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PM Modi In Assam: पीएम ने किया शिलॉन्ग-सिलचर कॉरिडोर का भूमि पूजन, 8 घंटे का सफर 5 घंटे में होगा…

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PM Modi In Assam: पीएम नरेंद्र मोदी ने असम दौरे पर सिलचर में शिलांग-सिलचर कॉरिडोर परियोजना का भूमि पूजन किया। यह उत्तर-पूर्व भारत का पहला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड चार लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर होगा।

पीएम मोदी ने इसे पूर्वोत्तर के विकास के लिए मील का पत्थर बताया। असम में कुछ ही दिन में चुनाव होने वाले हैं। उससे पहले अहम विकास परियोजनाओं का ऐलान और शिलान्यास हो रहा है।

हाई स्पीड कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस पर भी हमला बोला। पीएम ने कहा कि कांग्रेस के राज में दशकों तक पूर्वोत्तर और असम को विकास योजनाओं से दूर रखा गया। आज असम पूर्वोत्तर ही नहीं देश में विकास का मॉडल बन रहा है।

PM Modi In Assam: पीएम ने असम और पूर्वोत्तर को बताया विकास का गेटवे<

असम के सिलचर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘चाहे सड़कें हों, रेलवे हो या कॉलेज, इनमें से हर एक परियोजना बराक वैली को उत्तर-पूर्व का एक बड़ा लॉजिस्टिक्स और व्यापार केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही है। इसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अनगिनत अवसर पैदा होंगे। इन विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए मैं आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं।’

Shillong Silchar Corridor से मिलेगी आर्थिक विकास को रफ्तार

– करीब 166 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट लगभग 22,860 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा। इस कॉरिडोर से मेघालय और असम के बीच कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।

– परियोजना के पूरा होने के बाद गुवाहाटी और सिलचर के बीच की दूरी कम हो जाएगी और यात्रा समय 8.5 घंटे से घटकर लगभग 5 घंटे रह जाएगा।

– सरकार का कहना है कि यह हाई-स्पीड कॉरिडोर क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति देगा और सीमावर्ती व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर किया तीखा हमला, असम के विकास पर जोर…

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शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पार्टी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि देश उनके अतीत के कार्यों के लिए उन्हें दंडित कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस लगातार चुनावों में हार का सामना कर रही है और अब वे देश के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।

शिलांग-सिलचर कॉरिडोर के भूमि पूजन के अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि असम में कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया गया है और अब हर राज्य कांग्रेस को सबक सिखा रहा है।

कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी

पिछले महीने एआई शिखर सम्मेलन में भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्यों द्वारा किए गए कपड़े फाड़ने के विरोध का उल्लेख करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने इस सम्मेलन को बदनाम करने के लिए अजीब विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस के पास अब हताशा में अपने कपड़े फाड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश ने इस तरह के विरोध की निंदा की है।

असम के युवाओं के लिए अवसर

प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा सरकार के वर्तमान राजनीतिक माहौल की तुलना पूर्व की सरकारों से करते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने असम के युवाओं को हिंसा और आतंकवाद के चक्र में फंसाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने असम को ‘बांटो और राज करो’ की नीति का प्रयोगशाला बना दिया था। अब असम के युवाओं के लिए अवसरों का आकाश खुला है।

बराक घाटी का विकास

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने पूर्वोत्तर को उसके हाल पर छोड़ दिया था। आजादी के समय कांग्रेस ने सीमा निर्धारण इस तरह से किया कि बराक घाटी का समुद्र से संपर्क पूरी तरह से टूट गया। बराक घाटी, जो कभी एक प्रमुख व्यापार मार्ग और औद्योगिक केंद्र था, अब अपनी मूल शक्ति से वंचित हो गया है।

शिलांग-सिलचर कॉरिडोर का महत्व

शिलांग-सिलचर कॉरिडोर के शिलान्यास समारोह की लागत 24,000 करोड़ रुपये बताई गई है। पीएम मोदी ने कहा कि अगर कांग्रेस से पूछा जाए तो वे इसे लिख भी नहीं पाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि असम में भाजपा की सरकार बराक घाटी को व्यापार और वाणिज्य का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए काम कर रही है।

Sonam Wangchuk NSA Revoked: 6 महीने बाद जेल से बाहर आएंगे सोनम वांगचुक, केंद्र सरकार ने हटाया उन पर से NSA?

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Sonam Wangchuk NSA Revoked: केंद्र सरकार ने लद्दाख के प्रमुख सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई हिरासत को वापस ले लिया है। वांगचुक को लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिया गया था। सरकार के इस फैसले को तनाव कम करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। उनकी रिहाई की मांग को लेकर देशभर में आवाजें उठ रही थीं, जिसके बाद गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप से यह कार्रवाई रद्द की गई।

भारत के फल बाजारों में मिडिल ईस्ट तनाव का असर;भारत के फल बाजारों में मंदी का माहौल…

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मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और युद्ध जैसे हालात का प्रभाव अब भारत के फल बाजारों पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। मुंबई के फल मंडी में इस समय मंदी का माहौल बना हुआ है।

कई फलों की कीमतें गिरकर आधी से भी कम हो गई हैं, जिससे व्यापारियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि विदेशों से आने वाले फलों की आपूर्ति प्रभावित हुई है और स्थानीय बाजार में खरीदारों की संख्या भी कम हो गई है। मिडिल ईस्ट के विभिन्न देशों के साथ व्यापार में रुकावट के कारण निर्यात पर असर पड़ा है, जिसका सीधा प्रभाव मुंबई की फल मंडी पर पड़ रहा है। जो फल पहले अच्छे दामों पर बिकते थे, वे अब बेहद कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं।

एक व्यापारी ने बताया कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि लागत निकालना भी कठिन हो रहा है। ट्रांसपोर्ट के खर्च में वृद्धि हुई है, जबकि बिक्री की कीमतें गिर गई हैं। इस कारण व्यापारियों की आय में कमी आई है और कई को घाटे में माल बेचना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट का क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां तनाव बढ़ने से जहाजों की आवाजाही, आयात-निर्यात और सप्लाई चेन प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर भारत जैसे बड़े बाजारों पर पड़ता है। खासकर फल और सब्जियों का व्यापार तेजी से प्रभावित होता है क्योंकि ये जल्दी खराब होने वाले सामान हैं।

मुंबई फल मंडी में इस समय सेब, केला, संतरा और अंगूर जैसे फलों की कीमतों में भारी गिरावट देखी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि यदि स्थिति कुछ और दिनों तक यही रही, तो उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कई छोटे व्यापारी पहले ही कर्ज में डूबने की बात कर रहे हैं।

व्यापारियों ने सरकार से अनुरोध किया है कि ट्रांसपोर्ट खर्च को कम करने और बाजार को स्थिर करने के लिए जल्द कदम उठाए जाएं, ताकि उन्हें राहत मिल सके।

फिलहाल मंडी में निराशा का माहौल है और सभी की नजर अंतरराष्ट्रीय हालात पर है। व्यापारियों का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट का तनाव कम नहीं होगा, तब तक कारोबार को संभालना मुश्किल होगा।

LPG Gas Rule: घर में कितने गैस सिलेंडर रखना कानूनी? ज्यादा रखे तो हो सकती है जेल, सरकार का पूरा नियम जान लें…

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LPG Gas Rule:

मिडिल ईस्ट में जारी जंग की वजह से देश के कई हिस्सों में कुकिंग गैस को लेकर घबराहट देखने को मिल रही है। घर में आखिर कितने LPG सिलेंडर रखना कानूनी है? इन दिनों देशभर में यही सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है।

दरअसल एलपीजी गैस को लेकर तरह-तरह की बातें फैल रही हैं, जिसकी वजह से कई लोग एहतियात के तौर पर अतिरिक्त सिलेंडर बुक कराने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि सरकार का साफ कहना है कि देश में गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। फिलहाल ऑनलाइन बुकिंग के जरिए सिलेंडर दो से तीन दिन के भीतर लोगों के घर तक पहुंच रहे हैं और रोजाना लाखों सिलेंडर की डिलीवरी हो रही है। जमाखोरी या कालाबाजारी करने वालों पर भी सख्त निगरानी रखी जा रही है। ऐसे में आइए समझते हैं कि घर में कितने सिलेंडर रखना नियमों के मुताबिक सही है और अगर ज्यादा पाए गए तो क्या होगा। अगर आप भी सुरक्षा के नाम पर ज्यादा सिलेंडर घर में जमा कर रहे हैं तो यह नियम जरूर जान लें, क्योंकि कानून इसकी स्पष्ट सीमा तय करता है।

घर में कितने LPG सिलेंडर रखना कानूनी है? (How Many LPG Cylinders Are Allowed At Home)

सरकारी नियमों के मुताबिक एक सामान्य घरेलू उपभोक्ता अपने घर में आमतौर पर 14.2 किलोग्राम के केवल दो LPG सिलेंडर रख सकता है। इनमें एक सिलेंडर गैस चूल्हे से जुड़ा होता है जबकि दूसरा बैकअप के तौर पर रखा जाता है। देश की तेल विपणन कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम भी घरेलू गैस कनेक्शन इसी नियम के आधार पर जारी करती हैं। यानी सामान्य घरेलू उपभोक्ता के लिए दो सिलेंडर की सीमा ही मान्य मानी जाती है।

किस कानून के तहत तय हुआ है यह नियम (LPG Rules Under Gas Cylinders Rules 2016)

भारत में एलपीजी सिलेंडर के इस्तेमाल और भंडारण को लेकर नियम गैस सिलेंडर नियम 2016 और पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) Petroleum and Explosives Safety Organisation) के सुरक्षा मानकों के तहत बनाए गए हैं। इन नियमों के मुताबिक घरेलू उपयोग के लिए सीमित मात्रा में ही सिलेंडर रखने की अनुमति दी जाती है, क्योंकि LPG बेहद ज्वलनशील गैस है। अगर इसे बड़ी संख्या में बंद जगह पर रखा जाए तो दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। इसी वडह से घरों में एलपीजी सिलेंडर को हमेशा हवादार जगह पर रखने और आग या गर्मी के स्रोत से दूर रखने की सलाह दी जाती है।

क्या घर में दो से ज्यादा सिलेंडर रखना गैरकानूनी है (Is Stockpiling LPG Cylinders Illegal)

अगर कोई व्यक्ति जरूरत से ज्यादा एलपीजी सिलेंडर जमा करता है तो इसे जमाखोरी माना जा सकता है। खासतौर पर तब जब यह सामान्य घरेलू जरूरत से अधिक हो या बुकिंग नियमों का उल्लंघन किया गया हो। घरेलू उपयोग के लिए दो सिलेंडर की सीमा तय है, जबकि अधिक मात्रा में गैस सिलेंडर रखने की अनुमति केवल लाइसेंस प्राप्त व्यावसायिक या संस्थागत उपयोग के लिए दी जाती है।

LPG की जमाखोरी पर क्या सजा हो सकती है (Punishment Under Essential Commodities Act)

भारत में LPG को जरूरी वस्तु यानी Essential Commodity माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति गैस सिलेंडर जमा करके कालाबाजारी करता है या नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act 1955) के तहत कार्रवाई हो सकती है। इस कानून की धारा 7 के तहत दोषी पाए जाने पर कम से कम 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं धारा 6A के तहत अधिकारियों को अतिरिक्त सिलेंडर जब्त करने का अधिकार भी दिया गया है।

100 किलो तक गैस रखने का नियम क्या है (LPG Storage Limit Explained)

नियमों के मुताबिक तकनीकी रूप से 100 किलोग्राम तक LPG स्टोर की जा सकती है, जो लगभग 7 सिलेंडर के बराबर होती है। लेकिन यह सीमा सामान्य घरेलू कनेक्शन के लिए लागू नहीं होती। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए व्यवहारिक और कानूनी सीमा दो सिलेंडर ही मानी जाती है।

गैस बुकिंग को लेकर क्या हैं नियम (LPG Booking Interval Rules)

सामान्य परिस्थितियों में घरेलू गैस सिलेंडर की अगली बुकिंग 15 से 21 दिन के अंतराल पर की जा सकती है। हालांकि हाल के दिनों में मांग को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी वाले सिलेंडर की अगली बुकिंग की न्यूनतम अवधि बढ़ाकर 45 दिन कर दी गई है। इससे पहले इसे 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन किया गया था। वहीं शहरी क्षेत्रों में फिलहाल अगली बुकिंग की सीमा 25 दिन रखी गई है।

क्या देश में LPG की कमी होने वाली है ( India LPG Supply)

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक देश में LPG की कोई कमी नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा आपूर्ति को लगातार बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार देशभर में रोजाना लगभग 50 लाख LPG सिलेंडरों की डिलीवरी की जा रही है। बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक औसतन करीब 2.5 दिन का समय लग रहा है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि घबराहट में अतिरिक्त बुकिंग या सिलेंडर जमा करने से बचें, क्योंकि इससे कृत्रिम कमी की स्थिति बन सकती है। भारत पहले अपनी एलपीजी जरूरतों का करीब 60 प्रतिशत आयात कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों से करता था। अब सप्लाई को सुरक्षित बनाने के लिए अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी गैस मंगाई जा रही है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।

प्रश्न 1: घर में कितने LPG सिलेंडर रखना कानूनी है?

सामान्य घरेलू उपभोक्ता अपने घर में 14.2 किलोग्राम के दो सिलेंडर रख सकता है।

प्रश्न 2: क्या दो से ज्यादा सिलेंडर रखने पर कार्रवाई हो सकती है?

अगर बिना वैध कारण के ज्यादा सिलेंडर जमा किए जाते हैं तो इसे जमाखोरी माना जा सकता है और कार्रवाई हो सकती है।

प्रश्न 3: LPG जमाखोरी पर कितनी सजा हो सकती है?

Essential Commodities Act के तहत 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

प्रश्न 4: गैस सिलेंडर बुकिंग के बीच कितना अंतर होना चाहिए?

आमतौर पर 15 से 21 दिन का अंतर होता है, लेकिन कुछ जगहों पर इसे बढ़ाकर 25 से 45 दिन तक किया गया है।

प्रश्न 5: क्या देश में LPG की कमी है?

सरकार के अनुसार देश में गैस की कोई कमी नहीं है और रोजाना लगभग 50 लाख सिलेंडर की डिलीवरी हो रही है।

“Ladli Behna Yojana: इन महिलाओं के खाते में नहीं आएंगे 1500 रुपये, घर बैठे ऐसे करें स्टेटस चेक”

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Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 34वीं किस्त (मार्च 2026) आज (13 मार्च 2026) मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर के घाटीगांव (भितरवार) से सिंगल क्लिक से जारी कर दी है।

करीब 1 करोड़ 25 लाख से अधिक पात्र बहनों के खातों में ₹1500 प्रति महीना ट्रांसफर हो गया है, कुल राशि ₹1836 करोड़ से ज्यादा। लेकिन कुछ महिलाओं के खाते में यह राशि नहीं आएगी। अगर आपके खाते में पैसा नहीं पहुंचा है, तो घबराएं नहीं-नीचे बताए गए कारणों और स्टेटस चेक करने के तरीके से पता लगाएं।

किन महिलाओं के खाते में नहीं आएगा ₹1500?

सरकार ने योजना की पात्रता सख्त कर दी है। अपात्र महिलाओं के नाम पहले ही हटाए जा चुके हैं, लेकिन कई मामलों में तकनीकी या दस्तावेजी कारणों से भी पेमेंट रुक सकता है। मुख्य कारण:

इनकम टैक्स भरने वाले परिवार: महिला या उनके परिवार (पति/पत्नी/नाबालिग बच्चे) में से कोई भी आयकरदाता (इनकम टैक्स फाइलर) है, तो लाभ नहीं मिलेगा।

सालाना आय 2.5 लाख से ज्यादा: परिवार की कुल आय इससे अधिक होने पर योजना से बाहर।

सरकारी नौकरी या पेंशन: महिला या परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में हो या रिटायर होकर पेंशन ले रहा हो।

बैंक अकाउंट की समस्या:

आधार से लिंक नहीं है।

  • DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) एक्टिवेट नहीं।
  • अकाउंट इनएक्टिव (लंबे समय से कोई ट्रांजेक्शन नहीं)।
  • गलत/अपडेट न हुआ बैंक डिटेल्स।

अन्य: योजना से अपात्र घोषित (जैसे 5 एकड़ से ज्यादा भूमि, या अन्य पात्रता उल्लंघन)। अगर आप इनमें से किसी श्रेणी में आती हैं, तो पैसा नहीं आएगा। अन्यथा, तकनीकी कारण से देरी हो सकती है-कुछ घंटों या दिनों में आ सकता है।

स्टेटस कैसे चेक करें?

आधिकारिक पोर्टल पर जाकर तुरंत चेक करें कि पैसा आया है या नहीं, और आपका स्टेटस क्या है:

  1. वेबसाइट खोलें: https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।
  2. विकल्प चुनें: होमपेज पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” (Application and Payment Status) पर
  3. डिटेल्स डालें: अपना लाड़ली बहना आवेदन क्रमांक (Application Number) या समग्र आईडी (Samagra ID) दर्ज करें।
  4. कैप्चा भरें: दिख रहे कैप्चा कोड डालें और “OTP भेजें” पर ।
  5. OTP वेरिफाई करें: रजिस्टर्ड मोबाइल पर आए OTP को डालें और “सर्च” या “खोजें” पर ।

स्टेटस स्क्रीन पर आपका पूरा भुगतान इतिहास दिखेगा-कौन-सी किस्त आई, कौन-सी नहीं, और कारण (अगर रिजेक्टेड)। अगर “Payment Pending” या “Not Credited” दिखे, तो बैंक डिटेल्स चेक करें या हेल्पलाइन पर संपर्क करें।

मोबाइल ऐप से भी चेक कर सकती हैं (यदि ऐप डाउनलोड है): लाड़ली बहना ऐप में लॉगिन करके “Payment Status” देखें।

क्या करें अगर पैसा नहीं आया?

बैंक पासबुक/स्टेटमेंट चेक करें-कभी-कभी मैसेज देर से आता है।

आधार-बैंक लिंक और DBT एक्टिवेट करवाएं (नजदीकी बैंक में)।

हेल्पलाइन: 0755-2700800 या टोल-फ्री 181 पर कॉल करें।

CSC सेंटर या ग्राम पंचायत में जाकर सहायता लें।

अगर नाम कट गया है, तो अपील का विकल्प पोर्टल पर चेक करें।

यह योजना महिलाओं के सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम है, लेकिन पात्रता सख्त होने से कुछ बहनों को बाहर होना पड़ रहा है। अगर आप पात्र हैं और फिर भी पैसा नहीं आया, तो ऊपर बताए स्टेप्स से तुरंत चेक करें।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की संभावना…

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर में कई महीनों की देरी होने की संभावना है। यह जानकारी चार भारतीय सरकारी स्रोतों के हवाले से एक रिपोर्ट में दी गई है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशासन द्वारा शुरू की गई नई जांचों ने व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है। हालांकि, भारत ने शुक्रवार को उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि व्यापार वार्ताएं स्थगित की गई हैं। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच चर्चाएं जारी हैं। मंत्रालय ने कहा, “हमने अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं के बारे में एक मीडिया रिपोर्ट का उल्लेख किया है। यह खारिज किया जाता है कि द्विपक्षीय संबंधों में कोई रुकावट है।”

रिपोर्ट में क्या कहा गया

नई दिल्ली ने पहले मार्च में एक अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद की थी, इसके बाद इस वर्ष एक व्यापक समझौता होना था। यह योजना तब बनी जब ट्रंप ने फरवरी की शुरुआत में भारतीय आयात पर भारी अमेरिकी टैरिफ को कम करने पर सहमति दी थी। इसके बदले में भारत ने कुछ प्रतिबद्धताओं का आश्वासन दिया था, जिसमें रूसी तेल के आयात को रोकना और अमेरिकी सामानों पर शुल्क कम करना शामिल था। हालांकि, अब यह समयसीमा कई महीनों के लिए खिसकने की संभावना है।

वार्ता की गति में कमी

भारतीय सरकारी स्रोतों के अनुसार, अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ को समाप्त करने के बाद वार्ता की गति धीमी हो गई है। इसके बाद से कोई महत्वपूर्ण चर्चा नहीं हुई है, खासकर जब अमेरिका ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में व्यस्त है।

नई अमेरिकी जांच का दबाव

नई अमेरिकी जांच ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिसमें 16 व्यापारिक साझेदारों के बीच “संरचनात्मक अधिशेष क्षमता और उत्पादन” की जांच की जा रही है। एक स्रोत ने कहा, “हम किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए जल्दी में नहीं हैं।”

संभावित WTO मार्ग

यह नवीनतम जांच अमेरिका के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत शुरू की गई है। यदि अवसर मिला, तो भारत अपने मामले को अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के सामने पेश करने की योजना बना रहा है।

अमेरिका की अपेक्षाएं

इस बीच, भारत में अमेरिकी राजदूत ने कहा कि अमेरिका उन देशों से अपेक्षा करता है जिन्होंने अमेरिका के साथ समझौते किए हैं, वे अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करें।

टैरिफ अनिश्चितता बनी हुई है

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, ट्रंप ने सभी देशों से आयात पर 10% टैरिफ लगाया है। भारत अब यह स्पष्टता चाहता है कि क्या अमेरिका उस दर पर लौटेगा या कोई अन्य टैरिफ स्तर लागू करेगा।

तमिलनाडु में ईंधन आपूर्ति को लेकर भाजपा नेता का बयान…

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भाजपा के नेता के. अन्नामलाई ने तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके सरकार पर आरोप लगाया है कि वह पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच ईंधन आपूर्ति को लेकर जनता में भय का माहौल बना रही है।

उन्होंने कहा कि भारत ने अपने तेल आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाकर स्थिति को नियंत्रण में रखा है। कोयंबटूर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अन्नामलाई ने बताया कि केंद्र सरकार ने आपूर्ति स्थिर रहने का आश्वासन दिया है, फिर भी डीएमके नेतृत्व अनावश्यक डर पैदा कर रहा है।

डीएमके की निंदा

अन्नामलाई ने कहा कि हम डीएमके सरकार की इस कोशिश की कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री के आश्वासनों का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी ने तिरुचिरापल्ली में स्पष्ट रूप से कहा था कि किसी भी प्रकार का भय न फैलाएं। संसद में पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि गैर-होर्मुज तेल का विविधीकरण 55 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत हो गया है।

वैकल्पिक ऊर्जा के प्रयास

अन्नामलाई ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को सुरक्षित करने के लिए सरकार के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दो जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर चुके हैं और प्राकृतिक गैस भारत ला रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के बावजूद भारत में पेट्रोल की कीमतें स्थिर हैं।

कांग्रेस पर आरोप

भाजपा नेता ने राहुल गांधी पर भी आरोप लगाया कि वह ईंधन आपूर्ति को लेकर भय फैलाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। अन्नामलाई ने कहा कि विपक्ष के नेताओं को संवेदनशील मुद्दों पर जिम्मेदारी से कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अपने विशेषाधिकार का दुरुपयोग कर रहे हैं और जनता उनसे शालीनता की अपेक्षा करती है।

भारत में 44% वाहन बिना बीमा के सड़कों पर, सरकार की रिपोर्ट में खुलासा…

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भारत में सड़कों पर चलने वाले वाहनों में बड़ी संख्या ऐसे हैं जिनका बीमा नहीं कराया गया है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में चल रहे करीब 44 प्रतिशत वाहनों के पास कोई बीमा कवर नहीं है.

यानी लगभग हर दो में से एक कार या दोपहिया वाहन बिना बीमा के सड़कों पर दौड़ रहा है. यह जानकारी संसद में पेश सरकारी आंकड़ों से सामने आई है, जिसने सड़क सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

राज्यसभा में सवाल के जवाब में खुलासा

यह मामला राज्यसभा में उठे एक सवाल के जवाब में सामने आया. सांसद के. आर. सुरेश रेड्डी ने बिना बीमा वाले वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं और पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर सवाल पूछा था. इसके जवाब में सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि यह आंकड़े VAHAN डाटाबेस पर आधारित हैं. इसमें 6 मार्च 2026 तक देश में रजिस्टर्ड और सक्रिय वाहनों की जानकारी शामिल है. इन आंकड़ों में वाहनों के रजिस्ट्रेशन और फिटनेस की स्थिति को भी ध्यान में रखा गया है.

थर्ड-पार्टी बीमा कानून के बावजूद ढिलाई

मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर चलने वाले हर वाहन के लिए थर्ड-पार्टी बीमा होना अनिवार्य है. कानून की धारा 146 के तहत यह नियम लागू किया गया है, जबकि धारा 196 में इसका उल्लंघन करने पर जुर्माने और सजा का प्रावधान है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन मालिक इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं. इससे सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ितों को मुआवजा मिलने में भी दिक्कतें आ सकती हैं.

राज्यों को सख्ती और जागरूकता बढ़ाने की सलाह

इस स्थिति को सुधारने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कई बार सलाह दी है. मंत्रालय ने कहा है कि राज्यों को नियमों को सख्ती से लागू करना चाहिए और लोगों को बीमा के महत्व के बारे में जागरूक करना चाहिए. इसके अलावा डिजिटल वेरिफिकेशन जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान आसानी से हो सके.

दुर्घटना पीड़ितों के लिए राहत की व्यवस्था

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना बीमा वाले वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए राहत के प्रावधान मौजूद हैं. मोटर वाहन अधिनियम की धारा 164 और 166 के तहत पीड़ित मुआवजे का दावा कर सकते हैं. इसके अलावा मोटर वाहन दुर्घटना फंड के जरिए भी हिट-एंड-रन और बिना बीमा वाले मामलों में पीड़ितों की मदद की जाती है, जिससे इलाज और मुआवजा देने में सहायता मिलती है.

West Bengal Chunav: बंगाल में BJP का CM चेहरा कौन? सभी बड़े नेताओं को मैदान में उतारेगी पार्टी, रणनीति तैयार..

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो चुकी है। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर भारतीय जनता पार्टी अगर चुनाव जीतती है तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा।

दिलचस्प बात यह है कि पार्टी इस बार भी बिना किसी घोषित मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

भाजपा का फोकस इस बार अलग रणनीति पर है। पार्टी ने तय किया है कि वह राज्य में अपने बड़े नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं को चुनाव मैदान में उतारेगी। इसी रणनीति के तहत केंद्रीय नेतृत्व ने उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

140 सीटों के उम्मीदवारों पर CEC की मुहर (West Bengal BJP Candidates)

भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति यानी CEC की अहम बैठक में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए लगभग 140 सीटों के उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दे दिया गया है। यह बैठक प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित हुई।

यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के पद संभालने के बाद यह पहली बड़ी रणनीतिक बैठक थी। आम तौर पर ऐसी बैठकें भाजपा मुख्यालय में होती हैं, लेकिन इस बार इसे प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित किया गया।

पार्टी सूत्रों के अनुसार 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए लगभग आधे उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए गए हैं और जल्द ही पहली सूची जारी की जा सकती है।

बंगाल में बिना CM चेहरे के चुनाव (Strategy Without Declaring CM Face)

भाजपा ने इस बार भी मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए बिना चुनाव लड़ने का फैसला किया है। पार्टी का मानना है कि वह चुनाव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार के कामकाज के आधार पर लड़ेगी।

चुनावी पोस्टरों और प्रचार अभियान में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर और केंद्र सरकार की योजनाओं को प्रमुखता दी जाएगी। पार्टी का मानना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व की लोकप्रियता बंगाल में चुनावी फायदा दिला सकती है।

पूर्व सांसदों और बड़े नेताओं को मैदान में उतारने की तैयारी

भाजपा इस बार अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए कई पूर्व सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, पूर्व केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक और सुवेंदु अधिकारी जैसे नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि 2021 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार पार्टी मौजूदा लोकसभा सांसदों को चुनाव मैदान में उतारने के मूड में नहीं दिख रही है।