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छत्तीसगढ़ : धान की खड़ी फसल को रौंद रहे जंगली हाथी दल, किसान परेशान

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 छत्तीसगढ़ में मौसम की मार झेल रहे किसानों पर जंगली हाथियों के आतंक ने जख्म पर नमक छिड़कने का काम किया है। राज्य में सक्रिय कई हाथी दल अलग-अलग हिस्सों में स्वतंत्र विचरण कर रहे हैं और खेतों में किसानों की खड़ी फसल को रौंध कर तबाह कर रहे हैं। सोमवार की रात बिलासपुर संभाग के पेंड्रा मझगांव जंगल से निकल कर हाथियों का एक बड़ा दल मरवाही वन मंडल के अमारू जंगल से लगे खेतों में पहुंच गया। हाथियों ने यहां जमकर उत्पात मचाया और एक बड़े रकबे में लगी किसानों की धान की खड़ी फसल को रौंध कर चौपट कर दिया। राजधानी रायपुर से सटे आरंग क्षेत्र के गांव में भी हाथियों का एक बड़ा दल विचरण कर रहा है जिसने यहां किसानों के रातों की नींद उड़ा दी है।

पिछले तीन दिनों तक हुई असमय बारिश की वजह से किसान वैसे ही बेहद परेशान हैं। खेतों में काटने के लिए तैयार हो चुकी अर्ली वेरायटी धान की फसल को बारिश की वजह से काफी नुकसान पहुंचा है और अब राज्य में जगह-जगह हाथी फसलों को रौंध रहे हैं।

रायपुर, महासमुंद, बिलासपुर, सरगुजा, जशपुर, कोरिया, कोरबा, धमतरी सहित राज्य के कई जिले हाथियों के स्वतंत्र विचरण करने की समस्या से परेशान हैं। हाथी दल जंगलों को छोड़कर गांवों की सीमा के अंदर प्रवेश कर जाते हैं और जान माल का नुकसान पहुंचाते हैं। हाथियों के हमले से ग्रामीणों के घर टूटते हैं, फसल चौपट होती है और उनकी जान भी चली जाती है।

छत्तीसगढ़ में हाथी और मानव द्वंद को लेकर भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून शोध करने जा रहा है। यह रिसर्च तीन साल तक चलेगी। यह दल शोध आधारित क्षमता विकास का कार्य भी करेगा। मानव हाथी द्वंद्व को लेकर अंतरराज्यीय पहल के लिए राज्य सरकार एमओयू करने जा रही है।

इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। इसके तहत तिमोर पिंगला अभयारण्य में हाथियों के पेयजल के लिए 16 एनीकट, 11 स्टॉप डैम और 475 हेक्टेयर में चारागाह विकास कार्य कराया गया है। छत्तीसगढ़ में हाथी-मानव द्वंद्व में आदिवासियों की जान जा रही है।

हाथियों के आंतक को रोकने के लिए सरकार की ओर से चलित हाथी दस्ता बनाया गया है। जंगली हाथियों को रेडियो कॉलर पर सेटेलाइट के माध्यम से निगरानी की जा रही है। कर्मचारियों की गश्त भी लगाई जा रही है। गांवों में नु-ड़ नाटक, रैली और कार्यशाला के माध्यम से भी जागरूकता की जा रही है।

चॉकलेट खाने के ये दुष्प्रभाव जानकर हैरान हो जाएंगे आप

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चाकलेट ह्रदय, मस्तिष्क, मन व बुद्धि पर बहुत ही विपरीत प्रभाव डालता है। इसका सेवन कई घातक बीमारियों का गंभीर कारण है। इसमें पाये जानेवाले बहुत ही हानिकारक तत्त्व है।

चॉकलेट खाने के दुष्प्रभाव:

1. कैफीन: व्यक्ति को चाकलेट खाने के अधीन करता है। इससे चित्त अधिक विचलित होता है। नींद बिगड़ती है। सिरदर्द व आँतों के विकार उत्पन्न होते है।

2. सीसा: यह एक अत्यंत हानिकारक खनिज है, जो बोद्धिक विकास रोकता है। इससे बुद्धि -गुणांक कम होता है। ह्रदय की गति में अतिरिक्त वृद्धी होती है।

3. थियोब्रोमाइन: असामान्य ग्रंथि-वृद्धि, अवसाद, बेचैनी, अनिंद्रा, पाचनतंत्र के रोग और खुजली जैसे कई रोग होते हैं।

4. वेसोएक्टिव एमाइन्स: मस्तिष्क की रक्तवाहिनियों को प्रसारित कर सिरदर्द कराते है।

5. सेच्युरेटेड फेट्स: कोलेस्ट्राल व ब्लडप्रेशर बढ़ाते हैं। ह्रदय की रक्तवाहिनियों को अवरुद्ध कर ह्रदयरोग उत्पन्न करते हैं। इनसे मोटापा, दाँतों के रोग व कील-मुंहासे होते हैं।

6. थियोफालीन: पेट की तकलीफें व तंत्रिका-विकार होते हैं।

7. टिरपटोंफेन: शुरू में ख़ुशी व स्फूर्ति का एहसास दिलाकर बाद में थकाता है। अत: हानिकारक द्रव्यों से युक्त ऐसे चाकलेट का सेवन करने की अपेक्षा स्वास्थ्य, बुद्धि व बलवर्धक तुलसी-गोलियों का सेवन करे।

छत्तीसगढ़ : PWD ऑफिस परिसर में घुसा भालू, लोगों में दहशत

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कांकेर शहर में फिर एक बार भालू ने दहशत फैला दी है। मंगलवार की अल सुबह एक भालू शहर में स्वच्छंद विचरण करता देखा गया। इसके बाद यह भालू यहां स्थित पीडब्लूडी कार्यालय के परिसर में दाखिल हो गया। इस परिसर में एसडीओ कार्यालय सहित कर्मचारियों के आवास भी हैं। भालू के आवासिय व कार्यालय परिसर में घुसने के बाद यहां लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारियों के परिवार के सदस्य दहशत में नजर आए। इस बीच लोगों की भीड़ देख भालू एक खंडहरनुमा भवन में जा घुसा। बाहर लोगों का मजमा लगा रहा।

मौके पर वन विभाग और पुलिस का अमला भी पहुंचा और सुरक्षा इंतजाम अपने हाथ में लिए। उधर भालू के शहर में घुसने की खबर से लोग कौतूहल वश वहां एकत्र होने लगे। लंबे समय तक मशक्कत जारी रही, लेकिन भालू वहीं डटा रहा।

इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने रायपुर रेंज के अफसरों को इसकी सूचना दी। सूचना पर रायपुर से एक टीम को रवाना किया गया है जो भालू को ट्रेंक्यूलाइज कर वहां से बाहर निकालने का काम करेगी।

कांकेर शहर में जंगली जानवरों की धमक अक्सर होती रहती है। एक आदमखोर तेंदुआ कई बार रात के वक्त शहर की सड़कों पर घूमता देखा गया था। बाद में इसे पकड़ कर जंगल में छोड़ा गया था। शहर में भालुओं की दखल तो अक्सर होती रहती है। इन भालुओं ने यहां पहले कई लोगों पर हमले किए हैं।

पिछले दिनों मॉर्निंग वॉक के लिए निकली एक महिला और एक पुरुष पर भालुओं ने हमला कर दिया था। दो भालुओं को एफसीआई के गोदाम में बंद कर स्थानीय ग्रामीणों और कर्मचारियों ने पकड़ा था, जिसे बाद में वन विभाग को सौंप दिया गया था।

घने जंगल और पहाड़ी इलाका होने की वजह से कांकेर वन क्षेत्र में बड़ी तादात में जंगली हिंसक जीव रहते हैं। शहर के नजदीक से ही जंगली इलाका शुरू हो जाता है, इस वजह से शहर में अक्सर जंगली जानवर घुसते रहते हैं। यहां जंगल और शहर के बीच की सीमा बिल्कुल असुरक्षित है।

यहां RTO में लाइसेंस बनवाने के लिए ड्राइविंग से पहले महिलाओं को देना होता है ड्रेस का टेस्ट

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 18 साल की उम्र के बाद कोई भी व्यक्ति ड्राइविंग लाइसेंस बनवा सकता है बशर्ते कि वह आरटीओ से निर्धारित सभी मानदंडों को पूरा करता हो। सारे दस्तावेज जमा करने और लर्निंग लाइसेंस की निर्धारित परीक्षा पास करने के बाद निश्चित समय पर लाइसेंस चाहने वाले को आरटीओ में अधिकारियों के सामने गाड़ी ड्राइव करके दिखाना होता है। अगर, वह इस ड्राइविंग टेस्ट में पास हो जाता है तो उसे निश्चित अवधि के लिए वाहन चलाने का लाइसेंस मिल जाता है। लेकिन, अगर आप तमिलनाडु में हैं और उसमें भी महिला हैं तो आपको इस टेस्ट से पहले भी एक टेस्ट से गुजरना होगा, जिसका कोई प्रावधान लिखित रूप में मोटर व्हीकल ऐक्ट में नहीं है। इस अलिखित नियम के अनुसार आरटीओ के अधिकारी ये तय करते हैं कि ड्राइविंग टेस्ट देने आई महिला ने किस तरह के कपड़े पहन रखे हैं। अगर उन्हें लगा कि उनके हिसाब से महिला का परिधान सही है, तभी वह गाड़ी ड्राइव करने की इजाजत देते हैं, नहीं तो उन्हें वहां से बैरंग लौटा दिया जाता है।जींस-स्लीवलेस में लाइसेंस नहीं

चेन्नई में आजकल आरटीओ के इंस्पेक्टर नियम-कानून से अलग अपनी मनमर्जी का नियम भी जनता पर थोपने लगे हैं। टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक पवित्रा नाम की आईटी फिल्ड में काम करने वाली एक महिला केके नगर स्थित आरटीओ पहुंची तो उसे ड्राइविंग टेस्ट देने से सिर्फ इसलिए रोक दिया गया, क्योंकि उन्हें उसका ड्रेस मुनासिब नहीं लगा। पवित्रा ने बताया कि ‘मैंने जींस और स्लीवलेस टॉप पहन रखी थी।’ इसपर ड्राइविंग टेस्ट लेने वाले इंस्पेक्टर को आपत्ति थी। उसने इन कपड़ों में ड्राइविंग टेस्ट की इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया। महिला ने किसी तरह से टेस्ट के लिए वक्त निकाला था। इसलिए, उसने बहस में पड़ने की बजाय उसकी बात मान लेने में ही भलाई समझी और घर जाकर ड्रेस चेंज करके टेस्ट के लिए वापस आई। उसके मुताबिक, ‘लेकिन, मुझे लाइसेंस की बहुत जरूरत थी, इसलिए मैं घर गई और सलवार-कमीज पहनकर लौटी।’

यहां ड्राइविंग टेस्ट के लिए सलवार-कमीज है ड्रेस कोड

चेन्नई के आरटीओ में ड्रेस कोड की शिकार हुई पवित्रा अकेले नहीं हैं। करीब 10 दिन पहले ही कॉलेज की छात्रा सुमति के साथ भी ऐसा ही वाक्या हुआ था। उसे आरटीओ से इसलिए लौटा दिया गया था, क्योंकि वह कैपरी पैंट और शर्ट पहनकर ड्राइविंग टेस्ट के लिए पहुंची थी। उससे कहा गया कि घर जाओ और सभ्य कपड़े पहनकर आओ। वह भी ड्राइविंग टेस्ट के लिए बड़ी मुश्किल से मिले मौके को गंवाना नहीं चाहती थी। उसने कहा, ‘मैं लाइसेंस मिलने का अपना चांस गंवाना नहीं चाहती थी, इसलिए मैं घर गई और सलवार-समीज पहनकर वापस लौटी।’
(महिलाओं के नाम बदले गए हैं)

लुंगी-शॉर्ट्स वाले पुरुषों को भी आफत

दो महिलाओं ने तो बताया कि वह तो इतनी डर गई थीं कि उस इंस्पेक्टर के नाम का पता लगाया, जो ड्रेस कोड पर जोर दे रहा था। खास बात ये है कि पिछले हफ्ते ड्राइविंग टेस्ट देने वाले लोगों ने बताया कि यह मोरल ड्रेस कोड यहां सिर्फ महिलाओं पर ही नहीं थोपा जा रहा था। वहां जो पुरुष लुंगी या शॉर्ट्स पहनकर पहुंच रहे थे, उन्हें भी बैरंग लौटा दिया गया। जब तक वो उनके बताए ड्रेस पहनकर नहीं आए उन्हें ड्राइविंग टेस्ट में नहीं शामिल होने दिया गया।

ताकि फूहड़ नहीं दिखें लोग….ट्रांसपोर्ट कमिश्नल

वाहन दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों को देखने वाले एक वकील वीएस सुरेश ने कहा कि कानून ड्राइविंग टेस्ट के लिए किसी ड्रेस कोड की बात नहीं करता। उन्होंने कहा कि, ‘आवेदकों की उम्र कम से कम 18 वर्ष की होनी चाहिए और उसे मानसिक तौर पर फिट होना चाहिए।’ हालांकि, रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर जी सुंदरमूर्ति ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि वह इस मामले को देखेंगे। वैसे ट्रांसपोर्ट कमिश्नर सी समयमूर्ति ने कहा कि खासकर टू-व्हीलर्स टेस्ट के दौरान कैपरी पैंट और लुंगी पहनना फूहड़ लगता है और उससे बचना चाहिए।
(तस्वीरें सिर्फ प्रतिकात्मक हैं)

छत्तीसगढ़ : सवारी के परिवहन की आड़ में ऑटोचालक करता था ऐसा काम

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ऑटो चालक सवारी लाने-ले जाने के बजाए नशीली दवा के कारोबार में शामिल हो गया। पुलिस ने उससे पूछताछ कर उनके सरगना समेत दो आरोपित को पकड़ लिया। आरोपितों से बड़ी मात्रा में नशीले टेबलेट व इंजेक्शन जब्त किया गया है।

कोतवाली पुलिस नशीली दवा की सप्लाई करने वालों की जानकारी जुटाकर कार्रवाई की योजना बना रहे थे। तभी पता चला कि ऑटो चालक भी इस कारोबार में शामिल है। टीआई ने टीम को पकड़ने के निर्देश दिए। इस बीच तालापारा निवासी संदेही ऑटो चालक अकील अहमद पुराना बसस्टैंड में मिल गया।

पुलिस ने दोनों आरोपित के पास से 11 सौ 70 नाइट्रोसन टेबलेट, 127 रेक्सोजेसिक एम्पुल इंजेक्शन व एविल टेबलेट जब्त किया है। जब्त दवा की कीमत हजारों में बताई गई है। दोनों आरोपित के खिलाफ पुलिस ने एडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है।

मोबाइल चोर पकड़ाए

जोनल स्टेशन में जांच के दौरान जीआरपी व आरपीएफ टास्क टीम ने संदिग्ध गतिविधि देखकर दो लोगों को पकड़ लिया। दोनों की तलाशी लेने पर चार मोबाइल बरामद हुए। उन्होंने मोबाइल चोरी करने की बात स्वीकार कर ली है।

त्योहारी में ट्रेन व स्टेशनों में चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए आरपीएफ ने अलग से टॉस्क टीम बनाई है। यह टीम जीआरपी के साथ समन्वय स्थापित कर लगातार ट्रेन व स्टेशनों में जांच कर रही है। रविवार को जांच के दौरान प्लेटफार्म दो पर संदिग्ध युवक दिखाई दिए।

वे यात्रियों के लगेज में ताकझांक कर रहे थे। संदेह होते ही घेराबंदी कर दोनों को पकड़ा गया। पूछताछ में एक ने अपना नाम शंभू गोंड़ पिता स्व. हरि गोंड़( 40) निवासी पोर्टरखोली बताया। वहीं दूसरे का नाम मोतीलाल बंजारे उर्फ चकरी पिता पटवारी लाल बंजारे(30) निवासी बिल्हा है।

पूछताछ में दोनों स्टेशन आने की वजह नहीं बता पाए। दोनों की तलाशी ली गई। उनके कब्जे से चार मोबाइल बरामद हुए। सख्ती से पूछताछ में दोनों ने मोबाइल पूर्व में रेलवे स्टेशन से चोरी करना स्वीकार किया। जीआरपी ने आरोपितों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है। जब्त मोबाइल की कीमत 36 हजार रुपये आंकी गई है।

चंद्रयान-1: जब 11 साल पहले भारत ने दुनिया को बताया- चांद पर पानी है

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भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के चंद्रयान-1 मिशन को आज (22 अक्टूबर) पूरे 11 साल हो चुके हैं। चंद्रयान-1 की वजह से आज भारत का नाम स्पेस क्लब में शामिल देशों में गर्व से लिया जाता है। 22 अक्टूबर 2008 को इसरो ने चांद पर चंद्रयान-1 रॉकेट भेज कर इतिहास रच दिया। चंद्रयान-1 ने चांद पर पानी की खोज की और दुनिया को बताया कि भारत किसी अन्य देशों से कमतर नहीं है। इसरो की इतनी बड़ी खोज से पूरी दुनिया हैरान थी कि आखिर भारत ने यह कैसे किया, यह पूरी सदी की सबसे बड़ी खोज थी।पहली कोशिश में रचा इतिहास
पहली कोशिश में रच दिया इतिहास

बता दें कि, चंद्रयान-1 ने 22 अक्टूर को चांद के लिए उड़ान भरा और अंतरिक्ष में धरती के 7 चक्कर लगाने के बाद वह पहली बार 8 नवंबर को चांद की पहली कक्षा में पहुंचा। चार बार चांद की कक्षा में चक्कर काटने के बाद 12 नवंबर को चंद्रयान-1 चांद की सतह के करीब 100 किलोमीटर उपर पहुंच गया। चंद्रयान-1 को 2 साल तक काम करने के लिए बनाया गया था लेकिन अंतरिक्ष में रेडिएशन ज्यादा होने की वजह से उसमें लगे कंप्यूटरों को नुकसान पहुंचा और वह सिर्फ 11 महीने ही काम कर सका। इतने कम समय में भी चंद्रयान-1 ने धरती पर कई अहम जानकारियां भेंजी, इनमें से सबसे बड़ी खोज चांद पर पानी का पता लगाना था।

चांद पर पानी की खोज
चांद पर की पानी की खोज

11 महीने काम करने के बाद इसका पृथ्वी के डीप नेटवर्क से संपर्क टूट गया और वह अंतरिक्ष में ही लापता हो गया। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा में 2 जुलाई 2016 को एक बार फिर चंद्रयान-1 का पता लगाया। वह इस दौरान भी चांद का चक्कर लगा रहा था। 11 महीने के दौरान चद्रयान-1 ने चांद के चारों तरफ 3400 से ज्यादा चक्कर लगाए। चद्रयान-1 ने अपने कार्यकाल में 70 हजार थ्री-डी तस्वीरें इसरो को भेजी, उसने करीब चांद की 70 प्रतिशत हिस्से की तस्वीरें भेजी थीं। इसके अलावा चंद्रयान-1 ही ऐसा पहला मिशन था जिसमें वैज्ञानिकों को टेरेन मैपिंग कैमरे की मदद से पहली बार चांद की चोटिंयों और गड्ढों को करीब से देखने का मौका मिला।

20 साल पहले आया आइडिया
20 साल पहले चद्रयान-1 का आया आइडिया

चद्रयान-1 को भले ही आज से 11 साल पहले अंतरिक्ष में भेजा गया हो लेकिन इसका आइडिया 20 साल पहले ही आ गया था। 1999 में इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेस ने इसका सुझाव दिया और वर्ष 2000 में एस्ट्रोनॉटिकल सोसाईटी ऑफ इंडिया ने इसे हरी झंडी दिखाई। इस मिशन में देश के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों को शामिल किया गया, वर्ष 2003 में इस मिशन को सरकार ने भी मंजूरी दे दी।

VIDEO : सवारी करने जाता है कोई तो मरने की एक्टिंग करने लगता है यह कामचोर घोड़ा

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अक्सर कई बार हमारा भी मन काम करने को नहीं करता. ऑफिस पहुंचने या घर में ही कई बार काम करते-करते इतना बोर हो जाते हैं कि बहाने बना कर काम टाल जाते हैं. अब इंसान तो ऐसा कर सकता है. कुछ लोग ऐसा करने में माहिर भी होते होंगे लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जानवर भी ऐसा करते होंगे?

अगर आपको लगता है कि बहाने सिर्फ इंसान ही बना सकता है तो आप यह गलतफहमी अपने मन से निकाल दें. जी हां! काम से टालमटोल करने का या बचने का बहाना बनाते हुए एक ऐसे जानवर को पाया गया है जिसके बारे में कहा जाता है कि उससे ज्यादा फुर्तीला कोई नहीं है.

एक घोड़े (Horse) का वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है. यह घोड़ा जैसे ही देखता है कि उस पर कोई सवारी करने आ रहा है या उस पर सवार हो चुका है, वह तुरंत मैदान में ही गिर जाता है. ऐसा नहीं है कि उसे कोई बीमारी है या उसके पांव में कोई दिक्कत है. सच्चाई यह है कि ये घोड़ा कामचोर है!

और जब मरने की एक्टिंग करने लगता है घोड़ा? यह वीडियो मैक्सिको (Mexico) के डुरांगो सिटी निवासी फैरासिस्को जालासार ने फेसबुक (Facebook) पर पोस्ट किया है. इस 1.32 सेकेंड के वीडियो में आप देख सकते हैं कि जैसे ही कोई घोड़े पर सवारी करने की कोशिश करता है वह मैदान में ही लेट जाता है.

इतना ही नहीं वह मरने की एक्टिंग करने लगता है जबकि वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि वह सांस ले रहा है. पास ही खड़ा एक घोड़ा मैदान के चक्कर लगा रहा है. वह कई बार इस एक्टिंग करने वाले कामचोर घोड़े के पास आता है और मानों कह रहा हो कि ‘उठो… नाटक मत करो.’

2.3 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा….
वीडियो में देख सकते हैं कि एक बार जब घोड़े पर शख्स सवारी करने की कोशिश करता है तभी वह मैदान में गिर जाता है. फिर वह शख्स दूर चला जाता है. कुछ देर बाद जब वह अपने आस पास किसी को नहीं देखता तो फिर उठ जाता है.

जैसे ही वह अचानक एक आदमी को अपनी ओर दौड़ते हुए देखता है तुरंत फिर लेट जाता और अपने पांव इधर उधर मारने लगता है. दो हफ्ते पहले पोस्ट किए गए इस वीडियो को अब तक 2.3 करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने देखा है. समाचार लिखे जाने तक इस वीडियो पर 83 हजार से ज्यादा लोगों ने रिएक्शन दिया था. 12 लोगों के कॉमेंट्स आए थे और 6,33,000 बार शेयर किया जा चुका है.

इस वीडियो के कैप्शन में जालासर ने स्पैनिश में लिखा है- ‘El caballo que se hace el muerto para que no le montén’. Google के अनुसार इसका हिन्दी मतलब है – ‘वह घोड़ा जो मर जाता है ताकि उस पर कोई सवारी न कर सके.’

इस वीडियो पर लोगों ने अपने दोस्तों को खूब टैग किया है ताकि वह भी ऐसा कामचोर घोड़ा देख सकें. Youtube पर यह वीडियो देखने के बाद एक व्यक्ति ने लिखा, ‘यह वास्तव में मैं हू, जब मेरी माँ बर्तन धोने के लिए नीचे से चिल्लाती है और मैं सोने का नाटक करता हूं.’ एक शख्स ने लिखा यह घोड़ा पूरी तरह से मेरा जीवन के बारे में बता रहा है.

नोबेल विजेता अर्थशास्‍त्री अभिजीत बनर्जी से मिले पीएम मोदी, कहा उपलब्धियों पर देश को गर्व

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अपने आधिकारिक निवास पर नोबेल पुरस्‍कार विजेता अर्थशास्‍त्री अभिजीत बनर्जी से मुलाकात की है। दोनों की यह पहली मुलाकात थी और अभिजीत की मानें तो पीएम ने उनसे अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लाने के बारे में कई बातें कीं। वहीं, बनर्जी से मीटिंग के बाद पीएम मोदी भी उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह सके। आपको बता दें कि साल 2019 के लिए जिन लोगों को अर्थशास्‍त्र का नोबेल पुरस्‍कार दिया गया है उसमें अभिजीत की पत्‍नी एश्‍थर डुफेलो भी शामिल हैं।

‘अफसरशाही को बदल रहे हैं पीएम’

अभिजीत ने पीएम से मुलाकात के बाद कहा, प्रधानमंत्री काफी उदार थे कि उन्‍होंने मुझे अपना समय दिया और मुझे बताया कि वह भारत के बारे में किस तरह से सोचते हैं। यह वाकई में काफी खास था क्‍योंकि कोई भर सिवर्फ नीतियों के बारे में सुनता है लेकिन शायद ही कोई यह सुनना चाहता हो कि इसके पीछे का विचार क्‍या है।’ उन्‍होंने आगे कहा, ‘उन्‍होंने मुझे बताया कि वह शासन को किस नजरिए से देखते हैं और क्‍योंकि जमीन पर कुछ लोगों को शासन को लेकर भरोसा कम है। इस वजह से कुछ लोग मानते हैं कि यह सरकार सिर्फ एलीट लोगों के नियंत्रण में हैं और प्रतिक्रिया देने वाली सरकार नहीं है।’ बनर्जी के मुताबिक इस प्रक्रिया में पीएम ने उन्‍हें बहुत ही अच्‍छे से समझाया कि वह कैसे देश में अफसरशाही को बदलकर इसे और ज्‍यादा प्रतिक्रियात्‍मक बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

कई विषयों पर हुई विस्‍तार से चर्चा

अभिजीत के मुताबिक भारत के लिए अब यह काफी जरूरी है कि अफसरशाही ऐसी हो जो जमीन से जुड़ी हो। अभिजीत ने इसके साथ ही पीएम मोदी को थैंक्‍यू भी कहा। वहीं पीएम मोदी ने मुलाकात के बाद कहा कि बनर्जी के साथ कई विषयों पर चर्चा काफी ‘काफी स्‍वस्‍थ और विस्‍तृत’ रही। पीएम ने ट्वीट कर बनर्जी की तारीफों के पुल बांधे। पीएम के शब्‍दों मेंद्व ‘नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी से मीटिंग बेहद अच्‍छी थी। मानवता के सशक्‍तीकरण के लिए उनका नजरिया एकदम स्‍पष्‍ट है। हमने कई विषयों पर विस्‍तार से चर्चा की। भारत को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है। मैं उन्‍हें उनके भावी कार्यों के लिए शुभकामनाएं देता हूं।’ गौरतलब है कि बीजेपी के कुछ नेता जिनमें पीयूष गोयल और राष्‍ट्रीय सचिव राहुल सिन्‍हा शामिल हैं, उन्‍होंने सरकार की आलोचना करने पर बनर्जी को आड़े हाथों लिया था।

उबर एप से कर सकेंगे मेट्रो में सफर, साथ में मिलेगी कैब की सुविधा

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अब आप जल्द ही उबर एप की मदद से मेट्रो में सफर कर सकेंगे। इसके लिए यात्रियों को कार्ड या फिर टोकन का प्रयोग भी नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही यात्रियों को घर से मेट्रो स्टेशन या फिर मेट्रो स्टेशन से अपने घर तक कैब की सुविधा भी मिलेगी। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए उबर ने दिल्ली मेट्रो कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएमआरसी) के साथ समझौता किया है।

210 स्टेशनों पर सुविधा

इस तरह की योजना पहली बार एशिया और भारत में शुरू की गई है। इससे पहले इस सेवा को अमेरिका के बोस्टन और फ्रांस के नाइस (Nice) शहर में शुरू किया गया था। फिलहाल इस योजना को दिल्ली मेट्रो के 210 स्टेशनों में शुरू किया गया है। एप पर एक बुकिंग से ही आपकी पूरी यात्रा हो जाएगी। इससे यात्रियों को बार-बार बुकिंग करने के, टोकन या फिर स्मार्ट कार्ड को खरीदने/रिचार्ज कराने के झंझट से मुक्ति मिलेगी।

ऐसे होगी एप की मदद से पूरी यात्रा

  • एप में यात्रियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का विकल्प मिलेगा।
  • एप में आपको कहां से कहां तक की यात्रा का विवरण देना होगा।
  • बुकिंग करने के बाद आपको कैब और निकटम मेट्रो स्टेशन के बारे में बताया जाएगा।
  • इसके बाद आपकी बुुक की गई लोकेशन पर कैब आएगी जो पास के मेट्रो स्टेशन पर छोड़ देगी।
  • मेट्रो स्टेशन में मोबाइल एप पर एक कोड को स्कैन करने के बाद प्रवेश मिलेगा।
  • प्रवेश करने के बाद यात्री मेट्रो में यात्रा करेंगे।
  • फिर तय स्टेशन पर उतरने के बाद यात्रियों को कैब मिलेगी, जो उनके बताए लोकेशन पर छोड़ देगी।
  • इसके बाद एप के जरिए ही उनको पूरी यात्रा का भुगतान करना पड़ेगा।
  • जल्द ही इसमें डीटीसी बसों का विकल्प भी दिखने लगेगा, जिससे यात्री चाहे तो बसों का भी प्रयोग कर सकेंगे।

छत्तीसगढ़ में 4 माह बाद खुलेंगे अभयारण्य के द्वार

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प्रदेश के अभयारण्यों के द्वार एक नवंबर से खुल जाएंगे। पर्यटक अब आसानी से अभयारण्यों में घूम कर वन्यजीवों के साथ-साथ प्रकृति का लुत्फ उठा सकेंगे। वन विभाग ने अभयारण्य खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। वन विभाग बारिश में चार माह के लिए प्रदेश के सभी अभयारण्य पर्यटकों के लिए बंद कर दिए थे। राज्य शासन ने एक जुलाई से लेकर 31 अक्टूबर तक प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था, क्योंकि इस दौरान वन्यजीवों का प्रजनन काल होता है। इसके साथ ही अभयारण्यों में सुरक्षा संबंधी काम किए गए हैं। वन विभाग के अधिकारी का कहना है कि प्रदेश के अभयारण्य एक नवंबर से पर्यटकों के लिए खोल दिए जाएंगे।

ज्ञात हो कि अभयारण्यों में ऑनलाइन बुकिंग शुरू हो गई है। ज्यादातर जगहों में ओपनिंग के बाद पार्क पूरी तरह से अभयारण्य के फुल होने का अधिकारियों द्वारा दावा किया जा रहा है। चार माह बाद अभयारण्य पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए विभाग जिप्सी के साथ-साथ तैयारी पूरी कर ली गई है।

जानवरों का होता है प्रजनन काल

बारिश का मौसम अधिकतर वन्य प्राणियों, जीव-जंतुओं का प्रजनन काल होता, इसलिए पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया जाता है, ताकि वे विचलित न हों, वे स्वच्छंद विचरण कर सकें। बाकी दिनों पर्यटकों की आवाजाही से वन्य प्राणी पर्यटकों की नजरों से बचते-बचाते विचरण करते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बारिश के सीजन में अभयारण्य के सभी तालाब, पोखर व नाले पानी से लबालब हो जाते हैं। सड़कें टूट जाती हैं, जिससे पर्यटकों को दिक्कत होती है और खतरा भी रहता है। इसलिए हर साल बारिश के मौसम में पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया जाता है।

सुरक्षा के किए जाएंगे उपाय

एक जुलाई से पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी, क्योंकि आसपास रहने वाले ग्रामीण अभयारण्यों के भीतर से ही आना-जाना करते हैं। ऐसे में अभयारण्यों की सुरक्षा को लेकर खास उपाय किए किए जाते हैं, जिससे भविष्य में वन्य प्राणियों को कोई दिक्कत न हो।

छत्तीसगढ़ के अभयारण्य

बारनवापारा अभयारण्य, भोरमदेव अभयारण्य, भैरमगढ़ अभयारण्य, सेमरसोत अभयारण्य, गोमर्डा अभयारण्य, पामेड़ अभयारण्य, बादलखोल अभयारण्य, तमोर पिंगला अभयारण्य आदि।

छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय उद्यान

कांगेरघाटी राष्ट्रीय उद्यान

गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान

छत्तीसगढ़ के टाइगर रिजर्व

इंद्रावती टाइगर रिजर्व

उदंती एवं सीतानदी टाइगर रिजर्व

अचानकमार टाइगर रिजर्व

– प्रदेश के अभयारण्य एक नवंबर से पर्यटकों के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। पर्यटक चार माह बाद दोबारा वन्यजीवों का लुत्फ उठा सकेंगे। – अतुल कुमार शुक्ला, पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ, छत्तीसगढ़