Home समाचार “Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति पर आखिर क्यों किया जाता है सत्तू...

“Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति पर आखिर क्यों किया जाता है सत्तू का दान? जानिए धार्मिक महत्व”

2
0

Mesh Sankranti 2026: हिंदू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र में संक्रांति का विशेष महत्व होता है. जब सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे संक्रांति कहा जाता है.

साल 2026 में 14 अप्रैल को सूर्य देव मीन राशि की अपनी यात्रा समाप्त कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे. इसे ही मेष संक्रांति के नाम से जाना जाता है. भारतीय संस्कृति में यह दिन केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि नई फसल, नए उत्साह और दान-पुण्य का महापर्व है. आइए जानते हैं इस दिन का महत्व और सत्तू के दान की परंपरा के पीछे का कारण.

मेष संक्रांति पर क्यों किया जाता है सत्तू का दान?

मेष संक्रांति पर सत्तू दान करने की परंपरा बहुत पुरानी और विशेष मानी जाती है. सत्तू मुख्य रूप से भुने हुए चने से बनता है और यह गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक देने वाला आहार है. धार्मिक दृष्टि से सत्तू का दान करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. वहीं वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो अप्रैल के महीने से गर्मी बढ़ने लगती है, ऐसे में सत्तू शरीर को ठंडा रखता है और ऊर्जा प्रदान करता है. इसलिए इस दिन जरूरतमंदों को सत्तू, जल, फल और वस्त्र का दान करना बहुत ही फलदायी माना गया है.

अलग-अलग राज्यों में मेष संक्रांति का उत्सव

भारत के विभिन्न हिस्सों में मेष संक्रांति को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. बैसाखी (पंजाब), पोइला बोइशाख (पश्चिम बंगाल), पुथंडु (तमिलनाडु) और बोहाग बिहू (असम) जैसे त्योहार इसी दिन या इसके आसपास मनाए जाते हैं.

क्या करें इस दिन?

मेष संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए. इसके बाद दान-पुण्य का विशेष महत्व है. सत्तू, गुड़, जल, पंखा, वस्त्र और फल का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है. साथ ही इस दिन क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर सकारात्मकता अपनाने की सलाह दी जाती है.

मेष संक्रांति का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मेष संक्रांति के दिन सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन में ऊर्जा, सफलता और सकारात्मकता का संचार होता है. इस दिन से सूर्य उत्तरायण के प्रभाव को और अधिक मजबूत करता है, जिससे दिन बड़े और मौसम गर्म होने लगता है. यही कारण है कि इसे नई शुरुआत, उन्नति और शुभ कार्यों के आरंभ का समय माना जाता है. पुराणों में वर्णित है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है. खासकर गंगा स्नान और सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा बेहद शुभ मानी जाती है.