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कौन है द्रविड़? DMK हो या AIADMK, राजनीतिक दलों के नाम में शामिल, तमिलनाडु में इसकी गहरी हैं जड़ें…

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तमिलनाडु में राजनीति हो या वास्तुकला, बार-बार द्रविड़ शब्द का जिक्र होता है. राज्य में 3 राजनीतिक पार्टियां ऐसी हैं, जिनके नाम में द्रविड़ जुड़ा हुआ है. वहीं चाहें DMK या AIADMK. अब सवाल है कि कौन है द्रविड, तमिलनाडु में कितनी गहरी हैं इस शब्द की जड़ें और क्या है इसका मतलब?

तमिलनाडु में एक्टर विजय का मुख्यमंत्री बनना तय है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कांग्रेस के बाद 3 छोटी पार्टियां भी समर्थन देने के लिए राजी हो गई हैं.TVK को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में वह सरकार बना लेगी. इससे पहले सोशल मीडिया पर यह भी खबर फैली थी कि तमिलनाडु की दो बड़ी पार्टियांं डीएमके और AIADMK गठबंधन कर सकती हैं.हालांकि दोनों की तरफ से इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया. तमिलनाडु में 3 राजनीतिक पार्टियां ऐसी हैं, जिनके नाम में द्रविड़ जुड़ा हुआ है.

तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरलम के सीमावर्ती इलाकों में द्रविड़ों का बोलबाला है. संभवतः इसीलिए DMK ( द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम) और AIADMK (ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) नाम में द्रविड़ जुड़ा हुआ है. एक सीट जीतने वाली डीएमडीके भी इस नाम के महत्व को जानती है, इसीलिए उसने भी पार्टी के नाम में द्रविड़ को जगह दिया हुआ है.

इसी बहाने जानना रोचक होगा कि आखिर कौन हैं द्रविड़, क्या है दक्षिण भारत में इनका इतिहास? जिसका इस्तेमाल राजनीतिक दलों ने पार्टी के नाम में कर रखा है.

द्रविड़ शब्द का मतलब

द्रविड़ शब्द का प्रयोग आज कई अर्थों में होता है. यह एक भाषा-परिवार के लिए भी आता है. यह एक सांस्कृतिक पहचान भी है और दक्षिण भारत की राजनीति में यह एक बड़े सामाजिक आंदोलन का नाम भी बन गया है. सरल शब्दों में कहें, तो द्रविड़ कोई एक ही जाति या नस्ल का सीधा नाम नहीं है. इतिहासकार और भाषाविद इसे अधिकतर भाषाई और सांस्कृतिक शब्द मानते हैं. दक्षिण भारत की तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और कुछ अन्य भाषाएं द्रविड़ भाषा-परिवार में आती हैं. इसी कारण द्रविड़ शब्द दक्षिण भारत की पहचान से जुड़ा हुआ है.

कहां हैं द्रविड़ शब्द की जड़ें?

द्रविड़ शब्द बहुत पुराना है. संस्कृत ग्रंथों में द्रविड़, द्रमिल, द्राविड जैसे रूप मिलते हैं. कई विद्वान मानते हैं कि यह शब्द तमिल से भी जुड़ता है. समय के साथ इसका अर्थ फैलता गया. 19 वीं सदी में मिशनरी-भाषाविद रॉबर्ट काल्डवेल ने अपनी किताब ए कंपरेटिव ग्रामर ऑफ द द्रविनियन ओर साउथ इंडियन फॅमिली लैंग्वेजेस में दक्षिण भारतीय भाषाओं को एक अलग परिवार के रूप में समझाया है. इस पुस्तक ने द्रविड़ शब्द को आधुनिक बौद्धिक दुनिया में बहुत प्रसिद्ध किया. इसके बाद यह केवल भाषा का शब्द नहीं रहा. यह पहचान और राजनीति का शब्द भी बन गया.

क्या द्रविड़ एक नस्ल हैं?

पुराने समय में कुछ यूरोपीय विद्वानों ने मानव समाज को नस्लों में बांटने की कोशिश की थी. उसी दौर में आर्य और द्रविड़ को कभी-कभी नस्ल की तरह भी बताया गया. लेकिन आज इतिहास, मानवशास्त्र और आनुवंशिकी के अधिकतर गंभीर अध्ययन इस तरह की सीधी और कठोर नस्ली रेखा को सही नहीं मानते. आज बेहतर समझ यह है कि द्रविड़ मुख्य रूप से भाषाई और सांस्कृतिक शब्द है. दक्षिण भारत का समाज बहुत मिश्रित रहा है. यहां अनेक समुदाय, जातियां, राजवंश और परंपराएं रही हैं. इसलिए द्रविड़ को एक ही खून, एक ही नस्ल या एक ही समुदाय में बांधना ठीक नहीं माना जाता.

क्या है दक्षिण भारत का इतिहास और द्रविड़ परंपरा?

दक्षिण भारत का इतिहास बहुत पुराना है. तमिल क्षेत्र का संगम साहित्य इस इतिहास की बड़ी धरोहर है. इन रचनाओं में युद्ध, प्रेम, व्यापार, समाज और शासन के चित्र मिलते हैं. यह बताता है कि दक्षिण भारत प्राचीन काल से ही जीवंत सभ्यता का क्षेत्र था. इतिहासकार के. ए. नीलकंठ शास्त्री ने दक्षिण भारत के इतिहास को विस्तार से लिखा है. उनकी पुस्तकों से पता चलता है कि चोल, चेर और पांड्य जैसे राजवंश बहुत महत्वपूर्ण थे. इंका समुद्री व्यापार भी मजबूत था. रोम तक दक्षिण भारत के माल जाते थे. बाद में पल्लव, चोल, चालुक्य, राष्ट्रकूट, होयसळ और विजयनगर जैसे शक्तिशाली राज्य उभरे. इन राजाओं ने मंदिर, जल-व्यवस्था, व्यापार और प्रशासन को बढ़ाया. तमिल, कन्नड़, तेलुगु और मलयालम भाषाओं में साहित्य फला-फूला यानी द्रविड़ भाषाई संसार केवल भाषा नहीं था. यह एक गहरी सभ्यतागत दुनिया भी थी.

भाषा, संस्कृति और समाज, सबमें शामिल है द्रविड़

दक्षिण भारत में भाषा पहचान का बहुत बड़ा आधार रही. तमिल भाषा को विशेष सम्मान मिला. कई तमिल विद्वानों ने इसे अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली भाषा माना. इसी तरह कन्नड़, तेलुगु और मलयालम की भी अपनी समृद्ध परंपराएं हैं. मंदिर, भक्ति आंदोलन, स्थानीय देवता, लोककथाएं, शिल्पकला और संगीत ने दक्षिण भारत को विशिष्ट रूप दिया. फिर भी यह क्षेत्र कभी पूरी तरह अलग-थलग नहीं रहा. उत्तर भारत, श्रीलंका, दक्षिण-पूर्व एशिया और अरब दुनिया से इसके संबंध रहे, इसलिए द्रविड़ इतिहास को केवल अलगाव की कहानी मानना सही नहीं है. यह संपर्क, आदान-प्रदान और स्थानीय गर्व की भी कहानी है.

आधुनिक दौर में द्रविड़ विचार कैसे बना?

आधुनिक राजनीतिक अर्थ में द्रविड़ विचार औपनिवेशिक काल में अधिक स्पष्ट हुआ. ब्रिटिश शासन में नई शिक्षा, जनगणना, नौकरियाँ और प्रतिनिधित्व की राजनीति शुरू हुई. इसी समय समाज में यह सवाल उठा कि सत्ता और शिक्षा पर किसका अधिकार है. मद्रास प्रेसिडेंसी में गैर-ब्राह्मण समुदायों ने महसूस किया कि प्रशासन, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में ब्राह्मणों की पकड़ अधिक है. इसी पृष्ठभूमि में जस्टिस पार्टी का उदय हुआ. यह गैर-ब्राह्मण राजनीति का शुरुआती बड़ा मंच था. इसके बाद ई. वी. रामासामी पेरियार ने सेल्फ-रिस्पेक्ट मूवमेंट चलाया. उन्होंने जाति-व्यवस्था, ब्राह्मणवाद, अंधविश्वास और सामाजिक ऊंच-नीच का विरोध किया. उन्होंने तर्क, आत्म-सम्मान, स्त्री-अधिकार और सामाजिक न्याय पर जोर दिया. यहीं से द्रविड़ शब्द एक मजबूत सामाजिक-राजनीतिक पहचान बना.

क्या है द्रविड़ आंदोलन का मूल संदेश?

द्रविड़ आंदोलन के मुख्य मुद्दों में सामाजिक न्याय, जाति-विरोध, गैर-ब्राह्मण प्रतिनिधित्व, तर्कवाद, क्षेत्रीय गर्व, भाषा की रक्षा, हिंदी थोपने का विरोध आदि शामिल रहा है. यह आंदोलन खासकर तमिलनाडु में बहुत प्रभावशाली हुआ और आज भी किसी न किसी रूप में खूब फलफूल रहा है. यहां द्रविड़ शब्द केवल अतीत की पहचान नहीं था. यह वर्तमान के अधिकारों की मांग भी है.

DMK के नाम में द्रविड़ क्यों है?

डीएमके का पूरा नाम है द्रविड़ मुनेत्र कड़गम. तमिल में इसका अर्थ लगभग द्रविड़ प्रगति महासंघ जैसा है. इसका गठन 1949 में सी. एन. अन्नादुरै ने किया. वे पेरियार की धारा से आए थे, लेकिन बाद में उन्होंने अलग राजनीतिक रास्ता चुना. डीएमके ने द्रविड़ पहचान को जनतांत्रिक चुनावी राजनीति से जोड़ा. पार्टी के नाम में द्रविड़ रखने का अर्थ था कि यह पार्टी सामाजिक न्याय, दक्षिण भारतीय पहचान, तमिल स्वाभिमान और गैर-ब्राह्मण राजनीति की परंपरा से जुड़ी है. यह नाम जनता को बताता था कि पार्टी केवल सत्ता नहीं चाहती. वह एक सामाजिक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करती है.

एआईएडीएमके के नाम में द्रविड़ क्यों है?

AIADMK का पूरा नाम है अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम. यह पार्टी 1972 में एम. जी. रामचंद्रन ने बनाई. वे पहले डीएमके में थे. जब नई पार्टी बनी, तब उसके नाम में भी द्रविड़ रखा गया. इसका कारण साफ था. एआईएडीएमके भी उसी व्यापक द्रविड़ राजनीतिक परंपरा से अपनी वैचारिक वैधता लेना चाहती थी. वह यह दिखाना चाहती थी कि भले संगठन अलग है, पर सामाजिक न्याय, द्रविड़ पहचान और तमिल राजनीति की जड़ वही है. अन्ना शब्द जोड़कर इस पार्टी ने अन्नादुरै की विरासत से अपना संबंध भी जताया. इस तरह डीएमके और एआईएडीएमके के नाम में द्रविड़ होना संयोग नहीं है. यह तमिलनाडु की पूरी आधुनिक राजनीति का संकेत है.

क्या द्रविड़, केवल तमिल राजनीति है?

नहीं, पर तमिलनाडु में इसका सबसे गहरा रूप दिखा. द्रविड़ शब्द सैद्धांतिक रूप से पूरे दक्षिण भारत से जुड़ता है. लेकिन व्यावहारिक राजनीति में यह सबसे अधिक तमिलनाडु में सफल हुआ. वहीं यह एक स्थायी चुनावी और सामाजिक शक्ति बना. तेलुगु, कन्नड़ और मलयाली समाजों में भी क्षेत्रीय पहचान मजबूत रही. लेकिन वहां तमिलनाडु जैसा एकीकृत द्रविड़ आंदोलन उसी रूप में नहीं बना, इसलिए द्रविड़ राजनीति कहने पर सबसे पहले तमिलनाडु याद आता है.

बंगाल के नए मुख्यमंत्री होंगे शुभेंदु अधिकारी, अग्निमित्रा पॉल और निसिथ प्रमाणिक बनेंगे डिप्टी सीएम, कल लेंगे शपथ…

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज करने के बाद बीजेपी ने आज सीएम फेस का ऐलान कर दिया है. शुभेंदु अधिकारी राज्य के नए और बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री होंगे. बीजेपी विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी. अब शनिवार को नई सरकार का शपथ-ग्रहण समारोह होगा.

शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नए सीएम होंगे. अग्निमित्रा पॉल और निसिथ प्रमाणिक डिप्टी सीएम होंगे. फाइनल ऐलान हो गया है. बीजेपी विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लग गई है. अब कल शपथ लेंगे. इससे पहले आज शाम शुभेंदु राज्यपाल से मिलेंगे और सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे.आज हुई विधायक दल की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ ही सुनील बंसल, अमित मालवीय, बिप्लब देब, निशित प्रमाणिक, अग्निमित्र पाल और शंकर घोष मौजूद रहे.

अमित शाह ने कहा कि बंगाल की जनता ने पीएम मोदी पर भरोसा किया है. मैं हाथ जोड़कर राज्य की जनता को देता हूं. हिंसा के बीच राज्य की जनता ने प्रचंड जनादेश दिया है. 321 देवतुल्य कार्यकर्ताओं ने बलिदान दिया है. आज गंगा से गंगासागर तक बीजेपी की सरकारें हैं. हमें विनम्रता से जिम्मेदारी निभानी होगी.

रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह

बता दें कि रवींद्र जयंती के मौके पर शनिवार सुबह 10 बजे ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मौजूद रहेंगे. साथ ही एनडीए शासित 20 राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहेंगे. रवींद्र जयंती के मौके पर होने वाले शपथ-ग्रहण समारोह में बंगाली रंग की झलक भी देखने को मिलेगी.

कौन-कौन मंत्री बन सकता है?

बताया जा रहा है कि दिलीप घोष, शंकर घोष, स्वपन दासगुप्ता, निशित प्रमाणमिक, जितेंद्र तिवारी और शरदवत मुखर्जी मंत्री बन सकते हैं. नीलाद्रि शेखर और प्रणत टुडू भी मंत्री पद की दौड़ में हैं. इसके साथ ही रुद्रनील घोष, दुधकुमार मंडल और बंकिम घोष भी मंत्री बन सकते हैं.

बीजेपी की जीत में शुभेंदु का रोल

कई नामों पर चर्चा होने के बावजूद शुभेंदु इस दौड़ में सबसे आगे थे. चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही कहा जा रहा था कि ममता बनर्जी के गढ़ भाबानीपुर से जीत दर्ज करने वाले शुभेंदु ही राज्य के नए सीएम होंगे. राज्य में पार्टी की जीत में उनका बड़ा योगदान है. इसके अलावा उन्हें कई वर्षों तक राज्य के मंत्री के रूप में काम करने का अनुभव भी है. इन सब तथ्यों को देखते हुए पार्टी आलाकमान ने उन्हें राज्य में सत्ता की कुर्सी सौंप दी है.

अग्निमित्रा पॉल और निसिथ प्रमाणिक के बारे में

अग्निमित्रा पॉल ने इस विधानसभा चुनाव में आसनसोल दक्षिण से जीत दर्ज की है. उन्हें 1 लाख 19 हजार 582 वोट मिले. उन्होंने 40 हजार से ज्याादा वोटों से इस सीट पर जीत का परचम लहराया. वहीं, निसिथ प्रमाणिक ने माथाभांगा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की है. उन्हें 1 लाख 43 हजार 340 वोट मिले, उन्होंने 57 हजार 90 वोटों से जीत दर्ज की है.

राज्य में किसे कितनी सीटें मिलीं?
बीजेपी 207
टीएमसी 80
कांग्रेस 2
लेफ्ट 2
अन्य 2

 

हर 4 में से 1 व्यक्ति हेल्थ जानकारी के लिए कर रहा AI का इस्तेमाल, स्टडी में दावा…

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आज के दौर में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. हाल ही में आई एक स्टडी में दावा किया गया है कि हर 4 में से 1 व्यक्ति हेल्थ से जुड़ी जानकारी पाने के लिए AI का उपयोग कर रहा है. आइए इस स्टडी डिटेल में समझते हैं.

आज के समय में लोग हेल्थ से जुड़ी जानकारी पाने के लिए तेजी से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. हाल ही में सामने आई एक स्टडी में दावा किया गया है कि हर 4 में से 1 व्यक्ति स्वास्थ्य संबंधी सवालों के जवाब पाने के लिए AI टूल्स का सहारा ले रहा है. लोग बीमारी के लक्षण, डाइट, दवाइयों और मानसिक स्वास्थ्य जैसी चीजों के बारे में जानकारी लेने के लिए AI का उपयोग कर रहे हैं.

तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अब लोग इंटरनेट और AI टूल्स पर पहले से ज्यादा निर्भर होने लगे हैं. हेल्थ से जुड़ी जानकारी तुरंत और आसान तरीके से मिल जाने के कारण AI का उपयोग तेजी से बढ़ा है. हालांकि, स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में सही और गलत जानकारी के बीच अंतर समझना बेहद जरूरी होता है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि लोग हेल्थ इंफॉर्मेशन के लिए AI का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं और क्या हेल्थ के लिए सिर्फ AI पर भरोसा करना सही है या नहीं.

लोग हेल्थ जानकारी के लिए AI का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं?

Hematology Advisor में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, अब बड़ी संख्या में लोग हेल्थ से जुड़ी जानकारी के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. लोग बीमारी के लक्षण समझने, डाइट प्लान जानने और दवाइयों से जुड़ी जानकारी पाने के लिए AI टूल्स का सहारा ले रहे हैं.

AI से तुरंत जवाब मिलने और आसान भाषा में जानकारी मिलने के कारण इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है. कई लोगों को लगता है कि AI से उन्हें बिना ज्यादा समय लगाए जानकारी मिल जाती है. खासकर युवा वर्ग और इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोग हेल्थ संबंधी सवालों के लिए AI का ज्यादा उपयोग कर रहे हैं.

क्या हेल्थ के लिए सिर्फ AI पर भरोसा करना सही है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि हेल्थ से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ AI पर पूरी तरह भरोसा करना सही नहीं माना जाता. AI सामान्य जानकारी दे सकता है, लेकिन हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है.

कई बार AI गलत या अधूरी जानकारी भी दे सकता है, जिससे गलत इलाज या दवा लेने का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए किसी भी गंभीर बीमारी, टेस्ट या दवा से जुड़ा फैसला डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए.

AI से हेल्थ जानकारी लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?

AI से मिली जानकारी को केवल सामान्य जानकारी के तौर पर ही देखें. अगर कोई गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. इंटरनेट या AI के आधार पर खुद इलाज शुरू करना नुकसानदायक हो सकता है.

इसके अलावा, भरोसेमंद और सही सोर्स से ही हेल्थ जानकारी लेने की कोशिश करें. किसी भी दवा या सप्लीमेंट को लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.

कोलकाता में बीजेपी विधायक दल की बैठक… सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नए सीएम…

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सूत्रों का कहना है कि सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नए सीएम होंगे. बीजेपी विधायक दल की बैठक चल रही है, जिसमें कुछ ही देर में अधिकारिक ऐलान होगा. साथ ही डिप्टी सीएम फॉर्मूले की भी चर्चा है. सीएम फेस के ऐलान के बाद शनिवार को रवींद्र जयंती के मौके पर ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह होगा.

सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नए सीएम होंगे. हालांकि अभी फाइनल ऐलान होना बाकी है. अभी बीजेपी विधायक दल की बैठक चल रही है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ ही सुनील बंसल, अमित मालवीय, बिप्लब देब, निशित प्रमाणिक, अग्निमित्र पाल और शंकर घोष मौजूद हैं.सूत्रों का कहना है कि सुवेंदु अधिकारी ही राज्य के नए सीएम होंगे. वहीं, बीजेपी शासित अन्य राज्यों की तरह यहां भी डिप्टी सीएम वाला फॉर्मूला देखने को मिल सकता है. इस रेस में रूपा गांगुली और अग्रिमित्रा पॉल जैसे नामों की चर्चा है.

बता दें कि रवींद्र जयंती के मौके पर शनिवार सुबह 10 बजे ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मौजूद रहेंगे.

इसके साथ ही एनडीए शासित 20 राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहेंगे. समाज के विभिन्न वर्गों की प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहेंगी. विधायकों को भी आमंत्रित किया गया है. वहीं, रवींद्र जयंती पर होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में बंगाली रंग की झलक देखने को मिलेगी.

कौन-कौन मंत्री बन सकता है?

बताया जा रहा है कि दिलीप घोष, शंकर घोष, स्वपन दासगुप्ता, निशित प्रमाणमिक, जितेंद्र तिवारी और शरदवत मुखर्जी मंत्री बन सकते हैं. नीलाद्रि शेखर और प्रणत टुडू भी मंत्री पद की दौड़ में हैं. इसके साथ ही रुद्रनील घोष, दुधकुमार मंडल और बंकिम घोष भी मंत्री बन सकते हैं.

तमिलनाडु की सियासत में आखिर हर पार्टी के नाम में क्यों जुड़ा रहता ‘K’, 82 सालों से इस ‘क’ के इर्द-गिर्द घूम रही है राज्य की पूरी राजनीति…

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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों और थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) की धमाकेदार एंट्री ने दक्षिण की राजनीति में हलचल मचा दी है. विजय की इस जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि तमिलनाडु की सत्ता का रास्ता आज भी ‘K’ यानी ‘कड़गम’ शब्द से ही होकर गुजरता है. आखिर क्या वजह है कि पेरियार के दौर से लेकर आज विजय के उदय तक, हर पार्टी के नाम में यह शब्द अनिवार्य रूप से जुड़ा रहता है? पिछले 82 सालों से राज्य की पूरी सियासत इसी एक शब्द के इर्द-गिर्द क्यों सिमटी हुई है? जानते हैं पूरी कहानी.

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने देश को चौंका दिया है. दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार विजय की राजनीतिक पारी की ‘अपार सफलता’ ने यह साफ कर दिया है कि तमिलनाडु की जनता नए चेहरों को स्वीकार तो कर रही है, लेकिन अपनी जड़ों और पहचान के साथ समझौता करने को तैयार नहीं है. विजय की पार्टी के नाम में लगा ‘कड़गम’ शब्द उसी गौरवशाली द्रविड़ विरासत की अगली कड़ी है, जिसने दशकों से राज्य की किस्मत लिखी है. इसी के साथ यह भी तय हो गया कि तमिलनाडु की राजनीति में ‘K’ फैक्टर (कड़गम) महज एक नाम नहीं, बल्कि एक अभेद्य किला है. जिसे पार पाना किसी के लिए भी असभंव है. 1944 में पेरियार द्वारा ‘द्रविड़ कड़गम’ की स्थापना के बाद से आज तक, यानी पिछले 82 सालों से, चेन्नई के सचिवालय की कुर्सी उसी को मिली है जिसके पास इस नाम की विरासत रही है. विजय की हालिया जीत ने इसी ‘कड़गम’ परंपरा को और मजबूती दी है, जिसने राष्ट्रीय पार्टियों को सालों से राज्य की सीमाओं पर ही रोक कर रखा है. आइए समझते हैं कि आखिर इस एक शब्द में ऐसी क्या जादुई ताकत है जो तमिल मानुष के दिल पर राज करती है.

क्या है कड़गम शब्द का असली मतलब?

तमिल भाषा में ‘कड़गम’ का सीधा और सरल अर्थ होता है- ‘संस्था’, ‘संगठन’ या ‘परिषद’. प्राचीन समय में विद्वानों की सभा को कड़गम कहा जाता था. राजनीति में इस शब्द का इस्तेमाल एक ऐसे मंच के रूप में किया गया, जो किसी ‘पार्टी’ (जो कि एक अंग्रेजी शब्द है) से कहीं ज्यादा भावनात्मक और जड़ों से जुड़ा हुआ महसूस हो. इसे अपनाने का मकसद लोगों को यह बताना था कि यह कोई चुनावी मशीनरी नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुधार का आंदोलन है जो तमिलनाडु के आत्मसम्मान के लिए बना है.

पेरियार: वो नायक जिसने बदला इतिहास

इस पूरी कहानी की नींव 1944 में पड़ी थी. द्रविड़ आंदोलन के पुरोधा ई.वी. रामास्वामी ‘पेरियार’ ने दक्षिण की राजनीति को नई पहचान दी.  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पेरियार ने अपनी ‘जस्टिस पार्टी’ का नाम बदलकर ‘द्रविड़ कड़गम’ (DK) कर दिया था. पेरियार का मानना था कि ‘जस्टिस पार्टी’ नाम में एक तरह का संभ्रांतवाद झलकता है, जबकि ‘कड़गम’ शब्द सीधे तौर पर आम तमिल जनता की भाषा और उनकी मिट्टी से जुड़ा हुआ है. यहीं से तमिलनाडु की सियासत में ‘K’ फैक्टर की आधिकारिक एंट्री हुई थी.

तमिलनाडु की सियासत के इन दिग्गजों ने ‘कड़गम’ शब्द को अपनी पहचान बनाया है.

हिंदी विरोध और द्रविड़ गौरव की ढाल

कड़गम शब्द के इतना लोकप्रिय होने के पीछे एक बड़ा कारण ‘हिंदी विरोध आंदोलन’ भी रहा है. तमिलनाडु की राजनीति का मूल मंत्र ही अपनी भाषा और संस्कृति का संरक्षण रहा है. जब भी केंद्र की ओर से हिंदी को बढ़ावा देने की कोशिश हुई, इन कड़गम पार्टियों ने उसे तमिल संस्कृति पर हमले के रूप में पेश किया. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, क्षेत्रीय दलों को लगा कि ‘पार्टी’ या ‘दल’ जैसे शब्द सुनने में उत्तर भारतीय लगते हैं, इसलिए उन्होंने जानबूझकर ‘कड़गम’ शब्द को पकड़े रखा ताकि वे अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान बनाए रख सकें.

अन्नादुरै की बगावत और डीएमके का जन्म

पेरियार के सबसे करीबी शिष्य सी.एन. अन्नादुरै के साथ उनके वैचारिक मतभेद बढ़ गए. 1949 में अन्नादुरै ने अलग रास्ता चुनने का फैसला किया, लेकिन उन्होंने पेरियार की विचारधारा और ‘कड़गम’ शब्द को नहीं त्यागा. उन्होंने अपनी नई पार्टी का नाम रखा ‘द्रविड़ मुनेत्र कड़गम’ (DMK). अन्नादुरै यह अच्छी तरह जानते थे कि अगर उन्हें जनता के दिलों पर राज करना है, तो उन्हें ‘कड़गम’ की विरासत को साथ लेकर चलना होगा. उनकी इस रणनीति ने काम किया और 1967 में पहली बार एक शुद्ध द्रविड़ कड़गम पार्टी ने सत्ता पर कब्जा कर लिया.

एमजीआर और जयललिता का सियासी सफरनामा

डीएमके के भीतर जब सुपरस्टार एम.जी. रामचंद्रन (MGR) का कद बढ़ा, तो 1972 में उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई. उन्होंने इसका नाम ‘अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम’ (ADMK) रखा, जिसे बाद में ‘ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम’ (AIADMK) कर दिया गया. उन्होंने ‘अन्ना’ और ‘कड़गम’ दोनों शब्दों को अपने नाम में पिरोया ताकि वह खुद को अन्नादुरै का असली वारिस साबित कर सकें. जयललिता ने इसी नाम के सहारे सालों तक राज्य पर राज किया और ‘अम्मा’ के रूप में अपनी अमिट पहचान बनाई. इसी ‘K’ फैक्टर ने उन्हें राज्य की देवी बना दिया.

विजय की जीत और कड़गम का जलवा

सुपरस्टार विजय ने अपनी पार्टी का नाम ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ रखा और देखते ही देखते उन्होंने सूबे की राजनीति में अपनी जड़ें जमा लीं. उनकी इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ ‘कड़गम’ शब्द के प्रति लोगों का भरोसा है. तमिलनाडु में आम जनता का मानना है कि जो पार्टी अपने नाम में कड़गम लगाती है, वही उनकी भाषा, संस्कृति और अधिकारों के लिए दिल्ली से लड़ सकती है.  विजय ने भी इसी सेंटीमेंट को भुनाया और अपनी नई पार्टी को द्रविड़ विरासत का असली उत्तराधिकारी साबित कर दिया.

कड़गम विरासत: प्रमुख पार्टियां और उनके सूत्रधार

तमिलनाडु की सियासत के इन दिग्गजों ने ‘कड़गम’ शब्द को अपनी पहचान बनाया है. इनमें द्रविड़ कड़गम (पेरियार), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (सी.एन. अन्नादुरै), एआईएडीएमके (एम.जी. रामचंद्रन), तमिलगा वेत्री कड़गम (विजय), एमडीएमके (वाइको) और डीएमडीके (विजयकांत) प्रमुख हैं, जिन्होंने पिछले 82 सालों से राज्य की वैचारिक और राजनीतिक दिशा तय की है.

सिनेमा से सत्ता तक कड़गम का प्रभाव

तमिलनाडु में सिनेमा और राजनीति को अलग नहीं किया जा सकता. कड़गम पार्टियों ने अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए फिल्मों का भरपूर सहारा लिया. करुणानिधि के लिखे संवाद हों या एमजीआर की फ़िल्मी छवि, ‘कड़गम’ की विचारधारा हर घर तक पहुँच गई. पर्दे पर जब नायक ‘कड़गम’ के झंडे तले लड़ता था, तो असल जिंदगी में भी लोग उस नाम के दीवाने हो जाते थे. आज भी वहां यह धारणा मजबूत है कि अगर नाम में ‘कड़गम’ नहीं, तो वह पार्टी अपनी नहीं. विजय ने भी इसी फिल्मी और सियासी फार्मूले को सफलतापूर्वक दोहराया है.

केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक नहीं हुए पेश तो जस्‍ट‍िस स्‍वर्णकांता क्‍यों बोलीं – मैं वेट कर रही हूं…

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दिल्ली शराब नीति से जुड़े सीबीआई के एक मामले की द‍िल्‍ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी संख्या 16 की ओर से एक वकालतनामा दाखिल किया गया, लेकिन जवाब दाखिल करने का समय समाप्त हो चुका था. इसके बाद वकील ने जज से और समय मांगा. इसके बाद हाईकोर्ट ने वकील के जवाब को र‍िकॉर्ड में दर्ज कर ल‍िया. सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि अब तीन लोग केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक उपस्थित नहीं हो रहे हैं और हम उनकी सहमति की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

दिल्ली शराब नीति से जुड़े सीबीआई मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प स्थिति बन गई जब अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि वह अब भी तीन प्रमुख नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की ओर से सहमति का इंतज़ार कर रही है.

यह मामला सीबीआई की अपील से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच कर रही हैं. सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए. सुनवाई की शुरुआत में हाईकोर्ट को बताया गया कि आरोपी संख्या 16 की ओर से एक और वकालतनामा दाखिल किया गया है हालांकि जवाब दाखिल करने की समय-सीमा पहले ही खत्म हो चुकी थी।. वकील ने समय मांगा जिसके बाद कोर्ट ने उस जवाब को रिकॉर्ड पर ले लिया.

जस्‍टि‍स स्‍वर्णकांता शर्मा क्‍या बोलीं?
इसी दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने साफ तौर पर टिप्पणी की कि अब तक तीन लोग केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक अदालत के सामने उपस्थित नहीं हो रहे हैं।. उन्होंने कहा कि वह उनकी सहमति का इंतजार कर रही हैं ताकि उनकी ओर से प्रतिनिधित्व के लिए कुछ एमिकस क्यूरी (अदालत द्वारा नियुक्त वकील) को नियुक्त करने की अनुमति मिल सके. जस्टिस शर्मा ने कहा कि वह इस मुद्दे पर सोमवार को विचार करेंगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि सोमवार को बहस नहीं सुनी जाएगी बल्कि उस दिन एमिकस क्यूरी की नियुक्ति की जाएगी और मंगलवार से बहस शुरू होगी.

हम वैधता पर सुनवाई करेंगे: जस्‍ट‍िस शर्मा
हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि कुछ प्रतिवादियों ने सीबीआई की याचिका की वैधता को ही चुनौती दी है. इस पर जस्टिस शर्मा ने कहा क‍ि ठीक है, हम वैधता पर सुनवाई करेंगे? साथ ही अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि वैधता को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में भी याचिका दाखिल कर दी गई है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह आग्रह किया कि चूंकि यह उनकी (सीबीआई की) याचिका है, इसलिए सबसे पहले उन्हें सुना जाना चाहिए.

कुल मिलाकर, केस की अगली दिशा इस बात पर भी निर्भर करती दिख रही है कि केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की ओर से सहमति मिलती है या नहीं क्योंकि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने साफ कर दिया है कि वह अभी भी उनकी सहमति का इंतजार कर रही हैं ताकि अदालत उनकी अनुपस्थिति में भी एमिकस क्यूरी नियुक्त कर सुनवाई को आगे बढ़ा सके.

WHO ने जारी किया 12 देशों में अलर्ट, कहीं फैल न जाए कोरोना जैसी महामारी?

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दुनिया में एक और महामारी के फैलने के संकेत मिल रहे हैं. इस बार चमगादड़ नहीं चूहों ने इंसानों की जान लेने वाला वायरस फैलाया है. फिलहाल इससे 3 लोगों की मौत हो चुकी है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से 12 देशों में अलर्ट भेजा गया है. भारत के लिए चिंता की बात इसलिए भी है क्योंकि जिस क्रूज में ये वायरस फैला, उसमें 2 भारतीय क्रू मेंबर भी सवार थे.

डच क्रूज जहाज MV Hondius पर हंतावायरस (Hantavirus) फैलने की खबर ने दुनिया को चिंता में डाल दिया है. इस जहाज पर कुल 149 लोग फंसे हुए हैं. मिल रही खबरों के मुताबिक इनमें से दो भारतीय क्रू मेंबर भी शामिल हैं. जहाज को ओशियनवाइड एक्सपडिशंस कंपनी चलाती है. यह फिलहाल अफ्रीका के केप वर्डे के पास लंगर डाले खड़ा है. जहाज पर हंतावायरस फैलने से अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है. मरने वालों में एक डच दंपती और एक जर्मन यात्री शामिल हैं. एक गंभीर रूप से बीमार यात्री को इलाज के लिए साउथ अफ्रीका भेजा गया है. बाकी संक्रमितों का इलाज और निगरानी चल रही है.

अब कंपनी ने यात्रियों और क्रू की राष्ट्रीयता की सूची जारी की है, जिसमें कुल 23 के लोग शामिल हैं. पहले इतनी डिटेल जानकारी नहीं मिली थी लेकिन डिटेल्स मिलने के बाद पता चला है कि भारत के दो क्रू मेंबर भी इस सूची में हैं. हालांकि उनके नाम, पद और स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी नहीं दी गई है. WHO और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. फिलहाल जहाज पर सभी लोगों को आइसोलेशन और सतर्कता बरतने को कहा गया है. भारतीय दूतावास की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है, लेकिन दो भारतीय क्रू सदस्यों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है.

कब क्रूज में मिला हंतावायरस?

दरअसल जहाज अर्जेंटीना से अंटार्कटिका की यात्रा पर निकला था और कैनरी द्वीपों की ओर जा रहा था. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 2 मई को पहली बार हंतावायरस के लक्षण सामने आए. जांच में पता चला कि संक्रमण शायद जहाज पर चढ़ने से पहले अर्जेंटीना या चिली में हुआ होगा.

क्या है हंतावायरस?

हंतावायरस एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक वायरस है, जो मुख्य रूप से चूहों के मूत्र, लार या मल से फैलता है. इस बार हंतावायरस की एंडस वायरस स्ट्रेन पाई गई है, जो कभी-कभी इंसान से इंसान में भी फैल सकता है.

कैसे हुई क्रूज पर वायरस की पहचान?

जहाज पर पहले मौत होने के बाद भी कई दिनों तक यात्री सामान्य गतिविधियां करते रहे- खाना खाना, घूमना-फिरना सब जारी रहा. बाद में स्थिति बिगड़ने पर अलर्ट जारी किया गया. अभी जहाज के पास कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां सक्रिय हैं. जिन यात्रियों को पहले उतारा गया था, उनकी भी ट्रेसिंग की जा रही है.

डब्ल्यूएचओ की मानें तो हंता वायरस कोविड जितनी तेजी से नहीं फैलता है और लोगों को इसका ज्यादा खतरा नहीं है.

हंतावायरस के लक्षण क्या-क्या?

  1. हंतावायरस एक गंभीर वायरस है जो मुख्य रूप से चूहों के मूत्र, मल, लार या उनके संपर्क में आए क्षेत्र से फैलता है.
  2. ये लक्षण आमतौर पर फ्लू (इन्फ्लूएंजा) जैसे दिखते हैं और 3 से 5 दिन तक रह सकते हैं.
  3. तेज बुखार और ठंड लगना, बहुत ज्यादा थकान और मांसपेशियों में तेज दर्द इसके लक्षणों में शामिल हैं. खासकर शरीर के निचले हिस्सों और कंधों में दर्द होता है.
  4. सिरदर्द, चक्कर आना, मतली, उल्टी, दस्त और पेट दर्द के साथ-साथ कई बार आंखें लाल हो जाती हैं और रैशेज भी होते हैं.
  5. लक्षण शुरू होने के 4 से 10 दिन बाद अचानक स्थिति बिगड़ सकती है और फिर सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. फेफड़ों में पानी भरने लगता है और दिल ठीक से काम नहीं करता. अगर समय पर इलाज न मिले तो 30-40 फीसदी केसेज में मौत हो जाती है.

12 देशों में जारी किया गया अलर्ट

क्रूज शिप पर फैले संक्रमण से जुड़े हंता वायरस के पांच मामले सामने आए हैं, जबकि तीन अन्य मामलों पर अभी भी शक बना हुआ है. गंभीर सांस संबंधी बीमारी के कुल आठ मामले मिले हैं, जिनमें तीन लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें से पांच मामलों में एंडीज वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है. डब्‍ल्‍यूएचओ ने अब उन 12 देशों को सूचित किया है, जिनके नागरिक यात्रा के दौरान पहले ही दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित सुदूर ब्रिटिश क्षेत्र सेंट हेलेना में क्रूज जहाज ‘एमवी होंडियस’ से उतर गए थे. इन 12 देशों में कनाडा, डेनमार्क, जर्मनी, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड, सेंट किट्स एंड नेविस, सिंगापुर, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, टर्की, यूनाइटेड किंगडम और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका शामिल हैं.

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

डब्‍ल्‍यूएचओ प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने जिनेवा में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि अगर सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कदम तेजी और सही तरीके से उठाए गए, तो फिलहाल एजेंसी को उम्मीद है कि यह संक्रमण सीमित ही रहेगा. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि कई देशों में यात्रियों और उनके संपर्क में आए लोगों की जांच जारी है, इसलिए आगे और मामले सामने आ सकते हैं. भारत की परेशानी ये है कि उसके भी दो नागरिक इस वायरस के संपर्क में आए हैं, हालांकि अब तक क्रूज की ओर से उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट नहीं दी गई है. डब्‍ल्‍यूएचओ ने बताया कि अर्जेंटीना की लैब्स से करीब 2,500 हंतावायरस टेस्ट किट पांच देशों को भेजी जा रही हैं.

कब क्रूज में मिला हंतावायरस?

दरअसल जहाज अर्जेंटीना से अंटार्कटिका की यात्रा पर निकला था और कैनरी द्वीपों की ओर जा रहा था. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 2 मई को पहली बार हंतावायरस के लक्षण सामने आए. जांच में पता चला कि संक्रमण शायद जहाज पर चढ़ने से पहले अर्जेंटीना या चिली में हुआ होगा.

क्या है हंतावायरस?

हंतावायरस एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक वायरस है, जो मुख्य रूप से चूहों के मूत्र, लार या मल से फैलता है. इस बार हंतावायरस की एंडस वायरस स्ट्रेन पाई गई है, जो कभी-कभी इंसान से इंसान में भी फैल सकता है.

कैसे हुई क्रूज पर वायरस की पहचान?

जहाज पर पहले मौत होने के बाद भी कई दिनों तक यात्री सामान्य गतिविधियां करते रहे- खाना खाना, घूमना-फिरना सब जारी रहा. बाद में स्थिति बिगड़ने पर अलर्ट जारी किया गया. अभी जहाज के पास कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां सक्रिय हैं. जिन यात्रियों को पहले उतारा गया था, उनकी भी ट्रेसिंग की जा रही है.

डब्ल्यूएचओ की मानें तो हंता वायरस कोविड जितनी तेजी से नहीं फैलता है और लोगों को इसका ज्यादा खतरा नहीं है.

हंतावायरस के लक्षण क्या-क्या?

  1. हंतावायरस एक गंभीर वायरस है जो मुख्य रूप से चूहों के मूत्र, मल, लार या उनके संपर्क में आए क्षेत्र से फैलता है.
  2. ये लक्षण आमतौर पर फ्लू (इन्फ्लूएंजा) जैसे दिखते हैं और 3 से 5 दिन तक रह सकते हैं.
  3. तेज बुखार और ठंड लगना, बहुत ज्यादा थकान और मांसपेशियों में तेज दर्द इसके लक्षणों में शामिल हैं. खासकर शरीर के निचले हिस्सों और कंधों में दर्द होता है.
  4. सिरदर्द, चक्कर आना, मतली, उल्टी, दस्त और पेट दर्द के साथ-साथ कई बार आंखें लाल हो जाती हैं और रैशेज भी होते हैं.
  5. लक्षण शुरू होने के 4 से 10 दिन बाद अचानक स्थिति बिगड़ सकती है और फिर सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. फेफड़ों में पानी भरने लगता है और दिल ठीक से काम नहीं करता. अगर समय पर इलाज न मिले तो 30-40 फीसदी केसेज में मौत हो जाती है.

12 देशों में जारी किया गया अलर्ट

क्रूज शिप पर फैले संक्रमण से जुड़े हंता वायरस के पांच मामले सामने आए हैं, जबकि तीन अन्य मामलों पर अभी भी शक बना हुआ है. गंभीर सांस संबंधी बीमारी के कुल आठ मामले मिले हैं, जिनमें तीन लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें से पांच मामलों में एंडीज वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है. डब्‍ल्‍यूएचओ ने अब उन 12 देशों को सूचित किया है, जिनके नागरिक यात्रा के दौरान पहले ही दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित सुदूर ब्रिटिश क्षेत्र सेंट हेलेना में क्रूज जहाज ‘एमवी होंडियस’ से उतर गए थे. इन 12 देशों में कनाडा, डेनमार्क, जर्मनी, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड, सेंट किट्स एंड नेविस, सिंगापुर, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, टर्की, यूनाइटेड किंगडम और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका शामिल हैं.

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

डब्‍ल्‍यूएचओ प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने जिनेवा में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि अगर सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कदम तेजी और सही तरीके से उठाए गए, तो फिलहाल एजेंसी को उम्मीद है कि यह संक्रमण सीमित ही रहेगा. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि कई देशों में यात्रियों और उनके संपर्क में आए लोगों की जांच जारी है, इसलिए आगे और मामले सामने आ सकते हैं. भारत की परेशानी ये है कि उसके भी दो नागरिक इस वायरस के संपर्क में आए हैं, हालांकि अब तक क्रूज की ओर से उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट नहीं दी गई है. डब्‍ल्‍यूएचओ ने बताया कि अर्जेंटीना की लैब्स से करीब 2,500 हंतावायरस टेस्ट किट पांच देशों को भेजी जा रही हैं.

बंगाल में उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चर्चा तेज बीजेपी विधायक दल की बैठक…

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पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार के मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान शुक्रवार शाम तक हो सकता है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता पहुंच चुके हैं. वह बीजेपी विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे और नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाएंगे. साथ ही उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चर्चा तेज है, क्योंकि बीजेपी कई बड़े राज्यों में जातीय और सामाजिक संतुलन के लिए डिप्टी सीएम फॉर्मूला अपना चुकी है.

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बनने वाली पहली सरकार में मुख्यमंत्री कौन होगा इस बात का खुलासा आज यानी शुक्रवार शाम तक हो जाएगा. पर्यवेक्षक बनाए गए गृहमंत्री अमित शाह शुक्रवार को कोलकाता पहुंच चुके हैं. वह यहां बीजेपी के नवनिर्वाचित विधायकों से मिलेंगे. इसके बाद वह पश्चिम बंगाल के होने वाले मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा करेंगे. यानी आज पूरे बंगाल में सबसे हॉट टॉपिक अमित शाह बने रहेंगे. सबकी नजरें उन्हीं पर टिकी है.

क्या पश्चिम बंगाल को मिलेंगे उपमुख्यमंत्री?

अमित शाह के कोलकाता दौरे से पहले चर्चा शुरू हो गई है कि क्या पश्चिम बंगाल को भी मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री भी मिलने वाले हैं. यह चर्चा इसलिए शुरू हुई है क्योंकि लोग उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए चर्चा कर रहे हैं कि क्या पश्चिम बंगाल में भी यही फॉर्मूला लागू होने वाला है.

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में या तो बीजेपी की सरकार है या फिर वह सहयोगी दलों के साथ सरकारें चल रही है. इन बड़े राज्यों में बीजेपी ने या तो अपनी ही पार्टी के उपमुख्यमंत्री बनाए हैं, या अपने सहयोगी दलों को यह पद दिया है. बीजेपी ने राज्यों में जातीय संतुलन को बनाए रखने के लिए राज्यों में उपमुख्यमंत्री पद देने की शुरुआत की है.

  1. देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं तो केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश बाठक डिप्टी सीएम हैं.
  2. गुजरात में भले ही बीजेपी लंबे समय से सत्ता में है, लेकिन यहां भी हर्ष संघवी बतौर उपमुख्यमंत्री सेवा दे रहे हैं.
  3. राजस्थान में भजनलाल शर्मा सीएम हैं तो दीया कुमारी और प्रेम चंद बैरवा उपमुख्यमंत्री हैं.
  4. मध्य प्रदेश में मोहन यादव सीएम हैं तो जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल डिप्टी सीएम का जिम्मा संभाल रहे हैं.
  5. महाराष्ट्र में बीजेपी की तरफ से देवेंद्र फडणवीस सीएम हैं तो सहयोगी दलों की तरफ से सुनेत्रा पवार और एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री के पद पर जमे हुए हैं.
  6. बिहार में भी बीजेपी के सम्राट चौधरी सीएम हैं तो जेडीयू के विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव उपमुख्यमंत्री हैं.
  7. छत्तीसगढ़ में विजय शर्मा और अरुण साव डिप्टी सीएम हैं, वहीं मुख्यमंत्री का जिम्मा विष्णु देव साय संभाल रहे हैं.

चर्चा है कि पश्चिम बंगाल भी राजनीतिक रूप से इन राज्यों की तरह ही बड़ा केंद्र है. ऐसे में क्या अमित शाह पश्चिम बंगाल में भी उपमुख्यंत्री बना सकते हैं. दावा किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में भी मुख्य रूप से दो क्लास के वोटर हैं. ऐसे में एक संभ्रात (भद्रलोक) और एक आम वर्ग को अड्रेस करने के लिए मुख्यमंत्री और उपमुख्मंत्री का दांव खेला जा सकता है. इसके अलावा मतुआ और चंद्रवंशी समाज ने शुरुआत से ही बीजेपी को सपोर्ट किया है, इसलिए हो सकता है इस समाज से भी किसी बड़े नेता को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है.

शाम 4 बजे बीजेपी के विधायक दल की बैठक

बीजेपी सूत्रों का कहना है कि गृहमंत्री अमित शाह शुक्रवारको कोलकाता पहुंच चुके हैं. यहां वह बीजेपी के नवनिर्वाचित विधायकों से मिलेंगे. वह यहां पहुंचने के बाद बीजेपी के बड़े नेताओं से बंद कमरे में मीटिंग कर बंगाल के अगले सीएम के साथ मंत्रिमंडल सदस्यों के नाम भी फाइनल करेंगे. यह बैठक कोलकाता के न्यूटाउन स्थित ‘विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर’ में शाम 4 बजे आयोजित होने की बात कही जा रही है. इसी बैठक में पश्चिम बंगाल के नये मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा हो जाएगी.

बंगाल में डिप्टी सीएम की रेस में ये नाम

पश्चिम बंगाल में दो डिप्टी सीएम बनाए जाने का अनुमान लगाया जा रहा है. बीजेपी के अंदर डिप्टी सीएम के लिए जिन नामों की चर्चा है उनमें अग्निमित्रा पॉल, सुकांतो मजूमदार प्रमुख हैं. इसके अलावा सिलीगुड़ी और नॉर्थ कोलकाता से भी किसी बड़े चेहरे को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है. यह भी चर्चा है कि शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाए जाने की स्थिति में किसी खांटी संघी नेता को भी उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है.

शुभेंदु अधिकारी का सीएम बनना तय

सूत्र बताते हैं कि शुभेंदु अधिकारी को ही पश्चिम बंगाल का अगला मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. टीएमसी की सरकारों में शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी के बाद नंबर दो कि हैसियत से काम कर चुके हैं. बीजेपी में आने के बाद वह नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं. इसके अलावा शुभेंदु ने 2021 में नंदीग्राम फिर 2026 में भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराया है. पिछले पांच-छह सालों में शुभेंदु अधिकारी वैसा चेहरा हैं जिन्होंने खुलकर ममता बनर्जी और टीएमसी पर हमले किए हैं.

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बताया है कि मुख्यमंत्री का नाम तय होने के बाद शनिवार, 9 मई को बीजेपी की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा. बीजेपी की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह ऐतिहासिक कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा. रवींद्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती को बीजेपी ने नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए चुना है. शपथ ग्रहण समारोह सुबह 11 बजे से शुरू होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत तमाम बीजेपी शाषित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे.

थलापति विजय के 107 विधायकों ने इस्तीफा दिया तो? क्या तमिलनाडु में लगेगा राष्ट्रपति शासन…

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तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव नतीजों ने एक ऐसी उलझन पैदा कर दी है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कज़गम’ (TVK) 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है. बहुमत के लिए जरूरी 118 के आंकड़े से टीवीके महज कुछ कदम दूर है. कांग्रेस के 5 विधायकों के साथ विजय 113 के आंकड़े तक पहुंच गए हैं. इसके बावजूद राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर. लेकर ने अभी तक उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया है. इस बीच डीएमके और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन की चर्चाओं ने आग में घी का काम किया है. टीवीके के 107 विधायकों के सामूहिक इस्तीफे की धमकी ने अब राज्य को संवैधानिक संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है. चर्चा है कि अगर स्थिर सरकार की संभावना नहीं बनती तो राज्यपाल तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं.

तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और एआईएडीएमके पारंपरिक दुश्मन रहे हैं. चुनाव परिणामों के बाद यह चर्चा तेज है कि टीवीके को सत्ता से बाहर रखने के लिए ये दोनों दल हाथ मिला सकते हैं. डीएमके के पास 59 और एआईएडीएमके के पास 47 सीटें हैं. अगर इनके गठबंधन सहयोगियों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 126 तक पहुंचती है.

डीएमके नेता एम.के. स्टालिन ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिए हैं कि वे विजय को मौका देने के पक्ष में हैं. दूसरी तरफ, एआईएडीएमके के 25 विधायकों द्वारा टीवीके को समर्थन देने की मांग की खबरें भी आ रही हैं. ऐसे में इन दो धुर विरोधियों का एक साथ आना फिलहाल नामुमकिन सा लगता है.

टीवीके के खेमे में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया जा रहा है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर उनकी अनदेखी कर किसी और गठबंधन को मौका दिया गया, तो सभी 107 विधायक इस्तीफा दे सकते हैं. विजय खुद एक सीट छोड़ चुके हैं, जिससे विधानसभा की प्रभावी संख्या 233 रह गई है. यदि 107 विधायक एक साथ इस्तीफा देते हैं, तो सदन की ताकत आधी रह जाएगी. यह कदम राज्यपाल पर दबाव बनाने की एक रणनीति भी हो सकती है.

संविधान के जानकारों का मानना है कि यदि विधानसभा में कोई भी दल स्थिर सरकार देने की स्थिति में नहीं होता, तो राज्यपाल अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं. 107 विधायकों के इस्तीफे की सूरत में सदन में कोरम की समस्या पैदा हो जाएगी. ऐसी स्थिति में कामकाज ठप हो सकता है.

राज्यपाल के पास यह अधिकार है कि वे विधानसभा को भंग कर नए सिरे से चुनाव कराने की रिपोर्ट केंद्र को भेजें. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के एस.आर. बोम्मई केस के फैसले के अनुसार, बहुमत का फैसला राजभवन में नहीं बल्कि विधानसभा के फ्लोर पर होना चाहिए.

मदुरै कांग्रेस ने राज्यपाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ के लिए नहीं बुलाया गया, तो वे राजभवन का घेराव करेंगे. उनका आरोप है कि राज्यपाल केंद्र के इशारे पर काम कर रहे हैं. इधर, फिल्मी दुनिया से कमल हासन, खुशबू और प्रकाश राज जैसे सितारों ने भी टीवीके के प्रति अपना समर्थन जताया है. कनिमोझी ने भी राज्यपाल के पद की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए इसे अनावश्यक बताया है.

तमिलनाडु इस समय एक चौराहे पर खड़ा है. 8 मई, 2026 की स्थिति के अनुसार, विजय ने राज्यपाल को समर्थन का पत्र सौंप दिया है. अब गेंद राज्यपाल के पाले में है. यदि वे विजय को मौका देते हैं, तो उन्हें सदन में 117 का आंकड़ा जुटाना होगा. अगर इस्तीफे की धमकी हकीकत बनती है, तो राज्य को फिर से चुनाव की अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ सकता है.

पश्चिम बंगाल में बीजेपी के ये नेता बन सकते हैं CM और मंत्री, अमित शाह की बैठक से पहले जानें मंत्रियों की लिस्ट…

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार सुबह कोलकाता क्षेत्र में जहां भाजपा विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे. इस बैठक में पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता दल के नेताओं का चुनाव किया जाएगा और राज्य में बनने वाली पहली भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वालों पर चर्चा होगी. सुवेंदु अधिकारी समेत कई नेताओं ने एयरपोर्ट पर किया शाह का स्वागत. पासपोर्ट के अनुसार शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे हैं. वहीं अग्निमित्रा पॉल, दिलीप घोष, शंकर घोष, रितीश तिवारी, अशोक डिंडा और तापस रॉय समेत कई नेताओं के मंत्री बनाए जाने की चर्चा तेज है. बैठक न्यू टाउन स्थित बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में होगी.

कोलकाता: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार सुबह कोलकाता पहुंचे, जहां वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे. इस बैठक में पश्चिम बंगाल में पार्टी के नेता का चुनाव किया जाएगा और राज्य में भाजपा की पहली सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों पर चर्चा होगी. शुभेंदु अधिकारी समेत अन्य भाजपा नेताओं ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शाह का स्वागत किया. हवाई अड्डे से वह न्यू टाउन स्थित एक होटल गए. दोपहर में शाह विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में भाजपा विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे. अमित शाह के कोलकाता पहुंचते ही चर्चा शुरू हो गई है कि किस नेता को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्री बनाया जाएगा. न्यूज 18 इंडिया को सूत्रों के हवाले से बीजेपी के नवनिर्वाचित विधायकों में कुछ ऐसे नाम पता चले हैं जो मुख्यमंत्री और मंत्री बनाए जा सकते हैं.

पश्चिम बंगाल में इन नामों के सीएम और मंत्री बनने की चर्चा तेज

  1. शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं
  2. अग्निमित्रा पॉल:आसनसोल दक्षिण
  3. दिल्ली घोष: खड़गपुर सदर
  4. शंकर घोष : सिलीगुड़ी
  5. रितेश तिवारी: काशीपुर बेलगाछिया
  6. अशोक डिंडा : मोइना
  7. अजीत कुमार जाना : दातोन
  8. सौरभ सिकधर: दमदम नार्थ
  9. शरद दत्त मुखोपाध्याय: विधाननगर
  10. रत्ना देबनाथ : पानीहाटी
  11. राजेश महतो: बिनपुर
  12. स्वप्नदास गुप्ता : राशबेहारी
  13. उमेश राय : हावड़ा उत्तर
  14. तापस रॉय : मानिकतला

शनिवार को वह ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे. इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे. हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन का अंत कर दिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा झटका दिया. राज्यपाल आर एन रवि ने गुरुवार को विधानसभा भंग कर दी, जिससे नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया.

अमित शाह ने दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पूजा की

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को कोलकाता पहुंचे और सबसे पहले दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पूजा-अर्चना की. एयरपोर्ट पर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, शुभेंदु अधिकारी, दिलीप घोष और सुकांत मजूमदार समेत कई नेताओं ने उनका स्वागत किया. अमित शाह बीजेपी विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे, जहां विधायक दल के नेता का चुनाव किया जाएगा. बैठक बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में होगी और इसमें बीजेपी के 207 विजयी विधायक शामिल होंगे. ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी केंद्रीय सह-पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहेंगे. शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नई बीजेपी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे.