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Shukra Gochar 2026: शुक्र गोचर से इन 4 राशियों की लगेगी लॉटरी, मां लक्ष्मी भर देंगी खाली तिजोरियां!

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Venus Transit 2026: वैदिक ज्योतिष में शुक्रदेव को भौतिक सुख, विलासिता, प्रेम और धन का मुख्य कारक माना जाता है. जब भी शुक्र अपनी स्वराशि या उच्च राशि में प्रवेश करते हैं, तो संसार में सुख-सुविधाओं की लहर दौड़ जाती है.19 अप्रैल 2026 को शुक्रदेव अपनी ही राशि वृषभ में गोचर करने जा रहे हैं. शुक्र का अपनी राशि में होना एक अत्यंत बलवान स्थिति है, जो आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोलती है. इस गोचर के दौरान मुख्य रूप से चार राशियां ऐसी हैं, जिनके जीवन में धन का आगमन होगा और सुख-साधनों की प्राप्ति होगी. ग्रहों का यह मंगलकारी बदलाव व्यक्तिगत और आर्थिक उन्नति के लिए बहुत ही शुभ फल देने वाला माना जा रहा है.

शुक्र गोचर 2026: भाग्यशाली राशियों का आर्थिक भविष्य’वृषभ राशि: स्वयं राशि स्वामी बढ़ाएंगे ऐश्वर्य’

शुक्रदेव आपके प्रथम भाव में गोचर कर रहे हैं, जिससे व्यक्तित्व में आकर्षण और आत्मविश्वास बढ़ेगा. आर्थिक रूप से यह समय वरदान जैसा है. व्यवसाय में नए निवेश से बड़ा लाभ होगा और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. धन की कमी से रुके काम अब तेजी से पूरे होंगे. लक्ष्मी जी की कृपा से भौतिक सुख-साधनों और विलासिता में भारी वृद्धि होने के संकेत हैं.

कर्क राशि: आय के स्रोतों में होगी भारी वृद्धि

शुक्रदेव आपके लाभ स्थान में गोचर कर रहे हैं, जिससे आय के एक से अधिक स्रोत बनेंगे. नौकरीपेशा जातकों के लिए पदोन्नति और वेतन वृद्धि की प्रबल संभावना है. सामाजिक संपर्कों से कोई बड़ा प्रोजेक्ट मिल सकता है, जिससे जमा पूंजी बढ़ेगी. घर में बरकत रहेगी और यह अपनी बड़ी इच्छाओं को पूरा करने तथा आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने का सबसे उत्तम समय है.

मकर राशि: राज योग का मिलेगा पूर्ण लाभ

राज योग कारक शुक्र आपके पंचम भाव में गोचर कर रहे हैं. आपकी रचनात्मकता और सहजता बढ़ेगी, जिससे करियर में धन लाभ के नए अवसर मिलेंगे. शेयर बाजार या निवेश से अचानक लाभ होने के योग हैं. इस दौरान लिया गया कोई साहसी निर्णय भविष्य में बड़ी आर्थिक मजबूती प्रदान करेगा. लक्ष्मी जी के आशीर्वाद से आपकी सुख-सुविधाओं पर खर्च करने की क्षमता भी बढ़ेगी.

कुंभ राशि: संपत्ति और सुख-साधनों का विस्तार

शुक्रदेव आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहे हैं, जिससे भौतिक सुखों के द्वार खुलेंगे. नया घर, भूमि या वाहन खरीदने की आपकी बड़ी इच्छा अब पूरी हो सकती है. पिता की संपत्ति से लाभ मिलने के संकेत हैं और पुराने विवाद सुलझेंगे. कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति मजबूत होगी, जिससे मानसिक सुकून मिलेगा. आर्थिक स्थिरता आने से घर-परिवार में खुशहाली और समृद्धि का माहौल रहेगा.

शुक्र गोचर के दौरान सुख-समृद्धि पाने के विशेष उपाय

शुक्रदेव की असीम कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन में ऐश्वर्य बढ़ाने के लिए आप इन सरल लेकिन प्रभावशाली बातों का पालन कर सकते हैं:

साफ-सफाई का महत्व: शुक्रदेव को स्वच्छता अत्यंत प्रिय है. अपने घर और कार्यस्थल को व्यवस्थित रखें. फटे हुए पुराने वस्त्रों का त्याग करें.

सुगंध का उपयोग: प्रतिदिन स्नान के बाद चंदन या गुलाब के इत्र का प्रयोग करें. सुगंधित वातावरण नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आपके आकर्षण को बढ़ाता है.

स्त्रियों का सम्मान: शुक्र ग्रह स्त्री शक्ति का प्रतीक है. अपने घर की महिलाओं, विशेषकर मां और जीवनसाथी का सम्मान करें, इससे भाग्य की बाधाएं दूर होती हैं.

शुक्रवार का व्रत: यदि संभव हो, तो शुक्रवार के दिन नमक का सेवन न करें और मां लक्ष्मी की कपूर से आरती करें.

सफेद वस्तुओं का दान: शुक्रवार को चावल, चीनी, दूध या सफेद मिठाई का दान किसी जरूरतमंद को करें.

एयरलाइंस द्वारा जेट ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण उड़ानों में कटौती’

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उड़ानों में कटौती का कारण

विश्वभर में एयर ट्रैवलर्स को और अधिक व्यवधानों के लिए तैयार रहना पड़ सकता है, क्योंकि एयरलाइंस जेट ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि का जवाब दे रही हैं। विभिन्न क्षेत्रों में एयरलाइंस अपनी उड़ान अनुसूचियों में कटौती कर रही हैं और विमानों को ग्राउंड कर रही हैं ताकि बढ़ती परिचालन लागत को प्रबंधित किया जा सके, जिससे आगामी यात्रा सत्रों की स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

हाल ही में KLM ने अपनी नेटवर्क में महत्वपूर्ण कमी की घोषणा की है। डच ध्वज वाहक ने कहा है कि वह अगले महीने एम्स्टर्डम के शिपहोल हवाई अड्डे पर 80 राउंड-ट्रिप उड़ानों को रद्द करेगा। यह निर्णय कई वैश्विक साथियों के साथ मेल खाता है, जिनमें यूनाइटेड एयरलाइंस, लुफ्थांसा और कैथे पैसिफिक शामिल हैं, जिन्होंने पहले ही वित्तीय दबाव को सीमित करने के लिए सेवाओं में कमी की है।

एविएशन एनालिटिक्स फर्म Cirium के आंकड़ों के अनुसार, मई के लिए वैश्विक उड़ान क्षमता में लगभग 3 प्रतिशत की कमी आई है। दुनिया की 20 सबसे बड़ी एयरलाइनों में से लगभग सभी ने परिचालन में कमी की है, जो उद्योग में समन्वित वापसी का संकेत देती है। विश्लेषकों का कहना है कि स्थिति में सुधार से पहले और बिगड़ने की संभावना है। Cirium के वरिष्ठ सलाहकार रिचर्ड इवांस ने कहा, “यह अत्यधिक संभावना है कि और भी कटौती आगे आएंगी,” जो विमानन योजना में बढ़ती अनिश्चितता को उजागर करता है।

यह उथल-पुथल, जो पहले मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के कारण केंद्रित थी, अब वैश्विक स्तर पर फैल गई है, जो गर्मियों की यात्रा की मांग को खतरे में डाल रही है। तेल आपूर्ति मार्गों पर चल रहा दबाव, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की पाबंदियां शामिल हैं, उद्योग की भावना पर भारी पड़ रही हैं। डेल्टा एयर लाइन्स के सीईओ एड बास्टियन ने इस दबाव को संक्षेप में बताया, stating, “हम जो भी उड़ानें कर रहे हैं, जो कि सीमांत पर हैं, शायद हमें जो लाभ चाहिए, वह नहीं दे रही हैं, उन्हें फिर से विचार किया जाएगा,” उन्होंने कहा, “यह उद्योग के लिए एक परीक्षा होगी।”

ईंधन आपूर्ति की चिंताएं दबाव बढ़ाती हैं

बढ़ती कीमतों के अलावा, एयरलाइंस जेट ईंधन की उपलब्धता को लेकर भी चिंताओं का सामना कर रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने चेतावनी दी है कि यूरोप के पास “शायद छह सप्ताह” की आपूर्ति बची है। कई एयरलाइंस, जैसे कि रयानएयर और वर्जिन अटलांटिक, ने सतर्क दृष्टिकोण पेश किया है, जिसमें ईंधन आपूर्ति पर दृश्यता केवल मध्य-मई तक ही है। यूरोपीय संघ ने भी संभावित कमी की चेतावनी दी है और यदि आपूर्ति में व्यवधान बढ़ता है तो आकस्मिक उपाय तैयार कर रहा है। इस बीच, ईरान ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। हालांकि, बाजार विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि स्थिति अस्थिर बनी हुई है।

एयरलाइंस लागत-सुरक्षा मोड में प्रवेश कर रही हैं

एयरलाइंस अब विस्तार के बजाय वित्तीय अस्तित्व को प्राथमिकता दे रही हैं। लुफ्थांसा ने क्षमता में कटौती की है, विमानों को रिटायर किया है, और अपने नेटवर्क में परिचालन को समायोजित किया है। अन्य एयरलाइंस, जैसे एयर कनाडा, क्यूंटास, और कैथे पैसिफिक ने भी मार्गों या आवृत्तियों में कमी की है। कुछ ऑपरेटर, विशेष रूप से यूरोप में, ईंधन हेजिंग रणनीतियों द्वारा आंशिक रूप से सुरक्षित हैं, जबकि कई अमेरिकी और एशियाई एयरलाइंस अस्थिर ईंधन लागत के प्रति सीधे संवेदनशील हैं। इसके परिणामस्वरूप, लंबी दूरी और क्षेत्रीय नेटवर्क दोनों में रद्दीकरण और मार्ग निलंबन अधिक सामान्य होते जा रहे हैं।

Mushroom Farming: दुनिया में सबसे ज्यादा कहां होती है मशरूम की खेती, जानें किस पायदान पर आता है India?

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Mushroom Farming: मशरूम की खेती आज के समय में एक लाभदायक और आसान खेती बन चुकी है. साथ ही यह एक बहुत ही लोकप्रिय और पोषक आहार है .यह एक तरह का कवकीय क्यूब होता है, जिसे खाने में सब्जी अचार और पकोड़े जैसी चीजों को बनाने के इस्तेमाल किया जाता है. मशरूम के अंदर कई तरह के पोषक तत्व मौजूद होते है, जो मानव शरीर के लिए काफी लाभदायक होते है. जैसे मशरूम में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, मिनरल और विटामिन जैसे उच्च स्तरीय गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते है, इसलिए इसे सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. कम जगह में और कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए भी अच्छी कमाई का जरिया बन रही है.

दुनिया में सबसे ज्यादा मशरूम की खेती कहां होती है?

दुनिया में सबसे ज्यादा मशरूम की खेती चीन में होती है. चीन इस क्षेत्र में सबसे आगे है और पूरी दुनिया भर में मशरूम उत्पादन का सबसे बडा हिस्सा यहीं से आता है. साथ ही यहां के किसान आधुनिक तकनीक और बेहतर तरीके अपनाकर बहुत अधिक मात्रा में मशरूम उगाते हैं. यहां मशरूम की खेती ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में की जाती है. चीन के साथ- साथ अमेरिका, नीदरलैंड, भारत और जापान जैसे देश भी मशरूम उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इन देशों में भी मशरूम की खेती के लिए नई तकनीक और अच्छे संसाधनों का उपयोग किया जाता है.

मशरूम की खेती क्यों हो रही है लोकप्रिय?

मशरूम की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है क्योंकि इसमें कम जगह और कम पानी की जरूरत होती है. साथ ही इसे घर के अंदर भी आसानी से उगाया जा सकता है. इसके अलावा बाजार में इसकी मांग भी लगातार बढ रही है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा भी मिल रहा है

भारत में मशरूम की खेती

भारत में भी मशरूम की खेती तेजी से बढ रही है. यहां पर मशरूम की खेती मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उड़ीसा में बड़े पैमाने पर होती है. साथ ही सोलन (हिमाचल प्रदेश) को “भारत का मशरूम शहर” कहा जाता है. इसके अलावा, उत्तर-पूर्वी राज्यों और बिहार-झारखंड में भी मशरूम की खेती लोकप्रिय हो रही है.

ईरान के सख्त कदमों के बीच भारतीय टैंकर की सुरक्षित आवाजाही’

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तनावपूर्ण स्थिति का सामना

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी सख्ती बढ़ा दी है, जिससे वहां का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। इस बीच, भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर ‘देश गरिमा’ इस समुद्री मार्ग से सुरक्षित निकलने में सफल रहा।

हालांकि, सभी जहाजों के लिए स्थिति सामान्य नहीं थी। टैंकरट्रैकर्सडॉटकॉम और यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस की रिपोर्ट के अनुसार, ओमान के निकट ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौकाओं ने गोलीबारी की। इस घटना के बाद, कई जहाजों को जैसे कि देश वैभव, देश विभोर, सनमार हेराल्ड और जग अर्नव को अपना मार्ग बदलना पड़ा या वापस लौटना पड़ा।

भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

इस घटना को गंभीरता से लेते हुए, भारतीय विदेश मंत्रालय ने ईरान में तैनात अपने राजदूत को तलब किया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भारतीय जहाजों पर हुई गोलीबारी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। राहत की बात यह है कि सभी टैंकर और उनके चालक दल सुरक्षित हैं, लेकिन भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा।

विदेश मंत्रालय का रुख

विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि भारत हमेशा से नाविकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता आया है। भारत ने ईरान को याद दिलाया कि अतीत में ईरान ने भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करने में सहयोग किया है।

विदेश सचिव ने ईरानी राजदूत से अनुरोध किया कि वे तेहरान को भारत की चिंताओं से अवगत कराएं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय जहाजों की आवाजाही को जल्द से जल्द सुरक्षित और सामान्य बनाने के लिए उचित कदम उठाएं। ईरानी राजदूत ने भारत को आश्वासन दिया है कि वे इन चिंताओं को अपनी सरकार तक पहुंचाएंगे।

फारस की खाड़ी में जहाजों की स्थिति

आंकड़ों के अनुसार, ‘देश गरिमा’ मार्च की शुरुआत से गुजरने वाला 10वां भारतीय जहाज था। वर्तमान में फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले 14 जहाज मौजूद हैं।

PM मोदी के वाराणसी दौरे को लेकर तैयारियां तेज, 5000 करोड़ रुपये से अधिक की देंगे सौगात’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) अप्रैल के अंतिम सप्ताह में अपने संसदीय वाराणसी दौरे पर आ सकते हैं, पीएम मोदी का यह वाराणसी दौरा बेहद अहम माना जा रहा है. पीएम मोदी के दौरे को लेकर वाराणसी जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने तैयारी को शुरू कर दी है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार – वाराणसी के एक से दो दिवसीय दौरे पर पीएम मोदी हजारों करोड़ रुपये परियोजनाओं की सौगात काशी वालों को दे सकते हैं.

इस संबंद में एबीपी लाइव को मिली जानकारी के अनुसार, अप्रैल के अंतिम सप्ताह यानी 28 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के एक दिवसीय दौरे पर आ सकते हैं. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काशी दौरे को लेकर अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. वहीं, वाराणसी जिला प्रशासन और पुलिस की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था और कार्यक्रमों को लेकर की जाने वाली तैयारी से यह संभावना जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काशी दौर लगभग तय है.

5000 करोड़ रुपये अधिक की सौगात देंगे पीएम मोदी

सूत्रों के हवाल से खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वाराणसी दौरे पर काशी को 5000 करोड़ रुपये से अधिक की सौगात देंगे, जो बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी होंगी. काशी और आसपास के जनपद में जिन प्रोजेक्ट कार्य का निर्माण कार्य पूरा हो गया है उनके शुभारंभ की रूपरेखा तैयार की जा रही है.

पीएम मोदी काशी में जनसभा को कर सकते हैं संबोधित

अप्रैल के अंतिम सप्ताह में काशी के संभावित दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक विशाल जनसभा को भी संबोधित कर सकते हैं. इसको लेकर भारतीय जनता पार्टी पदाधिकारीयों की तरफ से जगह को निर्धारित करने का भी कार्य तेजी से किया जा रहा है. बहुत जल्द उस कार्यक्रम स्थल को भी तय कर लिया जाएगा. ऐसे में देखना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी के मंच से क्या अहम बात कहते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने बिष्णुपुर में टीएमसी पर साधा निशाना, महिलाओं के लिए किए कई वादे’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के बिष्णुपुर में आयोजित ‘विजय संकल्प सभा’ में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है, तो गरीबों को मुफ्त राशन प्रदान किया जाएगा, जिसे कोई भी छीन नहीं सकेगा।

महिलाओं के लिए आर्थिक लाभ

सभा के दौरान, पीएम मोदी ने बंगाल की महिलाओं के लिए विभिन्न आर्थिक योजनाओं की घोषणा की।

आवास योजना: पक्के घर के लिए 1.5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।

स्वास्थ्य सुरक्षा: महिलाओं को आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा।

वित्तीय सहायता: ‘मातृ शक्ति भरोसा कार्ड’ के माध्यम से महिलाओं को हर साल 36,000 रुपये मिलेंगे।

अन्य मदद: गर्भवती महिलाओं को 21,000 रुपये, बच्चे के जन्म पर 5,000 रुपये और बेटियों की शिक्षा के लिए 50,000 रुपये की सहायता दी जाएगी।

टीएमसी पर आरोप

प्रधानमंत्री ने टीएमसी सरकार पर भ्रष्टाचार और केंद्रीय योजनाओं को रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि टीएमसी को आदिवासी महिलाओं से नफरत है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान करने का मुद्दा उठाते हुए, पीएम ने कहा कि टीएमसी ने आदिवासी नेता के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा किया, जैसे कांग्रेस ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के खिलाफ किया था। इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताया गया।

टीएमसी नेताओं को चेतावनी

पीएम मोदी ने टीएमसी के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके बड़े नेताओं की बातें असली ‘एग्जिट पोल’ हैं, जो दर्शाती हैं कि वे हार के डर से परेशान हैं। उन्होंने बिष्णुपुर में सिंडिकेट और भ्रष्ट लोगों को सख्त चेतावनी दी। पीएम ने कहा कि टीएमसी के सभी गुंडों को 29 अप्रैल से पहले अपने नजदीकी पुलिस थाने में जाकर सरेंडर करना चाहिए, क्योंकि 4 मई के बाद किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। अंत में, उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अब जागरूक हो चुकी है और इस सरकार को हटाने का संकल्प ले चुकी है।

ग्लोबल टेंशन, लोकल इम्पैक्ट: मिडिल ईस्ट टेंशन ने थामी LPG की रफ्तार, खपत में आई 13% की कमी’

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मार्च में भारत में कुकिंग गैस (LPG) की खपत में 13 फ़ीसदी की भारी गिरावट आई. इसकी सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट टेंशन है. जिसकी वजह से सप्लाई में रुकावटें आईं, जिससे घरेलू रसोई और कमर्शियल, दोनों तरह के यूजर्स के लिए गैस की उपलब्धता पर असर पड़ा.

मार्च में LPG की खपत 2.379 मिलियन टन रही, जो पिछले साल इसी समय हुई 2.729 मिलियन टन की खपत से 12.8 फीसदी कम थी. भारत अपनी LPG की जरूरत का लगभग 60 फीसदी हिस्सा आयात करता है, जिसका ज्यादातर हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है.

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके जवाब में तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह रास्ता लगभग बंद हो गया था. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से सप्लाई में रुकावट आने के कारण, सरकार ने होटलों जैसे कमर्शियल संस्थानों और उद्योगों को होने वाली LPG की सप्लाई में कटौती कर दी है, ताकि घरेलू रसोई के लिए गैस की उपलब्धता बनी रहे.

थोक एलपीजी की सेल में गिरावट

तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के मुताबिक, मार्च में घरेलू परिवारों को बेचे गए LPG सिलेंडरों की संख्या में 8.1 फ़ीसदी की गिरावट आई और यह 2.219 मिलियन टन रही, जबकि गैर-घरेलू यूजर्स को बेचे गए सिलेंडर्स की संख्या में लगभग 48 फीसदी की कमी आई. थोक LPG की बिक्री में 75.5 फ़ीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई. PPAC के आंकड़ों से पता चला कि खपत में कमी आई है, जबकि सरकार का दावा था कि LPG की सप्लाई सामान्य है और घरेलू यूजर्स की सभी मांगें पूरी की जा रही हैं. इस कमी को पूरा करने के लिए, सरकार ने रिफाइनरीज को निर्देश दिया कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले फीडस्टॉक को LPG उत्पादन बढ़ाने की ओर मोड़ दें. PPAC के आंकड़ों के मुताबिक, इस कदम से मार्च में घरेलू LPG का उत्पादन बढ़कर 1.4 मिलियन टन हो गया, जो एक साल पहले 1.1 मिलियन टन था.

घरेलू प्रोडक्शन में इजाफा

इस प्रयास के कारण, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल 2025 से मार्च 2026) में LPG का उत्पादन बढ़कर 13.1 मिलियन टन हो गया, जबकि पिछले दो वित्त वर्षों में यह 12.8 मिलियन टन था. मार्च के महीने को अपवाद मान लें, तो भी मार्च 2026 में समाप्त हुए वित्त वर्ष में LPG की खपत में 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 33.212 मिलियन टन तक पहुंच गई. हाल के वर्षों में LPG की खपत में लगातार बढ़ोतरी हुई है. इसकी मुख्य वजह सरकार के वे प्रयास हैं जिनके तहत लकड़ी और अन्य प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों की जगह साफ-सुथरे विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है. युद्ध के कारण कई खाड़ी देशों में हवाई क्षेत्र बंद होने और उड़ानों के रुकने से, मार्च में जेट फ्यूल या ATF की खपत में लगभग कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. यह 807,000 टन रही, जबकि एक साल पहले इसकी बिक्री 801,000 टन थी.

पेट्रोल और डीजल की सेल में इजाफा

युद्ध से प्रभावित इन दो ईंधनों के अलावा, पेट्रोल और डीजल की बिक्री में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखी गई. पेट्रोल की बिक्री 7.6 प्रतिशत बढ़कर 3.78 मिलियन टन हो गई, जबकि डीजल की खपत 8.1 प्रतिशत बढ़कर 8.727 मिलियन टन हो गई. पूरे वित्त वर्ष के लिए, ATF की बिक्री 2 प्रतिशत बढ़कर 9.161 मिलियन टन हो गई, जबकि पेट्रोल की खपत 6.5 प्रतिशत बढ़कर 42.586 मिलियन टन हो गई. डीजल की खपत 3.6 प्रतिशत बढ़कर 94.705 मिलियन टन हो गई. औद्योगिक ईंधन नेफ्था और फ्यूल ऑयल में क्रमशः 9.9 प्रतिशत और 1.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सड़क बनाने में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन की खपत में 2025-26 में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 8.84 मिलियन टन तक पहुंच गई.

किसान भाई शुरू करें जीरो बजट फार्मिंग, नोट छापने की मशीन बन जाएगी खेती’

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Zero Budget Farming: आज के दौर में खेती को केवल मेहनत का काम समझना पुरानी बात हो गई है. अब यह एक ऐसा स्मार्ट बिजनेस बन चुका है जिसे अगर सही तरीके से किया जाए तो मात्र 1 एकड़ जमीन भी नोट छापने की मशीन साबित हो सकती है. बहुत से किसान भाई अब पारंपरिक खेती के ढर्रे को छोड़कर आधुनिक और नेचुरल फार्मिंग का रास्ता अपना रहे हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब एक छोटे से खेत में मल्टी-लेयर फार्मिंग के जरिए एक साथ 22 तरह की फसलें उगाई गईं. हैरानी की बात तो यह है कि सही मार्केट टाइमिंग और ऑर्गेनिक क्वालिटी के दम पर सिर्फ एक हफ्ते में प्याज जैसी फसल बेचकर 50,000 रुपये तक की कमाई की गई. यह इस बात का सबूत है कि तकनीक और विजन के साथ की गई खेती किसी भी कॉर्पोरेट जॉब से कहीं ज्यादा मुनाफा दे सकती है.

1 एकड़ में 22 फसलों का स्मार्ट मॉडल

अगर आप अपनी 1 एकड़ जमीन से मैक्सिमम रिटर्न चाहते हैं. तो मल्टी-लेयर फार्मिंग सबसे बेस्ट तरीका है. इसमें खेत का मैनेजमेंट इस तरह किया जाता है कि एक ही समय पर अनाज, सब्जियां और फलदार पौधे साथ-साथ बढ़ सकें. इस मॉडल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि एक फसल दूसरी फसल के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है. इस तकनीक में ऊंची फसलें छोटी फसलों को तेज धूप से बचाती हैं. जिससे पानी की बचत होती है. अलग-अलग ऊंचाई की फसलें उगाने से जमीन के एक-एक इंच का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होता है. इस तरीके से खेती करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान का रिस्क जीरो हो जाता है और कमाई का फ्लो बना रहता है.

प्याज और सब्जियों से छप्परफाड़ कमाई

सब्जियों की खेती में टाइमिंग का बहुत बड़ा रोल होता है. अगर आप प्राकृतिक खाद और जीवामृत का इस्तेमाल करके फसल तैयार करते हैं, तो आपकी पैदावार की चमक और स्वाद बाजार में सबसे अलग होता है. हाल ही में देखा गया कि कैसे सही मंडी मैनेजमेंट के जरिए महज 7 दिनों के भीतर प्याज बेचकर 50,000 रुपये का मुनाफा निकाला गया. नेचुरल फार्मिंग की वजह से फसलों की शेल्फ लाइफ ज्यादा होती है. जिससे व्यापारियों से बेहतर रेट मिलते हैं. डिमांड वाले सीजन में शुद्ध और ऑर्गेनिक प्याज की सप्लाई सीधे प्रीमियम ग्राहकों तक की जा सकती है. जब आप बिना केमिकल के शुद्ध फसल उगाते हैं, तो मार्केट में उसकी डिमांड खुद-ब-खुद बढ़ जाती है और मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है.

लागत कम में डबल मुनाफा

खेती को बिजनेस बनाने का सबसे पहला नियम है लागत में कटौती करना. जब हम बाजार से महंगी खाद और कीटनाशक खरीदना बंद कर देते हैं और घर पर ही गोबर-गोमूत्र से खाद तैयार करते हैं, तो खेती की इनपुट कॉस्ट लगभग जीरो हो जाती है. इससे जो भी पैसा फसल बेचने पर मिलता है, वह सीधा किसान का शुद्ध मुनाफा होता है. घर पर बना जीवामृत और नीम का तेल महंगे पेस्टिसाइड्स का खर्चा पूरी तरह खत्म कर देते हैं. मिट्टी की उर्वरता बढ़ने से बार-बार जुताई और बाहरी सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं पड़ती. मार्डन टेक्निक और नैचुरल खाद के मिक्सचर से आप हर हफ्ते खेत से कुछ न कुछ बेचकर मोटी नकदी कमा सकते हैं.

सामंती सोच और विभाजनकारी राजनीति. अखिलेश बोले- महिला आरक्षण बिल गिरना BJP की बड़ी हार’

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महिला आरक्षण बिल पर अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि बीजेपी की सोच सामंती, संकीर्ण और तंग है. महिला आरक्षण ध्यान भटकाने की कोशिश है. आधुनिक महिलाओं के साथ इनकी सोच ठीक नहीं है. बीजेपी की राजनीति दरारवादी है. ये बीजेपी की बदनीयत की बड़ी हार है. अखिलेश यादव ने कहा कि आज हम एक ऐतिहासिक, लोकतांत्रिक जीत के अवसर पर मिल रहे हैं.

उन्होंने कहा कि जब सरकार की बदनीयत की हार हुई है और परिसीमन बिल पास नहीं हो पाया है. संसद में हार का मतलब होता है कि सरकार अब जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व नहीं करती है, ऐसे में उसे बने रहने का कोई हक नहीं है. अखिलेश ने जोर देते हुए कहा कि विपक्ष ही अब सही मायने में जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व कर रहा है.

महिलाएं ही भाजपा को हराएंगी

सपा नेता ने कहा कि भाजपाई नाकारात्मक राजनीति का आधार हमेशा से दरारवादी रहा है. भाजपा वाले सबसे पहले लोगों के बीच अविश्वास पैदा करते हैं, फिर इनलोगों को बांट कर लोगों को आपस में लड़वाते हैं. अखिलेश ने कहा कि भाजपाई सरकार बचाने और सत्ता पाने के लिए कोई भी साजिश कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि महिलाएं ही भाजपा को हराएंगी, भाजपाई सोचते हैं जो पुराने सोच की महिलाएं हैं उनके अपनी ओर कर लें. उन्होंने कहा कि ये टीवी सीरियल की आपसी राजनीति को असल जिंदगी में औरतों के बीच एक लाइन खींचने के लिये इस्तेमाल करना चाहते थे, जिससे महिला एकता ना बना पाएं. उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति इनकी सोच सामंती है.

विपक्ष की एकता ने धूल चटा दी

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा इस बिल के माध्यम से महिलाओं की एकता में दरार डाल कर उनको ठगना चाहती थी लेकिन विपक्ष की एकता ने भाजपाई मंसूबों को धूल चटा दी. ये भाजपा के खिलाफ देश की सक्रिय हो चुकी जन चेतना की जीत है. अखिलेश यादव ने कहा समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता की चाय दुकान पर कार्रवाई हुई और कहा गया एल्युमिनियम में चाय बन रही. सीएम अजय कुमार बिष्ट का कोई खासम खास कोई बैठा तो मेरे घर चले वहां भी एल्युमिनियम ही उपयोग होता. ये लोग नाली से चाय बनाते, जो समाजवादी चाय वाला है इसका चाय अच्छा है, बीजेपी के चाय का दूध खराब है.

YouTube पर वीडियो शेयर करना होगा और आसान, आने वाला है ये नया फीचर, जानिए कैसे करेगा काम’

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इस फीचर की मदद से आप किसी वीडियो के पूरे लिंक की जगह उसका सिर्फ जरूरी हिस्सा शेयर कर पाएंगे. यानी अब आपको अलग से टाइम सेट करने या लिंक एडिट करने की जरूरत नहीं होगी. आप जिस समय से वीडियो शेयर करना चाहते हैं वहीं से वीडियो सीधे प्ले होगा.

अभी तक अगर किसी वीडियो का खास हिस्सा भेजना होता था तो यूजर्स को लिंक कॉपी करके उसमें टाइम मैन्युअली जोड़ना पड़ता था या किसी थर्ड-पार्टी टूल का सहारा लेना पड़ता था. लेकिन नए फीचर के साथ यह प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी बस एक टैप में आप अपनी पसंद का हिस्सा शेयर कर सकेंगे.

यह फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी होगा जो लंबे वीडियो देखते और शेयर करते हैं. जैसे ट्यूटोरियल, इंटरव्यू या एजुकेशनल कंटेंट जहां अक्सर किसी खास पॉइंट को ही दूसरों तक पहुंचाना होता है.

रिपोर्ट के अनुसार, यह नया फीचर YouTube Clips की जगह ले सकता है या उसके उपयोग को सीमित कर सकता है. Clips फीचर के जरिए यूजर्स वीडियो के छोटे हिस्से बनाकर शेयर करते थे लेकिन अब कंपनी एक आसान और तेज विकल्प की ओर बढ़ रही है. हालांकि पहले से बने Clips उपलब्ध रहेंगे लेकिन आगे नए क्लिप बनाने का तरीका बदल सकता है.

फिलहाल कंपनी ने इस फीचर के लॉन्च की आधिकारिक तारीख नहीं बताई है. लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी टेस्टिंग मोबाइल ऐप पर शुरू हो चुकी है. आने वाले समय में यह फीचर सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध हो सकता है.

यह अपडेट वीडियो शेयरिंग को पहले से ज्यादा तेज और सरल बना देगा. खासकर उन यूजर्स के लिए जो अक्सर खास पलों को शेयर करना चाहते हैं उनके लिए यह फीचर काफी उपयोगी साबित होगा.