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पूर्व सीएम भूपेश बघेल का धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर तंज, कहा-साधु का वेश धरकर कह रहे लग रहा है डर….

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में पांच दिन के पंजाब दौरे पर रवाना हो गए।

रायपुर से रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि पंजाब में चुनावी तैयारियां तेज हो चुकी हैं और विभिन्न समितियों की घोषणा के बाद अब संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा, “मैं पंजाब जा रहा हूं। कमेटियों की घोषणा हो चुकी है और अब चुनाव की तैयारियां करनी हैं।”

पंजाब रवाना होने से पहले छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने प्रदेश के कई समसामयिक मुद्दों पर भी भाजपा सरकार को घेरा। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर भाजपा नेता विनय कटियार के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री के बारे में सबसे पहले उन्होंने ही सवाल उठाए थे। बघेल ने कहा कि अब धीरेंद्र शास्त्री साधु का वेश धारण कर यह कह रहे हैं कि उन्हें डर लग रहा है जबकि सच्चा साधु किसी से नहीं डरता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन्होंने बड़े-बड़े लोगों को नहीं छोड़ा, वे किसी और को क्यों छोड़ेंगे।

रायपुर शहर के कई इलाकों में बारिश के बाद हुए जलभराव को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इसकी पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। सड़कों को ऊंचा करने और जल निकासी की बेहतर व्यवस्था करने की आवश्यकता है। “ट्रिपल इंजन सरकार” होने के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास के इलाके तक जलमग्न हैं, जो राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।

नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर भी भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में लगातार झूठ बोल रही है और जनता को गुमराह कर रही है। उनका दावा था कि अंकित आनंद द्वारा जारी एक पत्र में कलेक्टर को नकटी गांव से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे ताकि संबंधित जमीन विधायकों को आवंटित की जा सके। विधानसभा में भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने भी इस मुद्दे को उठाया था और मंत्री के जवाब के दौरान संसदीय मर्यादा का उल्लंघन किया गया।

भूपेश बघेल ने कहा कि नकटी गांव में हुई कार्रवाई को प्रदेश में किसी ने स्वीकार नहीं किया है और यह पूरी तरह गलत फैसला था। भाजपा सरकार गंभीर संकट में है और जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

भारत में कमजोर मानसून के बाद भी खाद्य उत्पादों की कीमतें स्थिर…

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भारत में कमजोर मानसून के बाद भी खाद्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर बनी हुई है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

साप्ताहिक खुदरा आंकड़ों के मुताबिक, सब्जियों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत और अंडों की कीमतों में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि अनाज की कीमतों में 0.5 प्रतिशत और तेल व फैट की कीमतों में 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

तेल और फैट की कीमतों में 11 प्रतिशत, अंडों में 6 प्रतिशत, सब्जियों में 3 प्रतिशत, दूध में 3 प्रतिशत, मसालों में 3 प्रतिशत, अनाज में 2 प्रतिशत और दालों में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे मुख्य खाद्य-उत्पादक राज्यों में मानसून की लगातार कमी से आने वाले हफ्तों में खाद्य आपूर्ति पर खतरा मंडरा सकता है और कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 3 जुलाई तक कुल बारिश लंबे समय के औसत से 31 प्रतिशत कम रही।

जून के महीने में बारिश लंबे समय के औसत से 40 प्रतिशत कम रही, जिससे यह पिछले दशक में बारिश के लिहाज से सबसे खराब जून का महीना बन गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बुवाई का काम कम हो गया है, क्योंकि मानसून कमजोर बना हुआ है, जिससे जलाशयों में पानी का स्तर बहुत कम हो गया है।

पूरे देश में जलाशयों का जलस्तर उनकी क्षमता का सिर्फ 26 प्रतिशत है और पिछले साल इसी समय की तुलना में 39 प्रतिशत कम है।

मध्य भारत में सबसे ज्यादा क्षमता (32 प्रतिशत) है, इसके बाद उत्तर भारत (29 प्रतिशत) और पश्चिम भारत (28 प्रतिशत) का स्थान है। दक्षिण भारत (20 प्रतिशत) और पूर्वी भारत (19 प्रतिशत) में जलस्तर काफी कम है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग को उम्मीद है कि जुलाई 2026 में बारिश सामान्य से कम होगी, जिससे मानसून और खरीफ की बुवाई के मौसम को लेकर चिंता बनी रहेगी।

इंडोनेशिया दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी”  मोदी की इंडोनेशिया की तीसरी यात्रा”

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” सबसे बड़े हिंदू मंदिर में पूजा के बाद ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस डील पर लग सकती है मुहर”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को इंडोनेशिया के लिए रवाना हो रहे हैं। वे राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो से मुलाकात करेंगे और इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसर, प्रम्बानन मंदिर भी जाएंगे।

इस यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय बैठक में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के लिए लगभग ₹2,500 करोड़ के सौदे को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। इसके अलावा, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों नेताओं के बीच कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की भी संभावना है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है, और इस यात्रा का उद्देश्य उनकी रणनीतिक साझेदारी को नई गति देना है।

मोदी की इंडोनेशिया की तीसरी यात्रा

पीएम मोदी पहले भी दो बार इंडोनेशिया जा चुके हैं। उनकी पहली मुलाकात मई 2018 में हुई थी, जिसके दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक बढ़ाया था। रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा कनेक्टिविटी सहित 15 से अधिक क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। उस यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने एक साझा समुद्री दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया था। इसके बाद, सितंबर 2023 में, मोदी जकार्ता में आयोजित होने वाले 20वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और 18वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए इंडोनेशिया गए थे।

इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा देश बन सकता है

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम के लिए लगभग ₹2,500 करोड़ का संभावित सौदा इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा माना जा रहा है। यदि यह सौदा अंतिम रूप ले लेता है, तो इंडोनेशिया फिलीपींस के बाद ब्रह्मोस मिसाइलें खरीदने वाला दूसरा विदेशी ग्राहक बन सकता है। यह सौदा भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा देगा और इंडोनेशिया की तटीय और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को भी मजबूत करेगा। ब्रह्मोस मिसाइल को भारत के DRDO और रूस के NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया के संयुक्त उद्यम, ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित किया गया था। यह दुनिया की सबसे तेज़ ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है।

इंडोनेशिया का सबांग बंदरगाह भारत के लिए महत्वपूर्ण है

इंडोनेशिया का सबांग बंदरगाह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बहुत करीब स्थित है। मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के प्रवेश-द्वार के पास होने के कारण इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है; दुनिया का एक बड़ा समुद्री व्यापार इसी रास्ते से होता है। 2018 में जकार्ता की अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने सबांग बंदरगाह और उसके आस-पास के इलाकों में समुद्री सहयोग बढ़ाने के लिए इंडोनेशिया के साथ सहमति जताई थी। इस पहल का मकसद बंदरगाह का विकास, समुद्री कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स में सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना था। सबांग बंदरगाह में भारतीय नौसेना के जहाजों को ईंधन, मरम्मत और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी मदद देने की क्षमता है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री पहुंच और निगरानी क्षमता मजबूत हो सकती है।

भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित इंडोनेशिया का सबसे बड़ा मंदिर

मध्य जावा प्रांत में, राजधानी जकार्ता से लगभग 400 किलोमीटर दूर स्थित प्रम्बानन मंदिर परिसर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है। इसे भारत और इंडोनेशिया के बीच साझा सांस्कृतिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। प्रम्बानन परिसर में कुल 240 मंदिर हैं। इनमें सबसे ऊंचा और सबसे प्रसिद्ध मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिसकी ऊंचाई लगभग 47 मीटर (154 फीट) है। दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश होने के बावजूद, इंडोनेशिया की सांस्कृतिक विरासत में हिंदू-बौद्ध संस्कृति की मजबूत छाप है। प्रम्बानन मंदिर को उसी साझा विरासत का एक प्रमुख प्रतीक माना जाता है।

एसआईआर में गड़बड़ी को लेकर एनडीए नेताओं ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र, जांच की मांग….

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केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, एसडी कुमारस्वामी समेत कई एनडीए नेताओं ने कर्नाटक में एसआईआर की गड़बड़ी को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) वी. अनबुकुमार को पत्र लिखा है।

एनडीए नेताओं की ओर से पत्र में लिखा गया कि कर्नाटक में मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) के दौरान हो रही भारी अनियमितताओं पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करने के लिए यह पत्र लिखा जा रहा है। एसआईआर को संचालित करने वाले अधिकारी तय प्रक्रिया का बिल्कुल भी पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे लोकतंत्र की मूल भावना को नुकसान पहुंच रहा है।

पत्र में लिखा गया, “एसआईआर दिशानिर्देशों के तहत, बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) को डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (डीईओ/डीसी) के निर्देशों पर घर-घर जाकर अनिवार्य रूप से सत्यापन करना होता है और हर घर के सदस्यों की पहचान की व्यक्तिगत रूप से पुष्टि करनी होती है। हालांकि, जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं किया जा रहा है।” पत्र में सबूत का दावा किया गया है। पत्र में लिखा गया कि राज्य के कई अन्य हिस्सों से भी ऐसी ही कई शिकायतें मिल रही हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र में लिखा गया, “कम्युनिटी हॉल, मस्जिदों और बीएलओ के घरों में बैठकर एन्यूमरेशन फॉर्म भरे जा रहे हैं। इसी मकसद से वॉट्सएप ग्रुप भी बनाए गए हैं और लोगों को एसआईआर प्रक्रिया के लिए इन कम्युनिटी हॉल और मस्जिदों में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ऐसा करना तय एसआईआर के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर गंभीर सवाल खड़े करता है।”

पत्र में लिखा गया कि एसआईआर मतदाता सूची की विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए किया जाता है लेकिन जिस तरह से बीएलओ यह प्रक्रिया चला रहे हैं, उससे इस संशोधन का मूल मकसद ही खत्म हो रहा है। इससे एक ऐसा इलेक्टोरल रोल बनेगा जो टिकाऊ नहीं रहेगा और जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के तय तरीकों से कोई भी छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।

नेताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से पत्र में मांग की कि इन गड़बड़ियों की गंभीरता को देखते हुए हम एनडीए अलायंस पार्टनर्स आपसे गुजारिश करते हैं कि तुरंत जांच का आदेश दें और सभी गिनती के फॉर्म का घर-घर जाकर जरूरी वेरिफिकेशन करके दोबारा वेरिफिकेशन करने का निर्देश दें। इन गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले सभी अधिकारियों और राजनीतिक लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।

cg” स्वस्थ छत्तीसगढ़ करेगा विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण- मुख्यमंत्री श्री साय…”

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103 करोड़ रुपये से अधिक के स्वास्थ्य अधोसंरचना कार्यों का भूमिपूजन”

200 सीटर छात्रावास, कैंसर भवन विस्तार और आवासीय परिसर का होगा निर्माण”

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज अटल बिहारी वाजपेयी सभागृह, चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर में 103 करोड़ रुपये से अधिक लागत के स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों का भूमिपूजन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ ही विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेगा। प्रदेश में लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। यह परियोजनाएं प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई प्रदान करेंगी तथा मरीजों, विद्यार्थियों और चिकित्सकों सभी को इसका लाभ मिलेगा।

इस अवसर पर छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक छात्रावास, कैंसर भवन के विस्तार तथा चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के आवासीय परिसर सहित विभिन्न निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी गई।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पिछली बार मेडिकल कॉलेज आने पर विद्यार्थियों ने छात्रावास निर्माण की मांग रखी थी, जिसे सरकार ने गंभीरता से लेते हुए आज उसके निर्माण की शुरुआत कर दी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में जनता से किए गए अधिकांश वादों को पूरा किया है और ‘मोदी की गारंटी’ को धरातल पर उतारा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और विकसित भारत के संकल्प की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए स्वस्थ छत्तीसगढ़ आवश्यक है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के नेतृत्व में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग लगातार उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने विभाग के अधिकारियों एवं पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार का छत्तीसगढ़ को निरंतर सहयोग मिल रहा है। उन्होंने बताया कि डीएम कार्डियक कोर्स की स्वीकृति से लेकर अन्य स्वास्थ्य परियोजनाओं तक केंद्र सरकार ने हर मांग पर सकारात्मक सहयोग दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में छत्तीसगढ़ को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद) की भी सौगात मिलेगी, जिससे राज्य की समृद्ध औषधीय वनस्पतियों एवं आयुर्वेद को नई पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब  नक्सलवाद से मुक्त होकर तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने दूरस्थ क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर लाखों लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया है। उन्होंने मेडिकल विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सरगुजा से लेकर बस्तर तक प्रदेश के हर क्षेत्र में सेवाएं देने का संकल्प लें और केवल शहरों तक सीमित रहने की मानसिकता न रखें।
उन्होंने कहा कि सरकार चिकित्सा शिक्षा के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा विद्यार्थियों को बेहतर अधोसंरचना, छात्रावास एवं आधुनिक शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि लगभग 104 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले छात्रावास, कैंसर संस्थान विस्तार एवं अन्य अधोसंरचना परियोजनाएं चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग एवं निर्माण एजेंसियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा से पहले एवं उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हो रहा है। राज्य में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति, नर्सिंग कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि, फिजियोथेरेपी कॉलेजों का विस्तार तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 10 एकड़ क्षेत्र में 100 बिस्तरों वाले योग एवं नेचुरोपैथी अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर का निर्माण भी प्रगति पर है।

स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार ने पूर्व में लंबित कोरबा, कांकेर एवं महासमुंद मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्य प्रारंभ कराए हैं। बिलासपुर स्थित सिम्स का भी व्यापक उन्नयन किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि डीएम कार्डियक कोर्स प्रारंभ हो चुका है तथा जगदलपुर में जल्द ही छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे बड़ा हार्ट सेंटर स्थापित किया जाएगा।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रथम परियोजना के तहत 200 सीटर आधुनिक छात्र-छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। इसमें विद्यार्थियों के लिए आधुनिक आवासीय सुविधाओं के साथ चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के लिए भी आवास उपलब्ध कराए जाएंगे।

दूसरी परियोजना के तहत कैंसर भवन का द्वितीय से छठे तल तक विस्तार किया जाएगा। लगभग 11 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में बनने वाले इस भवन में आधुनिक लैब, 64-64 बिस्तरों वाले वार्ड, सिंगल रूम, आईसीयू तथा अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर विकसित किए जाएंगे, जिससे कैंसर रोगियों को उच्च स्तरीय उपचार सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

तीसरी परियोजना के अंतर्गत छात्राओं के लिए आधुनिक छात्रावास का विस्तार किया जाएगा, जिसमें अतिरिक्त कमरे, डॉरमेट्री, लाइब्रेरी, रिक्रिएशन हॉल तथा सभी आवश्यक आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि छात्राओं को सुरक्षित एवं बेहतर आवासीय वातावरण उपलब्ध हो सके।

इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, सीजीएमएससी के चेयरमैन श्री दीपक म्हस्के, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री रितेश अग्रवाल, पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी, अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर सहित जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, मेडिकल विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

” मॉनसूनी बारिश का कहर” ” महाराष्ट्र में मूसलधार बारिश से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भूस्खलन…”

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महाराष्ट्र में हाल के दिनों से हो रही तेज बारिश ने गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर दी हैं। सोमवार सुबह, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर एक बड़े भूस्खलन ने यातायात को बाधित कर दिया।

इस प्राकृतिक आपदा के कारण एक्सप्रेसवे के ‘मिसिंग लिंक’ सेक्शन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मलबे से भर गया है, जिससे पुणे से मुंबई जाने वाली लेन पर गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर ट्रैफिक रूट में बदलाव किया है और यात्रियों के लिए एक तात्कालिक ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है।

भूस्खलन की जानकारी

अधिकारियों के अनुसार, यह भूस्खलन सोमवार सुबह भारी बारिश के दौरान पुणे से मुंबई जाने वाली लेन पर टनल 2 के खंडाला एग्जिट के पास हुआ। इस घटना ने कनेक्टिंग लिंक पर ट्रैफिक को रोक दिया है, जिससे राज्य के व्यस्ततम एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

यात्रियों के लिए चेतावनी

पुणे ट्रैफिक पुलिस ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि जब तक प्रभावित क्षेत्र को साफ नहीं किया जाता, तब तक वे पुणे से मुंबई की यात्रा न करें। पुलिस अधीक्षक (ट्रैफिक) शिवाजी पवार ने बताया कि भूस्खलन के बाद कनेक्टिंग लिंक पूरी तरह बंद कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पानी भरने के कारण पुराना मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे रूट भी बंद कर दिया गया है, और पुराने हाईवे पर भी एक और भूस्खलन की सूचना मिली है।

भविष्य की उम्मीदें

एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राकेश सोनवणे ने बताया कि लगातार बारिश के बाद भूस्खलन हुआ है। उन्होंने कहा, “मलबा हटाने का कार्य जारी है, और हमें उम्मीद है कि अगले चार से पांच घंटों में स्थिति सामान्य हो जाएगी।” अधिकारियों ने मलबा हटाने के लिए टीमें और मशीनरी मौके पर तैनात की हैं।

‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट का महत्व

‘मिसिंग लिंक’ मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट है। यह 13.3 किलोमीटर का हिस्सा रायगढ़ ज़िले के खोपोली को पुणे ज़िले में लोनावाला के पास कुसगांव से जोड़ता है। इस प्रोजेक्ट में दो सुरंगें और दो बड़े पुल शामिल हैं। पूरी तरह चालू होने पर, यह यात्रा की दूरी को लगभग छह किलोमीटर कम करेगा और समय को करीब 30 मिनट घटाएगा।

मॉनसून का प्रभाव

हाल की भारी बारिश ने मुंबई और आस-पास के क्षेत्रों में जनजीवन को प्रभावित किया है, जिससे जलभराव, भूस्खलन और ट्रांसपोर्ट में देरी जैसी समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा की योजना बनाने से पहले ट्रैफ़िक से जुड़ी जानकारी अवश्य देखें, खासकर पश्चिमी घाट से गुजरने वाले रास्तों पर।

” विश्व ज़ूनोसिस दिवस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी… जानवरों से मानवों में फैलने वाली बीमारियों का खतरा…”

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विश्व ज़ूनोसिस दिवस

विश्व ज़ूनोसिस दिवस के अवसर पर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकारों और जनता से आग्रह किया है कि वे एक महत्वपूर्ण वैश्विक स्वास्थ्य खतरे, ज़ूनोटिक बीमारियों को हल्के में न लें।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार, लगभग 75 प्रतिशत नई उभरती संक्रामक बीमारियाँ जानवरों से उत्पन्न होती हैं, जिससे ज़ूनोसिस महामारी और महामारी के प्रमुख कारणों में से एक बन जाती है।

COVID-19, निपाह वायरस, बर्ड फ्लू, इबोला, SARS, और मंकीपॉक्स जैसे रोगों ने यह साबित किया है कि जानवरों से शुरू होने वाली बीमारियाँ मानवों में तेजी से फैल सकती हैं, जिससे व्यापक बीमारी, आर्थिक संकट, और जीवन की हानि होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगली महामारी की भविष्यवाणी करना हमेशा संभव नहीं है, लेकिन बेहतर निगरानी, प्रारंभिक निदान, और मानव, पशु, और पर्यावरण स्वास्थ्य क्षेत्रों के बीच मजबूत सहयोग के माध्यम से कई भविष्य की प्रकोपों को रोका जा सकता है।

“हालांकि कई संक्रमण हल्के होते हैं, कुछ निमोनिया, मस्तिष्क संक्रमण, अंग विफलता, या व्यापक प्रकोप को जन्म दे सकते हैं। प्रारंभिक पहचान महत्वपूर्ण है क्योंकि लक्षण अक्सर सामान्य वायरल बीमारियों के समान होते हैं,” डॉ. अरविंद एस, लीड कंसल्टेंट – आंतरिक चिकित्सा, एस्टर आरवी अस्पताल ने बताया।

ज़ूनोटिक बीमारियाँ क्या हैं?

ज़ूनोटिक बीमारियाँ उन संक्रमणों को संदर्भित करती हैं जो जानवरों से मानवों में फैलती हैं, और ये वायरस, बैक्टीरिया, परजीवी, या फफूंद द्वारा उत्पन्न होती हैं। ये संक्रमण कई तरीकों से फैल सकते हैं, जैसे:

  • संक्रमित जानवरों के साथ सीधा संपर्क
  • मच्छरों, टिक, और अन्य कीड़ों के काटने
  • प्रदूषित भोजन या पानी
  • जानवरों की लार, मूत्र, रक्त, या मल के संपर्क में आना
  • संक्रमित मवेशियों या वन्यजीवों को संभालना

विशेषज्ञों की चिंता का कारण

ज़ूनोटिक बीमारियों की बढ़ती संख्या मानवों और पर्यावरण के बीच संबंधों में बदलाव से जुड़ी हुई है।

डॉ. ऐश्वर्या आर, कंसल्टेंट – संक्रामक बीमारियाँ, एस्टर व्हाइटफील्ड अस्पताल के अनुसार, कई कारक हैं जो जानवरों से मानवों में रोगाणुओं के संक्रमण की संभावना को बढ़ा रहे हैं, जैसे तेजी से शहरीकरण, वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन, वन्यजीव व्यापार, और पशुपालन का विस्तार।

“यह स्थिति वायरस, बैक्टीरिया, और अन्य रोगाणुओं को एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में संक्रमण करने में आसान बनाती है, और कभी-कभी वे मानव-से-मानव संक्रमण के लिए अधिक प्रभावी ढंग से अनुकूलित हो जाते हैं, जिससे समस्या तेजी से बढ़ती है,” उन्होंने कहा।

अपने आप को कैसे सुरक्षित रखें?

डॉ. अरविंद के अनुसार, कुछ सरल निवारक उपाय ज़ूनोटिक संक्रमण के जोखिम को काफी कम कर सकते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • जानवरों को संभालने के बाद हाथों को अच्छी तरह धोना।
  • बीमार या मृत जानवरों को छूने से बचना।
  • मांस, मुर्गी, अंडे, और समुद्री भोजन को पूरी तरह से पकाना।
  • केवल पाश्चुरीकृत दूध और डेयरी उत्पादों का सेवन करना।
  • फलों और सब्जियों को खाने से पहले धोना।
  • मच्छर या टिक-प्रवण क्षेत्रों में मच्छर रोधी और सुरक्षात्मक कपड़े पहनना।
  • पालतू जानवरों का टीकाकरण कराना और नियमित पशु चिकित्सा जांच कराना।
  • सुरक्षित कृषि और खाद्य हैंडलिंग प्रथाओं का पालन करना।
  • जानवरों के संपर्क के बाद अनजान बुखार विकसित होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना।

अगली महामारी की रोकथाम आज से शुरू होती है

विश्व ज़ूनोसिस दिवस के अवसर पर, संदेश स्पष्ट है: जानवरों के स्वास्थ्य की रक्षा करना, पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा करना, और सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करना अगली महामारी की रोकथाम में आवश्यक निवेश हैं। अगली वैश्विक प्रकोप एक वायरस के साथ शुरू हो सकता है जो जानवरों में चुपचाप फैल रहा है – लेकिन यह इस पर निर्भर करेगा कि हम खतरे को कितनी जल्दी पहचानते हैं, विज्ञान के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग करते हैं। जागरूकता, तैयारी, और प्रारंभिक कार्रवाई हमारे सबसे मजबूत बचाव बने रहते हैं।

” कोलकाता में इन्फ्लूएंजा ए के मामलों में तेजी, सुरक्षित रखने के उपाय…”

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कोलकाता में इन्फ्लूएंजा ए का बढ़ता प्रकोप

कोलकाता में इन्फ्लूएंजा ए के मामलों में तेजी देखी जा रही है, जहां अस्पतालों में उच्च बुखार, गंभीर खांसी, फेफड़ों में जाम, सांस लेने में कठिनाई और कुछ मामलों में आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

चिकित्सकों का कहना है कि हाल के मौसम में भारी बारिश, तेज धूप और उच्च आर्द्रता ने वायरस के तेजी से फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने विशेष रूप से बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पुरानी बीमारियों से ग्रस्त लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है क्योंकि मौसमी फ्लू की लहर तेज हो रही है।

कोलकाता में इन्फ्लूएंजा के मामलों में वृद्धि का कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान में अचानक बदलाव और लगातार आर्द्रता ने श्वसन संक्रमणों में वृद्धि में योगदान दिया है। ये मौसम की स्थितियाँ इन्फ्लूएंजा वायरस को लंबे समय तक जीवित रहने और श्वसन बूंदों के माध्यम से तेजी से फैलने की अनुमति देती हैं। भीड़-भाड़ वाले इनडोर स्थान, एयर-कंडीशंड कार्यालय, स्कूल और सार्वजनिक परिवहन संक्रमण के जोखिम को और बढ़ाते हैं। कोलकाता के कई अस्पतालों ने इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षणों के लिए बाह्य रोगी विजिट में महत्वपूर्ण वृद्धि की सूचना दी है, जबकि गंभीर श्वसन जटिलताओं के लिए भर्ती भी पिछले दो हफ्तों में बढ़ी है।

इन्फ्लूएंजा ए के सामान्य लक्षण

हालांकि इन्फ्लूएंजा अक्सर सामान्य जुकाम की तरह शुरू होता है, चिकित्सकों का कहना है कि लक्षण जल्दी गंभीर हो सकते हैं, विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों में। लक्षणों में शामिल हैं:

  • उच्च बुखार
  • लगातार सूखी या गीली खांसी
  • गंभीर शरीर में दर्द
  • गले में खराश
  • सिरदर्द
  • नाक में जाम
  • अत्यधिक थकान
  • छाती में जाम
  • सांस लेने में कठिनाई

कई मरीजों में बुखार चार से पांच दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन खांसी और फेफड़ों में जलन कई हफ्तों तक बनी रह सकती है।

किसे सबसे अधिक खतरा है?

हालांकि स्वस्थ वयस्क आमतौर पर आराम और सहायक देखभाल से ठीक हो जाते हैं, इन्फ्लूएंजा कमजोर समूहों के लिए खतरनाक हो सकता है, जिसमें 50 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्क, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे, अस्थमा या क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) से ग्रस्त लोग, मधुमेह या हृदय रोग वाले लोग, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग और गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। चिकित्सकों का कहना है कि पहले से मौजूद फेफड़ों की बीमारियों वाले मरीजों को निमोनिया, गंभीर सांस लेने में कठिनाई और अस्पताल में भर्ती होने की अधिक संभावना होती है।

इस फ्लू के मौसम की गंभीरता

विशेषज्ञों का कहना है कि कोलकाता केवल इन्फ्लूएंजा ए से नहीं लड़ रहा है। कई श्वसन वायरस, जैसे राइनोवायरस, श्वसन सिंसिटियल वायरस (RSV) और पैराइनफ्लूएंजा एक साथ फैल रहे हैं। यह “वायरल कॉकटेल” ठीक होने की प्रक्रिया को लंबा कर सकता है और श्वसन लक्षणों को बढ़ा सकता है, विशेष रूप से बुजुर्गों और जिनके पास स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं। कुछ मरीज जो शुरू में बुखार से ठीक हो जाते हैं, वे चार से छह हफ्तों तक लगातार खांसी, थकान और वायुमार्ग में सूजन का अनुभव करते हैं।

अपने आप को सुरक्षित रखने के उपाय

चिकित्सक संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए सरल निवारक उपायों की सिफारिश करते हैं:

  • भीड़-भाड़ या बंद स्थानों में मास्क पहनें।
  • बार-बार साबुन और पानी से हाथ धोएं।
  • खांसते या छींकते समय मुँह और नाक को ढकें।
  • बीमार लोगों के साथ निकट संपर्क से बचें।
  • यदि आपको बुखार या फ्लू जैसे लक्षण विकसित होते हैं, तो घर पर रहें।
  • पर्याप्त तरल पदार्थ पिएं और पर्याप्त आराम करें।
  • प्रतिरक्षा को समर्थन देने के लिए संतुलित आहार लें।
  • यदि आप उच्च जोखिम वाले समूह में हैं, तो मौसमी इन्फ्लूएंजा वैक्सीन के बारे में अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर विशेष लेख…

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार, 6 जुलाई को भारतीय जनसंघ के संस्थापक और महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर प्रमुख समाचार पत्रों में एक हस्ताक्षरित लेख प्रकाशित किया।

इस लेख में उन्होंने डॉ. मुखर्जी के साहस, त्याग और राष्ट्रसेवा की अद्वितीय सोच को उजागर किया। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35(ए) को हटाना डॉ. मुखर्जी के बलिदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

मोदी ने अपने लेख में उल्लेख किया कि डॉ. मुखर्जी का जीवन साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है, जिसने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि मुखर्जी ने हमेशा ‘भारत और भारतीय मूल्यों को सर्वोच्च’ रखा और मजबूत संस्थानों का निर्माण किया।

प्रधानमंत्री ने बताया कि मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना उस समय की, जब कांग्रेस पार्टी का वर्चस्व था। डॉ. मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ और उनका निधन 23 जून 1953 को श्रीनगर में हिरासत के दौरान हुआ। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ पूरी तरह से एकीकृत करने के लिए संघर्ष किया।

मोदी ने कहा कि 6 जुलाई का दिन उन करोड़ों देशवासियों के लिए विशेष है, जो राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखते हैं। उन्होंने लिखा, ‘हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मना रहे हैं, जिनका जीवन साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है।’

प्रधानमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम बताया। उन्होंने कहा कि मुखर्जी का जन्म एक शिक्षित परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने सुख-सुविधाओं को छोड़कर राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना।

मोदी ने बताया कि मुखर्जी का दृढ़ विश्वास था कि उन्हें अपने समय की चुनौतियों का सामना करना चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत दुखों का सामना किया, लेकिन अपने संकल्प को कमजोर नहीं होने दिया। उनका आदर्श भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना था।

उन्होंने लिखा, ‘देश के विभाजन के समय उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।’ पीएम मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का बलिदान भी ऐसा ही था, जो राजनीति से ऊपर उठकर देश की स्मृति का हिस्सा बन गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति के रूप में शिक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव किए।

मोदी ने मुखर्जी के विचारों का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि शिक्षण संस्थानों को केवल कम वेतन वाले कर्मचारियों की फैक्टरी नहीं समझना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के कार्यकाल को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि उन्होंने औद्योगिक नीति और पारंपरिक सामर्थ्य के संरक्षण के लिए कई ऐतिहासिक पहल की।

मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन लोकतांत्रिक भावना का प्रतीक था और उन्होंने पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल होकर राष्ट्र निर्माण का दायित्व निभाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी की मानवीय संवेदनाएं और सेवाभाव उन्हें विशेष बनाते हैं। उन्होंने 1943 में बंगाल के अकाल के दौरान पीड़ितों की सेवा में खुद को समर्पित कर दिया।

मोदी ने कहा कि आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है और डॉ. मुखर्जी के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उस भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करें, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी।

“NATO शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि: शिखर सम्मेलन की चुनौतियाँ”

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उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के नेता इस सप्ताह अंकारा में मिलने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि संगठन एकता का प्रदर्शन करने का प्रयास कर रहा है।

यह उस समय हो रहा है जब रणनीतिक प्राथमिकताओं, रक्षा खर्च और इसके दीर्घकालिक उद्देश्य पर असहमति बढ़ती जा रही है।

शिखर सम्मेलन की चुनौतियाँ

यह शिखर सम्मेलन मंगलवार और बुधवार को आयोजित होने वाला है, जिसमें अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई, रक्षा खर्च के लक्ष्यों पर बहस और यूरोप के कुछ हिस्सों में NATO के प्रति बढ़ती सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

अमेरिका और इजराइल द्वारा फरवरी के अंत में ईरान पर सैन्य हमले के बाद असहमति के संकेत सामने आए हैं। जबकि कई NATO सहयोगियों ने अमेरिका के लक्ष्य का समर्थन किया, लेकिन किसी ने भी इस कार्रवाई में सीधा भाग लेने पर सहमति नहीं दी।

यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया

अंकारा के मध्य पूर्व अध्ययन केंद्र के वरिष्ठ शोधकर्ता ओयटुन ओर्हान ने कहा कि कई यूरोपीय सदस्य अमेरिका के हमलों को क्षेत्रीय स्थिरता के दृष्टिकोण से देख रहे हैं।

उन्होंने कहा, “सीधे सैन्य भूमिका से प्रतिशोध का खतरा हो सकता है, ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आ सकती है, और प्रवासन का दबाव बढ़ सकता है।”

रक्षा खर्च का मुद्दा

शिखर सम्मेलन में एक प्रमुख मुद्दा पिछले साल द हेग में हुए NATO शिखर सम्मेलन में किए गए समझौते का कार्यान्वयन होगा, जिसमें सहयोगियों ने 2035 तक रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद का 5 प्रतिशत बढ़ाने का वादा किया था।

विश्लेषकों का मानना है कि सभी सदस्य देश इस लक्ष्य को पूरा कर पाएंगे या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है।

सार्वजनिक विरोध

शिखर सम्मेलन से पहले अंकारा, इस्तांबुल और इज़मिर में NATO के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने संगठन को “साम्राज्यवादी युद्ध संगठन” करार दिया।

प्रदर्शनकारियों ने “NATO युद्ध चाहता है, श्रमिक शांति चाहते हैं” जैसे नारे लगाए।

भविष्य की दिशा

अंकारा शिखर सम्मेलन में प्रमुख रक्षा खरीद समझौतों की घोषणा की उम्मीद है, जो अमेरिकी रक्षा निर्माताओं को लाभ पहुंचा सकते हैं।

मार्मारा विश्वविद्यालय के विद्वान बारिस डॉस्टर ने कहा कि NATO विरोधी प्रदर्शन घरेलू स्तर पर बढ़ती सैन्यकरण की चिंताओं को दर्शाते हैं।