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मोरक्को : 6.8 तीव्रता के भूकंप से तबाही 2000 से ज्यादा की मौत कब्रिस्तान बन गया मोरक्को का ये शहर…

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अफ्रीकी देश मोरक्को में देर रात भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं. यहां 6.8 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई है. न्यूज एजेंसी एएफपी ने स्थानीय प्रशासन के हवाले से बताया कि अभी तक 2000 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है जबकि इतने ही लोगों के घायल होने की भी खबर है.

भूकंप के कारण बड़ी संख्या में इमारतें जमींदोज हो गई हैं. आशंका जताई जा रही है कि अभी भी मलबे में लोग फंसे हुए हैं. तेज भूकंप का झटका तब आया जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे. भूकंप का केंद्र मोरक्को के मराकेश शहर से 71 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है. रेस्क्यू टीम मौके पर है और राहत बचाव अभियान जारी है.

भूकंप का केंद्र धरती के 18.5 किलोमीटर गहराई में बताया जा रहा है. भकंप के झटके स्थानीय समयानुसार रात 11 बजे महसूस किए गए. मराकेश शहर में बड़ी संख्या में घर गिरे हैं. तबाही के बाद स्थानीय लोगों ने राहत बचाव का काम शुरू किया. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में तबाही का मंजर देखा जा सकता है. सड़कों पर मलबा जमा है.


तबाही के बाद मची अफरा तफरी

भूकंप के झटके महसूस करते ही स्थानीय लोगों में अफरातफरी मच गई. लोग अपने घरों को छोड़कर सड़कों पर निकल आए. न्यूज एजेंसी से बातचीत करते हुए एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि भूकंप आने के कुछ ही समय के बाद सड़कों पर कई एंबुलेंस देखी गई, जो इमारतें गिरी हैं उसमें अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बीच मोरक्को भूकंप में मारे गए लोगों के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है और कहा है कि भारत मोरक्को की हर संभव मदद करने के लिए तैयार है.

120 सालों बाद इतने तेज भूकंप के झटके

स्थानीय लोगों ने बताया कि झटका इतना तेज था कि लोगों में चीख-पुकार मच गई. भूकंप के बाद भी लोगों के मन में डर बना हुआ है और वह अपने घरों में दोबारा जाने से डर रहे हैं.बीते 120 सालों में इस क्षेत्र में इतनी तीव्रता के भूकंप नहीं महसूस किया गया है. इससे पहले देश में जो भी भूकंप आए वह पूर्वी क्षेत्रों में आए हैं.

Aja Ekadashi 2023: अजा एकादशी व्रत आज, इन नियमों का पालन करने से मिलेगा अश्वमेघ यज्ञ जितना फल…

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हिंदू धर्म में एकादशी व्रत काफी फलदायी माना गया है. हर महीने दो एकादशी के व्रत होते हैं. एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में. इसी तरह हर एकादशी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है.

आज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है. इसे अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है. सभी व्रतों में इस व्रत का खास महत्व है. मान्यता है इस दिन सच्चे दिल से व्रत करने से और भगवान विष्णु की आराधना करने से अश्वमेघ यज्ञ जितना फल प्राप्त होता है.

एकादशी तिथि कल यानी 9 सितंबर को रात 7 बजकर 17 मिनट पर शुरू हो गई थी और आज यानी 10 सितंबर को रात 09 बजकर 28 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के मुताबिक अजा एकादशी का व्रत आज रखा जा रहा है. वहीं व्रत पारण का समय 11 सितंबर को सुबह 06 बजकर 04 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 33 मिनट तक का है.

अजा एकादशी व्रत का महत्व

अजा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति देने वाला और अश्वेघ यज्ञ के समान पुण्यदायी बताया गया है. इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करना भी बेहद शुभ माना गया है. इससे जीवन में सुख समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी की कृपा सदा आपके परिवार पर बनी रहती है.

अजा एकादशी पर तीन शुभ योग

इस साल अजा एकाजदशी पर तीन शुभ योग भी बन रहे हैं. रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और बुधादित्य योग. ये तीनों ही योग बेहद शुभ माने जाते हैं. इनमें की गई पूजा में आर्थिक स्थिति बेहतर होती है और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है. रवि पुष्य योग 10 सितंबर को शाम 05 बजकर 06 से लेकर 11 सितंबर शाम 06 बजकर 04 मिनट तक रहेगा. वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग – 10 सितंबर को शाम 05 बजकर 06 मिनट से लेकर 11 सितंबर शाम 06 बजकर 04 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा बुधादित्य योग पूरे दिन रहेगा.

पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़ें पहनकर पूजा घर को अच्छे से साफ करें.
  • इसके बाद गंगाजल छिड़कर पूरे घर को शुद्ध करें. अब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें.
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर सामने रखें और उन्हें रोली, पीला चंदन, सफेद चंदन, अक्षत, पुष्प, पंचामृत, फल और नैवेद्य अर्पित करें. इस दौरान भगवान विष्णु को तुलसी दल भी जरूर अर्पित करें.
  • फिर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और व्रत कथा पढ़ें. इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें.
  • भगवान को भोग लगाएं और उसमें तुलसी जरूर शामिल करें. कहा जाता है कि बिना तुलसी के भगवान भोग ग्रहण नहीं करते.

अजा एकादशी व्रत नियम

दशमी तिथि से ही सात्विक भोजन का सेवन करें और मांस मछली, मदिरा और मसूर की दाल का सेवन ना करें. एकादशी के अगले दिन ब्राह्मण या जरूरतमंदों को भोजन कराएं और दान और दक्षिणा दें. इसके बाद ही व्रत का पारण करें. व्रत के दौरान गुस्से से बचें और भगवान का ध्यान करें. बड़ों की इज्जत करें और किसी के बारे में कुछ बुरा ना बोलें. किसी से झूठ ना बोलें और ना ही किसी की चुगली करें.

Health Tips: दिल के मरीज हैं तो भूलकर भी न पिएं ये हेल्दी चीज, जान लीजिए नुकसान…

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Butter Milk Side Effects: गर्मियों के मौसम में छाछ हेल्थ के लिहाज से बेहद फायदेमंद होती है. ये शरीर को कूल रखने के साथ-साथ गट हेल्थ में भी सुधार करती है. छाछ में कई जरूरी पोषक तत्व जैसे- कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन बी12 और मिनरल्स समेत कई चीजें पाई जाती हैं.

ये सारे न्यूट्रिएंट्स हमारेशरीर की कई समस्याओं को कम कर सकते हैं.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ स्थितियों में छाछ को बिल्कुल नहीं पीनी चाहिए. ऐसा करने से हमारे शरीर में कई सारी परेशानियां हो सकती हैं.आइए जानते हैं छाछ का सेवन करने से शरीर को होने वाले नुकसान क्या हैं?

सर्दी खांसी में रखें ध्यान

सर्दी-खांसी या गले में खराश होने की शिकायत होने छाछ का सेवन करना आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है. आपको बता दें कि छाछ की तासीर ठंडी होती है, जिसकी वजह से परेशानी कम होने के बजाय बढ़ सकती है. इसके अलावा, ऐसी कंडीशन में रात के दौरान भी छाछ पीने से बचें.

किडनी की समस्या

अगर आपको किडनी या फिर एक्जिमा से जुड़ी कोई परेशानी है तो इस स्थिति में भी छाछ को न पिएं. ऐसा करने से हेल्थ को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं. किडनी से जुड़ी समस्या होने परडॉक्टर की सलाह लेकर ही छाछ का सेवन करें.

दिल के मरीज

छाछ में सैचुरेटेड फैट ज्यादा पाया जाता है. ऐसे में दिल से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे मरीजों के लिए छाछ का सेवन करना हेल्दी नहीं माना जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो दिल के मरीज अगर छाछ पीते हैं तो इससे कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है, जो उनके लिए रिस्की है.

जोड़ों का दर्द

उम्र बढ़ने के साथ अक्सर लोगों को हड्डियों से जुड़ी समस्याएं हो जाती हैं. इन परेशानियों में जोड़ों में दर्द, गठिया और मांसपेशियों का दर्द इत्यादि शामिल है. इस तरह की स्थितियों में छाछ का सेवन करने से बचना चाहिए। यह जोड़ों के दर्द और जकड़न को बढ़ा सकता है. छाछ पीने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

इन 5 इलेक्ट्रिक स्कूटर में मिलेगी सबसे ज्यादा स्टोरेज शानदार स्पेसिफिकेशंस देंखे लिस्ट…

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कहीं आने-जाने के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर ना केवल सबसे आसान ऑप्शन हैं, बल्कि आपको कई सारी सहूलियत भी देते हैं. अगर सामान के साथ शहर में इधर से उधर जाना हो तो भी ये काम आते हैं. इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदते समय लोग इस बात को लेकर निश्चित रहते हैं कि कम से कम सामान रखने की तो काफी जगह मिल जाएगी.

फिर भी कई बार जगह की कमी पड़ जाती है, और हम जरूरी चीजें नहीं रख पाते हैं. इसलिए हम आज आपके लिए 5 ऐसे इलेक्ट्रिक स्कूटर लाएं हैं जिनमें सबसे ज्यादा स्टोरेज मिलती है.

इंडिया में एक से बढ़कर एक इलेक्ट्रिक स्कूटर हैं जो शानदार स्पेसिफिकेशंस का दावा करते हैं. आज हम उन इलेक्ट्रिक स्कूटर को देखेंगे जो आपको सबसे ज्यादा स्पेस उपलब्ध कराते हैं, ताकि सामान रखने के लिए मुश्किलों का सामना ना करने पड़े. यहां आप सबसे ज्यादा स्टोरेज वाले 5 इलेक्ट्रिक स्कूटर की लिस्ट देख सकते हैं.

Largest Storage Electric Scooters: मिलेगी सबसे ज्यादा जगह

सबसे ज्यादा अंडरसीट स्टोरेज के साथ आते हैं ये इलेक्ट्रिक स्कूटर.

  1. River Indie: रिवर इंडी इंडिया का सबसे ज्यादा स्टोरेज वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर है. इसकी कुल अंडरसीट स्टोरेज कैपेसिटी 43 लीटर है. अब आपको जरूरी चीज छोड़ने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि ये आपको काफी ज्यादा स्पेस देता है. केवल जगह के मामले में ही नहीं, रिवर इंडी को एक मजबूत इलेक्ट्रिक स्कूटर माना जाता है.
  2. Ola S1 Pro: सबसे ज्यादा स्टोरेज के मामले में ओला का इलेक्ट्रिक स्कूटर दूसरे नंबर पर है. ओला एस1 प्रो में आपको 36 लीटर की अंडरसीट स्टोरेज मिलती है. यह इतना स्पेस है कि आप आसानी से दो हेलमेट रख सकते हैं. यह स्कूटर भी आपको भरपूर सामान रखने की सहूलियत देता है.
  3. Ola S1 Pro Gen 2/Air: तीसरे नंबर पर भी ओला के इलेक्ट्रिक स्कूटर हैं. नए हाइब्रिड चेसिस और शानदार टेक्नोलॉजी के दम पर ओला एस1 प्रो जेन 2 और ओला एस1 एयर में काफी स्टोरेज मिलती है. नए ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर 34 लीटर का स्टोरेज देते हैं.
  4. Simple One: इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में दो बैटरी पैक मिलते हैं. इसके बाद भी आपको स्टोरेज के लिए टेंशन लेने की जरूरत नहीं है. सिंपल वन इलेक्ट्रिक स्कूटर में 30 लीटर की अंडरसीट स्टोरेज मिलता है. ज्यादातर पेट्रोल स्कूटर में भी सामान रखने के लिए इतनी जगह नहीं मिलेगी.
  5. Hero Vida V1: हीरो विडा रेंज के इलेक्ट्रिक स्कूटर भी बढ़िया स्पेस उपलब्ध कराते हैं. हीरो के इलेक्ट्रिक स्कूटर में 26 लीटर अंडरसीट स्टोरेज मिल जाएगी. यानी आप सीट के नीचे काफी सामान रख पाएंगे. स्टोरेज को इस तरह डिजाइन किया गया है, ताकि आप हेलमेट भी रख पाएं.

G-20 LIVE: सम्मेलन जारी, जो बाइडेन दिल्ली से रवाना, वियतनाम जाएंगे…

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राजधानी दिल्ली में G-20 समिट का आज दूसरा और आखिरी दिन है. ‘वन अर्थ, वन फैमिली’ के बाद आज वन फ्यूचर पर तीसरा सेशन होगा. G-20 शिखर सम्मेलन के आदर्श वाक्य ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का आखिरी संदेश ‘वन फ़्यूचर’ है.

जिसमें वैश्विक पटल पर दुनिया के बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष मंथन करेंगे. नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति भारत की कूटनीति की बड़ी सफलता मानी जा रही है.

पीएम मोदी ने कहा है कि आज के सत्र के दौरान नई दिल्ली घोषणापत्र को ‘एडॉप्ट’ किया जाएगा. फिर अंत में समापन समारोह और हस्तांतरण समारोह होगा, जिसके बाद निर्धारित द्विपक्षीय मुलाकातें कर सभी नेता और शिष्टमंडल प्रमुख सुविधानुसार अपने-अपने होटलों के लिए प्रस्थान कर जाएंगे. जी 20 से जुड़ी हर छोटी बड़ी अपडेट के लिए बने रहिए…

IND vs PAK Weather: भारत-पाक मैच में बारिश फिर खराब करेगी खेली? जानें क्या है कोलंबो का लेटेस्ट मौसम अपडेट…

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IND vs PAK Weather Update And Report: एशिया कप 2023 में आज एक बार फिर भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने होंगी. इस बार दोनों के बीच सुपर-4 का मुकाबला खेला जाएगा. इससे पहले हुए ग्रुप स्टेज के मैच में बारिश ने खलल और पैदा की थी और मुकाबला रद्द हो गया था.

इस बार दोनों टीमें कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में एक दूसरे के आमने-सामने उतरेंगी. इससे पहले दोनों के बीच पल्लेकल में मैच हुआ था. हालांकि इस बार भी बारिश खेल खराब कर सकती है.

क्या कहता है कोलंबो का मौसम?

वेदर डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलंबो में 80-90 प्रतिशत तक भारी बारिश की संभावना है. सुबह के वक़्त 100 प्रतिशत यानी बारिश होना करीब-करीब तय है. बारिश के साथ-साथ थंडर स्टॉर्म की भी संभावना है. दिन आगे बढ़ने के साथ बारिश कम होने के चांस हैं, लेकिन मैच के वक़्त फिर करीब 80 प्रतिशत बारिश के आसार हैं. मैच शुरू होने के वक़्त करीब 15-20 किमी प्रति घंट की रफ्तार से हवा भी चल सकती है. वहीं आर्द्रता 90 प्रतिशत के आसपास होगी. ऐसे में यही कहा जा सकता है कि एक बार फिर फैंस के हाथ निराशा लग सकती है.

मैच के लिए तय हुए रिजर्व डे पर भी भारी बारिश की आशंका

बता दें कि एशियन क्रिकेट काउंसिल की ओर से कहा गया है कि भारत-पाक के बीच होने वाले मैच के लिए रिजर्व डे रखा गया है. एसीसी के मुताबिक, अगर तय दिन में बारिश आती है, तो रिजर्व डे पर मैच वहीं से शुरू होगा, जहां से पिछले दिन रोका गया था. हालांकि रिजर्व डे पर भी थंडर स्टॉर्म के साथ करीब 80-90 बारिश की आशंका जताई जा रही है.

बता दें कि एशिया कप के सुपर-4 चरण में भारत-पाक इकलौता ऐसा मैच है, जिसके लिए रिजर्व डे रखा गया है. रिजर्व डे अगले दिन यानी सोमवार (11 सितंबर) को होगा. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या फैंस इस बार भारत-पाक मैच का लुत्फ उठा पाते हैं या नहीं.

Ghosi Election Result: घोसी उपचुनाव में बीजेपी की हार ‘इंडिया’ और एनडीए की लड़ाई में अखिलेश यादव बीजेपी पर भारी…

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Ghosi Bypoll Result 2023: आगामी लोकसभा चुनाव से पहले यूपी के घोसी उप-चुनाव में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। ‘इंडिया’ और एनडीए की लड़ाई में अखिलेश यादव बीजेपी पर भारी पड़े हैं।

घोसी सीट पर सपा के सुधाकर सिंह ने बीजेपी के दारा सिंह चौहान को 42 हजार से ज्यादा वोटों के बड़े मार्जिन से हरा दिया। दारा सिंह समाजवादी पार्टी (सपा) छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे, जिसके बाद उन्हें घोसी से उप-चुनाव में कैंडिडेट बनाया गया था। वे यहां पहले सपा से विधायक थे। उप-चुनाव में सपा ने सुधाकर सिंह को उतारकर जोर-शोर से प्रचार किया। जमीन पर शिवपाल यादव ने कई दिनों तक मोर्चा संभाले रखा और घर-घर जाकर मतदाताओं से मुलाकात की। सुधाकर की जीत और दारा सिंह चौहान की हार की कई प्रमुख वजहें हैं, जिसमें दल-बदल से लेकर अखिलेश यादव का पीडीए फॉर्मूला है। आइए घोसी से दारा सिंह चौहान की हार की पांच बड़ी वजहों के बारे में जानते हैं…

जनता ने दल-बदल नहीं पसंद किया
बीजेपी के दारा सिंह चौहान उन नेताओं में हैं, जो यूपी की लगभग सभी प्रमुख पार्टियों में कभी न कभी रहे। कांग्रेस से अपनी राजनीति शुरू करने वाले दारा सिंह बसपा, सपा, बीजेपी सभी में रहे। साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में दारा सिंह ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की। इसके बाद योगी सरकार में पांच साल तक मंत्री रहे, लेकिन जैसे ही 2022 विधानसभा चुनाव आया और तमाम जगहों पर अखिलेश का पलड़ा भारी लगता दिखा, उन्होंने बीजेपी का दामन छोड़ दिया। इसके बाद वे सपा से चुनाव लड़े और घोसी विधानसभा से जीते भी। हालांकि, सपा को बहुमत न मिलने के बाद उन्हें बड़ा झटका लगा और कुछ महीने पहले ही वापस बीजेपी में चले गए। घोसी उप-चुनाव में बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया और विधायकों, मंत्रियों आदि की पूरी फौज चुनाव प्रचार के लिए उतार दी। लेकिन शुक्रवार को आए नतीजों से साफ है कि जनता ने दारा सिंह चौहान जैसे दल-बदल करने वाले नेताओं को पसंद नहीं किया और चुनाव में बड़ी हार का स्वाद चखा दिया।

शिवपाल यादव की ‘जादूगरी’ आ गई काम
अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल लंबे समय तक सपा से दूर रहे। जब मुलायम से अखिलेश को सपा की सत्ता गई तो बाद में शिवपाल ने अपनी अलग पार्टी बना ली। वे बीजेपी के करीब भी नजर आए और कई बार अटकलें लगीं कि वे भगवा पार्टी का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, मुलायम के निधन के बाद शिवपाल फिर से अखिलेश के करीब हुए और मैनपुरी उप-चुनाव में डिंपल यादव को जीत दिलवाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। अखिलेश पर हमेशा से ही आरोप लगते रहे कि वे अपने पिता और चाचा की तरह जमीनी स्तर पर लड़ने वाले नेता नहीं हैं, जबकि मुलायम और शिवपाल ने हमेशा एसी के कमरे से नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर राजनीति की। शिवपाल की यह ‘जादूगरी’ घोसी में उस समय दिखाई दी, जब उन्होंने सपा कैंडिडेट सुधाकर के लिए वही मैनपुरी वाली पुरानी रणनीति अपनाई। वे लंबे समय तक घोसी में डटे रहे और जनता से सपा को जिताने की अपील करते रहे। वे खुद कई जगह घर-घर गए और कैसे पार्टी को जीत मिले, इसके लिए समय-समय पर रणनीति बनाते रहे। शिवपाल की यही जमीनी राजनीति भी घोसी उप-चुनाव में सपा कैंडिडेट की जीत की एक वजह बनी।

‘इंडिया’ का एकजुट होना बीजेपी को पड़ा भारी
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए इस बार विपक्ष के 28 दल एक साथ आए हैं, जिसमें कांग्रेस, सपा भी शामिल है। एक समय कांग्रेस से पूरी तरह से दूरी बनाकर रखने का दावा करने वाले अखिलेश यादव को घोसी उप-चुनाव में कांग्रेस का काफी साथ मिला। यूपी कांग्रेस के नए नवेले अध्यक्ष अजय राय ने उप-चुनाव में पार्टी का कोई भी कैंडिडेट नहीं उतारा और सपा को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। वहीं, जब बसपा ने भी अपना उम्मीदवार नहीं खड़ा किया तो यह लड़ाई ‘इंडिया’ बनाम एनडीए की हो गई। इस लड़ाई में ‘इंडिया’ की एकजुटता बीजेपी पर भारी पड़ गई। अब आने वाले समय में भी देखना होगा कि क्या अखिलेश यादव लोकसभा में कांग्रेस के साथ गठबंधन करते हैं या फिर नहीं। इस समय सपा और आरएलडी का गठबंधन है और माना जा रहा है कि यूपी में कांग्रेस को भी साथ में लिया जा सकता है। घोसी में ‘इंडिया’ के एकजुट लड़ने से हुए फायदे से इसकी संभावनाएं अब ज्यादा बढ़ गई हैं।

मुख्तार अंसारी भी क्यों बना वजह ?
घोसी उप-चुनाव में मुख्तार अंसारी भी सपा की जीत की एक वजह माना जा रहा है। दरअसल, घोसी मऊ जिले में आता है और यहां से काफी समय से मुख्तार परिवार का दबदबा रहा है। बाहुबली मुख्तार खुद मऊ क्षेत्र से पांच बार विधानसभा के सदस्य चुना जा चुका है। उसने साल 1996, 2002, 2015, 2012 और 2017 में लगातार पांच बार विधानसभा का चुनवा जीता। हालांकि, इसी साल अप्रैल महीने में बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या में दोषी ठहराए जाने के बाद दस साल की सजा सुना दी गई। बसपा के उप-चुनाव नहीं लड़ने की वजह से पूरा मुस्लिम वोट भी एकजुट होकर सपा की ओर गया, जिससे सुधाकर सिंह को जबरदस्त फायदा हुआ। यदि बसपा यहां उप-चुनाव लड़ती तो यकीनन मुस्लिम वोटों में बंटवारा होता और इसका नुकसान सपा को झेलना पड़ सकता था।

काम कर गया अखिलेश का ‘पीडीए’ फॉर्मूला, बसपा के न होने से भी फायदा
2022 विधानसभा चुनाव में झटका खाने के बाद अखिलेश यादव नई रणनीति पर काम कर रहे हैं। उन्होंने इंडिया गठबंधन से पहले ही ‘पीडीए’ फॉर्मूले की बात करनी शुरू कर दी, जिसका फुल फॉर्म उन्होंने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक बताया। इसके लिए उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य को आगे किया, जिन्होंने पिछड़े और दलित वोटबैंक को साधने की भरपूर कोशिश की। हालांकि, उनके बयानों से काफी विवाद भी हुआ, जिस पर बीजेपी ने जमकर घेरा। इसके बावजूद भी अखिलेश स्वामी प्रसाद मौर्य को आगे करके पीडीए शब्द का जिक्र करते रहे। ऐसे में घोसी के नतीजों को देखकर लगता है कि इस रणनीति का अखिलेश को फायदा भी मिला। बसपा के मैदान में नहीं उतरने से पिछड़ों और दलितों के वोटों पर सपा के सुधाकर सिंह भी सेंधमारी की। वहीं, मुस्लिम वोट भी सपा की ओर चला गया। जीत के बाद अखिलेश ने पीडीए का जिक्र भी किया और कहा, ”इंडिया टीम है और पीडीए रणनीति: जीत का हमारा ये नया फॉर्मूला सफल साबित हुआ है।”

‘G20 में शामिल होने के लिए लैंडिंग की अनुमति नहीं’, गहलोत-बघेल के दावे को गृह मंत्रालय ने किया ख़ारिज!

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दिल्ली में जी20 समिट के पहले दिन डिनर के लिए सभी राज्य के मुख्यमंत्रियों को निमंत्रित किया गया है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने दिल्ली में लैंडिंग की इजाजत नहीं मिलने का दावा किया है।

कांग्रेस शासित दोनों राज्यों के सीएम के बयान पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सफाई दी है। मंत्रालय ने कहा है कि यह कहना सच नहीं है। सीएम के मूवमेंट पर रोक नहीं है। केंद्र ने शनिवार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के इस दावे को खारिज कर दिया कि वह दिल्ली और उसके आसपास हवाई प्रतिबंधों के कारण शनिवार को जी20 रात्रिभोज में शामिल नहीं होंगे, और स्पष्ट किया कि उनके राज्य के विमानों पर राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों की आवाजाही प्रतिबंधित नहीं है।

दरअसल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को कहा था कि वह राष्ट्रपति के साथ जी20 डिनर में शामिल नहीं होंगे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को कहा था कि वह राष्ट्रपति के साथ जी20 डिनर में शामिल नहीं होंगे। इस हफ्ते के अंत में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए सुरक्षा उपायों के कारण दिल्ली के अंदर और बाहर जाने वाली कोई गैर-निर्धारित उड़ानें नहीं हैं।

बघेल ने कहा कि उन्होंने कहा कि, भाई अब तो नो फ्लाइंग जोन हो गया है, तो कैसे जाऊं? सरकार ने शनिवार को भारत मंडपम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित विशेष रात्रिभोज के लिए जी20 के गणमान्य व्यक्तियों के अलावा सभी मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों को विशेष निमंत्रण दिया है।

वहीं, गृह मंत्रालय ने आगे कहा, एक मीडिया रिपोर्ट में राजस्थान के मुख्यमंत्री ने गृह मंत्रालय द्वारा उनके हेलिकॉप्टर उड़ान के लिए मंजूरी देने से इनकार करने का दावा किया है। राजस्थान के सीएम की तरफ से सीकर समेत उड़ान अनुमति के लिए चार अनुरोध प्राप्त हुए थे और सभी को गृह मंत्रालय की तरफ से अनुमोदित किया गया है। सीएम राजस्थान के किसी भी अनुरोध को अस्वीकार नहीं किया गया है। जबकि वाणिज्यिक विमानों की सभी निर्धारित उड़ानों और राज्यपालों और राज्य के मुख्यमंत्रियों को अपने राज्य के विमानों पर आवाजाही की अनुमति है। निजी चार्टर्ड उड़ानों को एमएचए से अनुमति लेना जरूरी होगा।

अर्श से फर्श पर टमाटर: दो महीने में 200 रुपये से 3 रुपये पहुंचे दाम, सड़क पर फसल फेंकने को मजबूर किसान…

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Tomato prices Huge decline: अभी दो महीने पहले की ही बात है कि टमाटर के भाव 200 रुपये प्रति किलो से भी ऊपर पहुंच गए थे। इतनी महंगाई ने आम जनता से लेकर सियासी गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी थी।

बड़े-बड़े रेस्टोरेंट और होटलों में भी पकवानों से टमाटर गायब हो गया था। लिहाजा सरकार को टमाटर के दाम नीचे लाने के लिए सब्सिडी देनी पड़ी और जगह-जगह सरकारी स्टॉल भी लगाए गए। जहां, आम जनता को राहत देने के लिए 50 रुपये किलो टमाटर बेचा जा रहा था।

लेकिन, अब टमाटर के भाव अर्श से फर्श पर आ चुके हैं। आंध्र प्रदेश में तो टमाटर 2 से 3 रुपये किलो बिक रहा है। आलम यह है कि दो महीने टमाटर से भरपूर मुनाफा कमाने वाले किसान अब मुसीबत में पड़ गए हैं और फसल को सड़क पर फेंकने के लिए मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि टमाटर के भाव इतना नीचे गिर गए हैं कि उन्हें खेत से मंडी तक ले जाने का भाड़ा तक निकालना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में रायलसीमा के कई किसानों ने अपनी उपज सड़कों पर फेंक दी है।

थोक में 10 रुपये से नीचे पहुंची कीमत

टमाटर के भावों में गिरावट का आलम यह है कि कई बाजारों में इसकी थोक कीमतें 10 रुपये से नीचे गिर गई हैं। वहीं खुदरा कीमत 20 से 30 रुपये प्रति किलो के बीच है। अनंतपुर जिले के इप्पेरू के किसान के वन्नूरू स्वामी ने कहा कि टमाटर के दामों में भारी गिरावट के कारण उन्होंने खेद में ही फसल छोड़ दी है। उन्होंने बताया, मैंने तीन एकड़ में टमाटर की फसल लगाई थी, इसमें एक लाख रुपये से अधिक का खर्च आया था, लेकिन अब लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया, कई किसानों में माल ढुलाई का भाड़ा भी अपनी जेब से भरा है। इसलिए उन्होंने इस सीजन के लिए अपनी फसल खेत में छोड़ने का फैसला किया है।

कई जगह 400 रुपये में भी बिका था टमाटर

दो महीने पहले जब टमाटर की कीमतें बढ़ीं थीं तो कई जगह टमाटर के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे। टमाटर की कीमत रिटेल में 250 से लेकर 400 रुपये तक पहुंच गई थी, जिससे हाहाकार मच गया था।

राजस्थान में 10000 महिलाओं को मिलेगा रोजगार, ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेंगी 1000 इंदिरा रसोई

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राजस्थान सरकार ने अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी एक हजार इंदिरा रसोइयां खोलने का ऐलान किया है। राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि प्रदेश के हर व्यक्ति को महंगाई की मार से राहत देने तथा भरपेट भोजन उपलब्ध कराने का फैसला लिया है।

गहलोत शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर इंदिरा रसोई योजना के संबंध में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि इसका शुभारंभ 10 सितंबर को टोंक जिले में निवाई के पास झिलाय से होगा और इन सभी एक हजार रसोइयों का संचालन राजीविका समूह की महिलाओं द्वारा किया जाएगा। इससे 10 हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा।

8 रुपये में भरपेट भोजन

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित इंदिरा रसोई योजना के माध्यम से गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को मात्र आठ रुपये में सम्मानपूर्वक पौष्टिक भोजन मिल रहा है। इस योजना से ‘कोई भूखा ना सोए’ का संकल्प साकार हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की इस योजना से सुविधापूर्ण वातावरण में सम्मानपूर्वक मात्र 8 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना का लाभ विद्यार्थी एवं श्रमिकों सहित सभी वर्ग के लोगों को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में इंदिरा रसोई के संचालकों एवं कर्मचारियों द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है। गहलोत ने कहा कि ‘कोई भूखा ना सोए’ के संकल्प के साथ शुरू की गई, इस योजना के माध्यम से कोरोना काल में 72 लाख लोगों को सरकार द्वारा निःशुल्क पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया।

कोरोना के दौर में राज्य सरकार के प्रयासों के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी सेवा भाव से आगे बढ़कर सहयोग किया। प्रदेश में वंचित तबके के लिए खाद्य सुरक्षा सुनश्चिति करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही इस योजना के लिए आर्थिक रूप से किसी भी तरह की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

भोजन की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश

बैठक में बताया गया कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रदेश के विभिन्न जिलों के इंदिरा रसोई संचालकों को सम्मानित भी किया जा रहा है। गहलोत ने इंदिरा रसोई योजना में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता एवं योजना में पारदर्शिता की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को भी प्रतिमाह रसोइयों में जाकर भोजन करना चाहिए ताकि गुणवत्ता की सुनश्चितिता हो सके। इससे यहां नियमित भोजन करने आने वाले लोगों का मान-सम्मान बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यह योजना आज महंगाई के दौर में बाहर से आने वाले विद्यार्थियों एवं कार्मिकों के लिए एक वरदान साबित हो रही है।

बैठक में बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा नवीन रसोइयों की स्थापना के लिए पांच लाख रुपये की एकमुश्त राशि तथा 17 रुपये प्रति थाली अनुदान दिया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों की 992 इंदिरा रसोइयों से अब तक 13 करोड़ से अधिक पौष्टिक एवं स्वादिष्ट भोजन की थालियां आमजन को परोसी जा चुकी हैं।

गहलोत ने कहा कि प्रदेश में 500 से अधिक स्थानीय सेवाभावी संस्थाओं के द्वारा ‘ना लाभ ना हानि’ के आधार पर रसोइयों का संचालन किया जाना सुखद बात है। इस योजना से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इंदिरा रसोई योजना में भामाशाहों द्वारा भी भोजन प्रायोजित किया जा सकता है।