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कलेक्टर ने पेट्रोल-डीजल पंप संचालकों की ली बैठक…

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– नियमानुसार करें पेट्रोल एवं डीजल की बिक्री का कार्य: कलेक्टर’
– पेट्रोल-डीजल के जमाखोरी की स्थिति नहीं होनी चाहिए’

राजनांदगांव: कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में पेट्रोल-डीजल पंप संचालकों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि नियमानुसार पेट्रोल एवं डीजल की बिक्री कार्य करें। नियम के विरूद्ध रिटेल पेट्रोल पंप से औद्योगिक कार्य के लिए पेट्रोल-डीजल नहीं दें। उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी को सेंसेटाईज किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जिले में पेट्रोल एवं डीजल की सतत आपूर्ति हो रही है और संकट की स्थिति नहीं है। उन्होंने सभी पेट्रोल-डीजल संचालकों से कहा कि जमाखोरी की स्थिति नहीं होनी चाहिए। आवश्यकतानुसार नियमों के तहत पेट्रोल एवं डीजल देना सुनिश्चित करें। ईंधन की बचत को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल एवं डीजल का उपयोग करना है।

जिले में आपूर्ति एवं मांग के अनुरूप मूल्य का निर्धारण होना चाहिए तथा इसकी सूचना खाद्य विभाग को दें। उन्होंने पेट्रोल एवं डीजल की आपूर्ति की निगरानी करने तथा नियमानुसार कार्य नहीं करने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान संयुक्त कलेक्टर

श्रीमती शीतल बंसल, खाद्य अधिकारी श्री रविन्द्र सोनी एवं अन्य अधिकारी तथा पेट्रोल-डीजल पंप संचालक उपस्थित रहे।

सुशासन तिहार 2026: – 14 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों की समस्याओं का हुआ समाधान’

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– शिविर में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, जाॅब कार्ड, पेंशन एवं अधिकार पत्र का किया गया वितरण’

– सुशासन तिहार शासन-प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद का प्रभावी माध्यम बन रहा – जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव’

राजनांदगांव: राज्य शासन की मंशानुरूप सुशासन तिहार के अंतर्गत आज पूरे जिला प्रशासन का अमला बस से जिले के अंतिम छोर के ग्रामीणों की समस्याओं के निराकरण एवं शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने छुरिया विकासखंड के ग्राम साल्हे पहुंचा। ग्राम पंचायत साल्हे क्लस्टर में 14 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों के लिए जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी द्वारा ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर निराकरण किया गया। शिविर में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 8 हितग्राहियों को पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। वहीं 15 हितग्राहियों को नया राशन कार्ड, 15 हितग्राहियों को नया जाॅब कार्ड, 7 हितग्राहियों को पेंशन स्वीकृति, 5 हितग्राहियों को श्रमिक कार्ड तथा 4 हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए। इसके अलावा 4 बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) अंतर्गत 16 हितग्राहियों को व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए प्रशासकीय स्वीकृति दी गई तथा 14 स्वच्छता दीदियों को स्वच्छता किट वितरित की गई। कृषि विभाग द्वारा 3 हितग्राहियों को मूंग बीज वितरण किया गया। बिहान योजना के अंतर्गत 2 महिला स्वय सहायता समूहों को 6-6 लाख रूपए का ऋण वितरण किया गया। स्वामित्व योजना के तहत 10 हितग्राहियों को अधिकार पत्र प्रदान किए गए। मत्स्य पालन विभाग द्वारा आदिवासी मछुआ समूह ग्राम पंचायत जोंधरा को मछली पकड़ने हेतु जाल एवं आईस बाॅक्स तथा जय गुहा निषाद मछुआ सहकारी समिति मर्यादित मन्होरा को आईस बाॅक्स प्रदान किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की गई तथा नन्हे बच्चों की माताओं को सुपोषण किट प्रदान कर पोषण के प्रति जागरूक किया गया।

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव ने कहा कि सुशासन तिहार शासन-प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद का प्रभावी माध्यम बन रहा है। पहले लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कार्यालय जाना पड़ता था, लेकिन अब पूरा प्रशासन गांव पहुंचकर समस्याओं का समाधान कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा है कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। शिविरों के माध्यम से राशन कार्ड, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, स्वास्थ्य सेवाएं, रोजगार और अन्य योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को एक ही स्थान पर मिल रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से स्वास्थ्य जांच कराने, शासन की योजनाओं का लाभ लेने तथा जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का आव्हान किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम साल्हे में मुक्तिधाम निर्माण की घोषणा भी की। साथ ही 10वीं एवं 12वीं में उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान कर उन्हें उवल भविष्य की शुभकामनाएं दी।

अध्यक्ष जनपद पंचायत छुरिया श्री संजय सिन्हा ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन-प्रशासन स्वयं गांव पहुंचकर अंतिम छोर के लोगों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को अब छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जनपद या जिला मुख्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि विभिन्न विभागों के अधिकारी शिविर में उपस्थित होकर त्वरित निराकरण कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से शासन की योजनाओं का लाभ लेने तथा अपनी समस्याएं निःसंकोच रखने की बात कही। श्री सिन्हा ने जल संरक्षण, जैविक खेती और रासायनिक उर्वरकों के कम उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि छुरिया विकासखंड में बड़ी संख्या में पात्र हितग्राहियों को आवास का लाभ मिला है।

अपर कलेक्टर श्री सीएल मारकण्डेय ने कहा कि राज्य शासन के निर्देशानुसार 1 मई से 10 जून तक पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारी गांव-गांव पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिले में 10 से 15 पंचायतों के क्लस्टर बनाकर कुल 62 जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपनी समस्याओं एवं मांगों से संबंधित आवेदन शिविर में प्रस्तुत करने की अपील करते हुए कहा कि जिन आवेदनों का तत्काल निराकरण संभव होगा, उनका मौके पर समाधान किया जाएगा तथा शेष आवेदनों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण कर हितग्राहियों को जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि राजस्व संबंधी प्रकरणों जैसे नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, नक्शा त्रुटि सुधार सहित अन्य विभागीय समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जा रहा है। इस अवसर पर उपाध्यक्ष जनपद पंचायत श्री प्रशांत ठाकुर एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता साहू ने भी संबोधित किया। शिविर में जिला पंचायत सदस्य श्री गोपाल सिंह भुआर्य, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती बिरम मण्डावी, जनपद सदस्य श्रीमती अंजली, जनपद सदस्य श्रीमती भेष साहू, जनपद सदस्य श्रीमती लक्ष्मी बाई मंडावी, श्रीमती हरिला बाई, एसडीएम डोंगरगांव श्री श्रीकांत कोर्राम, तहसीलदार श्री विजय कोठारी, सीईओ जनपद पंचायत श्री होरीलाल साहू सहित 14 ग्राम पंचायतों के सरपंच, जनप्रतिनिधिगण एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

धान उठाव, कस्टम मिलिंग और पीडीएस व्यवस्था की खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने की विस्तृत समीक्षा…

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31 मई तक शेष धान उठाव पूर्ण करने और कस्टम मिलिंग चावल जमा करने की गति बढ़ाने के निर्देश’

तीन माह के एकमुश्त राशन वितरण, भंडारण क्षमता और रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया की भी हुई समीक्षा’

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री दयालदास बघेल ने आज मंत्रालय महानदी भवन में विभागीय योजनाओं, धान उठाव, कस्टम मिलिंग तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में खरीफ वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के निराकरण, धान खरीदी केन्द्रों एवं संग्रहण केन्द्रों से धान के उठाव, कस्टम मिलिंग एवं एफसीआई तथा नागरिक आपूर्ति निगम में चावल जमा किए जाने की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि खरीफ वर्ष 2025-26 के उपार्जन केन्द्रों एवं संग्रहण केन्द्रों में शेष धान का उठाव 31 मई 2026 तक हर हाल में पूर्ण कराया जाए। उन्होंने कस्टम मिलिंग के बाद चावल जमा करने की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत अप्रैल, मई एवं जून 2026 के लिए तीन माह के एकमुश्त चावल भंडारण एवं वितरण की भी समीक्षा की गई। खाद्य मंत्री श्री बघेल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्धारित समय-सीमा में तीनों माह का राशन वितरण कार्य पूर्ण किया जाए ताकि हितग्राहियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

समीक्षा बैठक में खाद्य संचालनालय, जिला कार्यालयों, नागरिक आपूर्ति निगम, राज्य भंडार गृह निगम तथा छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया की स्थिति की भी समीक्षा की गई। मंत्री श्री बघेल ने आवश्यक पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

राज्य में खाद्यान्न भंडारण क्षमता की समीक्षा करते हुए मंत्री श्री बघेल ने छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम द्वारा निर्माणाधीन गोदामों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर उपयोग में लाने के निर्देश दिए। बैठक में विधिक माप विज्ञान के कार्यों की भी समीक्षा की गई।

खाद्य मंत्री श्री बघेल ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्यान्न वितरण, पूरक पोषण आहार एवं मध्यान्ह भोजन जैसी योजनाओं से जुड़े कमीशन का भुगतान शीघ्र करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

बैठक में खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले, खाद्य संचालक डॉ. फरिहा आलम, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ श्री जितेंद्र शुक्ला, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, रजिस्ट्रार छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, नियंत्रक विधिक माप विज्ञान तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

भारत बनाने जा रहा फाइटर जेट, दुनिया देखेगी ताकत…

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भारत अब रक्षा निर्यातक बनने की ओर है. वडोदरा में तैयार पहला मेड इन इंडिया C-295 विमान सितंबर में वायुसेना को मिलेगा. यह दुर्गम इलाकों में भारी पेलोड ले जाने में सक्षम और पूरी तरह सुरक्षित है.

भारत अब रक्षा सौदों के लिए दुनिया के सामने हाथ फैलाने वाला देश नहीं, बल्कि खुद सैन्य साजो-सामान बनाने और निर्यात करने वाला महाशक्ति बनने की राह पर है. वडोदरा के टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स प्लांट से बाहर निकलता C-295 विमान केवल धातु का एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह भारत के आत्मनिर्भर होने के स्वाभिमान की एक बुलंद गूंज है. दशकों तक हम विदेशी तकनीक और विमानों के भरोसे रहे, लेकिन अब भारतीय इंजीनियरिंग और निजी क्षेत्र की ताकत सातवें आसमान को छूने को बेताब है. यह विमान भारत की सैन्य क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव का आगाज है.

सितंबर में इतिहास रचेगा पहला मेड इन इंडिया विमान

भारतीय वायुसेना के बेड़े में इसी साल सितंबर में पहला ‘मेड इन इंडिया’ C-295 एयरक्राफ्ट शामिल होने जा रहा है. गुजरात के वडोदरा में स्थित टाटा-एयरबस प्लांट ने इस अत्याधुनिक विमान को तैयार कर लिया है. यह देश के इतिहास में पहली बार हो रहा है जब कोई निजी कंपनी पूरी तरह से एक सैन्य विमान का निर्माण और असेंबली कर रही है. अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने इस प्लांट का उद्घाटन किया था, जो अब अपने पहले उत्पाद के साथ दुनिया के सामने आने को तैयार है.

भारत का स्पेन के साथ 56 विमानों का समझौता

भारत ने स्पेन के साथ कुल 56 C-295 विमानों का समझौता किया है. इस डील की खास बात यह है कि 16 विमान सीधे स्पेन से बनकर आएंगे, जबकि शेष 40 विमानों का निर्माण पूरी तरह से वडोदरा के प्लांट में होगा. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और एयरबस का यह संयुक्त उद्यम भारत में विमानों की मैन्युफैक्चरिंग, असेंबलिंग, टेस्टिंग और मेंटेनेंस (MRO) का केंद्र बनेगा. वडोदरा के हरनी में बनी फाइनल असेंबली लाइन इस समय इंजन फिटिंग और डिजिटल सिस्टम के अंतिम चरण पर काम कर रही है.

पुराने एवरो बेड़े का आधुनिक विकल्प

भारतीय वायुसेना लंबे समय से 1960 के दशक के पुराने एवरो-748 विमानों पर निर्भर थी, जिन्हें अब रिटायर करने का समय आ गया है. C-295 विमान न केवल उन पुराने विमानों की जगह लेगा, बल्कि वायुसेना की परिवहन क्षमता को 50 प्रतिशत तक बढ़ा देगा. यह विमान लद्दाख जैसे दुर्गम और चीन-पाकिस्तान की संवेदनशील सीमाओं पर रसद पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा. अपनी बेमिसाल टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट क्षमता के कारण इसे इस श्रेणी का राजा माना जा रहा है.

कच्चे रनवे पर उतरने की क्षमता

C-295 विमान की सबसे बड़ी खूबी इसकी शॉर्ट टेक-ऑफ और लैंडिंग (STOL) क्षमता है. यह विमान महज 670 मीटर के छोटे से रनवे से उड़ान भर सकता है और सिर्फ 320 मीटर की दूरी में लैंड कर सकता है. भारत की पहाड़ी सीमाओं पर जहां रनवे छोटे और कच्चे होते हैं, वहां यह विमान किसी गेम-चेंजर से कम नहीं होगा. उबड़-खाबड़ इलाकों में रसद और सैनिकों को तेजी से तैनात करने के मामले में यह भारतीय रक्षा उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

ताकत और पेलोड का जबरदस्त कॉम्बिनेशन

तकनीकी रूप से C-295 एक बेहद शक्तिशाली मशीन है. यह एक बार में करीब 9.2 टन वजन उठाने में सक्षम है. इसके भीतर 71 सैनिक या 50 पैराट्रूपर्स आराम से सफर कर सकते हैं. आपातकालीन स्थिति में इसे एयर एम्बुलेंस बनाकर 24 स्ट्रेचर रखे जा सकते हैं. यह विमान 480 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ता है और एक बार ईंधन भरने पर लगभग 5,000 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर सकता है, जो इसे लंबी मिशन अवधि के लिए उपयुक्त बनाता है.

अत्याधुनिक तकनीक

यह विमान सिर्फ सामान ढोने तक सीमित नहीं है. इसे समुद्री निगरानी, आपदा राहत और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जैसे जटिल ऑपरेशनों के लिए भी तुरंत तैयार किया जा सकता है. इसके पिछले हिस्से में लगा बड़ा रियर रैंप डोर भारी हथियारों और सैन्य जीपों की लोडिंग को आसान बनाता है. साथ ही, इसका अत्याधुनिक ग्लास कॉकपिट और स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम पायलटों को खराब मौसम और रात के घने अंधेरे में भी सटीक नेविगेशन और सुरक्षित उड़ान की सुविधा प्रदान करता है.

स्वदेशी सुरक्षा और ग्लोबल एक्सपोर्ट हब

भारत में तैयार हो रहे इन विमानों में स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट लगाया गया है, जो इन्हें दुश्मन की मिसाइलों और रडार की नजर से बचाने में सक्षम है. वडोदरा का यह प्लांट सिर्फ भारत की जरूरतों को ही पूरा नहीं करेगा, बल्कि भविष्य में यहां से दूसरे देशों को भी C-295 विमानों का निर्यात किया जाएगा. यह कदम भारत को दुनिया के बड़े डिफेंस एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करेगा, जिससे मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड का सपना सच होगा.

बंगाल और असम के बाद यहां भी बीजेपी की बंपर जीत, PM मोदी ने जताया आभार…

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Haryana Municipal Elections Result 2026: हरियाणा नगर निकाय चुनावों में बीजेपी की जीत हुई है.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को हरियाणा नगर निकाय चुनावों में शानदार जीत हासिल की. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यह जीत एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की विकास और सुशासन नीतियों में जनता के अटूट विश्वास को दर्शाती है.

मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हरियाणा के नगर निकाय चुनावों में भाजपा की शानदार विजय के लिए राज्य के मेरे परिवारजनों का बहुत-बहुत आभार! ’’.

उन्होंने कहा, ‘‘इस जीत से एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि जनता-जनार्दन का भाजपा-राजग सरकार द्वारा किए जा रहे विकास और सुशासन की नीतियों पर अटूट विश्वास है. यह विजय राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार पर हरियाणा के लोगों के भरोसे का भी प्रतीक है’’.

मोदी ने कहा, ‘‘इस अवसर पर पार्टी के उन सभी कार्यकर्ताओं का मैं हृदय से अभिनंदन करता हूं, जिन्होंने भाजपा की इस जीत में अहम भूमिका निभाई है’’.

उकलाना को छोड़कर भाजपा ने अन्य सभी नगर निकाय चुनावों में शानदार जीत दर्ज की.

उकलाना में 23 वर्षीय एक छात्र ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नगर समिति के अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की.

पार्टी ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ माने जाने वाले सांपला में नगरपालिका समिति अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की.

कांग्रेस ने नगर निकाय चुनाव के लिए सांपला में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था. हालांकि, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और आम आदमी पार्टी (आप) ने कुछ वार्ड में चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें एक भी सीट नहीं मिली.

नगरपालिका चुनाव में, भाजपा ने विकास के मुद्दे पर वोट मांगे, जबकि कांग्रेस ने स्वच्छता, जल निकासी और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर भाजपा पर निशाना साधा.

भाजपा खेमे में जश्न का माहौल था और पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मिठाई बांटी.

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने नगर निगम चुनावों में भाजपा के शानदार प्रदर्शन की सराहना की. उन्होंने कहा कि लोगों ने एक बार फिर नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों पर अपनी सहमति जताते हुए उन पर अपना भरोसा जताया है.

सैनी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने एक बार फिर उन्हें नकार दिया है. उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस हमेशा झूठ का सहारा लेती है, लोग यह समझ चुके हैं’’.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का ‘‘असली चेहरा बेनकाब हो गया है’’.

हुड्डा के गढ़ सांपला में भाजपा की जीत पर सैनी ने कहा, ‘‘लोगों को अब हुड्डा पर भरोसा नहीं रहा. वह झूठ बोलते हैं’’.

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी सरकार ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और लोगों से किए गए वादों को पूरा कर रही है’’.

परिणामों के अनुसार, पंचकूला में महापौर पद के लिए भाजपा के श्यामलाल बंसल (71) ने कांग्रेस उम्मीदवार और राज्य महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सुधा भारद्वाज को 36,252 मतों के अंतर से हराया.

सोनीपत में महापौर पद के लिए भाजपा के राजीव जैन (61) ने कांग्रेस उम्मीदवार कमल दीवान को 23,247 मतों से हराया.

अंबाला में भाजपा की अक्षिता सैनी (32) ने कांग्रेस उम्मीदवार कुलविंदर कौर को 21,358 मतों के अंतर से हराया.

वर्तमान में पंचकूला, अंबाला और सोनीपत के तीन नगर निगमों में मौजूदा महापौर भाजपा से हैं.

सांपला नगर समिति में भाजपा के प्रवीण ने निर्दलीय उम्मीदवार अंकित को 687 मतों से हराया.

धारूहेड़ा में, भाजपा के सत्यनारायण उर्फ ​​​​अजय जांगड़ा ने निर्दलीय उम्मीदवार बाबू लाल के खिलाफ 6,236 मतों से जीत हासिल की.

हालांकि, उकलाना में भाजपा उम्मीदवार निकिता गोयल निर्दलीय उम्मीदवार रीमा सोनी से 2,806 मतों से हार गईं.

जब उनसे निकिता के लिए प्रचार करने वाले भाजपा के शीर्ष नेताओं के बारे में पूछा गया, तो सोनी ने कहा, ‘‘मुझे उकलाना की जनता का समर्थन प्राप्त था. मैं उन्हें मुझे विजयी बनाने के लिए धन्यवाद देती हूं’’.

सोनी ने कहा, ‘‘मैं एक साधारण परिवार से आती हूं, और मैं उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त करना चाहती हूं जिन्होंने मेरा समर्थन किया’’. चुनाव लड़ने से पहले, स्नातक सोनी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं.

इस बीच रेवाड़ी नगर परिषद में भाजपा की विनीता पिप्पल ने कांग्रेस की निहारिका को 21,445 मतों से हराया. अंबाला में भाजपा ने 16 वार्ड जीते, तीन वार्ड कांग्रेस के खाते में गए, जबकि एक वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए.

सोनीपत में भाजपा ने 17 वार्ड पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस ने पांच वार्ड में जीत दर्ज की. कुछ वार्ड में तो कांग्रेस उम्मीदवार निर्दलीय उम्मीदवारों से भी पीछे रह गए.

पंचकूला नगर निगम में भाजपा ने 17 वार्ड में जीत हासिल की, निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो वार्ड में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस ने केवल एक वार्ड में जीत हासिल की.

पंचकूला में महापौर का पद जीतने के बाद भाजपा के श्यामलाल बंसल ने कहा कि वह जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे.

भाजपा की हरियाणा इकाई के अध्यक्ष मोहन लाल बडोली ने पार्टी पर भरोसा जताने के लि ए मतदाताओं का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि हुड्डा के गढ़ माने जाने वाले सांपला में भाजपा की जीत कांग्रेस के प्रति स्पष्ट अस्वीकृति का संकेत है.

भारत में बढ़ती पेट्रोलियम खपत और महंगे कच्चे तेल की वजह से फोरेक्स रिजर्व पर दबाव…

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भारत में बढ़ती पेट्रोलियम खपत और महंगे कच्चे तेल की वजह से फोरेक्स रिजर्व पर दबाव बढ़ रहा है. रुपये को संभालने के लिए RBI को दखल देना पड़ता हैं. आइए जानते हैं, डेटा से पूरे मामले को.

देश में पेट्रोलियम पदार्थों की खपत पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है और इसका सीधा असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार यानी फोरेक्स पर भी पड़ रहा है. साल 2010 से 2014 के बीच देश में कुल 604.43 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) पेट्रोलियम उत्पादों की खपत हुई थी. बढ़ती आबादी, ज्यादा वाहन और तेज आर्थिक गतिविधियों की वजह से तेल की मांग लगातार बढ़ती चली गई है.

भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में खपत बढ़ने का सीधा असर देश के फोरेक्स यानी विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो देश का आयात बिल भी बढ़ जाता हैं. जिसके असर की बात करें तो, महंगाई और आम लोगों का घरेलू खर्च बढ़ता हैं. जिससे आम लोग आर्थिक दबाव महसूस करते हैं.

हर साल बढ़ती गई पेट्रोलियम की खपत

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में पेट्रोलियम पदार्थों की खपत साल-दर-साल लगातार बढ़ती रही है. साल 2010-11 में यह 141.04 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) थी, जो 2011-12 में बढ़कर 148.13 MMT हो गई. इसके बाद 2012-13 में खपत 157.06 MMT तक पहुंची. वहीं 2013-14 में यह बढ़कर 158.20 MMT दर्ज की गई थी.

2019-20 में पेट्रोलियम खपत का आंकड़ा

वित्त वर्ष 2019-20 में देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कुल खपत 237.63 मिलियन टन रही. इस दौरान कुल खपत में पेट्रोल की हिस्सेदारी 12.6 फीसदी रही थी. जबकि एलपीजी का हिस्सा 11.1 फीसदी दर्ज किया गया था. बढ़ती आबादी और घरेलू जरूरतों के कारण इन दोनों ईंधनों की मांग में लगातार तेजी देखने को मिली है.

तेल आयात से बढ़ता है फोरेक्स पर दबाव

देश अपनी जरूरत का करीब 80% से 85% कच्चा तेल विदेशों से मंगवाता हैं. ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो देश को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. इसका सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार यानी फोरेक्स रिजर्व और रुपये की कीमत पर पड़ता है. यही वजह है कि तेल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी भी भारत की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर असर डालने का काम करती है.

आरबीआई को देना पड़ता हैं दखल

जब दुनिया में किसी युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें अचानक बढ़ती हैं, तो भारत पर इसका सीधा असर पड़ता हैं. तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. जिससे रुपये पर दबाव बढ़ने लगता है. ऐसी स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक को बाजार में दखल देकर डॉलर की सप्लाई बनाए रखनी पड़ती है, ताकि रुपया ज्यादा कमजोर न हो. इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार यानी फोरेक्स रिजर्व में तेजी से कमी आती है.

सरकार ने रोक दिया चीनी का एक्सपोर्ट, भारत के इस फैसले से दुनिया पर पड़ेगा भारी असर…

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भारत सरकार ने बेहद ही महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए चीनी के एक्सपोर्ट पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. तो वहीं, भारत सरकार के इस फैसले से पूरी दुनिया पर गंभीर असर देखने को मिलने वाला है.

भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को बढ़ने से रोकने को नियंत्रित करने के लिए चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. जहां, यह रोक 30 सितंबर, 2026 तक या अगले आदेश तक फिललहाल पूरी तरह से जारी रहेगा. इसके साथ ही भारत सरकार का यह बेहद ही महत्वपूर्ण फैसला एक ऐसे समय में लिया गया है जब खाद्य कीमतें भारतीय परिवारों के लिए राजनीतिक और आर्थिक रूप से एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई हैं.

दो प्रकार की चीनी पर लागू रहेगा प्रतिबंध 

दरअसल, यह प्रतिबंध कच्चे (Raw) और रिफाइंड दोनों प्रकार की चीनी पर पूरी तरह से लागू रहेगा. लेकिन, सरकार ने उन शिपमेंट को एक बड़ी राहत दी है जो पहले से ही इस प्रक्रिया में शामिल हैं. इसके अलावा अगर अधिसूचना जारी होने से पहले लोडिंग शुरू हो चुकी थी, जहाज बंदरगाह पर आ चुके थे, या स्टॉक सीमा शुल्क (Customs) विभाग को सौंपा जा चुका था, तो उन खेपों को निर्यात की अनुमति दिए जाने का भी फैसला लिया गया है.

नीति में अचानक बदलाव की क्या है असली वजह?

जानकारी के मुताबिक, इससे पहले सरकार ने 1.59 मिलियन टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, क्योंकि तब उत्पादन खपत से ज्यादा रहने का अनुमान लगाया जा रहा था. लेकिन अब अनुमान कमजोर पड़ गए हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ प्रमुख उत्पादक राज्यों में गन्ने की कम पैदावार की वजह से भारत में लगातार दूसरे सीजन में खपत की तुलना में उत्पादन कम होने की आशंका जताई जा रही है.

भारत सरकार के इस फैसले से क्या पड़ेगा वैश्विक प्रभाव?

यह तो सभी जानते हैं कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक में से एक में आता है. तो वहीं, भारत सरकार के अस बड़े फैसले से  भारतीय आपूर्ति रुकने से एशिया और अफ्रीका के देश अब ब्राजील और थाईलैंड की तरफ तेजी से रुख करने लगेंगे.  जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चीनी की वायदा कीमतों में पहले के मुताबिक और भी ज्यादा तेजी देखने को मिलेगी. हांलाकि,  मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और बढ़ती ऊर्जा लागत ने पहले ही वैश्विक शिपिंग रूटों पर अपना दबाव बनाना शुरू कर दिया है.

आर्थिक संदर्भ और क्या लिए जा सकते हैं अन्य कदम

चीनी निर्यात पर रोक के एक दिन पहले ही सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है. हांलाकि,  यह कदम विदेशी मुद्रा बचाने को पूरी तरह से कम करने के लिए ही उठाया गया है. तो वहीं, दूसरी तरफ ईरान से जुड़े संघर्ष और डॉलर के मुकाबले रुपये के 95.75 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने की वजह से अर्थव्यवस्था फिलहाल दबाव में देखने को मिल रहा है. जिसको लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने की खास तौर से अपील की है ताकि देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को जितना जल्दी हो सके उतना स्थिर किया जा सके.

US-China करीब आए तो भारत के लिए खतरा या मौका? ट्रंप के दौरे पर शुरू हुई बड़ी बहस…

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ट्रंप की चीन यात्रा से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर बड़ा असर पड़ सकता है. जहां ईरान संकट सुलझना एक मौका है, वहीं अमेरिका-चीन का व्यापारिक मेल भारत के लिए रणनीतिक खतरा बन सकती है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. ईरान और पश्चिम एशिया के संकट के बीच हो रहा यह दौरा केवल दो महाशक्तियों का मिलन नहीं है, बल्कि भारत के लिए एक बड़ा रणनीतिक संकेत भी है. भारत के लिए यह क्षण अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि अमेरिका और चीन के आपसी संबंधों की गर्माहट या कड़वाहट सीधे तौर पर हमारी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित करती है. यह बहस अब तेज हो गई है कि क्या यह करीब आती दूरियां भारत के लिए कोई नया अवसर लेकर आएंगी या फिर यह हमारे क्षेत्रीय हितों के लिए एक गंभीर चेतावनी साबित होंगी.

ईरान संकट और ट्रंप का दबाव

डोनाल्ड ट्रंप इस समय ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण काफी दबाव में हैं. वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें और युद्ध के फैलने का खतरा उनकी प्राथमिकता है. माना जा रहा है कि इसी दबाव के चलते ट्रंप चीन के साथ अपने रिश्तों को नया मोड़ देने की कोशिश कर रहे हैं. भारत के लिए चिंता की बात यह है कि यदि ट्रंप ने इस दबाव में आकर चीन को कोई बड़ी रणनीतिक रियायत दी, तो इसका सीधा असर भारत के प्रभाव पर पड़ सकता है.

व्यापारिक तालमेल और भारतीय बाजार

अमेरिका और चीन भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं. यदि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ जैसा कोई नया सिस्टम बन जाता है, तो भारत के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है. ट्रंप पहले भी भारतीय उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ लगाने की वकालत कर चुके हैं. ऐसे में भारत को डर है कि अमेरिका व्यापारिक लाभ के लिए चीन को व्यापार में ढील न दे दे. अगर ऐसा हुआ तो वैश्विक बाजार में भारत की व्यापारिक महत्ता कम हो सकती है और निर्यात पर बुरा असर पड़ सकता है.

ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण रास्ता

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल और गैस पर बुरी तरह निर्भर है. यह आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जरिए होती है, जो फिलहाल युद्ध के साये में है. भारत को उम्मीद है कि ट्रंप चीन के प्रभाव का उपयोग कर ईरान युद्ध को शांत कराएंगे और इस समुद्री रास्ते की नाकेबंदी खत्म करवाएंगे. अगर ट्रंप की यात्रा से इस मार्ग पर शांति बहाल होती है, तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा मौका साबित होगा.

प्रतिस्पर्धा से मिलने वाला लाभ

अब तक भारत को अमेरिका और चीन के बीच जारी कड़वाहट और कॉम्पिटिशन का सीधा फायदा मिला है. जब ये दोनों देश आपस में उलझे रहते हैं, तो अमेरिका भारत को चीन के खिलाफ एक काउंटरबैलेंस के तौर पर देखता है. इसी वजह से भारत को आधुनिक तकनीक और बड़े निवेश आसानी से मिलते रहे हैं. भारत के लिए रणनीतिक रूप से यह जरूरी है कि अमेरिका और चीन के बीच एक नियंत्रित प्रतिस्पर्धा बनी रहे, ताकि भारत की अहमियत कम न हो.

ताइवान और क्षेत्रीय अखंडता का सवाल

क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से ताइवान का मुद्दा भारत के लिए भी अहम है. यदि ट्रंप ताइवान के मुद्दे पर चीन के प्रति नरम रुख अपनाते हैं, तो इससे बीजिंग की विस्तारवादी नीतियों को नई ताकत मिल सकती है. चीन का बढ़ता मनोबल भारत की अपनी सीमाओं और क्षेत्रीय अखंडता के लिए भविष्य में खतरा पैदा कर सकता है. भारत को इस बात की आशंका है कि अमेरिका और चीन के बीच की कोई भी बड़ी डील उसके पड़ोसी देशों में चीन के प्रभाव को और बढ़ा सकती है.

जी-2 की आशंका और रणनीतिक कद

जानकारों के बीच सबसे बड़ी चिंता अमेरिका और चीन के बीच G-2 जैसी किसी संभावित साझेदारी को लेकर है. अगर दुनिया की ये दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं आपस में हाथ मिलाकर वैश्विक नियम तय करने लगीं, तो भारत जैसे उभरते देशों का रणनीतिक महत्व कम हो सकता है. भारत अब तक जिस बहुध्रुवीय विश्व की बात करता रहा है, उसे इस साझेदारी से गहरा धक्का लग सकता है. इसलिए ट्रंप का यह दौरा भारत के लिए एक कूटनीतिक इम्तिहान की तरह है.

बुलेट पर दिखे महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस, सामने आई ये खास तस्वीरें…

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बुलेट बाइक से विधान भवन पहुंचे. प्रधानमंत्री की ईंधन बचत अपील के बाद सीएम फडणवीस ने यह फैसला लिया.

बाइक पर सीएम फडणवीस

बुलेट पर CM, PM मोदी की अपील के बाद फडणवीस का दिखा अलग अंदाज - India TV  Hindi

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भाजपा नेता आशीष शेलार को पीछे बैठाकर दोनों हेलमेट पहनकर विधान भवन पहुंचे.

बाइक से विधान भवन पहुंचे फडणवीस, योगी ने कम किया काफिला... पीएम मोदी की  अपील का राज्यों में दिखा असर - Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis  on bike pm modi appeal effect

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मुख्यमंत्री फडणवीस की यह अलग अंदाज वाली एंट्री चर्चा का विषय बन गई.

पीएम की अपील का असर: महाराष्ट्र CM देवेंद्र फडणवीस का नया अंदाज, बुलेट बाइक पर  दिखे,

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अपनी सरकारी कार छोड़कर सीएम बुलेट मोटरसाइकिल से विधान भवन पहुंचे.

पीएम की अपील पर कारों का काफिला सब घटा रहे थे, मुख्यमंत्री साहब को देख चौंक  गए सभी | petrol diesel save maharashtra cm devendra fadnavis bullet vidhan  sabha

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प्रधानमंत्री की अपील के बाद कई नेता कम ईंधन खपत वाले वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

Devendra Fadnavis Bike Ride Puc Expired Controversy Varsha Gaikwad Bjp  Reply - क्या CM फडणवीस ने तोड़े नियम, एक्सपायर PUC वाली बाइक से पहुंचे  विधानसभा? जानें क्या है पूरी सच्चाई ...

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फडणवीस ने कहा कि देश और दुनिया के मौजूदा हालात को देखते हुए ईंधन की बचत जरूरी है.

ईंधन बचाने के लिए बाइक चलाकर विधान भवन पहुंचे फडणवीस, पीएम मोदी की अपील का  दिखा असर - maharashtra cm fadnavis bikes to assembly amid fuel saving push

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मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने अपने काफिले छोटे कर दिए हैं और पुलिस से भी इसे और कम करने का आग्रह किया गया है.

Arvind Chotia's Video on X

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फडणवीस ने कहा कि सभी विदेश दौरे रद्द कर दिए गए हैं और अगले छह महीने तक बड़े सरकारी कार्यक्रम नहीं होंगे.मुख्यमंत्री ने कहा कि पेट्रोल-डीजल और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है.

MSP For Farmers:  भारत में एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य की शुरुआत कब हुई. जान लीजिए इस बारे में पूरी जानकारी….

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भारत में खेती-किसानी की जब भी बात होती है. एमएसपी यानी मिनिमम सपोर्ट प्राइस का जिक्र सबसे पहले आता है. यह सिस्टम किसानों के लिए एक सेफ्टी नेट की तरह काम करता है ताकि मार्केट में कीमतों के गिरने पर उन्हें भारी नुकसान न उठाना पड़े. एमएसपी की शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी जब भारत अनाज की भारी किल्लत से जूझ रहा था.

और लाल बहादुर शास्त्री सरकार ने देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया था. उस दौर में हरित क्रांति की नींव रखी जा रही थी और किसानों को नई तकनीकों और बीजों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक सुनिश्चित आय का भरोसा देना बेहद जरूरी था. जान लीजिए एमएसपी की पूरी कहानी.

कब हुई थी एमएसपी की शुरुआत?

एमएसपी सिस्टम को औपचारिक रूप से साल 1966-67 में लागू किया गया था. इसकी शुरुआत के पीछे लक्ष्मीकांत झा की अध्यक्षता में बनी खाद्य अनाज मूल्य समिति का बड़ा हाथ था. सरकार ने महसूस किया कि अगर किसान को उसकी मेहनत का वाजिब दाम नहीं मिलेगा. तो वह ज्यादा उत्पादन के लिए प्रेरित नहीं होगा.

सबसे पहले गेहूं के लिए एमएसपी तय की गई थी जिससे किसानों को बिचौलियों के चंगुल से बचाया जा सके. इसके बाद धीरे-धीरे अन्य फसलों को भी इस दायरे में लाया गया. आज कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों पर सरकार हर साल रबी और खरीफ की फसलों के लिए एमएसपी का ऐलान करती है जिससे मार्केट में एक बैलेंस बना रहता है.

एमएसपी से पहले फसलों की खरीद का तरीका

एमएसपी सिस्टम लागू होने से पहले किसानों की हालत काफी चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि फसलों की खरीद पूरी तरह से ओपन मार्केट और बड़े व्यापारियों पर निर्भर थी. उस समय कोई फिक्स रेट नहीं होता था और फसल कटने के बाद जब मंडियों में आवक बढ़ती थी, तो व्यापारी मिलीभगत करके कीमतें गिरा देते थे.

किसानों के पास अनाज को स्टोर करने की सुविधा नहीं होती थी. इसलिए उन्हें मजबूरी में अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती थी. उस दौर में साहूकारों और जमींदारों का दबदबा था और किसान अक्सर कर्ज के जाल में फंसे रहते थे क्योंकि फसल बेचने के बाद भी उनकी लागत तक वसूल नहीं हो पाती थी.

आधुनिक दौर में एमएसपी की अहमियत 

आज के समय में एमएसपी न केवल कीमतों को कंट्रोल करता है बल्कि देश की फूड सिक्योरिटी सुनिश्चित करने में भी बड़ी भूमिका निभाता है. भारतीय खाद्य निगम (FCI) और अन्य सरकारी एजेंसियां एमएसपी पर अनाज खरीदकर उसका बफर स्टॉक बनाती हैं. जिसका इस्तेमाल पीडीएस यानी राशन सिस्टम के जरिए गरीबों तक अनाज पहुँचाने में होता है.

अब सरकार का फोकस एमएसपी को लागत का कम से कम डेढ़ गुना करने पर है. जिससे किसानों की आय में इजाफा हो सके. हालांकि आज भी फल, सब्जी और कई अन्य फसलों पर यह सिस्टम लागू नहीं है. लेकिन अनाज के मामले में इसने भारतीय खेती को एक मजबूत आधार प्रदान किया है जिससे किसान भविष्य की योजनाएं बेहतर बना पाते हैं.