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राजस्थान में 10000 महिलाओं को मिलेगा रोजगार, ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेंगी 1000 इंदिरा रसोई

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राजस्थान सरकार ने अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी एक हजार इंदिरा रसोइयां खोलने का ऐलान किया है। राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि प्रदेश के हर व्यक्ति को महंगाई की मार से राहत देने तथा भरपेट भोजन उपलब्ध कराने का फैसला लिया है।

गहलोत शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर इंदिरा रसोई योजना के संबंध में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि इसका शुभारंभ 10 सितंबर को टोंक जिले में निवाई के पास झिलाय से होगा और इन सभी एक हजार रसोइयों का संचालन राजीविका समूह की महिलाओं द्वारा किया जाएगा। इससे 10 हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा।

8 रुपये में भरपेट भोजन

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित इंदिरा रसोई योजना के माध्यम से गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को मात्र आठ रुपये में सम्मानपूर्वक पौष्टिक भोजन मिल रहा है। इस योजना से ‘कोई भूखा ना सोए’ का संकल्प साकार हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की इस योजना से सुविधापूर्ण वातावरण में सम्मानपूर्वक मात्र 8 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना का लाभ विद्यार्थी एवं श्रमिकों सहित सभी वर्ग के लोगों को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में इंदिरा रसोई के संचालकों एवं कर्मचारियों द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है। गहलोत ने कहा कि ‘कोई भूखा ना सोए’ के संकल्प के साथ शुरू की गई, इस योजना के माध्यम से कोरोना काल में 72 लाख लोगों को सरकार द्वारा निःशुल्क पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया।

कोरोना के दौर में राज्य सरकार के प्रयासों के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी सेवा भाव से आगे बढ़कर सहयोग किया। प्रदेश में वंचित तबके के लिए खाद्य सुरक्षा सुनश्चिति करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही इस योजना के लिए आर्थिक रूप से किसी भी तरह की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

भोजन की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश

बैठक में बताया गया कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रदेश के विभिन्न जिलों के इंदिरा रसोई संचालकों को सम्मानित भी किया जा रहा है। गहलोत ने इंदिरा रसोई योजना में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता एवं योजना में पारदर्शिता की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को भी प्रतिमाह रसोइयों में जाकर भोजन करना चाहिए ताकि गुणवत्ता की सुनश्चितिता हो सके। इससे यहां नियमित भोजन करने आने वाले लोगों का मान-सम्मान बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यह योजना आज महंगाई के दौर में बाहर से आने वाले विद्यार्थियों एवं कार्मिकों के लिए एक वरदान साबित हो रही है।

बैठक में बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा नवीन रसोइयों की स्थापना के लिए पांच लाख रुपये की एकमुश्त राशि तथा 17 रुपये प्रति थाली अनुदान दिया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों की 992 इंदिरा रसोइयों से अब तक 13 करोड़ से अधिक पौष्टिक एवं स्वादिष्ट भोजन की थालियां आमजन को परोसी जा चुकी हैं।

गहलोत ने कहा कि प्रदेश में 500 से अधिक स्थानीय सेवाभावी संस्थाओं के द्वारा ‘ना लाभ ना हानि’ के आधार पर रसोइयों का संचालन किया जाना सुखद बात है। इस योजना से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इंदिरा रसोई योजना में भामाशाहों द्वारा भी भोजन प्रायोजित किया जा सकता है।

पूर्व सीएम रमन सिंह का बड़ा आरोप, कहा- छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को बढ़ावा दे रही है घोटालों में डूबी बघेल सरकार

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रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा अभी होनी है लेकिन, लगातार तीन कार्यकाल के बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में भारी झटका खाने वाले भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने चुनाव अभियान का बिगुल फूंक दिया है.

रमन सिंह ने भ्रष्टाचार को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर लाखों करोड़ रुपये के कई कथित घोटालों का आरोप लगाया है.

साक्षात्कार में, रमन सिंह ने कांग्रेस पर चुनावी लाभ के लिए राज्य में नक्सलवाद को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया…

आप सबसे लंबे वक्त तक सेवा में रहने वाले भाजपा मुख्यमंत्रियों में से एक रहे हैं, आपको क्या लगता है इस बार आप छत्तीसगढ़ में सत्ता में आएंगे?

भाजपा की सरकार बनने से पहले छत्तीसगढ़ पलायन और भुखमरी से जूझ रहा था. यह हमने सुनिश्चित किया कि राज्य में रहने वाले 58 लाख गरीब परिवारों को एक रुपये किलो के दाम पर चावल उपलब्ध हो. हमारा पीडीएस (पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम) देश में एक मिसाल है. लेकिन दुर्भाग्य से, आज भूपेश बघेल सरकार जो पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूबी हुई है, उसने इसी पीडीएस योजना से 600 करोड़ रुपये बनाए हैं. राज्य की बात छोड़िए, इन्होंने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के लिए केंद्र से आ रहे फंड के तहत 5000 करोड़ रुपये का घोटाला किया है.

भाजपा शासनकाल में छत्तीसगढ़ कौशल उन्नयन के मामले में देश का 14% लक्ष्य पूरा करने वाला एकमात्र राज्य हुआ करता था. लेकिन आज यहां सीजीपीएससी (छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग) घोटाला सामने आ रहा है और सरकारी नौकरियां बेची जा रही हैं, यहां तक कि युवाओं के प्रदर्शन के बाद भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कोई फर्क नहीं पड़ा. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बड़े-बड़े वादे कर जनता को धोखा दिया. जनता ने उन्हें इस विश्वास के साथ वोट दिया कि विकास की गति तेज होगी, लेकिन छत्तीसगढ़ की वर्तमान दुर्दशा को देखने के बाद राज्य कांग्रेस के इस कुशासन को समाप्त कर देगा. प्रदेश की जनता पूर्ण बहुमत वाली भाजपा सरकार चुनने का मन बना चुकी है.

इस बार आपकी पार्टी का राज्य में मुख्य चुनावी मुद्दा क्या है?

भाजपा के पास राज्य में गिनाने के लिए 15 साल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र के 9 सालों की उपलब्धियां हैं, और हम जनता के बीच उन्हीं के साथ जाएंगे. कांग्रेस इसे लेकर घबराई हुई है, आखिर वह जनता की अदालत में अपनी क्या उपलब्धियां गिनाएंगे? कोयला घोटाला 540 करोड़ रुपये, 600 करोड़ का चावल घोटाला, 5000 करोड़ का प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, गौथन घोटाला जो 1300 करोड़ का है, गाय का गोबर घोटाला 229 करोड़, सीजीपीएससी घोटाला जिसमें लाखों करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ, यह कांग्रेस की कुछ उपलब्धियां हैं. अब ईडी ने भी सबूत पेश किया है जो बताता है कि महादेव ऐप के सुरक्षित संचालन में मुख्यमंत्री कार्यालय के करीबी लोग शामिल हैं. इसमें कोई हैरानी नहीं कि इस बार कांग्रेस अपना घोषणापत्र दरवाजों के पीछे तैयार कर रही है.

राज्य में बस्तर जैसे इलाकों में नक्सलवाद अभी भी चुनावी मुद्दा है?

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि एक बड़ी समस्या है. आज बघेल सरकार की बेअसर और अस्पष्ट नीतियों की वजह से और नक्सल-प्रभावी इलाकों में सुरक्षा को लेकर बरती जा रही लापरवाही के चलते हालात और बदतर हो गए हैं. ना जाने कितने लोगों ने अपनों को गंवाया है. लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लिए बस्तर में चुनावी फायदे से ज्यादा और कुछ भी अहम नहीं है. पिछले 6 महीनों में, 6 भाजपा नेताओं को लक्षित करके मारा गया है. भाजपा नेताओं को लगातार इसलिए मारा जा रहा है क्योंकि नक्सली जानते हैं कि अगर भाजपा सरकार आ गई तो वह फिर से कमजोर पड़ जाएंगे. कांग्रेस ने राज्य में नक्सलवाद को बढ़ावा दिया है.

यहां निवेश करने वालों की खुल गई किस्मत, एक झटके में बन गए करोड़पति…

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आजकल बाजार में कई निवेश विकल्प मौजूद हैं, जो ज्यादा रिटर्न देने का वादा करते हैं. लेकिन इनमें रिस्क भी कहीं ज्यादा होता है. इसी तरह शेयर बाजार में भी रिटर्न तो बंपर मिलता है लेकिन इसमें रिस्क भी काफी है.

परंतु यदि सोच-समझ कर बाजार में निवेश किया जाए तो नुकसान होने के चांस बहुत कम होते हैं. अगर निवेश के वक्त कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो शेयर मार्केट में आप अच्छी कमाई कर सकते हैं. मजबूत फंडामेंटल वाला कोई भी स्टॉक निवेशकों को अमीर बना सकता है.

आज हम आपको एक ऐसे ही जबरदस्त शेयर के बारे में बता रहे हैं, जिसने अपने निवेशकों को दो साल में ही 22000 पर्सेंट का तगड़ा रिटर्न देकर करोड़पति बनाने का काम किया है.

कमाल का निकला ये शेयर

यह शेयर है राज रेयॉन इंडस्ट्रीज (Raj Rayon Industries Ltd) का. कंपनी के शेयर 7 सितंबर, 2018 को 0.19 रुपये यानी 19 पैसे पर था. यह स्टॉक 7 सितंबर, 2023 को सबसे अधिक 21,963 प्रतिशत चढ़कर 41.92 रुपये पर पहुंच गया. अगर किसी निवेशक ने 5 साल पहले 19 पैसे के भाव से 1 लाख करोड़ किया होता तो आज उसका 1 लाख लगभग 3 करोड़ में बदल जाता. राज रेयान मुख्य रूप से पॉलिएस्टर टेक्सचराइज्ड यार्न (पीटीवाई), आंशिक रूप से ओरिएंटेड यार्न और पूरी तरह से तैयार यार्न के निर्माण में लगा हुआ है. कंपनी के प्लांट दादरा और नगर हवेली के सिलवासा में स्थित हैं.

ये शेयर भी निवेशकों की चमका रहे किस्मत

भारत के व्यापक बाजारों ने इक्विटी निवेशकों के लिए कुछ रत्न उजागर किए हैं. डेटा से पता चला है कि कम से कम 15 स्टॉक जो अभी भी 50 रुपये से नीचे कारोबार कर रहे हैं, पिछले पांच वर्षों में 1,000 प्रतिशत से अधिक रिटर्न देने में कामयाब रहे हैं. 7 सितंबर, 2018 से सितंबर, 2023 के दौरान रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज, आरआरआईएल लिमिटेड, लॉयड्स इंजीनियरिंग वर्क्स और अग्रवाल फॉर्च्यून इंडिया ने भी क्रमशः 4,100 प्रतिशत, 3,963 प्रतिशत, 2,534 प्रतिशत और 2,254 प्रतिशत की वृद्धि की है. 7 सितंबर को इन कंपनियों के शेयर 19 रुपये से 43 रुपये के बीच उपलब्ध थे.

9 वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाए जाने का इंतजार, रेलवे अब बेहतर रखरखाव और निरीक्षण के लिए करेगा कर्मचारियों को प्रशिक्षित

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भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क में और अधिक वंदे भारत ट्रेन जोड़ने की योजना बना रहा है. इसके साथ ही रेलवे स्वदेशी ट्रेनों के रखरखाव और निरीक्षण से निपटने के लिए पर्याप्त कर्मचारी रहें, इसे सुनिश्चित करते हुए उनके लिए प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित करेगा.

वर्तमान में भारत भर में 25 वंदे भारत चल रही हैं और करीब 9 और ट्रेन इस बेड़े में जुड़ने के लिए तैयार हैं. मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम आने वाले हफ्तों में और अधिक ट्रेनें चलाएंगे. इतनी सारी ट्रेनों के साथ, यह सुनिश्चित करना जरूरी हो जाता है कि वंदे भारत रेक के नियमित निर्धारित रखरखाव और इसके विभिन्न उप-असेंबली जैसे प्रोपल्जन, नियंत्रण, ब्रेक सिस्टम, प्लग दरवाजे, विद्युत प्रणाली, वैक्यूम शौचालय और अर्थिंग सिस्टम के निरीक्षण के लिए पर्याप्त योग्य और सक्षम प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध रहें.” अधिकारियों ने कहा कि चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) को मूल उपकरण निर्माताओं के मार्गदर्शन में तैयार कौशल विकास प्रशिक्षण सत्र की योजना बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं. सत्र में उन रेलवे जोन से प्राप्त फीडबैक भी शामिल होने हैं जहां वंदे भारत ट्रेनें पहले से ही चालू हैं.

मंत्रालय ने आदेश में प्रशिक्षण को “अति आवश्यक” मानने के दिए निर्देश

मंत्रालय के एक आदेश में कहा गया है ट्रेनिंग मोड्यूल को इस तरह से तैयार किया जाएगा कि ट्रेन के संचालन को सीखने और रखरखाव को लेकर प्रभावी समझ बने. प्रशिक्षण में व्यवहारिक और सैद्धांतिक दोनों तरह के सत्र शामिल किए जाएंगे. जिसमें ट्रेन पर काम करते समय किसी भी असामान्य और संबंधित सुरक्षा के मामले में पालन किए जाने वाले विभिन्न प्रोटोकॉल शामिल होंगे. आदेश में कहा कि मामले को “अति आवश्यक” माना जाना चाहिए. इस हफ्ते की शुरुआत में, News18 ने बताया था कि जुलाई के मध्य से, कम से कम नौ वंदे भारत ट्रेनें ICF (जहां उनका निर्माण किया जाता है) से निकल चुकी हैं. हालांकि, 7 जुलाई के बाद से नई ट्रेनों का उद्घाटन नहीं किया गया है.

नए बेड़े में राजस्थान, मध्यप्रदेश और ओडिशा के लिए ट्रेनें

उद्घाटन के लिए तैयार नई वंदे भारत में जहां ओडिशा को दूसरी ट्रेन भी मिलने की संभावना है, वहीं चुनावी राज्य राजस्थान और मध्य प्रदेश के लिए भी ट्रेनें शामिल हैं. इस सप्ताह रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने निरीक्षण के लिए उदयपुर और नीमच रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ राजस्थान और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों का दौरा किया. विद्युतीकृत रेलवे मार्गों वाले सभी राज्यों में अब कम से कम एक वंदे भारत है. वहीं पूर्वोत्तर भारत में असम को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में सेमी हाई-स्पीड ट्रेन का इंतजार है.

628 मौतें और हर तरफ तबाही. 19 साल पहले भी मोरक्को में भूकंप ने बरपाया था कहर, पढ़ें पूरी कहानी…

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अफ्रीकी देश मोरक्को में शुक्रवार देर रात भूकंप का तेज झटका लगा. 6.8 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई. समाचार एजेंसी AFP के मुताबिक, 632 लोगों की मौत हुई है. सैकड़ों मकान मलबे में दबे हैं.

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. लोगों को बाहर निकाला जा रहा है. भूकंप का केंद्र मोरक्काे के मराकेश शहर से 71 किलोमीटर दूर बताया गया. मोरक्को में भूकंप की यह कोई पहली घटना नहीं है. 2004 में आए भूकंप ने मोरक्को में जो तबाही मचाई वो इतिहास में दर्ज हो गई.

19 साल पहले मोरक्को के अल होसिमा में आए भूकंप में 628 लोगों ने जान गंवाई. 926 घायल हुए. सैकड़ों बेघर हुए. सरकार पर मदद न करने के आरोप लगे. जहां भूकंप आया वहां प्रदर्शन हुए.

तबाही के बीच लोगों मेंगुस्सा और विरोध प्रदर्शन

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, हालात इस कदर बुरे थे कि तबाही के बीच स्थानीय लोग सड़कों पर प्रदर्शन करने को मजबूर थे. मदद के लिए मोरक्को पहुंचे विदेशी मददगारों ने भी सरकार की आलोचना की और उन पर राहत न पहुंचाने में लापरवाही की आलोचना की. उस घटना में मोरक्को की सरकार ने 571 लोगों के मरने और 400 से ज्यादा लोगों के घायल होने की पुष्टि की, जबकि आंकड़ा कहीं ज्यादा था. सर्च खत्म होने के बाद यूरोपीय बचावकर्ताओं ने लोगों को मदद पहुंचानी शुरू की.

भूकंप के बाद मची तबाही के बाद जो खबरें आईं वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बन गईं. स्थानीय लोग गुस्से में थे. सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. उनका कहना था सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही. जहां मदद मिल भी रही थी वो पर्याप्त साबित नहीं हो रही.

विदेशी मदद के बीच स्थानीय लोगों का गुस्सा सरकार के प्रति खत्म नहीं हो रहा था. भूकंप से बुरी तरह प्रभावित इम्ज़ोरेन शहर की सड़कों पर सैकड़ों गुस्साए लोगों ने सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की.

एम्बुलेंस तक नहीं

प्रदर्शनकारियों का कहना था फ्रांस, स्पेन और अमेरिका समेत कई देशों से मदद मिल रही है, लेकिन हमारी सरकार कहां है. मोरक्को की सरकार अपने लोगों की कितनी मदद कर पा रही है. भूकंप की एक घटना के बाद दो बार और झटके लग चुके हैं. सरकार के लोग जानते हैं कि यह क्षेत्र भूकंप के खतरे वाले हिस्से में है, इसके बावजूद यहां एम्बुलेंस तक नहीं है.

मोरक्को में भूकंप के बाद बिगड़े हालात अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बने थे और सरकार की किरकिरी भी हुई थी. अब एक बार फिर मोरक्को में भूकंप ने तबाही मचाई है.

मदद के लिए शुरू हुआ अभियान

मोरक्को के लोगों की मदद के लिए इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसायटीज ने मिलकर फंडिंग के लिए अभियान शुरू किया था. 2.3 बिलियन डॉलर की फंडिंग इकट्ठा करने के लिए यह अभियान चलाया गया. फंडिंग से आए पैसों का लक्ष्य पीड़ितों के लिए टेंट, कम्बल, हीटर्स, चटाई और खाना जुटाना था.

क्या देश का बदल गया नाम? G20 में PM मोदी के आगे नेम प्लेट पर ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ लिखा…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत भाषण के साथ आज शनिवार को दो दिवसीय जी20 शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो गई. हालांकि इस सम्मेलन की सबसे खास बात यह रही कि मंच पर पीएम मोदी के सामने लगाए जाने वाले कंट्री नेम प्लेट पर इंडिया की जगह भारत लिखा हुआ था.

देश में पिछले कुछ दिनों से इंडिया की जगह भारत नाम करने की चर्चा जोरों पर चल रही है.

इससे पहले जी-20 शिखर सम्मेलन को लेकर भेजे गए निमंत्रण पत्र में भी ‘प्रेजिडेंट ऑफ इंडिया’ की जगह ‘प्रेजिडेंट ऑफ भारत’ लिखा गया था, जिसकी वजह से देश का नाम बदले जाने की चर्चा छिड़ गई है. सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर लोग अपने-अपने तर्क दे रहे हैं.

नाम बदलने को लेकर लगातार विरोध कर रहे विपक्षी दल

यही नहीं विपक्षी दलों की ओर से भी इंडिया की जगह भारत नाम लिखे जाने पर मोदी सरकार को घेरा गया. विपक्षी दल केंद्र सरकार के देश का नाम भारत किए जाने की कवायद को लेकर लगातार आलोचना कर रहा है. कांग्रेस नेता और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पर कहा कि विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA नाम से जब से गठबंधन बना है, इनकी चूलें हिल गई हैं. विपक्षी गठबंधन से ये लोग इतने घबरा गए हैं कि अब आप भारत नाम लिख रहे हैं.

इससे पहले केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले भारत नाम के साथ एक बुकलेट जारी किया था. यह बुकलेट पीएम मोदी के इंडोनेशिया में होने वाले भारत-आसियान सम्मेलन में शामिल होने से जुड़ी थी. इसमें भी पीएम मोदी को इंडिया के प्रधानमंत्री की बजाय भारत के प्रधानमंत्री लिखा गया था.

भारत-आसियान सम्मेलन से जुड़े बुकलेट में भी भारत का जिक्र

राष्ट्रपति के निमंत्रण में भारत का जिक्र

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी मंगलवार को जी20 सम्मेलन के दौरान रात्रिभोज में शामिल होने के लिए भेजे गए निमंत्रण पत्र को सोशल मीडिया पर साझा किया जिसमें प्रेजिडेंट ऑफ भारत लिखा हुआ था.

जी20 सम्मेलन के दौरान रात्रिभोज के लिए भेजे गए निमंत्रण में भारत नाम लिखा गया है.

इसी तरह असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरना ने भी सोशल मीडिया पर इंडिया की जगह भारत नाम किए जाने का समर्थन करते हुए कहा कि देश का इंग्लिश नाम क्यों होना चाहिए? उन्होंने भी रिपब्लिक ऑफ भारत लिखा.

INDIA गठबंधन का नाम बदलने को तैयार

इंडिया की जगह भारत नाम किए जाने को लेकर विपक्ष नाखुश है. इसी क्रम में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 3 दिन पहले कहा था कि विपक्षी गठबंधन अपना INDIA नाम बदलने को तैयार है, यदि इस नाम की वजह से केंद्र देश का नाम इंडिया’ की जगह नाम भारत करने योजना बना रही है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में देश के नाम के रूप में इंडिया’ और भारत दोनों का जिक्र किया गया है, लेकिन इंडिया’ नाम को नहीं हटाया जाना चाहिए.

NPCI ने भारत में लॉन्च किया UPI Lite X और Hello UPI, आपके बोलने मात्र से हो जाएगी पेमेंट, समझिए कैसे?

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What is UPI Lite X and Hello UPI? ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) 2023 में NPCI यानि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने यूपीआई बेस्ड 2 नई सर्विस लॉन्च की हैं. इसमें एक UPI Lite X और दूसरा Hello UPI है.

दोनों ही सर्विस यूपीआई पेमेंट को और आसान बनाने के लिए लाई गई हैं. पिछले महीने यूपीआई पेमेंट ने एक नया रिकॉर्ड स्थपित किया था. अगस्त में यूपीआई ट्रांजेक्शन का आंकड़ा 10 अरब को पार कर गया है जो बताता है कि भारत में किस तरह ये सर्विस बढ़ रही है. जीएफएफ में NPCI ने UPI यूजर्स के लिए बिलपे कनेक्ट सुविधा भी पेश की है.

क्या है UPI Lite X ?

UPI Lite X के जरिये यूजर्स बिना इंटरनेट के भी पैसो का लेन-देन कर पाएंगे. इस सर्विस का लाभ कोई भी व्यक्ति उठा सकता है लेकिन शर्त ये है कि आपके फोन में नियर फील्ड कम्युनिकेशन (एनएफसी) होना चाहिए. ये सर्विस ज्यादातर उन लोगों के लिए फायदेमंद हैं जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी अच्छी नहीं है.

Hello UPI क्या है?

हेलो यूपीआई के जरिए यूजर्स वॉइस कमांड से पैसे ट्रांसफर कर पाएंगे. इसके लिए बस आपको रिसीवर का नाम लेकर UPI PIN दर्ज करना है. फिलहाल हेलो यूपीआई की सर्विस हिंदी और इंग्लिश में ही मौजूद है. आने वाले समय में NPCI इसमें और भाषाएं जोड़ेगी जिससे इसे सभी यूज कर पाएं. कंपनी ने कहा कि उसने हिंदी और अंग्रेजी भुगतान भाषा मॉडल को सह-विकसित करने के लिए आईआईटी मद्रास में भाषिनी कार्यक्रम – एआई4भारत के साथ साझेदारी की है.

क्या है BillPay Connect Service

बिलपे कनेक्ट पूरे भारत में बिल भुगतान के लिए एक राष्ट्रीयकृत नंबर लाता है. यूजर्स को बिल भरने के लिए इस नंबर पर कॉल या मैसेज करना होगा. इसके बाद उनके पास एक वेरिफिकेशन कॉल आएगा. पेमेंट को वेरिफाई करते ही बिल का भुगतान हो जाएगा. इसके अलावा, बिलपे कनेक्ट वॉयस असिस्टेड बिल पेमेंट सर्विस भी प्रदान करेगा. यूजर्स अपने स्मार्ट होम डिवाइस पर वॉयस कमांड के माध्यम से बिल प्राप्त करने और भुगतान करने में सक्षम होंगे और तुरंत उन्हें वॉइस कन्फर्मेशन भी मिलेगी.

मोदी सरकार के इस फैसले के मुरीद हुए पूर्व PM मनमोहन सिंह, कहा- प्रधानमंत्री ने सही किया…

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पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता मनमोहन सिंह ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर कड़ी कूटनीतिक स्थिति को संभालते हुए भारत के संप्रभु और आर्थिक हित को पहले रखने के मोदी सरकार के कदम की सराहना की है।

उन्होंने कहा कि केंद्र ने बिल्कुल सही काम किया है। एक इंटरव्यू में मनमोहन सिंह ने कहा कि जब दो या दो से अधिक शक्तियां संघर्ष में फंस जाती है तो अन्य राष्ट्र के लिए पक्ष चुनने का भारी दवाब आ जाता है। मनमोहन सिंह ऐसे समय में जी20 समिट में भारत की अध्यक्षता देखकर खुश हैं, जब विदेश नीति पहले की तुलना में आज कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। पूर्व पीएम ने रूस और यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर भारत के रूख का समर्थन करने हुए कहा, ‘मेरा मानना ​​है कि भारत ने शांति की अपील करते हुए हमारे संप्रभु और आर्थिक हितों को पहले रखकर सही काम किया है।’ उन्होंने कहा, ‘जी20 शिखर सम्मेलन को सुरक्षा संबंधी विवादों को निपटाने के मंच के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जी20 के सदस्य देशों और संस्थानों को जलवायु चुनौतियों, असमानता, वैश्विक व्यापार में नीति समन्वय और अविश्वास से निपटने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग पर दी ये प्रतिक्रिया मनमोहन सिंह ने G20 समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बैठक में न शामिल होने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि पीएम मोदी भारत की क्षेत्रीय और संप्रभु अखंडता की रक्षा करने और द्विपक्षीय तनाव को कम करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे। भारत के भविष्य को लेकर आशावादी हूं 90 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वह भारत के भविष्य के बारे में चिंतित होने के बजाय भविष्य की चुनौतियों को लेकर अधिक आशावादी हैं क्योंकि यह देश आजादी के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। उन्होंने कहा, “कुल मिलाकर मैं भारत के भविष्य को लेकर चिंतित होने से ज्यादा आशावादी हूं। हालाँकि, मेरी आशावादिता इस बात पर निर्भर है कि भारत एक सामंजस्यपूर्ण समाज बने, जो सभी प्रगति और विकास का आधार है। भारत की सहज प्रवृत्ति विविधता का स्वागत करना और उसका जश्न मनाना है जिसे संरक्षित किया जाना चाहिए।” चंद्रयान-3 के लिए इसरो को बधाई दी मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पहले चंद्रमा मिशन को याद करत हुए कहा कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के तीसरे मिशन में चंद्रमा पर सफल लैंडिंग की सराहना की। उन्होने कहा, ‘मैं काफी खुश हूं कि चंद्रयान मिशन जिसे 2008 में लॉन्च किया गया था, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाले पहला मिशन बनकर शिखर पर पहुंच गया है। इसरो में सभी महिलाओं और पुरूषों को मेरी हार्दिक बधाई।’

राजनांदगांव। ग्राम ठेकवा में कांग्रेस के भरोसे का सम्मेलन, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मंच पर पहुंचे।

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राजनांदगांव।  छत्तीसगढ़ के ग्राम ठेकवा में कांग्रेस के भरोसे का सम्मेलन शुरू हो गया है। सम्मेलन में मुख्य अतिथि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मंच पर पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने हाथ दिखाकर लोगों का अभिवादन किया। इसके बाद राज्य गीत हुआ।मल्लिकार्जुन खरगे ने जय जोहार, जय छत्तीसगढ़ से संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार भरोसे की सरकार है। ये गरीबों, पिछड़ों, आदिवासी और किसानों की सरकार है। ये मोदी का गुजरात माडल नहीं है। कांग्रेस पार्टी और भूपेश बघेल सरकार का माडल है।

खरगे ने कहा, छत्तीसगढ़ के लोगों के आशीर्वाद से मैं कांग्रेस का राष्टीय अध्यक्ष चुना गया हूं। उन्होंने छत्तीसगढ़ में ईडी-आइटी के छापे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, जब रायपुर में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ उसी दिन पार्टी के लोगों के यहां ईडी का छापा डाला गया। ये छापे कांग्रेस के लोगों को डराने के लिए मारा गया। लेकिन छत्तीसगढ़ के लोग डरने वाले नहीं है। अगर हम कांग्रेस के लोग डरते तो इंदिरा गांधी, राजीव गांधी अपनी जान नहीं देते।

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, पूरे प्रदेश में भरोसे का सम्मेलन हो रहा है। भरोसा करना बहुत बड़ी बात है। लेकिन कांग्रेस सरकार पर जनता ने भरोसा किया है। भरोसा है, क्योंकि किसानों का कर्जा माफ किया है। 25 सौ में धान खरीदी किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जो कहा वो सरकार ने किया। कोटवारों का मानदेय दिया है।

इसके बाद सम्मेलन में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, गढ़बो छत्तीसगढ़ का सपना अभी पूरा नहीं हुआ है। इसलिए 2023 में कांग्रेस की सरकार बनाए। इसके बाद डिप्टी टीएस सिंहदेव ने सम्मेलन को संबोधित किया।

1867 कार्यों का भूमिपूजन व लोकार्पण किया जाएगा

राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम ठेकवा में भरोसे का सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में नेता प्रतिपक्ष राज्यसभा मल्लिकार्जुन खड़गे और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी एवं खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के लिए 355 करोड़ 23 लाख रुपये की लागत के कुल 1 हजार 867 के विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया । जिसमें 177 करोड़ 86 लाख रुपये के 1 हजार 691 कार्यों का भूमिपूजन एवं 177 करोड़ 36 लाख रुपये के 176 कार्यों का लोकार्पण शामिल है।

कच्चे तेल के 90 डॉलर पार होने का भारत के लिए क्या है मतलब, कितना किस पर होगा असर…

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भारत जैसी अर्थव्यवस्था में कच्चे तेल (crude oil) की बड़ी भूमिका है। मौजूदा समय में तेल की कीमत (crude oil price) में हुई बढ़ोतरी से हालांकि मैक्रो फंडामेंटल्स के लिए बड़ा रिस्क नहीं है, लेकिन अगर कीमत लगातार बढ़ती जाती है तब इसका आर्थिक विकास (Indian economy) पर असर देखने को मिल सकता है।

तेल उत्पादक देशों के समूह वाला ओपेक+ ब्लॉक द्वारा उत्पादन में कटौती को तीन और महीनों के लिए बढ़ाए जाने के बाद, ब्रेंट क्रूड 5 सितंबर को 90 डॉलर प्रति बैरल से पार हो गया। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, कीमत का यह लेवल नवंबर 2023 के बाद सबसे ज्यादा है, जो अभी भी इसी के आस-पास है।

भारत के लिए चुनौती इसलिए है, क्योंकि यह कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार है। क्रूड का महंगा इम्पोर्ट चालू खाते के घाटे का भार और बढ़ा सकता है जीडीपी की रफ्तार को सुस्त कर सकता है। बावजूद, कुछ ऐसे फैक्टर्स भी हैं जो इकोनॉमी को सपोर्ट करते हैं।

चालू खाते का घाटा

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक,बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री दीपान्विता मजूमदार का कहना है कि चूंकि भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 80% से ज्यादा इम्पोर्ट करता है, तो ऐसे में चालू खाते के घाटे और रुपये पर असर पड़ने की संभावना है. चालू वित्त वर्ष में जुलाई तक आवक तेल शिपमेंट 55 अरब डॉलर था।
मजूमदार ने कहा कि हमारा अनुमान है कि 80-85 डॉलर प्रति बैरल के आधार पर तेल आयात में 15 बिलियन डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद का 0.4% की ग्रोथ होने की संभावना है।

विदेशी मुद्रा भंडार

आईडीएफसी बैंक की इंडिया इकोनॉमिस्ट गौरा सेन गुप्ता ने कहा कि आने वाले समय में विदेशी मुद्रा भंडार, डॉलर की ताकत बनी रहने की उम्मीद है। सेन गुप्ता ने कहा कि कच्चे तेल में उछाल से रुपये जैसी तेल इम्पोर्ट करने वाली मुद्राओं पर भी मूल्यह्रास का दबाव बढ़ेगा। ऐसे में बहुत कुछ आरबीआई के विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप पर निर्भर करता है जिसका मकसद दोनों पक्षों में अस्थिरता को कम करना है। दिसंबर तक डॉलर-रुपये की जोड़ी 82-84 के बीच सीमित रहने की उम्मीद है।

महंगाई

कच्चे तेल की कीमतों (crude oil price) में बढ़ोतरी से महंगाई के जोखिम की संभावना फिलहाल नहीं है। इसकी वजह है कि कच्चे तेल में अस्थिरता के बावजूद मई 2022 से घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2024 में खुदरा महंगाई दर औसतन 5.8% रहेगी। माना जा रहा है कि घरेलू खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मार्च 2024 तक बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। सीपीआई बास्केट में पेट्रोल और संबंधित उत्पादों का भार 2.4% है। कच्चे तेल में 10% बढ़ोतरी का सीधा अर्थ खुदरा महंगाई में 15 बेसिस प्वॉइंट की बढ़ोतरी से है।

जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल (crude oil) की ऊंची कीमतें इम्पोर्ट पर दबाव बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी ग्रोथ को धीमा कर देती हैं। तेल की कीमतों में लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल की लगातार वृद्धि से जीडीपी की ग्रोथ रेट लगभग 20 आधार अंकों तक कम हो जाती है।