Home Blog Page 1140

Ganesh Utsav के अंतिम दिन मुंबई में 19 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात…

0

मुंबई में गणेश उत्सव के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को भगवान गणेश की प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए निकाले जाने वाले जुलूसों के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए 19 हजार से अधिक पुलिस जवानों को तैनात किया गया है।

अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि विसर्जन के जुलूस के लिए अधिकारियों और होम गार्ड्स की तैनाती की गई है। उत्सव के अंतिम दिन ‘अनंत चतुर्दशी’ पर घंटों तक जुलूस निकाला जाता है और इस दौरान भगवान गणेश को विदाई देने के लिए सड़कों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है।

लोगों से अपील की गई है कि विसर्जन के दौरान समुद्र में जाने से बचें और प्रशिक्षित कर्मियों की मदद लें। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने भी लोगों से विसर्जन के दौरान अंधेरे वाली जगहों या सुनसान इलाकों से दूर रहने की अपील की है।

एक अधिकारी ने बताया कि बीएमसी ने 1,337 गोताखोर तैनात किए हैं। इनमें 69 प्राकृतिक जलाशयों पर 1,035 और लगभग 200 कृत्रिम तालाबों में 302 गोताखोर तैनात किये गए हैं।

साथ ही प्राकृतिक जलाशयों पर 53 मोटरबोट की व्यवस्था की गई है। पुलिस की अपील के बाद विभिन्न मुस्लिम संगठनों और धार्मिक नेताओं ने ‘अनंत चतुर्दशी’ के मद्देनजर ईद-ए-मिलाद जुलूस बृहस्पतिवार के बजाय शुक्रवार कोनिकालने का फैसला किया है।

एक अधिकारी ने बताया कि मुंबई में 16,250 कांस्टेबल, 2,866 अधिकारी, 45 सहायक पुलिस आयुक्त, 25 पुलिस उपायुक्त, आठ अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया गया है।

उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त प्रदेश आरक्षित पुलिस बल (एसआरपीएफ) की 35 प्लाटून, त्वरित कार्रवाई बल की एक कंपनी, त्वरित मोचन दल (क्यूआरटी) और होम गार्ड्स के जवान यहां महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात रहेंगे।

महानगर के गिरगांव, दादर, जुहू, मार्वे और अक्सा समुद्र तटों सहित 73 स्थानों पर घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

अधिकारी ने बताया कि मुंबई में सभी विसर्जन जुलूसों की सीसीटीवी कैमरों से कड़ी निगरानी की जाएगी और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में भीड़ में शामिल रहेंगे।

अधिकारी ने बताया कि विसर्जन जुलूसों की निगरानी के लिए अलग से नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। मुंबई में भगवान गणेश की मूर्तियों के विसर्जन की निगरानी के लिए 250 नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं, जिनमें प्राकृतिक जलाशयों की निगरानी के लिए 72 और कृत्रिम तालाबों के लिए 178 निगरानी कक्ष शामिल हैं।

बीएमसी ने विभिन्न समुद्री तटों पर 468 स्टील की प्लेटें लगाई हैं ताकि प्रतिमाओं को ले जाने वाले वाहन रेत में न फंसें। इसके अलावा समुद्र में विशाल मूर्तियों के विसर्जन के लिए 46 जर्मन राफ्ट की व्यवस्था की गयी है।

विसर्जन स्थलों पर अग्निशमन वाहनों और प्रशिक्षित कार्यबल की तैनाती के अलावा, प्राकृतिक जलाशयों और कृत्रिम जलाशयों पर कुल 242 निरीक्षण टावर स्थापित किए गए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि विसर्जन स्थलों पर 96 एंबुलेंस भी तैनात रहेंगी।

बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं यातायात (बेस्ट) के सहयोग से विसर्जन वाली जगहों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था के लिए 1,083 फ्लड लाइट और 27 सर्चलाइट लगायी गयी हैं। बीएमसी ने बताया कि विभिन्न स्थानों पर 150 निर्मल्य कलश स्थापित किये गये हैं।

पुणे में विसर्जन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ-साथ बम खोजी एवं निरोधक दस्ते, त्वरित कार्रवाई बल और श्वान दस्ते भी तैनात किये गये हैं। पुणे में 3,865 गणेश मंडल हैं, जबकि घरों में भगवान गणेश की 6,14,257 प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।

गणेश उत्सव 2023; अनंत चौदस पर्व का समापन और मान्यतायें!

0

हिंदू धर्म में गणपति को शुभता और सौभाग्य का देवता माना जाता है, जिनकी पूजा से जुड़ा गणेश उत्सव आज भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चौदहवीं तिथि यानि अनंत चौदस के पर्व पर समाप्त होने जा रहा है.

गणपति के भक्त आज के दिन अपने आराध्य देवता को इस कामना के साथ विदाई देते हैं कि वह अगले साल एक बार फिर उनके घर में पधारें और उनका जीवन खुशियों से भर दें. हिंदू मान्यता के अनुसार जिस प्रकार गणपति को अपने घर में बिठाने का नियम होता है, कुछ वैसे ही गणपति को विदाई या फिर कहें उनका विसर्जन करने के भी जरूरी नियम होते हैं. आइए गणपति विसर्जन से जुड़े नियम और सही विधि को जानते हैं.

कैसे करें गणपति का विसर्जन

गणपति बप्पा की विदाई करने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले स्नान-ध्यान करके तन और मन से पवित्र हो जाना चाहिए और उसके बाद साफ वस्त्र धारण करने के बाद जिस स्थान पर बप्पा विराजमान हों वहां की साफ-सफाई करके उसे पवित्र करना चाहिए. इसके बाद गणपति को गंगाजल से स्नान कराएं और और उसके बाद उन्हें तिलक, पुष्प, फल, मोदक, दूर्वा आदि अर्पित करें. इसके बाद गणपति बप्पा के सामने दीपक जलाकर उनकी आरती करते हुए पूजा में हुई भूल की माफी मांगे और अपने जीवन में शुभता की कामना करें. इसके बाद गाजे-बाजे के साथ किसी पवित्र स्थान या जल तीर्थ में बप्पा का विसर्जन करें.

गणपति विसर्जन के नियम

  1. हिंदू मान्यता के अनुसार गणपति का विसर्जन हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए.
  2. गणेश विसर्जन के दिन काले कपड़े न पहनें.
  3. गणपति की पूजा में चढ़ाए गई सभी पूजन सामग्री को भी गणपति के साथ विसर्जित करें.
  4. यदि आपने गणपति को नारियल चढ़ाया हुआ है तो उसे कभी भी तोड़ें नहीं बल्कि उसे साबुत ही जल तीर्थ में बहा दें.
  5. गणपति की प्रतिमा को किसी जल तीर्थ में फेंके नहीं बल्कि आदर के साथ उन्हें जल में विलीन करें.
  6. गणपति की मूर्ति को विसर्जित करते समय गहरे पानी में न जाएं.
  7. गणपति की मूर्ति को किसी ऐसे स्थान पर विसर्जित करें जहां विसर्जन के बाद उसमें किसी का पैर न लगे.
  8. यदि आपकी मूर्ति छोटी है तो उसे आप अपने घर के किसी टब में विसर्जित करने के बाद उसका पानी और मिट्टी किसी गमले या पार्क के पौधे में डाल सकते हैं.

Monsoon Season: मॉनसून की वापसी की तैयारी, देश में 6 फीसदी कम बार‍िश हुई र‍िकॉर्ड

0

मॉनसून खत्‍म होने जा रहा है. देश के अधिकांश राज्यों में मॉनसून (Monsoon) के खत्‍म होने में अब स‍िर्फ 3 दिन बाकी हैं. आगामी 30 स‍ितंबर तक मॉनसून के समाप्‍त हो जाने की संभावना है.

ऐसे में बात मॉनसून में बार‍िश होने के र‍िकॉर्ड को लेकर भी शुरू होती है. इस बार मॉनसून के दौरान अमूमन कुल बारिश 6 फीसदी कम र‍िकॉर्ड हुई है. हालांक‍ि इस बार कहीं बहुत ज्‍यादा बार‍िश दर्ज की गई है तो कहीं पर सूखे (Drought) जैसे हालात भी पैदा हुए हैं. नार्थ ईस्‍ट में मण‍िपुर और म‍िजोरम के अलावा पूर्वी भारत के ब‍िहार, झारखंड के साथ-साथ दक्ष‍िण भारत के केरल में बारिश की कमी दर्ज की गई है.

मौसम विभाग की माने तो देश के 226 जिलों यानी 31 फीसदी क्षेत्र में इस बार 20 से 60 फीसदी तक बारिश कम र‍िकॉर्ड हुई है. जहां तक छत्तीसगढ़ के 33 जिलों की बात है, यहां केवल 6 जिलों में ही बारिश औसत से कम हुई है. उसमें भी दो जिलों में आधी के आसपास ही र‍िकॉर्ड की गई है. मौसम व‍िभाग का अनुमान है कि छत्तीसगढ़ से मॉनसून वापसी 10 अक्टूबर के आसपास होती है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है क‍ि कम बार‍िश वाले कुछ और ज‍िलों में बार‍िश हो सकती है और वो कम बार‍िश वाले ज‍िलों की स्‍थ‍ित‍ि से बाहर आ सकते हैं.

मीड‍िया र‍िपोर्ट्स के मुताब‍िक उत्‍तर प्रदेश के 5 जिलों समेत देश के 11 जिले ऐसे भी रहे हैं जहां 72 फीसदी तक बारिश की कमी र‍िकॉर्ड की गई. वहीं, देश के 372 जिलों में सामान्य बारिश हुई है. वहीं, मौसम व‍िभाग जिलों की बारिश को मापते वक्‍त 20 फीसदी से कम बारिश होने को भी सामान्य कैटेगरी में ही रखता है. उत्‍तर प्रदेश के 29 जिले, बिहार में 18, झारखंड के 15, केरल के 9, कर्नाटक व आंध्र के 7-7, तमिलनाडु व महाराष्ट्र के 5-5 ज‍िलों में 25% से 72% के बीच बारिश की कमी दर्ज की गई है.

मौसम व‍िभाग ने छत्तीसगढ़ के 6 जिलों में भी औसतन कम बार‍िश र‍िकॉर्ड की है. इनमें से 2 जिलों सरगुजा और जशपुर की स्थि​ति बेहद खराब आंकी गई है. इन दोनों ज‍िलों में मॉनसून में अनुमान‍ित न‍िर्धार‍ित बार‍िश का आधा ही हुआ है. हालांक‍ि मौसम विभाग की रिपोर्ट बताती है क‍ि सितंबर माह में जितना पानी बरसना चाहि‍ए, उतना बरस रहा है. लेक‍िन छत्‍तीसगढ़ का बेहद कम बारिश वाला ज‍िला सरगुजा है जहां औसतन 60 फीसदी से कम बारिश को र‍िकॉर्ड क‍िया है.

वहीं, जशपुर ज‍िले में भी अनुमानित बार‍िश से 39 फीसदी कम पानी बरसा है. सूरजपुर में पिछले कुछ दिन में बदले मौसम के म‍िजाज के बाद भी बारिश 32 फीसदी कम रह गई है. दंतेवाड़ा, कोरबा और कोरिया कम बार‍िश वाले जिलों की ल‍िस्‍ट में शाम‍िल हैं. लेकिन मौसम वैज्ञान‍िकों का मानना है क‍ि एक-दो दिन की तेज बारिश से इनका मॉनसून का कोटा पूरा हो सकता है.

कृषि विशेषज्ञ मानते हैं क‍ि इस बार देश का आधा ह‍िस्‍सा सूखे की मार झेल रहा है जोक‍ि बेहद च‍िंताजनक है. धान के रकबा में बढ़ोतरी नजर आई है. पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों में जुलाई में बाढ़ आने के बाद धान की दोबारा बुवाई हुई और उसे फिर से रिकॉर्ड में लिया गया, जिससे आंकड़ा बढ़ गया. अब मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है यानी हवा में नमी भी खत्म होती जाएगी, इसका फसलों पर असर पड़ेगा. रबी की फसलों पर भी इसका असर पड़ेगा क्योंकि अलनीनो की मार शुरू हो गई है.

इन राज्‍यों पर पड़ा मॉनसून में कम बार‍िश का खास असर

इस बीच देखा जाए तो कृष‍ि व‍िशेषज्ञों का मानना है क‍ि बारिश की कमी की वजह से खरीफ की फसल पर इसका असर पड़ा है. धान, गन्‍ना और श्रीअन्‍न को छोड़कर सभी दलहन, त‍िलहन, जूट और कपास की बुवाई में कमी र‍िकॉर्ड की गई है. कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तम‍िलनाडु, महाराष्‍ट्र और ओड‍िशा में धान की बुवाई प‍िछड़ गई. इन पांचों राज्‍यों में प‍िछले साल के मुकाबले 4.58 लाख हेक्‍टेयर में धान की बुवाई नहीं हो सकी.

इस साल कर्नाटक में 3.12 लाख हेक्‍टेयर, महाराष्‍ट्र में 2.66 लाख हेक्‍टेयर रकबे में दालों की बुवाई नहीं हो पाई है. असमान मॉनसून का सबसे ज्‍यादा असर राजस्‍थान में नुकसान के तौर पर देखा जा सकता है. यहां अगस्‍त में जरूरत के वक्‍त बार‍िश नहीं हुई और फसल कटाई के समय स‍ितंबर में बार‍िश हुई है. ऐसा ही हाल कुछ गुजरात में रहा. मध्‍य प्रदेश में सोयाबीन और यूपी व बिहार, झारखंड और पश्‍च‍िम बंगाल में धान की बुवाई को नुकसान हुआ है.

मणिपुर : 6 महीने के लिए बढ़ाया गया AFSPA, लगातार हिंसा की वारदातें…

0

मणिपुर हिंसा : कानून-व्यवस्था को देखते हुए सरकार ने ये फैसला लिया है. हाल ही में 2 छात्रों की मौत के बाद लोगों में गुस्सा है और हजारों छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. मणिपुर सरकार ने घाटी के 19 पुलिस स्टेशनों को छोड़कर राज्य के पहाड़ी इलाकों में AFSPA को 6 महीने के लिए बढ़ा दिया है, जिसकी शुरुआत 1 अक्टूबर से होगी.

करीब 150 दिनों से मणिपुर जल रहा है, लगातार हिंसा की वारदातें सामने आ रही हैं. राज्य में अब तक ना जाने कितने लोगों की जान चली गई, हजारों लोग बेघर हो गए, केंद्र सरकार कोई कदम नहीं उठा रही.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता की चिंता सता रही है. मणिपुर जल रहा है लेकिन पीएम मणिपुर पर ध्यान देने की बजाए चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं. इससे साफ जाहिर होता है कि पीएम को मणिपुर की जनता की कोई फिक्र नहीं है.

हत्या के खिलाफ हजारों छात्रों का प्रदर्शन

इधर राजधानी इंफाल में हत्या के खिलाफ हजारों छात्रों का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी है. घटना से नाराज छात्रों ने विरोध प्रदर्शन कर रैली निकाली और जमकर नारेबाजी की. छात्रों का कहना है कि वो लोग अपने साथी छात्रों के अपहरण और हत्या के खिलाफ काले बैज पहनकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

CBI जांच में देरी से नाराज सड़कों पर उतरी महिलाएं

कुकी समुदाय की संस्था, इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) की महिला शाखा विंग ने आदिवासियों की हत्या और बलात्कार के मामले में सीबीआई की जांच में देरी के खिलाफ चुराचांदपुर में प्रदर्शन किया. महिला विंग की संयोजक का कहना है कि उन्हें हैरत है की आदेश के बाद भी अभी तक कुकी समुदाए के लोगों की हत्याओं और बलात्कारों की जांच शुरू नहीं की गई.

इस बीच हिंसा की आंशका को देखते हुए इंफाल में मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ और आरएएफ के जवान तैनात किए गए हैं. अधिकारियों के मुताबिक पुलिस हालात पर नजर बनाए हुए हैं और चप्पे-चप्पे पर नजर रखी गई है ताकि किसी भी तरह की हिंसा को रोका जा सके.

टमाटर, प्याज के बाद अब दालें होंगी सस्ती सरकार ने उठाया ये कदम…

0

खाने-पीने के सामान महंगा होने का पुराना रिकॉर्ड रहा है। इसको देखते हुए सरकार ने टमाटर, प्याज के बाद अब दालों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने तुअर और उड़द पर मौजूदा स्टॉक रखने की सीमा की अवधि इस साल दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर तक कर दी है।

साथ ही सरकार ने कुछ इकाइयों के लिए स्टॉक रखने की सीमा को संशोधित किया है। खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डिपो में थोक विक्रेताओं और बड़ी श्रृंखला के खुदरा विक्रेताओं के लिए स्टॉक सीमा 200 टन से घटाकर 50 टन कर दी गई है। उम्मीद है कि कीमतें में कमी आए।

मंत्रालय ने बयान में कहा, स्टॉक सीमा में संशोधन और समय अवधि का विस्तार और बाजार में पर्याप्त मात्रा में तुअर और उड़द की उपलब्धता सुनिश्चित करने और इनको सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए है। ताजा आदेश के अनुसार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 31 दिसंबर तक तुअर और उड़द के लिए स्टॉक सीमा निर्धारित की गई है। थोक विक्रेताओं के लिए प्रत्येक दाल पर अलग से लागू स्टॉक सीमा 50 टन होगी; खुदरा विक्रेताओं के लिए पांच टन; प्रत्येक खुदरा दुकान पर पांच टन, और बड़ी श्रृंखला के खुदरा विक्रेताओं के लिए डिपो पर 50 टन; मिल मालिकों के लिए उत्पादन का अंतिम एक महीने या वार्षिक स्थापित क्षमता का 10 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, होगी। हालांकि, आयातकों को सीमा शुल्क निकासी की तारीख से 30 दिन से अधिक आयातित स्टॉक रखने की अनुमति नहीं है। मिल मालिकों के लिए स्टॉक सीमा भी पिछले तीन महीने के उत्पादन, या वार्षिक क्षमता के 25 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, से घटाकर पिछले एक महीने के उत्पादन, या वार्षिक क्षमता का 10 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, कर दी गई है।

पोर्टल पर स्टॉक की घोषणा करनी होगी

आदेश के अनुसार, संबंधित पात्र संस्थाओं को उपभोक्ता मामलों के विभाग के पोर्टल पर अपने स्टॉक की घोषणा करनी होगी और यदि उनके पास स्टॉक इस निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उन्हें अधिसूचना जारी होने के 30 दिनो के भीतर इसे निर्धारित स्टॉक सीमा में लाना होगा। इस साल दो जनवरी को,सरकार ने जमाखोरी और सट्टेबाजी को रोकने के लिए तुअर और उड़द पर स्टॉक सीमा लगाई थी। बयान में कहा गया है कि उपभोक्ता मामलों का विभाग स्टॉक खुलासा पोर्टल के माध्यम से तुअर और उड़द की स्टॉक स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है, जिसकी साप्ताहिक आधार पर समीक्षा की जा रही है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, चालू खरीफ सत्र के दौरान दलहन की बुवाई का रकबा 22 सितंबर तक कम यानी 122.57 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो एक साल पहले की समान अवधि में 128.49 लाख हेक्टेयर था। इस कमी को पूरा करने के लिए देश दालों का आयात करता है।

छत्तीसगढ़ में किसान, मजदूरों को आत्मनिर्भर बनाने से सरकार की जनहितैषी योजनाएं कारगर साबित हो गई : सी.एम. भूपेश बघेल!

0

छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि प्रदेश के गांव-गांव में छोटे किसान, मजदूरों को आत्मनिर्भर बनाने से सरकार की जनहितैषी योजनाएं काफी कारगर साबित हो रही हैं. राज्य में रोजगार, स्व-रोजगार, स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को लेकर कई बड़े काम किए गए हैं.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मार्गदर्शन में ग्रामीण तबकों और सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं का काफी लाभ पहुंचा है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के वनवासी और आदिवासियों के हितों में कई बड़े कार्य किए गए हैं. यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में देश का 74 फीसदी लघु वनोपज संग्रहित होता है.

संग्राहकों की संख्या 4 गुना बढ़ी

छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा कि यहां संग्राहकों के हित में लघु वनोपजों की संख्या में लगातार वृद्धि करते हुए 7 से बढ़ाकर वर्तमान में 67 लघु वनोपजों की खरीदी की जा रही है. खरीदी बढ़ने से संग्राहकों की संख्या में भी 4 गुना से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है.

जानकारी के मुताबिक साल 2018-19 में संग्राहकों की संख्या 1.5 लाख थी जो बढ़कर 6 लाख हो गई है. साल 2021-22 में कुल 42 हजार मीट्रिक टन लघु वनोपजों की खरीदी की गई है, जबकि यह मात्रा साल 2018-19 में 540 मीट्रिक टन थी. प्रबंध संचालक राज्य लघु वनोपज संघ अनिल राय का कहना है छत्तीसगढ़ में लघु धान्य फसलों को बढ़ावा देने के लिए मिलेट मिशन भी चलाया जा रहा है. इसके तहत समर्थन मूल्य पर कोदो, कुटकी, रागी की खरीदी की जा रही है.

तेंदूपत्ता संग्राहकों की आमदनी बढ़ी

छत्तीसगढ़ पूरे देश का सबसे बड़ा वनोपज संग्राहक राज्य है. पिछले साढ़े चार सालों में छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितैषी योजनाओं की वजह से करीब 13 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों और 06 लाख वनोपज संग्राहकों को विशेष आमदनी हो रही है. संग्राहकों के हित में तेन्दूपत्ता संग्रहण दर 2 हजार 500 रुपए से बढ़ाकर 4 हजार रुपए प्रति मानक बोरा किया गया है.

संग्राहकों को पिछले चार सालों के दौरान 2146.75 करोड़ रूपए तेन्दूपत्ता के हिसाब से मेहनताना दिया गया है. संग्राहक परिवारों के हित में शहीद महेन्द्र कर्मा तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत अब तक 4692 हितग्राहियों को 71.02 करोड़ रूपए की सहायता प्रदान की गई है.

लाख उत्पादन को कृषि का दर्जा

वन अधिकारों के क्रियान्वयन में भी छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य है. छत्तीसगढ़ सरकार ने लाख उत्पादन को कृषि का दर्जा दिया है. लाख उत्पादक कृषकों को अल्पकालीन ऋण प्रदान करने की योजना भी लागू की है. इससे लाख उत्पादक किसानों के जीवन में सुधार आ रहा है.

नीति आयोग : मुफ्त राशन और गैस सिलेंडर इन 2 योजनओं पर हो सकता है सरकार का एलान!

0

नीति आयोग जल्द ही भारत की सबसे बड़ी सब्सिडी योजनाओं, नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट और एलपीजी सब्सिडी का मूल्यांकन करेगा, ताकि इस खर्च को तर्कसंगत बनाया जा सके, फर्जीवाड़ा रोका जा सके और और यह सुनिश्चित किया जा सके कि पात्र उम्मीदवारों तक लाभ पहुंच रहा है या नहीं.

नीति आयोग के डेवलपमेंट मॉनेटरिंग और इवैल्यूएशन ऑफिस ने दो योजनाओं के इवैल्यूएशन के लिए सेंट्रल कॉर्डिनेशन एजेंसी के लिए प्रपोजल मंगाए हैं. इन दोनों योजनाओं पर सरकारी खजाने से हर साल लगभग 4,00,000 करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं.

डीएमईओ ने आरएफपी डॉक्युमेंट्स में कहा कि सरकार 2013 में अधिनियमित नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट यानी एनएफएसए के माध्यम से दुनिया में सबसे बड़े पब्लिक फूड और न्यूट्रिशनल सेफ्टी को लागू करती है. ताज्जुब की बात तो ये है कि भारत में फूड सेफ्टी पर इतने बड़े खर्च के बाद भी परिणाम कुछ खास अच्छे देखने को नहीं मिले हैं. ग्लोबल हंगर में भारत की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी है.

क्या इवैल्यूएशन का तर्क

एलपीजी सब्सिडी की वैल्यूएशन के पीछे तर्क बताते हुए डीएमईओ ने आगे कहा कि चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एनर्जी कंज्यूमर है. डीएमईओ ने आगे जोड़ते हुए कहा कि भारत में एलपीजी की वर्तमान खपत केरोसिन की 1.13 फीसदी की तुलना में कुल पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का 12.3 फीसदी तक बढ़ गई है. चालू योजनाओं से संभावित रूप से एलपीजी का उपयोग और बढ़ेगा, जिससे उनका मूल्यांकन अनिवार्य हो जाएगा.

लगातार बढ़ रही है डिमांड

टीपीडीएस के तहत फूड सब्सिडी को लागू करने की लागत 2021 के संशोधित अनुमान के अनुसार 4,22,618.11 करोड़ रुपये थी, जबकि एमडीएम और आईसीडीएस को लागू करने की लागत क्रमशः 12,900 करोड़ रुपये और 17,252.21 करोड़ रुपये थी. डीएमईओ के अनुसार, भारत में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कंजंप्शन देश की ऊर्जा जरूरतों का एक तिहाई से अधिक है. इसके अलावा, बढ़ती जनसंख्या, आर्थिक विकास और क्लीन एनर्जी की डिमांड के साथ तेल और गैस की मांग पिछले कुछ वर्षों में बढ़ रही है.

Weather Forecost : 18 राज्यों में हो रही भारी बारिश, मानसून को लेकर आई अच्छी खबर!

0

: देश के 18 राज्यों में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है. दिल्ली, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भारी बारिश हो रही है.

सबसे बुरा हाल महाराष्ट्र के नागपुर का है. बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश से पूरा शहर पानी-पानी हो गया है. इधर, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मानसून सीजन के बचे हुए दिनों में देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना ने मानसून को सामान्य के करीब ला दिया है. इससे पहले मौसम वैज्ञानिकों ने कम बारिश का संकेत दिया था. मानसूम में 6 फीसदी कमी यानी सामान्य से नीचे की श्रेणी में बारिश को रखा था. बता दें, देश के 18 राज्यों में मानसून सक्रिय है. दिल्ली, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भारी बारिश हो रही है. सबसे बुरा हाल महाराष्ट्र के नागपुर का है.

मौसम विभाग ने की थी सामान्य बारिश की भविष्यवाणी
गौरतलब है कि मानसून के आगमन के साथ ही मौसम विभाग ने देश में सामान्य मानसून का अनुमान जताया था. हालांकि आईएमडी ने बाद में अल नीनो के कारण अगस्त महीने में हुई कम बारिश के कारण कहा कि इस बार मानसून सामान्य से कम रहेगा. लेकिन इधर बीते कुछ दिनों से मानसून के फिर से सक्रिय हो जाने और कई राज्यों में जोरदार बारिश के कारण मौसम विभाग ने कहा है कि मानसून सामान्य से अब ज्यादा कम नहीं होगा. आईएमडी ने कहा है कि इस महीने की शुरुआत में मानसून में बारिश की कमी 11 फीसदी से कम होकर शनिवार को 6 फीसदी हो गई है.

18 राज्यों में मानसून सक्रिय
दिल्ली, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र में मूसलाधार बारिश हो रही है. मौसम विभाग ने कहा है कि देश के 18 राज्यों में मानसून सक्रिय है. जिन राज्यों में मानसून सक्रिय हुआ है उनमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश समेत देश के 18 राज्य सक्रिय है. इन राज्यों में भारी बारिश हो रही है. कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं. सबसे बुरा हाल महाराष्ट्र के नागपुर का है. भारी बारिश के कारण नागपुर में चार लोगों की मौत की खबर है.

बिहार में 28, झारखंड में 29 फीसदी कम बारिश
राजस्थान 426.6 14
गुजरात 685.7 20
उत्तर प्रदेश 723.0 15
बिहार 938.6 28
झारखंड 692.2 29
पश्चिम बंगाल 846.7 23
ओडिशा 1077 3

देश में अब तक सामान्य से छह फीसदी कम बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक, देश में 22 सितंबर तक 780.3 मिमी बारिश हुई है, जबकि 832.4 मिमी बारिश होनी चाहिए थी. ये सामान्य से 6 फीसदी कम बारिश है. मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से दो फीसदी अधिक बारिश हुई है, जबकि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 10 फीसदी कम वर्षा हुई है.

परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा की शादी खत्म, इस नए सफर के लिए शुभकामनाएं!

0

परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा 24 सितंबर की शाम शादी रचाई गयी. एक साथ दोनों की जोड़ी काफी जच रही है.

परिणीति चोपड़ा ने इंस्टाग्राम पर शादी की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, ‘ब्रेकफस्ट की टेबल पर पहली बार हुई बातचीत के वक्त से ही, हमारा दिल ये जानता था. इस दिन का लंबे वक्त से इंतज़ार कर रही थी. मिस्टर और मिसेज़ बनकर हम बहुत खुश हैं. एक दूसरे के बिना नहीं जी पाते, हमेशा के लिए हमारी ज़िंदगी शुरू हो गई.’

गौरतलब है कि दोनों ने इसी साल मई के महीने सगाई की थी और फिर अब दोनों हमेशा हमेशा के लिए शादी के पवित्र बंधन में बंध गए हैं. अटूट बंधन में बंधने की खुशी दोनों के चेहरे पर साफ झलक रही है. फैंस सोशल मीडिया पर काफी पसंद कर रहे हैं और दोनों को इस नए सफर के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं.

परिणीति की कजन सिस्टर प्रियंका चोपड़ा का भी रिएक्शन सामने आया है. कमेंट करते हुए उन्होंने लिखा, ‘मेरी दुआएं हमेशा साथ हैं.’ बता दें, प्रियंका और परिणीति एक दूसरे के काफी क्लोज हैं. हालांकि किसी कारण से वो शादी में शरीक नहीं हो पाईं थीं.

CG Election 2023: भाजपा की चारों विधानसभा सीटों का पैनल केंद्रीय टीम के हवाले!

0

CG Election 2023: कांग्रेस की प्रदेश चुनाव समिति की बैठक 26 सितंबर को राजीव भवन में होगी। इसमें दावेदारों के पैनल को अंतिम रूप दिया जाएगा। वहीं भाजपा की चारों विधानसभा सीटों का पैनल केंद्रीय टीम के हवाले हो गया है। वहीं से उम्मीदवारों की घोषणा होगी।

राजनीतिक पार्टी का कार्यालय, हर तरफ बस दावेदारों की टिकट को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक प्रीतम सिंह ने गांधी मैदान स्थित कांग्रेस भवन में चारों सीट के दावेदारों से वन-टू-वन चर्चा की। शहर की एक विधानसभा सीटों को छोड़कर तीन जगहों पर प्रत्याशी की स्थिति करीब स्पष्ट हो गई है, अब केवल नाम घोषित किया जाना शेष बचा है।

लोगों में चर्चा है कि शहर के पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक विकास उपाध्याय, उत्तर से कुलदीप जुनेजा और ग्रामीण से विधायक सत्यनारायण शर्मा के चुनाव नहीं लड़ने की स्थिति में उनके बेटे पंकज शर्मा को टिकट मिलना तय है। ग्रामीण विधानसभा सीट से दावेदारी कर पंकज शर्मा संकेत दे चुके हैं कि पिता की सीट के प्रबल दावेदार हैं।

कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो रायपुर उत्तर और दक्षिण विधानसभा सीट से महापौर एजाज ढेबर ने दावेदारी पेश की थी, लेकिन पर्यवेक्षक प्रीतम सिंह से चर्चा के दौरान वे उत्तर से प्रबल दावेदार और विधायक कुलदीप जुनेजा के समर्थन में आ गए। रायपुर शहर की चार विधानसभा सीटें के लिए कांग्रेस से 92 दावेदारों ने दावा ठोक था, हालांकि शहर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से तीन-तीन नामों का पैनल बनाकर राज्य चुनाव समिति को भेजा जा चुका है।

भाजपा के दावेदारों का रोज बदल रहा समीकरण

भाजपा की पहली सूची में जिस तरीके से केंद्रीय संगठन ने प्रत्याशी घोषित किए, उससे भाजपा के स्थानीय नेता यह दावा नहीं कर पा रहे हैं कि किसे उम्मीदवार बनाया जाएगा। हर सीट पर कयास का दौर है। भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर से लेकर कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में रोज चर्चा में नए समीकरण बन रहे हैं। लोगों से सहज सुना जा सकता है कि कोई कितना भी दावा कर ले, प्रत्याशी तो दिल्ली से ही तय किया जाएगा। बताया जाता है कि भाजपा की ओर से प्रत्याशियों के लिए सर्वे कार्य कराया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही टिकट तय होंगे। युवाओं को भाजपा दांव लगाती है तो पूर्व के कई विधायकों और पूर्व मंत्रियों के नाम सूची से गायब हो सकते हैं।