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Business Idea : LED बल्ब का बिजनेस शुरू कर चमकाएं किस्मत, दो कमरों में लग जाएगी फैक्ट्री, होगी लाखों की कमाई

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रोशनी की जरूरत तो हम सभी को होती है। अंधेरा होते ही दुनिया के हर घर में बल्ब से ही रोशनी की जाती है। ऐसे में ये एक ऐसा बिजनेस है जिसकी राह में कभी अंधेरा नहीं आ सकता। हालांकि इस क्षेत्र में तकनीक तेजी से बदल रही है।

15 साल पहले फिलामेंट वाले बल्ब से सीएफएल का दौर हमने देखा है। लेकिन बीते 3 से 5 साल में LED बल्ब बाजार में छा चुके हैं। इनकी मांग भी काफी ज्यादा है। ऐसे में यदि आप नया बिजनेस शुरू करने के लिए सोच रहे हैं तो LED बल्ब बनाने की फैक्ट्री आपके लिए एक अच्छा विकल्प बन सकती है। आप घर पर ही LED बल्ब की फैक्ट्री सेटअप कर सकते हैं, इसमें इन्वेस्टमेंट भी बहुत कम है।इसे महज 50 हजार रुपये लगाकर शुरू किया जा सकता हे और हर महीने लाखों में कमाई की जा सकती है। आइए जानते हैं ये बिजनेस कैसे शुरू कर सकते हैं, कहां से कच्चा माल मिलेगा, मार्केट कैसे बिल्ट करें और कितनी कमाई हो सकती है।

LED बल्ब की फैक्ट्री शुरू करने से पहले 3 बातें समझ लेते हैं

  1. डिमांड: देश के हर घर में एलईडी बल्ब की जरूरत है। एक बड़ा असंगठित बाजार है, जहां आपके लिए भी जगह है
  2. लागत: LED बल्ब की फैक्ट्री लगाने के लिए आपको बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं है, आप घर पर ही फैक्ट्री शुरू कर सकते हैं। आपको कच्चा माल भी आसानी से मिल जाता है।
  3. सरकारी मदद: सरकार छोटे कारोबार शुरू करने के लिए सब्सिडी और लोन देती है। ऐसे में आपको पूंजी के साथ ही तकनीकी ज्ञान भी सरकार प्रदान कर सकती है।

 LED Bulb

सरकार देती है मदद

सरकार की ओर से छोटे कारोबार शुरू करने के लिए तकनीकी ज्ञान से लेकर पूंजी सहायता भी दी जाती है। एलईडी बल्ब के बिजनेस को शुरू करने के लिए आपको केवल 50 हजार रुपये का छोटा निवेश करना होगा। आप बल्ब बनाने का हुनर मिनिस्ट्री ऑफ माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज यानिए एमएसएमई की मदद ले सकते हैं। यहां ट्रेनिंग के दौरान आपको एलईडी लाइट की बेसिक जानकारी जैसे बेसिक ऑफ पीसीबी, एलईडी ड्राइवर, फिटिंग-टेस्टिंग, मैटेरियल की खरीद, सरकारी सब्सिडी आदि की जानकारी दी जाती है।

घर पर शुरू हो सकती है फैक्ट्री

एलईडी बल्ब बनाने की फैक्ट्री को आप अपने छोटे घर पर ही सेटअप कर सकते हैं। आपको यहां कुछ पार्ट असेंबल करने होते हैं। आपको हैवी मशीनरी भी नहीं लगानी होती है। एलईडी बल्ब बनाने के लिए आपको सोल्डरिंग मशीन,स्टर, सीलिंग मशीन आदि बहुत सी चीजों को जरूरत पड़ सकती है। यही कारण है कि आपको बल्ब बनाने के लिए एक छोटे एरिया की भी जरूरत पड़ेगी।

 LED Bulb

ED बल्ब बनाने की प्रोसेस

  1. प्रोसीजर / इम्पोर्ट मिलीवेट-रेटेड एलईडी चिप्स, सर्किट और अन्य माउंटिंग डिवाइस
  2. एंब्रायडरी सर्किट, फिल्टर सर्किट के साथ पीसीबी बोर्ड पर मिलीवेट-रेटेड एलईडी चिप्स एम्बेड करें , आदि
  3. एक कॉम्पैक्ट यूनिट बनाने के लिए स्मोकी रिफ्लेक्टर के साथ लगे हुए धारक टोपी और प्लास्टिक मॉड्यूल के साथ पीसीबी बोर्ड को फिट करें
  4. इकट्ठे एलईडी प्रकाश व्यवस्था और पैकेज का परीक्षण करें !

10W तक के LED Bulb के लिए आवश्यक कच्चे माल

  • एलईडी चिप्स
  • फिल्टर के साथ रेक्टिफायर सर्किट
  • हीट-सिंक डिवाइस
  • धातु की टोपी धारक
  • प्लास्टिक बॉडी
  • प्लास्टिक ग्लास
  • कनेक्टिंग वायर

 LED Bulb

आइए समझते हैं कमाई का गणित

एक एलईडी बल्ब बनाने में करीब 50 रुपये की लागत आती है। बाजार में लोकल बल्ब 80 से 100 रुपये में बिक जाता है। यानि आप इस बिजनेस में 60 से 100 प्रतिशत का प्रोफिट कमा सकते हैं। मान लीजिए कि आप एक दिन में 100 बल्ब बनाते हैं। इस तरह आप एक दिन में ही 5000 रुपये बचा सकते हैं। महीने की बात करें तो यह बचत 1.50 लाख रुपये की हो जाती है। आपको इसके लिए बस मार्केट तलाशने की जरूरत है।

गांवों में तलाश सकते हैं मार्केट

एलईडी बल्ब बनाने का बिजनेस शुरू करने के कई फायदे हैं. चूंकि इनकी रोशनी अच्छी होती है और बिजली की खपत कम होती है, ऐसे में इसकी डिमांड काफी बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में फिलिप्स, बजाज जैसी बड़ी कंपनियों की पहुंच सीमित है। ऐसे में आप कस्बों और गांवों को फोकस कर अपने माल की बिक्री के लिए अच्छा मार्केट बना सकते हैं।

Tomato Prices : कब मिलेगी महंगे टमाटर से राहत? सरकार ने दी ये अहम जानकारी

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Tomato Price Hike : लंबे वक्त से टमाटर की बढ़ती कीमत (Tomato Price Hike) ने किचन का बजट बिगाड़ रखा है. सरकार इसकी कीमतों को काबू में करने के लिए कई तरह के कदम उठा रही है, मगर अभी भी रिटेल मार्केट में इसकी कीमत आसमान छू रही है.

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि टमाटर के दाम (Tomato Price) कब कम होंगे. उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा है कि आने वाले कुछ दिनों में टमाटर की कीमत में गिरावट दर्ज की जा सकती है. अगले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से नई फसलों की आवत शुरू हो जाएगी. इसके बाद टमाटर के दाम में गिरावट दर्ज की जा सकती है.

कब कम होंगे दाम?

राज्य सभा में टमाटर की बढ़ती कीमत पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे में लिखित जवाब में कहा है कि अगले कुछ दिनों में टमाटर की नई फसलें मार्केट में आने लगेगी. इसमें बड़ी संख्या में टमा महाराष्ट्र के नारायणगांव, औरंगाबाद और नासिक से आएगी. इसके साथ ही मध्य प्रदेश से भी टमाटर की नई फसल आएगी. ऐसे में मार्केट नई फसलों की आवक से टमाटर की कीमत में कमी होने की संभावना है.

कई शहरों में बेचे जा रहे टमाटर

इसके अलावा उपभोक्ता मामले के राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने संसद को यह भी जानकारी है कि दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे कई राज्यों में सस्ते टमाटर कृषि मार्केटिंग एजेंसियों जैसे नेफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) द्वारा बेचे जा रहे हैं. टमाटर को शुरुआती दौर में 90 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, जो 16 जुलाई तक घटकर 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था. वहीं अब NAFED और NCCF के सेंटरों पर अब टमाटर 70 रुपये किलो मिल रहा है. सरकार ने यह भी कहा है कि टमाटर के बढ़ते दाम के कारण कई किसान इसकी खेती कर रहे हैं. ऐसे में मार्केट में आने वाले दिनों में टमाटर की भारी मात्रा में आवक होगी. इससे रेट में कमी होने की संभावना है.

Parliament : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ओडिशा के बालासोर जिले में दुखद ट्रिपल ट्रेन दुर्घटना ।दुर्घटना में 41 मृत व्यक्तियों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है |

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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि ‘सिग्नलिंग-सर्किट-परिवर्तन’ में चूक के कारण गलत सिग्नल के कारण जून में ओडिशा के बालासोर जिले में दुखद ट्रिपल ट्रेन दुर्घटना हुई।

मंत्री इस त्रासदी पर संसद की राज्यसभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) नेता जॉन ब्रिटास और आम आदमी पार्टी (आप) नेता संजय सिंह के सवालों का जवाब दे रहे थे। ब्रिटास और सिंह ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने दुर्घटना के संबंध में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी और क्या उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच के लिए कोई समयसीमा तय की थी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में कहा

2 जून को बहनागा बाजार स्टेशन (बालासोर के पास) पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण ट्रेन दुर्घटना में 295 यात्रियों की जान चली गई, 176 गंभीर रूप से घायल हुए, 451 को साधारण चोटें आईं और 180 को प्राथमिक उपचार मिला और वे चले गए। उक्त दुर्घटना में 41 मृत व्यक्तियों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सीआरएस द्वारा स्थापित दुर्घटना का कारण है -: पिछली टक्कर पूर्व में स्टेशन के नॉर्थ सिग्नल गूमटी पर किए गए सिग्नलिंग-सर्किट-परिवर्तन में खामियों के कारण हुई थी, और स्टेशन पर लेवल क्रॉसिंग गेट नंबर 94 के लिए इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर के प्रतिस्थापन से संबंधित सिग्नलिंग कार्य के निष्पादन के दौरान हुई थी।

संसद सत्र, संसदीय लोकतंत्र

रेलमंत्री : मुख्य लाइन को अब लूप लाइन (क्रॉसओवर 17 ए/बी) से जोड़ने वाला क्रॉसओवर अब लूप लाइन पर सेट किया गया था। गलत सिग्नलिंग के परिणामस्वरूप ट्रेन नंबर 12841 अप लूप लाइन पर चली गई और अंततः वहां खड़ी मालगाड़ी (नंबर एन/डीडीआईपी)इससे पहले एक सूत्र ने बताया कि भारतीय रेल बालासोर ट्रेन हादसे पर सीआरएस की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करेगी ताकि यह सुनश्चित हो सके कि उससे दुर्घटना की सीबीआई जांच प्रभावित ना हो। यह दुर्घटना तब हुई जब दो जून को शाम करीब सात बजे कोरोमंडल एक्सप्रेस एक खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई, जिससे ट्रेन के अधिकतर डिब्बे पटरी से उतर गए। उसी समय दूसरी लाइन से गुजर रही बेंगलुरु-हावड़ा एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे भी पलट गये।

उर्फी जावेद के नए लुक ने उड़ाए सबके होश

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यह बात तो आप जानते ही हैं कि उर्फी जावेद काफी बोल्ड हैं. उनका पूरा इंस्टाग्राम ही बोल्ड तस्वीरों वीडियो यूनिक ड्रेस सेंस में कुछ ऐसा कर दिया है, जिसे देखकर आपके होश उड़ जायेंगे आप जानते ही हैं कि उर्फी जावेद अपने हर ड्रेस के साथ ऐसे ऐसे एक्सपेरिमेंट, जिसके बारे में किसी की सोच नजर . इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है.यह वीडियो खुद उर्फी जावेद ने शेयर किया है. उर्फी जावेद ने अपना यह वीडियो शुक्रवार को शेयर किया. इसमें आप देख सकते हैं कि उर्फी जावेद हद से ज्यादा रिवीलिंग ड्रेस में नजर आ रही हैं. इसे देखने के बाद कुछ लोगों का तो गुस्साऔर एक यूजर ने उन्हें चुड़ैल तक कह दिया है. एक अन्य यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा- अरे मोरी मैया जी का है.

Manipur Violence : हिंसा की आग में जलता मणिपुर

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मणिपुर के इम्फाल में महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा घारी इलाके में एक मुख्य सड़क के दोनों किनारों को अवरुद्ध करने के बाद विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए, जिसके बाद पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी।

प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए मणिपुर सशस्त्र पुलिस, सेना और त्वरित कार्रवाई बटालियन मौके पर पहुंची। एक ऑपरेशन में उन्होंने आग बुझाई और स्थिति को नियंत्रित किया। प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए कई इलाकों में फ्लैग मार्च किया गया।

मणिपुर राज्य में 3 मई से इम्फाल घाटी में केंद्रित बहुसंख्यक मैतेई और पहाड़ियों पर कब्जा करने वाले कुकी लोगों के बीच जातीय झड़पें हो रही हैं। हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। राज्य में तीन मई को हिंसा भड़क उठी थी, जब मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ का आयोजन किया गया था।

मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी, जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं, 40 प्रतिशत ज्यादातर पहाड़ी इलाको में रहते हैं।

राज्य के विभिन्न हिस्सों से आगजनी, लूट, हिंसा और भीड़ जमा होने की कई घटनाएं सामने आई हैं।

जब राज्य सामान्य स्थिति में लौटने की कोशिश कर रहा था, तब 4 मई का एक वीडियो बुधवार को सामने आया जिसमें एक युद्धरत समुदाय की दो महिलाओं को दूसरे पक्ष के पुरुषों के एक समूह द्वारा नग्न परेड करते हुए दिखाया गया। इस वीडियो ने देश भर में आक्रोश पैदा कर दिया है और कांग्रेस ने मांग की है कि हिंसा प्रभावित राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए।

घटना के संबंध में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दो आदिवासी महिलाओं की आपबीती को कैद करने वाला 26 सेकंड का वीडियो 3 मई को पूर्वोत्तर राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के एक दिन बाद सामने आया।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को संसद के मानसून सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले एक वायरल वीडियो के जारी होने के समय पर सवाल उठाया और दावा किया कि इस वीडियो के लीक होने के पीछे राजनीति है। उन्होंने दावा किया कि पूर्वोत्तर खासकर मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में बलात्कार की घटनाएं कम होती हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि मणिपुर की घटना ने 140 करोड़ भारतीयों को शर्मसार किया है, उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया। दो महीने पहले राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से मणिपुर पर अपनी पहली टिप्पणी में प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि “कानून अपनी पूरी ताकत से काम करेगा” और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 1800 घंटे से अधिक की “समझ से परे और अक्षम्य चुप्पी” के बाद, प्रधान मंत्री ने आखिरकार मणिपुर पर कुल 30 सेकंड तक बात की।

Indian Railway : रेलवे स्‍टेशनों पर मिलेगी 20 रुपये में खाने की थाली, क्‍या-क्‍या होगा खाने में, डिटेल में जान लें

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नई दिल्‍ली. अब रेलवे जनरल बोगी में सफर करने वाले यात्रियों को भरपेट भोजन बेहद सस्‍ती कीमत में कराएगा. स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर ही जनरल कोच के सामने इकॉनमी मील (Economy Meals) स्टॉल लगाए जाएंगे.

इन स्‍टॉल पर 20 रुपये में खाना मिल जाएगा और 3 रुपये में पीने का पानी उपलब्‍ध होगा. शुरुआत में देशभर के 64 रेलवे स्‍टेशनों पर यह सेवा शुरू की गई है. पहले इसे 6 महीने के लिए ट्रायल के तौर पर शुरू किया जाएगा. बाद में सभी रेलवे स्टेशनों पर यह स्कीम शुरू कर दी जाएगी. नॉर्थ जोन के 10, ईस्‍ट जोन के 29, साउथ सेंट्रल जोन के 3, साउथ जोन के 9 और वेस्‍ट जोन के 13 रेलवे स्‍टेशनों पर यह सुविधा शुरू हुई है.

उत्तरी जोन में फुलेरा, अजमेर, रेवाड़ी, आबू रोड़, जयपुर, अलवर, उदयपुर और मथुरा रेलवे स्‍टेशनों पर सस्‍ते खाने के स्‍टॉल शुरू हो गए हैं. इसी तरह पूर्वी जोन में दुर्गापुर, आसनसोल, सियालदह, मधुपुर, जसीडीह, बालासोर, खड़गपुर, हिजली, न्यू कूचबिहार, न्यू अलीपुरद्वार, कटिहार, न्यू तिनसुकिया, कामाख्या, धनबाद, रक्सौल, समस्तीपुर, बेतिया, नरकटियागंज, कियूल, बक्सर, मोकामा, बख्तियारपुर, टाटानगर, झारसुगुड़ा और रांची में यह सुविधा शुरू हो गई है.

मील टाइप 1 में 20 रुपये में पूड़ी, सब्जी और अचार रहेगा.

यहां भी मिलेगी सस्‍ती थाली

साउथ सेंट्रल जोन में बिलासपुर, रायपुर और गोदियां में यात्री 20 रुपये में भोजन की थाली और 3 रुपये में पानी की बोतल इकॉनमी मील स्‍टॉल से ले सकते हैं. इसी तरह साउथ जोन के नौ स्‍टेशनों पर यह सेवा शुरू हो चुकी है. वेस्‍ट जोन के सतना, पिपरिया, नागपुर, पुणे, खंडवा राजकोट और सुरेंद्रनगर रेलवे स्‍टेशनों सहित 15 स्‍टेशनों पर सस्‍ती थाली मिल रही है.

भारतीय रेलवे ने अपने हर जोन के कुछ स्‍टेशनों पर ट्रायल के तौर पर ये स्‍टॉल लगाए हैं.

रेलवे के इकॉनमी मील में क्या-क्या मिलेगा?

मील टाइप 1 में 20 रुपये में पूड़ी, सब्जी और अचार रहेगा. मील टाइप 2 में स्नैक्स मील (350 ग्राम) मिलेगी, जिसकी कीमत 50 रुपये होगी. 50 रुपये के सेनैक्स मील में राजमा-चावल, खीचड़ी, कुल्छे-छोले, छोले-भटूरे, पावभाजी या मसाला डोसा कुछ भी ले सकते हैं. इसके अलावा यात्रियों के लिए 200 मिलीमीटर पैकेज्ड के सीलबंद ग्लास उपलब्ध रहेंगे, जिनकी कीमत 3 रुपये रखी गई है. रेलवे की इस सेवा का जनरल कोच में यात्रा करने वालों को बहुत फायदा होगा. सस्‍ते खाने के स्‍टॉल उस जगह पर लगेंगे जहां जनरल कोच का ठहराव होता है.

खुशखबरी! सोना हो गया खूब सस्ता, गहने खरीदने पर कम होगा खर्च- चेक करें लेटेस्ट रेट्स

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Gold Price Reduced : सोने के दाम में आज जोरदार गिरावट देखी जा रही है और ये सस्ते रेट पर मिल रहा है. इससे जुड़ी अच्छी बात ये है कि सोने के रिटेल दाम आज घट गए हैं जिसका फायदा सोने की खुदरा खरीदारी करने वालों को मिलेगा.

आज सोने के दाम में ये कटौती देखी जा रही है क्योंकि ग्लोबल डिमांड में कमी आई है और डॉलर के रेट में इजाफा देखा जा रहा है जिसका असर कीमती कमोडिटी के दाम पर देखा जा रहा है.

रिटेल बाजार में कितना सस्ता हुआ है सोना

आज कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी के रेट में इजाफा देखा जा रहा है और ये हल्की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं. हालांकि रिटेल बाजार में सोना खूब सस्ता हो गया है और इसके घटे रेट के बाद आप सोने के गहने, सिक्के या गोल्ड बार आदि की खरीदारी में पैसा बचा सकते हैं.

आपके शहर में सोने के दाम जानिए

आज भारत के अलग-अलग शहरों में सोना 300 रुपये से लेकर 440 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हुआ है. इसके रेट अलग-अलग शहरों में कुछ भिन्न हैं और आपके शहर में सोना किस रेट पर मिल रहा है ये आप यहां जान सकते हैं.

देश के चार महानगरों में जाने सोने के दाम क्या हैं

दिल्लीः 24 कैरेट शुद्धता वाला सोना 310 रुपये की गिरावट के साथ 60590 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

मुंबईः 24 कैरेट शुद्धता वाला सोना 310 रुपये की गिरावट के साथ 60440 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

कोलकाताः 24 कैरेट शुद्धता वाला सोना 310 रुपये की गिरावट के साथ 60440 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

चेन्नईः 24 कैरेट शुद्धता वाला सोना 440 रुपये की गिरावट के साथ 60760 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

जानें आपके शहर में कैसे हैं सोने के दाम

अहमदाबादः सोना 310 रुपये की गिरावट के साथ 60490 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

बंग्लुरूः सोना 310 रुपये की गिरावट के साथ 60440 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

चंडीगढ़ः सोना 310 रुपये की गिरावट के साथ 60590 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

हैदराबादः सोना 310 रुपये की गिरावट के साथ 60440 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

लखनऊः सोना 310 रुपये की गिरावट के साथ 60590 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

जयपुरः सोना 310 रुपये की गिरावट के साथ 60590 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

पुणेः सोना 310 रुपये की गिरावट के साथ 60440 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

पटनाः सोना 310 रुपये की गिरावट के साथ 60490 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

सूरतः सोना 310 रुपये की गिरावट के साथ 60490 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

विशाखापट्नमः सोना 310 रुपये की गिरावट के साथ 60440 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर है.

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कैसे हैं सोने के दाम

एमसीएक्स पर सोना 8 रुपये की तेजी के साथ 59560 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर कारोबार कर रहा है. इसके नीचे में दाम 59473 रुपये तक गए थे और ऊपर में ये 59587 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर गया था. सोने के ये दाम इसके अगस्त वायदा के लिए हैं.

एमसीएक्स पर चांदी के दाम

एमसीएक्स पर चांदी के दाम 74 फीसदी की तेजी के साथ 0.10 फीसदी की मजबूती के बाद 75523 रुपये प्रति किलो पर हैं. चांदी के ये रेट नीचे में 75246 रुपये और ऊपर में 75545 रुपये प्रति किलो तक गए थे. चांदी के ये रेट इसके सितंबर वायदा के लिए हैं.

विपक्ष के मोर्चे ‘India’ में क्यों शामिल नहीं हुईं मायावती,बीएसपी कितने राज्यों में बिगाड़ सकती है खेल

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18 जुलाई का दिन देश के आगामी लोकसभा चुनाव के लिए बड़ा दिन था. बेंगलुरु में 26 विपक्षी पार्टियों ने India नाम के गठबंधन का एलान किया. इसका पूरा नाम इंडियन नेशनल डिवेलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस रखा गया है.

इसके थोड़ी देर बाद बीजेपी ने दिल्ली के अशोका होटल में लोकसभा चुनाव 2024 के लिए एनडीए गठबंधन की तस्वीर की झलक पेश की. विपक्ष के पास कुल 26 पार्टियों की ताकत है तो बीजेपी की बैठक में 38 पार्टियां शामिल थीं.

एनडीए के साथ लगभग सभी छोटी क्षेत्रीय पार्टियां थीं. गणित के हिसाब से कुल 66 पार्टियों ने अपना रुख साफ किया कि आने वाले चुनाव में इंडिया के साथ चुनाव लड़ेंगी या एनडीए के साथ. लेकिन कुछ बड़ी पार्टियां दोनों ही खेमों से दूर रही हैं.

विपक्षी गठबंधन इंडिया से दूर रहने वाली पार्टी में मायावती की बीएसपी का नाम भी शामिल है. सवाल ये है कि मायावती ‘इंडिया’ से दूरी क्यों बना ली है, क्या उनका इरादा बीजेपी के साथ जाने का है, या फिर अकेले चुनाव लड़कर नुकसान पहुंचाना चाहती हैं लेकिन किसे?

बीजेपी के बचाव में मायावती, इशारा क्या?

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने इस बार विपक्ष की बैठकों से खुद को दूर रखा. मायावती ने साफ कहा है कि वो इस गठबंधन का हिस्सा नहीं होंगी इसके साथ ही लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर दिया है.

भले ही मायावती विपक्ष से दूरी बनाते हुए लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने की बात कर रही हैं लेकिन वो खुलकर केंद्र सरकार के बचाव में भी आई हैं. इससे पहले भी 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद कई मुद्दों पर उन्होंने सरकार का समर्थन किया है.

वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क ने एबीपी न्यूज को बताया कि अब तक ये साफ नहीं है कि मायावती बीजेपी के साथ जाएंगी. ये जरूर साफ है कि वो विपक्षी गठबंधन के साथ नहीं हैं. मायावती का किसी भी दल में शामिल न होना दोनों ही दलों का नुकसान कराएगा.

अश्क ने का कहना है कि दोनों ही दलों में एक बहुत बड़ी कमी ये है कि उनके साथ गठबंधन में ज्यादातर ऐसी पार्टियां हैं जिनका कोई भी जनाधार नहीं है. लोकसभा में उनके एक भी सदस्य नहीं हैं. इन गठबंधनों का साफ मतलब यही है कि छोटे- छोटे क्षेत्रों में एक -दो प्रतिशत वोट को भी अपने पाले में लाया जाए. लेकिन ये प्रयोग फेल है क्योंकि जिन पार्टियों का वोट शेयर हैं वो मोटे तौर पर दोनों ही दलों में नहीं हैं. इसका उदाहरण मायावती की पार्टी बीएसपी है.

अश्क ने कहा कि विपक्षी गठबंधन ने मायावती, जगन मोहन रेड्डी, चन्द्रबाबू नायडु को छोड़ कर पहली और सबसे बड़ी गलती की है. ये सभी ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने अपने-अपने राज्यों की शासन किया है. इनका प्रभाव विपक्षी गठबंधन के साथ नहीं जुड़ने पर पूरे विपक्ष को नुकसान पहुंचाएगा.

अश्क ने कहा कि विपक्ष को सबसे ज्यादा नुकसान यूपी में होगा. मायावती दलितों की नेता हैं. जितना प्रभाव उनका यूपी के दलितों में है. बीएसपी का वोट प्रतिशत यूपी में 13 फीसदी के करीब है. बीजेपी जब एक-एक प्रतिशत वोट बैंक वाली पार्टियों को अपने पाले में ला रही है तो 10 फीसदी ज्यादा वोटबैंक रखने वाली बीएसपी को विपक्ष दलों का गठबंधन पीछे कैसे छोड़ सकता है.

क्या बीजेपी के साथ जा सकती हैं मायावती

वरिष्ठ पत्रकार ओम सैनी ने एबीपी न्यूज को बताया कि मायावती यूपी में एनडीए के साथ सरकार चला चुकी हैं. इसलिए ये मान के चलना चाहिए कि मायावती का मन एनडीए से मिल सकता है. मायावती ये जरूर सोच सकती हैं कि जब द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाया जा सकता है तो उन्हें क्यों नहीं. मायावती के साथ आने पर बीजेपी को भी फायदा होगा क्योंकि देश में कुल दलित आबादी 18 -20 प्रतिशत है. बीजेपी इन समुदायों को साधना चाहेगी.

एक तरफ जहां कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने ये मांग की थी कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से कराया जाए. बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराए जाने का समर्थन किया था.

उन्होंने कहा कि संसद की नई इमारत का निर्माण सरकार ने कराया है, इसलिए प्रधानमंत्री को इसका उद्घाटन भी कराने का पूरा अधिकार है . मायावती ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से नए संसद भवन के उद्घाटन की मांग से भी असहमति जताई. बीएसपी सुप्रीमो मायावती विपक्ष से दूरी बनाते हुए खुलकर केंद्र सरकार के बचाव में आ गईं हैं. सैनी ने कहा कि निश्चित ही दोनोे ही अपना फायदा अभी से देख रहे हैं.

क्या मायावती के लिए ये फ़ायदे की राजनीति साबित होगी

मायावती ने तीन बार बीजेपी के समर्थन में अपनी सरकार बनाई है. साल 1995, 1997 और 2002 में बीजेपी के समर्थन में उनकी सरकार बनी, हालांकि तीनों बार उनकी सरकार को गिराने का काम भी बीजेपी ने ही किया. इस दौरान बीएसपी ने कई हिंदी भाषी राज्यों में भी आंशिक कामयाबी दर्ज की. नए सामाजिक समीकरण साधते हुए 2007 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाई जो पूरे पांच साल चली. 2007 के बाद बीएसपी का जनाधार लगातार सिकुड़ता गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें महज एक ही सीट मिली. बीएसपी ने दलित और अति पिछड़ी जातियों का जो वोट बैक कांग्रेस से छीना था, उसका भी बहुत बड़ा हिस्सा अब बीजेपी के पास है.

मायावती के हाल के कई बयानों से भी बहुत कुछ ज़ाहिर होता है. मायावती अब राजनीतिक नारों से भी पीछा छुड़ाती दिख रही हैं. कभी इन्हीं नारों के सहारे वे उत्तर भारत में दलितों और अति पिछड़े वर्गों यानी बहुजन समाज की शीर्ष नेता बनी थीं.

वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क ने एबीपी न्यूज को बताया कि बीजेपी के साथ गठबंधन करना मायावती के लिए कोई नई बात नहीं होगी. जिस तरह से वो पुराने नारे से खुद को बचा रही हैं वो इस बात की तरफ एक इशारा हो सकता है.

मायावती की सियासी ताकत, कर सकती है विपक्ष को कमजोर?

बीएसपी प्रमुख मायावती देश में दलितों की सबसे बड़ी नेता हैं, ये भी सच है कि लगातार उनका सियासी आधार सिमटता जा रहा है. मायावती ने 2019 के लोकसभा चुनाव यूपी में सपा के साथ मिलकर लड़ा था. बीएसपी ने देश भर में 351 कैंडिडेट उतारे थे, लेकिन यूपी में ही उन्हें जीत मिली थी. हालांकि, एक समय बीएसपी यूपी से बाहर हरियाणा, पंजाब और एमपी में जीत दर्ज करती रही है.

बीएसपी के दलित वोटबैंक का बड़ा हिस्सा छिटक कर कुछ बीजेपी के साथ तो कुछ दूसरी पार्टियों के साथ चला गया है. यूपी में मायावती के पास अब भी 13 फीसदी के करीब वोट हैं. दूसरे राज्यों में भी दलित समुदाय के बीच उनका सियासी आधार है. बीएसपी के पास अभी 10 लोकसभा सांसद भी हैं.

क्या 2024 की इन सीटों पर बीएसपी की वजह से होगा विपक्ष को नुकसान

वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) 80 सीटों वाली उत्तर प्रदेश लोकसभा सीट में से 10 सीटों पर जीत हासिल की थी. इन 10 सीटों में अम्बेडकर नगर, अमरोहा, बिजनौर, गाजीपुर, घोषी, जौनपुर, लालगंज, नगीना, सहारनपुर, और श्रावस्ती शामिल हैं. चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में बीएसपी का कुल वोट शेयर 12. 77 प्रतिशत है. यूपी के अलावा इससे सटे राज्यों बिहार, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़, राजस्थान, में भी बीएसपी का कुछ इलाकों में मतदाताओं पर प्रभाव है.

चुनाव आयोग की रिपोर्ट उत्तराखंड में बीएसपी का कुल वोट शेयर 4. 70 प्रतिशत है. पंजाब में 1.88 प्रतिशत है.

वहीं हरियाणा में 2019 के चुनाव से पहले इनेलो और बीएसपी के बीच गठजोड़ रहा. इनेलो को बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने के बाद ही मान्यता प्राप्त दल का दर्जा प्राप्त हुआ था. फरवरी 1998 में 12वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में हरियाणा में इनेलो को चार और बीएसपी को एक सीट मिली थी.

ओम प्रकाश अश्क ने कहा कि जहां पर भी बीएसपी का वोट शेयर है अगर चुनावों से पहले सुप्रीमो के स्तर पर कोई फरमान जारी होता है तो उनके समर्थक उसे मानेंगे. मध्य प्रदेश या बिहार में भले ही मायावती का शासन नहीं रहा है लेकिन उनका एक समर्थक तबका है, मायावती के उम्मीदवार बिहार में भी जीतते रहे हैं. इस स्थिति में एनडीए या विपक्ष को मायावती को अपने साथ लाना चाहिए. मायावती जिसके खिलाफ गईं, नुकसान जरूर पहुंचाएंगी.

Priyanka Gandhi in Gwalior: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने आज ग्वालियर में आयोजित जनाक्रोश रैली को संबोधित किया

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Madhya Pradesh Elections 2023: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने आज ग्वालियर में आयोजित जनाक्रोश रैली को संबोधित किया.

उन्होंने अपने भाषण की शुरूआच स्थानीय भाषा में की. उन्होंने कहा भारतीय राजनीति की लड़ाई सत्य की लड़ाई है.इस दौरान उन्होंने महंगाई,बेरोजगारी, घोटालों और पटवारी भर्ती में कथित धांधली का मुद्दा उठाया.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जिस उद्योगपति को सारी संपत्ति सौंप दी है, वह एक दिन में 16 सौ करोड़ रुपये कमा रहा है. वहीं हमारा किसान एक दिन में 27 रुपये भी नहीं कमा पा रहा है.

प्रियंका टू सीएम शिवराज

प्रियंका गांधी ने कहा कि मैं अपने भाषण में 10 मिनट पीएम की आलोचना कर सकती हूं. मैं 10 मिनट शिवराज जी की आलोचना कर सकती हूं. मैं 10 मिनट सिंधिया पर बोल सकती हूं. लेकिन मैं यहां आपकी समस्याओं की बात करने आई हूं. मैं महंगाई की बात करने आई हूं. उन्होंने कहा कि आज जीवन पर बोझ बन गई है, महंगाई. उन्होंने कहा कि महंगाई का बोझ महिलाएं उठा रही है. ऐसे समय में मैं लोगों की आलोचना करना उचित नहीं लगता है. नेताओं को चुनाव में जनता के मुद्दे पर बात करनी होगी. उसे बताना होगा कि महंगाई क्यों है, बेरोजगारी है क्यों हैं.

कांग्रेस की सरकार बनने पर क्या-क्या होगा

रैली के दौरान प्रियंका गांधी ने उन वादों को दोहराया जिन्हें सरकार बनने के बाद कांग्रेस पूरा करेगी.उन्होंने कहा कि हमारी जिन राज्यों में सरकारें हैं, वहां पुरानी पेंशन योजना लागू की गई है, मध्य प्रदेश में भी सरकार बनने पर पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करेंगे. महिलाओं के बैंक खाते मे 15 सौ रुपये हर महीने डाले जाएंगे.रसोई गैस का सिलेंडर 500 रुपये में दिया जाएगा, 100 यूनिट बिजली मुफ्त मिलेगी और 200 यूनिट बिजली आधे दाम पर मिलेगी. इसके अलावा किसानों के कर्ज माफी का काम पूरा किया जाएगा. इसके अलावा प्रियंका ने कमलनाथ से कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर दिव्यांगों को मिलने वाली पेंशन को बढ़ाएं.

निशाने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया

प्रियंका गांधी ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर में हुंकार भरी. ग्वालियर में कांग्रेस ने सीधे-सीधे सिंधिया परिवार को टारगेट किया है. ग्वालियर में लगे कांग्रेस के पोस्टर में लिखा है,’वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई लड़ी थी गोरों से, प्रियंका दीदी अब लड़ना है चोरों से.’

इससे पहले कमलनाथ ने कहा कि बीजेपी की सरकार ने मध्य प्रदेश को झूठ की राजधानी बना दिया है, नौजवानों को झूठ बोला, आदिवासियों को झूठ बोला, मां नर्मदा को झूठ बोला, हमारे आदिवासियों को झूठ बोला. मैं पूछना चाहता हूं कि किसको इन्होंने झूठ नहीं बोला. शिवराज सिंह झूठ की मशीन हैं, घोषणाओं की मशीन हैं, घोटालों की मशीन हैं. चुनाव में चार महीने बचे हैं ये मशीन अब डबल स्पीड से चल रही है. उन्होंने कहा कि यह चुनाव मध्य प्रदेश का भविष्य तय करेंगा.

छत्तीसगढ़ में फिर से ED की रेड, कांग्रेस नेता और IAS अफसरों के घर में चल रही कार्रवाई

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Chhattisgarh ED Raid: छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से ईडी ने दबिश दी है. राजधानी रायपुर में कांग्रेस के बड़े नेता और प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के घर ईडी की टीम पहुंची है.

इसके अलावा, रायपुर में आईएएस रानू साहू के घर भी ईडी की टीम पहुंची है. इसके बाद एक बार फिर छत्तीसगढ़ में हड़कंप मच गया है. रायपुर के अलावा कोरबा में भी ईडी की टीम पहुंची है.हालाकि ईडी किस मामले में ईडी रेड करने पहुंची है. ये अबतक इसकी जानकारी नहीं लगी है.

कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल और आईएएस रानू साहू के घर रेड
दरअसल शुक्रवार सुबह करीब 5 से 6 बजे के बीच ईडी की टीम प्राइवेट टैक्सी से अलग अलग जगहों में एक साथ पहुंची. राजधानी रायपुर में ऑफिसर्स कॉलोनी में आईएएस रानू साहू के घर ईडी के अफसर सुरक्षा बल के साथ पहुंचे है. इसके बाद रायपुर के अनुपम नगर में कांग्रेस के नेता और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल के यहां ईडी की बड़ी टीम पहुंची है. जहां बड़ी संख्या में सीआरपीएफ के जवान घर के अंदर पहरा दे रहे है. घर के मेन गेट में ताला लगा दिया गया है. लोगों को आने जान नहीं दिया जा रहा है. हालही दोपहर के वक्त कुछ ईडी के अफसर घर के बाहर सीआरपीएफ के जवानों से बातचीत करते हुए दिखा.

छत्तीसगढ़ में आयकर के साथ ईडी की कार्रवाई
इसके अलावा कोरबा जिले में नगर निगम के आयुक्त प्रभार पांडे के घर भी आज एक टीम पहुंची थी. वहां भी घर के बाहर सुरक्षा बल दिखाई दे रहे हैं. खबर लिखे जाने तक छत्तीसगढ़ के 2 जिलों में 2 बड़े अधिकारियों के घर और एक कांग्रेस के नेता के यहां ईडी की कार्रवाई चल रही है.हालाकि ये भी कहा जा रहा है कि रायपुर – कोरबा के अलग कई और जिले में भी ईडी की टीम पहुंची है. वहीं अपको ये भी बता दें कि छत्तीसगढ़ बीते मंगलवार से आयकर विभाग की भी कार्रवाई चल रही है. रायपुर में नागरिक आपूर्ति निगम के एमडी मनोज सोनी और धमतरी,महासमुंद, बिलासपुर और दुर्ग जिलों में कई राइस मिलर्स के यहां आयकर विभाग ने कार्रवाई की है.

छत्तीसगढ़ में 500 करोड़ के कोयला घोटाले से शुरू हुई है ईडी की कार्रवाई
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में चुनावी साल में सेंट्रल एजेंसियों की तरफ से लगातार कार्रवाई की जा रही है. पिछले साल अक्टूबर महीने में ईडी ने बड़ी करवाई की थी. इसके अनुसार कोयला ट्रांसप्रटिंग मामले में 500 करोड़ रुपए गड़बड़ी का खुलासा करते है. कई बड़े अफसरों का नाम सामने आया. इसमें सस्पेंड आईएएस समीर विश्नोई, मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ अफसर सौम्या चौरसिया, कोयला कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, सुनील अग्रवाल और लक्ष्मीकांत तिवारी सहित 9 अभयुक्तों को ईडी ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

ईडी ने शराब में 2 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का दावा किया
इसके बाद चुनावी साल यानी 2023 की शुरुआत होने के साथ ईडी ने शराब में 2 हजार करोड़ रुपए के घोटाले का खुलासा किया. इस मामले में ईडी ने कांग्रेस की महापौर ऐजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया. इसके साथ अफसर एपी त्रिपाठी, नितेश पुरोहित, त्रिलोक सिंह ढिल्लों को गिरफ्तार का जेल भेज दिया है. वहीं ईडी ने कतिथ शराब घोटाले में 180 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच कर दिया है. इसमें आईएएस अनिल टुटेजा सहित 14 लोगों के नाम शामिल है.हालाकि ईडी के शराब घोटाले मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है.