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US PoK Map: अमेरिका-भारत ट्रेड डील के साथ जारी नक्शे ने बढ़ाई पाकिस्तान की चिंता, चीन को भी लिया लपेटे में, जानें पूरी बात…

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भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील के फ्रेमवर्क के ऐलान के साथ एक और बात ने सबका ध्यान खींचा है. अमेरिका की ट्रंप सरकार की ओर से जारी भारत के नए नक्शे ने पाकिस्तान को असहज कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई है.

अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस ने ट्रेड डील की जानकारी देते समय जो नक्शा जारी किया, उसमें पूरा जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाया गया है.

हालांकि भारत हमेशा से यह साफ कहता आया है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और इसके लिए किसी बाहरी देश की मंजूरी की जरूरत नहीं है. इसके बावजूद अमेरिका की तरफ से इस तरह का नक्शा जारी किया जाना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक झटका माना जा रहा है.

क्यों अहम है यह नक्शा?

अब तक अमेरिका की सरकारी एजेंसियां नक्शों में PoK को लेकर संतुलित रुख अपनाती रही थीं, ताकि पाकिस्तान की आपत्तियों से बचा जा सके. लेकिन ट्रंप प्रशासन के इस ताजा नक्शे में पाकिस्तान के दावों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है. यही वजह है कि यह कदम अमेरिका की पुरानी नीति से अलग माना जा रहा है. इसका समय भी काफी अहम है. हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर लंबी बातचीत चली थी. पहले ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था, जो सहयोगी देशों में सबसे ज्यादा था. अब अंतरिम समझौते के तहत इसे घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है.

अक्साई चिन को भी भारत का हिस्सा दिखाया गया

इस नक्शे की एक और खास बात यह है कि इसमें अक्साई चिन को भी भारत का हिस्सा दिखाया गया है. यह वही इलाका है जिस पर चीन लंबे समय से दावा करता रहा है. पहले भारत ने कई बार विदेशी एजेंसियों द्वारा जारी गलत नक्शों पर आपत्ति जताई थी. ट्रंप प्रशासन का यह कदम भारत की उन्हीं आपत्तियों को मान्यता देने जैसा माना जा रहा है.

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

रणनीतिक मामलों के जानकारों ने इस कदम की सराहना की है. रिटायर्ड मेजर गौरव आर्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह अमेरिका का शानदार कदम है. कई लोगों का कहना है कि यह पाकिस्तान की हालिया कूटनीतिक कोशिशों के लिए बड़ा झटका है.

ट्रेड डील से भारत को फायदा

इस अंतरिम ट्रेड डील से भारत को स्टील, एल्युमिनियम, फार्मा, ऑटो और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में राहत मिली है. वहीं कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भारत ने अपने हितों की पूरी रक्षा की है.

कमाई का शानदार मौका! IPO लेकर आ रही है InCred Holdings, जानें इश्यू साइज से लेकर बाकी सभी डिटेल…

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प्राइवेट इक्विटी फर्म केकेआर समर्थित इनक्रेड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (InCred Holdings) अपना आईपीओ लेकर आ रही है. गुरुवार, 5 फरवरी को मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से कंपनी को इस इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के जरिए फंड जुटाने की मंजूरी मिल गई है.

इससे पहले मामले से जुड़े लोगों के हवाले से पीटीआई ने 9 नवंबर, 2025 को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि फाइनेंशियल सर्विसेज प्लेटफॉर्म इनक्रेड ने पिछले नवंबर में प्री-फाइलिंग रूट के जरिए सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DHRP) जमा कराया था. इसका मतलब है कि कंपनी ड्राफ्ट पेपर्स में IPO की जानकारी का खुलासा बाद के चरणों तक रोक सकती है. यह बाजार की स्थितियों के आधार पर जरूरी जानकारियों का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस लेने का भी मौका देती है.

इन कंपनियों को भी मिली IPO लाने की मंजूरी

जिन दूसरी कंपनियों को रेगुलेटरी मंजूरी मिली है, उनमें लेजर पावर एंड इंफ्रा, सेडेमैक मेकाट्रॉनिक्स, आर्डी इंडस्ट्रीज, आर्मी इन्फोटेक, आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स और शंकरेश ज्वैलर्स शामिल हैं. इन कंपनियों ने भी पिछले साल सितंबर और नवंबर के बीच अपने ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे और 2 से 6 फरवरी के बीच सेबी से ऑब्जर्वेशन मिले थे.

ये मंजूरी 2026 की शुरुआत में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड, शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और अमागी मीडिया लैब्स जैसे तीन बड़े IPOs के भारतीय प्राइमरी मार्केट में आने के बाद मिली है.

इनक्रेड होल्डिंग के आईपीओ का साइज लगभग 3,000-4,000 करोड़ रुपये के बीच होने की संभावना है. आईपीओ में नए शेयरों के साथ-साथ ऑफर फॉर सेल भी शामिल रहेगा.

क्या करती है कंपनी?

InCred NBFC InCred फाइनेंशियल सर्विसेज की सहायक कंपनी है. IIFL कैपिटल सर्विसेज ऑफर के लिए बुक-रनिंग लीड मैनेजर है. साल 2016 में भूपिंदर सिंह ने इनक्रेड ग्रुप की शुरुआत की थी. इसके निवेशकों में अबू धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी, TRS (टीचर रिटायरमेंट सिस्टम ऑफ टेक्सास), KKR, ओक्स, एलेवर इक्विटी और मूर वेंचर पार्टनर्स जैसे बड़े नाम शामिल हैं. कंपनी अपने 3 वर्टिकल्स- इनक्रेड फाइनेंस, इनक्रेड कैपिटल और इनक्रेड मनी के जरिए अपना ऑपरेशन चलाती है. 2022 में इनक्रेड फाइनेंस को केकेआर इंडिया फाइनेंशियल सर्विसेज के साथ मर्ज किया गया.

TMMTMTRM OTT Release: ओटीटी पर रिलीज हुई कार्तिक-अनन्या की ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’, लेकिन ये है ट्विस्ट…

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कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे स्टारर रोमांटिक कॉमेडी ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ पिछले साल सिनेमाघरों में क्रिसमस के मौके पर रिलीज हुई थी. इस फिल्म से यूं तो बॉक्स ऑफिस पर काफी धमाल मचाने की उम्मीद थी लेकिन धुरंधर के तूफान के आगे ये टिक नहीं पाई और बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई. हालांकि फैंस कार्तिक की इस फिल्म की ओटीटी रिलीज का इंतजार कर रहे थे तो ये रोमांटिक ड्रामा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ गई है.

चलिए यहां जानते हैं ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ को ओटीटी पर कहां देख सकते हैं

‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ ओटीटी पर कब और कहां होगी रिलीज?

‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ फाइनली OTT पर आ गई है. यह फिल्म क्रिसमस 2025 वीकेंड पर सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी. बहुत से लोग इसे घर पर देखने का इंतज़ार कर रहे थे, और अब यह आखिरकार आ गई है. यह फिल्म प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है, लेकिन अभी यह सिर्फ़ रेंट पर अवेलेबल है, अगर लोग इसे अभी देखना चाहते हैं, तो उन्हें 349 रुपये देने होंगे.

प्राइम वीडियो आमतौर पर शुरुआत में फिल्में रेंट पर अवेलेबल कराता है औरकुछ समय बाद, आमतौर पर शुरुआती डिजिटल रेवेन्यू फेज खत्म होने के बाद, उन्हें सब्सक्राइबर के लिए अपनी फ्री स्ट्रीमिंग लाइब्रेरी में जोड़ देता है.

‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ की बॉक्स ऑफिस कमाई की बात करें तो इस फिल्म ने भारत में 32.95 करोड़ की नेट कमाई की थी जबकि इसकी ग्रॉस कमाई 39.35 करोड़ रही थी. फिल्म ने वर्ल्डवाइड 49.5 करोड़ का कलेक्शन किया था. इस फिल्म का बजट 90 करोड़ रुपये बताया गया था और ये बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी.

क्या है कहानी?

यह फ़िल्म लॉस एंजिल्स में रहने वाले एक बहुत सफल वेडिंग प्लानर रेहान ‘रे’ मेहरा (कार्तिक आर्यन स्टारर) की कहानी बताती है. उसे अपना काम और अपनी शानदार ज़िंदगी बहुत पसंद है. उसकी सिंगल मां ने उसे पाला-पोसा और उसे आत्मनिर्भर बनना सिखाया. इसी वजह से रे को इमोशनल चीज़ें पसंद नहीं हैं. वह कैज़ुअल रिलेशनशिप और आज के ज़माने के ऐसे प्यार में विश्वास करता है जिसमें कोई दिक्कत न हो. वह कमिटमेंट नहीं चाहता और ज़िंदगी को सिंपल रखना पसंद करता है, सब कुछ तब बदल जाता है जब रे क्रोएशिया में एक लग्ज़री यॉट क्रूज़ पर जाता है. वहाँ उसकी मुलाकात रूमी वर्धन (अनन्या पांडे स्टारर) से होती है. रूमी एक उभरती हुई राइटर है जो आगरा की रहने वाली है. वह रे से बहुत अलग है. बाद में कहानी और दिलचस्प हो जाती है.

बीजेपी की रितु तावड़े बनेंगी BMC मेयर, अब उद्धव ठाकरे गुट ने लिया ये बड़ा फैसला…

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मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मेयर चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. बीजेपी की रितु तावड़े अब निर्विरोध मेयर बन सकती हैं. अगर आज (7 फरवरी) शाम 6 बजे तक कोई और दल मेयर पद के लिए उम्मीदवारी नहीं दाखिल करता है, तो रितु तावड़े सीधे मेयर चुन ली जाएंगी.

इस बार महायुति की ओर से बीजेपी की रितु तावड़े ने मेयर पद के लिए और शिंदे गुट की शिवसेना के संजय घाड़ी ने उपमहापौर पद के लिए नामांकन दाखिल किया है. वहीं, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना और कांग्रेस ने अभी तक मेयर पद के लिए कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है. इस स्थिति में महायुति की उम्मीदवार रितु तावड़े का निर्विरोध मेयर बनना लगभग तय माना जा रहा है.

11 फरवरी को होगा बीएमसी मेयर पद का चुनाव

एनसीपी (एसपी) के एकमात्र पार्षद अजीत राव राणे ने भी महायुति का समर्थन करने का ऐलान किया है. इससे यह संभावना और मजबूत हो गई है कि मेयर और उपमहापौर का चुनाव बिना मुकाबले के ही संपन्न होगा. बीएमसी मेयर पद का चुनाव 11 फरवरी को दोपहर 12 बजे होगा. नामांकन दाखिल करने की अंतिम समय-सीमा आज शाम 5 बजे तक है. अगर इस समय तक विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार नहीं आता है, तो रितु तावड़े बिनविरोध मेयर बन जाएंगी और उपमहापौर का पद भी निर्विरोध तय हो सकता है.

मुंबई की राजनीति में मजबूत दिखाई दे रहा महायुति का दबदबा

इस चुनाव में महायुति की जीत लगभग पक्की मानी जा रही है. शिवसेना के मेयर पद के लिए उम्मीदवार न देने के फैसले ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं. ऐसे में मुंबई की राजनीति में महायुति का दबदबा और मजबूत होता दिखाई दे रहा है.

Google का रेड अलर्ट! करोड़ों स्मार्टफोन यूजर्स खतरे में, ये एक सेटिंग नहीं बदली तो पड़ सकता है भारी…

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इस चेतावनी की सबसे बड़ी वजह पुराने Android ऑपरेटिंग सिस्टम हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, Android 13 या उससे पुराने वर्जन पर चल रहे स्मार्टफोन सबसे ज्यादा जोखिम में हैं. दुनिया में आज भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे ही डिवाइस इस्तेमाल कर रहे हैं.

अनुमान है कि करीब 40 प्रतिशत स्मार्टफोन अब भी पुराने Android सिस्टम पर चल रहे हैं जिनकी संख्या लगभग एक अरब तक पहुंचती है. इन डिवाइसों के लिए अब नियमित सिक्योरिटी अपडेट जारी नहीं किए जाते जिससे हैकर्स के लिए उनमें सेंध लगाना काफी आसान हो जाता है.

अगर Android वर्जन के हिसाब से देखा जाए, तो सबसे नया Android 16 अभी बहुत कम यूजर्स तक ही पहुंच पाया है. Android 15 पर भी सीमित संख्या में फोन चल रहे हैं. इसके मुकाबले Android 14 और Android 13 अब भी बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रहे हैं. कुल मिलाकर देखा जाए तो सिर्फ करीब आधे से थोड़ा ज्यादा स्मार्टफोन ही ऐसे हैं जिन्हें फिलहाल सुरक्षित माना जा सकता है जबकि बाकी डिवाइस संभावित खतरे के घेरे में हैं.

इस स्थिति में यूजर्स के लिए सबसे जरूरी कदम यही है कि वे अपने फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम तुरंत अपडेट करें. अगर आपका स्मार्टफोन किसी पुराने Android वर्जन पर चल रहा है और उसे अब अपडेट नहीं मिल रहा तो वह डिवाइस हैकर्स के लिए आसान शिकार बन सकता है. ऐसे फोन में मौजूद निजी जानकारी चोरी होने का खतरा रहता है जिसका इस्तेमाल ठगी, ब्लैकमेलिंग या बड़े फ्रॉड के लिए किया जा सकता है.

स्मार्टफोन कंपनियां आमतौर पर सीमित समय तक ही सिक्योरिटी अपडेट देती हैं. ज्यादातर ब्रांड्स चार से पांच साल तक अपडेट सपोर्ट प्रदान करते हैं, जिसके बाद फोन को बदलना ही सुरक्षित विकल्प रह जाता है. हालांकि, अब कुछ प्रीमियम कंपनियां जैसे Samsung और Google अपने नए फ्लैगशिप फोन में सात साल तक सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा कर रही हैं. इसके उलट, मिड-रेंज और बजट स्मार्टफोन में यह सपोर्ट आमतौर पर तीन से चार साल तक ही सीमित रहता है.

ऐसे में अगर आप अपने डेटा और प्राइवेसी को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो पुराने फोन को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट करना या जरूरत पड़ने पर नया स्मार्टफोन लेना ही इस बढ़ते साइबर खतरे से बचने का सबसे भरोसेमंद तरीका है.

CG: कवासी लखमा जमानत के बाद उड़ीसा के मलकानगिरी में क्यों रहेंगे, छत्तीसगढ़ बजट सत्र में आएंगे या नहीं?

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शराब घोटाले के मामले में जमानत पर रिहा होने के बाद कांग्रेस नेता कवासी लखमा सुप्रीम कोर्ट की शर्त के चलते उड़ीसा के मलकानगिरी में रहेंगे. सीमावर्ती इलाका और राजनीतिक प्रभाव इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है. बजट सत्र में शामिल होने के लिए उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अनुमति मांगी है.

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के आरोप में लगभग एक साल तक जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा हुए कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा अब उड़ीसा के मलकानगिरी जिले में रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय यह शर्त लगाई है कि कवासी लखमा छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से बाहर रहेंगे.

कवासी लखमा 4 फरवरी 2026 को रायपुर सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद 6 फरवरी को न्यायालय में पेश हुए. इस दौरान उन्होंने अदालत को जानकारी दी कि वे अब उड़ीसा के मलकानगिरी में निवास करेंगे. सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद यह उनकी पहली पेशी थी. मामले में अगली सुनवाई 19 फरवरी 2026 को ईडी की विशेष अदालत में होगी.

मलकानगिरी को ही क्यों चुना कवासी लखमा ने?

कवासी लखमा बस्तर क्षेत्र के वरिष्ठ आदिवासी नेता माने जाते हैं. वे छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं. लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहने के कारण उनका प्रभाव पड़ोसी राज्य उड़ीसा के मलकानगिरी जिले में भी है.

मलकानगिरी और कोंटा दोनों ही सीमावर्ती इलाके हैं और इनके बीच की दूरी मात्र 20 से 25 किलोमीटर है. नजदीकी क्षेत्र होने के कारण राजनीतिक और सामाजिक संपर्क बनाए रखना आसान होता है. माना जा रहा है कि इसी वजह से कवासी लखमा ने मलकानगिरी को अपना ठिकाना चुना है.

बजट सत्र में शामिल होने की मांग

सुप्रीम कोर्ट से मिली सशर्त जमानत के चलते कवासी लखमा फिलहाल छत्तीसगढ़ में निवास नहीं कर सकते. ऐसे में उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी बजट सत्र में शामिल होने की अनुमति के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को आवेदन सौंपा है.

कवासी लखमा ने विधानसभा अध्यक्ष से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर बजट सत्र में शामिल होने की मांग रखी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय में निर्णय लेने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को दिया है कि वे बजट सत्र में शामिल हो सकते हैं या नहीं. गौरतलब है कि शराब घोटाले के मामले में कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था.

छत्तीसगढ़ में रेल विकास को रफ्तार, 51,080 करोड़ रुपए की परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में जारी…

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राज्य में 51,080 करोड़ रुपए की रेल परियोजनाएं विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं, जिससे कनेक्टिविटी, सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क को मजबूत करने और अधोसंरचना के विकास को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य को 7,470 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है। इस राशि का उपयोग रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने, यात्रियों की सुविधाओं में सुधार, माल ढुलाई क्षमता के विस्तार और रेल सुरक्षा को और सुदृढ़ करने के लिए किया जाएगा।

Chhattisgarh Rail Budget: विकास को निरंतर गति ​मिलने की उम्मीद

राज्य में इस समय कुल 51,080 करोड़ रुपए की लागत से कई रेल परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में निर्माणाधीन हैं। इन परियोजनाओं के तहत नई रेल लाइनों का विस्तार, दोहरीकरण कार्य, स्टेशन पुनर्विकास, सुरक्षा से जुड़े कार्य और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित रेल अवसंरचना विकसित की जा रही है। रेल परियोजनाओं के माध्यम से न केवल परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि इससे छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास, व्यापारिक गतिविधियों और समग्र आर्थिक प्रगति को भी निरंतर गति मिलने की उम्मीद है।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ में संचालित प्रमुख रेल परियोजनाएं

(1) बिलासपुर–झारसुगुड़ा चौथी लाइन परियोजना शामिल है, जिसकी कुल लंबाई 206 किलोमीटर तथा लागत 2,135.34 करोड़ रुपए है। इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 175 किलोमीटर से अधिक चौथी रेल लाइन का कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जिससे इस व्यस्त रेलखंड पर परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

(2) बिलासपुर–नागपुर रेल खंड पर बिलासपुर से गोंदिया के बीच विभिन्न खंडों (पैचों) में चौथी रेल लाइन का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।

(3) दल्लीराझरा–रावघाट नई रेल लाइन परियोजना, जिसकी कुल लंबाई 95 किलोमीटर एवं लागत 16,275.56 करोड़ रुपए है, के अंतर्गत 77.35 किलोमीटर नई रेल लाइन का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। यह परियोजना विशेष रूप से दुर्गम एवं आदिवासी क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

(4) छत्तीसगढ़ राज्य में खरसिया–नया रायपुर–परमालकसा नई रेल लाइन परियोजना भी प्रगति पर है, जिसकी कुल लंबाई 278 किलोमीटर तथा अनुमानित लागत 7,854 करोड़ रुपए है। यह परियोजना राज्य की राजधानी क्षेत्र सहित औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों को बेहतर रेल संपर्क प्रदान करेगी।

(5) सरदेगा–भालूमाड़ा नई रेल लाइन परियोजना, जिसकी लंबाई 37.24 किलोमीटर एवं लागत 1,282 करोड़ रुपए है, क्षेत्रीय संपर्क को सुदृढ़ करने के साथ-साथ खनिज परिवहन को अधिक सुगम बनाएगी।

(6) रावघाट–जगदलपुर नई रेल लाइन परियोजना, जिसकी कुल लंबाई 140 किलोमीटर तथा लागत 3,513 करोड़ रुपए है, बस्तर अंचल को रेल नेटवर्क से जोड़ते हुए क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।

(7) यात्री सुविधाओं के उन्नयन की दिशा में अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों का आधुनिक सुविधाओं के साथ पुनर्विकास किया जा रहा है।

(8) राज्य में वर्तमान में वंदे भारत एक्सप्रेस की दो जोड़ी सेवाएँ ( बिलासपुर नागपुर बिलासपुर एवं दुर्ग विशाखापट्टनम दुर्ग ) तथा अमृत भारत एक्सप्रेस की एक जोड़ी सेवा ब्रह्मपुर (ओडिशा)-उधना (सूरत गुजरात) के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन संचालित की जा रही हैं, जिससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित एवं आधुनिक रेल यात्रा का लाभ मिल रहा है।

(9) इसके साथ ही राज्य में रेल नेटवर्क का निरंतर विस्तार करते हुए पिछले 10-11 वर्षों में नई रेल पटरियों का निर्माण, संपूर्ण रेल विद्युतीकरण तथा 170 फ्लाईओवर एवं अंडरपास का निर्माण किया गया है, जिससे रेल एवं सड़क यातायात अधिक सुरक्षित और सुगम हुआ है।

(10) वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कुल 1,083 रेलवे कार्य स्वीकृत हैं, जिनमें से 845 कार्य विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। ये सभी प्रयास छत्तीसगढ़ को एक आधुनिक, सुरक्षित एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित रेल नेटवर्क प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

CG: हंगामेदार होगा छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र, पहले दिन मुख्यमंत्री के विभागों से जुड़े सवाल…

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विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के भी तीखे सवाल सामने आएंगे। ऐसे में उन्हें सोच समझकर उत्तर तैयार करने पड़ेंगे। दरअसल, विधानसभा के शीतकालीन सत्र में साइंस कॉलेज चौपाटी से जुड़े सवाल के लिखित उत्तर ने सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर दी थी। यही वजह है कि इस बार सभी विभाग पहले से सतर्क है।

विधानसभाका बजट सत्र भले ही 23 फरवरी से शुरू होगा, लेकिन सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के विधायकों ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है। ज्यादातर विधायक स्थानीय और प्रदेश स्तरीय समस्याओं पर केंद्रित सवालों की छड़ी लगा रहे हैं। कुछ सवाल तो ऐसे हैं, जिन्हें देखकर अफसरों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है।

उन्हें पता है कि विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के भी तीखे सवाल सामने आएंगे। ऐसे में उन्हें सोच समझकर उत्तर तैयार करने पड़ेंगे। दरअसल, विधानसभा के शीतकालीन सत्र में साइंस कॉलेज चौपाटी से जुड़े सवाल के लिखित उत्तर ने सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर दी थी। यही वजह है कि इस बार सभी विभाग पहले से सतर्क है।

इस बार विधानसभा का सत्र हंगामेदार होना तय माना जा रहा है, क्योंकि पिछले दिनों में दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई है। इसमें राहुल गांधी ने आम जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़क से सदन तक की लड़ाई लड़ने पर जोर दिया था।

  • धान, मनरेगा, अवैध खनन जैसे मुद्दे पर घेरने की तैयारी

बताया जाता है कि इस बार विपक्ष सरकार को घेरने के लिए ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा। इसमें सबसे बड़ा मुद्दा धान खरीदी का रहेगा। इसे लेकर विपक्ष स्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा आदिवासी क्षेत्रों में हो रही पेड़ों की कटाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि केंद्र मनरेगा योजना में बदलाव किया है। इसका विपक्ष तीखा विरोध कर रहा है। छत्तीसगढ़ में भी इसे लेकर विधानसभ में हंगामा होने के आसार है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि विपक्ष के हंगामों की वजह से एक-दो दिन सदन की कार्यवाही भी प्रभावित हो सकती है।

लगातार 9 दिन नहीं चलेगा सत्र

विधानसभा का सत्र 23 फरवरी से 20 मार्च तक चलेगा। इस दौरान कुल 15 बैठकें होंगी। खास बात यह है कि लगातार नौ दिन तक विधानसभा का सत्र नहीं होगा। दरअसल, 28 फरवरी को शनिवार और 1 मार्च को रविवार होने की वजह से अवकाश रहेगा। 2 मार्च सोमवार को बैठक नहीं होगी। 3 मार्च को होलिका दहन की वजह से बैठक नहीं होगी। 4 मार्च को होली का अवकाश होगा। 5 और 6 मार्च को बैठक नहीं होगी। 7 और 8 मार्च को शनिवार और रविवार होने की वजह से अवकाश रहेगा।

पहले दिन मुख्यमंत्री के विभागों से जुड़े सवाल

विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी। इस वजह से प्रश्नकाल नहीं होगा। इसके दूसरे दिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वन मंत्री केदार कश्यप और राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा सत्ता पक्ष और विपक्ष के सवालों के जवाब देंगे।

फैक्ट फाइल दिनांक- तारांकित-अतारांकि- कुल

  •  30 जनवरी- 16-07-23
  • 02 फरवरी-250-192-442
  • 03 फरवरी-447-377-824
  • 04 फरवरी-530-450-980
  • 05 फरवरी-561-473-1034
  • 06 फरवरी-605-499-1104

CG: आज से छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, नक्सलवाद पर हाइलेवल मीटिंग; मिनट टू मिनट कार्यक्रम…

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तीन दिनों के छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगे. वे बस्तर भी जाएंगे. आइए जानते हैं उनके कार्यक्रम का शेड्यूल आखिर क्या है? 

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज शनिवार को छत्तीसगढ़ आ रहे हैं. यहां वे नक्सलवाद पर हाईलेवल मीटिंग लेंगे. छत्तीसगढ़ में तीन दिनों तक शाह का डेरा रहेगा. वे बस्तर भी जाएंगे. जहां बस्तर पंडुम के कार्यक्रम में शामिल होंगे. आइए जानते हैं उनके तीन दिनों के कार्यक्रम का क्या है शेड्यूल…

नक्सल अभियानों की होगी समीक्षा 

अमित शाह का छत्तीसगढ़ दौरा कई मायनों में बेहद खास माना जा रहा है.मार्च 2026 तक नक्सलियों के खात्में का टारगेट है. ऐसे में यहां वे नक्सल अभियानों की समीक्षा कर अफसरों को जरूरी निर्देश भी देंगे. दरअसल शाह ने जब से ये ऐलान किया है उसके बाद से उनका लगातार छत्तीसगढ़ दौरा हो रहा है. वे इस बार फिर से बस्तर भी जाएंगे.

केंद्रीय गृहमंत्री का मिनट टू मिनट कार्यक्रम

केंद्रीय गृहमंत्री 7 फ़रवरी की शाम 4:40 को रायपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे. रायपुर एयरपोर्ट से निजी होटल के लिए रवाना होंगे. 8 फरवरी को सुबह 11:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक नक्सलवाद पर हाई लेवल मीटिंग लेंगे. शाम 5 बजे से 06:10 मिनट तक शिफ्टिंग द लेंस थीम पर आयोजित राष्ट्रीय कॉनक्लेव में शामिल होंगे. निजी होटल में ही रात्रि विश्राम करेंगे. दौरे के तीसरे और आखिरी दिन शाह बस्तर पंडूम के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे. सुबह 11 बजे विशेष विमान से रायपुर से दंतेश्वरी एयरपोर्ट के लिए  रवाना होंगे. दंतेश्वरी एयरपोर्ट से बाय रोड बस्तर पंडुम कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे. यहां वे दोपहर 12:05 से शाम 04:00 बजे तक कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसके बाद वे शाम 4:20 को जगदलपुर से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, बार एसोसिएशन चुनाव का रास्ता साफ, 12 फरवरी को मतदान…

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, इसलिए अब हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है. कोर्ट ने चुनाव से जुड़े विवादों का समाधान सही समय और मंच पर करने का निर्देश दिया.

बिलासपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर दायर याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से साफ इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि चुनाव की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, इसलिए इस लेवल पर कोर्ट का हस्तक्षेप सही नहीं है. इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम घोषित हो चुका है, नामांकन, जांच और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं. ऐसे में अगर अब चुनाव पर रोक लगाई जाती है, तो इससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित होगी और बार एसोसिएशन की कार्यप्रणाली भी बाधित हो सकती है. कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव से जुड़े विवादों का समाधान उचित मंच पर और उचित समय पर किया जाना चाहिए.

12 फरवरी को मतदान
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब बार एसोसिएशन चुनाव का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. जानकारी के अनुसार, 12 फरवरी को मतदान कराया जाएगा. इस चुनाव में अध्यक्ष सहित कुल 17 पदों के लिए वोटिंग होगी. चुनाव को लेकर वकीलों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. इस बार के चुनाव में कुल 61 प्रत्याशी मैदान में हैं, जो अलग-अलग पदों के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. अध्यक्ष पद को लेकर मुकाबला खासा रोचक माना जा रहा है, वहीं, अन्य पदों पर भी कड़े मुकाबले की संभावना है. चुनाव प्रचार भी तेज हो गया है और प्रत्याशी अधिवक्ताओं से समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं.

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बार एसोसिएशन के सदस्यों ने राहत की सांस ली है. कई अधिवक्ताओं के मुताबिक, समय पर चुनाव होना संगठन के लिए जरूरी है, ताकि नई कार्यकारिणी बार की समस्याओं और मुद्दों पर प्रभावी ढंग से काम कर सके. अब सभी की नजरें 12 फरवरी को होने वाले इलेक्शन पर टिकी हैं, जिसके बाद यह तय होगा कि आने वाले कार्यकाल में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की कमान किसके हाथों में होगी.