केन्द्रीय बजट 2026 एक फरवरी को पेश किया गया, जिसमें देश के समग्र विकास को केंद्र में रखते हुए कई बड़े निवेश संबंधी ऐलान किए गए हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर निर्यात तक लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस रखा गया है.
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने कहा है कि भारत का केंद्रीय बजट सरकारी कर्ज में क्रमिक कमी के जरिए व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
इसके साथ ही मजबूत पूंजीगत व्यय कार्यक्रम को बनाए रखते हुए विकास की संभावनाओं को संतुलित करने की कोशिश की गई है. हालांकि बजट में किसी बड़े पैमाने के संरचनात्मक सुधार की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन फिच को आने वाले समय में खासतौर पर विनियमन में ढील देने के एजेंडे पर और सुधारों की उम्मीद है.
ऋण स्थिति में सुधार
फिच का मानना है कि मजबूत जीडीपी वृद्धि भारत के कई संप्रभु ऋण संकेतकों में सकारात्मक रुझान ला रही है और यदि यह गति आगे भी बनी रहती है, तो मौजूदा राजकोषीय चुनौतियों के बावजूद समय के साथ देश की ऋण स्थिति में सुधार हो सकता है. रेटिंग एजेंसी के अनुसार, हालिया सुधारों की रफ्तार को आगे बढ़ाने से निजी निवेश में तेजी आएगी और भारत की संभावित विकास दर और मजबूत होगी.
हालांकि फिच ने यह भी संकेत दिया कि राजकोषीय समेकन सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रखा गया है, जो 2025-26 के 4.4 प्रतिशत से केवल मामूली रूप से कम है.
निजी निवेश की सुस्त गति की भरपाई
फिच ने कहा कि समेकन की धीमी रफ्तार इस आकलन के अनुरूप है कि आर्थिक वृद्धि से अधिक समझौता किए बिना घाटे में और कटौती करना अब मुश्किल होता जा रहा है. एजेंसी के मुताबिक, सरकार ने अधिक सख्त राजकोषीय समेकन की बजाय 2026-27 में पूंजीगत व्यय को जीडीपी के 3.1 प्रतिशत पर अपेक्षाकृत स्थिर रखने का विकल्प चुना है, जो निजी निवेश की सुस्त गति की भरपाई करने के प्रयास को दर्शाता है.
फिच रेटिंग्स के निदेशक जेरेमी जूक ने कहा कि यह बजट विकास और स्थिरता के बीच संतुलन साधने की सरकार की नीति को दर्शाता है. फिच ने वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है.



