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निपाह वायरस केरल में: कैसे फैलता है ये संक्रमण, क्या है इलाज!

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केरल सरकार ने कोझिकोड ज़िले में निपाह वायरस का संक्रमण फैलने के बाद सभी शैक्षणिक संस्थानों को गुरुवार और शुक्रवार तक बंद रखने का फ़ैसला किया है.

राज्य सरकार की ओर से उन सभी लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है जो संक्रमित पाए गए लोगों के संपर्क में आए हैं.

इसके साथ ही केंद्र सरकार की एक टीम कोझिकोड पहुंच गयी है. इस टीम ने निपाह वायरस से संक्रमित क्षेत्र का दौरा किया है.

वहीं, राज्य सरकार ने वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों के क्वारंटीन के लिए उचित इंतज़ाम करना शुरू कर दिए हैं.

कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग शुरू

केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने अब से कुछ घंटे पहले बताया है कि अब तक कुल तीन सैंपल पॉज़िटिव पाए गए हैं.

वहीं, अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, उन्होंने कहा है है कि “हमने कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है. इस प्रक्रिया में मिले 706 कॉन्टेक्ट्स में से 77 लोग हाई रिस्क केटेगरी मे हैं. 153 स्वास्थ्य कर्मी लो रिस्क कैटेगरी में हैं. जो मरीज हाई रिस्क कैटेगरी में हैं, उन्हें अपने घरों में रहने के लिए कहा गया है. अगर उनमें लक्षण नज़र आते हैं तो वे कॉल सेंटर पर संपर्क कर सकते हैं.”

वीणा जॉर्ज ने बताया है कि ऐसे मरीज़ जिनमें लक्षण नज़र आते हैं तो उन्हें मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा.

उन्होंने कहा, “आइसोलेशन में रखे गए लोगों में किसी तरह के लक्षण नज़र आने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा. हमने टेलीमेडिसिन की व्यवस्था की है. इसके साथ ही निपाह वायरस के संक्रमण पर नज़र रखने के लिए 19 समितियां बनाई हैं.

हाई रिस्क कैटेगरी वाले किसी शख़्स में अब तक किसी तरह के लक्षण नहीं दिखे हैं. हमारे पास मेडिकल कॉलेज में 75 कमरों को आइसोलेशन के लिए तैयार किया गया है. वहीं, मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए गए 13 लोगों में हल्के लक्षण पाए गए हैं.”

कोझिकोड पहुंची केंद्रीय टीम

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, कोझिकोड से निपाह वायरस की ख़बर फैलने के बाद केंद्र की एक टीम केरल पहुंच गई है.

इस टीम ने निपाह वायरस प्रभावित इलाके का दौरा किया है.

कोझिकोड प्रशासन ने सात ग्राम पंचायतों को कंटेनमेंट ज़ोन घोषित कर दिया है ताकि इस क्षेत्र से निपाह वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके.

इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने कुछ घंटे पहले निपाह प्रभावित क्षेत्रों में जाने के लिए मोबाइल वायरॉलजी लैब को रवाना किया है.

इस ताज़ा आउटब्रेक से जुड़ी जानकारी आना जारी है जिसे बीबीसी की ओर से लगातार उपलब्ध कराया जाएगा.

कैसे फैलता है निपाह वायरस?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक़ निपाह वायरस (NiV) एक तेज़ी से उभरता वायरस है, जो जानवरों और इंसानों में गंभीर बीमारी को जन्म देता है.

NiV के बारे में सबसे पहले 1998 में मलेशिया के कम्पंग सुंगाई निपाह से पता चला था.

वहीं से इस वायरस को ये नाम मिला. उस वक़्त इस बीमारी के वाहक सूअर बनते थे.

लेकिन इसके बाद जहां-जहां NiV के बारे में पता चला, इस वायरस को लाने-ले जाने वाले कोई माध्यम नहीं थे.

साल 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोग इस वायरस की चपेट में आए.

इन लोगों ने खजूर के पेड़ से निकलने वाले तरल पदार्थ को चखा था और इस तरल पदार्थ तक वायरस को लेने जानी वाले चमगादड़ थे जिन्हें फ्रूट बैट कहा जाता है.

अब तक कोई इलाज नहीं?

इस वायरस के एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुंचने की पुष्टि भी हुई. और ऐसा भारत के अस्पतालों में हुआ है.

इंसानों में NiV इंफ़ेक्शन से सांस लेने से जुड़ी गंभीर बीमारी हो सकती है या फिर जानलेवा इंसेफ़्लाइटिस भी अपनी चपेट में ले सकता है.

इंसानों या जानवरों को इस बीमारी को दूर करने के लिए अभी तक कोई इंजेक्शन नहीं बना है.

सेंटर फ़ॉर डिसीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक़ निपाह वायरस का इंफ़ेक्शन एंसेफ़्लाइटिस से जुड़ा है, जिसमें दिमाग़ को नुक़सान होता है.

बीमारी के लक्षण क्या?

इस वायरस से संक्रमित होने के बाद व्यक्ति 3 से 14 दिन तक तेज़ बुख़ार और सिरदर्द का सामना कर सकता है.

ये लक्षण 24 से 48 घंटों में मरीज़ को कोमा में पहुंचा सकते हैं.

इंफ़ेक्शन के शुरुआती दौर में सांस लेने में समस्या होती है जबकि लगभग आधे मरीज़ों में न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें भी होती हैं.

साल 1998-99 में इस वायरस की चपेट में 265 लोग आए थे.

अस्पतालों में भर्ती हुए इनमें से क़रीब 40% मरीज़ ऐसे थे जिन्हें गंभीर नर्वस बीमारी हुई थी और उन्हें बचाया नहीं जा सका था.

आम तौर पर इंसानों में ये वायरस इंफेक्शन की चपेट में आने वाले चमगादड़ों, सूअरों या फिर दूसरे इंसानों से फैलता है.

मलेशिया और सिंगापुर में इसके सूअरों के ज़रिए फैलने की जानकारी मिली थी जबकि भारत और बांग्लादेश में इंसान से इंसान का संपर्क होने पर इसकी चपेट में आने का ख़तरा ज़्यादा रहता है.

Ganesh Chaturthi; गणेश चतुर्थी के मौके पर 18, 19, 20 सितंबर को बंद रहेंगे बैंक, आपके राज्य में कब है बैंक हॉलिडे- जानें!

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Ganesh Chaturthi 2023: सितंबर में 19 तारीख मंगलवार को गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाएगा और इसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. भगवान गणेश के जन्म के उपलक्ष्य में गणेश चतुर्थी का त्योहार देश भर में धूमधाम से और उत्साह से मनाया जाता है.

खासकर कि महाराष्ट्र में इसकी अलग ही रौनक रहती है. इस साल 10 दिन का ये हिंदू त्योहार 19 सितंबर से 28 सितंबर के बीच मनाया जाएगा. इस दिन देश के कई बैंकों में अवकाश रहेगा और अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दिनों पर भी छुट्टी रहेगी.

गणेश चतुर्थी पर बैंकों में अवकाश

गणेश चतुर्थी पर बैंकों में अवकाश के दिन देखें तो कुछ शहरों में 18, 19 और 20 सितंबर को छुट्टी रहेगी. लिहाजा अलग-अलग राज्यों में तीन दिनों के लिए बैंक बंद रहेंगे. भारतीय रिजर्व बैंक के हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक बंग्लुरू, चेन्नई, हैदराबाद और तेलंगाना में 18 सितंबर को वरसिद्धि विनायक व्रत/विनायक चतुर्थी के अवसर पर 18 सितंबर को अवकाश रहेगा.

19 सितंबर को कहां-कहां बंद रहेंगे बैंक

19 सितंबर को बैंक बंद रहने वाले जो शहर हैं उनमें अहमदाबाद, बेलापुर, भुवनेश्नर, मुंबई, नागपुर, पणजी में गणेश चतुर्थी/संवत्सरी (चतुर्थी पक्ष) के उपलक्ष्य में बैंकों में छुट्टी रहेगी.

20 सितंबर को कहां-कहां बंद रहेंगे बैंक

20 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दूसरे दिन के उपलक्ष्य में भुवनेश्वर और पणजी में अवकाश रहेगा.

सितंबर में कितने दिन बंद रहेंगे बैंक

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की हॉलिडे लिस्ट के मुताबिक सितंबर में 12 आधिकारिक छुट्टियां रहेंगी (अलग-अलग राज्यों के मुताबिक विभिन्न हो सकती है). इसके अलावा रविवार और ऑल्टरनेट शनिवार के अवकाश को जोड़ दिया जाए तो ये 16 बैंक हॉलिडे बन जाती हैं.

जानिए सितंबर के अन्य बैंक अवकाश कब-कब हैं

  • 22 सितंबर, 2023- श्री नारायण गुरु समाधि दिवस (कोच्चि, पणजी और त्रिवेंद्रम में बैंकों में अवकाश रहेगा).
  • 23 सितंबर, 2023- चौथे शनिवार के कारण पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे.
  • 24 सितंबर, 2023- रविवार
  • 25 सितंबर, 2023- श्रीमंत शंकरदेव की जयंती (गुवाहाटी में बैंकों में अवकाश रहेगा).
  • 27 सितंबर, 2023- मिलाद-ए-शेरिफ (जम्मू, कोच्चि, श्रीनगर और त्रिवेंद्रम में बैंक में छुट्टी है).
  • 28 सितंबर, 2023- ईद-ए-मिलाद (अहमदाबाद, आइजोल, बेलापुर, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, देहरादून, तेलंगाना, इंफाल, कानपुर, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, रायपुर, रांची में बैंकों में अवकाश है).
  • 29 सितंबर, 2023- ईद-ए-मिलाद-उल-नबी (गंगटोक, जम्मू और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे).

Blood Cancer Awareness Month; कितने तरह का होता है ब्लड कैंसर, इसके शुरुआती लक्षण कुछ इस तरह के होते हैं?

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हर साल पूरी दुनिया में सितंबर के महीने में ब्लड कैंसर जागरूकता महीने के रूप में मनाया जाता है. आज हम बात करेंगे कितने तरह के ब्लड कैंसर होते हैं? उनके प्रकार और प्रभाव से जुड़ी जानकारी.

इंडियन एक्सप्रेश में छपी खबर के मुताबिक अगर इस बीमारी का पता समय रहते चल जाए तो मरीज को बचाया जा सकता है. या सही इलाज से उसकी जिंदगी में कुछ साल जोड़े जा सकते हैं. आज इस आर्टिकल में बात करेंगे कैंसर कितने तरह के होते हैं और इसे लेजर के इलाज से कैसे ठीक किया जा सकता है.

मायलोइड्सप्लास्टिक सिंड्रोम (एमडीएस)

एमडीएस दुर्लभ रक्त विकारों का एक समूह है जिसमें अस्थि मज्जा पर्याप्त स्वस्थ रक्त कोशिकाओं का उत्पादन नहीं करता है. इससे एनीमिया, संक्रमण और रक्तस्राव की समस्या हो सकती है. कुछ मामलों में एमडीएस तीव्र ल्यूकेमिया में बदल सकता है, जिससे शीघ्र निदान और उपचार महत्वपूर्ण हो जाता है.

मायलोप्रोलिफेरेटिव नियोप्लाज्म (एमपीएन)

एमपीएन ब्लड कैंसर में बोन मैरो में ब्लस सेल्स काफी ज्यादा बढ़ने लगता है.पॉलीसिथेमिया वेरा, एसेंशियल थ्रोम्बोसाइटेमिया और मायलोफाइब्रोसिस जैसी स्थितियां इस श्रेणी में आती हैं. थकान, रक्त के थक्के और ल्यूकेमिया के बढ़ते जोखिम जैसे लक्षणों के कारण एमपीएन किसी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है.

हेयरी सेल ल्यूकेमिया (HCL)

एचसीएल ल्यूकेमिया का एक गंभीर बीमारी बी कोशिकाओं को प्रभावित करता है. माइक्रोस्कोप के नीचे देखने पर कैंसर कोशिकाओं की सतह पर बाल जैसे उभार के कारण इसका नाम पड़ा. हालांकि इसे धीमी गति से बढ़ने वाला कैंसर माना जाता है, फिर भी एचसीएल का इलाज करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

वाल्डेनस्ट्रॉम मैक्रोग्लोबुलिनमिया

यह एक दुर्लभ प्रकार का लिंफोमा है जो अस्थि मज्जा और रक्त को प्रभावित करता है. इसमें इम्युनोग्लोबुलिन एम (आईजीएम) नामक प्रोटीन का अत्यधिक उत्पादन शामिल है, जिससे थकान, रक्तस्राव और तंत्रिका संबंधी समस्याएं जैसे लक्षण हो सकते हैं.

क्रोनिक इओसिनोफिलिक ल्यूकेमिया (सीईएल)

सीईएल क्रोनिक माइलॉयड ल्यूकेमिया का एक दुर्लभ उपप्रकार है जो मुख्य रूप से ईोसिनोफिल्स, एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका को प्रभावित करता है. यह त्वचा पर चकत्ते, थकान और अंग क्षति सहित कई प्रकार के लक्षण पैदा कर सकता है.

सफेद बैंगन चमकाएगा किसानों की किस्मत, एक एकड़ में लगा दिया तो होगा लाखों का लाभ!

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White Brinjal Cultivation: बहुत से लोगों को बैंगन की सब्जी और भरता बेहद पसंद होता है. बैंगन की कीमतें भी बाजार में अच्छी होती है. लेकिन क्या आपने कभी सफेद बैंगन के बारे में सुना है.

इसकी मांग बाजार में तेजी से बढ़ रही है, किसान भाई सफेद बैंगन की खेती कर बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं. इसकी एक खासियत ये भी है कि इसे आप पूरे साल में कभी भी ऊगा सकते हैं.

बता दें कि सफेद बैंगन में सामान्य बैंगन के मुकाबले अधिक मात्रा में विटामिन और मिनरल्स होते हैं. इस के अंदर विटामिन बी, पोटैशियम, कॉपर और मैग्नीशियम सहित कई तरह के पोषक तत्व भी रहते हैं. इसी कारण इसके पत्ते और तने दवाई बनाने के काम भी आते हैं.

यदि किसान सफेद बैंगन उगाना चाहते हैं तो सबसे पहले उन्हें इसकी नर्सरी तैयार करनी होगी. नर्सरी तैयार करने के लिए खेतों की कई बार जुताई करनी चाहिए. फिर, जब मिट्टी भुरभुरी हो जाए तो खेत को गारे से समतल कर दिया जाता है। इसके बाद क्यारी बनाकर उसमें सफेद बैंगन के बीज बो दें। फिर सिंचाई के बाद क्यारी को पुआल से ढक दें. इस दौरान निराई-गुड़ाई भी करते रहें। इस प्रकार एक माह बाद सफेद बैंगन की पौध तैयार करने की तैयारी पूरी हो जायेगी. इसके बाद आप बैंगन के पौधों को नर्सरी से उखाड़कर दो फीट की दूरी पर तैयार खेत में लगा सकते हैं.

होगी शानदार कमाई

यदि आप सफेद बैंगन का पौधा फरवरी माह में लगाएंगे तो जून से इसमे बैंगन लगने शुरू हो जाएंगे। बैंगन लगाने के बाद उन्हें हर 20 दिन में पानी दें. यदि ड्रिप सिंचाई का प्रयोग किया जाए तो बेहतर होगा। बैंगन के पौधे बड़े होते हैं और उन्हें सहारे की जरूरत होती है, इसलिए इसके आधार के पास एक बांस की छड़ी गाड़ दें और तने को उससे बांध दें। बैंगन की कीमते बाजार में 60 से 80 रुपये किलो रहती हैं. यदि आप एक एकड़ जमीन में सफेद बैगन की खेती करते हैं तो लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं.

Assembly Election Survey; छत्तीसगढ़, राजस्थान और MP में किसकी बन रही सरकार?

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2024 लोकसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है. जानें इन तीनों चुनावी राज्यों में किसकी बनने वाली हैं सरकार? सर्वे में किसको कितनी सीटें!

Assembly Election Survey: 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियां रणनीति बनाई जा रही है. वहीं आम चुनाव से पहले देश में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव किया जाना है, जिसका कार्यकाल दिसंबर और जनवरी में खत्म होने वाले है. इन पांचों राज्यों में छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश हिंदी भाषाई राज्य है और आगामी लोकसभा चुनाव के दृष्टि कोण से भी काफी महत्वपूर्ण है. फिलहाल छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है जबकि मध्य प्रदेश में बीजेपी की सत्ता है. इन राज्यों में अगले दो महीनों में होने वाले चुनाव को लेकर जमकर रैलियां निकाली जा रही है. इस बीच किए गए एक सर्वे में बताया गया कि यहां किसकी सरकार बनने की संभावना है. किसकी सत्ता में वापसी होगी और किसे निराश होना पड़ेगा?

बता दें कि ये सर्वे IANS एजेंसी Polstrat ने किया है, जिसे 1 सितंबर से 13 सितंबर के बीच किया गया है. सर्वे के आंकड़ो की मानें तो साल के अंत में होने वाले इन तीनों राज्यों के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन होता नहीं दिख रहा है. हालांकि, राज्यों में पार्टियों के सीट में उतार चढ़ाव होने की पूरी संभावना सामने आई है. इन तीनों राज्यों में से राजस्थान में विधानसभा के कुल 200 सीटें है, छत्तीसगढ़ में 90 सीटें और मध्य प्रदेश में 230 विधानसभा सीटें है. आईये राज्यवार देखते हैं किस पार्टी को कितनी सीटें मिलने का अनुमान है. 

राजस्थान में BJP के सीटों में इजाफा लेकिन सरकार कांग्रेस की
राजस्थान में वर्तमान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार है. जिसने 2018 के विधानसभा चुनाव में कुल 200 सीटों में 100 सीटें जीती थी और केवल एक सीट से बहुमत से पीछे रह गई थी. हालांकि चुनाव बाद बीएसपी से गठबंधन कर सरकार बनाने में सफल हुई. जबकि बीजेपी को 73 सीटें और बीएसपी को 6 सीटें मिली थी. वहीं, इस सर्वे की बात करें तो यहां कांग्रेस फिर से सत्ता में वापसी कर सकती है. सर्वे के मुताबिक, 2023 के चुनाव में कांग्रेस को 97 से 105 सीटें मिलने का अनुमान है. जबकि राज्य की प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी को पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार 16 से 26 सीटों का फायदा होने का अनुमान है. सर्वे में बीजेपी को 89 से 97 सीटें और बीएसपी को 0 से 4 सीटें मिली है. 

मध्य प्रदेश में इस बार बीजेपी को मिलेगी पूर्ण बहुमत?
एमपी के 2018 विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर हुई थी और 15 सालों में पहली बार किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिल पाया था. हालांकि, सबसे ज्यादा सीट होने का कारण कांग्रेस को सत्ता मिली लेकिन एक साल बाद हुए उलटफेर ने बीजेपी को फिर से सत्ता में वापसी करा दी.230 विधानसभा सीटों वाली मध्य प्रदेश में 2018 चुनाव में कांग्रेस को 114 सीटें और बीजेपी को 109 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी को 2 सीट मिली थी. 

सर्वे के आंकड़े देखें तो मध्य प्रदेश में  बीजेपी की सरकार बनती दिखाई दे रही है. सर्वे में बीजेपी को 116 से 124 सीटों पर जीत मिल सकती है. वहीं, कांग्रेस को 100 से 108 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. बीजेपी को राज्य में  42 फीसदी और कांग्रेस को 40 प्रतिशत तक वोट शेयर मिलने की बात सामने आई है. 

छत्तीसगढ़ में फिर से भूपेश बघेल की सरकार?
छत्तीसगढ़ में 2018 के विधानसभा चुनाव में 15 सालों के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ था. इतने सालों तक विपक्ष में बैठने के बाद कांग्रेस को प्रचंड जीत मिली थी. कांग्रेस को उस चुनाव में कुल 90 विधानसभा सीटों में से 68 सीटें मिली थी. जबकि बीजेपी 49 सीटों से 15 सीटों पर आ गिरी थी और यहां भी बीएसपी की गठबंधन को 5 सीटों पर जीत मिली. अब इस साल के चुनाव से पहले आए इस सर्वे के मुताबिक , राज्य में कांग्रेस को अच्छी बढ़त मिलने का अनुमान है पार्टी को 62 सीटें मिलते दिखाया गया है. बीजेपी को 12 सीटों का फायदा हो सकता है, सर्वे में पार्टी को 27 सीटें मिली है. जबकि राज्य में कांग्रेस को कांग्रेस 44 फीसदी और बीजेपी को 38 प्रतिशत वोट शेयर रहने का अनुमान है. छत्तीसगढ़ में हुए सर्वे का सैंपल साइज 3672 है. 

Food Inflation; सितंबर की बारिश कम करेगी महंगाई, चावल समेत घटेंगे इन चीजों के बढ़ते दाम!

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Rain Effect Inflation: गर्मी और बेमौसम बारिश ने देश में महंगाई की समस्या बढ़ा दी है. फूड इंफ्लेशन बड़ी तेजी से बढ़ा है. खासकर पिछले कुछ समय में सब्जियों के दाम में इजाफा हुआ है. एक्सपर्ट्स का मनना है कि बारिश के कारण कम पैदवार आने वाले समय में चावल समेत कई चीजों के दाम बढ़ा सकती है.

हालांकि सितंबर की बारिश ने कुछ उम्मीद जगाई है.

सितंबर में हुई बेहतर बारिश, प्रमुख कृषि क्षेत्रों के लिए थोड़ी खुशी लेकर आई है और कई जगहों पर बुआई पहले से बेहतर हुई है. उम्मीद है कि इस बारिश से महंगाई कम हो सकती है, क्योंकि चावल और सोयाबीन समेत कुछ फसलों की पैदावार बेहतर हो सकती है.

उत्पादन में कमी का संकट

अगस्त में भारी कमी के कारण नमी का तनाव पैदा हो गया, जिससे अनाज के उत्पादन में कमी का संकट बढ़ा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, धान का बुआई क्षेत्र 8 सितंबर तक सालाना आधार पर 2.7 फीसदी बढ़कर 40.3 मिलियन हेक्टेयर हो गया है, जबकि सोयाबीन का रकबा 1.3 फीसदी बढ़कर 12.54 मिलियन हेक्टेयर हो चुका है.

चावल का प्रोडक्शन बेहतर होने की उम्मीद

सितंबर में देश के उत्तरी राज्यों खासकर पंजाब और हरियाणा में धान की खेती सिंचाई पर निर्भर है. हालांकि पूर्वी राज्यों, जहां से भारी मात्रा में चावल प्रोड्यूस होता है, अच्छी बारिश देखी गई है. इकनोमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे में सितंबर में बारिश से धान की पैदवार पिछले साल की तुलना में आसपास ही रहने वाली है. बता दें कि बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, वेस्ट बंगाल और उत्तर प्रदेश में धान की बुआई उच्चतम रही है.

सोयाबीन के फसलों को भी मदद

धान की तरह ही सोयाबीन की फसलों को भी सितंबर की बारिश से मदद मिलेगी. इससे सोया तेल के दामों में कमी आ सकती है. भारतीय मौसम विभाग का अनुमान है कि 21 सितंबर तक देश के कई हिस्सों में और बारिश हो सकती है.

Maharashtra; NCP और पार्टी सिंबल के दावे पर अजित पवार का बड़ा बयान, कहा- हम भी चुनाव आयोग के सामने…

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एनसीपी पार्टी के चुनाव चिन्ह और नाम के दावे पर भारत चुनाव आयोग की सुनवाई पर एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का कहना है, ”हर किसी को अपना पक्ष रखने का अधिकार है, हम भी चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखेंगे.” इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) से पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा करने वाले बागी अजित पवार के समूह की याचिका पर विचार नहीं करने का आग्रह किया है और कहा है कि अगर आज इसकी अनुमति दी जाती है, तो कोई भी पार्टी सदस्य किसी भी दिन एक “तुच्छ” याचिका दायर कर सकते हैं और अजित का पार्टी अध्यक्ष होने का दावा हास्यास्पद और अवैध है.

क्या है पूरा मामला?
अजित पवार ने 2 जुलाई को अपने चाचा और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के खिलाफ विद्रोह कर दिया था और आठ अन्य नेताओं के साथ बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ राज्य सरकार में शामिल हो गए थे. ईसीआई के साथ किए गए दावे में, अजित गुट ने कहा कि 30 जून को, उन्हें पार्टी अध्यक्ष के रूप में चुना गया था और पार्टी का नाम और उसका चुनाव चिन्ह घड़ी, अब उनके पक्ष में है.

किसके पास कितने विधायक?
शरद पवार के नेतृत्व में एनसीपी द्वारा विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को सौंपी गई अयोग्यता याचिकाओं ने पार्टी के भीतर स्पष्ट विभाजन पर प्रकाश डाला है. शरद पवार के पास अब केवल 11 विधायकों का समर्थन है, जबकि उपमुख्यमंत्री अजित पवार, जिन्होंने 2 जुलाई को अपने चाचा शरद पवार के खिलाफ विद्रोह करके बीजेपी के साथ गठबंधन किया था, ने 41 विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया है. दोनों पक्षों ने समर्थक विधायकों की सटीक संख्या का खुलासा करने से परहेज किया था. हालांकि, दो महीने से अधिक समय के बाद उन्होंने अब आधिकारिक तौर पर संख्याओं का खुलासा किया है.

Chhattisgarh: बिलासपुर संभाग की 24 सीटों पर BJP की नजर, 70 दिनों के भीतर कल PM मोदी का दूसरा छत्तीसगढ़ दौरा!

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PM Modi Chhattisgarh Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) का 70 दिन के भीतर दूसरी बार छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) दौरा बन रहा है. गुरुवार दोपहर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से सीधे पीएम मोदी छत्तीसगढ़ के रायगढ़(Raigarh) जिला पहुंचेंगे.

रायगढ़ में पीएम मोदी की विशाल जनसभा की तैयारी में बीजेपी(BJP) की पूरी टीम जुट गई है. लाखों लोगों की भीड़ जुटाने की भी तैयारी की जा रही है. इसके अलावा बिलासपुर संभाग(Bilaspur) के 24 विधानसभा सीटों पर बीजेपी की नज़र है क्योंकि 2018 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बिलासपुर संभाग में बड़ी हार का सामना करना पड़ा था.

रायगढ़ जिले के कोड़ातराई में 14 सितंबर को दोपहर 2:50 बजे प्रधानमंत्री का आगमन होगा. पीएम मोदी रायगढ़ के जिंदल एयरस्ट्रीप पर लैंड करेंगे. इसके बाद सीधे हेलीकॉप्टर से सभा स्थल कोड़ातराई जाएंगे.जहां 3 बजे हजारों करोड़ रुपए के विकास कार्यों का शिलान्यास कार्यक्रम होगा. इसके बाद वहीं पर 3: 25 बजे से पीएम मोदी की बड़ी आम सभा होगी.

जनसभा में लाखों लोगों की भीड़ जुटाने का दावा
इससे पहले पीएम मोदी 7 जुलाई को रायपुर में आम सभा में चुनावी शंखनाद कर चुके है. बीजेपी ने दावा किया है कि पीएम नरेंद्र मोदी की विशाल जनसभा के लिए लाखों कार्यकर्ताओं को न्योता भेजा गया है. इसके अलावा ये भी कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी विश्व के सबसे लोकप्रिय जननेता हैं और उनकी हर जनसभा में पिछली जनसभा की तुलना में रिकॉर्ड तोड़ जनसैलाब उमड़ता ही है. इससे पहले पीएम मोदी की रायपुर जनसभा में रिकॉर्ड तोड़ भीड़ जुटी थी.

पीएम मोदी के दौरे पर बारिश की टेंशन
पीएम मोदी के छत्तीसगढ़ दौरे के पहले मौसम विभाग ने बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है. क्योंकि बुधवार शाम से राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में झमाझम बारिश हो रही है. इसके अलावा अगले दो दिन के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. जिसमे रायगढ़ जिला भी शामिल है. इसके अनुसार रायगढ़ में भी कल भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने जताई है. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने वॉटरप्रूफ डोम लगाया है.

क्या है बिलासपुर संभाग का समीकरण
चुनावी साल में पीएम मोदी का रायपुर संभाग के बाद बिलासपुर संभाग के रायगढ़ जिले में आम सभा करने जा रहे है. ये आने वाले विधानसभा चुनाव के हिसाब से बहुत अहम माना जा रहा है. क्योंकि छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा संभाग बिलासपुर है. जहां 8 जिलों में 24 विधानसभा सीट आती है. इस इलाके में सभी राजनीतिक पार्टियां जोर लगा रही है. इसमें से कांग्रेस के पास 13,बीजेपी 7, जोगी कांग्रेस 1 और बहुजन समाज पार्टी के पास 2 सीट है. वहीं जोगी कांग्रेस से अलग हुए धर्मजीत सिंह अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं.

छत्तीसगढ़ में फिर एक्टिव हुआ मानसून, मौसम विभाग ने कई जिलों में जारी किया ऑरेंज और येलो अलर्ट!

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छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मानसून एक्टिव हो गया. पिछले तीन दिनों में प्रदेश के लगभग सभी जिलों में जमकर बारिश हुई है. छत्तीसगढ़ मौषम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में बारिश को लेकर ऑरेंज और एलो अलर्ट जारी किया है.

आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ और ज्यादा बारिश हो सकता है. प्रदेश के कई इलाकों में सुबह से ही काले घने बादल छाये हुए है और कई इलाकों में बारिश भी हो रही है.

छत्तीसगढ़ मौषम विभाग ने आने वाले कुछ घंटों में छत्तीसगढ़ कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश होने को लेकर ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग में ऑरेंज कलर जारी करते हुए कहां है कि छत्तीसगढ़ के रायगढ़, जांजगीर, रायपुर, बलोदाबाजार, गरियाबंद, धमतरी तथा महासमुंद ज़िले में एक-दो स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा तथा वज्रपात होने की संभावना है. वहीं प्रदेश के दुर्ग, बालोद तथा राजनांदगांव ज़िलों में एक-दो स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा और वज्रपात होने की संभावना है.

इन जिलों में बारिश को लेकर किया गया येलो अलर्ट जारी
वहीं मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश के सरगुजा, जशपुर, बिलासपुर, मुंगेली, कोरबा, बेमेतरा, कबीरधाम, कांकेर, बीजापुर तथा नारायणपुर ज़िलों में एक-दो स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा तथा वज्रपात होने की संभावना है. प्रदेश के कोरिया, सूरजपुर, बिलासपुर, मुंगेली, रायपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, बेमेतरा कबीरधाम, बस्तर, कोंडागांव तथा कांकेर ज़िलों में एक-दो स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा तथा वज्रपात होने की संभावना है.

जानिए अब तक छत्तीसगढ़ में कितना बारिश दर्ज किया गया
राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बनाए गए राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष जारी आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में अब तक एक जून 2023 से अब तक राज्य में 890.1 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है. राज्य के विभिन्न जिलों में 01 जून 2023 से आज 14 सितंबर सवेरे तक रिकॉर्ड की गई वर्षा के अनुसार बीजापुर जिले में सर्वाधिक 1537.8 मिमी और सरगुजा जिले में सबसे कम 397.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी है. एक जून से अब तक सूरजपुर जिले में 718.8 मिमी, बलरामपुर में 811.7 मिमी, जशपुर में 714.0 मिमी, कोरिया में 833.5 मिमी, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 829.0 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी.

पीएम मोदी का INDIA गठबंधन पर वार’हर सनातनी सतर्क रहे, ये 1 हजार साल की गुलामी में धकेलना चाहते हैं’

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PM Modi on Sanatan Controversy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को मध्य प्रदेश के बीना से विपक्षी गठबंधन INDIA पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने कहा कि कुछ दल समाज को विभाजित करने में लगे हैं.

भारत की संस्कृति पर हमला करना उनका मकसद है. पीएम मोदी ने कहा कि विपक्षी गठबंधन INDIA सनातन धर्म को खत्म करना चाहता है. भारत की संस्कृति पर हमला करना चाहता है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की आस्था पर चोट करना विपक्षी गठबंधन INDIA की रणनीति है. उन्होंने कहा कि ये लोग सनातन परंपरा को खत्म करना चाहते हैं. ये सनातन को मिटाकर 1 हजार साल की गुलामी में धकेलना चाहते हैं. मगर एकजुटता से इनके मंसूबों को नाकाम करना है.

INDIA गठबंधन की नीयत भारत की संस्कृति पर हमला करने की

पीएम मोदी ने कहा कि विपक्षी गठबंधन INDIA का नेता तय नहीं है. इसके नेतृत्व पर भ्रम है. इस गठबंधन को लोग घमंडिया गठबंधन भी कहते हैं. इस घमंडिया गठबंधन की नीति और रणनीति भारत की संस्कृति पर हमला करने की है. इस गठबंधन ने भारतीयों की आस्था पर हमला करने का फैसला कर लिया है. इस घमंडिया गठबंधन की नीयत भारत के विचारों और संस्कारों को तबाह करने की है.

सनातन परंपरा को खत्म करना चाहता है INDIA गठबंधन

उन्होंने कहा कि ये ‘घमंडिया गठबंधन’ वाले सनातन संस्कारों और परंपरा को समाप्त करने का संकल्प लेकर आए हैं. जिस सनातन को गांधी जी ने जीवनपर्यंत माना, जिस सनातन ने उन्हें अस्पृश्यता के खिलाफ आंदोलन चलाने के लिए प्रेरित किया. ये घमंडिया गठबंधन के लोग उस सनातन परंपरा को समाप्त करना चाहते हैं.

कैसे शुरू हुई सनातन पर विवाद?

बता दें कि सनातन पर विवाद की शुरुआत तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन के एक बयान से शुरू हुई. उदयनिधि ने कहा था कि सनातन धर्म डेंगू, मलेरिया की तरह है, इसे खत्म कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल इसका विरोध करने से समस्या का समाधान नहीं होगा. इसे खत्म करने की जरूरत है. डीएमके के इस नेता के बयान से पूरा सियासी माहौल खराब हो गया.

वहीं, बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाकर विपक्षी गठबंधन पर जमकर हमला बोला. बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान सनातन का अपमान नहीं सहेगा.