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तमिलनाडु में भाषा विवाद: मंत्री के बयान से राजनीतिक हलचल…

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राजनीतिक विवाद की शुरुआत

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले, एक मंत्री के बयान ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। डीएमके के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने कहा कि उत्तर भारतीय प्रवासी राज्य में केवल टेबल क्लीनर और पानी पूरी विक्रेता के रूप में काम करने आते हैं।

यह बयान महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव से कुछ सप्ताह पहले ‘हिंदी थोपने’ के मुद्दे पर एक नया विवाद खड़ा कर रहा है।

मंत्री के बयान का संदर्भ

पन्नीरसेल्वम ने यह भी कहा कि उत्तर भारत से आए लोगों के पास केवल हिंदी जानने के कारण सीमित रोजगार के अवसर हैं, जिससे उन्हें निम्न स्तर के काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि तमिल वासियों को राज्य की दो-भाषा नीति का लाभ मिलता है, जिससे वे विदेशों में बेहतर नौकरियों के लिए जा सकते हैं।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

भाजपा ने मंत्री के बयान को लापरवाह और खतरनाक बताते हुए इसे राज्य में प्रवासी श्रमिकों के खिलाफ हिंसा से जोड़ा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए। विवाद बढ़ने पर, डीएमके के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी को इन टिप्पणियों से अलग करने की कोशिश की।

चुनावों पर प्रभाव

जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, यह विवाद तमिलनाडु के चुनावी माहौल में नई जान फूंक रहा है। भाषा की राजनीति, प्रवासी मजदूरों और उत्तर-दक्षिण तनाव के मुद्दे फिर से डीएमके और भाजपा के बीच राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बन गए हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस बयान को ‘घटिया’ बताते हुए उत्तर भारत का अपमान कहा।