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Weather: फिर पड़ेगी कड़ाके की ठंड, कुछ स्थानों पर शीतलहर की चेतावनी, IMD ने जारी किया अलर्ट..

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मौसम विभाग ने उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर शीतलहर चलने की संभावना जताई है। वहीं रविवार को रायपुर में धुंध छाए रहने की संभावना है।

फिर कड़ाके की ठंड का दौर

उत्तरी छत्तीसगढ़ समेत मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। अधिकतर जगह न्यूनतम तापमान सामान्य से 5 डिग्री तक कम है। सरगुजा संभाग शीतलहर की चपेट में है। पारा 4.6 डिग्री पर जा पहुंचा है, जो सामान्य से 5 डिग्री कम है। माना में भी न्यूनतम तापमान 9 डिग्री है। रायपुर शहर में शनिवार को पारा 13 डिग्री से नीचे चला गया।

मौसम विभाग ने उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर शीतलहर चलने की संभावना जताई है। वहीं रविवार को रायपुर में धुंध छाए रहने की संभावना है। अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम 13 डिग्री के आसपास रहने की उम्मीद है। मौसम शुष्क रहेगा।

तापमान बढऩे की संभावना

मौसम विभाग का कहना है कि रविवार को तापमान में विशेष अंतर नहीं आएगा। इसके बाद 2-3 डिग्री वृद्धि होने की संभावना है।

प्रमुख शहरों का तापमान ;शहरअधिकतमन्यूनतम

  • रायपुर – 27.6 – 12.9
  • माना – 28 – 9
  • बिलासपुर – 27 – 12
  • पेंड्रारोड – 23.8 – 8.4
  • अंबिकापुर – 24.3 – 4.6
  • राजनांदगांव – 27 – 10

MD-MS Courses Reopened: स्थानीय छात्रों को बड़ी राहत, नए नियमों के साथ MD-MS प्रवेश प्रक्रिया दोबारा…

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गजट नोटिफिकेशन के पांच दिन बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने MD-MS कोर्स के लिए रजिस्ट्रेशन फिर शुरू कर दिया है।

एमडी-एमएस कोर्स के लिए दोबारा पंजीयन शुरू

MD-MS Courses Reopened: 8 दिसंबर लास्ट डेट

नीट पीजी क्वालिफाइड छात्र 8 दिसंबर की आधी रात तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। हाईकोर्ट के 100 फीसदी स्थानीय आरक्षण को रद्द करने के बाद विभाग ने 22 नवंबर को पंजीयन रोक दिया था। 13 दिनों बाद दोबारा रजिस्ट्रेशन शुरू होने से छात्रों को राहत मिली है।

एमबीबीएस पढ़ने वाले स्थानीय छात्रों को बड़ी राहत

नए गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, अब दूसरे राज्यों में पढ़े स्थानीय छात्रों को एडमिशन में 50 फीसदी सीटें आवंटित की जाएंगी। इतनी ही सीटें प्रदेश के कॉलेजों में पढ़े एमबीबीएस छात्रों को दी जाएंगी। इससे दूसरे राज्यों में एमबीबीएस पढ़ने वाले स्थानीय छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

 कांग्रेस नेता की मौत पर बढ़ा विवाद, राजनीतिक हत्या का आरोप

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सर्व आदिवासी समाज ने आदिवासी नेता की मौत को राजनीतिक हत्या बताया है और विरोध में 9 दिसंबर को बस्तर संभाग बंद का ऐलान किया है।

जगदलपुर और कांकेर ज़िलों के चारामा में न्यायिक हिरासत में आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की मौत पर विवाद बढ़ गया है। सर्व आदिवासी समाज ने इसे राजनीतिक हत्या बताया है और इसके विरोध में 9 दिसंबर को बस्तर संभाग बंद का आह्वान किया है।

संगठन के डिविज़नल प्रेसिडेंट प्रकाश ठाकुर का कहना है कि जीवन ठाकुर की मौत पर शक पैदा होता है। उनका आरोप है कि ठाकुर की जेल में एक राजनीतिक साज़िश के तहत हत्या की गई। उनके परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, जीवन ठाकुर के खिलाफ़ एक FIR दर्ज की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनका वन अधिकार सर्टिफिकेट नकली था, जो बहुत संदिग्ध लगता है।

समुदाय ने यह भी सवाल उठाया कि अगर ज़मीन का पट्टा अवैध था, तो उसे रद्द करने के लिए सही प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई? सीधे FIR कैसे दर्ज की गई? क्या FIR दर्ज करने वाले अधिकारी को वन अधिकार अधिनियम की जानकारी थी? समुदाय ने पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है। इसके अलावा, समुदाय ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि इस मामले में दूसरे आरोपियों को ज़मानत मिल गई, लेकिन बीमार होने के बावजूद जीवन ठाकुर को ज़मानत नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि इसकी भी जांच होनी चाहिए।

एक और बड़ा सवाल यह है कि जीवन ठाकुर को उनके परिवार को बताए बिना चरमा से रायपुर जेल कैसे और किसके आदेश पर शिफ्ट किया गया? उन्हें 2 दिसंबर को रायपुर जेल भेजा गया और 4 दिसंबर की सुबह मेकाहारा हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ उनकी मौत हो गई। समुदाय का कहना है कि यह पूरी घटना संदिग्ध है और कई सवालों के जवाब अभी भी नहीं मिले हैं।

“बंगाल की धरती पर ‘बाबरी’ मस्जिद! बेलडांगा में 25 बीघा मस्जिद का शिलान्यास, मैदान में 3 लाख की भीड़!”

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कोलकाता : मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में अंततः बाबरी मस्जिद का शिलान्यास कार्यक्रम संपन्न हो गया है। तृणमूल के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के आह्वान पर राज्य के विभिन्न हिस्सों, साथ ही देश के अलग-अलग क्षेत्रों से भारी संख्या में लोग, धर्मगुरु और काजी मरादिघी मोड़ के विशाल मैदान में जुटे हैं।

हाईकोर्ट से अनुमति मिलने के बावजूद पूरे इलाके को अभेद्य सुरक्षा घेरे में बदल दिया गया है।

भारी बजट और विशाल आयोजन: आयोजकों के दावे के अनुसार, इस शिलान्यास समारोह का बजट लगभग 6-7 करोड़ रुपये है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कुल मिलाकर लगभग 60-70 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसमें मंच निर्माण पर 10 लाख रुपये और भोजन व्यवस्था पर करीब 30 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। मेहमानों के लिए 7 कैटरिंग एजेंसियों द्वारा 40,000 ‘शाही बिरयानी’ तैयार की जा रही है। मैदान में 2 से 3 हजार स्वयंसेवक (वॉलंटियर्स) तैनात हैं। हुमायूं कबीर का अनुमान है कि 25 बीघा जमीन पर मस्जिद के शिलान्यास के लिए लगभग 3 लाख लोग इकट्ठा होंगे।

शनिवार का भव्य कार्यक्रम:

  • सुबह 8 बजे: अतिथियों का आगमन। सऊदी अरब के दो काजियों का काफिला मैदान में पहुंचा।
  • सुबह 10 बजे: कुरान पाठ।
  • दोपहर 12 बजे: शिलान्यास का मुख्य समारोह।
  • दोपहर 2 बजे: भोजन (लंच) का कार्यक्रम शुरू।
  • शाम 4 बजे: मैदान खाली करने का निर्देश है।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था:

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शिलान्यास की अनुमति देते समय कड़ी सुरक्षा का निर्देश दिया था। इस निर्देश का पालन करते हुए, लगभग 3 हजार पुलिसकर्मियों को मैदान में तैनात किया गया है। भीड़ को नियंत्रित करने और निगरानी रखने के लिए क्विक रिस्पांस टीम (QRT), रैफ (RAF), विलेज पुलिस और महिला कांस्टेबल मौजूद हैं। जिला पुलिस के अनुसार, सुरक्षा की जिम्मेदारी दो पुलिस अधीक्षक (SP) रैंक के अधिकारियों, 30 DSP, 100 इंस्पेक्टर, 200 सब-इंस्पेक्टर/ASI और 30 खुफिया विभाग (इंटेलिजेंस) के अधिकारियों को सौंपी गई है। शुक्रवार देर रात तक मंच निर्माण का काम और अंतिम तैयारियां जारी रहीं।

हुमायूं का दावा और भविष्य की योजना:

हुमायूं कबीर ने कहा कि कई ‘झूठी अफवाहों और बाधाओं’ को पार करने के बाद आखिरकार शिलान्यास हो रहा है। 25 बीघा जमीन पर बनने वाली इस मस्जिद में एक स्कूल और चिकित्सा केंद्र भी शामिल होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक नेक दिल मुस्लिम व्यक्ति इस मस्जिद निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये का दान देंगे।

“हम बाबा साहेब के विचारों और संविधान की रक्षा करते हैं: राहुल गांधी”

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को डॉ बीआर अंबेडकर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राहुल गांधी ने मीडिया से कहा कि बाबा साहेब में देश को संविधान दिया और हम संविधान की रक्षा करते हैं।

उन्होंने कहा, “अंबेडकर एक आइकन हैं। उन्होंने पूरे देश को एक रास्ता दिखाया, उन्होंने हमें संविधान दिया। इसलिए हम उन्हें याद करते हैं और उनके विचारों और संविधान की रक्षा करते हैं।”

एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा, बाबासाहेब अंबेडकर को उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि। समानता, न्याय और मानवीय गरिमा की उनकी अनमोल विरासत संविधान की रक्षा करने के मेरे संकल्प को मजबूत करती है और एक ज्यादा समावेशी, दयालु भारत के लिए हमारे सामूहिक संघर्ष को प्रेरित करती है।”

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक्स पर लिखा, “स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री, प्रसिद्ध वकील, राजनेता और संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्हें सादर नमन। बाबासाहेब ने देश में स्वतंत्रता, समता, न्याय और बंधुत्व के विचार को आगे बढ़ाया और संविधान के माध्यम से शोषितों, वंचितों समेत हर एक भारतीय के अधिकार को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई। बाबासाहेब के विचार सदैव देश का मार्गदर्शन करते रहेंगे।”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने एक्स पर लिखा, “भारत रत्न बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जी की पुण्यतिथि पर सादर नमन और विनम्र श्रद्धांजलि। संविधान निर्माता के तौर पर देश के हर वर्ग को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार देने, समावेशी समाज की नींव रखने के लिए पीढ़ियां उनको सदैव याद रखेंगी।”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने लिखा, भारतीय संविधान के शिल्पी, शिक्षा-संघर्ष-समता के प्रतीक, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन. बाबा साहब ने दलित एवं शोषित समाज में आत्मसम्मान, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों की ज्योति प्रज्वलित की. “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” का आपका संदेश सदैव बहुजन समाज की प्रेरणा रहेगा।”

“भारत में पिछले 11 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग 6 गुना बढ़ी”

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संसद में हाल ही में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत में पिछले 11 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में 6 गुना विस्तार हुआ है, जो कि 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 11.32 लाक करोड़ रुपए हो गई है।

यह उपलब्धि देश को एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर के रूप में स्थापित करने को लेकर महत्वपूर्ण है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में बताया कि भारत सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर पॉलिसी पीएम मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन पर आधारित है।

उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 2020 में शुरू हुई लार्ज स्केल इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए पीएलआई स्कीम ने 14,065 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है।

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को लेकर उन्होंने जानकारी दी कि पिछले 11 वर्षों में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की कुल संख्या 2 से बढ़कर 300 से अधिक हो गई है। एलएसईएम के लिए पीएलआई के शुभारंभ के बाद से मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग 2020-21 में 2.2 लाख करोड़ से बढ़कर 5.5 लाख करोड़ हो गई है।

देश के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 2014-15 में 38 हजार करोड़ रुपए से आठ गुना बढ़कर 2024-25 में 3.26 लाख करोड़ रुपए हो गया है। मोबाइल निर्यात भी लगभग 22 हजार करोड़ से बढ़कर 2.2 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। इसी के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स अब तीसरी सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कैटेगरी है।

उद्योग का अनुमान है कि इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर अब लगभग 25 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करता है।

केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की सफलता के आधार पर सरकार ने 2022 में सेमीकंडक्टर के विकास के लिए कार्यक्रम शुरू किया। सरकार का ध्यान सेमीकंडक्टर के पूरे इकोसिस्टम को विकसित करने पर है। वहीं, 3 वर्ष से भी कम समय में 1.6 लाख करोड़ के संचयी निवेश के साथ दस सेमीकंडक्टर यूनिट को मंजूरी दी गई है।

“ई-श्रम पोर्टल पर 31 करोड़ से अधिक असंगठित कामगार और 5 लाख से अधिक गिग वर्कर्स किए जा चुके रजिस्टर”

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संसद में हाल ही में दी गई जानकारी के अनुसार, इस वर्ष नवंबर तक 31.38 करोड़ से अधिक असंगठित कामगार और 5.09 लाख से अधिक गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर किए जा चुके हैं।

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने ई-श्रम (असंगठित कामगारों का नेशनल डाटाबेस) पोर्टल 26 अगस्त, 2021 को लॉन्च किया था। इस पोर्टल का उद्देश्य असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सेल्फ डिक्लेरेशन बेसिस पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) देकर उन्हें रजिस्टर करना है।

केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सोशल सिक्योरिटी, स्वास्थ्य और कल्याण योजनाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की 14 योजनाओं को ई-श्रम पोर्टल से जोड़ा जा चुका है।

केंद्रीय राज्य मंत्री के अनुसार, भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 की बजट घोषणा में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के गिग वर्कर्स के कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें ई-श्रम पोर्टल के जरिए रजिस्ट्रेशन, पहचानपत्र जारी करना और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवा के लाभ देना शामिल है।

इसके अलावा, केंद्र सरकार रोजगार सृजन के साथ युवाओं और महिलाओं की रोजगार-क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। देश में रोजगार सृजन की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू किया जा रहा है। इनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), स्टैंडअप इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम तथा वूमेन इन साइंस एंड इंजीनियरिंग-किरण (वाइज-किरण) शामिल हैं।

केंद्र की ओर से चार लेबर कोड को 21 नवंबर 2025 से प्रभावी कर दिया गया है। इन लेबर कोड के साथ औपचारिक रोजगार और सोशल सिक्योरिटी कवरेज को बढ़ाने के साथ देश में समग्र श्रमिक कल्याण के लिए लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी के रूप में कई प्रावधान प्रावधान किए गए हैं।

इन नए लेबर कोड्स के साथ सभी नौकरियों के लिए न्यूनतम मजदूरी भुगतान सुनिश्चित किया गया है, वेतन का समय पर भुगतान अनिवार्य किया गया है और श्रमिकों की मुफ्त सालाना स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है। साथ ही, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स समेत अस्थाई कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का विस्तार किया गया है। महिला कामगार/कर्मचारी के लिए नए लेबर कोड उन्हें मातृत्व लाभ पाने का हकदार बनाते हैं।

“लेबर कोड्स पर बड़ी अपडेट: अप्रैल 2026 तक पूरे देश में लागू होंगे नए नियम, 1 साल में ग्रेच्युटीसमेत जाने और क्या-क्या होंगे फायदे”

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श्रम और रोज़गार मंत्री मनसुख मंडाविया ने बुधवार को कहा कि चार नए लेबर कोड के ड्राफ्ट नियम बहुत जल्द प्री-पब्लिश किए जाएंगे। इसके बाद 5 दिनों तक सुझाव दिए जा सकेंगे, और फिर फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।

मनसुख मंडाविया ने बताया कि ये कोड अगले फाइनेंशियल ईयर (अप्रैल 2026) से पूरी तरह लागू हो जाएंगे। सभी चार कोड 21 नवंबर को नोटिफाई किए गए थे। उन्होंने आगे कहा कि लेबर एक कॉन्करेंट सब्जेक्ट है, इसलिए राज्यों को भी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन्हें नोटिफाई करना होगा। वे स्थानीय स्थितियों के अनुसार नियमों में बदलाव कर सकते हैं।

चार लेबर कोड कौन से हैं?

  • वेतन संहिता 2019 औद्योगिक संबंध संहिता 2020
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020
  • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता 2020
  • अब समझें कि नए लेबर कोड में क्या बदलाव होंगे
  • 29 कानूनों की जगह चार कानून

केंद्र सरकार लंबे समय से लेबर कानूनों को आसान बनाने की कोशिश कर रही थी। पहले 29 अलग-अलग केंद्रीय लेबर कानून थे, जो कन्फ्यूजिंग थे। अब इनकी जगह चार कोड लाए गए हैं – वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा। ये कोड 2020 में पास हुए थे, लेकिन नियम बनाने में देरी हो रही थी। अब राज्यों को भी अपने नियमों को उसी हिसाब से अपडेट करना होगा। श्रम मंत्रालय के अनुसार, इससे व्यापार करने में आसानी होगी और श्रमिकों के अधिकार मजबूत होंगे। ये अप्रैल 2025 से पूरे देश में लागू होंगे, जिससे 500 मिलियन से ज़्यादा श्रमिकों को फायदा होगा।

ग्रेच्युटी में बदलाव: 20 लाख तक टैक्स-फ्री, देरी पर 10% ब्याज

सबसे बड़ा अपडेट ग्रेच्युटी को लेकर है। नए कानून के साथ, कर्मचारी अब 5 साल के बजाय सिर्फ 1 साल की सर्विस के बाद ग्रेच्युटी का फायदा उठा पाएंगे। टैक्स-फ्री ग्रेच्युटी की लिमिट भी 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है।

यह रकम टैक्स-फ्री रहेगी, यानी कर्मचारी को पूरी ग्रेच्युटी रकम मिलेगी। एम्प्लॉयर्स को 30 दिनों के अंदर ग्रेच्युटी का पेमेंट करना होगा। अगर देरी होती है, तो 10% सालाना ब्याज लगेगा, और मुआवजा दोगुना भी हो सकता है।

यह प्राइवेट और पब्लिक दोनों सेक्टर पर लागू होगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई कर्मचारी 5 साल तक काम करता है, तो उसे हर साल की सर्विस के लिए 15 दिन की सैलरी मिलेगी। इस बदलाव से रिटायरमेंट के समय फाइनेंशियल सिक्योरिटी बढ़ेगी।

ओवरटाइम के लिए डबल पेमेंट: 9 घंटे से ज़्यादा काम करने पर डबल सैलरी

ओवरटाइम के नियमों को भी सख्त किया गया है। अब, दिन में 9 घंटे से ज़्यादा या हफ्ते में 48 घंटे से ज़्यादा काम करने पर कर्मचारियों को डबल रेट से पेमेंट मिलेगा। पहले ऐसा नहीं था। हालांकि, ओवरटाइम सिर्फ इमरजेंसी में ही ज़रूरी होगा, जैसे कि फैक्ट्री में कोई खराबी आने पर। वर्कर्स को पैसे के बजाय कॉम्पेंसेटरी छुट्टी भी मिल सकती है। हर हफ्ते एक छुट्टी ज़रूरी होगी। यह प्रोविजन खासकर फैक्ट्री वर्कर्स और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है। लेबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे कंपनियों द्वारा गैर-ज़रूरी ओवरटाइम कम होगा, लेकिन वर्कर्स की कमाई बढ़ेगी।

अब 26 हफ्ते की मैटरनिटी और 15 दिन की पैटरनिटी लीव मिलेगी

छुट्टी के नियमों में भी सुधार किया गया है। हर 20 दिन काम करने पर एक दिन की पेड लीव मिलेगी। अर्न लीव सालाना 15 से बढ़ाकर 30 दिन कर दी गई है, लेकिन यह एक साल की सर्विस के बाद ही लागू होगी। मैटरनिटी लीव 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दी गई है, जो महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत है। पहली बार 15 दिन की पैटरनिटी लीव और एडॉप्शन लीव भी शुरू की गई है। फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को भी 3 महीने की सर्विस के बाद परमानेंट कर्मचारियों जैसे ही फायदे मिलेंगे। इन बदलावों से वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर होगा।

गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी और कवरेज: 0.65% कंट्रीब्यूशन ज़रूरी

नए कोड्स में सोशल सिक्योरिटी को मज़बूत किया गया है। एम्प्लॉयर्स को EDLI स्कीम में सैलरी का 0.65% कंट्रीब्यूट करना होगा, जिससे लाइफ और डिसेबिलिटी कवर मिलेगा। अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के वर्कर्स को पहली बार लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ बेनिफिट्स मिलेंगे। गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स, जैसे कि उबर ड्राइवर या फूड डिलीवरी बॉय, को हेल्थ इंश्योरेंस, एक्सीडेंट कवर और सोशल सिक्योरिटी मिलेगी। फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयमेंट कोड कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को परमानेंट कर्मचारियों जैसे ही अधिकार देगा। दुकानों और एस्टैब्लिशमेंट को ऑनलाइन रजिस्टर करना होगा; ऐसा न करने पर ₹5 लाख तक का जुर्माना लग सकता है।

नए कोड्स से वर्कर्स की कमाई और सुरक्षा बढ़ेगी

ये नए कोड्स वर्कर्स की कमाई और सुरक्षा बढ़ाएंगे। ओवरटाइम और ग्रेच्युटी से एक्स्ट्रा इनकम होगी। छुट्टी से परिवार के साथ ज़्यादा समय बिताने का मौका मिलेगा। हालांकि, कंपनियों को कंट्रीब्यूशन और पेनल्टी की वजह से ज़्यादा खर्च उठाना पड़ेगा। लेबर मिनिस्ट्री का मानना ​​है कि इससे रोज़गार के मौके बढ़ेंगे। राज्यों को नियम बनाने के लिए चार महीने का समय दिया गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये नए कोड भारत को ग्लोबल लेबर स्टैंडर्ड्स के करीब लाएंगे। कुल मिलाकर, ये बदलाव लेबर मार्केट को मॉडर्न बनाएंगे।

1 साल की सर्विस के बाद कितनी ग्रेच्युटी मिलेगी?

ग्रेच्युटी कैलकुलेट करने का फ़ॉर्मूला वही रहेगा…

ग्रेच्युटी = आखिरी बेसिक सैलरी × (15/26) × कुल सर्विस (सालों में)

मान लीजिए कि किसी कर्मचारी की आखिरी बेसिक सैलरी ₹50,000 थी और वह एक साल काम करने के बाद नौकरी छोड़ देता है। ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन इस तरह होगी: ₹50,000 × (15/26) × 1 = ₹28,847

इसका मतलब है कि एक साल की सर्विस के लिए, कर्मचारी को ग्रेच्युटी के तौर पर लगभग ₹28,800 मिल सकते हैं।

ग्रेच्युटी क्या है?

ग्रेच्युटी एक फाइनेंशियल बेनिफिट है जो कंपनी अपने कर्मचारियों को देती है, जिसे तारीफ़ का एक तरीका भी माना जा सकता है। यह आपकी सर्विस की अवधि और सैलरी के आधार पर तय होती है।

“पुतिन के भारत दौरे ने झकझोरा पश्चिम! रूस के खिलाफ साजिश फिर से तेज, यूरोपीय देशों की चिंता बढ़”

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यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर दबाव बढ़ाने की कोशिशें एक बार फिर तेज़ होने वाली हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, G7 और यूरोपियन यूनियन अब एक ऐसे कदम पर विचार कर रहे हैं जो रूस के तेल रेवेन्यू पर पिछले सभी प्रतिबंधों की तुलना में कहीं ज़्यादा असर डाल सकता है।

इस प्रस्ताव में रूस के तेल व्यापार से पश्चिमी समुद्री सेवाओं – टैंकर, बीमा और शिपिंग – को पूरी तरह से हटाना शामिल है। अगर इसे लागू किया जाता है, तो इससे ग्लोबल एनर्जी पॉलिटिक्स में एक बड़ा बदलाव आ सकता है।

हालांकि रूस ने युद्ध के दौरान नए रास्ते ढूंढ लिए हैं, लेकिन उसके लगभग एक तिहाई तेल शिपमेंट अभी भी यूरोपीय समुद्री देशों के जहाजों पर निर्भर हैं। बड़ी मात्रा में कच्चा तेल ग्रीस, माल्टा और साइप्रस के बड़े टैंकर बेड़े के ज़रिए भारत और चीन पहुंच रहा है। अगर प्रस्तावित प्रतिबंध लागू होते हैं, तो ये सेवाएं बंद हो जाएंगी, जिससे रूस को अपने ग्लोबल खरीदारों तक पहुंचने के लिए नए विकल्प खोजने होंगे।

शैडो फ्लीट का आकार बढ़ेगा – क्योंकि यह रूस का एकमात्र दूसरा विकल्प है

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले प्राइस कैप प्रतिबंधों के बाद, रूस ने अस्पष्ट स्वामित्व वाले और पश्चिमी बीमा के बिना पुराने जहाजों का एक “शैडो फ्लीट” बनाया। यह फ्लीट अब उसके 70% से ज़्यादा तेल का ट्रांसपोर्ट करता है। लेकिन अगर G7-EU समुद्री नेटवर्क को पूरी तरह से बंद कर देता है, तो रूस को इस फ्लीट को और बढ़ाना होगा, जिससे न केवल लागत बढ़ेगी बल्कि दुर्घटनाओं और पारदर्शिता की कमी का जोखिम भी बढ़ेगा।

2026 की शुरुआत एक बड़ा टर्निंग पॉइंट हो सकता है – EU इसे अगले पैकेज में शामिल करने की तैयारी कर रहा है

अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यूरोपियन यूनियन 2026 की शुरुआत में अपेक्षित एक बड़े प्रतिबंध पैकेज में इस प्रस्ताव को शामिल करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि, कुछ सदस्य चाहते हैं कि पहले G7 के भीतर एक संयुक्त सहमति बन जाए। अमेरिका और ब्रिटेन तकनीकी स्तर पर इस विकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं।

ट्रम्प प्रशासन की नीति अंतिम निर्णय तय करेगी

यह निर्णय काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प रूस और यूक्रेन के बीच चल रही बातचीत को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। कई विशेषज्ञों का मानना ​​है कि ट्रम्प प्राइस कैप रणनीति को पिछले प्रशासन जितना प्रभावी नहीं मानते हैं, इसलिए उनका रुख महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

2022 के बाद से सबसे मुश्किल प्रस्ताव

2022 से रूस पर प्रतिबंध लगातार बढ़े हैं। पहले, यूरोपीय तेल आयात रोक दिया गया, फिर प्राइस कैप लागू किया गया। हालांकि, समुद्री सेवाओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध पिछले सभी उपायों की तुलना में कहीं ज़्यादा बड़ा असर डाल सकता है। यह एक ऐसा कदम होगा जो रूस के इंटरनेशनल तेल ट्रांसपोर्टेशन को लगभग पूरी तरह से पंगु बना देगा।

रूस अब तक इस दबाव से कैसे बचा है?

रूस की रणनीति सीधी रही है: उन रास्तों से जहाज़ भेजना जहाँ कम कंट्रोल हो। यही वजह है कि एशियाई देशों की ओर जाने वाले ज़्यादातर जहाज़ पश्चिमी इंश्योरेंस के बिना और डेटा शेयर किए बिना चलते हैं। बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन का तर्क था कि अगर रूस शिपिंग पर ज़्यादा खर्च करेगा, तो उसके पास युद्ध के लिए कम संसाधन बचेंगे, लेकिन ट्रंप टीम इस अप्रोच पर शक कर रही है।

मौजूदा स्थिति: रूस का तेल तीन हिस्सों में बंटा हुआ है

फिनिश ऑर्गनाइज़ेशन CREA के एक एनालिसिस के मुताबिक, रूस अपना कच्चा तेल कई चैनलों से ट्रांसपोर्ट करता है। लगभग 44% उसके बैन वाले “शैडो फ्लीट” द्वारा, 18% बिना बैन वाले “शैडो जहाज़ों” द्वारा, और 38% G7-EU या ऑस्ट्रेलिया से जुड़े टैंकरों द्वारा हैंडल किया जाता है। समुद्री डेटा से पता चलता है कि रूस, ईरान और वेनेजुएला से बैन वाले तेल को ट्रांसपोर्ट करने में 1,423 जहाज़ शामिल हैं, जिनमें से 900 से ज़्यादा पश्चिमी बैन के दायरे में आते हैं।

“‘हम सभी बाबासाहेब के हमेशा आभारी रहेंगे’, पीयूष गोयल समेत कई नेताओं ने किया संविधान निर्माता को याद”

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भारतीय संविधान के निर्माता बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि को ‘ महापरिनिर्वाण दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर देशवासी सुदृढ़, सशक्त और उन्नत भारत के निर्माण में भीमराव अंबेडकर के योगदान को याद कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि हम सभी बाबासाहेब अंबेडकर के हमेशा आभारी रहेंगे।

भीमराव अंबेडकर के ‘महापरिनिर्वाण दिवस’ पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “हम सभी बाबासाहेब अंबेडकर से प्रेरणा लेते हैं, जिन्होंने देश में सामाजिक सद्भाव स्थापित करने, दुनिया का सबसे अच्छा संविधान बनाने, सभी को अवसर प्रदान करने और बेहतर भविष्य के लिए देश को सशक्त बनाने का काम किया। हम इसके लिए हमेशा उनके आभारी रहेंगे।”

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा, “आज बाबासाहेब अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस है, जिनका निधन 6 दिसंबर 1956 को हुआ था। हर साल, संसद परिसर में सामाजिक न्याय मंत्रालय की ओर से एक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, जहां राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री, विपक्ष के नेता और कई अन्य लोग उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।”

रामदास आठवले ने आगे कहा, “बाबासाहेब ने ऐसा संविधान दिया है कि अगर कोई देश तोड़ने की कोशिश करेगा, तो वह खुद टूट जाएगा। बाबासाहेब ने दलितों के लिए सबसे बड़ा काम किया। उनका यह संविधान बहुत ही शक्तिशाली है।”

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, “आज बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस है, जिस दिन उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली थी। उन्हें सम्मान देने के लिए राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा स्पीकर, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, कई मंत्री, सांसद और राहुल गांधी भी मौजूद थे। हम सभी ने बाबासाहेब को गहरे सम्मान के साथ याद किया और श्रद्धांजलि दी।”

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “महापरिनिर्वाण दिवस पर वे डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को स्मरण करते हैं। उनकी दूरदर्शी सोच, न्याय और समानता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता तथा संवैधानिक मूल्यों ने भारत की विकास यात्रा को दिशा दी है।”

उन्होंने आगे कहा, “अंबेडकर ने पीढ़ियों को मानव गरिमा और लोकतांत्रिक आदर्शों को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।” पीएम मोदी ने कामना की कि बाबासाहेब के आदर्श विकसित भारत के निर्माण में आगे भी हमारा मार्ग रोशन करते रहें।