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टीम इंडिया में आया ये सिक्सर किंग, युवराज जैसे जादू की उम्मीद

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साउथ अफ्रीका के बाद टीम इंडिया अब अपने पड़ोसी प्रतिद्वंद्वी बांग्लादेश से भिड़ने के लिए तैयार है. बांग्लादेश का भारत दौरा 3 नवंबर से शुरू होने वाला है. भारत और बांग्लादेश के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 सीरीज और दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी. तीन मैचों की टी-20 सीरीज के लिए सेलेक्टर्स ने पहली बार मुंबई के विस्फोटक ऑलराउंडर शिवम दुबे को शामिल किया है.

शिवम दुबे बन सकते हैं अगले युवराज?

मुंबई के 26 साल के ऑलराउंडर शिवम दुबे को चोटिल हार्दिक पंड्या की जगह चुना गया है. दरअसल, उन्होंने छोटे प्रारूप में ऑलराउंडर के दूसरे विकल्प में विजय शंकर को पछाड़ दिया है. बाएं हाथ से बल्लेबाजी करने वाले शिवम दुबे बड़े छक्के जड़ सकते हैं.

पिछले साल रणजी ट्रॉफी के मैच में बड़ौदा के खिलाफ शिवम दुबे ने बाएं हाथ के स्पिनर स्वप्निल सिंह के एक ओवर में पांच छक्के लगाए थे. तब वह एक ओवर में छह छक्के लगाकर फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भारत के रवि शास्त्री के रिकॉर्ड की बराबरी करने से चूक गए थे.

मैच का रुख पलट सकते हैं शिवम दुबे

शिवम जिस तरह से छक्के लगाते हैं उनमें युवराज सिंह की झलक देखने को मिलती है. पिछले सीजन में शिवम दुबे ने विजय हजारे ट्रॉफी में बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया था. शिवम दुबे ने इस दौरान एक शतक भी जड़ा था. टूर्नामेंट में जड़े 15 छक्कों से उनका कद ऐसा हो गया जो किसी भी मैच का रुख पलट सकता है.

क्यों टीम इंडिया में चुने गए शिवम दुबे?

शिवम दुबे को वेस्टइंडीज ए और दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करने के बाद टीम में जगह मिली है. शिवम ने हाल ही में विजय हजारे ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन किया था. शिवम ने कर्नाटक के खिलाफ 118 रनों की दमदार पारी खेली थी. उन्होंने इसके लिए 67 गेंदों का सामना किया, जिसमें 7 चौके और 10 छक्के जड़े थे. टूर्नामेंट में 5 विकेट भी झटके थे.

शिवम दुबे ने दांए हाथ से बल्लेबाजी जबकि बाएं हाथ से तेज गेंदबाजी करते हैं. उन्होंने अब तक फर्स्ट क्लास करियर में 16 मैच खेले हैं और 1012 रन बना चुके हैं. इस दौरान 25 पारियों में 2 शतक और 7 अर्धशतक लगाए हैं. इसके साथ ही उन्होंने 40 विकेट भी झटके हैं.

IPL में विराट कोहली के साथ खेल चुके हैं

IPL में विराट कोहली की कप्तानी वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने शिवम दुबे को 5 करोड़ रुपये में खरीदा था. इसके बाद शिवम दुबे पहली बार चर्चा में आए थे. शिवम दुबे ने 16 फर्स्ट क्लास मैचों में 48.19 की औसत से 1012 रन बनाए हैं, जिसमें दो शतक और सात अर्धशतक शामिल हैं. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में शिवम 39 छक्के जड़ चुके हैं.

शिवम के टी-20 रिकॉर्ड की बात करें तो वे 18 पारियों में 18.61 की औसत से 242 रन बना चुके हैं. स्ट्राइक रेट 142 का है. टी-20 में बतौर तेज गेंदबाज वे 14 विकेट भी ले चुके हैं.

शिवम दुबे ने सेलेक्शन के बाद पिता को दिया श्रेय

अपने सेलेक्शन के बाद शिवम दुबे ने कहा, ‘मैं भगवान और अपने पिता का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा. विशेषकर मेरे पिता को जिन्होंने हमेशा मेरा समर्थन किया और यह उन्हीं का सपना था कि मैं भारत के लिए खेलूं.’ उन्होंने कहा, ‘मैं टीम में चुने जाने की उम्मीद कर रहा था. मुझे अपने चयन का भरोसा था. मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा था इसलिए मैं टीम में चुना गया.’

शिवम दुबे ने कहा कि उन्हें आक्रामक बल्लेबाजी करना पसंद है और वह अपनी इस ‘पावर हिटिंग’ शैली को कभी नहीं छोड़ेंगे, जिसने उन्हें भारतीय टीम में शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई.

शिवम दुबे ने कोहली-रोहित से लिए टिप्स

शिवम दुबे ने अपने सेलेक्शन के बाद कहा, ‘जब मैं आरसीबी में था, तो मैं ज्यादातर मैचों में बेंच पर बैठा था, इसलिए विराट कोहली और एबी डिविलियर्स जैसे महान खिलाड़ियों को उनके काम के प्रति लगन को देखना अपने आप में एक बहुत बड़ा सबक था. विराट भाई और रोहित भाई ने मुझे प्रदर्शन करने के लिए हमेशा समर्थन दिया है. वे लगातार मुझे बताते हैं कि मेरे पास ऑलराउंडर के रूप में लगातार प्रदर्शन करने की क्षमता है और मैं जल्द ही भारत के लिए खेल सकता हूं.’

शिवम दुबे ने कहा, ‘मैंने पिछले साल आईपीएल के दौरान विराट भाई के साथ स्पष्ट चर्चा की थी. मैंने उनसे पूछा, मुझे किन क्षेत्रों में विकास करने की आवश्यकता है. उन्होंने मुझे फिनिशर की भूमिका पर काम करने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि मेरे पास खेल को कंट्रोल करने और फिर इसे खत्म करने की क्षमता है, क्योंकि मेरे पास पावर-हिटिंग क्षमताएं हैं. मैंने उस पर काम करना शुरू कर दिया, जिसका परिणाम आखिरकार आज मुझे मिला है. मैं कह सकता हूँ, कि यह मेरे जीवन का सबसे अच्छा दिन है.

शिवसेना के बदले सुर, सामना में कहा- चुनाव नतीजे अहंकारी शासकों के लिए एक सबक…

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महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में भाजपा को नसीहत दी है कि यह महाजनादेश नहीं केवल जनादेश है।

मुंबई, एजेंसी। Maharashtra assembly election results 2019 महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद शिवसेना के सुर बदल गए हैं। शिवसेना (Shiv Sena) ने अपने मुखपत्र सामना (Saamana) में भाजपा (Bharatiya Janata Party, BJP) को नसीहत दी है कि वह अपने पैर जमीन पर ही रखे। यह ‘महाजनादेश’ नहीं केवल जनादेश है। महाराष्ट्र की जनता के रुझान सीधा और साफ है कि भाजपा को अति उत्‍साह में नहीं आना चाहिए।

शिवसेना ने शुक्रवार को सामना के संपादकीय में लिखा कि इस बात का विश्‍लेषण करने में कुछ वक्‍त लगेगा कि शिवसेना-भाजपा ने 2014 की तुलना में कम सीटें क्यों जीतीं। लेकिन महाराष्‍ट्र की जनता के फैसले से साफ है कि यह महज जनादेश है, ‘महाजनादेश’ या क्‍लीन स्‍वीप नहीं है। राज्‍य के लोगों ने दूसरी पार्टियों को तोड़े जाने को अस्‍वीकार कर दिया है। जनता ने हमें साफ संदेश दिया है कि हमारे पैर हमेशा जमीन पर होने चाहिए।

चुनाव से पहले, राकांपा के नेता भाजपा में शामिल हो गए लेकिन चुनावों में जनता ने इस समझा। यही कारण है कि एनसीपी ने इन चुनावों में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में बिना किसी नेता वाली कांग्रेस को भी 37 सीटें मिल गई हैं। चुनाव नतीजे शिवसेना और भाजपा के पक्ष में हैं। फ‍िर भी सरकार के लिए सबक हैं जो सोचती है कि वह जो कर रही है वही कानून है।

बता दें कि महाराष्‍ट्र चुनाव के नतीजे अहंकारी शासकों के लिए एक सबक हैं। भाजपा को साल 2014 में 122 सीटें मिली थीं जबकि इस चुनाव में उसे 105 सीटें मिली हैं। शिवसेना ने इस पर कहा है कि 25 सीटें दूसरी छोटी पार्टियों के खातों में चली गईं। यह दिखाता है कि यदि सत्‍ता अहंकारी सत्‍ता को लेकर लोग जागरूक हो गए हैं। इस चुनाव में लोगों ने भाजपा की उस मानसिकता को खारिज कर दिया है कि चुनाव इंजीनियर‍िंग से जीते जा सकते हैं।

हरियाणाः लालू यादव के दामाद चिरंजीव राव ने बीजेपी प्रत्याशी को हराया, रेवाड़ी से दर्ज की धमाकेदार जीत…

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के दामाद चिरंजीव राव ने हरियाणा के रेवाड़ी विधानसभा सीट से चुनाव जीत गए हैं. उन्होंंने अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी सुनील यादव को 1352 वोटों से हराया है. कांग्रेस प्रत्याशी चिरंजीव को 43535 वोट तो उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी सुनील यादव को 42183 मत मिले तो निर्दलीय प्रत्याशी कापड़ीवास को 36510 और सनी को 21969 मत हासिल हुए हैं.

बता दें कि अपने दामाद की जीत सुनिश्चित करने के लिए राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने अपनी करीबी भोला यादव को जिम्मा सौंपा था. यही वजह थी कि विधायक और लालू के हनुमान कहे जाने वाले भोला यादव ने तीन दिनों तक रेवाड़ी विधान सभा क्षेत्र में रहकर चिरंजीव के लिए चुनाव प्रचार किया था. इतना ही नहीं, चुनाव प्रचार के अंतिम दिन रोड शो भी किया था. चिरंजीव के पिता कैप्टन अजय यादव ने लालू से मदद के तौर पर भोला यादव की मांग की थी.

बताया जाता है कि लालू प्रसाद यादव की वजह से रेवाड़ी आए भोला यादव ने रेवाड़ी में रह रहे 20000 से ज्यादा बिहार के वोटरों पर निशाना साधते हुए जमकर प्रचार किया था. इससे पहले जब चिरंजीव राव ने रेवाड़ी विधानसभा सीट के लिए नामांकन किया था, तब बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव भी मौजूद थे. इस मौके पर उन्होंने चिरंजीव राव की जीत का भी दावा किया था.लालू की बेटी अनुष्का की शादी हरियाणा के दिग्गज कांग्रेस नेता कैप्टन अजय यादव से हुई है.

दोनों भाइयों की धमाकेदार जीत पर रितेश देशमुख ने किया पिता को याद, कहा – पापा हमने कर दिखाया

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महाराष्ट्र विधानसभा (Maharashtra Assembly) को इस बार दो भाई विधायक (MLA) के तौर पर मिलेंगे. अमित देशमुख (Amit Deshmukh) और धीरज देशमुख (Dheeraj Deshmukh) जो कि अपने पिता विलासराव देशमुख की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. दोनों ने ही लातूर (Latur) शहर और सदर सीट से जीत दर्ज की है. अब इसको लेकर बॉलीवुड एक्टर और विलासराव देशमुख के बेटे रितेश देशमुख (Ritesh Deshmukh) ने अपने भाइयों को ट्वीटर (Twitter) पर बधाई दी. इस दौरान उन्होंने अपने पिता को भी याद किया. गौरतलब है कि विलासराव देशमुख दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री (Chief Minister) रह चुके हैं.

हमने कर दिखाया
अपने पोस्ट में रितेश ने लिखा, हमने कर दिखाया पापा, अमित देशमुख ने लातूर शहर की सीट 42 हजार से ज्यादा वोटों से लगातार तीसरी बार जीती, वहीं धरीज देशमुख ने लातूर ग्रामीण सीट को 1.20 लाख वोटों से अपने नाम की. इसके साथ ही रितेश ने जनता को धन्यवाद दिया और कहा कि लातूर की जनता को धन्यवाद जिन्होंने हम पर विश्वास जताया और इतना प्यार दिया. ट्वीट के साथ ही रितेश ने दो फोटो भी डाले जिसमें एक में वे काफी गंभीर दिख रहे हैं, वहीं दूसरी फोटो में तीनों भाई चुनावी प्रचार करते हुए साथ में हैं.

जिला परिषद सदस्य से विधायक तक
धीरज देशमुख ने अपने राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत एक जिला परिषद सदस्य के तौर पर लातूर से ही की थी और अब वे विधायक बन गए हैं. धीरज 1.21 लाख वोटों के भारी अंतर से जीते हैं. वहीं उनके बड़े भाई अमित ने लातूर शहर की सीट पर लगातार तीसरी बार अपना कब्जा बरकरार रखा है. वे 40 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज करने में कामयाब हुए हैं. गौरतलब है कि विलासराव देशमुख जो 1999 से 2003 और फिर 2004 से 2008 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे, लातूर उनका गृह जिला है.

नज़रिया – महाराष्ट्र के चुनावी नतीजे असल में क्या कहते हैं?

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चुनाव प्रचार और मतदान के बाद महाराष्ट्र को लेकर आए एग्ज़िट पोल के अनुमानों में बीजेपी को अकेले दम पर बहुमत हासिल करते हुए दिखाया गया.

यहां तक कि मतगणना के कुछ दिन पहले हरियाणा में कांटे की टक्कर की बात कुछ लोगों ने स्वीकार की लेकिन महाराष्ट्र के नतीजों का अनुमान वैसा ही बना रहा.

महाराष्ट्र की राजनीति पर क़रीब से नज़र रखने वाले कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र के नतीजों ने भले ही लोगों को चौंकाया हो लेकिन राज्य में स्थितियां इससे अलग नहीं थीं.

जो अंतिम नतीजे आए हैं उसमें कोई ताज्जुब नहीं है. ये अलग बात है कि हमारा अनुमान था कि बीजेपी को कम से कम 110 सीटें हासिल होंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इससे बीजेपी के अंदर ही कई सवाल खड़े हो गए हैं. क्योंकि बीजेपी का अनुमान था कि उसे 120 सीटें तो मिल ही जाएंगी.

हालांकि कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन भले ही उम्मीद के मुताबिक़ प्रदर्शन नहीं कर पाया हो लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखें तो ये दोनों पार्टियां लगभग ख़त्म हो चुकी थीं.

उस हिसाब से तो इस चुनाव नतीजे से कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को ये तो लग सकता है कि वे अभी भी उबर सकती हैं. लोकसभा के मुक़ाबले में इन दोनों पार्टियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है.

अब वो ऐसी स्थिति में आ गए हैं कि वे सरकार भले नहीं बना पाएं लेकिन एक मज़बूत विपक्ष की भूमिका निभा सकने की स्थिति में हैं.

कांग्रेस-एनसीपी की तरह ही बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन 25 साल पुराना है जो कि बीच में कुछ समय के लिए ये गठबंधन टूट गया था और 2014 का विधानसभा चुनाव शिवसेना ने अकेले लड़ा था.

दिलचस्प बात ये है कि 2014 में अकेले दम पर लड़ने के बावजद शिवसेना को लगभग उतनी ही सीटें मिली थीं, जितनी इस बार गठबंधन में रहते हुए मिलीं.

इसका मतलब साफ़ है कि महाराष्ट्र में दोनों ने पांच साल सरकार चलाई, काफ़ी विज्ञापन दिए लेकिन उससे कोई फ़ायदा नहीं मिला.

इन नतीजों से ये साफ़ हो जाता है कि असल में मतदाताओं की दिलचस्पी इन दोनों पार्टियों में बहुत ज़्यादा रही नहीं, सिर्फ़ इसलिए इन्हें फ़ायदा मिल गया क्योंकि कोई मज़बूत विकल्प नहीं है उनके सामने.

अगर इस चुनाव में कांग्रेस वाक़ई दम लगाकर लड़ती तो नतीजे उसके पक्ष में और बेहतर आ सकते थे. देखने में यह आया कि कांग्रेस के स्थानीय बड़े नेता सिर्फ़ अपनी सीटों पर ही सक्रिय रहे लेकिन कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने इस चुनाव में दिलचस्पी ली ही नहीं.

महाराष्ट्र में देखा गया कि चुनाव से पहले कांग्रेस के विपक्ष के नेता बीजेपी में चले गए और प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण सिर्फ़ अपने विधानसभा क्षेत्र में लगे रहे. इसकी वजह से राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व नज़र नहीं आया. हालांकि, कार्यकर्ताओं की तारीफ़ करनी होगी कि उन्होंने मेहनत की.प्रकाश आंबेडकर की पार्टी भी चुनाव मैदान में थी

छोटे दलों का प्रदर्शन कैसा रहा?

महाराष्ट्र चुनाव में छोटे दलों को अगर देखें तो वह विफल रहे. 2014 की विधानसभा चुनाव जैसा ही उन्होंने प्रदर्शन किया है.

छोटे दल हमेशा विपक्ष की बड़ी भूमिका निभाते हैं लेकिन देखने में आया कि प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. जबकि चुनाव से पहले उनके दल की काफ़ी चर्चा थी.

इसी तरह से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी काफ़ी सुर्ख़ियां बटोरती रही है लेकिन उसे केवल एक सीट मिली है. इसके अलावा बहुत से छोटे दलों ने चुनाव लड़ा है लेकिन उन्होंने ग़लती यह कि उन्होंने बीजेपी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा है.

अब देखना यह होगा कि असलियत में बीजेपी के कितने और छोटे दलों के कितने उम्मीदवार चुनाव जीते हैं.

कौन-से मुद्दे हावी रहे?

विधानसभा चुनावों में हमेशा स्थानीय मुद्दे हावी रहते हैं. बीजेपी की रणनीति यह थी कि केवल मुख्यमंत्री राज्य के विकास के मुद्दे की बात करेंगे जबकि राष्ट्रीय नेता राष्ट्रीय मुद्दों की बात करेंगे.

यह रणनीति बीजेपी ने सिर्फ़ महाराष्ट्र में नहीं अपनाई बल्कि उसकी रणनीति है कि राष्ट्रीय नेता राष्ट्रीय मुद्दों पर ही बात करके चुनाव जीतें. इस कारण बीजेपी ने कई विधानसभा चुनावों में कोई बंपर जीत दर्ज नहीं की है क्योंकि जनता को लगता है कि स्थानीय मुद्दों की जगह उन पर राष्ट्रीय मुद्दे थोपे जा रहे हैं.

महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री मोदी का ही जादू चला. लोकसभा की तरह ही इस विधानसभा चुनाव में यह संदेश गया कि प्रधानमंत्री मोदी को मज़बूत करना है और उन्हें वोट दिया जाना चाहिए.

एनसीपी-कांग्रेस का भविष्य

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद यह साफ़ है कि एनसीपी-कांग्रेस विपक्ष का नेतृत्व करेंगे. अब इनके लिए ज़रूरी है कि यह ठोस मुद्दे लेकर राजनीति करें.

पिछली सरकार में इस विपक्षी गठबंधन ने दो साल कुछ भी नहीं किया. यह गठबंधन उस वक़्त सदमे में था कि अब वह विपक्ष में है. अब उम्मीद है कि वह इस सदमे से बाहर होगा.

विपक्ष में बैठने की एक कला होती है जो एनसीपी प्रमुख शरद पवार को पता है और इस कला को कांग्रेस को भी सीखना होगा.

इन विधानसभा चुनाव के नतीजों से यह पता चलता है कि अगर आप पूरी राजनीति सिर्फ़ एक नेता पर केंद्रित कर दें तो वो खोखली हो जाती है. क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी की वजह से हरियाणा में जीत नहीं मिली और महाराष्ट्र की जीत बंपर जीत नहीं है.

दूसरा सबक़ यह है कि नेता अगर प्रसिद्ध न भी हो तो गवर्नेंस बहुत मायने रखता है. हरियाणा और महाराष्ट्र का उदाहरण लें तो हरियाणा का गवर्नेंस महाराष्ट्र से कमतर था. इस कारण हरियाणा में बीजेपी को महाराष्ट्र के मुक़ाबले ज़्यादा बड़ी सज़ा मिली.

महाराष्ट्र में बीजेपी का अधिक बुरा गवर्नेंस नहीं था इस कारण वह वापस सत्ता में आ रही है.

शिवसेना की सरकार में क्या भूमिका होगी?

शिवसेना का कहना है कि 50-50 फॉर्मूला चलेगा लेकिन मेरा मानना है कि यह सिर्फ़ कहने की बात है. अब मंत्रिमंडल कौन-सा किसके पास जाएगा इस पर बात होगी.

शिवसेना चाहेगी कि महत्वपूर्ण मंत्रालय उसे मिलें. शहरी विकास, उद्योग मंत्रालय शिवसेना मांग सकती है. इस पर शिवसेना राज़ी हो सकती है.

बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की अगर बात करें तो वह आगे भी चलेगा लेकिन साथ ही हर रोज़ के झगड़े भी चलते रहेंगे. इन झगड़ों को अलग रखकर अगर आप सरकार चला ले जाते हैं तो यह मुख्यमंत्री की सफलता होगी.

बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में शिवसेना के पास बहुत विकल्प नहीं है. क्योंकि वह किसी और दल के साथ मिलकर सरकार नहीं बना सकती है.

महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना की जीत ज़रूर हुई है लेकिन वह बंपर जीत नहीं है. वहीं, एनसीपी-कांग्रेस हारे ज़रूर हैं लेकिन वह यह कह सकते हैं कि हारने के बाद भी ज़िंदा हैं.

इन चुनाव नतीजों से पता चलता है कि एनसीपी-कांग्रेस के लिए भी राजनीति में जगह है. बीजेपी-शिवसेना का न ही वोट प्रतिशत बढ़ा और न ही सीट बढ़ी लेकिन वह सत्ता में लौट आए हैं.

इन चुनावों ने सभी पार्टियों को फिर एक बार यह दिखा दिया है कि जनता आपको चेतावनी देती है. अगर आप उसे नहीं पढ़ पाते हैं तो आपका भविष्य दिक़्क़तों भरा हो जाता है.

ताबड़तोड़ वायरल हुआ ये वीडियो, माधुरी दीक्षित ने किया बड़ा ऐलान…

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बॉलीवुड में इन दिनों नई एंट्रीज का दौर चल रहा है. आए दिन कोई न कोई नया फिल्मों में एंट्री मार रहा है. वहीं इन सबके बीच कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जिन्हें इंडस्ट्री में सालों बीत जाने के बाद भी उतना ही प्यार मिल रहा है. दर्शक आज भी इन स्टार्स को उतना ही पसंद करते हैं, जितना सालों पहले करते थे. ऐसी ही एक स्टार हैं अभिनेत्री माधुरी दीक्षित. वो खुद भी तो अपने फैंस को इंप्रेस करने का कोई मौका नहीं छोड़तीं, हाल ही में उन्होंने फैंस से जुड़े रहने के लिए एक और कोशिश की है.

दरअसल, हाल ही में माधुरी दीक्षित ने अपना यूट्यूब चैनल लॉन्च कर दिया है. माधुरी दीक्षित नेने के नाम से इस यूट्यूब चैनल पर पहला वीडियो डांस का ही शेयर किया गया है. ये डांस माधुरी दीक्षित की आईफा परफॉर्मेंस का है. माधुरी दीक्षित ने आईफा अवॉर्ड्स में अपने एक से बढ़कर एक गानों पर परफॉर्म किया था. उनकी परफॉर्मेंस को जबरदस्त तारीफें भी मिली थीं. उन्होंने इस परफॉर्मेंस की छोटी-छोटी झलकियां लेकर वीडियो में शामिल की हैं. इसके साथ ही इस वीडियो में उनकी डांस रिहर्सल भी दिखाई गई है.

इस वीडियो को शेयर करते हुए माधुरी लिखा- ‘मैं अपना पहला यूट्यूब वीडियो शेयर करते हुए हुए और आप सभी के साथ ये सफर शुरू करते हुए बहुत एक्साइटेड हूं. IIFA 2019 वाकई एक शानदार एक्सपीरिएंस रहा और मैं खुश हूं कि मुझे मेरी फेवरेट कोरियोग्राफर और गुरु सरोज खान जी को स्पेशल परफॉर्मेंस के जरिए ट्रिब्यूट देने का मौका मिला. मैं आशा करती हूं कि आपको मेरा वीडियो पसंद आएगा और प्लीज मेरे चैनल को लाइक शेयर और सब्सक्राइब करना ना भूलें’.

माधुरी दीक्षित से पहले अभिनेत्री आलिया भट्ट ने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया था. आलिया इस चैनल पर जब-तब आकर अपनी जिंदगी जुड़ी कई बातें शेयर करती हैं. इसके साथ ही वो फिल्मों के बिहाइन्ड सीन भी फैंस को दिखाती हैं. ऐसे में ये माना जा रहा है कि माधुरी दीक्षित भी अपने यूट्यूब चैनल पर ऐसा ही कुछ इंटरेस्टिंग शेयर करेंगी.

धनतेरस पर महासंयोग, जानिए किस समय में क्या खरीदना होगा शुभ…

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कार्तिक कृष्ण द्वादशीयुक्त-त्रयोदशी पर आज धनतेरस (Dhanteras Puja Muhurat) के साथ ही पंचपर्व दीपोत्सव (Diwali) शुरू हुआ। सुबह से ही बाजार में धनतेरस का उल्लास शुरू हो चुका हैं। बाजार में दुकानें सज चुकी हैं और दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। शहर में धनतेरस (Dhanteras) पर ज्वैलरी, बर्तन और वाहनों की खरीदारी प्रमुख तौर पर की जाती है, सबसे अधिक भीड़ इन्हीं दुकानों पर नजर आती है। सुबह से ही दुकानें खुल गईं और खरीदारी शुरू हो गई। शाम को धनतेरस (Dhanteras) के निमित्त दीपदान होगा।बता दें कि पंचांग की गणना के अनुसार इस बार धन त्रयोदशी (Trayodashi) का आरंभ 25 अक्टूबर की शाम 6 बजकर 38 मिनट पर होगा। त्रयोदशी (Trayodashi) 26 अक्टूबर की शाम 3 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। सूर्यास्त के पश्चात अकाल मृत्यु से बचने के लिए घर के मुख्य द्वार पर बाहर की ओर 4 बातियों का दीप दान यानि दीप का प्रज्जवलन करना चाहिए। रात्रि में आरोग्य प्राप्ति के लिए भगवान धनवंतरी (Lord Dhanvantari) तथा समृद्धि के लिए कुबेर (Kubera) के साथ लक्ष्मी गणेश का पूजन (Worship of laxmi ganesh) करके भगवती लक्ष्मी (Laxmi pooja) को नैवेद्य में धनिया, गुड़ व धान का लावा अर्पित करना चाहिए।

Brass and silverके बर्तन खरीदना शुभ

ज्योतिषविदों के अनुसार धनतेरस (Dhanteras) पर नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा रही है। विशेषकर पीतल व चांदी (Brass and silver) के बर्तन खरीदना शुभ माना गया है। इससे धन संपदा में वृद्धि होती है। धनतेरस (Dhanteras) पर व्यापारी अपने कारोबार को चलाने के लिए नई बहियां खरीदते हैं। शाम को आरोग्य व समृद्धि की बढ़ोतरी के लिए घर की देहरी के बाहर दक्षिणमुखी होकर यम के निमित्त दीपदान किया जाएगा। अकाल मृत्यु से बचने के लिए भी इस दिन दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है।

कल मनाया जाएगा रूप चौदस का त्योहार

अगले दिन शनिवार को नरक चतुर्दशी और रूप चौदस का त्योहार मनाया जाएगा। शाम को नरक चतुर्दशी के निमित्त दीपदान होगा। वहीं, 27 अक्टूबर, रविवार को दीपावली का त्योहार मनाया जाएगा। इसके अगले दिन 28 अक्टूबर, सोमवार को अन्नकूट महोत्सव और 29 अक्टूबर, मंगलवार को भैया दूज (Bhaiya dooj)का पर्व मनाया जाएगा। इस बार चतुर्दशी दो दिन होने से रविवार को अरुणोदय काल में रूप चौदस निमित प्रभात स्नान और दीपदान होगा। इसी दिन दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि आ जाएगी, ऐसे में शाम को प्रदोषकाल में ही दीपावली (diwali) मनाई जाएगी। इसके अगले दिन गोवर्धन पूजा

छत्तीसगढ़ : मंत्रिपरिषद के निर्णय…

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नानुसार निर्णय लिए गए:-

  • छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम (संशोधन) अध्यादेश, 2019 एवं छत्तीसगढ़ नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश, 2019 का अनुमोदन किया गया। जिसके तहत महापौर/अध्यक्षों का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रीति से होगा। जिसमें निर्वाचित पार्षदों के द्वारा निर्वाचित पार्षदों में से महापौर/अध्यक्षों का निर्वाचन किया जाएगा। चुनाव दलीय आधार और मतपत्र से होगा। पार्षद निर्वाचन के लिए आयु सीमा न्यूनतम 21 वर्ष तय है।
  • राज्य की नवीन औद्योगिक नीति 2019-24 का अनुमोदन किया गया। जो आगामी एक नवंबर से 31 अक्टूबर 2024 के लिए लागू होगी।
  • आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति, 2016 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। जिसके तहत आपसी सहमति से ग्रामीण क्षेत्रों में अर्जित की जाने वाली भूमि एवं उस भूमि पर स्थित स्थावर परिसंपत्तियों के मूल्य की मुआवजा राशि को दो गुना से बढ़ाकर 4 गुना किया गया है। 
  • राज्य के शहरी क्षेत्रों में नगरीय निकायों द्वारा निर्मित दुकानों के किराए में कटौती का निर्णय लिया गया। जिससे करीब 3 हजार हितग्राही लाभान्वित होंगे। पूर्व में इन दुकानों का किराया स्वीकृत प्रीमियम राशि का 7.2 प्रतिशत अधिकतम था जिसे घटाकर ऑफसेट प्राइस के 2 प्रतिशत पर सीमित किया गया। इससे निकाय क्षेत्रों में खाली दुकानों की नीलामी उचित मूल्य पर संभव हो सकेगी साथ ही निकायों की आय में भी वृद्धि होगी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
  • मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के गठन आदेश की कंडिका-3(5) में संशोधन का अनुमोदन किया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष कोरबा के अध्यक्ष को सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
  • विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलनों से संबंधित 14 प्रकरणों को जनहित में न्यायालय से वापस लेने का निर्णय लिया गया।
  • भारतीय वन सेवा (संवर्ग) नियम 1966 के नियमों के तहत प्रधान मुख्य वन संरक्षक वेतनमान में दो अस्थायी संवर्गीय पदों का दो वर्ष के लिए सृजन का निर्णय लिया गया।
  • छत्तीसगढ़ के रहने वाले तथा छत्तीसगढ़ में शहीद हुए सी.आर.पी.एफ. के आरक्षक शहीद नीरज शर्मा के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नही होने के कारण उनके छोटे भाई श्री सूरज शर्मा को जिला बल में आरक्षक (सामान्य) पद पर विशेष नियुक्ति का निर्णय लिया गया।
  • श्रीमती सविता दास वैष्णव अनिवार्य सेवानिवृत्त निरीक्षक को पुनः सेवा में बहाल किए जाने का निर्णय लिया गया।
  • राज्य शासन के विभिन्न विभागों में अपलेखित भण्डार को नीलाम करने हेतु ऑनलाईन आक्शन का विकल्प करने हेतु भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम MSTC Ltd को नामांकन के आधार पर अधिकृत करने का निर्णय लिया गया।

छत्तीसगढ़ : लाखों रुपए में बिके गोबर से बने दिये, गांव की महिलाओं की आय का नया ज़रिया…

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छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने में गोबर बड़े काम की चीज साबित हो रहा है। गोबर से बने दिये का जबदरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। सीएम भूपेश बघेल ने दिवाली पर सीएम हाउस में इन्हीं दियों का इस्तेमाल करने की घोषणा की। आम लोगों ने भी गोबर से बने दियों को हाथों-हाथ लिया। शहर के सभी मॉल, कलेक्टोरेट परिसर, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक जगहों पर 7 स्टॉल लगाए गए हैं। हर स्टॉल पर इन दियों को लोगों ने खरीदा। इसके अलावा जिला पंचायत कैंपस के बिहान दफ्तर से बड़े ऑर्डर को पूरा करने का काम भी जारी है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान योजना और छत्तीसगढ़ सरकार की नरवा, गरवा, घुरवा, बारी योजना के तहत गोबर से प्रोडक्ट बनवाए गए। अब तक करीब 4.50 लाख के दिये बिक चुके हैं। यह आंकड़ा साढ़े पांच लाख तक पहुंचने का अंदाजा है।

7 से 8 हजार हर महीने कमा रहीं महिलाएं

  1. बिहान प्रोजेक्ट के अधिकारी विक्रम लोधी ने बताया कि जिले के 12 से 15 गांव की करीब 300 महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई। दो महीने की मेहनत के बाद महिलाओं ने गोबर के दिये, गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियां, दीवार पर छिपकाने वाले वॉल स्टीकर्स बनाए। करीब 2.5 लाख दिये बनाए गए और दूसरे प्रोडक्ट करीब 50 हजार की तादाद में बने। इस बिक्री से प्रत्येक महिला को 7 से 8 हजार रुपए महीने की आय मिल रही है। प्रोडक्ट बनाने गोबर गौठानों के मवेशियों से मिल जाता है। इसके लिए महिलाओं को महाराष्ट्र से आए ट्रेनर्स ने ट्रेंड किया। हिंदू मान्यता में गोबर को शुभ माना गया है, ऐसे में लोग इन्हें खरीदना पसंद कर रहे हैं। इस्तेमाल होने के बाद यह दिये लोग घरों के गमलों में खाद के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  2. आईआईएम, पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट में गोबर से बने दियों का इस्तेमाल होगा। यहां तक की बड़े गिफ्ट पैक बनाकर स्मृति चिन्ह की जगह गोबर से बने इन प्रोडक्ट्स को देने की तैयारी है। दिवाली के बाद गोबर से बने प्रोडक्ट नए अवतार में नजर आएंगे। लोगों को कार में लटकाने के लिए डेकोरेटिव्स, छोटे शो पीस, गमले यहां तक की मोबाइल स्टैंड भी गोबर से बना मिलेगा। इनकी कीमत 2 रुपए से लेकर 100 रुपए तक है। रायपुर के साथ ही यह प्रोजेक्ट पूरे छत्तीसगढ़ लागू किया जाएगा। महिलाओं को ट्रेंड किया जाएगा, ताकि वह अपनी आय को बढ़ा सकें। इसे सरकार की योजना नरवा, गरवा, घुरवा, बारी योजना के जमीनी स्तर पर असर के तौर पर भी देखा जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में ब्लॉक स्तर पर बनी नई उद्योग नीित, अब उद्योगों में 100 फीसदी स्थानीय मजदूर होंगे, 40 फीसदी प्रबंधन में भी जरूरी…

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छत्तीसगढ़ की नई उद्योग नीति ब्लॉक स्तर पर बनाई गई है। स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया जाएगा। साथ ही अब प्रदेश में खुलने वाले सभी उद्योगों में 100 फीसदी स्थानीय मजदूर होंगे। जबकि कुशल श्रेणी के 70 फीसदी तथा प्रबंधकीय व प्रशासनिक श्रेणी के 40% कर्मचारी स्थानीय होना अनिवार्य कर दिया गया है। आैद्योगिक नीति 1 नवंबर 2019 से 31 अक्टूबर 2024 तक लागू रहेगी। सीएम भूपेश बघेल की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिए गए। बैठक की जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री रविन्द्र चौबे, मो. अकबर आैर शिव डहरिया ने बताया कि नई उद्योग नीति का अनुमोदन कर दिया गया है। गरीबों को व्यवसाय में सहायता देने सभी निकायों की दुकानें दो फीसदी ऑफसेट दर पर किराए पर दी जाएगी। 

 इससे कोई भी व्यक्ति किराए पर दुकान लेकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकेगा। वहीं वन विभाग में पीसीसीसीफ दो नए पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें राज्य अनुसंधान जलवायु तथा राज्य अनुसंधान प्रशिक्षण  संस्थान शामिल हैं।

राजनीतिक प्रकरणों की वापसी : मंत्रियों ने बताया कि 14 राजनीतिक प्रकरणों की वापसी पर भी फैसला लिया गया। वहीं नक्सल हमले में शहीद हुए नीरज शर्मा के भाई को नौकरी देने पर भी सहमति बनी। वहीं थानेदार सविता दास को भी बहाल कर दिया गया है। इसी तरह प्रदेश के वििभन्न विभागों पड़े कबाड़ को नीलाम करने का भी फैसला लिया गया है। इसमें यदि विभाग खुद चाहे तो नीलामी कर सकता या फिर उसे भारत सरकार की एजेंसी के माध्यम से नीलाम करवाया जाएगा। मंत्रियों ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता जैव ईधन शामिल है। इसके अलावा बैटरी चार्जिंग स्टेशन को भी बढ़ावा दिया जाएगा। 

राज्योत्सव की शुरुआत सोनिया आैर समापन भूपेश करेंगे : बैठक में राज्योत्सव की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। राज्योत्सव का शुभारंभ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाथों होगा। तीन दिवसीय उत्सव में दूसरे दिन राज्यपाल अनुसुईया उइके आैर कार्यक्रम का समापन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे।