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World Consumer Rights Day पर विशेष लेख जागरूक उपभोक्ता ही सशक्त समाज की पहचान…

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15 मार्च को विश्वभर में विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है। यह दिवस उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को शोषण से बचाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। आज के दौर में जब बाजार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, वैश्वीकरण और डिजिटल तकनीक के कारण खरीद-बिक्री के तरीके नए रूप ले रहे हैं, ऐसे समय में उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

जागरूक उपभोक्ता ही सशक्त समाज की पहचान

उपभोक्ता अधिकार दिवस की पृष्ठभूमि

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाने की प्रेरणा 15 मार्च 1962 को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति श्रवीद  F& Kennedy द्वारा अमेरिकी संसद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण से मिली। इस भाषण में उन्होंने पहली बार उपभोक्ताओं के चार मूलभूत अधिकारों सुरक्षा का अधिकार, जानकारी पाने का अधिकार, विकल्प का अधिकार और सुने जाने का अधिकार का उल्लेख किया था। बाद में इन सिद्धांतों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया गया और वर्ष 1983 से 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

भारत में उपभोक्ता संरक्षण की व्यवस्था

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण बाजार वाले देश में उपभोक्ता अधिकारों का महत्व और भी अधिक है। यहां करोड़ों लोग प्रतिदिन विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग करते हैं, इसलिए उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कानून और संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है  उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए भारत सरकार ने  Consumer Protection Act, 2019 लागू किया, जिसने पुराने  World Consumer Rights Day पर विशेष लेख का स्थान लिया। यह कानून उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों, घटिया या दोषपूर्ण उत्पादों, सेवा में लापरवाही, अधिक मूल्य वसूली और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से सुरक्षा प्रदान करता है।
इस कानून के तहत जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता आयोगों की स्थापना की गई है, जहां उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज कर न्याय प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा उपभोक्ता मामलों के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) जैसी संस्थाएं भी कार्यरत हैं, जो बाजार में अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर निगरानी रखती हैं।

उपभोक्ताओं के प्रमुख अधिकार

उपभोक्ताओं को कई महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें सुरक्षित और न्यायपूर्ण बाजार व्यवस्था प्रदान करना है। प्रमुख अधिकारों में शामिल हैं-
सुरक्षा का अधिकार – जीवन और संपत्ति के लिए हानिकारक वस्तुओं से सुरक्षा पाने का अधिकार।
जानकारी पाने का अधिकार – वस्तु या सेवा की गुणवत्ता, मात्रा, मूल्य और उपयोग से जुड़ी सही जानकारी प्राप्त करने का अधिकार।
विकल्प का अधिकार – प्रतिस्पर्धी मूल्य पर विभिन्न विकल्पों में से वस्तु या सेवा चुनने का अधिकार।
सुने जाने का अधिकार – अपनी शिकायत या सुझाव को उचित मंच पर प्रस्तुत करने का अधिकार।
क्षतिपूर्ति का अधिकार – किसी भी प्रकार के नुकसान या शोषण की स्थिति में मुआवजा पाने का अधिकार।
उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार – अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार।
स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार – स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में जीवन जीने का अधिकार।

डिजिटल युग में नई चुनौतियां

आज के डिजिटल युग में ई-कॉमर्स, ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल भुगतान का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इससे उपभोक्ताओं को सुविधा तो मिली है, लेकिन साथ ही कुछ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। फर्जी वेबसाइट, नकली उत्पाद, साइबर ठगी और डेटा चोरी जैसे मामले उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।
इन समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने कई डिजिटल पहल शुरू की हैं। उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए  National Consumer Helpline  proतथा  E&Daakhil Portal जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं। इनके माध्यम से उपभोक्ता घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और उसकी स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

जागरूकता ही सबसे बड़ी शक्ति

भारत में उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाने के लिए “जागो ग्राहक जागो” जैसे व्यापक अभियान चलाए गए हैं। इन अभियानों का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि बाजार में सुरक्षित और समझदारी से व्यवहार करना उनकी जिम्मेदारी भी है। किसी भी वस्तु या सेवा को खरीदते समय बिल अवश्य लेना, एमआरपी देखना, गुणवत्ता की जांच करना और नियम-शर्तों को ध्यान से पढ़ना जैसे छोटे-छोटे कदम उपभोक्ताओं को बड़े नुकसान से बचा सकते हैं।

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस हमें यह संदेश देता है कि जागरूक उपभोक्ता ही सशक्त समाज और मजबूत अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। जब उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति सजग होंगे और किसी भी प्रकार की अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाएंगे, तभी बाजार व्यवस्था पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता हितैषी बन सकेगी।

उपभोक्ता जागरूकता केवल व्यक्तिगत हितों की रक्षा नहीं करती, बल्कि यह समाज में नैतिक व्यापार, पारदर्शिता और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत बनाती है। यही कारण है कि आज के समय में जागरूक उपभोक्ता को सशक्त राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।

CG: साइबर ठगों से बचने की पॉवर कंपनी ने की उपभोक्ताओं से अपील…

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विद्युत उपभोक्ता रहे सतर्क, सतर्कता ही समझदारी’ ‘मोर बिजली मोबाइल एप केवल Play Store या App Store से ही डाउनलोड करें’

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के पंजीयन अथवा किसी भी प्रकार के भुगतान के लिए किसी अनजान वॉट्सएप, मेल अथवा एसएमएस पर क्लिक करने से बचें। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के नाम पर किसी भी लिंक या एपीके फाइल को डाउनलोड न करें। छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी अपनी किसी भी योजना अथवा सेवा के लिए कभी भी कोई एपीके पाइल अथवा कोई वेब लिंक नहीं भेजती है।

छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी से के एमडी श्री भीम सिंह से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना को आम उपभोक्ता तक पहुँचाने पॉवर कंपनी मैदानी स्तर पर शिविर का करेगी। उपभोक्ता अपना कोई भी भुगतान सिर्फ मोर बिजली एप, कंपनी की वेबसाइट, एटीपी सेंटर अथवा नजदीकी कार्यालय में ही करें, किसी मैदानी कर्मचारी को भी नकद भुगतान न करने की सलाह दी गई है। पंजीयन राशि के भुगतान की सुविधा केवल मोर बिजली एप, एटीपी केंद्र और संबंधित विद्युत कार्यालय के माध्यम से ही उपलब्ध कराई गई है। बिजली बिल भुगतान हो या कोई अन्य सूचना पॉवर कंपनी अपने उपभोक्ताओं को संदेश सिर्फ CSPDCL-S सेंडर ID से ही भेजती है।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना अथवा विद्युत सेवा से संबंधित किसी अन्य जानकारी  के लिए पॉवर कंपनी की केंद्रीकृत कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 1912 पर उपभोक्ता कॉल कर सकते हैं, अथवा नजदीकी सीएसपीडीसीएल के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

CG: मिलिट्री पाइप बैंड प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में द ग्रेट इंडिया सैनिक स्कूल रायपुर के छात्रों ने सौजन्य मुलाकात की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की मिलिट्री पाइप बैंड प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार प्राप्त करने पर बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि आपकी इस उपलब्धि से न केवल आपके विद्यालय, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। यह राज्य के लिए गर्व का विषय और एक बड़ी उपलब्धि है।

इस अवसर पर स्कूल के संचालक श्री सिद्धार्थ सिंह, कमांडेंट (सेवानिवृत्त) कर्नल श्री आर.के. वर्मा सहित विद्यालय के अन्य शिक्षक एवं छात्र उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष शिक्षा मंत्रालय एवं रक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर मिलिट्री पाइप बैंड प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जिसमें देशभर के सैनिक स्कूल भाग लेते हैं। छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार द ग्रेट इंडिया सैनिक स्कूल, रायपुर ने इस प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त किया है।

यह प्रतियोगिता जिला स्तर से प्रारंभ होकर राज्य स्तरीय, जोन स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर तक आयोजित की जाती है।छत्तीसगढ़ दक्षिण जोन का हिस्सा है, जिसमें केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के सैनिक स्कूल शामिल होते हैं।

CG: कान्यकुब्ज समाज छत्तीसगढ़ के विकास में निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका…

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छत्तीसगढ़ में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है और यह समाज प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के आशीर्वाद भवन में आयोजित कान्यकुब्ज शिक्षा मंडल के होली मिलन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

कान्यकुब्ज समाज छत्तीसगढ़ के विकास में निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका :  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

छत्तीसगढ़ में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है और यह समाज प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के आशीर्वाद भवन में आयोजित कान्यकुब्ज शिक्षा मंडल के होली मिलन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को एक सूत्र में जोड़ने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में गोधन संरक्षण और गौसेवा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी कड़ी में राज्य में गौधाम योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों में चरणबद्ध रूप से गौधाम स्थापित किए जाएंगे, जहां बेसहारा और घुमंतू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शासकीय भूमि पर स्थापित सभी गौधाम अब “सुरभि गौधाम” के नाम से जाने जाएंगे। इन गौधामों में पशुपालन, हरा चारा उत्पादन तथा गोबर से उपयोगी उत्पाद तैयार करने से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, जिससे स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रभु श्रीराम से विशेष संबंध है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। उन्होंने कहा कि श्री रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 42 हजार से अधिक रामभक्तों को अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन कराए जा चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के अंतर्गत बुजुर्गों को विभिन्न तीर्थस्थलों का दर्शन कराया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा “बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026” की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिलेगी। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता मोर बिजली ऐप के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं। इसके लिए राज्यभर में समाधान शिविरों का आयोजन भी किया जाएगा।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला तथा कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल के पदाधिकारियों सहित सभी आयोजकों को आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, कान्यकुब्ज सभा-शिक्षा मंडल के अध्यक्ष श्री सुरेश मिश्रा, पत्रकार शिरीष मिश्रा, राजेश मिश्रा अरविन्द अवस्थी, मोहन तिवारी, गौरव शर्मा सहित बड़ी संख्या में कान्यकुब्ज समाज के गणमान्यजन उपस्थित थे।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को एक सूत्र में जोड़ने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में गोधन संरक्षण और गौसेवा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी कड़ी में राज्य में गौधाम योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों में चरणबद्ध रूप से गौधाम स्थापित किए जाएंगे, जहां बेसहारा और घुमंतू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शासकीय भूमि पर स्थापित सभी गौधाम अब “सुरभि गौधाम” के नाम से जाने जाएंगे।  इन गौधामों में पशुपालन, हरा चारा उत्पादन तथा गोबर से उपयोगी उत्पाद तैयार करने से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, जिससे स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रभु श्रीराम से विशेष संबंध है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। उन्होंने कहा कि श्री रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 42 हजार से अधिक रामभक्तों को अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन कराए जा चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के अंतर्गत बुजुर्गों को विभिन्न तीर्थस्थलों का दर्शन कराया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा “बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026” की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिलेगी। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता मोर बिजली ऐप के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं। इसके लिए राज्यभर में समाधान शिविरों का आयोजन भी किया जाएगा।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला तथा कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल के पदाधिकारियों सहित सभी आयोजकों को आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, कान्यकुब्ज सभा-शिक्षा मंडल के अध्यक्ष श्री सुरेश मिश्रा, पत्रकार शिरीष मिश्रा, राजेश मिश्रा अरविन्द अवस्थी, मोहन तिवारी, गौरव शर्मा सहित बड़ी संख्या में कान्यकुब्ज समाज के गणमान्यजन उपस्थित थे।

On Election: बंगाल, असम समेत 5 राज्यों में चुनाव की तारीखों का आज ऐलान, कांग्रेस का आया रिएक्शन, जानें क्या कहा?

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भारतीय निर्वाचन आयोग आज रविवार (15 मार्च 2026) को शाम 4 बजे 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव का पूरा कार्यक्रम घोषित करेगा. शेड्यूल घोषित होते ही चुनाव प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी.

कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही मॉडल ऑफ कंडक्ट यानी आचार संहिता भी लागू हो जाएगी. इस बीच प्रमुख विपक्षी पार्टी

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान में आरोप-प्रत्यारोप और तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिलेगी. कांग्रेस का कहना है कि चुनाव प्रचार में गलत जानकारी और डर का माहौल बनाने की कोशिश की जाती है.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा ‘चुनाव आयोग आज शाम 4 बजे 2026 के विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित करेगा. जी2 की ओर से इसे मंजूरी मिल चुकी होगी, क्योंकि जी1 ने उद्घाटन, रिबन काटने, ध्वजारोहण और शुभारंभ जैसे समारोहों का यह दौर पूरा कर लिया होगा. चुनाव आयोग की आदर्श आचार संहिता (MCC) जल्द ही लागू होने वाली है, लेकिन 2014 से इसे मोदी की चुनावी आचार संहिता का पर्याय माना जाता रहा है – जो मानहानि, गाली-गलौज, धमकियों, भय फैलाने और झूठ का वायरस फैलाने से भरी होगी.’

पूर्व सांसद संदीप दीक्षित का बयान

वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने कहा, ‘हम इसका स्वागत करते हैं. हम इसका लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. दरअसल, इसकी घोषणा बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी. मैं चुनाव आयोग से कहना चाहूंगा कि आपके बारे में पहले से ही बहुत संदेह हैं, लेकिन कम से कम इतनी बेशर्मी से घोषणा न करें. प्रधानमंत्री लगातार घोषणाएं करते रहते हैं और फिर अचानक आपको तारीखों की घोषणा करने का ख्याल आता है.’

आचार संहिता लागू होने के बाद क्या होगा?

आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार और राजनीतिक दलों को चुनाव से जुड़े नियमों का पालन करना होगा और नई योजनाओं या बड़े सरकारी फैसलों की घोषणा पर रोक लग जाती है. चुनाव आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम में मतदान की तारीख, नामांकन की अंतिम तिथि, मतगणना की तारीख और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी. इसके बाद सभी राजनीतिक दल और उम्मीदवार अपने चुनाव अभियान को तेज कर देंगे. अब सबकी नजर चुनाव आयोग की घोषणा पर टिकी है, जिसके बाद राज्यों में चुनावी माहौल और तेज होने की संभावना है.

चाबहार अब परिदृश्य में दिखाई नहीं दे रहा. कांग्रेस ने उठाए पीएम मोदी की मध्य एशिया कूटनीति पर सवाल…

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ईरान के चाबहार पोर्ट परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि इस परियोजना की शुरुआत 1990 के दशक के अंत में भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग रणनीति के तहत हुई थी और बाद में इसे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे आगे बढ़ाया था.

रमेश ने कहा कि मई 2013 में केंद्र सरकार ने चाबहार बंदरगाह में शुरुआती तौर पर 115 मिलियन डॉलर के निवेश को मंजूरी दी थी. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उस समय भारत भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते को लागू करने की दिशा में भी बड़े कदम उठा रहा था.

कांग्रेस ने परियोजना को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार ने मनमोहन सिंह की इस पहल को रीपैकेज कर इसे प्रधानमंत्री की नई दृष्टि के रूप में पेश किया. उन्होंने कहा कि 2026-27 के बजट में चाबहार परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है, जिससे इस परियोजना के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.

जयराम रमेश ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में क्या-क्या लिखा?

जयराम रमेश ने लिखा कि शासन में निरंतरता एक बुनियादी सच्चाई है, जिसे आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री कभी स्वीकार नहीं करते हैं. साल 1990 के दशक के उत्तरार्ध से ही भारत ने भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग रणनीति के तहत ईरान के चाबहार बंदरगाह में निवेश की संभावनाओं की तलाश शुरू कर दी थी. अंततः तेहरान में आयोजित 16वें गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने इन योजनाओं को नई गति दी और मई 2013 में केंद्रीय कैबिनेट ने चाबहार में प्रारंभिक तौर पर 115 मिलियन डॉलर के निवेश को मंजूरी दी. यह याद रखना चाहिए कि यह फैसला उस समय लिया गया था, जब भारत अक्टूबर 2008 में हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को लागू करने के लिए बड़े कदम उठा रहा था.

शासन में निरंतरता एक बुनियादी सच्चाई है, जिसे आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री कभी स्वीकार नहीं करते।

1990 के दशक के उत्तरार्ध से ही भारत ने भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग रणनीति के तहत ईरान के चाबहार बंदरगाह में निवेश की संभावनाओं की तलाश शुरू कर दी थी। अंततः तेहरान में आयोजित 16वें…

भारत परियोजना से हो गया बाहर?- जयराम

आगे लिखा कि इसके बाद अक्टूबर 2014 में मोदी सरकार ने, जैसा कि वह अक्सर करती रही है, डॉ. मनमोहन सिंह की चाबहार पहल को रीपैकेज किया और उसे पीएम मोदी की विज़न का हिस्सा बताकर पेश किया. साल 2026-27 के बजट में चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया. क्या इसका मतलब यह है कि भारत इस परियोजना से बाहर हो गया है, या फिलहाल उसके निवेश संबंधी दायित्व पूरे हो चुके हैं?

आगे लिखा कि किसी भी स्थिति में, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह-जिसे चीन ने बनाया है-से लगभग 170 किलोमीटर पश्चिम स्थित चाबहार अब परिदृश्य में दिखाई नहीं दे रहा है. यह भारत की मध्य एशिया कूटनीति के लिए दूसरा रणनीतिक झटका है, क्योंकि इससे पहले भारत ताजिकिस्तान के दुशांबे के पास अयनी में स्थित अपने वायुसेना अड्डे को बंद कर चुका है.

क्यों खास है भारत के लिए चाबहार पोर्ट?

साउथ-ईस्ट ईरान में मौजूद चाबहार पोर्ट, भारत के लिए स्ट्रैटेजिकली सबसे इम्पोर्टेंट मैरीटाइम प्रोजेक्ट्स में से एक है. ये ईरान के थ्रू अरेबियन सी तक भारत का ओनली डायरेक्ट एक्सेस पॉइंट है, इस प्रोजेक्ट का पर्पज अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया, स्पेशली उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान जैसे कंट्रीज के लिए एक शॉर्टर और मोर रिलायबल ट्रेड रूट प्रोवाइड करना है.

Meen Sankranti 2026: मीन संक्रांति पर रखें ये सावधानियां, वरना सूर्य देव हो सकते हैं नाराज..

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Meen Sankranti 2026: संक्रांति सूर्य देव से जुड़ा पर्व माना जाता है. ये पर्व सूर्य देव को समर्पित किया गया है. संक्रांति के पर्व का संबंध ज्योतिष और धर्म शास्त्र में सूर्य देव के गोचर से बताया गया है.

यानी सूर्य जब भी एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं, तो उस राशि के नाम पर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. मकर संक्रांति सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, लेकिन सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही सभी राशियों के नाम से ये पर्व मनाया जाता है.

आज मीन संक्रांति मनाई जा रही है. आज से खरमास भी लग गया है. जोकि 14 अप्रैल को सूर्य देव के मेष राशि में जाने पर समाप्त होगा. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को आत्मा और पिता का कारक माना गया है. मीन संक्रांति पर और पूरे खरमास के दौरान पूजा-पाठ विशेषकर सूर्य पूजन का महत्व बहुत अधिक होता है, लेकिन धर्म शास्त्रों में मीन संक्रांति पर कुछ सावधानियां रखने के लिए भी कहा गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

मीन संक्रांति पर रखें ये सावधानियां

मीन संक्रांति से खरमास या मलमास की शुरुआत हो जाती है, इसलिए खरमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या यज्ञोपवीत जैसे शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है. ऐसे में इस दौरान ये सभी काम न करें. इस दौरान किसी बड़े निवेश या नई संपत्ति की खरीदारी से बचें. इस पूरे महीने सात्विक भोजन करें. क्रोध-अहंकार से दूर रहें. खरमास में मंत्र-जप और ध्यान करना न भूलें. इस समय में अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों की सेवा अवश्य करें.

मीन संक्रांति का महत्व

धार्मिक दृष्टि से मीन संक्रांति को अत्यंत पुण्य प्रदान करने वाला दिन माना गया है. मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश हो जाता है और अध्यात्मिक शुद्धि होती है. इसके साथ ही दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है. जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, गुड़, तिल और धन का दान बहुत ही शुभ माना गया है.

“शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी? इस हफ्ते के ये 9 फैक्टर्स बदल सकते हैं किस्मत”

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ईरान-इजराइल वॉर, गिरता रुपया, लगातार FII का बाहर जाना और फ्यूल सप्लाई की चिंताओं के चलते घरेलू बाजारों पर इस महीने में काफी दबाव देखने को मिला. खास बात तो ये है कि इस प्रेशर की वजह से पिछल हफ्ते शेयर बाजार में 5.3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली.

जब सोमवार को ट्रेडिंग फिर से शुरू होगी, तो इस हफ्ते होने वाले कई अहम इवेंट्स का निवेशकों के मूड पर असर पड़ने की संभावना है. वैसे शुक्रवार को 50 शेयरों वाला निफ्टी 488.05 अंक, या 2.06 फीसदी गिरकर 23,151.10 पर बंद हुआ था.

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे ईटी की रिपोर्ट में कहा कि जैसे-जैसे बिकवाली बढ़ी, इंडेक्स 200-DMA से और दूर चला गया. उन्होंने आगे कहा कि RSI ओवरसोल्ड ज़ोन में चला गया है और ट्रेंड कमजोर बना हुआ है. RSI के गहरे ओवरसोल्ड दायरे में बने रहने के कारण उन्हें और गिरावट की उम्मीद है.

डे ने कहा कि कम समय के लिए, ट्रेंड कमजोर बना रह सकता है, और किसी भी बढ़त पर बिकवाली होने की संभावना है. नीचे की तरफ, इंडेक्स 23,000-22,800 की ओर गिर सकता है, जबकि रेजिस्टेंस 23,400 पर है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर वो कौन से 9 बड़े फैक्टर्स हैं, जो शेयर बाजार की दशा और दिशा तय करने वाले हैं?

ईरान-इजराइल वॉर

जब सोमवार को ग्लोबल बाजारों में ट्रेडिंग शुरू होगी, तब तक ईरान-इजराइल वॉर अपने 17वें दिन में प्रवेश कर चुका होगा. जब तक यह संघर्ष जारी रहेगा, बाजारों में घबराहट बने रहने की उम्मीद है. युद्धरत पक्षों के बीच किसी भी तरह की सुलह के संकेत दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं. AFP ने बताया कि ईरान ने कसम खाई है कि वह अमेरिका और इजराइल में अपने दुश्मनों को बड़ा सबक सिखाएगा, जिसे वह कभी नहीं भूल पाएंगे.

AFP ने ईरानी राजनयिक इस्माइल बाकाई के हवाले से कहा कि हम यह स्वीकार नहीं कर सकते कि वे कभी-कभार बातचीत और सीजफायर की बात करें, और उसके बाद हमें उन्हीं अपराधों और युद्ध की पुनरावृत्ति का सामना करना पड़े. हमारी सेना दुश्मन को कड़ा और कभी न भूलने वाला सबक सिखाने के लिए पूरी तरह से दृढ़ है.

फेड मीटिंग

इस हफ्ते US फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि इस बात की चिंता है कि अगर मौजूदा संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इससे महंगाई के समीकरण बिगड़ सकते हैं. रेट तय करने वाली कमेटी मंगलवार, 17 मार्च को अपनी दो-दिवसीय बैठक शुरू करेगी और बुधवार, 18 मार्च को अपने पॉलिसी फैसले की घोषणा करेगी.

केंद्रीय बैंक से व्यापक रूप से यह उम्मीद की जा रही है कि वह दरों को स्थिर रखेगा, क्योंकि US में महंगाई फेड के 2 फीसदी के टारगेट से ऊपर बनी हुई है. ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के ताजा डेटा के मुताबिक, फरवरी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स साल-दर-साल आधार पर 2.4 फीसदी बढ़ा.

अमेरिकी बाजार

घरेलू बाजार भी वॉल स्ट्रीट से संकेत लेंगे. शुक्रवार को US के प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए. डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 119.38 अंक, या 0.26 फीसदी गिरकर 46,558.50 पर बंद हुआ. नैस्डैक कंपोजिट 206.62 अंक, या 0.93 फीसदी गिरकर 22,105.40 पर आ गया, जबकि S&P 500 0.61 फीसदी या लगभग 40 अंक गिरकर 6,632.19 पर बंद हुआ.

कच्चे तेल के दाम

सभी की नजरें कच्चे तेल की कीमतों पर होंगी. बेंचमार्क ब्रेंट और US WTI क्रूड पिछले सत्र में 3 फीसदी से ज़्यादा उछले थे, और जब ट्रेडिंग फिर से शुरू होगी तो इनमें और बढ़त देखने को मिल सकती है. US WTI क्रूड वायदा 99.31 डॉलर प्रति बैरल पर सेटल हुआ, जिसमें 3.58 या 3.74 फीसदी की बढ़त देखने को मिली. जबकि ब्रेंट क्रूड 3.43 फीसदी या 3.41 डॉलर चढ़कर 103.14 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ.

FII/DII की मुनाफावसूली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने शुक्रवार को 10,716.64 करोड़ रुपए के भारतीय शेयर बेचे. वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) 9,977.42 करोड़ रुपए के शुद्ध खरीदार रहे. FIIs ने मार्च के पहले पखवाड़े में 52,704 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं, जिसमें शुक्रवार को 2026 का अब तक का सबसे बड़ा एक-दिवसीय आउटफ्लो दर्ज किया गया. साल-दर-तारीख आधार पर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने 66,051 करोड़ रुपए के भारतीय शेयर बेचे हैं.

सेक्टर पर नजर

ईरान-इजराइल/US संघर्ष कई सेक्टरों पर असर डाल रहा है. अगर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो तेल विपणन कंपनियां (OMCs) दबाव में आ सकती हैं, क्योंकि इनपुट कॉस्ट बढ़ने से उनके मार्जिन पर असर पड़ सकता है. दूसरी ओर, ONGC और Oil India जैसी Upstream Exploration Companies तेल की बढ़ती कीमतों से फायदा उठा सकती हैं.

पेंट और टायर कंपनियां, जो कच्चे तेल से बने प्रोडक्ट्स को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल करती हैं, उन्हें भी दबाव का सामना करना पड़ सकता है. जब बाजार दोबारा खुलेंगे, तो एयरलाइन और टूरिज्म कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. LPG की कमी पहले से ही रेस्टोरेंट पर असर डाल रही है, ऐसे में क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) के शेयरों में और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

टेक्नीकल इंडीकेटर्स

निफ्टी चार्ट का विश्लेषण करते हुए, मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर, डॉ. रवि सिंह ने कहा कि इंडेक्स ने अपने अहम 23,800 के सपोर्ट लेवल को निर्णायक रूप से तोड़ दिया है और अब यह पिछले 10 महीनों के सबसे निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो बाजार पर बिकवाली के मजबूत दबाव का संकेत है.

आने वाले हफ्ते के लिए, 23,000 का मनोवैज्ञानिक स्तर बेहद अहम होगा. उन्होंने कहा कि अगर इंडेक्स इस स्तर से नीचे गिरता है, तो यह 22,800 और यहां तक कि 22,500 के स्तर तक भी पहुंच सकता है. उन्होंने आगे कहा कि ऊपरी स्तर पर, 23,800 और 24,050 अब मजबूत रुकावट (resistance) के तौर पर काम करेंगे.

जब तक इंडेक्स निर्णायक रूप से 24,000 के स्तर को दोबारा हासिल नहीं कर लेता, तब तक हमारी रणनीति तेजी आने पर बेचने (sell on rise) की ही रहेगी. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच बाजार अभी भी अपने निचले स्तर (bottom) की तलाश में है, इसलिए बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है.

रुपया बनाम डॉलर

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी. शुक्रवार को भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गया. इसकी वजह यह चिंता थी कि ईरान वॉर के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी भारत की ग्रोथ-महंगाई की गतिशीलता को बिगाड़ सकती है और पूंजी प्रवाह को नुकसान पहुंचा सकती है.

रुपया कमजोर होकर 92.4750 प्रति डॉलर पर आ गया, जो गुरुवार को बने अपने पिछले रिकॉर्ड निचले स्तर 92.3575 से भी नीचे था. आखिरकार यह 92.4550 पर बंद हुआ, जो इस हफ्ते 0.7 फीसदी की गिरावट दिखाता है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने के बाद से बेंचमार्क निफ्टी 50 ‘करेक्शन ज़ोन’ में फिसल गया है; शुक्रवार को इंडेक्स में लगभग 2 फीसदी की गिरावट आई.

विश्लेषकों ने रॉयटर्स को बताया कि मध्य पूर्व में लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष रुपए के भविष्य को काफी हद तक खराब कर सकता है, और लगातार ऊंची बनी हुई ऊर्जा कीमतें रुपए को 95 प्रति डॉलर के स्तर से भी नीचे धकेल सकती हैं.

IPO पर नजर

प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां मजबूत रहने की उम्मीद है; इस हफ्ते तीन IPO सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहे हैं और तीन कंपनियों की लिस्टिंग होनी है. GSP Crop Science और Central Mine Planning and Design Institute (CMPDI) के मेनबोर्ड IPO पर खास नजर रहेगी.

एग्रोकेमिकल निर्माता GSP Crop Science अपने पब्लिक ऑफरिंग के जरिए 400 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही है.

यह IPO 16 मार्च को खुलेगा. 18 मार्च को बंद होगा. इसका प्राइस बैंड 304320 रुपए प्रति शेयर तय किया गया है. Coal India की कंसल्टेंसी शाखा CMPDI का IPO 20 मार्च को खुलेगा और 24 मार्च को बंद होगा. इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) फिलहाल लगभग 24 रुपए है.

इस बीच, Novus Loyalty का SME IPO 17 मार्च को खुलेगा और 20 मार्च को बंद होगा. इसका प्राइस बैंड 139146 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, और कंपनी का लक्ष्य लगभग 60.15 करोड़ रुपए जुटाना है. Rajputana Stainless, Apsis Aerocom और Raajmarg Infra Investment Trust के शेयर भी इस हफ्ते स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट होने वाले हैं.

ममता बनर्जी ने पुजारियों और मुअज़्ज़िनों के मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि की घोषणा की…

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने पुजारियों और मुअज़्ज़िनों के मासिक मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि करने का ऐलान किया है।

यह निर्णय चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से कुछ समय पहले आया है, जो राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह घोषणा आदर्श आचार संहिता के लागू होने से पहले की गई है, जो चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ प्रभावी हो जाती है।

चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग, जिसमें अन्य चुनाव आयुक्त भी शामिल हैं, आज शाम 4 बजे नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा। इस दौरान तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी।

ममता बनर्जी का बयान

ममता बनर्जी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि राज्य सरकार ने पुजारियों और मुअज़्ज़िनों के मासिक मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा, “मुझे अपने पुरोहितों और मुअज़्ज़िनों को दिए जाने वाले मासिक मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है, जिनकी सेवा हमारे समुदायों के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को बनाए रखती है।”

मानदेय में वृद्धि का प्रभाव

इस संशोधन के बाद, दोनों समूहों के लिए मासिक भुगतान 2,000 रुपये हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मानदेय के लिए सभी नए आवेदनों को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है।

उन्होंने कहा, “साथ ही, पुरोहितों और मुअज़्ज़िनों द्वारा विधिवत जमा किए गए सभी नए आवेदनों को भी राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है।”

सरकार की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह कदम समाज में धार्मिक पदाधिकारियों की भूमिका को मान्यता देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने लिखा, “हमें ऐसे माहौल को बढ़ावा देने पर गर्व है जहाँ हर समुदाय और हर परंपरा को महत्व दिया जाता है और उसे मजबूती प्रदान की जाती है,” और यह भी जोड़ा कि सरकार का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की आध्यात्मिक परंपराओं की रक्षा करने वालों को उचित मान्यता और समर्थन मिले।

आचार संहिता का प्रभाव

यह घोषणा चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा किए जाने की उम्मीद से कुछ समय पहले की गई थी; इसके बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी, जो सरकारों को मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से नई नीतियों या वित्तीय प्रतिबद्धताओं की घोषणा करने से रोक देगी।

इसलिए, मानदेय में बढ़ोतरी और नए आवेदनों की मंजूरी चुनाव आचार संहिता के लागू होने से ठीक पहले की गई है।

“गुवाहाटी में युवा शक्ति समारोह में अमित शाह का संबोधन”

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रविवार को खानापारा के पशु चिकित्सा महाविद्यालय के मैदान में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) द्वारा आयोजित युवा शक्ति समारोह में युवा समर्थकों की भारी भीड़ जुटी।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए। यह आयोजन असम में विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत किया गया, जहां चुनाव आयोग द्वारा मतदान कार्यक्रम की घोषणा की उम्मीद थी।

अमित शाह का विश्वास

शाह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सरमा के नेतृत्व में असम में सत्ता में लौटेगी और इसे पार्टी के ‘सबसे बड़े जनादेश’ के रूप में वर्णित किया।

उन्होंने मतदाताओं से भाजपा का समर्थन करने की अपील की और अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर पार्टी के रुख को दोहराया।

शाह ने कहा, “कांग्रेस ने घुसपैठ को वैध किया, लेकिन भाजपा हर एक को मतदाता सूची से हटाएगी। राहुल बाबू को आश्वस्त रहना चाहिए कि न केवल उनके नाम हटाए जाएंगे, बल्कि उन्हें बाहर भी निकाला जाएगा।”

कांग्रेस पर आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में असम में हिंसा की छवि बनी और कई युवाओं की जान गई। शाह ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व अपने परिवारों के हितों के लिए अधिक चिंतित था।

विकास की दिशा में कदम

सरमा ने हाल के विकासों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई शांति समझौतों ने 10,000 से अधिक युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने में मदद की है।

उन्होंने कई प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भी जिक्र किया, जैसे धोला-सदिया पुल, बोगीबील पुल, और अन्य।

भविष्य की योजनाएँ

सरमा ने कहा कि असम 25 मेडिकल कॉलेजों की ओर बढ़ रहा है और नए विश्वविद्यालयों के माध्यम से छात्रों के लिए अवसर बढ़ रहे हैं।

उन्होंने युवा उद्यमियों को वित्तीय सहायता देने की बात भी की। “हमने एक लाख युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 2 लाख रुपये की सहायता दी है,” उन्होंने कहा।

चुनावों की तैयारी

आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में, सरमा ने कहा कि यदि भाजपा तीसरी बार सत्ता में आती है, तो वे रोजगार और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों का विस्तार करेंगे।

हम दो लाख और सरकारी नौकरियों का निर्माण करने का वादा करते हैं,” उन्होंने कहा।

अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई

सरमा ने सरकार द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया। “हमने पहले ही 1.5 लाख बिघा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त किया है,” उन्होंने कहा।