दुनिया में सबसे ज्यादा अंडों का प्रोडक्शन चीन में होता है. भारत दूसरे पायदान पर है. देश के कुछ चुनिंदा राज्य अंडों के सबसे ज्यादा प्रोडक्शन के लिए जाने जाते हैं, लेकिन एक शहर ऐसा भी है जो एग सिटी कहलाता है.
तमिलनाडु का नमक्कल अकेले रोजाना 7 करोड़ अंडों का उत्पादन करता है. यही वजह है कि इसे अंडों के एक्सपोर्ट का हब कहा जाता है.
नमक्कल के अंडे संयुक्त अरब अमीरात, कतर और अफ्रीकी देशों में एक्सपोर्ट किए जाते हैं. हाल में अमेरिका भी लिस्ट में शामिल हुआ है, जहां नमक्कल के अंडे पहुंचने लगे हैं. पहली बार यहां से अंडे संयुक्त राज्य अमेरिका को एक्सपोर्ट किए गए हैं. अमेरिकी बाजार से मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर एक्सपोर्ट और भी बढ़ सकता है. अब सवाल है कि नमक्कल कैसे बना अंडों का हब. जानिए, इसका जवाब.
नमक्कल कैसे बना अंडों का हब?
भारत के ‘अंडों के शहर’ के रूप में पहचाना जाने वाले नमक्कल में 1,200 पॉल्ट्री फार्म हैं. जो रोजाना 7 करोड़ अंडों का उत्पादन करती हैं. ये अंडे मुख्य रूप से केरल, कर्नाटक और पुडुचेरी जैसे राज्यों में भेजे जाते हैं, और तमिलनाडु की फूड स्कीम के तहत स्कूलों को भी बांटे जाते हैं.
नमक्कल रोजाना 7 करोड़ अंडों का उत्पादन करता है.
1960 के दशक के अंत में, नमक्कल में ट्रांसपोर्ट बिज़नेस से जुड़े कुछ लोगों ने पॉल्ट्री फार्मिंग शुरू की. तेजी से फलते-फूलते फायदे के इस सौदे में धीरे-धीरे स्थानीय लोग जुड़ने लगे. 1990 के दशक तक, शहर में 5,000 से ज़्यादा पॉल्ट्री फार्म थे. ये फार्म 1990 के दशक के अंत में मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग में चले गए.
तकनीक और आधुनिक तरीकों के बढ़ते दायरे के कारणछोटे पैमाने पर पॉल्ट्री फार्म चलाने वाले लोग कम हो गए, और पॉल्ट्री फार्म की संख्या 5,000 से घटकर 1,100 हो गई. हालांकि, अंडों की संख्या बढ़ गई क्योंकि एक ग्रुप में 10,000 से 2,00,000 मुर्गियां होती थीं. वर्तमान में फार्म की संख्या बढ़कर 1200 हो गई है.
नमक्कल को अंडों को हब बनाने में सरकार की भी बड़ी भूमिका रही. किसानों को सही कीमत दिलाने के लिए नेशनल एग कॉर्डिनेशन कमेटी (NECC) बनाई गई. 1985 में वेटरनरी कॉलेज खोला गया है. इससे पॉल्ट्री उद्योग को स्थिरता के वैज्ञानिक मदद भी मिली.
मिडिल ईस्ट समेत कई देशों में नमक्कल के अंडों की मांग है.
क्यों बढ़ी नमक्कल के अंडों की मांग?
रूस और यूक्रेन की जंग के कारण कई देशों में पॉल्ट्री फीड महंगा हुआ. इसका फायदा नमक्कल को मिला. पॉल्ट्री इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से दुनिया के कई देशों को एक्सपोर्ट होने वाले अंडों में 95 फीसदी हिस्सेदारी नमक्कल की है. यही नहीं, भारतीय अंडा अंतराष्ट्रीय मानकों पर खतरा उतरा है. मांग बढ़ने की एक वजह यह भी है. दूसरे देशों के मुकाबले भारतीय अंडा सस्ता पड़ता है. भारत में बड़े स्तर पर इसका प्रोडक्शन होता है और सरकार की तरफ से इस उद्योग को काफी मदद मिली है. नतीजा, यह फला-फूला.
पॉल्ट्री इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत वैश्विक अंडा उत्पादन में दूसरे स्थान पर है. ओमान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन सहित मध्य पूर्वी देश, मालदीव और कई अफ्रीकी देश भारतीय अंडों के खरीदार हैं. ओमान, भारतीय अंडों का सबसे बड़ा आयातक देश है.



