पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो चुकी है। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर भारतीय जनता पार्टी अगर चुनाव जीतती है तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा।
दिलचस्प बात यह है कि पार्टी इस बार भी बिना किसी घोषित मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
भाजपा का फोकस इस बार अलग रणनीति पर है। पार्टी ने तय किया है कि वह राज्य में अपने बड़े नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं को चुनाव मैदान में उतारेगी। इसी रणनीति के तहत केंद्रीय नेतृत्व ने उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
140 सीटों के उम्मीदवारों पर CEC की मुहर (West Bengal BJP Candidates)
भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति यानी CEC की अहम बैठक में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए लगभग 140 सीटों के उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दे दिया गया है। यह बैठक प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित हुई।
यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के पद संभालने के बाद यह पहली बड़ी रणनीतिक बैठक थी। आम तौर पर ऐसी बैठकें भाजपा मुख्यालय में होती हैं, लेकिन इस बार इसे प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित किया गया।
पार्टी सूत्रों के अनुसार 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए लगभग आधे उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए गए हैं और जल्द ही पहली सूची जारी की जा सकती है।
बंगाल में बिना CM चेहरे के चुनाव (Strategy Without Declaring CM Face)
भाजपा ने इस बार भी मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए बिना चुनाव लड़ने का फैसला किया है। पार्टी का मानना है कि वह चुनाव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार के कामकाज के आधार पर लड़ेगी।
चुनावी पोस्टरों और प्रचार अभियान में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर और केंद्र सरकार की योजनाओं को प्रमुखता दी जाएगी। पार्टी का मानना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व की लोकप्रियता बंगाल में चुनावी फायदा दिला सकती है।
पूर्व सांसदों और बड़े नेताओं को मैदान में उतारने की तैयारी
भाजपा इस बार अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए कई पूर्व सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, पूर्व केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक और सुवेंदु अधिकारी जैसे नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि 2021 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार पार्टी मौजूदा लोकसभा सांसदों को चुनाव मैदान में उतारने के मूड में नहीं दिख रही है।



