बांग्लादेश की 13वीं संसदीय चुनाव में BNP की जीत
बांग्लादेश में हाल ही में हुए 13वें संसदीय चुनाव में तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने शानदार जीत हासिल की है। इस चुनाव ने न केवल देश के आंतरिक मुद्दों को उजागर किया, बल्कि भारतीय राजनीतिक रणनीतियों के प्रभाव को भी दर्शाया।
BNP ने 212 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत प्राप्त किया, जबकि जमात-ए-इस्लामी गठबंधन को 77 सीटें मिलीं। यह चुनाव 2024 के छात्र आंदोलन के बाद का पहला बड़ा चुनाव था, जिसमें BNP ने युवाओं को ध्यान में रखते हुए प्रभावी प्रचार किया।
भारतीय राजनीतिक अभियानों का प्रभाव
BNP की चुनावी रणनीति में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के सफल अभियानों की झलक साफ नजर आई। पार्टी ने भारतीय सोशल मीडिया ट्रेंड्स और जमीनी गतिविधियों का गहन अध्ययन कर अपनी रणनीति बनाई, जिससे तारिक रहमान को बाहरी और अनुभवहीन नेता के आरोपों से उबरने में मदद मिली।
चाय पर चर्चा से चायेर अड्डा तक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के चाय पर चर्चा अभियान की तर्ज पर BNP ने बांग्लादेश में चायेर अड्डा का आयोजन किया। यह पहल तारिक रहमान की बेटी जैमा रहमान द्वारा शुरू की गई थी। इस कार्यक्रम में युवाओं के साथ अनौपचारिक चाय पर बातचीत की गई, जहां मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। भारत में यह अभियान मणिशंकर अय्यर की चायवाला टिप्पणी के जवाब में शुरू हुआ था और बांग्लादेश में भी इसने तारिक रहमान को युवा वोटरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सहज नेता की छवि
BNP ने तारिक रहमान को एक सहज और अनौपचारिक नेता के रूप में प्रस्तुत किया। पार्टी ने ‘मुझे सर नहीं, भाई कहो’ का नारा अपनाया, जो भारत में राहुल गांधी द्वारा छात्रों के साथ बातचीत के दौरान अपनाए गए दृष्टिकोण से मिलता-जुलता था। इसका उद्देश्य 4 करोड़ से अधिक पहली बार वोट देने वाले युवाओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाना था।
युवाओं को लुभाने की रणनीति
युवा वोटरों को आकर्षित करने के लिए BNP ने रील-मेकिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। उभरते YouTubers और कंटेंट क्रिएटर्स को पार्टी के विचारों पर रील बनाने के लिए आमंत्रित किया गया। विजेताओं को पुरस्कार दिए गए और उनकी रीलों को BNP के आधिकारिक हैंडल से साझा किया गया। यह रणनीति सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और युवाओं में पार्टी की पहुंच बढ़ाई।
तारिक रहमान की चुनौतियाँ
तारिक रहमान के सामने चुनौतियाँ खत्म नहीं हुई हैं। जमात-ए-इस्लामी के मजबूत प्रदर्शन (77 सीटें) और चुनाव में धांधली के आरोपों ने स्थिति को जटिल बना दिया है। इन सबके बीच रहमान के पोस्टरों पर टैगलाइन ‘आई हैव अ प्लान’ छपी थी, जो बराक ओबामा के ‘यस, वी कैन’ अभियान की याद दिलाती है। यह चुनाव दर्शाता है कि आधुनिक राजनीतिक रणनीतियाँ अब भौगोलिक सीमाओं से परे फैल रही हैं।



