया में स्थिरता आएगी.

सोनिया गांधी मुझे बना रही थीं मुख्यमंत्री, राहुल गांधी बने रोड़ा. हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा दावा…

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि 2014 में सोनिया गांधी ने उन्हें सीएम पद की शपथ लेने की तारीख तय करने को कहा था. क्योंकि उन्हें 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त था.

इसी बीच USA से राहुल गांधी का एक फोन पार्टी नेताओं के पास आया और स्थिति पूरी तरह बदल गई. एक तरह से राहुल गांधी ने उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया था.

सरमा ने दावा किया कि यह उनके एक बहुत बड़ा झटका था. मंगलवार को विधानसभा में कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने यह दावा किया है. दरअसल 2011 में विधानसभा चुनावों के बाद असम कांग्रेस में अंसतोष देखा गया था. जब विधायकों के एक गुट ने मौजूदा तरुण गोगोई की जगह सरमा को मुख्यमंत्री के तौर पर समर्थन दिया था. इस पूरे मामले को लेकर हिमंत ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि उस समय उन्हें सोनिया गांधी मैडम का फोन आया और उन्होंने ‘मुझसे कहा कि CM पद की शपथ को लेकर तारीख तय करो. मैंने उनसे कहा कि मैं जून (2014) में कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेले के बाद शपथ लूंगा.’

मुझे उनसे कहीं ज्यादा बीजेपी ने दिया

हिमंत का दावा है कि इसी बीच उस समय राहुल गांधी के कॉल करने के बाद स्थिति बदल गई. तब मुझे दुख हुआ था, इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ने का मन बना लिया. उन्होंने आगे कहा कि लेकिन अब मेरा मानना ​​है कि किसी की जिंदगी में जो कुछ भी होता है, वह अच्छे के लिए होता है और भगवान ने मुझे उनसे कहीं ज्यादा बीजेपी ने दिया है, जितना मुझे कांग्रेस में रहने पर शायद नहीं मिलता. उन्होंने 2015 में BJP में शामिल होने के लिए पार्टी छोड़ दी और विधानसभा चुनावों में भगवा पार्टी की पहली जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई.

भविष्य में लिख सकता हूं किताब

हिमंत ने कहा कि वह 2021 से असम के मुख्यमंत्री हैं. वह बीजेपी के सीएम के तौर पर पूरे दिल से असम और सनातन धर्म दोनों की सेवा करने का मौका मिला, जो कांग्रेस में रहने पर मुमकिन नहीं होता. उन्होंने कहा कि अगर वह भविष्य में कोई किताब लिखेंगे तो इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताएंगे. जिससे लोगों को कांग्रेस के बारे में सही जानकारी मिल पाए.

अब AI में पैर जमाएंगे अडानी, करने जा रहे हैं इतने लाख करोड़ का निवेश…

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अडानी ग्रुप ने 17 फरवरी को कहा कि समूह 2035 तक रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाले AI-रेडी डेटा सेंटर बनाने के लिए 100 अरब डॉलर यानी करीब 9 लाख करोड़ का निवेश करेगा. कंपनी ने कहा कि इस निवेश से अगले दशक में स्वदेशी क्लाउड प्लेटफॉर्म और सर्वर मैन्युफैक्चरिंग सहित कई जुड़े हुए सेक्टर में करीब 150 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च होने की उम्मीद है.

कंपनी ने आगे कहा कि अडानी के इस निवेश से भारत में एक दशक में 250 अरब डॉलर का AI इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम तैयार होगा.

इस पहल के तहत एक लॉन्ग-टर्म स्वदेशी एनर्जी और कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा, जिसका मकसद उभरते AI रिवोल्यूशन में भारत को ग्लोबल लीडर बनाना है. उम्मीद है कि यह निवेश 2035 तक सर्वर मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वदेशी क्लाउड प्लेटफॉर्म और सहायक इंडस्ट्रीज में 150 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश को बढ़ावा देगा. अनुमान है कि इससे अगले दस साल में भारत में 250 अरब डॉलर का AI इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम तैयार होगा.

एआई में आगे रहेगा भारत

अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने कहा कि दुनिया अब एक नई एआई क्रांति में प्रवेश कर रही है, जो पहले की किसी भी औद्योगिक क्रांति से कहीं ज्यादा गहरी और असरदार है. जो देश एनर्जी और कंप्यूटिंग को साथ जोड़ पाएंगे, वही अगले दशक की दिशा तय करेंगे. भारत इस रेस में आगे रहने की मजबूत स्थिति में है.

यह रोडमैप अडानी कॉनेक्स के मौजूदा 2 गीगावॉट के नेशनल डेटा सेंटर नेटवर्क पर आधारित है और इसे बढ़ाकर 5 गीगावॉट तक ले जाने का लक्ष्य है, जिससे भारत को ग्लोबल AI इकोनॉमी के केंद्र में लाया जा सके. इस विजन को गूगल के साथ विशाखापत्तनम में देश का सबसे बड़ा गीगावॉट-स्केल AI डेटा सेंटर कैंपस बनाने की साझेदारी और नोएडा में अतिरिक्त कैंपस के विकास से बल मिला है. साथ ही Microsoft के साथ हैदराबाद और पुणे में होने वाली पार्टनरशिप भी इसका अहम हिस्सा हैं.

एआई हब बनाने में अडानी ग्रुप की भूमिका

अडानी समूह ने यह भी कहा कि वह भारत में बड़े स्तर पर कैंपस बनाने के इच्छुक अन्य प्रमुख कंपनियों से बातचीत कर रहा है, जिससे भारत का AI इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में रोल और मजबूत होगा. Flipkart के साथ अपनी डेटा सेंटर पार्टनरशिप को और मजबूत करते हुए, समूह अगली पीढ़ी के डिजिटल कॉमर्स, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और बड़े AI वर्कलोड को सपोर्ट करने के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए दूसरे AI डेटा सेंटर के निर्माण पर काम करेगा.

5 गीगावॉट की यह परियोजना दुनिया का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म बनाने का लक्ष्य रखती है, जिसमें रिन्यूएबल पावर प्रोडक्शन, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और हाइपरस्केल AI कंप्यूटिंग को एक साथ जोड़ा जाएगा. कंपनी के मुताबिक, पारंपरिक डेटा सेंटर विस्तार के विपरीत, यह प्रोग्राम एक संयुक्त एनर्जी-और-कंप्यूट सिस्टम के रूप में तैयार किया गया है, जहां बिजली उत्पादन, ग्रिड की मजबूती और हाई-डेंसिटी प्रोसेसिंग क्षमता को साथ-साथ विकसित किया जाएगा.