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‘निशांत कुमार ने पटना से शुरू की ‘सद्भाव यात्रा’, पिता नीतीश कुमार से लिया आशीर्वाद’

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Nishant Kumar Sadbhav Yatra: निशांत कुमार की यात्रा जदयू प्रदेश कार्यालय पटना से शुरू हो चुकी है. उनकी यह यात्रा पश्चिम चंपारण से शुरू हो गई है. इस दौरान वह रथ से निकले हैं.

पश्चिम चंपारण की पावन धरा से प्रारंभ होने वाली ‘सद्भाव यात्रा’ के पहले दिन रविवार (3 मई) को निशांत कुमार ने पटना में पिता नीतीश कुमार से आशीर्वाद प्राप्त किया. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और जेडीयू नेता निशांत कुमार आज से बिहार यात्रा पर निकल रहे हैं.

निशांत कुमार की यात्रा जदयू प्रदेश कार्यालय पटना से शुरू हो चुकी है. उनकी यह यात्रा पश्चिम चंपारण से शुरू होगी. इस दौरान वह रथ से निकले हैं. जिस रथ से निशांत कुमार निकले हैं उसका नाम निश्चय रथ रखा गया है. निशांत कुमार के साथ उनके रथ पर प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार मौजूद हैं.

निशांत के लिए बड़ी चुनौती

निशांत के लिए यात्रा बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि बिना किसी पद के वह यात्रा पर निकल पड़े हैं. उनकी यात्रा पर विधायक दल के नेता श्रवण कुमार ने कहा कि निशांत जो पद चाहते वह उनको मिलता, लेकिन उन्होंने पद को ठुकराया और जनता के बीच जाने का निर्णय लिया.

श्रवण कुमार ने कहा कि निशांत कुमार बिहार में नीतीश कुमार के काम को लोगों को बताएंगे और पहुंचाएंगे. उन्होंने कहा कि युवाओं और महिलाओं से निशांत खुद को कनेक्ट जोड़ने की कोशिश करेंगे. निशांत हमारे नेता हैं और अब उनकी यह यात्रा संगठन पार्टी को मजबूत करेगी.

यात्रा को लेकर क्या बोले निशांत कुमार?

जेडीयू नेता निशांत कुमार ने यात्रा को लेकर कहा कि इसका उद्देश्य अमीर हो या गरीब, दलित हो या गैर-दलित सभी को साथ लेकर चलना है. उन्होंने कहा कि सभी के बीच भाईचारे की भावना होनी चाहिए. महात्मा गांधी ने भी सत्याग्रह आंदोलन चंपारण से शुरू किया था और मेरे पिता ने भी वहीं से शुरुआत की थी. इसलिए मैं भी उसी राह पर चल रहा हूं.

इस यात्रा का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना है. उन्होंने आगे कहा कि यह मेरी पहली राजनीतिक यात्रा है. निशांत ने कहा कि अपने कार्यकर्ता भाइयों से मिलना, उनके विचार सुनना और उनसे बातचीत करना है. मैं लोगों से मिलने और उनकी समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास करूंगा.

किस देश का पासपोर्ट दुनिया में नंबर-1, भारत और पाकिस्तान किस पायदान पर? सामने आई 2026 की पासपोर्ट रैंकिंग, देखें लिस्ट

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Passport Ranking 2026: 2026 की पासपोर्ट रैंकिंग में सिंगापुर दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट बनकर उभरा है, जहां के नागरिक 192 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं.

Passport Ranking 2026: आपका पासपोर्ट यह तय करता है कि आप दुनिया के कितने देशों में आसानी से जा सकते हैं. साल 2026 में सबसे ताकतवर और सबसे कमजोर पासपोर्ट के बीच करीब 170 देशों का फर्क है. यह आंकड़े Henley Passport Index के आधार पर तैयार किए गए हैं, जिसमें यह देखा जाता है कि किसी देश के नागरिक बिना वीजा कितनी जगहों पर जा सकते हैं.

सिंगापुर सबसे आगे, 192 देशों में बिना वीजा एंट्री

सिंगापुर इस लिस्ट में पहले स्थान पर है, जहां के नागरिक 192 देशों में बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं. यह आंकड़ा सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों के मुकाबले लगभग पांच गुना ज्यादा है. वहीं सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों के नागरिक 50 से भी कम देशों में बिना वीजा के जा सकते हैं. यह अंतर दिखाता है कि भूगोल, कूटनीति और राजनीतिक स्थिरता वैश्विक यात्रा पर कितना असर डालती है.

एशिया और यूरोप के पासपोर्ट सबसे मजबूत

सिंगापुर के बाद दूसरे स्थान पर जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात हैं, जहां के नागरिक 187 देशों में बिना वीजा के जा सकते हैं. संयुक्त अरब अमीरात पूर्वी एशिया के बाहर सबसे मजबूत पासपोर्ट रखता है, लेकिन एक कमी यह है कि यहां के नागरिकों को संयुक्त राज्य अमेरिका में वीजा-फ्री एंट्री नहीं मिलती, जबकि सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया को यह सुविधा है. इसके बाद यूरोप के देश इस सूची में आगे हैं, खासकर नॉर्वे और स्विट्जरलैंड, जिनके नागरिक 185 देशों में बिना वीजा के जा सकते हैं.

यूरोपीय संघ के 27 देशों का एक साझा पासपोर्ट सिस्टम है, लेकिन हर देश की वीजा-फ्री पहुंच अलग-अलग है. बुल्गारिया और रोमानिया के नागरिक 177 देशों में जा सकते हैं, जबकि स्वीडन के नागरिक 186 देशों में. औसतन यूरोपीय संघ की ताकत 183 देशों की है, जो मलेशिया और यूनाइटेड किंगडम के बराबर है. यह कनाडा (182) और संयुक्त राज्य अमेरिका (179) से भी थोड़ा आगे है.

सबसे कमजोर पासपोर्ट: 50 से कम देशों में एंट्री

रैंकिंग के निचले हिस्से में पासपोर्ट की ताकत काफी कम हो जाती है. सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों के नागरिक 50 से भी कम देशों में जा सकते हैं. इन देशों में अक्सर राजनीतिक अस्थिरता, ज्यादा पलायन या हाल के संघर्ष देखने को मिलते हैं, जिससे वीजा नियम सख्त हो जाते हैं. अफ्रीकी देशों जैसे नाइजीरिया (44), सोमालिया (32) और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (43) इस सूची में नीचे हैं. इन देशों की तेजी से बढ़ती आबादी और बड़े प्रवासी समुदाय भी वीजा प्रतिबंधों का कारण बने हैं.

पाकिस्तान का पासपोर्ट दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट में गिना जाता है. यह 98वें स्थान पर है और यह रैंक यमन के साथ साझा करता है. आसान भाषा में समझें तो पाकिस्तानी पासपोर्ट रखने वाले लोग सिर्फ करीब 31 से 35 देशों में ही बिना वीजा या पहुंचने पर वीजा लेकर यात्रा कर सकते हैं, यानी उनके लिए दूसरे देशों में जाना काफी सीमित है.

पासपोर्ट की ताकत दिखाती है वैश्विक असमानता

पासपोर्ट रैंकिंग सिर्फ यात्रा की सुविधा नहीं, बल्कि वैश्विक असमानता को भी दिखाती है. आप किस देश में पैदा हुए हैं, इससे यह तय होता है कि आप दुनिया के किन हिस्सों में जा सकते हैं. अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के पासपोर्ट आमतौर पर यूरोप और पश्चिमी देशों के मुकाबले कमजोर हैं. हालांकि मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कुछ अपवाद हैं, लेकिन इन्हें भी अमेरिका जैसे बड़े देशों में वीजा-फ्री एंट्री नहीं मिलती.

टॉप 20 सबसे ताकतवर पासपोर्ट (2026)

रैंक देश वीजा-फ्री गंतव्य
1 सिंगापुर 192
2 जापान 187
2 दक्षिण कोरिया 187
2 संयुक्त अरब अमीरात 187
5 नॉर्वे 185
5 स्विट्जरलैंड 185
7 यूरोपीय संघ (औसत) 183
7 मलेशिया 183
7 यूनाइटेड किंगडम 183
10 ऑस्ट्रेलिया 182
10 कनाडा 182
10 न्यूजीलैंड 182
13 लिकटेंस्टीन 180
14 आइसलैंड 179
14 संयुक्त राज्य अमेरिका 179
16 मोनाको 176
17 चिली 174
17 हांगकांग 174
19 एंडोरा 169
20 अर्जेंटीना 168
20 ब्राज़ील 168

भारतीय पासपोर्ट की स्थिति

भारत का पासपोर्ट इस साल 80वें स्थान पर है. भारतीय नागरिक 55 से 58 देशों में वीजा-मुक्त या वीजा-ऑन-अराइवल यात्रा कर सकते हैं.

दिल्ली अग्निकांड पर CM रेखा गुप्ता ने जताया दुख, कहा- पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है सरकार…

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Delhi Vivek Vihar fire Live: इसमें 9 झुलसे हुए शव अलग-अलग जगहों से बरामद किए गए. 1 शव को पहली मंजिल, 5 शवों को दूसरी मंजिल, और 3 शवों को सीढ़ियों की मुमटी जो बंद पाई गई थी वहां से बरामद किया गया है.

पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में एक इमारत के अंदर आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई है. घटना के बाद मौके पर राहत-बचाव का काम जारी है. शाहदरा के विवेक विहार स्थित एक चार मंजिला इमारत में आग लग गई. आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की ओर से काबू पाने के प्रयास जारी हैं. फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घटनास्थल पर मौजूद हैं.

आग बिल्डिंग के छह फ्लैट्स के अंदर घरेलू सामान में लग गई थी. इसमें 9 झुलसे हुए शव अलग-अलग जगहों से बरामद कर लिए गए हैं. 1 शव को पहली मंजिल, 5 शवों को दूसरी मंजिल, और 3 शवों को सीढ़ियों की मुमटी जो बंद पाई गई थी वहां से बरामद किया गया है. दिल्ली पुलिस द्वारा सभी शवों को क्राइम टीम को सौंप दिया गया है. फिलहाल घटनास्थल पर सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है.

यह आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते कई फ्लोर इसकी चपेट में आ गए. जानकारी के मुताबिक, यह आग विवेक विहार फेज-1 के एक बहुमंजिला मकान में लगी थी. फायर कंट्रोल रूम को इस हादसे की सूचना तड़के 3:48 बजे मिली थी, जिसके बाद तुरंत पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके के लिए रवाना हो गईं. मौके पर पहुंचने पर पता चला कि बिल्डिंग के दूसरे, तीसरे और चौथे फ्लोर पर आग लगी हुई थी. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल की करीब 12 से 14 गाड़ियां मौके पर लगाई गईं.

राहत-बचाव दलों ने शुरू किया प्रयास

फायर ब्रिगेड, पुलिस, क्राइम टीम, ट्रैफिक पुलिस और डीडीएमए की टीम ने मिलकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया. करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुबह 6:25 बजे आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन इसके बाद भी सर्च ऑपरेशन जारी रहा, खासकर ऊपरी मंजिलों पर, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अंदर फंसा न रह जाए.

शाहदरा के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि सुबह करीब 4 बजे आग लगने की कॉल मिली थी और तुरंत टीम मौके पर पहुंच गई थी. उन्होंने कहा कि आग पर काबू पाने में करीब दो घंटे लगे, जिसके बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया. बचाव कार्य के दौरान करीब 10 से 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. इनमें से दो लोगों को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें इलाज के लिए गुरु तेग बहादुर अस्पताल भेजा गया.

घायलों को अस्पताल में कराया भर्ती

वहीं, कुछ अन्य घायलों को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस आग में कुल नौ लोगों की जान चली गई. यह संख्या और बढ़ भी सकती है, क्योंकि अभी सर्च ऑपरेशन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, आग इतनी भयानक थी कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला. कई लोग अपनी जान बचाने के लिए बाहर की तरफ भागे, जबकि कुछ लोग अंदर ही फंस गए थे.फिलहाल आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन पुलिस और जांच एजेंसियां हर एंगल से मामले की जांच कर रही हैं.

Scam Alert: एक सेकंड हैंड कार खरीदने का बना रहे प्लान? इस बड़े स्कैम से हो जाएं सावधान…

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Second Hand Car Scam: कोई भी ऑनलाइन डील करते समय सावधानी बरतनी चाहिए जैसे कि बिना जांच-पड़ताल के पैसे न भेजें, अजनबी लिंक या ऑफर पर भरोसा न करें. आइए डिटेल्स जान लेते हैं.

आजकल ऑनलाइन स्कैम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. खासकर सेकेंड हैंड कार खरीदने-बेचने के नाम पर, कई लोग सस्ती डील के लालच में आकर ठगों के जाल में फंस जाते हैं. साथ ही अपनी मेहनत की कमाई गंवा देते हैं. ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि ये फ्रॉड कैसे होते हैं और अगर आपके साथ ऐसा हो जाए तो शिकायत कहां और कैसे करनी चाहिए?

इस तरह के फ्रॉड में ठग खुद को कार बेचने वाला या डीलर बताकर लोगों को भरोसे में लेते हैं. वे इंटरनेट या सोशल मीडिया पर कार की आकर्षक फोटो और कम कीमत डालते हैं, ताकि लोग जल्दी से संपर्क करें. फिर वे एडवांस पेमेंट या बुकिंग के नाम पर पैसे मांग लेते हैं.

इन स्कैम्स से रहें सावधान

कई बार स्कैमर्स फर्जी डॉक्यूमेंट्स, नकली वेबसाइट या पहचान भी दिखाते हैं, जिससे सब कुछ असली लगे. लेकिन जैसे ही पैसा ट्रांसफर होता है, ठग गायब हो जाते हैं और खरीदार को समझ आता है कि उसके साथ धोखा हो गया है.

तुरंत कार्रवाई करना जरूरी

अगर आपके साथ ऐसा ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए तो सबसे जरूरी है कि तुरंत कार्रवाई करें. सरकार ने इसके लिए एक खास प्लेटफॉर्म बनाया है, जिसे National Cybercrime Reporting Portal कहा जाता है. यहां आप ऑनलाइन जाकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं.  इसके अलावा, आप अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम सेल में भी शिकायत कर सकते हैं.

इस हेल्पलाइन नंबर पर करें कॉल

इसके साथ ही एक बहुत जरूरी हेल्पलाइन नंबर 1930 भी जारी किया गया है. अगर आपके साथ फ्रॉड हुआ है तो तुरंत इस नंबर पर कॉल करना चाहिए. खास बात यह है कि अगर आप जल्दी शिकायत कर देते हैं, तो कई बार ट्रांजैक्शन को रोका या पैसा वापस दिलाने की कोशिश की जा सकती है.

ऑनलाइन डील करते समय रहें सावधान

पुलिस का कहना है कि लोग अक्सर देर से शिकायत करते हैं, जिससे ठगों को पकड़ना मुश्किल हो जाता है. इसलिए जैसे ही आपको शक हो कि आपके साथ धोखा हुआ है तो तुरंत कार्रवाई करना बहुत जरूरी है. इसके साथ ही कोई भी ऑनलाइन डील करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, जैसे कि बिना जांच-पड़ताल के पैसे न भेजें, अजनबी लिंक या ऑफर पर भरोसा न करें और हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या भरोसेमंद प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें.

एक बूथ पर कितना खर्च करता है चुनाव आयोग, पश्चिम बंगाल में रि-वोटिंग से कितना नुकसान?

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Kolkata West Bengal Re-Polling: पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर, मगराहाट पश्चिम और फलता में दोबारा मतदान से चुनाव आयोग को भारी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है. चलिए जानें कि एक बूथ पर कितना खर्चा आता है.

लोकतंत्र का महापर्व यानी चुनाव कराने में भारी-भरकम सरकारी मशीनरी और करोड़ों रुपये का खर्च लगता है. एक-एक पोलिंग बूथ को सुरक्षित और चालू हालत में तैयार करने के लिए लाखों रुपये खर्च होते हैं. ऐसे में जब किसी धांधली या हिंसा की वजह से दोबारा मतदान यानी री-पोलिंग करानी पड़ती है, तो वह पूरा खर्च सीधे दोगुना हो जाता है. हाल ही में पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर, मगराहाट पश्चिम और फलता विधानसभा क्षेत्रों में दोबारा मतदान कराने के चुनाव आयोग के फैसले ने इस चुनावी खर्च और इसके आर्थिक नुकसान को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है.

फलता में दोबारा चुनाव का फैसला

पश्चिम बंगाल के चुनावी घमासान के बीच चुनाव आयोग ने फलता विधानसभा सीट पर भी दोबारा वोटिंग कराने के स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं. आयोग ने यह कड़ा कदम चुनाव प्रक्रिया के दौरान मिलीं गंभीर शिकायतों और गड़बड़ियों की जांच के बाद उठाया है. आयोग का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए फलता में री-पोलिंग कराना बेहद जरूरी हो गया था. इस नए आदेश के बाद स्थानीय प्रशासन ने तैयारियों को तेज कर दिया है, लेकिन इसके साथ ही सरकारी खजाने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ और बढ़ गया है.

15 बूथों पर फिर से मतदान

इससे पहले पश्चिम बंगाल के दो प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों के 15 पोलिंग बूथों पर कड़ी सुरक्षा के बीच पुनर्मतदान संपन्न कराया गया. इसमें डायमंड हार्बर के 4 बूथ और मगराहाट पश्चिम के 11 बूथ शामिल थे, जहां 29 अप्रैल को हुए मतदान को रद्द कर दिया गया था. इन सभी 15 बूथों पर 2 मई को दोबारा वोट डलवाए गए. चुनाव आयोग को यहां नई सिरे से व्यवस्थाएं करनी पड़ीं, क्योंकि पहले दिन हुई गड़बड़ियों के कारण जनता का भरोसा बहाल करना जरूरी था. इस री-पोलिंग ने प्रशासनिक अमले की मेहनत और समय दोनों को काफी बढ़ा दिया.

एक बूथ को सजाने का खर्च

आखिर एक पोलिंग बूथ को तैयार करने में कितना पैसा लगता है? चुनाव आयोग जब किसी एक बूथ को वोटिंग के लिए तैयार करता है, तो उसमें खर्चों की एक लंबी लिस्ट शामिल होती है. इसमें सबसे पहले ईवीएम (EVM) और वीवीपीएटी (VVPAT) मशीनों का सुरक्षित प्रबंधन और ट्रांसपोर्टेशन आता है. इसके अलावा वहां तैनात होने वाले मतदान कर्मियों का यात्रा भत्ता, खाने-पीने का इंतजाम, स्टेशनरी और अब वेबकास्टिंग जैसी आधुनिक तकनीक का खर्च भी जुड़ता है. अनुमान बताते हैं कि देश में एक सामान्य चुनाव के दौरान प्रति बूथ औसतन 1 लाख रुपये या उससे अधिक का खर्च आता है.

सुरक्षा व्यवस्था में सबसे ज्यादा खर्च

एक सामान्य पोलिंग बूथ पर होने वाले खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा सुरक्षा व्यवस्था में जाता है. चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराने के लिए वहां भारी संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और पुलिस के जवानों को तैनात किया जाता है. जवानों के ठहरने, आने-जाने और उनके भत्तों पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च होता है. संवेदनशील राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल में तो यह सुरक्षा खर्च सामान्य से कहीं अधिक बढ़ जाता है. ऐसे में जब किसी बूथ पर दोबारा चुनाव होता है, तो सुरक्षा बलों को फिर से वहां तैनात करना पड़ता है, जिससे खर्च काफी बढ़ जाता है.

री-वोटिंग से सरकारी खजाने को कितनी चोट?

जब भी किसी विधानसभा क्षेत्र में दोबारा मतदान होता है, तो वह सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डालता है. चुनाव आयोग को री-पोलिंग के लिए नए सिरे से वैसी ही पूरी तैयारी करनी पड़ती है, जैसी सामान्य चुनाव में होती है. इसमें पोलिंग अधिकारियों को दोबारा ड्यूटी पर भेजना, नई मशीनों की टेस्टिंग और सबसे जरूरी, संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की फिर से तैनाती शामिल है. यह सारा अतिरिक्त खर्च सीधे सरकारी खजाने से जाता है, जिसका कोई दूसरा फायदा नहीं होता और यह पूरी तरह से पैसे का नुकसान है.

आम जनता की जेब पर असर

चुनाव में जो भी पैसा खर्च किया जाता है, वह देश के नागरिकों द्वारा चुकाए गए टैक्स से आता है. जब भी राजनीतिक हिंसा, बूथ कैप्चरिंग या अन्य गड़बड़ियों की वजह से दोबारा मतदान होता है, तो वह आम जनता के पैसे की बर्बादी होती है. पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में, जहां पहले से ही भारी सुरक्षा बलों की जरूरत होती है, वहां री-वोटिंग कराना प्रशासन के लिए एक बड़ी सिरदर्दी बन जाता है. इससे न सिर्फ लाखों रुपयों का आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि सरकारी अमले को अपनी सामान्य ड्यूटी छोड़कर दोबारा चुनावी काम में जुटना पड़ता है.

‘आज के पहले मैच में SRH और KKR की भिड़ंत, जानें हैदराबाद-कोलकाता की प्लेइंग इलेवन, पिच रिपोर्ट और मैच प्रिडिक्शन’

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Sunrisers Hyderabad vs Kolkata Knight Riders: आईपीएल 2026 में आज दो मैच खेले जाएंगे. पहले मैच में सनराइजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राइडर्स की भिड़ंत होगी. यहां जानें इस मुकाबले की A टू Z डिटेल्स.

आईपीएल का आज सुपर संडे है. यानी आज आईपीएल 2026 में दो मैच खेले जाएंगे. पहले मैच में सनराइजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राइडर्स की टीमें भिड़ेंगी. यह मैच हैदराबाद को होम ग्राउंड राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा. केकेआर पिछले दो मैच जीतकर आई है. लखनऊ के खिलाफ उसे सुपर ओवर में जीत मिली थी. वहीं राजस्थान के खिलाफ केकेआर ने हारी हुई बाजी जीती थी. दोनों ही मैच में रिंकू सिंह ने अर्धशतक लगाया था. वहीं हैदराबाद ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ 243 रन चेज किए हैं. दोनों ही टीमें जीत की सिलसिले को बरकरार रखना चाहेंगी. हालांकि, आज एक टीम की हार तय है.

पैट कमिंस की सनराइजर्स हैदराबाद प्वाइंट्स टेबल में तीसरे नंबर पर है. इस सीजन अब तक हैदराबाद ने 9 मैच खेले हैं. इस दौरान 6 मैचों में जीत मिली है तो तीन मैचों में हार का सामना करना पड़ा है. वहीं केकेआर के लिए यह सीजन कुछ खास नहीं बीता है. केकेआर ने अब तक आठ मैच खेले हैं. इस दौरान सिर्फ दो मैच ही जीते हैं. अंक तालिका में कोलकाता नाइट राइडर्स 8वें नंबर पर है.

हेड टू हेड में कौन आगे?

सनराइजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच हेड टू हेड में अजिंक्य रहाणे की केकेआर काफी आगे है. कोलकाता ने अब तक हैदराबाद को 20 बार हराया है. वहीं SRH अब तक केकेआर को सिर्फ 11 मैचों में हरा सकी है. हैदराबाद के मैदान पर हेड टू हेड का आंकड़ा 4-3 है, जिसमें भी केकेआर आगे है.

राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम की पिच रिपोर्ट  

हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के लिए मुफीद मानी जाती है. यहां हाई स्कोरिंग मैच देखने को मिलते हैं. दिन का मैच है. ऐसे में गर्मी काफी रहेगी. टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी का फैसला ले सकती है.

मैच प्रिडिक्शन 

हमारा मैच प्रिडिक्शन मीटर कह रहा है कि इस मैच में पहले बैटिंग करने वाली टीम की जीत की उम्मीद ज्यादा है. यानी आज डिफेंड होगा. इस वीक सभी मैचों में चेज करने वाली टीम जीती है. ऐसे में आज उलटफेर हो सकता है.

सनराइजर्स हैदराबाद की संभावित प्लेइंग इलेवन अभिषेक शर्मा, ट्रेविस हेड, ईशान किशन (विकेटकीपर), हेनरिक क्लासेन, नितीश कुमार रेड्डी, सलिल अरोड़ा, अनिकेत वर्मा, पैट कमिंस (कप्तान), हर्ष दुबे, साकिब हुसैन और प्रफुल्ल हिंगे

इम्पैक्ट प्लेयर- ईशान मलिंगा

कोलकाता नाइट राइडर्स की संभावित प्लेइंग इलेवन अजिंक्य रहाणे (कप्तान), टिम सीफर्ट/ फिन एलन, कैमरून ग्रीन, अंगकृष रघुवंशी (विकेटकीपर), रोवमैन पॉवेल, रिंकू सिंह, सुनील नरेन, रमनदीप सिंह, अनुकूल रॉय, वैभव अरोड़ा और कार्तिक त्यागी

इम्पैक्ट प्लेयर- वरुण चक्रवर्ती

‘दूध की कीमतों में 4 रुपये की बढ़ोतरी, इस राज्य ने लिया बड़ा फैसला’

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देश में गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से लोग परेशान हो रहे हैं तो वहीं दूसरी और अब दूध के दामों में भी बढ़ोत्तरी ने लोगों की चिताएं और बढ़ा दी हैं. ओडिशा मिल्क एंड डेयरी कोऑपरेटिव फेडरेशन (ओएमएफईडी) ने राज्य भर में दूध की कीमत में 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है.

Strait of Hormuz: हॉर्मुज के ‘चक्रव्यूह’ से निकला भारत का एलपीजी टैंकर ‘सर्व शक्ति’ हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार करने में सफल’

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Strait of Hormuz अमेरिका-ईरान तनाव और नाकेबंदी के बीच भारत से जुड़ा एलपीजी टैंकर ‘सर्व शक्ति’ हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार करने में सफल रहा.

भारत से जुड़ा एलपीजी टैंकर ‘सर्व शक्ति’ हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहा है. ऐसे समय में जब अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान तनाव के कारण इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है, यह पारगमन भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. MarineTraffic के आंकड़ों के मुताबिक, एलपीजी वाहक ‘सर्व शक्ति’ ईरान के लारक द्वीप के करीब से गुजरा और इस चोकपॉइंट से गुजरने के लिए तेहरान द्वारा निर्धारित मार्ग का पालन किया. यह जहाज 45,000 टन गैस और 18 भारतीय चालक दल के सदस्यों को लेकर विशाखापत्तनम के एक बड़े एलएनजी टर्मिनल की ओर जा रहा है.

संकट के बीच दुर्लभ सफर
मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला ‘सर्व शक्ति’ जहाज, जिसमें करीब 45,000 टन एलपीजी (जो आमतौर पर खाना पकाने में इस्तेमाल होती है) लदी है, शनिवार को ईरान के लारक और क़ेश्म द्वीपों के पास से गुजरते हुए ओमान की खाड़ी में प्रवेश करता दिखाई दिया.  यह जहाज पहले भी पर्शियन गल्फ और भारतीय बंदरगाहों के बीच आवाजाही करता रहा है और फिलहाल यह भारत की ओर बढ़ने का सिग्नल दे रहा है. जहाज पर भारतीय चालक दल होने की जानकारी भी प्रसारित की जा रही है, जो ईरान युद्ध के बाद सुरक्षा के तौर पर अपनाई जाने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है.

इंडियन ऑयल खरीदार, पहली बड़ी आवाजाही

ब्लूमबर्ग द्वारा देखे गए एक शिपिंग दस्तावेज के अनुसार, इस कार्गो का खरीदार सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन है. हालांकि कंपनी ने इस पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. ‘सर्व शक्ति’ की यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि यह अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े जहाजों पर नाकेबंदी शुरू होने के बाद भारत से जुड़े किसी टैंकर का पहला दर्ज पारगमन है. इस नाकेबंदी के बाद हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या लगभग शून्य हो गई थी.

ऊर्जा संकट से जूझता भारत, एलपीजी की भारी कमी
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता होने के नाते भारत इस समय गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. मिडिल ईस्ट से सप्लाई बाधित होने के कारण देश में एलपीजी की कमी से घबराहट, लंबी कतारें और सीमित आपूर्ति की स्थिति बन गई है. नई दिल्ली ने फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से एलपीजी जहाजों के सुरक्षित पारगमन पर खास ध्यान दिया है. इसके तहत भारतीय बंदरगाहों को इन टैंकरों को प्राथमिकता देने और तेजी से अनलोडिंग करने के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया गया है.

तनाव के बीच बाधित हुआ था ट्रांजिट
अप्रैल के एक सप्ताहांत में स्थिति तब और बिगड़ गई जब ईरान ने पहले रास्ता खोलने की बात कही, लेकिन बाद में उसकी सेना ने गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों पर फायरिंग कर दी, जिससे कई जहाजों को वापस लौटना पड़ा. हालांकि ‘देश गरिमा’ नाम का एक भारतीय टैंकर ट्रांसपोंडर बंद करके किसी तरह निकलने में सफल रहा था.

हॉर्मुज में अब भी ठप ट्रैफिक, भारत ने उठाए कदम

तब से हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप बनी हुई है. इस दौरान भारत ने तेहरान के साथ द्विपक्षीय बातचीत के जरिए आठ एलपीजी जहाजों को इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है और अन्य विकल्पों पर भी काम कर रहा है. भारत ने घरेलू एलपीजी उत्पादन को 60% बढ़ाकर 54,000 टन कर दिया है, जबकि खपत घटकर 80,000 टन प्रतिदिन रह गई है. यह जानकारी पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने शुक्रवार को दी.

जहाज की यात्रा और तकनीकी चुनौतियां
‘सर्व शक्ति’ फरवरी की शुरुआत में पर्शियन गल्फ में दाखिल हुआ था और इसे दुबई के पास जहाज-से-जहाज ट्रांसफर के जरिए कार्गो मिला था, हालांकि कार्गो का सटीक स्रोत स्पष्ट नहीं हो पाया है. हॉर्मुज से गुजरने में आमतौर पर 10 से 14 घंटे लगते हैं, लेकिन इस क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप के कारण जहाज की लोकेशन गलत दिखाई दे सकती है. कई जहाज अपनी लोकेशन छिपाने के लिए ट्रांसपोंडर बंद भी कर देते हैं. इस जहाज का प्रबंधन दुबई स्थित फोरसाइट ग्रुप सर्विसेज लिमिटेड के पास है, जबकि इसका मालिक झे यिन शान झोउ नंबर 4 तियानजिन बताया गया है, जो उसी पते से जुड़ा है. हालांकि कंपनी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

छत्तीसगढ़ में डिजिटल जनगणना की शुरुआत, मोबाइल ऐप से जुटाई जा रही जानकारी…

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छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू हो चुका है, जिसमें 51 हजार से ज्यादा कर्मचारी घर-घर जाकर डिजिटल माध्यम से डेटा जुटा रहे हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह मोबाइल ऐप आधारित है और नागरिकों की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी।

पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना

इस बार की जनगणना खास है क्योंकि इसे पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है। प्रगणक मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाएं और परिसंपत्तियों से जुड़े कुल 33 सवालों का डेटा दर्ज कर रहे हैं। इससे प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक होगी।

ड्यूटी से गायब कर्मचारियों पर सख्ती

प्रशासन ने जनगणना कार्य को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। रायपुर नगर निगम में ड्यूटी पर अनुपस्थित पाए गए 44 कर्मचारियों को जनगणना अधिनियम 1948 और छत्तीसगढ़ सिविल आचरण नियमों के तहत नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि इस कार्य में बाधा डालना या मना करना दंडनीय अपराध है।

दुर्गम क्षेत्रों में भी शानदार काम

बस्तर जिले के तोकापाल तहसील के ग्राम गाटम में एक प्रगणक ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद पहले ही दिन अपना काम पूरा कर मिसाल पेश की। पहले दिन ही जिला कलेक्टर और नगर निगम आयुक्तों ने फील्ड में जाकर निरीक्षण किया और कर्मचारियों का उत्साह बढ़ाया।

लोगों ने खुद भरी अपनी जानकारी

डिजिटल साक्षरता का असर भी इस अभियान में साफ दिखा। 16 से 30 अप्रैल के बीच 1,49,862 परिवारों ने वेब पोर्टल के जरिए खुद अपनी गणना (Self Enumeration) पूरी की। यह लोगों की जागरूकता और तकनीक के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

जानकारी पूरी तरह सुरक्षित

जनगणना निदेशालय ने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि उनकी सभी व्यक्तिगत जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूरी तरह गोपनीय रहेगी। इस डेटा का उपयोग न तो टैक्स, न पुलिस जांच और न ही कोर्ट केस में किया जा सकता है। यहां तक कि RTI के जरिए भी व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं की जाएगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल सरकारी योजनाओं और देश के विकास के लिए किया जाएगा।

सही जानकारी देना जरूरी

प्रशासन ने प्रदेश के नागरिकों से अपील की है कि जब भी प्रगणक उनके घर आएं, उन्हें सही और पूरी जानकारी दें। आपका सहयोग देश के विकास और बेहतर योजनाओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।

‘NEET UG 2026 : देशभर में आज NEET-UG 2026 की परीक्षा आयोजित की जा रही है’

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NEET-UG 2026 की परीक्षा आज देशभर में आयोजित हो रही है, जिसमें 22.79 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। कड़े नियम, बायोमेट्रिक जांच और कई शहरों में विशेष व्यवस्थाओं के बीच परीक्षा को निष्पक्ष बनाने पर जोर दिया गया है।

NEET UG 2026 News  देशभर में आज NEET-UG 2026 की परीक्षा आयोजित की जा रही है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित इस परीक्षा में 22.79 लाख उम्मीदवारों ने पंजीयन कराया है। यह परीक्षा देश के 566 शहरों और विदेश के 14 शहरों में ऑफलाइन मोड में होगी। परीक्षा का समय दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक रहेगा।

परीक्षा नियम और एडवाइजरी

परीक्षा को लेकर NTA ने सख्त एडवाइजरी जारी की है, जिसमें ड्रेस कोड और परीक्षा केंद्र में ले जाने वाली (permissible items) को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई है। रायपुर जिले में परीक्षा के लिए 26 केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षार्थियों के लिए प्रवेश का समय सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। 1:30 बजे के बाद लेट आने वाले किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। पूरी परीक्षा प्रक्रिया में बायोमेट्रिक जांच और एंटी-चीटिंग सिस्टम के जरिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी ।

भोपाल में व्यवस्था

राजधानी भोपाल में नीट यूजी परीक्षा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शहर के 33 सेंटर्स पर लगभग 14 हजार अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाएंगे। परीक्षा दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक चलेगी। केंद्रों के अंदर प्रवेश की प्रक्रिया सुबह 11 बजे से शुरू हो जाएगी और 1:30 बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं मिलेगा। अगर किसी छात्र का बायोमेट्रिक फेल होता है, तो वे लिखित अंडरटेकिंग देकर परीक्षा दे सकेंगे।

इंदौर में विशेष सुविधा

वहीं इंदौर की बात करें तो यहाँ 57 सेंटर्स पर 23 हज़ार से ज़्यादा छात्र नीट यूजी की परीक्षा देंगे। सभी सेंटर्स पुलिस की निगरानी में रहेंगे। यहां सुबह 11 बजे से प्रवेश शुरू हो जाएगा। इंदौर आने वाले छात्रों के लिए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। एआईसीटीएसएल (AICTSL) और रेलवे स्टेशन से प्रशासन द्वारा एसी बसें चलाई जाएंगी। यह निःशुल्क बस सेवा सुबह 9 बजे से शुरू हो जाएगी।