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धार्मिक स्थलों पर हमले को लेकर बांग्लादेश में चरमपंथ के बढ़ते खतरे से चेताया…

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मानवाधिकार संगठन ने कहा कि ढाका में हजरत शाह अली बगदादी की दरगाह पर श्रद्धालुओं और 14 मई की रात को एक शांतिपूर्ण साप्ताहिक धार्मिक सभा में शामिल लोगों पर हिंसक हमला हुआ.

प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने बांग्लादेश में श्रद्धालुओं पर हुए हमले और एक दरगाह में हुई तोड़फोड़ की कड़ी निंदा की है. संगठन को चिंता है कि इस तरह की घटनाओं को न रोकने और दोषियों को सजा न दे पाने की वजह से चरमपंथी समूहों का हौसला बढ़ेगा.

फ्रांस में स्थित जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश (JMBF) ने कहा कि ढाका में हजरत शाह अली बगदादी की दरगाह पर श्रद्धालुओं पर हुआ हमला और 14 मई की रात को एक शांतिपूर्ण साप्ताहिक धार्मिक सभा में शामिल लोगों पर हिंसक हमला, धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक धरोहर और देश की सदियों पुरानी सूफी परंपराओं पर गंभीर आघात है.

प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से मानवाधिकार संगठन ने बताया कि बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र इकाई शिबिर से जुड़े हथियारबंद हमलावरों ने दरगाह परिसर में डंडों के साथ प्रवेश किया और निर्दोष श्रद्धालुओं पर सुनियोजित हमला किया, जिससे अफरा-तफरी मच गई और कई लोग घायल हो गए. संगठन ने यह भी कहा कि दरगाह के बाहर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कानून-व्यवस्था के अधिकारी कथित तौर पर नागरिकों की रक्षा करने में असफल रहे.

जेएमबीएफ ने एक घायल व्यक्ति के हवाले से कहा, ‘कुछ लोग डंडों के साथ आए… उन्होंने पूरी तरह से अराजकता फैला दी. लोग इधर-उधर भागने लगे. मैं मुख्य गेट से निकलने की कोशिश कर रहा था, तभी उन्होंने मेरे सिर पर वार किया.’ संगठन ने दरगाह के अनुयायियों का हवाला देते हुए कहा कि यह हमला 5 अगस्त 2024 से बांग्लादेश में दरगाहों और सूफी स्थलों पर हो रहे हमलों और तोड़फोड़ की एक श्रृंखला का हिस्सा है.

जेएमबीएफ के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने कहा कि यह घटना अकेली नहीं है, बल्कि यह एक चिंताजनक और व्यवस्थित हिंसा की एक कड़ी है, जिसमें धार्मिक अल्पसंख्यकों और सूफी स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है. इस अवधि में 100 से अधिक दरगाहों पर हमले की खबर है.

संगठन ने चिंता जताई कि इन घटनाओं में शामिल किसी भी दोषी पर आरोप साबित नहीं किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि इन्हें सजा नहीं मिलेगी. जेएमबीएफ ने बांग्लादेश सरकार से अपील की है कि वह शाह अली बगदादी दरगाह पर हुए हमले की तुरंत, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करे तथा सभी दोषियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर सजा दे. संगठन ने देशभर में सभी दरगाहों, धार्मिक संस्थानों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बढ़ते धार्मिक उग्रवाद और राजनीतिक हिंसा के खिलाफ सख्त कदम उठाने की भी मांग की है.

LIVE Updates:  शाह की अध्यक्षता में क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक, MP के CM मोहन यादव, UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी हुए शामिल…

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अपने 2 दिवसीय प्रवास पर जगदलपुर पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज मध्य क्षेत्रीय विकास परिषद की हाई लेवल की मीटिंग कर रहे हैं। इस मीटिंग के माध्यम से विकास, विस्तार व अन्य बातों को लेकर चर्चा हो रही है। उससे पहले जगदलपुर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचे। मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक बस्तर छत्तीसगढ़ में हो रही है। जहां शाह और योगी एक साथ नजर आए।

छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगे CM मोहन यादव, मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में होंगे शामिल, 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव 19 मई को छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगे, यहां वे बस्तर में आयोजित होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक शामिल होंगे.

Report: बस्तर में बैठक का बड़ा राजनीतिक संदेश! क्या है गृह मंत्रालय की बड़ी रणनीति? बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

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छत्तीसगढ़ का बस्तर, जो कभी देश में नक्सल हिंसा और सुरक्षा अभियानों का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता था, अब राष्ट्रीय नीति और संघीय समन्वय की बड़ी बैठकों का मंच बन रहा है. आज बस्तर में 26वीं सेंट्रल जोनल काउंसिल की बैठक आयोजित रही है रही है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री करेंगे. इस बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री , मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री , छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल होंगे.

यह बैठक सिर्फ प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसके पीछे गृह मंत्रालय की एक व्यापक राजनीतिक, सुरक्षा और विकास रणनीति दिखाई दे रही है.

बस्तर को इस आयोजन के लिए चुनना अपने आप में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है. जैसा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर को अगले 5 साल के भीतर देश के उन तमाम बड़े इलाकों जैसा विकसित किया जाएगा कि बस्तर में विकास की बयार बह रही है. इसी रणनीति का हिस्सा यहां पर सेंट्रल जोनल काउंसिल की बैठक करना भी शामिल है.

बस्तर ही क्यों?

आमतौर पर इस तरह की उच्चस्तरीय बैठकें राज्य की राजधानी या बड़े शहरों में आयोजित होती हैं. लेकिन केंद्र सरकार ने इस बार बस्तर को चुना है, जो वर्षों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा. गृह मंत्रालय इस बैठक के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि नक्सलवाद यहां से खत्म हो चुका है. बस्तर अब केवल संघर्ष का इलाका नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श और विकास नीति का हिस्सा बन चुका है.

जहां इंटरनेट भी नहीं पहुंचा था, अब वहां शुरू होगा ‘जन जन सुविधा केंद्र’, बदलेगी बस्तर की तस्वीर

केंद्र इस बैठक के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि जहां कभी सुरक्षा बलों पर हमले होते थे, वहां अब देश के बड़े मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री सुरक्षित वातावरण में बैठकर नीति निर्माण कर सकते हैं. यह एक मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक संदेश भी है कि बस्तर में अब सरकार की पकड़ मजबूत हुई है और नक्सलवाद अपने कमजोर चरण गुजर कर समाप्त हो चुका है.

गृह मंत्रालय की ‘सुरक्षा से विकास’ रणनीति

पिछले कुछ सालों में केंद्र सरकार ने बस्तर में दोहरी रणनीति अपनाई है. एक तरफ बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशन चलाए गए, वहीं दूसरी ओर सड़क, मोबाइल नेटवर्क, बैंकिंग, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया.

अब गृह मंत्रालय की कोशिश है कि बस्तर को  ’सुरक्षा मॉडल’ से आगे बढ़ाकर ‘विकास मॉडल’ के रूप में प्रस्तुत किया जाए. इसी रणनीति के तहत हाल के महीनों में जन जन सुविधा केंद्र जैसे मॉडल शुरू किए गए हैं, ताकि दूरदराज आदिवासी इलाकों तक शासन की सीधी पहुंच बनाई जा सके. सेंट्रल जोनल काउंसिल की बैठक उसी बदलती तस्वीर का राष्ट्रीय प्रदर्शन माना जा रही है.

बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

इस बैठक में केवल सुरक्षा मुद्दे ही नहीं बल्कि कई क्षेत्रीय और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी. केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार बैठक में राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की तेज जांच, फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, ग्रामीण बैंकिंग कनेक्टिविटी और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली ERSS-112 जैसे विषयों पर चर्चा होगी.

इसके अलावा पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, शहरी विकास और सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं. यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार अब आंतरिक सुरक्षा को केवल पुलिस कार्रवाई के नजरिए से नहीं बल्कि समग्र विकास से जोड़कर देख रही है.

गृह मंत्री ने कहा कि आज बस्तर में शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा प्रकल्प की शुरुआत हुई. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हमारे लगभग 200 CAPF कैंप हैं, ये 200 कैंप अब तक यहां के आदिवासियों, किसानों, बच्चों और महिलाओं की नक्सलियों से सुरक्षा का काम करते थे.

इन 200 में से 70 कैंप शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा के नाम से जाने जाएंगे और इस क्षेत्र को विकसित करने का मॉडल बनेंगे. उन्होंने कहा कि यहां से 371 योजनाओं का काम ऑनलाइन हो सकेगा.

राशन कार्ड और आधार कार्ड जन सेवा केन्द्र से बन सकेगा, साथ ही सस्ता अनाज नहीं मिलने की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, बैंक अकाउंट भी इस केन्द्र से ऑपरेट हो सकेगा. स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी. यह डेयरी मिल्क कलेक्शन सेंटर का भी काम करेगा. अच्छी खेती करने के लिए कृषि विभाग का मार्गदर्शन भी मिलेगा. यहां कौशल विकास केंद्र ग्रामीणों के रोजगार का केंद्र बनेगा और वहीं प्रौढ़ शिक्षा का काम शुरू होगा.

उन्होंने कहा कि तीन महीने के भीतर हम एनआईडी के सहयोग से इसका पूरा नक्शा तैयार कर एक सम्पूर्ण विकास परियोजना शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा के नाम से जमीन पर उतारने का काम करेंगे. इससे माओवादियों के समर्थक बुद्धिजीवियों को संदेश मिलेगा. उन्होंने कहा कि माओवाद इसलिए नहीं फैला था कि यहां विकास नहीं था, बल्कि यहां विकास नहीं होने का कारण ही हथियारबंद नक्सल अभियान था. अब हथियारबंद नक्सल अभियान समाप्त हो गया है.

सेंट्रल जोनल काउंसिल देश के पांच जोनल काउंसिलों में से एक है. इसकी स्थापना 1956 के स्टेट्स रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट की धारा 15 से 22 के तहत की गई थी. इन जोनल काउंसिलों का उद्देश्य राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है. केंद्रीय गृह मंत्री इन परिषदों के अध्यक्ष होते हैं जबकि सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रशासक और वरिष्ठ मंत्री इसके सदस्य होते हैं.

हर साल सदस्य राज्यों में से एक मुख्यमंत्री उपाध्यक्ष की भूमिका निभाता है. परिषद के अंतर्गत मुख्य सचिव स्तर की स्थायी समिति भी बनाई गई है, जो पहले मुद्दों की समीक्षा करती है और फिर उन्हें परिषद की बैठक में रखा जाता है. पिछले 11 सालों में विभिन्न जोनल काउंसिलों और उनकी स्थायी समितियों की कुल 64 बैठकें हो चुकी हैं.

बस्तर में बैठक का बड़ा राजनीतिक संदेश

बस्तर में यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब केंद्र सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि देश में नक्सलवाद निर्णायक रूप से कमजोर हुआ है. गृह मंत्री

अमित शाह कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं,  सरकार नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है. ऐसे में बस्तर में चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी एक राजनीतिक संदेश भी देती है कि अब यह क्षेत्र लोकतांत्रिक प्रशासन और विकास की मुख्यधारा में लौट रहा है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि केंद्र सरकार यह भी दिखाना चाहती है कि आदिवासी इलाकों को केवल सुरक्षा नजरिए से नहीं बल्कि राष्ट्रीय विकास भागीदार के रूप में देखा जा रहा है.

राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिश

बैठक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाना भी है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड जैसे राज्यों के सामने कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा, बैंकिंग पहुंच और ग्रामीण विकास जैसी कई साझा चुनौतियां हैं. गृह मंत्रालय चाहता है कि ये राज्य एक-दूसरे के सफल मॉडल साझा करें और साझा रणनीति पर काम करें. विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की त्वरित जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम जैसे मुद्दों पर राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश होगी.

प्रधानमंत्री मोदी के कोऑपरेटिव फेडरलिज्म मॉडल का हिस्सा

प्रधानमंत्री मोदी लगातार कोऑपरेटिव और कॉम्पिटिटिव फेडरलिज्म की बात करते रहे हैं. जोनल काउंसिल उसी सोच का हिस्सा हैं, जहां राज्यों और केंद्र के बीच संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान खोजा जाता है. सरकार का मानना है कि मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र की नींव हैं. इसलिए जोनल काउंसिल राज्यों के बीच स्वस्थ सहयोग और बेहतर प्रशासनिक समन्वय का मंच बन रही हैं.

स्थानीय लोगों के लिए इसका क्या अर्थ?

बस्तर के लोगों के लिए यह बैठक केवल वीआईपी दौरा नहीं है. इससे इलाके के विकास, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर असर पड़ सकता है. ऐसे आयोजनों के दौरान सड़क, सुरक्षा, संचार और सार्वजनिक सुविधाओं में तेजी से सुधार होता है. इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर बस्तर की सकारात्मक छवि भी बनती है, जिससे भविष्य में निवेश और पर्यटन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं.

बस्तर में 26वीं सेंट्रल जोनल काउंसिल की बैठक केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं बल्कि बदलते भारत की नई रणनीति का प्रतीक है. केंद्र सरकार इस आयोजन के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि बस्तर अब भय, हिंसा और अलगाव की पहचान से आगे बढ़ चुका है.

अब यहां सुरक्षा के साथ विकास, शासन और राष्ट्रीय भागीदारी की नई कहानी लिखी जा रही है. अमित शाह और चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी यह स्पष्ट करती है कि गृह मंत्रालय बस्तर को केवल नक्सल विरोधी अभियान का केंद्र नहीं बल्कि नए भारत के विकास मॉडल के रूप में स्थापित करना चाहता है.

सुशासन तिहार के माध्यम से ग्राम स्तर पर समस्याओं का निराकरण करें सुनिश्चित: विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. रमन सिंह…

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– सुशासन तिहार 2026 के तहत ग्राम खुटेरी में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित’

– विधानसभा अध्यक्ष ने ग्राम खुटेरी में सीसी रोड निर्माण के लिए 15 लाख रूपए तथा मैदान समतलीकरण के लिए 5 लाख रूपए की घोषणा की’

– जिले के 12 थानों के लिए 112 आपातकालीन सेवा के 12 नए वाहन उपलब्ध’

– जिले को लगभग 65 लाख रूपए लागत का अत्याधुनिक फाॅरेंसिक वाहन मिली’

विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. रमन सिंह आज विधानसभा निवास कार्यालय रायपुर से सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम पंचायत खुटेरी जनसमस्या निवारण शिविर में वीडियो काॅन्फ्रेसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. रमन सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में 1 मई से सुशासन तिहार 2026 का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य गांव स्तर तक पहुंचकर जनसामान्य की समस्याओं का त्वरित निराकरण करना है।

उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से राजस्व प्रकरणों सहित विभिन्न विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है तथा ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. सिंह ने शिविर में ग्राम पंचायत सरपंच द्वारा रखी गई मांगों पर ग्राम में सीसी रोड निर्माण के लिए 15 लाख रूपए तथा शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में मैदान समतलीकरण के लिए 5 लाख रूपए की स्वीकृति की घोषणा की। इस अवसर पर सांसद श्री संतोष पाण्डेय नई दिल्ली से शिविर में वीडियों काॅफ्रेसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।

विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. रमन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऊर्जा संरक्षण एवं संसाधनों के सदुपयोग तथा आवश्यक ईंधन का कम से कम उपयोग करने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं लगातार वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुशासन तिहार के शिविरों से जुड़कर ग्रामीणों से संवाद कर रहे हैं।

सुशासन तिहार का महत्वपूर्ण उद्देश्य ग्राम स्तर पर समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित करना है। राजस्व विभाग के माध्यम से नामांतरण, अविभाजित खाता, सीमांकन, डायर्वसन, आय एवं जाति प्रमाण पत्र, पेंशन, प्रधानमंत्री उवला योजना, स्व-सहायता समूहों तथा रोजगारमूलक योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. सिंह ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के आज रायपुर प्रवास के दौरान जिले के 12 थानों के लिए 112 आपातकालीन सेवा के 12 नए वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही लगभग 65 लाख रूपए लागत का अत्याधुनिक फाॅरेंसिक वाहन भी जिले को मिला है, जिससे घटनास्थल पर  साक्ष्य एकत्रित करने में मदद मिलेगी और अपराध नियंत्रण को मजबूती मिलेगी।

विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. सिंह ने कहा कि धमधा-गैंदपुर 220 केवी विद्युत लाइन को नेशनल ग्रिड से जोड़े जाने से राजनांदगांव, कवर्धा, बेमेतरा, बलौदाबाजार एवं भाटापारा क्षेत्र को दोहरी विद्युत आपूर्ति का लाभ मिलेगा। इससे विद्युत गुणवŸाा में सुधार होगा। उन्होंने इसे क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।

विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. रमन सिंह ने बताया कि खुटेरी क्लस्टर की 11 पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत विŸाीय वर्ष 2024 से 2026 अंतर्गत 999 आवास स्वीकृत किए गए हैं। जिसमें 624 आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा 375 आवासों में से 332 आवास प्रगतिरत हैं। शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन लगातार कार्य कर रहा है।

उन्होंने खुटेरी ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि सामुदायिक भवन, कबीर कुटीर, मैदान समतलीकरण, मिनी स्टेडियम, साइकिल स्टैंड एवं सीसी रोड जैसे कार्य कराए गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. सिंह ने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा चांदो नहर शिवनाथ डायवर्सन लाइनिंग कार्य 114 करोड़ 63 लाख रूपए की लागत से किया जा रहा है, जिससे 34 ग्राम पंचायतों को लाभ मिलेगा, जिनमें 20 पंचायते राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र की हैं।

उन्होंने कहा कि मोखला-जंगलेश्वर एनीकट निर्माण के लिए 4 करोड़ 69 लाख रूपए की स्वीकृति दी गई है, जिससे कटाव रोकने एवं जल संरक्षण में मदद मिलेगी। वहीं सोमनी से खुटेरी तक 68 करोड़ रूपए की लागत से सर्विस लेन निर्माण कार्य भी शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।

विधानसभा अध्यक्ष ने राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से जानकारी ली। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने बताया कि खुटेरी क्लस्टर की 11 पंचायतों में अविभाजित नामांतरण के 43 आवेदन प्राप्त हुए, जिनका निराकरण किया गया। अविभाजित खाता के 13, सीमांकन के 27 तथा त्रुटि सुधार के 18 आवेदन प्राप्त हुए हैं। प्राप्त सभी आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण किया गया है। उन्होंने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों से पेयजल व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि खुटेरी क्लस्टर में वर्तमान में पेयजल की कोई समस्या नहीं है तथा धीरी मल्टी विलेज योजना के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. सिंह ने क्षेत्र में सिंचाई सुविधा के संबंध में संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शिवनाथ डायवर्सन नहर लाइनिंग कार्य तेजी से प्रगति पर है। बारिश पूर्व लाइनिंग कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे आगामी सिंचाई सत्र में किसानों को लाभ मिल सके। उन्होंने सोमनी-खुटेरी सर्विस लेन निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।

विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. सिंह ने लखपति दीदी एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की सराहना करते हुए कहा कि रेडी-टू-ईट, मसाला एवं पापड़ निर्माण जैसे कार्यों से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। इन उत्पादों को प्रदेश स्तर तक पहुंचाने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। सुशासन तिहार शासन और जनता के बीच संवाद का प्रभावी माध्यम है तथा आमजन की समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जा रहा है।

सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने कहा कि सुशासन तिहार शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अभियान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब, किसान, महिला एवं युवाओं के हित में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति, स्व-सहायता समूहों एवं लखपति दीदी योजना महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकता है।

सांसद श्री पाण्डेय ने कहा कि जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, पेंशन, प्रधानमंत्री आवास, रोजगार, पेयजल सहित विभिन्न समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिल रही है। इस अवसर पर सरपंच ग्राम पंचायत खुटेरी श्रीमती उम्मी साहू ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव, अध्यक्ष जनपद पंचायत श्रीमती प्रतिमा चंद्राकर, जिला पंचायत सदस्य श्री देवकुमार साहू, विधायक प्रतिनिधि श्री संतोष अग्रवाल, श्री खूबचंद पारख, श्री राजेन्द्र गोलछा, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती सुरूचि सिंह, एसडीएम श्री गौतम पाटिल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी, 11  ग्राम पंचायतों के सरपंच तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

सुशासन तिहार 2026 – स्वामित्व योजना अंतर्गत रूपचंद एवं देवलाल के वर्षों की मुराद हुई पूरी…

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– जिले में अब तक 23 ग्रामों में 1347 अभिलेख का किया गया वितरण

सुशासन तिहार का दिन रूपचंद गोड़ एवं देवलाल ठेठवार के लिए खुशियों से भरा रहा। स्वामित्व योजना अंतर्गत जैसे उनकी वर्षों की मुराद अचानक पूरी हो गई है। उनके लिए सुशासन तिहार सुखद, आश्चर्यमिश्रित और चेहरे पर मुस्कान लाने वाला रहा।

सुशासन तिहार अंतर्गत छुरिया विकासखंड के दूरस्थ ग्राम साल्हे में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्राम लालुटोला निवासी रूपचंद गोड़ एवं ग्राम ऊचांईपुर निवासी देवलाल ठेठवार को अधिकार अभिलेख प्राप्त हुआ। जिससे उन्हें अपनी जमीन का मालिकाना हक मिल गया।

सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की स्वामित्व योजना नए आयाम स्थापित कर रही है। जिसके अंतर्गत ग्रामीण आबादी क्षेत्र का ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक का उपयोग करते हुए सर्वे और मैपिंग कर भू-स्वामी को अधिकारों का अभिलेख दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक जीवन में इससे एक परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

ग्राम लालुटोला निवासी श्री रूपचंद गोड़ ने बताया कि उन्हें जिंदगी में पहली बार अधिकार अभिलेख मिला है, जिससे उनके परिवार में बहुत खुशी है। अधिकार अभिलेख के बन जाने से अब उन्हें बैंक से आसानी से ऋण प्राप्त हो जाएगा। यह दस्तावेज एक प्रमाण के तौर पर कार्य करेगा।

उन्होंने कहा कि जीवन में वे असुरक्षित महसूस कर रहे थे और अधिकार अभिलेख बन जाने से उनकी समस्या का समाधान हुआ है और आसानी से ऋण ले सकते हैं.

उन्होंने बताया कि पहले जमीन की खरीदी एवं अन्य कार्यों के लिए ऋण लेने में दिक्कत आ रही थी। ग्राम ऊचांईपुर निवासी देवलाल ठेठवार के लिए अधिकार अभिलेख मिलने से एक सहायता मिली है।

उन्होंने बताया कि अधिकार अभिलेख मिल जाने से अब उनके जीवन का तनाव दूर हो गया है और आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले ऋण नहीं मिल पाता था और अब बैंक से अपना मकान बनाने के लिए वे ऋण ले सकेंगे।

उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार में शिविर में आने से बहुत कार्य हो जाते हैं। उन्होंने शिविर की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां राजस्व प्रकरण अंतर्गत सीमांकन, नामांतरण, बटवारा जैसे विभिन्न आवेदनों का निराकरण हो रहा है और जनमानस की समस्याओं का समाधान मिल रहा है।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने ड्रोन तकनीक का उपयोग करके ग्रामीण आबादी क्षेत्र में भूमि खण्डों के सर्वेक्षण के लिए योजना लागू की गई है।

आसमान को छूने के सपनों को मिली उड़ान…

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आसमान को छूने के सपनों को मिली उड़ान’

सक्ती के होनहार बच्चों ने पहली बार देखा एयरपोर्ट का रोमांच’

फाइटर प्लेन के कॉकपिट में बैठकर रोमांचित हुए विद्यार्थी’

रनवे पर विमानों की उड़ान देख बढ़ा आत्मविश्वास’

2 छोटे शहरों और गांवों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने की दिशा में जिला प्रशासन सक्ती की एक अनूठी पहल सामने आई है। प्रशासन ने जिले के 24 मेधावी छात्र-छात्राओं को एयरपोर्ट भ्रमण कराकर न केवल उन्हें आधुनिक उड्डयन व्यवस्था से परिचित कराया, बल्कि उनके भीतर बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास भी जगाया।

इस विशेष शैक्षणिक भ्रमण ने बच्चों के लिए यादगार अनुभव का रूप ले लिया। एयरपोर्ट और फाइटर प्लेन को अब तक केवल किताबों, फिल्मों या टीवी स्क्रीन पर देखने वाले विद्यार्थियों ने जब उन्हें सामने से देखा, तो उनकी उत्सुकता और खुशी देखते ही बन रही थी।

दरअसल, विद्यार्थियों के चयन के लिए 13 मई को जिला स्तरीय सामान्य ज्ञान एवं एप्टीट्यूड टेस्ट आधारित प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 24 छात्र-छात्राओं को एयरपोर्ट भ्रमण के लिए चुना गया। 16 मई की सुबह जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सक्ती से सभी विद्यार्थियों को बस के माध्यम से स्वामी विवेकानंद विमानतल माना, रायपुर के लिए रवाना किया गया।

एयरपोर्ट पहुंचने पर विद्यार्थियों को विमानतल परिसर का विस्तृत भ्रमण कराया गया। इस दौरान फ्लाइंग ऑफिसर और तकनीशियन ने बच्चों को फाइटर प्लेन एवं सिविलियन एयरक्राफ्ट की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने विमान के विभिन्न हिस्सों, डिजाइन और उड़ान प्रणाली को बेहद सरल तरीके से समझाया।

भ्रमण का सबसे रोमांचक पल वह रहा, जब विद्यार्थियों को एक-एक कर फाइटर प्लेन के कॉकपिट में बैठने का अवसर मिला। वहीं, रनवे पर विमानों को उड़ान भरते और उतरते हुए करीब से देखना भी विद्यार्थियों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया। कार्यक्रम के दौरान एयरपोर्ट और विमानन से जुड़ी सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की गई।

सही जवाब देने वाले विद्यार्थियों को उपहार देकर प्रोत्साहित किया गया। इस पूरे शैक्षणिक भ्रमण ने बच्चों को आधुनिक परिवहन प्रणाली, विमानन तकनीक और हवाई जहाज संचालन की व्यवहारिक जानकारी प्रदान की। जिला प्रशासन की इस पहल को विद्यार्थियों और अभिभावकों ने बेहद सराहा है। भ्रमण से लौटे बच्चों के चेहरों पर उत्साह साफ झलक रहा था। कई विद्यार्थियों ने भविष्य में पायलट, एयरफोर्स ऑफिसर और एयरोस्पेस इंजीनियर बनने की इच्छा भी जताई।

अवैध रेत भंडारण और परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 1740 घनमीटर रेत जप्त…

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खनिज विभाग के लगातार कार्रवाई अवैध खनन परिवहन पर लग रही लगाम प्रशासन की सक्रियता से अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों को मिल रहा कड़ा संदेश’

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कड़े निर्देश’

प्रदेश में रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ खनिज विभाग द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है।

राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विभागीय अमला दिन-रात सक्रिय रहकर अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है।

इसके लिए रात्रिकालीन गश्त, सघन निगरानी, औचक निरीक्षण और छापेमार कार्रवाई के साथ-साथ ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कड़े निर्देशों के तहत प्रदेश में रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ खनिज विभाग द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है।

राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विभागीय अमला दिन-रात सक्रिय रहकर अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है।

इसके लिए रात्रिकालीन गश्त, सघन निगरानी, औचक निरीक्षण और छापेमार कार्रवाई के साथ-साथ ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है।

वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने की प्रमुख विकास परियोजनाओं का किया निरीक्षण…

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मरीन ड्राइव, नया बस स्टैंड, किसान राइस मिल ऑक्सीजोन और दूध डेयरी ऑक्सीजोन के कार्यों की प्रगति की समीक्षा

गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निर्माण कार्य सुनिश्चित करने अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने रायगढ़ शहर में संचालित विभिन्न महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का स्थल निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने मरीन ड्राइव, नए बस स्टैंड, किसान राइस मिल परिसर में विकसित किए जा रहे ऑक्सीजोन तथा दूध डेयरी ऑक्सीजोन के निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। श्री चौधरी ने अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों को निर्देशित किया कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हों तथा गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से रायगढ़ शहर को आधुनिक और सुव्यवस्थित आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी। मरीन ड्राइव शहरवासियों के लिए आकर्षक सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित होगा, नया बस स्टैंड यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करेगा, जबकि ऑक्सीजोन परियोजनाएं पर्यावरण संरक्षण के साथ नागरिकों को स्वच्छ और हरित वातावरण उपलब्ध कराएंगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विकास कार्यों के माध्यम से नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। इसके लिए सभी परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि जनता को जल्द से जल्द इनका लाभ मिल सके। इस अवसर पर संबंधित विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अत्याधुनिक डायल 112 और फॉरेंसिक मोबाइल वैन को दिखाई हरी झंडी…

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अब सभी 33 जिलों में लागू होगी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अत्याधुनिक डायल 112 आपात सेवा’

400 नए आपातकालीन वाहन, 33 विशेष निगरानी वाहन और 60 राजमार्ग गश्ती वाहन किए गए रवाना’

नए आपराधिक कानूनों के तहत वैज्ञानिक जांच को मजबूती देने 32 आधुनिक फॉरेंसिक मोबाइल प्रयोगशालाएं मैदान में उतारी गईं’

पैनिक बटन, स्थान पहचान प्रणाली और डिजिटल माध्यमों के एकीकरण से महिला सुरक्षा त्वरित सहायता को मिलेगा बल’

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज राजधानी रायपुर में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में छत्तीसगढ़ की ‘अत्याधुनिक डायल 112’ आपातकालीन सेवा तथा आधुनिक फॉरेंसिक मोबाइल वैन के बेड़े को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप-मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा तथा छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे।

शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य की आपातकालीन सहायता प्रणाली का विस्तार करना और नए आपराधिक कानूनों के तहत वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमता को मजबूत करना है।

वर्ष 2018 से संचालित डायल 112 आपात सेवा का दायरा बढ़ाते हुए इसे अब राज्य के सभी 33 जिलों में पूरी तरह लागू कर दिया गया है, जो पहले केवल 16 जिलों तक सीमित थी। इस नए और उन्नत चरण के तहत संपूर्ण व्यवस्था को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और त्वरित बनाया गया है। सुरक्षा मानकों और सहायता क्षमता को मजबूत करने के लिए डायल 112 सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्थान पहचान तकनीक को जोड़ा गया है, जिससे संकट में फंसे व्यक्ति की वास्तविक भौगोलिक स्थिति का सटीक पता लगाया जा सकेगा।

इसके साथ ही, आपातकालीन कॉल और आंकड़ों का संचालन बिना किसी बाधा के जारी रखने के लिए सिविल लाइंस स्थित प्राथमिक नियंत्रण केंद्र के अतिरिक्त नया रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में वैकल्पिक बैकअप प्रणाली पर आधारित दूसरा नियंत्रण केंद्र भी सक्रिय किया गया है। यह केंद्र किसी भी तकनीकी समस्या या आपदा की स्थिति में स्वतः बैकअप के रूप में कार्य करेगा।

राज्यव्यापी सेवा विस्तार के तहत आज कुल 400 नए अत्याधुनिक आपातकालीन वाहन, 33 विशेष निगरानी वाहन तथा 60 नए राजमार्ग गश्ती वाहन विभिन्न जिलों के लिए रवाना किए गए। अब राज्य के नागरिक पारंपरिक दूरभाष कॉल के अलावा ‘112 इंडिया अनुप्रयोग’, संकट संकेत सेवा, लघु संदेश सेवा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संवाद प्रणाली, ईमेल, वेब अनुरोध तथा सामाजिक माध्यमों के जरिए भी आपातकालीन सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस व्यवस्था में पैनिक बटन और विशेष निगरानी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे पुलिस सहायता, एम्बुलेंस, अग्निशमन सेवा तथा महिला सहायता हेल्पलाइन को एकीकृत मंच पर उपलब्ध कराया जा सकेगा।

नए आपराधिक कानूनों, विशेषकर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 176 के प्रभावी क्रियान्वयन से सभी गंभीर अपराधों में, जिनमें सात वर्ष या उससे अधिक की सजा निर्धारित है, घटनास्थल पर फॉरेंसिक विज्ञान दल की उपस्थिति और वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करना अनिवार्य किया गया है।

आपराधिक न्याय प्रणाली को पूरी तरह साक्ष्य आधारित बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सभी 33 जिलों के लिए आधुनिक फॉरेंसिक मोबाइल प्रयोगशालाओं का गठन किया है, जिनमें से 32 फॉरेंसिक मोबाइल वैन आज मैदानी कार्य के लिए रवाना की गईं। ये वैन घटनास्थल पर जांच करने वाले उपकरणों से सुसज्जित चलती-फिरती प्रयोगशालाएं हैं।

इन मोबाइल फॉरेंसिक वैन में रक्त नमूना परीक्षण किट, डिजिटल साक्ष्य संग्रहण उपकरण, सीसीटीवी दृश्य सामग्री निकालने की प्रणाली, अंतर्निहित जीपीएस, उच्च क्षमता वाले लैपटॉप, कंप्यूटर तथा निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए जनरेटर लगाए गए हैं। साथ ही, रात अथवा कम रोशनी में साक्ष्य सुरक्षित करने के लिए इनमें विशेष रात्रि दृष्टि कैमरे और अन्य उच्च क्षमता वाले कैमरे भी स्थापित किए गए हैं।

इन वैन की सहायता से फॉरेंसिक विशेषज्ञ अपराध स्थल पर त्वरित रूप से पहुंचकर वैज्ञानिक साक्ष्यों को नष्ट होने से बचा सकेंगे तथा जैविक और डिजिटल नमूनों की प्राथमिक जांच मौके पर ही कर सकेंगे। इससे न्यायालय में पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी होगी। यह संयुक्त पहल छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था के आधुनिकीकरण, वैज्ञानिक अनुसंधान प्रणाली के विस्तार तथा नागरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

सोना खरीद पर बड़ी खबर, PM मोदी की अपील पर 10 में से 6 लोगों ने बदला अपना फैसला…

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पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बाद देश में कई लोगों ने गैर-जरूरी सोना खरीदना कम करने का फैसला लिया है, ताकि बढ़ते गोल्ड इंपोर्ट के बीच विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रह सके. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद देश में सोने की खरीदारी को लेकर लोगों का नजरिया बदलता दिख रहा है. लोकलसर्कल्स के एक सर्वे के मुताबिक, 61% सोना खरीदने वाले लोगों ने कहा कि वे अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से परहेज करेंगे. सरकार का मानना है कि इससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी.

यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में सोने का आयात रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है. बढ़ते आयात के कारण अमेरिका और इजराइल मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है, खासकर वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच. इसी वजह से प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में लोगों से एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील की थी.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सोने का आयात

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में भारत ने करीब 71.98 अरब डॉलर का सोना आयात किया, जो पिछले साल 2025 के मुकाबले 58 अरब डॉलर से 24% से ज्यादा है. हालांकि, सोने की मात्रा में थोड़ी कमी आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने से कुल आयात बिल काफी बढ़ गया.

हैदराबाद में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “हमें हर हाल में विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत है.” इसके बाद किए गए सर्वे में 66% लोगों ने माना कि अगर लोग कुछ समय तक सोना खरीदने से परहेज करें, तो इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी. रिपोर्ट के मुताबिक, सोने और चांदी का कुल आयात बढ़कर 102.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.

लोगों की सोच में दिखा बदलाव

सर्वे में शामिल 84,000 लोगों में से 28% लोगों ने कहा कि वे सोने की खरीदारी काफी कम कर देंगे, जबकि 36% लोगों ने कहा कि अगले एक साल तक वे सोना खरीदने की योजना नहीं बना रहे हैं.

वहीं, 19% लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील के बावजूद वे सिर्फ शादी-ब्याह या पारिवारिक परंपराओं के लिए ही सोना खरीदना जारी रखेंगे. दूसरी तरफ कुछ लोग अब भी सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं और उनका कहना है कि अनिश्चितता के दौर में वे इसकी खरीद जारी रखेंगे.