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CG: राज्यपाल श्री डेका ने वीर विनायक दामोदर सावरकर को श्रद्धांजलि दी…

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रायपुर: राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज महान सेनानी, विचारक और क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर  “वीर सावरकर” जी  की पुण्यतिथि पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

उन्होंने राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि वीर सावरकर भारत माता के उन वीर सपूतों में से एक हैं जिनकी बौद्धिक क्षमता, क्रांतिकारी उत्साह और भारत के भविष्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता अतुलनीय रही। वीर सावरकर जी महज एक क्रांतिकारी से कहीं अधिक थे, वे एक गहन विचारक थे जिनके बौद्धिक योगदान को देश भूल नहीं सकता।

इस अवसर पर राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय, उप सचिव सुश्री निधि साहू एवं अधिकारियों-कर्मचारियों ने भी सावरकर जी के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

CG: वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अर्पित की श्रद्धांजलि…

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रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में महान क्रांतिकारी, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि पर उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वीर सावरकर केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी विचारक, समाज सुधारक, ओजस्वी लेखक-कवि और प्रखर इतिहासकार भी थे। उन्होंने भारतीय स्वाधीनता संग्राम को नई वैचारिक ऊर्जा प्रदान की तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए सावरकर जी का त्याग, संघर्ष और अदम्य साहस भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। कालापानी की अमानवीय यातनाओं के बावजूद उनका राष्ट्र के प्रति समर्पण अडिग रहा। उनका संपूर्ण जीवन देशसेवा, आत्मबल और राष्ट्र गौरव का प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वीर सावरकर के विचार आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। हमें उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी,  मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह, श्री राम गर्ग सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

CG: किसान मोर्चा ने की अपने मंडल पदाधिकारियों की घोषणा…

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भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री किरण सिंह देव एवं प्रदेश महामंत्री (संगठन) श्री पवन साय के मार्गदर्शन तथा प्रदेश किसान मोर्चा अध्यक्ष श्री आलोक सिंह ठाकुर के निर्देशानुसार भारतीय जनता पार्टी जिला राजनांदगांव जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत की अनुशंसा से किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष दादू राम सोनकर ने जिले के सभी 16 मंडलों के अध्यक्ष एवं महामंत्रियों की घोषणा की है।

जारी सूची के अनुसार निम्नानुसार नियुक्यिां की गई हैं.

राज. उत्तर मंडल अध्यक्ष खेमलाल साहू, राज. दक्षिण मंडल अध्यक्ष फागुराम साहू, महामंत्री परशुराम प्रजापति महामंत्री चंदू साहू राज. ग्रामीण पूर्व मंडल अध्यक्ष हेमंत साहू महामंत्री दुगेश साहू महामंत्री जितेंद्र साहू राज. ग्रामीण पश्चिम मंडल अध्यक्ष तेजराम देवांगन महामंत्री गोपाल साहू महामंत्री संतोष साहू डोंगरगढ़ शहर मंडल अध्यक्ष राम कुमार डडसेना, महामंत्री अजय शर्मा, अजय दुबे डोंगरगढ़ ग्रामीण मंडल अध्यक्ष हरदेव वर्मा महामंत्री हुम्मन शर्मा, उदय सिन्हा, तिलई मंडल अध्यक्ष निलाभ यदु महामंत्री पुणम देवांगन, संतोष साहू, घुमका मंडल अध्यक्ष राकेश साहू, महामंत्री परस साहू, नूनकण वर्मा, डोंगरगांव मंडल अध्यक्ष खेमुदास साहू महामंत्री यदुराम नायक, श्रवण निषाद, मुसरा-मुरमंदा मंडल अध्यक्ष भीखम राम साहू महामंत्री डिसेन सिन्हा, दिनेश कुमार साहू, तुमडीबोड मंडल अध्यक्ष जितेन्द्र वर्मा महामंत्री कमलेश साहू, छगन पटेल, लाल बहादुर नगर मंडल अध्यक्ष योगेश सोनी महामंत्री गुरूदास साहू, सुखनंदन मंडावी, अर्जुनी मंडल अध्यक्ष प्रीतम साहू, छुरिया मंडल अध्यक्ष टीकम साहू महामंत्री प्रीतम साहू, केदार यादव, गैंदाटोला मंडल अध्यक्ष खेमचंद साहू महामंत्री भरत पटेल, रामपाल साहू, कुमर्दा मंडल अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू महामंत्री दीपक कलामे, गणपत साहू की घोषण की है।

जिलाध्यक्ष दादूराम सोनकर ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि किसान मोर्चा संगठन को और अधिक मजबूत करते हुए किसानों की समस्याओं के समाधान एवं सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएगा।

उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि सभी पदाधिकारी संगठन की रीति-नीति एवं अनुशासन का पालन करते हुए किसान हितों के लिए समर्पित भाव से कार्य करेंगे तथा पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाएंगे।

अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए संगठन की मजबूती के लिए संकल्प लिया। तथा उन्होंने निर्देशित किया की मंडल अध्यक्ष अपनी पदाधिकारियों की नियुक्ति कर जिला कार्यालय में सुची देवंे।

CG: बस्तर से वैश्विक मंच तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई उड़ान…

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अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ किर्सी ह्यवैरिनेन के प्रवास से छत्तीसगढ़ पर्यटन को नई दिशा

सामुदायिक पर्यटन मॉडल एवं यूएन बेस्ट टूरिज्म विलेज मानकों की दिशा में बढ़ते कदम

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में इन दिनों पर्यटन विकास की एक नई और सकारात्मक इबारत लिखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन के छह दिवसीय प्रवास ने राज्य के पर्यटन क्षेत्र को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण गति प्रदान की है। उनका यह दौरा केवल औपचारिक भ्रमण नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय आधारित सतत पर्यटन मॉडल को वैश्विक मानकों से जोड़ने की ठोस रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

दौरे के दूसरे दिन सुश्री किर्सी बस्तर जिले के ग्राम धुड़मारास पहुंचीं, जहां धुरवा डेरा होमस्टे में उनका पारंपरिक ढंग से स्वागत किया गया। सिहाड़ी और महुए की माला पहनाकर तथा धुरवा नृत्य और स्वागत गीतों के माध्यम से ग्रामीणों ने अपनी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की। आत्मीय स्वागत से अभिभूत सुश्री किर्सी ने कहा कि इस प्रकार का अनुभव उनके लिए अत्यंत विशेष और अविस्मरणीय है। यह स्वागत केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि बस्तर की सामाजिक एकजुटता और आत्मीयता का सशक्त परिचय था।

प्रवास के दौरान उन्होंने बस्तर के पारंपरिक एवं जैविक व्यंजनों का स्वाद भी लिया। कलम भाजी, सेमी और बोदई की सब्जी, केले की सब्जी, उड़द दाल, इमली की चटनी, कोसरा भात तथा मंडिया पेज जैसे स्थानीय व्यंजनों से सजी थाली ने उन्हें यहां की जीवनशैली और खाद्य परंपरा से परिचित कराया। वैश्विक पर्यटन परिदृश्य में स्थानीय खान-पान एक प्रमुख आकर्षण बन चुका है और बस्तर की जैव विविधता आधारित खाद्य संस्कृति विदेशी पर्यटकों के लिए विशिष्ट पहचान बना सकती है।

यह प्रवास विशेष रूप से यूनाइटेड नेशन से जुड़े ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम’ के मानकों के अनुरूप धुड़मारास और आसपास के क्षेत्रों को विकसित करने पर केंद्रित है। सुश्री किर्सी धुरवा डेरा होमस्टे में रहकर स्थानीय समुदाय, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और पर्यटन हितधारकों से संवाद कर सेवा गुणवत्ता, स्वच्छता प्रबंधन, डिजिटल प्रचार, ब्रांडिंग और होमस्टे संचालन के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर मार्गदर्शन दे रही हैं। यह भ्रमण जिला प्रशासन तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के समन्वय से आयोजित किया गया है।

प्रवास के दौरान उन्होंने विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात में नौका विहार कर वहां की पर्यटन संभावनाओं का अवलोकन किया और मेंदरी घूमर क्षेत्र में स्थानीय हितग्राहियों के साथ पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने पर चर्चा की। चित्रकोट जलप्रपात पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखता है, किंतु अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ की उपस्थिति इसे वैश्विक प्रचार अभियानों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकती है।

सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन के छह दिवसीय प्रवास का प्रभाव बहुआयामी होगा। एक ओर यह बस्तर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने में सहायक सिद्ध हो सकता है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के स्थायी अवसर भी सृजित करेगा। सामुदायिक पर्यटन को संस्थागत आधार मिलने से आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और सतत विकास की अवधारणा को बल मिलेगा।

कभी नक्सल प्रभाव की पहचान से जुड़े रहे बस्तर की छवि अब प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक समृद्धि के मॉडल के रूप में उभर रही है। यदि धुड़मारास ‘यूएन बेस्ट टूरिज्म विलेज’ मानकों पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ता है, तो यह मॉडल देश के अन्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन का यह प्रवास छत्तीसगढ़ के पर्यटन इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होने की संभावना रखता है, जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा।

CG: हर्बल गुलाल से और भी रंगीली होगी होली…

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विभिन्न रंगों और आकर्षक पैकेजिंग के साथ समूह द्वारा निर्मित हर्बल गुलाल

हर्बल गुलाल से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ी कबीरधाम ज़िले की महिला स्व-सहायता समूह महिला सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। जनपद पंचायत बोडला के ग्राम राजा नवागांव की जय गंगा मैया स्व-सहायता समूह से जुड़ी दीदियों ने रंगोत्सव त्योहार होली के लिए हर्बल गुलाल का निर्माण किया है। महिला समूह ने हर्बल गुलाल के व्यवसाय से जुड़कर आजीविका के नए रास्ते खोले है। इस गतिविधि में 10 महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी है, जो उनके आय का अच्छा स्रोत है। लाल, गुलाबी, पीले सहित अन्य रंगों और प्रकृति खुशबू से भरपूर हर्बल गुलाल बाजार में आने के लिए उपलब्ध है।

कलेक्टर कबीरधाम श्री गोपाल वर्मा ने बताया कि प्रत्येक वर्ष होली के अवसर पर जिले की विभिन्न महिला समूह द्वारा हर्बल गुलाल का निर्माण किया जाता है। कलेक्टोरेट, सभी जनपद पंचायत कार्यालय एवं अन्य स्थानों पर उनके द्वारा स्टॉल लगाकर हर्बल गुलाल की बिक्री की जाती है। समूह की दीदियों द्वारा बनाए गए गुलाल पूरी तरह से प्राकृतिक होने के साथ-साथ बाजार में मिलने वाले अन्य रंगों की तुलना में सस्ता होता है। हर्बल गुलाल की पैकेजिंग बहुत आकर्षक है और यह उपहार देने के भी बहुत अच्छा है। हर्बल गुलाल अनेक रंगो के साथ अलग-अलग मात्रा में पैकेजिंग सहित उपलब्ध है। गतवर्ष भी हमने देखा है कि समूह की दीदियों द्वारा बनाए गए हर्बल गुलाब को क्षेत्रवासियों ने बहुत पसंद किया है और इस व्यवसाय से जुड़कर हमारी ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही है।

जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि प्रत्येक वर्ष बहुत से समूह इसका निर्माण करते है। प्रत्येक समूह को इस व्यवसाय द्वारा 50 से 60 हजार रुपए का लाभ हो जाता है। हर्बल गुलाल की अच्छी गुणवत्ता और आकर्षक पैकिंग सभी को पसंद आती है। योजना से जुड़े मैदानी कर्मचारियों द्वारा समूह को मौसमी व्यवसाय करने के लिए प्रेरित करते हुए हर्बल गुलाल का निर्माण करने प्रोत्साहित किया जाता है। इसके निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल की उपलब्धता के लिए समूह को सहायता प्रदान की जाती है।

हर्बल गुलाल के कई फायदे

हर्बल गुलाल प्राकृतिक सामग्री जैसे फूल-पत्तियों आदि से बनाए जाते हैं और त्वचा के लिए यह पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं। इसके साथ हर्बल गुलाल के और भी कई फायदे हैं। हर्बल गुलाल में प्राकृतिक रंग होता हैं और इसके निर्माण में कोई अतिरिक्त मिलावट नही की जाती। हर्बल गुलाल पर्यावरण अनुकूल होता हैं। अन्य रंगों की तरह इसे छुड़ाने में मेहनत नहीं लगती बल्कि पानी द्वारा आसानी से धो कर साफ किया जा सकता है। इससे पानी की बचत भी होती है। हर्बल गुलाल में हानिकारक रसायन नहीं होते और यह त्वाचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। हर्बल गुलाल का निर्माण प्राकृतिक सामग्रियों से होने के कारण शरीर पर एलर्जी नहीं होती। हर्बल गुलाल में प्राकृतिक सुगंध होता है। खुशबू के लिए कोई केमिकल का उपयोग नहीं होने के कारण यह पूरा तरह सुरक्षित है।

CG: एक एकड़ में सवा लाख रुपए का मुनाफा देने वाला पाम ऑयल की खेती…

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किसान मुकेश कमा रहे हैं एक पेड़ से 3 हजार रुपए वार्षिक आय

एक पेड़ से 35 साल तक आय अर्जित किया जा सकेगा

पाम ऑयल उत्पादन में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, आयात पर निर्भरता कम करने तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से संचालित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल – ऑयल पाम योजना महासमुंद जिले के किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इस योजना के माध्यम से किसान अपनी बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर लाखों रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। जिले में इस योजना तहत लगभग 400 किसान लगभग 450 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती कर रहे हैं।

इसी क्रम में सरायपाली भलेसर गांव के उन्नत किसान श्री मुकेश चंद्राकर, जिन्होंने वर्षों से बंजर पड़ी अपनी 33 एकड़ भूमि पर वर्ष 2016 में ऑयल पाम की खेती प्रारंभ की। वे शासन की योजना से पाम खेती के लिए प्रेरित हुए और अपनी पूरी भूमि पर लगभग 1900 पौधे लगाए। योजना के अंतर्गत उन्हें पौध प्रदाय, फेंसिंग, रखरखाव तथा ड्रिप सिंचाई जैसी सुविधाएं अनुदान पर मिला। तीन से चार वर्षों में उत्पादन प्रारंभ हुआ, जो लगभग 35 वर्षों तक लगातार फल देता रहेगा। वर्तमान में श्री चंद्राकर एक पौधे से औसतन 3000 रुपये वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं। प्रति एकड़ लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने पाम पौधों के बीच अंतरवर्तीय फसल के रूप में पहले केले की खेती की, जिससे उन्हें लगभग डेढ़ लाख रुपए का लाभ हुआ। वर्तमान में वे कोको की खेती कर निजी कंपनियों को उत्पाद विक्रय कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। श्री चंद्राकर बताते है कि कम पानी, कम खाद एवं कम कीटनाशक में अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ मिलने के कारण किसानों को पाम की खेती अपनानी चाहिए। श्री चंद्राकर न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि अपने खेतों में दो दर्जन से अधिक लोगों को स्थायी रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं। स्थानीय मजदूरों के अनुसार, पहले रोजगार के लिए भटकना पड़ता था, जबकि अब वर्षभर यहीं नियमित कार्य उपलब्ध हो रहा है।

सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग श्रीमती पायल साव ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य पाम ऑयल उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके अंतर्गत किसानों को अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन एवं विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें उत्पादन एवं विक्रय में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। जिले में पाम ऑयल की खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला का आयोजन भी किया गया। यहां किसानों के रूझान और भूमि की प्रकार को देखते हुए कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने भी किसानों से अधिकाधिक संख्या में पाम की खेती करने अपील की है।

गौरतलब है कि खाद्य पदार्थों, साबुन, शैम्पू, सौंदर्य प्रसाधन तथा औषधि निर्माण में इसका व्यापक उपयोग होता है। ऐसे में जिले में कम लागत, कम श्रम, कम पानी एवं अधिक आय देने वाली पाम खेती किसानों की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। यह पहल फसल चक्र परिवर्तन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हो रही है।

CG: स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग प्रतिबद्ध – श्री अरुण साव…

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उप मुख्यमंत्री ने केमिस्ट के पद पर चयनितों को सौंपे नियुक्ति पत्र

प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली को आधुनिक एवं परिणाममुखी बनाया जाएगा

रायपुर: उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में केमिस्ट के पद पर चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। उन्होंने आज नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर स्थित अपने कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में 10 चयनितों को नियुक्ति पत्र सौंपा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक और प्रमुख अभियंता श्री ओंकेश चंद्रवंशी भी इस दौरान मौजूद थे।

उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव ने नव नियुक्त केमिस्टों को संबोधित करते हुए कहा कि केमिस्टों की संख्या बढ़ने से विभागीय जल परीक्षण प्रयोगशालाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा मैदानी स्तर पर जल की गुणवत्ता की जांच में सहूलियत होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों को शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता और प्रतिबद्धता है। इन नियुक्तियों से विभाग में तकनीकी रूप से दक्ष मानव संसाधन की संख्या बढ़ी है।

श्री साव ने कहा कि पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया से प्रदेश के युवाओं में विश्वास और उत्साह बढ़ा है। युवाओं को उनकी मेहनत और प्रतिभा का उचित प्रतिफल मिल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नवनियुक्त सभी केमिस्ट पूर्ण निष्ठा, अनुशासन और सेवा-भाव के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे तथा विभागीय लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि जल गुणवत्ता की निगरानी में किसी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली को आधुनिक एवं परिणाममुखी बनाया जाएगा।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता श्री ओंकेश चंद्रवंशी ने बताया कि विभाग द्वारा स्वीकृत केमिस्ट के 12 पदों पर व्यापम के माध्यम से चयन प्रक्रिया संपन्न की गई थी। दस्तावेज परीक्षण में 11 अभ्यर्थी पात्र पाए गए, जबकि एक अभ्यर्थी अनुपस्थित रहा। चयनित 11 अभ्यर्थियों में 2 महिला एवं 9 पुरुष अभ्यर्थी शामिल हैं।

CG: विकसित भारत के संकल्प के साथ विकसित छत्तीसगढ़ की ओर तेजी से बढ़ रहा प्रदेश : व्यापार एवं उद्योग के लिए छत्तीसगढ़ में बना है अनुकूल माहौल – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा आयोजित नेशनल ट्रेड एक्सपो 2026 के समापन समारोह में हुए शामिल

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर स्थित बीटीआई मैदान में कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा आयोजित नेशनल ट्रेड एक्सपो 2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि के साथ-साथ व्यापार एवं उद्योग के लिए भी अनुकूल वातावरण बना है, जिसका परिणाम है कि व्यापारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि राज्य में निवेश के लिए आगे आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 का 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का यह तीसरा वर्ष चल रहा है और दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। पहले वर्ष प्रस्तुत बजट का थीम “ज्ञान” था, जिसमें जी का अर्थ गरीब, वाय का अर्थ युवा, ए का अर्थ अन्नदाता किसान और एन का अर्थ नारी था तथा इन सभी वर्गों के विकास पर विशेष फोकस किया गया था। दूसरे वर्ष उसी विकास को गति देने के उद्देश्य से बजट का थीम “गति” रखा गया, जबकि इस वर्ष का बजट थीम “संकल्प” है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मंत्र “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना को आत्मसात करते हुए तैयार किया गया है और पूरे प्रदेश के हित में है। उन्होंने बताया कि इस बजट में विशेष फोकस बस्तर और सरगुजा क्षेत्र पर किया गया है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र केरल राज्य से भी बड़ा क्षेत्र है और प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुंदर है, जिसे धरती का स्वर्ग कहा जा सकता है, लेकिन चार दशक से अधिक समय तक नक्सलवाद के कारण यह क्षेत्र विकास से अछूता रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व तथा हमारे वीर जवानों के अदम्य साहस के कारण नक्सलवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है और छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में नक्सली सक्रिय थे, लेकिन विगत दो वर्षों में हमारे जवानों ने जिस तरह से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी है, उसमें कई बड़े माओवादी मारे गए हैं तथा बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इससे राज्य अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि माओवाद के कारण इन क्षेत्रों में समुचित विकास नहीं हो पाया था, जिसकी भरपाई के लिए अब सरकार इन क्षेत्रों के विकास पर विशेष फोकस कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि सरकार ने अबूझमाड़ और जगरगुंडा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी के लिए बजट में प्रावधान किया है। साथ ही क्षेत्र में कृषि को बढ़ावा देने और फॉरेस्ट प्रोड्यूस के वैल्यू एडिशन पर भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा दोनों संभागों में सैकड़ों प्रकार के वन उत्पाद उपलब्ध हैं, जिनका मूल्य संवर्धन कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह बजट पूरे छत्तीसगढ़ के विकास के लिए है और प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। राज्य का लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है।

उन्होंने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत 7 करोड़ पेड़ लगाए गए हैं तथा उद्योग नीति के तहत काटे जाने वाले पेड़ों की भरपाई भी बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण से की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प लिया है और उसी के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण भी आवश्यक है। इसके लिए राज्य सरकार ने विस्तृत विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान जीएसडीपी दर को आने वाले पांच वर्षों में दोगुना करने तथा वर्ष 2047 तक राज्य का जीएसडीपी 75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है। नई उद्योग नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और विभिन्न बड़े शहरों में आयोजित इन्वेस्ट मीट के माध्यम से अब तक प्रदेश को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से कई परियोजनाओं पर धरातल पर कार्य प्रारंभ हो चुका है। इनमें सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में व्यापारी बंधुओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्होंने नेशनल ट्रेड एक्सपो के सफल आयोजन के लिए कैट की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ट्रेड एक्सपो में विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया तथा कैट द्वारा प्रकाशित स्वदेशी पोस्टर का विमोचन भी किया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के चेयरमैन श्री सुनील सिंघी, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अमर परवानी सहित कैट छत्तीसगढ़ के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारीगण तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

Ramadan 2026: सहरी से इफ्तार तक.एक रोज़ेदार की 24 घंटे की कैसी होती है लाइफ?

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Ramadan 2026: रमज़ान का पवित्र महीना चल रहा है. मुसलमानों के लिए यह महीना इबादत, सब्र, आत्मसंयम और रहमत का महीना है. इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूरे महीने में की गई इबादत का सवाब (पुण्य) बाकी महीनों में की गई इबादतों से अधिक मिलता है.

रमज़ान में रोज़ेदार भूखे-प्यासे रहकर रोज़े रखता है. रमज़ान में में रोज़ा रखना इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक बताया गया है.

इस्लामिक जानकारों के अनुसार, रमज़ान केवल भूखे-प्यासे रहने का महीना भर नहीं है, बल्कि यह महीना आत्मशुद्धि और नेकी बढ़ाने का माह माना जाता है. रमज़ान में सिर्फ सहरी और इफ्तार भर नहीं होता है, बल्कि इस पूरे महीने रोज़ेदार हर चीज को लेकर संयम बरतता है और इस महीने के रहन-सहन को पूरे साल अपनाने का वादा करते हैं. ये भी मान्यता है कि रोज़ा रखने वाले शख्स को सिर्फ अपनी भूख और प्यास पर कंट्रोल नहीं करना होता है बल्कि न अपने मुंह से कोई गलत बात कहनी होती है, न गलत बात सुननी होती है और न ही किसी तरह का कोई गलत काम करना होता है. यहां तक कि किसी के बारे में बुरा सोचना और किसी को बुरी नजर से देखने की भी पाबंदी होती है. यानी मोटे तौर पर कहा जाए तो जो मान्यता है, उसे अगर पूरी तरह कोई माने तो समझ लीजिए वो बेहतर इंसान की बन जाता है. कुछ पॉइंट्स के जरिए समझते हैं कि रमज़ान के दौरान 24 घंटे रोज़ेदार की जिंदगी कैसी होती है?

रोज़ेदार की 24 घंटे की दिनचर्या

सहरी: रोज़ेदार 24 घंटे में भोर में सूर्योदय (फज्र की नमाज) से लगभग एक घंटा उठकर भोजन (सहरी) करते हैं. इसके बाद सूर्यास्त तक वह बिना पानी-खाने के रहते हैं और रोजा रखते हैं. इस दौरान वह कुरान, नमाज की पाबंदी करते हैं और अल्लाह से दुआ मांगते हैं.

रोजा: रोजे के दौरान रोज़ेदार भोजन ही नहीं, बल्कि पेय, धूम्रपान और बुरे कामों से पूरी तरह से बचते हैं.

इबादत: रोज़ेदार पांच वक्त फज्र, जोहर, असर, मगरिब, इशा की नमाज पढ़ते हैं. कुरान पढ़ते हैं. इस पाक महीने में रोज़ेदार अल्लाह से अपने किए गए गुनाहों की मांफी मांगते हैं. साथ ही इस महीने में एक खास नमाज तारावीह भी पड़ी जाती हैं, जो इशा की नमाज के बाद होती हैं.

इफ्तार: सूर्यास्त के बाद मगरिब की अजान के साथ रोज़ेदार रोजा खोलते हैं. इसे ही इफ्तार करना कहा जाता है. यानी दिनभर भूखा-प्यासा रहने के बाद लोग अच्छे से खाते-पीते हैं. खाने-पीने के बाद जबतक कोई व्यक्ति आराम करने का सोचता है तब तक दिन की आखिरी नमाज का वक्त हो जाता है और ये नमाज आम नमाज से अलग और बड़ी होती है.

तरावीह: रात में करीब 8 बजे या इसके बाद से इशा की नमाज होती है. इस नमाज में तो पूरे साल की तरह 15-20 मिनट ही लगते हैं लेकिन इसके साथ तुरंत ही रमजान में पढ़ी जाने वाली तरावीह नमाज भी पढ़ी जाती है. इस नमाज में कुरान का पाठ किया जाता है. आमतौर पर डेढ़-दो घंटे इसमें लग जाते हैं. इमाम कुरान पढ़ते हैं और नमाजी उनके पीछे खड़े होकर सुनते हैं. यानी दिनभर रोज़े की थकान के बाद रात में ये एक बड़ी नमाज होती है. इस नमाज के बाद आमतौर पर सोते-सोते रात के 11-12 बज जाते हैं. फिर सुबह 4 बजे से सहरी के लिए जगना शुरू हो जाता है. महिलाओं के लिए ये महीना और भी चुनौतीपूर्ण रहता है. एक तो बिना नमक-मिर्च चेक किए उन्हें खाना बनाना पड़ता है. उनका काफी वक्त किचन में गुजर जाता है क्योंकि रमजान में आमतौर पर कई तरह की डिश बनती हैं. दूसरी तरफ, घर के बाकी काम और बच्चों को भी संभालना होता है. अगर कोई महिला वर्किंग हो तो उसके लिए और ज्यादा मुश्किल हो जाती है.

दान-पुण्य और नेकी का काम: इस पवित्र महीने में रोज़ेदार दान करते हैं. जरूरतमंदों की मदद करते हैं. नेकी यानी अच्छा काम करते हैं. आत्म-अनुशासन पर विशेष जोर देते हैं. इस्लाम धर्म में जकात (दान) देना हर संपन्न व्यक्ति के ऊपर फर्ज है, हर साल रमजान के दौरान अपनी कुल कमाई का कम से कम 2.5 फीसद मुसलमानों को दान में देना ही होता है.

टिकट के लिए होड़ और 5 सीटों पर जीत की उम्मीद. कांग्रेस के लिए कितनी कठिन है राज्यसभा की राह?

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16 मार्च को राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव होना है. इसमें कांग्रेस के 5 सांसदों का चुना जाना तय माना जा रहा है. चार सांसद अभिषेक मनु सिंघवी, फूलो देवी नेताम, केटीएस तुलसी और रजनी पाटिल का कार्यकाल खत्म हो रहा है.

ऐसे में 5 मार्च को नामांकन की अंतिम तारीख से पहले टिकट पाने की होड़ मची है. इस बीच आइए जानते हैं कि छत्तीसगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, बिहार, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और असम से ओडिशा तक का सियासी गणित कैसा है.

सबसे पहले बात करते हैं छत्तीसगढ़ की, सत्ता से बाहर होने के बाद इस बार कांग्रेस यहां दो के बजाय एक सीट ही जीत सकती है. ऐसे में उसके सामने आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को रिपीट करने का ऑप्शन है. वहीं ओबीसी नेता भूपेश बघेल और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंह देव की भी इसी सीट पर नजर है. ऐसे में केटीएस तुलसी का रिपीट होना मुश्किल माना जा रहा है.

हिमाचल प्रदेश:

यहां पार्टी एक सीट जीतने की स्थिति में है. ऐसे में लोकसभा चुनाव हारे दो दिग्गज आनंद शर्मा और प्रतिभा सिंह प्रमुख दावेदार हैं. पिछली बार यहां से क्रॉस वोटिंग के चलते अभिषेक मनु सिंघवी चुनाव हार गए थे. इसलिए इस बार बाहरी के बजाय स्थानीय नेता को तरजीह दी जा सकती है.

हरियाणा:

यहां से भी पार्टी एक सीट जीत सकती है. हुड्डा की पसंद की में राजबब्बर, पूर्व अध्यक्ष उदयभान(दलित) हैं, तो वहीं आलाकमान ओबीसी के राष्ट्रीय चैयरमैन अनिल जयहिंद या फिर मीडिया विभाग से पवन खेड़ा या सुप्रिया श्रीनेत को भेजना चाहता है.

महाराष्ट्र:

यहां से महाविकास अघाड़ी के शरद पवार, फौजिया खान और प्रियंका चतुर्वेदी, रजनी पाटिल का कार्यकाल खत्म हो रहा है. एकजुट होकर विपक्ष एक सीट ही जीत सकता है. ऐसे में शरद पवार एनसीपी के विलय की बात साफ कर दें और वो जाना चाहें तो कांग्रेस उनको समर्थन दे देगी. अन्यथा वो अपना उम्मीदवार उतारने पर जोर देगी. ऐसे में वो रजनी पाटिल को रिपीट करना चाहेगी.

तेलंगाना:

यहां से कांग्रेस दो सीटें जीत सकती है. माना जा रहा है कि उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी से किया वादा पूरा कर सकती है. वहीं अभिषेक मनु सिंघवी का रिपीट होना तय है. हालांकि, आंध्र और तेलंगाना की स्थानीय सियासत के चलते आंध्र से आने वाले रेड्डी को तेलंगाना से भेजने पर विरोध के स्वर भी हैं. ऐसे में वहां से किसी अल्पसंख्यक को टिकट मिल सकता है.

तमिलनाडु:

यहां पार्टी डीएमके की मदद से एक सीट जीत सकती है लेकिन डीएमके और कांग्रेस के बीच तालमेल को लेकर तनाव चल रहा है. ऐसे में पार्टी चाहती है कि यहां से राहुल के करीबी प्रवीन चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया जाए लेकिन विजय के साथ तालमेल की वकालत और स्टालिन सरकार को घेरने वाले चक्रवर्ती को स्टॉलिन कतई पसंद नहीं करते. ऐसे में पवन खेड़ा या सुदर्शन रेड्डी की यहां से लाटरी लग सकती है.

बिहार:

यहां से अगर पूरा विपक्ष एकजुट हो और उसे ओवैसी की पार्टी का भी साथ मिले तो वो एक सीट जीत सकता है. मगर, विपक्ष को डर है कि अपनी ताकत और सत्ता के दम पर एक सीट भी उसका जीतना मुश्किल हो जाएगा. उल्टे महज एक सीट के लिए जिस एआईएमआईएम को वो बीजेपी की बी टीम कहता रहा है उससे हाथ मिलाने की तोहमत भी लगेगी. साथ ही विपक्ष को अपने लोगों से ही भितरघात का भी खतरा है.

असम:

यहां भी कमोबेश बिहार जैसी ही हालात है. कांग्रेस यहां एआईयूडीएफ के साथ मिलकर एक सीट जीत सकती है. मगर, चुनाव सिर पर हैं और वो अरसे से एआईयूडीएफ को बीजेपी की बी टीम और हिमंता की साथी बताती आई है. ऐसे में उसका साथ लेना उसे असहज करता है. वहीं हाल में पूर्व अध्यक्ष भूपेन वोरा के बीजेपी में शामिल होने के बाद उसे खुद क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है.

ओडिशा:

यहां कांग्रेस और नवीन पटनायक मिलकर एक सीट जीत सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, दून स्कूल के पटनायक के साथी कमलनाथ इस बावत पटनायक को मना भी सकते हैं. मगर, कांग्रेस और पटनायक के साथ आने पर बीजेपी को दोनों को घेरने का मौका मिलेगा. वहीं, कांग्रेस और बीजेडी में मुख्य विपक्षी दल कौन की लड़ाई कमजोर होगी.

कुल मिलाकर कांग्रेस के पास राज्यसभा के फल कम हैं और उसको खाने की चाहत रखने वाले ज्यादा. वहीं कई जगहों पर सियासी समीकरणों के चलते उसके लिए अंगूर खट्टे साबित हो सकते हैं.