यह प्रेमी जोड़ा करवा चौथ 2019 का व्रत कभी नहीं भूल पाएगा। प्रेमी पकड़ा गया और प्रेमिका के परिजनों ने उसकी जमकर धुनाई कर डाली। रातभर उसे प्रेमिका के घर के बाहर नीम के पेड़ के बांधे रखा। घटना राजस्थान के डूंगरपुर जिले के के रामसागड़ा थानांतर्गत वैंजा गांव की है। दूसरे दिन सूचना पाकर पुलिस मौेके पर पहुंची और प्रेमी को छुड़वाकर प्रेमिका के पिता, भाई सहित अन्य के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया।
थानाधिकारी परमेश्वर पाटीदार ने बताया कि रंगेला फला दुधेली का भाटड़ा निवासी भुपेंद्र पुत्र अर्जुनलाल कटारा का वैंजा की एक युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था। युवक ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया कि करवा चौथ 2019 की रात 12 बजे प्रेमिका ने उसे फोन किया तथा करवा चौथ व्रत का हवाला देते हुए मिलने के लिए बुलाया। इस पर प्रेमी रात को प्रेमिका के कहे अनुसार वैंजा पशु चिकित्सालय के पास उससे मिलने पहुंच गया। वहां प्रेमिका से बातचीत कर रहा था। इसी दौरान युवती के परिवारजन वहां पहुंच गए। उन्हें देखते ही युवक मौके से भागा।
परिजनों ने पीछा कर उसे दबोचा लिया। उसे घर के पास नीम के पेड़ से बांध दिया। उसके बाद प्रेमी के साथ लात-घुसों व लट्ठ से मारपीट की गई। रातभर पेड़ से बांध कर रखा। सूचना पर शुक्रवार सुबह वैंजा चौकी से पुलिस दल मौके पर पहुंचा। युवती के परिजनों से समझाइश कर युवक को छुड़ाकर चौकी पर लाए। यहां युवक के परिजन भी आ गए। घायल युवक का उपचार कराया। पुलिस ने युवक की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अगली पीढ़ी स्कोडा ऑक्टेविया का 11 नवंबर को अनावरण होने का इंतजार किया जा रहा है। इस संबन्ध मे ये बाद महत्वपूर्ण है कि इस लांच से पहले ही इस कार की कुछ तस्वीरें नेट पर लीक हो गई हैं। इन लीक्स छवियों को काफी प्रचारित भी किया जा रहा है।
आपको बता दें की टीज़र छवि बड़े मिश्र धातु पहियों के सेट की उपस्थिति को इंगित करती है और इसमें कोई दरवाज़े के हैंडल नहीं दिखते हैं क्योंकि वे अंदर छिपे हो सकते हैं। झुके हुए खंभे, राखी विंडशील्ड, स्लीकर विंग मिरर, स्पोर्टियर बॉडीलाइन, सी-आकार के एलईडी टेल लैंप आगामी ओक्टाविया को मौजूदा मॉडल की तुलना में अधिक आकर्षक बनाती है।
स्कोडा हाई-एंड वेरिएंट में या 2020 ऑक्टेविया में एक विकल्प के रूप में मैट्रिक्स एलईडी उपचार की पेशकश कर सकता है। ऑक्टेविया पहले से ही एक बडी सेडान है और इसके स्केला हैचबैक का प्रभाव अंदर पर भी देखा जा सकता है।
अन्य बदलावों में एक नया स्टीयरिंग व्हील, अपडेटेड डिजिटल इंस्ट्रूमेंटेशन और सेंटर कंसोल, अपमार्केट सामग्रियों और फिनिश का उपयोग आदि शामिल हैं। स्कोडा 2020 ग्लोबल के लिए और अधिक टीज़र जारी करेगा। चौथी पीढ़ी के ओक्टाविया को अगले साल भारत में लॉन्च किया जा सकता है।
गौरतलब है कि स्कौडा आक्टेविया को एक नये रुप और नये फिचर्स के साथ लांच किया जा रहा है। स्कौडा की ऑक्टेविया स्कौडा के नजरीये से काफी महत्वपूर्ण है क्योंकी स्कौडा की सेल्स काफी कम हो गई है। ऐसे में नई ऑक्टेविया के लांच के साथ कंपनी को अपनी सेल्स में बढोतरी की आस है।
देश में मिलने वाले कच्चे दूध से दोगुना जहरीला है पैकेज्ड दूध। खाद्य नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई ) ने देशभर में सर्वे के आधार पर यह चौंकाने वाला खुलासा किया है। कई प्रमुख ब्रांड के पैकेज्ड दूध (प्रोसेस्ड मिल्क) और कच्चे दूध के नमूने निर्धारित गुणवत्ता और तय मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। प्रोसेस्ड मिल्क के 10.4 फीसदी नमूने सुरक्षा मानकों पर फेल रहे, जो कच्चे दूध (4.8 फीसदी) की तुलना में काफी अधिक हैं। इनमें एफ्लाटॉक्सिन- एम 1, एंटीबायोटिक व कीटनाशक जैसे जहरीले पदार्थ मिले हैं। प्रोसेस्ड दूध में एफ्लाटॉक्सिन अधिक है। एफ्लाटॉक्सिन का पशु आहार में इस्तेमाल होता रहा है।
तामिलनाडु, दिल्ली, केरल, पंजाब, यूपी, महाराष्ट्र और उड़ीसा के लिए सैंपल में एफ्लाटॉक्सिन मिला है। मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र, यूपी, आंध्रप्रदेश और गुजरात के सैंपलों में एंटीबायोटिक अधिक मिले हैं।
कई प्रमुख ब्रांड के पैकेज्ड दूध (प्रोसेस्ड मिल्क) और कच्चे दूध के नमूने निर्धारित गुणवत्ता और तय मानकों पर खरे ने नहीं उतरे हैं। खाद्य नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक, गुणवत्ता मानकों पर प्रोसेस्ड दूध के 2,607 नमूनों में से 37.7 फीसदी फेल हो गए।
वहीं, कच्चे दूध के 3,825 नमूनों में से 47 फीसदी मानकों के मुताबिक नहीं थे। सुरक्षा मानकों की बात करें तो प्रोसेस्ड दूध के 10.4 फीसदी नमूने फेल रहे, जो कच्चे दूध (4.8 फीसदी) की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि कुल नमूनों में केवल 12 में ही मिलावट पाई गई, जिनमें से ज्यादातर तेलंगाना के थे।
एफएसएसएआई के सीईओ पवन अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा, लोग समझते हैं कि दूध में मिलावट ज्यादा गंभीर समस्या है, लेकिन इससे बड़ी समस्या दूध का दूषित होना है। प्रोसेस्ड दूध के 2607 नमूनों में से 37.7 फीसदी नमूनों में फैट, एसएनएफ, माल्टोडेक्सट्रिन और शुगर की मात्रा तय सीमा से ज्यादा मिली।
सुरक्षा मानकों पर प्रोसेस्ड दूध के 10.4 फीसदी फेल पाए गए। इनमें एफ्लाटॉक्सिन-एम1, एंटीबायोटिक्स और कीटनाशक पाया गया। कच्चे दूध की तुलना में प्रोसेस्ड दूध में एल्फाटॉक्सिन की मात्रा अधिक पाई गई। विशेषज्ञों के मुताबिक पशु आहार में एफ्लाटॉक्सिन का लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है, जो कि खतरनाक है।
मिलावटी दूध को रोकने के लिए जल्द ही कड़े कदम उठाए जाएंगे
एफएसएसएआई ने नवंबर 2018 में राष्ट्रीय दुग्ध सर्वे 2018 की अंतरिम रिपोर्ट जारी की थी। इसमें मिलावटी दूध को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। शुक्रवार को एफएसएसएआई ने राष्ट्रीय दुग्ध सर्वे 2018 की अंतिम रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भी सौंप दिया गया है। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर मिलावटी दूध को रोकने के लिए जल्द ही कड़े कदम उठाए जाएंगे। दिल्ली में करीब 60-65 फीसदी पैकेट वाले दूध का इस्तेमाल दिल्ली में 60 से 65 फीसदी पैकेट दूध का इस्तेमाल होता है। बाहरी दिल्ली को छोड़ दें तो मध्य दिल्ली में करीब 95 फीसदी तक पैकेट दूध का ही इस्तेमाल होता है। दिल्ली के 262 नमूने लिए गए थे। इनमें 194 प्रोसेस्ड और 68 त्वरित दूध के नमूने थे। 262 में से 38 नमूनों की जांच में एफ्लाटॉक्सिन एम1 मिला।
इन 38 में से सर्वाधिक 36 नमूने प्रोसेस्ड यानी पैकेट दूध के शामिल हैं। केवल 2 नमूने ऐसे थे, जो कि पशुओं से निकाले गए त्वरित दूध में मिले थे। ठीक इसी तरह चार नमूनों में एंटीबायोटिक्स मिला है। इनमें से तीन नमूने पैकेट दूध के थे। रसायन वाले पशु आहार पर लगे रोग एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार को जल्द से जल्द सख्त फैसला लेना चाहिए। देश का हर परिवार इससे जुड़ा है। सरकार को ऐसे रसायनों के पशु आहार में इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।
सात फीसदी दूध पीने लायक ही नहीं
एफएसएसएआई ने मई से अक्तूबर 2018 के बीच 1,103 शहरों से 6,432 नमूने लिए थे। इनमें 3825 (59.5 फीसदी) कच्चे दूध और 2607 (40.5 फीसदी) प्रोसेस्ड दूध के हैं। जांच में 5976 नमूने (93 फीसदी) सुरक्षित मिले, जबकि 456 (7.1 फीसदी) नमूनों में कई तरह की मिलावट मिली। इनमें से 368 नमूने (5.7 फीसदी) एफ्लाटॉक्सिन एम-1 नामक रसायन मिला। दो में यूरिया, तीन में डिटर्जेंट पाउडर, छह में हाइड्रोजन ऑक्साइड और एक में न्यूट्रलाइजर के तत्व मिले हैं। दिल्ली समेत कई राज्यों के सैंपल में रसायन 6432 में से 368 सैंपल एफ्लाटॉक्सिन एम-1 रसायन युक्त मिले हैं। इनमें सबसे ज्यादा 227 पैकेट वाले दूध के सैंपल हैं। तमिलनाडु, दिल्ली, केरल, पंजाब, यूपी, महाराष्ट्र और ओडिशा से लिए सैंपल में ये घातक रसायन मिला है। एंटीबॉयोटिक्स दवाओं की बात करें तो मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, आंध्रप्रदेश और गुजरात के सैंपल में इनकी मौजूदगी मिली। फफूंद से पैदा होता है यह रसायन डेयरी फार्मिंग में अक्सर एफ्लाटॉक्सिन बी-1, बी-2 और एम-1 व एम-2 की चर्चा होती रहती है। पशु एफ्लाटॉक्सिन बी-1 युक्त आहार खा लें तो यह सामान्य उपचय द्वारा एफ्लाटॉक्सिन एम-1 के रूप में उनके दूध तथा पेशाब में निकलने लगता है। एफ्लाटॉक्सिन ऐसे माइकोटॉक्सिन हैं, जो एस्पर्जिलस फ्लेवस तथा एस्पर्जिलस पैरासाइटिक्स नामक फफूंद से उत्पन्न होते हैं।
इसे फंफूद से पैदा होने वाला जहर भी कहते हैं। यह इंसान और पशु दोनों के लिए खतरनाक होता है। पशुपालन विभाग के अनुसार, कई बार एफ्लाटॉक्सिन नमी और कीटों के द्वारा फसलों की क्षति होने पर भी पैदा हो सकता है।
एफ्लाटॉक्सिन एम1 से कैंसर व मस्तिष्क रोगों का खतरा बढ़ता है।
दिल्ली एम्स, मेडिसिन विभाग के डॉ. नवल किशोर विक्रम ने बताया कि एफ्लाटॉक्सिन एम1 रसायन से कैंसर व मस्तिष्क रोगों का खतरा बढ़ता है। यह इंसानों के लिवर पर दुष्प्रभाव डाल सकता है। बच्चों के लिए ज्यादा हानिकारक है, क्योंकि उनके शारीरिक विकास को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।
एफ्लाटॉक्सिन एम 1 क्या होता है
डेयरी फार्मिंग में अक्सर एफ्लाटॉक्सिन बी-1 व बी-2 तथा एम-1 व एम-2 की चर्चा होती रहती है। पशु एफ्लाटॉक्सिन बी-1 युक्त आहार खा लें तो यह सामान्य उपचय द्वारा एफ्लाटॉक्सिन एम-1 के रूप में उनके दूध तथा पेशाब में निकलने लगता है। फ्लाटॉक्सिन ऐसे माइकोटॉक्सिन हैं जो एस्पर्जिलस फ्लेवस तथा एस्पर्जिलस पैरासाइटिकस नामक फफूंद से उत्पन्न होते हैं।
इसे फंफूद से पैदा होने वाला जहर भी कहते हैं। इंसान और पशु दोनों के लिए ये खतरनाक होता है। पशुपालन विभाग के अनुसार कई बार एफ्लाटॉक्सिन नमी और कीटों के द्वारा फसलों की क्षति होने पर भी पैदा हो सकता है।
इनके नमूनों में मिला एफ्लाटॉक्सिन एम1:
राज्य
कुल सैंपल
रसायन
प्रोसेस्ड
कच्चा दूध
तमिलनाडु
551
88
60
28
दिल्ली
262
38
36
02
केरल
187
37
29
08
पंजाब
203
29
13
16
उत्तर प्रदेश
729
27
13
14
यहां मिला एंटीबॉयोटिक:
राज्य
कुल सैंपल
मिलावट
प्रोसेस्ड
कच्चा दूध
मध्यप्रदेश
335
23
03
20
महाराष्ट्र
678
09
04
05
उत्तर प्रदेश
729
08
07
01
आंध्र प्रदेश
344
07
04
03
गुजरात
456
06
03
03
किस राज्य में कितने सैंपल में मिला रसायन
राज्यों में कुल नमूने रसायन युक्त:
हरियाणा
161
13
हिमाचल
20
02
उत्तराखंड
59
07
चंडीगढ़
20
04
ऐसे किया दूध पर सर्वे
शुक्रवार को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार देश के लगभग सभी राज्यों के 1103 शहरों में मई से अक्तूबर 2018 के बीच प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) और पशुओं से निकाले त्वरित दूध दोनों ही तरह के नमूने एकत्रित किए। कुल एकत्रित 6432 नमूनों में 3825 (59.5 फीसदी) त्वरित और 2607 (40.5 फीसदी) शामिल हैं।
जब इन नमूनों की जांच की गई तो 5976 नमूने (93 फीसदी) सुरक्षित मिले हैं। जबकि 456 (7.1 फीसदी) नमूनों में तरह तरह की मिलावट मिली है। इसमें सर्वाधिक 368 नमूने (5.7 फीसदी) एफ्लाटॉक्सिन एम-1 नामक रसायन युक्त मिलने से गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इसके अलावा 2 में यूरिया, 3 में डिटर्जेंट पाउडर, 06 में हाईड्र्रोजन पर ऑक्साइड और 01 नमूने में न्यूट्रलाइजर के तत्व भी मिले हैं।
भारत सबसे बड़ा दूध उत्पादक
17.635 करोड़ टन दूध का कुल उत्पादन हुआ देश में 2017-18 में
25.455 करोड़ टन उत्पादन लक्ष्य है सरकार का 2022 तक
आपको हैदराबाद शहर के आसपास 20 वर्षीय एक लड़की स्कूटी पर घूमती हुई नज़र आएगी।
वह अपनी आजीविका कमाने के लिए एक डिलीवरी गर्ल की अपरंपरागत नौकरी लेकर सामाजिक बाधाओं को तोड़ रही है और दूसरों को इस क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित कर रही है।
हैदराबाद निवासी जननी राव ऑनलाइन फूड ऑर्डरिंग और डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी के साथ एक डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करती हैं।
उन्होंने बताया, ‘मुझे कंपनी में शामिल हुए ढाई महीने हो चुके हैं। काम दिलचस्प है और यह मजेदार है। मुझे बहुत सारे ग्राहक मिलते हैं जो दिलचस्प लोग हैं। अगर आप इसके बारे में सोचते हैं तो यह एक अलग तरह का अनुभव है।’
वह कहती हैं कि ग्राहक इस काम को करने के लिए उनकी सराहना करते हैं।
राव बताती हैं, ‘ग्राहकों की प्रतिक्रिया बहुत सराहनीय रही है। वे कहते हैं कि इस क्षेत्र में एक महिला को देखना बहुत अच्छा लगता है और वे काम करते हैं जिन्हें समाज में एक कलंक माना जाता है।’
अपनी नौकरी के इर्द-गिर्द सामाजिक अवरोधों को खारिज करते हुए, उन्होंने कहा कि ‘एक नौकरी एक नौकरी है’।
उन्होंने कहा, ‘कोई भी नौकरी छोटी या बड़ी नहीं होती है। एक नौकरी एक नौकरी है अगर यह आपको भुगतान करती है। जितना आप इसका आनंद लेंगे, उतना ही बेहतर होगा।’
फील्ड जॉब्स के दौरान महिलाओं की सुरक्षा के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा: ‘जब सुरक्षा की बात आती है, तो हैदराबाद राज्य की महिलाओं के लिए दूसरा सबसे सुरक्षित शहर है। डरने की कोई बात नहीं है। मैं महिलाओं से अपील करती हूं कि वे अपनी सुरक्षा की चिंता किए बिना वही करें जो उन्हें पसंद है।’
दिवाली का पर्व हिंदू धर्म में बहुत ही खास और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता हैं यह पर्व सुख समृद्धि और शांति का प्रतीक होता हैं दिवाली के दिन धन धान्य की कामना की जाती हैं वही पुराने समय से जहां इस दिन साधु लोग सिद्धि की कामना करते हैं तो वही तंत्र मत्र को मनाने वाले लोग टोटकों में श्रृद्धा रखते हैं इस दिवाली आप भी इन उपायों को कर अपने जीवन में आर्थिक समस्याओं को दूर कर सकते हैं वही आज हम आपको दिवाली पर किए जाने वाले कुछ सरल और खास उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, तो आइए जानते हैं।
यदि आप चाहते है कि आपकी आय में वृद्धि हो तो दिवाली को साबुत उड़द, दही और सिंदूर लेकर पीपल की जड़ में रखें और एक दीपक जलाएं। ऐसा करने से आपको लाभ प्राप्त होगा। वही अगर आप चाहते हैं कि आपको जल्दी धन लाभ हो उसके लिए दिवाली की शाम में किसी बरगद के पेड़ की जटा में गांठ लगाएं और धन लाभ मिलने के बाद इस गांठ को खोल दें।
हत्थाजोड़ी में सिंदूर लगाकर धन रखने वाली जगह पर रखने से आपकी आय में वृद्धि होगी और आपके फिजूल खर्चों में भी रोक लग जाएगी। वही गन्ने की जड़ को लाल कपड़े में लपेटकर सिंदूर और लाल चंदन लगाएं और इसे तिजोरी में रखें। आपको लाभ मिल सकता हैं वही देवी महालक्ष्मी की पूजा के समय गोमती चक्र को पूजा की थाली में रखकर माता की पूजा करें ऐसा करने से आपका धन बढ़ेगा।
वही दिवाली की रात उल्लू की तस्वीर तिजोरी पर लगाएं। ऐसा माना जाता हैं कि उल्लू हर पूर्णिमा को पीपल के चक्कर लगाता हैं जहां महालक्ष्मी विराजती हैं और कहा भी जाता हैं कि उल्लू की तस्वीर यहां पर होने से देवी महालक्ष्मी आपकी तिजोरी में हमेशा ही वास करती हैं।
आमतौर पर विमान में यात्रियों के लिए ले जाए जाने वाले सामान के वजन की सीमा तय होती है. अगर इस सीमा से जरा सा भी वजन ऊपर होता है तो यात्री को एक्स्ट्रा पैसे चुकाने होते हैं, लेकिन कुछ यात्री इस एक्स्ट्रा बैगेज फीस को बचाने के लिए नई-नई तरकीब निकाल लेते हैं. ऐसी ही एक तरकीब फिलीपींस की महिला ने निकाली. उसने एक्स्ट्रा बैगेज फीस बचाने के लिए अपने सूटकेस से 2.5 किलोग्राम वजनी कपड़े निकालकर पहन लिए. और हां उसकी यह तरकीब काम भी कर गई.
एक्स्ट्रा बैगेज फीस बचाने की यह तरकीब अपनाई फिलीपींस की गेल रॉड्रिगुयेज नाम की महिला ने. उसने 2 अक्टूबर को इस संबंध में फेसबुक पर एक पोस्ट डाला. इसमें उसने अपनी एक तस्वीर भी शेयर की. इसमें उसने बताया कि वह एक एयरलाइंस की फ्लाइट से यात्रा करने एयरपोर्ट पहुंची थी. उसके पास कपड़ों से भरा एक सूटकेस था.
चेक-इन करते समय जब उसके सूटकेस का वजन लिया गया तो वो 9.5 किलोग्राम का निकला, जबकि एयरलाइंस में यात्री को अपने साथ 7 किलोग्राम तक सामान निशुल्क ले जाने की छूट थी. इसके ऊपर जरा सा भी वजन बढ़ने पर एक्स्ट्रा फीस देनी होती है. ऐसा ही एयरलाइंस कर्मचारियों ने गेल के साथ किया. उनसे एक्स्ट्रा फीस मांगी गई, लेकिन गेल ने इससे इनकार कर दिया. एक्स्ट्रा फीस चुकाने से इनकार कर देने के बाद गेल ने नई तरकीब निकाली. उसने अपना सूटकेस खोला और करीब 2.5 किलोग्राम वजनी कपड़े और पहन लिए. इनमें पांच जोड़ी पैंट और टी-शर्ट व शर्ट थे. इसके बाद सूटकेस का दोबारा वजन कराया तो वो तय सीमा से कम हो गया. किलोग्राम हो गया. इसके बाद एयरलाइंस ने उसे यात्रा करने की इजाजत दे दी. गेल ने फेसबुक पर जो फोटो शेयर की है, वो वायरल हो गई है. उसे अब तक 20 हजार लोगों ने शेयर किया है और 33 हजार लोग उसपर रिएक्ट कर चुके हैं.
शिमला मिर्च सेहत के लिए अत्यंत फायदेमंद होता है। शिमला मिर्च खाने से कई बीमारियां दूर होती है। शिमला मिर्च विटामिन ए और बीटा कैरोटीन का भी एक प्रमुख स्रोत है| प्रायः शिमला मिर्च, सब्जी नूडल्स व सलाद के रूप में खाई जाती है| शिमला मिर्च कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखती है| इसे खाने से वजन नहीं बढ़ता| आइए जाने शिमला मिर्च के अन्य गुण –
1. वजन घटाने में मददगार – अगर आप अपना वजन कम करने का सोच रहे है तो शिमला मिर्च आपके लिए बहुत ही लाभकारी है| इसमें केलोरिज बहुत कम मात्रा में होती है जो वजन कम करने में सहायक होती है| शिमला मिर्च मेटाबोलिज्म बढ़ाने में भी मददगार होती है|
2. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर – शिमला मिर्च में विटामिन ए और सी प्रचूर मात्रा में पाए जाते है| यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है| शिमला मिर्च के सेवन से अस्थमा, मोतियाबिंद व हार्ट से सम्बंधित बीमारियां दूर हो जाती है|
3. दर्द से दिलाये राहत – शिमला मिर्च एक अच्छी दर्द निवारक दवा का काम करती है| यह दर्द को स्पाइनल कॉर्ड तक नहीं जाने देती|
4. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाए – शिमला मिर्च संक्रामक रोगो से लड़ने में हमारी मदद करती है| यह हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के संक्रमण को भी बढ़ाती है| अस्थमा व फेफड़ो के संक्रमण को हटाने में भी सहायक होती है|
पशुपालन विभाग के अस्पताल में इलाज के लिए पर्चियां कटने के बाद भी कोई डाॅक्टर नहीं पहुंचा और एक के बाद एक तीन गायों ने दम तोड़ दिया। डाॅक्टरों का कहना था कि वह जाते हैं लेकिन गायाें की माैत के बारे में पूछने पर उन्हाेंने जांच की बात कहकर बात समाप्त कर दी। वहीं पशुपालन विभाग के श्याम टाकीज के अस्पताल में अभी भी दो गायों की हालत गंभीर बनी हुई है।
एक पर्ची से पूरे माह होता है इलाज
पिछले कई दिनों से गायों के इलाज के लिए एक के बाद एक पर्चियां कटती रहीं इस मंशा से कि उनका इलाज होगा लेकिन एक भी डाॅक्टर उन्हें देखने नहीं पहुंचा। नतीजा यह हुआ कि तीन गायों की मौत हो गई। अस्पताल में ही गायों की देखभाल करने वाले गौ सेवक व पशुपालन विभाग के डाॅक्टरों के बीच इस मुद्दे पर खींचतान बरकरार है। विभाग के अफसरों ने पूरे मामले को गौ सेवकों के देखभाल करने की कार्रवाई को अवैध कब्जा कहकर अपनी खामियों को दबाने का प्रयास किया।
वहीं गौ सेवकों का कहना है कि हमारे बार-बार निवेदन करने पर भी डाॅक्टर देखने नहीं आए जिसकी वजह से गायों की मौत हो गई। अस्पताल में तीन डाॅक्टर हैं। इसमें बड़ी सर्जरी यहां पदस्थ डाॅ. आरएम त्रिपाठी के जिम्मे है लेकिन वे भी पिछले कुछ दिनों से गायों का इलाज नहीं कर पा रहे हैं। पांच रुपए की एक पर्ची कटाने पर पूरे माह इलाज का प्रावधान है। गौर सेवक विपुल शर्मा का कहना है कि एक के बाद एक 22 पर्चियां कटने के बाद भी कोई डाॅक्टर देखने नहीं आया।
अवैध कब्जा है लाेगों का आपकी बात सही है कि कुछ कमियां हैं जिन्हें दूर किया जाना है। मैं खुद वहां विजिट के लिए जाऊंगा। वहां कुछ लोगों का अवैध कब्जा है जिसे हटाया जाना है। यदि वहां गायों की सेवा करने वालों के साथ किसी डाॅक्टर ने दुर्व्यवहार किया है तो मुझे संज्ञान में देना चाहिए था।रमेश कुमार सोनवानी , उपसंचालक,पशुपालन विभाग
गंभीर मामला, संज्ञान में लेंगे जिस तरह जानकारी मिल रही है उससे मामले को संज्ञान में लिया जाएगा। पूरी बात पता की जाएगी। जो भी उचित कार्रवाई होगी हम करेंगे।
साल 2011 की जनगणना के आधार पर बनी आयुष्मान सूची में जिन परिवारों का नाम हैं, कियोस्क सेंटरों पर उन्हीं के सदस्यों का आयुष्मान कार्ड बन रहा है। इस सूची में कोई भी किसी के परिवार को न जोड़ सकता है, न ही किसी परिवार का नाम उससे हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई में भी जारी है। कियोस्क सेंटर या अस्पतालों के आयुष्मान मित्र, सूची में शामिल परिवारों का केवल छूटा हुआ डाटा जैसे मोबाइल नंबर, आधार कार्ड, मुखिया, परिवार में आने वाले सिर्फ नए सदस्यों के ही नाम जोड़ रहे हैं।
ऐसे देखे आयुष्मान सूची में स्वयं का नाम
mera.pmjay.gov.in इस वेबसाइट पर जाकर आयुष्मान की सूची में स्वयं के परिवार का नाम है या नहीं जाना जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले वेबसाइट पर जाकर अपना मोबाइल नंबर और कैप्चा भरने के बाद ओटीपी फीड करना होगा। आगे जो पेज खुलेगा उस पर स्वयं के बारे में मांगी गई सूचना फीड कर देख सकते हैं। इसके अलावा लोग जिला अस्पताल दुर्ग के आयुष्मान दफ्तर, नगर पालिका निगम भिलाई के कियोस्क पर, लाल बहादुर शास्त्री अस्तपाल, सुपेला और भिलाई-3 हास्पिटल में आयुष्मान मित्र के पास जाकर इससे जुड़ी जानकारी को समझ सकते हैं।
आयुष्मान की आन लाइन सूची में जिन परिवारों के नाम हैं, उनके इलाज के लिए किसी कार्ड की जरूरत नहीं है। अपनी सहूलियत के लिए ऑनलाइन अपना नाम चेक करने के बाद वह किसी भी कियोस्क सेंटर या चयनित अस्पताल में जाकर अपना केवाईसी अर्थात छूटा हुआ डाटा फीड करा सकते हैं। केवाईसी कराने के बाद स्मार्ट कार्ड धारियों को भले ई-आयुष्मान कार्ड मिल जा रहा है, लेकिन इलाज उन्हें 50 हजार रु. तक ही मिलेगा। क्योंकि पूर्व से संचालित मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एक ही डाटा बेस पर संचालित हो रही हैं। कार्ड बदलते ही वे 5 लाख के उपचार श्रेणी में आ जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के बेरोजगार इंजीनियर्स को इस दिवाली प्रदेश सरकार रोजगार का तोहफा देगी। राजधानी रायपुर में राज्य स्तरीय प्लेसमेंट कैंप का आयोजन किया जा रहा है। दावा है कि यह इस तरह का पहला कैंप होगा। राज्य सरकार द्वारा यह प्लेसमेंट कैंप रायपुर के सेजबहार स्थित शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय में 21 अक्टूबर को लगाया जाएगा। कैंप में प्रदेश और देश की लगभग 50 कंपनियां भाग ले रही हैं। तकनीकी शिक्षा संचालनालय इस कैंप का आयोजन कर रही है। राज्य के तीन शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर में 3 हजार 370 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
सत्र 2018-19 रायपुर से 82, बिलासपुर से 15 और जगदलपुर से महज 13 का कैंपस प्लेसमेंट में सलेक्शन हुआ था। इस प्लेसमेंट कैंप में मेकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल, माईनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेलीकम्यूनिकेशन, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्प्यूटर साईंस, इनफॉर्मेशन टेक्नालॉजी ब्रांच के उम्मीदवार पहुंचेंगे। तकनीकी शिक्षा संचालनालय इस साल से शासकीय इंजीनियरिंग एवं पॉलीटेक्निक संस्थानों के विद्यार्थियों को प्लेसमेंट देने के मकसद से प्लेसमेंट सेल का गठन कर चुका है। इसकी निगरानी केन्द्रीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा संचालनालय करेगा।