Home Blog Page 181

मालदीव पहुंचा INS सुनयना, समुद्री ‘ग्रेट गेम’ में मजबूत मौजूदगी और चीन को भारत का रणनीतिक जवाब…

0

भारतीय नौसेना का गश्ती पोत INS सुनयना 6 अप्रैल को मालदीव की राजधानी माले पहुंचा. यह तैनाती भारतीय नौसेना की IOS SAGAR पहल के तहत की गई है. हालांकि यह सिर्फ एक रूटीन पोर्ट कॉल नहीं था बल्कि हिंद महासागर में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच एक बड़ा भू-राजनीतिक संकेत भी था.

क्यों अहम है यह तैनाती?

हिंद महासागर क्षेत्र में पिछले कुछ सालों में चीन की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं. चीन की Belt and Road Initiative (BRI) और String of Pearls रणनीति के तहत वह मालदीव, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देशों में बंदरगाह और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहा है.

मालदीव में भी चीन ने पहले बड़े निवेश किए हैं, जिससे भारत की रणनीतिक चिंता बढ़ी थी. ऐसे में INS सुनयना की यह तैनाती भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी और समुद्री संतुलन बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है.

भारत का जवाब

भारत की ओर से IOS SAGAR पहल के तहत यह मिशन चलाया जा रहा है, जिसमें 16 मित्र देशों की भागीदारी है. यह दिखाता है कि भारत सिर्फ अपनी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की साझा समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है. यह पहल चीन के बढ़ते प्रभाव के मुकाबले एक सॉफ्ट लेकिन स्ट्रॉन्ग रणनीतिक काउंटर मानी जा रही है जहां सैन्य शक्ति के साथ-साथ सहयोग, ट्रेनिंग और विश्वास निर्माण पर जोर है.

मालदीव क्यों है गेम चेंजर?

मालदीव हिंद महासागर में एक बेहद महत्वपूर्ण लोकेशन पर स्थित है. यहां से गुजरने वाले समुद्री मार्ग (Sea Lanes of Communication) वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम हैं. अगर यहां चीन का प्रभाव बढ़ता है तो यह भारत की समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए चुनौती बन सकता है. इसलिए भारत लगातार मालदीव के साथ रक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत कर रहा है.

INS सुनयना की तैनाती के 3 बड़े संदेश

भारत हिंद महासागर में नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर बना हुआ है

पड़ोसी देशों के साथ साझेदारी और विश्वास बढ़ा रहा है

सबसे अहम चीन की बढ़ती मौजूदगी को संतुलित करने के लिए सक्रिय रणनीति अपना रहा

यानी माले में INS सुनयना की मौजूदगी सिर्फ एक नौसैनिक दौरा नहीं, बल्कि हिंद महासागर की “ग्रेट गेम” में भारत की मजबूत और स्मार्ट चाल है.

अमरावती बनी आंध्र प्रदेश की राजधानी, विधानसभा से थीम सिटी तक-कैसे बसाई जा रही है आंध्र की नई स्मार्ट कैपिटल?

0

Andhra Pradesh capital Amaravati: आंध्र प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक ढांचे में लंबे समय से चला आ रहा सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है। अब यह तय हो चुका है कि अमरावती ही राज्य की एकमात्र राजधानी होगी।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 7 अप्रैल को इसे लेकर आधिकारिक घोषणा की, जिसके बाद इस फैसले को कानूनी मजबूती भी मिल गई। यह सिर्फ राजधानी की घोषणा नहीं है, बल्कि एक ऐसे मेगा विजन की वापसी है, जिसे कभी अधूरा छोड़ दिया गया था।

सीएम नायडू के नेतृत्व वाली TDP-NDA सरकार की इस पहल को अमरावती के भविष्य के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।अब जब अमरावती को आधिकारिक तौर पर राजधानी का दर्जा मिल चुका है, तो नजरें इसके विकास पर टिकी हैं। बड़ा बजट, भव्य डिजाइन और स्पष्ट विजन इसे खास बनाते हैं। आइए जानें कैसे बसाई जा रही है आंध्र की नई स्मार्ट कैपिटल।

ड्रीम प्रोजेक्ट की वापसी: अमरावती फिर सुर्खियों में

अमरावती को राजधानी बनाने का सपना कोई नया नहीं है। जब आंध्र प्रदेश का विभाजन हुआ था, तभी चंद्रबाबू नायडू ने इसे राज्य का नया प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्र बनाने की योजना बनाई थी। उस समय इसे विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित करने का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया था। लेकिन 2019 में सत्ता परिवर्तन के बाद यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया।

Amaravati capital: तीन राजधानियों का प्रयोग और विवाद

2019 में सत्ता में आई वाई एस जगनमोहन रेड्डी सरकार ने इस योजना को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने ‘तीन राजधानियों’ का मॉडल पेश किया, जिसमें विशाखापत्तनम को प्रशासनिक राजधानी, अमरावती को विधायी राजधानी और कुरनूल को न्यायिक राजधानी बनाने का प्रस्ताव रखा गया। यह प्रयोग राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना रहा, लेकिन अमरावती का मूल विकास ठहर गया।

2024 में सत्ता वापसी और बड़ा फैसला

2024 में एक बार फिर चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद अमरावती प्रोजेक्ट को नई जिंदगी मिली। सरकार ने साफ कर दिया कि अब राज्य की एक ही राजधानी होगी और वह अमरावती होगी। इस फैसले को प्रशासनिक स्पष्टता और विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

Amaravati Theme city plan: 217 वर्ग किमी में बसने जा रहा ‘मेगा सिटी’

नई राजधानी अमरावती को 217.23 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। यह सिर्फ एक प्रशासनिक केंद्र नहीं होगा, बल्कि एक आधुनिक, स्मार्ट और सुव्यवस्थित शहर के रूप में उभरेगा। शुरुआती चरण में ही इस प्रोजेक्ट पर करीब 65,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है।

इस शहर को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह भविष्य की जरूरतों के मुताबिक टिकाऊ, पर्यावरण के अनुकूल और तकनीकी रूप से उन्नत हो। सड़क, ट्रांसपोर्ट, जल प्रबंधन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास ध्यान दिया जाएगा।

250 मीटर ऊंची विधानसभा-नई पहचान

अमरावती की सबसे खास पहचान बनने जा रही है यहां की प्रस्तावित विधानसभा इमारत। इसे 250 मीटर ऊंचा बनाया जाएगा, जो ‘उल्टी लिली’ के आकार की होगी। यह डिजाइन न सिर्फ वास्तुकला का अनोखा उदाहरण होगा, बल्कि शहर का प्रतीक भी बनेगा। आने वाले समय में यह इमारत अमरावती की पहचान के रूप में जानी जाएगी।

2 मई को शिलान्यास, पीएम मोदी के आने की उम्मीद

नई राजधानी के निर्माण को लेकर सरकार ने तेजी दिखानी शुरू कर दी है। 2 मई को इसका शिलान्यास समारोह आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिलेगी।

9 थीम बेस्ड शहर-प्लानिंग में नया प्रयोग

अमरावती को पारंपरिक शहर की तरह नहीं, बल्कि एक आधुनिक ‘थीम बेस्ड’ सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां कुल 9 उप-शहर बनाए जाएंगे, जिनकी अपनी अलग पहचान और उपयोगिता होगी। इन थीम सिटी में रिहायशी, व्यावसायिक, टेक्नोलॉजी, एजुकेशन और प्रशासनिक जोन शामिल होंगे।

इसके अलावा एक सेंट्रल गवर्नमेंट हब भी तैयार किया जाएगा, जहां सभी प्रमुख सरकारी कार्यालय और संस्थान मौजूद रहेंगे। इससे प्रशासनिक कामकाज तेज और सुगम होगा।

क्यों अहम है अमरावती का यह प्रोजेक्ट?

अमरावती सिर्फ एक राजधानी नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश के भविष्य की दिशा तय करने वाला प्रोजेक्ट है। इससे राज्य में निवेश बढ़ने, रोजगार के अवसर पैदा होने और बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

यह प्रोजेक्ट राजनीतिक रूप से भी अहम है, क्योंकि यह चंद्रबाबू नायडू के विजन और वादों से जुड़ा हुआ है। अगर यह सफल होता है, तो यह देश के सबसे आधुनिक शहरों में से एक बन सकता है।

अगर योजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो अमरावती न सिर्फ आंध्र प्रदेश बल्कि पूरे भारत के लिए एक मॉडल सिटी बन सकता है। यही वजह है कि यह प्रोजेक्ट अब सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक बड़े सपने का नाम बन चुका है।

इंडिया ब्लॉक में पड़ी एक और दरार, ममता बनर्जी के बयान से गुस्साई कांग्रेस, बंगाल सीएम पर साधा निशाना…

0

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले इंडिया ब्लॉक में एक और दरार पड़ती दिख रही है. दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में तमिलनाडु सीएम स्टालिन और राज्य कांग्रेस पर एक विवादापस्द बयान दिया था.

ममता के इस बयान पर कांग्रेस गुस्साई हुई है. कांग्रेस हाईकमान ने भी ममता के बयान पर नाराजगी जाहिर की है. इस बीच कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा है.

कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने ममता पर आरोप लगाया कि उन्होंने डीएमके, कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच कथित समझौते का बेबुनियाद और गैरजिम्मेदाराना दावा किया है, जिससे विपक्ष की एकता कमजोर होती है. टैगोर ने ममता के पुराने भाजपा गठबंधन का भी जिक्र करते हुए उनके आरोपों को ध्यान भटकाने की कोशिश बताया. उन्होंने कहा कि बिना सबूत सहयोगियों और संस्थाओं पर सवाल उठाना सही नेतृत्व नहीं है. टैगोर ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि ममता बनर्जी अपना संतुलन खो रही हैं और बिना सबूत के बेबुनियाद दावे कर रही हैं.

ममता की TMC ने भाजपा से किया था गठबंधन

कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि टीएमसी 1998 और 1999 में भाजपा के साथ गठबंधन में थी और 2004 में आरएसएस-भाजपा गठबंधन के साथ चुनाव भी लड़ी थी. उन्होंने कहा कि संस्थाओं पर संदेह करना और बिना तथ्यों के गठबंधन सहयोगियों को निशाना बनाना नेतृत्व नहीं है, यह तो ध्यान भटकाने का प्रयास है. टैगोर ने कहा कि राहुल गांधी लगातार आरएसएस-भाजपा की विचारधारा के खिलाफ खड़े रहे हैं, जिसके चलते उन्हें 25 से अधिक मुकदमों, संसद से अयोग्यता और यहां तक ​​कि अपने सरकारी आवास से बेदखली का सामना करना पड़ा है. सत्ता के सामने सच बोलने की यही कीमत उन्हें चुकानी पड़ी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को भाजपा से लड़ने के बारे में उपदेशों की जरूरत नहीं है.

इंडिया ब्लॉक से अलग होने वाले दल

यह समय लापरवाही भरे बयान देने का नहीं है। यह समय एकता, जिम्मेदारी और लक्ष्य केंद्रित करने का है. वहीं, इंडिया ब्लॉक से 2024 लोकसभा चुनाव से पहले और उसके बाद कई प्रमुख दल अलग हो चुके हैं. इनमें नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) और जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल (RLD) शामिल हैं, जो NDA में शामिल हो गए. इसके अलावा, आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी खुद को गठबंधन से अलग कर लिया है. खुद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के साथ तनाव के कारण अकेले चुनाव लड़ रही है. केरल में कांग्रेस के साथ सीधे मुकाबले के कारण वामपंथी दल भी गठबंधन की एकजुटता में शामिल नहीं हैं. जबकि केंद्र में टीएमसी और वामपंथी कांग्रेस के साथ हैं.

Iran Vs America: जंग खत्म करने के लिए ईरान ने पेश किए 10 नई शर्तें, अगर नहीं बनी बात, मचेगी और तबाही?

0

Iran 10 Point Peace Plan: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर है। ईरान ने अमेरिका के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ‘अवास्तविक’ बताते हुए ठुकरा दिया है और बदले में अपना 10-सूत्रीय प्लान पेश किया है। तेहरान का कहना है कि सिर्फ युद्धविराम काफी नहीं है, बल्कि एक स्थायी समाधान जरूरी है। पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष के बीच ईरान की इन नई शर्तों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है, क्योंकि इसमें प्रतिबंध हटाने से लेकर समुद्री रास्तों के इस्तेमाल तक की बड़ी मांगें शामिल हैं।

Iran’s 10 point agenda: ईरान की 10 प्रमुख शर्तें

सुरक्षा की पक्की गारंटी: ईरान चाहता है कि अमेरिका और उसके सहयोगी लिखित में यह भरोसा दें कि भविष्य में ईरान की जमीन पर कभी भी दोबारा हमला नहीं किया जाएगा।

युद्ध का परमानेंट अंत: ईरान सिर्फ कुछ दिनों का युद्धविराम नहीं चाहता। उसकी मांग है कि इस जंग को हमेशा के लिए आधिकारिक तौर पर खत्म घोषित किया जाए ताकि शांति बनी रहे।

लेबनान पर हमला बंद हो: तेहरान की बड़ी शर्त है कि इजरायल लेबनान पर हो रहे अपने तमाम सैन्य हमलों को तुरंत रोके और वहां से अपनी सेना को पीछे हटाए।

अमेरिकी प्रतिबंधों की विदाई: ईरान पर जितने भी अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध लगे हैं, उन्हें पूरी तरह हटाया जाए ताकि वह दुनिया के साथ फिर से व्यापार कर सके।

सहयोगियों की सुरक्षा: ईरान ने मांग की है कि क्षेत्र में उसके साथ खड़े देशों और गुटों के खिलाफ चल रहे तमाम सैन्य ऑपरेशनों और संघर्षों को तुरंत बंद किया जाए।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलना: अगर ईरान की शर्तें मानी जाती हैं, तो वह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोल देगा।

हर जहाज पर ट्रांजिट फीस: ईरान ने शर्त रखी है कि इस रास्ते से गुजरने वाले हर एक जहाज को सुरक्षा और सुविधा के बदले 2 मिलियन डॉलर की फीस देनी होगी।

ओमान के साथ कमाई का बंटवारा: जहाजों से मिलने वाली इस भारी-भरकम फीस को ईरान अकेला नहीं रखेगा, बल्कि वह इसे अपने पड़ोसी देश ओमान के साथ साझा (Share) करेगा।

बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण: ईरान इस समुद्री टैक्स से होने वाली पूरी कमाई का इस्तेमाल युद्ध में तबाह हुए अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर और सड़कों-पुलों को फिर से बनाने के लिए करेगा।

क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान: ईरान की आखिरी शर्त है कि पश्चिम एशिया के मामलों में बाहरी दखल बंद हो और ईरान की सीमाओं और संप्रभुता का पूरा सम्मान किया जाए।

USA vs Iran conflict: ईरान ने क्यों ठुकराया अमेरिकी प्रस्ताव?

ईरान ने अमेरिका की शर्तों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ और ‘अत्यधिक मांग वाली’ बताया है। तेहरान का तर्क है कि अमेरिका का प्रस्ताव ईरान को कमजोर करने की कोशिश है। ईरान का मानना है कि केवल कुछ समय के लिए युद्ध रोकना समाधान नहीं है, क्योंकि इससे दुश्मन को फिर से संगठित होने का मौका मिल जाता है। इसी वजह से ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक उसकी बुनियादी शर्तें नहीं मानी जातीं, तब तक कोई समझौता मुमकिन नहीं है।

Netflix ने बच्चों की कराई मौज! लॉन्च किया Playground app, बिना पैसे के खेल सकेंगे गेम…

0

ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स ने बच्चों के लिए एक खास गेमिंग ऐप Netflix Playground लॉन्च किया है, जो पूरी तरह सुरक्षित और बिना किसी ऐड के है. यह ऐप खास तौर पर 8 साल से कम उम्र के बच्चों को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

इसमें न तो इन ऐप परचेज का झंझट है और न ही कोई अतिरिक्त फीस देनी होगी. माता पिता के लिए यह एक राहत की बात है क्योंकि बच्चों को अब बिना चिंता के गेम खेलने दिया जा सकता है. कंपनी का लक्ष्य इसे बच्चों के लिए एक सुरक्षित और मजेदार प्लेटफॉर्म बनाना है.

बच्चों के लिए सुरक्षित और बिना ऐड का गेमिंग प्लेटफॉर्म

नेटफ्लिक्स प्लेग्राउंड को खासतौर पर छोटे बच्चों के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें पूरी तरह ऐड फ्री अनुभव मिलता है. इस ऐप में कोई इन ऐप परचेज या छिपे हुए चार्ज नहीं हैं, जिससे माता-पिता को अतिरिक्त खर्च की चिंता नहीं करनी पड़ती. यह ऐप मौजूदा नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन के साथ ही काम करता है, यानी अलग से कुछ खरीदने की जरूरत नहीं है. कंपनी के अनुसार यह ऐप बच्चों की क्रिएटिविटी और सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए बनाया गया है. इसमें बच्चों के पसंदीदा किरदारों के साथ मजेदार और सुरक्षित गेमिंग अनुभव दिया गया है, जिससे स्क्रीन टाइम भी उपयोगी बन सके.

पॉपुलर किरदारों के साथ मजेदार गेम्स और ऑफलाइन सपोर्ट

इस ऐप में बच्चों के लिए कई तरह के आसान और इंटरएक्टिव गेम्स दिए गए हैं, जो उनके पसंदीदा शोज और किरदारों पर आधारित हैं. इसमें Peppa Pig, Sesame Street और Dr. Seuss जैसी कहानियों से जुड़े गेम्स शामिल हैं. बच्चे इसमें पजल्स, मेमोरी गेम्स, कलरिंग और अन्य क्रिएटिव एक्टिविटीज का आनंद ले सकते हैं. खास बात यह है कि ये सभी गेम्स बिना इंटरनेट के भी खेले जा सकते हैं. यानी यात्रा के दौरान या कमजोर नेटवर्क में भी बच्चे बिना रुकावट के गेम खेल सकते हैं.

कैसे डाउनलोड और इस्तेमाल करें ऐप

Netflix Playground ऐप को डाउनलोड करना और इस्तेमाल करना काफी आसान है. यूजर्स अपने फोन या टैबलेट में Apple App Store या Google Play Store पर जाकर इसे सर्च कर सकते हैं और इंस्टॉल कर सकते हैं. इसके बाद ऐप खोलकर अपने Netflix अकाउंट से लॉगिन करना होता है. लॉगिन के बाद एक आसान और बच्चों के अनुकूल इंटरफेस दिखाई देता है, जहां गेम्स कैटेगरी के अनुसार दिखाई देते हैं. माता-पिता को इसमें बेसिक कंट्रोल्स भी मिलते हैं, जिससे वे स्टोरेज मैनेज कर सकते हैं और जरूरत के अनुसार गेम्स को हटा सकते हैं.

Iran America War: युद्ध के माहौल में अचानक अमेरिका दौरे पर भारतीय विदेश सचिव, क्या है मोदी सरकार का प्लान?

0

Idian Foreign Secretary US visit: मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात के बीच भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका के तीन दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं।

8 से 10 अप्रैल 2026 तक होने वाली इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करना है।

वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत का रुख शांति की स्थापना और अपने रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए अहम है। यह दौरा न केवल व्यापार, रक्षा और उच्च तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा।

Iran America War: क्या रुकने वाली है विश्व तबाही?

ईरान और अमेरिका के बीच गहराते संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। भारत के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील है क्योंकि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं और वहां से भारत की ऊर्जा जरूरतें (तेल और गैस) जुड़ी हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। भारत इस संकट में एक संतुलन बनाने वाले देश के रूप में उभरा है, जो शांति और कूटनीति पर जोर देता है।

डिफेंस और बिजनेस से जुड़े समझौतों पर बातचीत

विक्रम मिसरी की इस यात्रा के दौरान डिफेंस और बिजनेस से जुड़े कई बड़े समझौतों पर बातचीत आगे बढ़ेगी। इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संकेत दिया था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अपने अंतिम चरण में है। इस दौरे पर उसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसके अलावा, दोनों देश रक्षा उपकरणों के साझा उत्पादन और उच्च तकनीक के हस्तांतरण पर भी चर्चा करेंगे, जिससे भारत की सुरक्षा व्यवस्था और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

विज्ञान और तकनीक पर विशेष फोकस

भारत और अमेरिका के बीच ‘कंपैक्ट’ (COMPACT) समझौते के तहत सेना, व्यापार और टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। विक्रम मिसरी अमेरिकी प्रशासन के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देंगे। 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देश एक-दूसरे के तकनीकी अनुभव का लाभ उठाना चाहते हैं। यह सहयोग आने वाले समय में भारतीय स्टार्टअप्स और इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए नए दरवाजे खोलेगा।

द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा

मिसरी का यह दौरा पिछले दौरों की प्रगति को जांचने का भी एक मौका है। मई 2025 में हुए उनके पिछले दौरे और फरवरी 2026 में एस जयशंकर की यात्रा के दौरान जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनकी समीक्षा की जाएगी। वॉशिंगटन डीसी में ‘फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन’ की मीटिंग में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि रणनीतिक और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर काम सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह निरंतर संवाद दोनों लोकतंत्रों के बीच भरोसे को और गहरा करता है।

Dollar Vs Rupee: कम हुई रुपए की ताकत, ₹93 पर पहुंची एक डॉलर की कीमत…

0

मंगलवार को रुपया 10 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.00 (अस्थायी) पर बंद हुआ. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि निवेशक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने की समय सीमा और रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले सतर्क बने रहे.

फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि डॉलर-रुपए जोड़ी दबाव में कारोबार कर रही है. विदेशी पूंजी की लगातार निकासी, डॉलर की मजबूती और अस्थिर भू-राजनीतिक स्थिति के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण इसमें गिरावट आई है. इसके अलावा, बाजार के पार्टिसिपेंट्स बदलती भू-राजनीतिक खबरों और RBI के आगामी मॉनेटरी पॉलिसी के फैसलों पर भी नजर रखेंगे. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर करेंसी मार्केट में किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं.

93 का हुआ एक डॉलर

इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.05 पर खुला. इसके बाद यह कमजोर होकर 93.07 पर कारोबार करने लगा, जो इसके पिछले बंद भाव से 17 पैसे की गिरावट दर्शाता है. दिन के दौरान, रुपया डॉलर के मुकाबले 92.86 के इंट्राडे उच्च स्तर को भी छू गया. मंगलवार के कारोबारी सत्र के अंत में, रुपया 93.00 (अस्थायी) पर बोला गया, जो इसके पिछले बंद भाव से 10 पैसे कम था. सोमवार को, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे मजबूत होकर 92.90 पर बंद हुआ. यह रिज़र्व बैंक द्वारा सट्टेबाजी की होड़ पर अंकुश लगाने और भारतीय मुद्रा में अस्थिरता को कम करने के उपायों के बाद हुआ.

RBI ने सट्टेबाजी की स्थितियों पर अंकुश लगाने के लिए अपने नियमों को सख्त कर दिया है और बैंकों की ‘नेट ओपन पोजीशन’ की सीमा 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तय कर दी है. इस बीच, रिजर्व बैंक की दर-निर्धारण समिति ने सोमवार को चालू वित्त वर्ष की पहली द्वि-मासिक मौद्रिक नीति पर अपना तीन दिवसीय विचार-मंथन सत्र शुरू किया. रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) का निर्णय बुधवार को घोषित किया जाएगा.

डॉलर गिरा और शेयर बाजार में तेजी

डॉलर इंडेक्स, जो छह मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.15 प्रतिशत गिरकर 99.83 पर आ गया. वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड, वायदा कारोबार में 1.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ 107.61 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. घरेलू शेयर बाज़ार में, सेंसेक्स 509.73 अंक उछलकर 74,616.58 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 155.40 अंक चढ़कर 23,123.65 पर पहुंच गया. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 8,167.17 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए दी गई समय सीमा आज खत्म हो रही है, और ईरान अभी भी संघर्ष विराम के प्रस्ताव पर नरम नहीं पड़ा है.

‘भारत दुनिया की आत्मा.गौभक्त बनते ही रुक जाएगी गौहत्या’, वृंदावन में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत…

0

उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित वृंदावन में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भाग लेकर कई महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए. भागवत मलूक पीठ गौशाला में चल रहे 452वें जयंती महोत्सव में शामिल हुए, जहां योग गुरु बाबा रामदेव सहित संत समाज की बड़ी उपस्थिति रही.

इस दौरान भागवत ने आश्रम पहुंचकर पूजा-अर्चना भी की और कार्यक्रम के आध्यात्मिक माहौल की सराहना की.

इस अवसर पर मोहन भागवत ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि यहां का वातावरण इतना शांत और आध्यात्मिक है कि बोलने की इच्छा कम हो जाती है. ऐसे माहौल में मौन रहना ही अधिक उपयुक्त लगता है. भागवत ने भारत की वैश्विक भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि भारत ही दुनिया की आत्मा है. उनके अनुसार, जब तक भारत अपनी मूल पहचान और मूल्यों के साथ खड़ा रहेगा, तब तक विश्व भी संतुलित रहेगा. उन्होंने कहा कि आज दुनिया भटकाव की स्थिति में है क्योंकि उसने अपनी आत्मा को खो दिया है.

समाज के गौभक्त बनते ही रुक जाएगी गौहत्या

गौसंरक्षण और गौहत्या के मुद्दे पर बोलते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि समाज को गौभक्त बनाया जाए तभी गौहत्या अपने आप रुक जाएगी. उन्होंने कहा कि समाज को गौभक्त बनाना जरूरी है. उनका मानना है कि जब समाज में गाय के प्रति सम्मान और श्रद्धा बढ़ेगी, तो गौहत्या स्वतः रुक जाएगी. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकारें इस दिशा में काम करना चाहती हैं, लेकिन कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में समाज का समर्थन बेहद जरूरी है. बिना समाज के समर्थन ये कार्य नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसे में साहसी कदम उठाने के लिए समाज का साथ जरूरी है. उन्होंने कहा कि गौ-जागृति को मजबूत करना होगा. जब जनभावना तैयार हो जाएगी, तो व्यवस्था को भी उसे मानना पड़ेगा.

जनभावना मजबूत होने पर हुआ राम मंदिर का निर्माण

राम मंदिर के निर्माण का उदाहरण देते हुए भागवत ने कहा कि 2014 से 2019 तक यह कार्य नहीं हो पाया, लेकिन 2019 के बाद जनभावना मजबूत होने के कारण रास्ता साफ हुआ. उन्होंने कहा कि इसी तरह यदि गौसंरक्षण के मुद्दे पर भी जनमत तैयार हो जाए, तो समाधान निकल सकता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि संत समाज और संघ मिलकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं. उन्होंने कहा कि संत मार्गदर्शन देंगे और संघ उनके साथ खड़ा रहेगा. भागवत ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत विश्व गुरु बनकर उभरेगा और दुनिया को नई दिशा देगा.

“Air India ने बढ़ाया फ्यूल चार्ज, डोमेस्टिक और इंटरनेशनल फ्लाइट टिकट का कितना बढ़ जाएगा किराया?”

0

Air India fuel surcharge Hike: एयर इंडिया ने घरेलू (Domestic) और अंतरराष्ट्रीय (international) उड़ानों पर फ्यूल चार्ज बढ़ाने का ऐलान किया है। जिसके चलते हवाई किराया अब महंगा होगा।

वैश्विक जेट फ्यूल की कीमतों में तीव्र बढ़ोतरी और अमेरिका-ईरान युद्ध को इसकी वजह बताया गया है।

एयर इंडिया का ये फैसला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कैंपबेल विल्सन के इस्‍तीफे के बाद आया है। कैंपबेल विल्सन को पांच साल के कान्‍ट्रेक्‍ट पर नियुक्त किया गया था। एयर इंडिया के सीईओ के रूप में उनका कार्यकाल जुलाई 2027 में समाप्त होने वाला था लेकिन इससे पहले ही उन्‍होंने इस्‍तीफा दे दिया है।

कब से बढ़ेगा एयर टिकट का किराया?

टाटा समूह की इस एयरलाइन ने बताया कि नई अधिभार संरचना घरेलू मार्गों पर 8 अप्रैल से और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों के लिए 10 अप्रैल से लागू होगी।

Air India का कितना बढ़ जाएगा किराया?

डोमेस्टिक फ्लाइट के लिए, एयर इंडिया ने दूरी के आधार पर फ्यूलच चार्ज मॉडल लागू किया है। इसके तहत, 0-500 किमी पर ₹299, 501-1000 किमी पर ₹399, 1001-1500 किमी पर ₹549, 1501-2000 किमी पर ₹749 और 2000 किमी से अधिक पर ₹899 का शुल्क होगा। घरेलू ATF पर 25% की सरकारी सीमा के बावजूद, यह वृद्धि अधिकांश टिकट की कीमतें बढ़ाएगी।

इंटरनेशनल फ्लाइट के किराए में कितनी होगी बढ़ोत्‍तरी?

इंटरनेशनल रूट पर इसका प्रभाव अधिक होगा, क्योंकि वहां कोई रेट लिमिट नहीं है। एयर इंडिया ने क्षेत्र के आधार पर काफी अधिक अधिभार निर्धारित किए हैं, सार्क गंतव्यों के लिए $24 से लेकर उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे लंबी दूरी के मार्गों के लिए $280 तक। एयरलाइन बढ़ी हुई ईंधन लागत का एक हिस्सा स्वयं वहन कर रही है, ताकि किराया और अधिक न बढ़े।

कितना महंगा हो गया है जेट फ्यूल?

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के अनुसार, वैश्विक जेट ईंधन की कीमतें मार्च के अंत तक $195.19 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो कुछ हफ़्ते पहले के $99 से लगभग दोगुनी हैं। रिफाइनिंग मार्जिन, या “क्रैक स्प्रेड,” भी कम समय में तीन गुना हुए हैं, जिससे विमानन कंपनियों पर लागत का बोझ बढ़ गया है।

Indigo पहले ही बढ़ा चुका है टिकट के दाम

बता दें पिछले सप्‍ताह इंडिगो ने फ्यूल चार्ज में बढ़ाेत्‍तरी करने का ऐलान किया था, जिसके चलते फ्लाइट टिकट महंगा हो गया है। इससे साफ है कि फ्यूल की बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा यात्रियों पर डालने को एयरलाइंस मजबूर हैं, क्योंकि ईंधन परिचालन खर्चों का लगभग 40% होता है। याद रहे ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल और ATF की कीमतें बढ़ाई हैं।

Pawan Khera: पासपोर्ट विवाद पर एक्शन! पवन खेड़ा के घर पहुंची असम पुलिस, हिमंता सरमा की पत्नी की FIR के बाद हलचल…

0

Pawan Khera असम पुलिस की एक टीम कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची है। यह कार्रवाई हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई FIR के ठीक एक दिन बाद की गई है।

यह कार्रवाई उस FIR के बाद हुई है, जो हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी की ओर से दर्ज कराई गई थी। पवन खेड़ा के घर रेड पर निकलने के बाद दिल्ली पुलिस ने कहा कि कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद है।

जानकारी के मुताबिक, असम से आई पुलिस टीम ने दिल्ली पुलिस को पहले ही सूचित कर दिया था, जिसके बाद स्थानीय पुलिस भी इस कार्रवाई में सहयोग कर रही है। नियमों के तहत जब किसी राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में जांच के लिए जाती है, तो वहां की स्थानीय पुलिस को जानकारी देना जरूरी होता है।

सूत्रों के मुताबिक जब पुलिस टीम पवन खेड़ा के घर पहुंची, उस समय वह वहां मौजूद नहीं थे। बताया जा रहा है कि हाल ही में उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पासपोर्ट को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए थे।

इसी मामले को लेकर अब कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है और असम पुलिस सीधे दिल्ली पहुंच गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

पवन खेड़ा और हिमंत बिस्वा सरमा क्या है पूरा विवाद?

असम की राजनीति में रविवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सीएम सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा को लेकर गंभीर आरोप लगाए। खेड़ा ने दावा किया कि उनके पास एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और विदेशों में उनकी बड़ी संपत्ति भी मौजूद है। इन आरोपों के सामने आते ही मामला सियासी बहस का केंद्र बन गया।

इन आरोपों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने इन्हें पूरी तरह झूठा और राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप कांग्रेस की घबराहट और घटते जनाधार को दिखाते हैं। सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने साफ किया कि यह सब उनकी छवि खराब करने की कोशिश है।

सीएम सरमा और उनकी पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा ने पवन खेड़ा पर एफआईआर दर्ज की है।आपराधिक और दीवानी मानहानि का केस दर्ज किया गया है।

पवन खेड़ा ने किस आधार पर लगाए आरोप?

अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने कुछ दस्तावेजों का हवाला दिया, जिनके बारे में उनका कहना था कि ये उन्हें विदेश में मौजूद सूत्रों से मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि रिनकी सरमा के पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ एंड बारबुडा के पासपोर्ट हैं।

इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दुबई में उनकी प्रॉपर्टी है और अमेरिका के व्योमिंग में एक कंपनी रजिस्टर्ड है, जिसका बजट 34.67 बिलियन डॉलर बताया गया। खेड़ा के मुताबिक, होटल इंडस्ट्री में निवेश की भी तैयारी है।

चुनावी हलफनामे और नागरिकता पर क्यों उठे सवाल?

पवन खेड़ा ने यह भी सवाल उठाया कि अगर ये सारी संपत्तियां मौजूद हैं, तो उनका जिक्र सीएम सरमा के चुनावी हलफनामे में क्यों नहीं किया गया। उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि क्या रिनकी सरमा के पास भारतीय नागरिकता है, क्योंकि भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है।

पवन खेड़ा ने इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी और आगामी चुनावों से अयोग्यता तक की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित से हस्तक्षेप की अपील की और पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग उठाई है।