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सामने आई ऐसी तस्वीरें, TMC सांसद नुसरत जहां पहुंची हनीमून पर

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बांग्ला एक्ट्रेस से TMC सांसद बनीं नुसरत जहां राजनीति में कदम रखने के बाद से सुर्खियों में बनी हुई हैं. वो पहले ही दिन अपनी ड्रेस को लेकर ट्रोल हुईं, शादी के बाद मांग में सिंदूर लगाकर और मंगलसूत्र पहनकर नुसरत संसद पहुंचीं, तो कई लोग नाराज हो गए. हालांकि, इन नाराज लोगों को नुसरत ने अपने ही अंदाज में सटीक जवाब भी दिया. वहीं अब नुसरत एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं. वो शादी के लगभग दो महीनों बाद हाल ही में हनीमून मनाने निकली हैं. इस दौरान सोशल मीडिया पर उनकी बेहद खूबसूरत तस्वीरें सामने आई हैं. इन दिनों नुसरत अपने बिजी शेड्यूल से समय निकालकर हनीमून मनाने पहुंचीं. उन्होंने अपने हनीमून की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं. ये खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. खास बात ये भी है कि नुसरत इन तस्वीरों में वेस्टर्न आउटफिट्स में नजर आ रही हैं और हमेशा की तरह स्टाइलिश लग रही हैं. इन तस्वीरों को देखकर मालूम होता है कि वो मालदीव्स में हैं. हालांकि, उन्होंने जगह का खुलासा नहीं किया है.

नुसरत ने अपने हनीमून के दौरान तस्वीरें शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा ‘बेहतर होगा कि आपका सिर बादलों में हो और आपको पता हो कि आप कहां हो.. स्वर्ग जगहों से नहीं बल्कि खूबसूरत पलों, जुड़ाव में, वक्त की चमक में मौजूद होता है’. उन्होंने अपनी तस्वीर के क्रेडिट में पति निखिल जैन का नाम लिखा है.

इस तस्वीर पर उन्हें ढेरों कमेंट्स मिल रहे हैं. हर किसी को नुसरत को ग्लैमसर अवतार पसंद आ रहा है. वहीं कुछ लोगों ने उन्हें कमेंट्स में संसद के कामों की याद भी दिलाई है. हालांकि, अभी नुसरत अपनी छुट्टियां इंजॉय करना चाहती हैं.

बता दें कि नुसरत ने 19 जून को कोलकाता के जाने-माने बिजनेसमैन निखिल जैन से शादी की थी. शादी के बाद वो लाल चूड़ा, मांग में सिंदूर लगाकर और मंगलसूत्र पहनकर संसद पहुंची थीं तो लोग उन्हें देखते ही रह गए थे. जिसके बाद उनके खिलाफ फतवा भी जारी किया गया था. इस फतवे का जवाब देते हुए नुसरत ने कहा था कि ‘मैं सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करती हूं. मैं अब भी मुस्लिम हूं. उन लोगों को इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहिए कि मैं क्या पहनूं और क्या नहीं’.

खाने का ठेका 90 रुपये से कम पर नहीं, मरीजों के भोजन पर नहीं होगा कोई समझौता

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 सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के भोजन का टेंडर 90 रुपये प्रति मरीज से कम नहीं होगा. इस राशि में मरीजों को नाश्ता व भोजन उपलब्ध कराना है. सरकार द्वारा हर भर्ती मरीज को 100 रुपये प्रतिदिन का भोजन उपलब्ध कराना है. मरीज के भोजन पर ठेकेदारों की नजर है.

ठेकेदार सरकार की निर्धारित दर से 40 फीसदी कम दर पर भोजन उपलब्ध कराने की जुगाड़ में रहते हैं. आउटसोर्सिंग एजेंसी के टेंडर को लेकर सिविल सर्जनों ने स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराया है. सिविल सर्जनों का कहना है कि सरकार द्वारा दी जा रही रही राशि से कम राशि में मरीजों को भोजन देने से गुणवत्ता प्रभावित होगी.

60-70 रुपये का ही डाल देते हैं टेंडर

राज्य के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों के पथ्य की

व्यवस्था खुद उसके कैंटीन द्वारा उपलब्ध करायी जाती है. इसमें हर मरीज को 100 रुपये के भोजन उपलब्ध कराने के लिए भोजन सामग्री का टेंडर किया जाता है. सामग्री खरीद के बाद तैयार नाश्ता-खाना मरीजों को दिया जाता है.

सबसे अधिक परेशानी जिलों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से भोजन उपलब्ध कराने को लेकर हो रही है. अस्पतालों में कैंटीन नहीं रहने से राज्य के 36 जिला अस्पताल और 534 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा 55 अनुमंडलीय अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों को आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम भोजन उपलब्ध कराया जाता है. राज्य के इन छोटे अस्पतालों में आउटसोर्सिंग एजेंसी द्वारा 100 रुपये के भोजन की दर 60-70 रुपये का टेंडर

डाल देते हैं. न्यूनतम दर रहने के कारण उस एजेंसी को भोजन उपलब्ध कराने का दबाव रहता है. सिविल सर्जनों द्वारा इस समस्या को स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में ध्यान आकृष्ट कराया गया. विभाग द्वारा इस समस्या के निदान का निर्देश दिया गया है.

एक समान टेंडर होने पर अन्य मानकों की जांच

यह निर्धारित किया गया है कि अब किसी भी आउटसोर्सिंग एजेंसी को न्यूनतम 90 रुपये प्रति मरीज की दर से कम का टेंडर स्वीकार नहीं किया जायेगा.

इसके अनुपालन की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव, सभी सिविल सर्जनों, अधीक्षकों और उपाधीक्षकों को दिया गया है. अब किसी भी एजेंसी को 90 रुपये से कम दर पर टेंडर स्वीकार नहीं किया जायेगा. एक समान टेंडर होने पर स्थानीय सिविल सर्जन अन्य मानकों पर उसकी जांच कर, एजेंसी का चयन करेंगे.

हलाल और धर्म के बीच फंसा Zomato, दी ‘हलाल टैग’ पर सफाई

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ऑनलाइन फूड सर्विस वेबसाइट जोमैटो (Zomato) इन दिनों सुर्ख‍ियों में बनी हुई है. दरअसल, गैर-हिंदू डिलिवरी बॉय से खाना लेने से इनकार करने वाले शख्स को शानदार जवाब देकर उसने देशभर का दिल जीत लिया है. देशभर में जोमैटो के समर्थन में लोग खड़े हैं, जबकि कुछ लोग इसके खिलाफ भी हैं. सोशल मीडिया पर एक ग्रुप जोमैटो के खिलाफ कैंपेन चला रहा है.

दरअसल, कुछ दिन पहले एक यूजर ने ‘गैर हिंदू’ डिलिवरी बॉय से अपना खाना लेने से इनकार कर दिया था. इसके बदले में ऐप ने यूजर को पैसे रिफंड नहीं किए थे. यूजर अमित शुक्‍ला ने इस मामले को लेकर एक ट्वीट किया. उसके जवाब में जोमैटो ने लिखा, ‘खाने का कोई धर्म नहीं होता. खाना खुद एक धर्म है.’ इसके बाद ट्विटर पर कुछ लोग जोमैटो के समर्थन में उतर आए, तो कुछ उसका विरोध करने लगे.

कुछ कस्‍टमर्स ने जोमैटो के खिलाफ पोस्‍ट किया, ‘हलाल मीट की मांग करने वाले यूजर्स को ऐप अच्‍छी प्रतिक्रिया देता है और उनकी मांग को मानता भी है.’ कुछ यूजर्स ने ट्विटर पर स्‍क्रीनशॉट भी शेयर किए, जिनमें जोमैटो ने नॉन हलाल मीट सर्व करने पर कस्‍टमर्स से माफी मांगी थी. गूगल प्‍ले और ऐपल ऐप स्‍टोर पर कई यूजर जोमैटो को एक स्‍टार रेटिंग दे रहे हैं. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर BoycottZomato के साथ इस ऐप का बहिष्‍कार करने की मुहिम भी चलाई जा रही है.

हालांकि, हलाल और नॉन हलाल मीट को लेकर जोमैटो ने अपने ऑफिशयल ट्विटर हैंडल पर बयान शेयर किया है. जोमैटो ने कहा, ”हलाल मीट’ टैग रेस्‍तरां की ओर से लगाया गया है. ये टैग ऐप का नहीं है. रेस्‍तरां हलाल टैग का यूज खुद को अलग दिखाने के लिए करते हैं, ना कि जोमैटो को अलग दिखाने के लिए ऐसा किया जाता है.’

हम केवल जानकारी देते हैं: जोमैटो
जोमैटो ने ट्वीट किया, ‘हम केवल कस्‍टमर को जानकारी देते हैं ताकि वे आसानी से अपनी पसंद चुन सकें. एक ग्रुप के तौर पर ये जरूरी हो जाता है कि हम कस्‍टमर्स को अलग-अलग विकल्‍प दिखाएं. जिससे कस्‍टमर्स अपनी पसंद चुन सकें. 

कंपनी ने ट्वीट किया, ‘रेस्‍तरां को हलाल-सर्व करने का सर्टिफिकेट ऑल इंडिया बॉडी देती है. हम चेक नहीं करते कि मीट हलाल है या नहीं.’ ऐप ने आगे बताया कि एफएसएसआई सर्टिफिकेट रेस्‍तरां के लिए अनिवार्य होते हैं, लेकिन हलाल सर्टिफिकेट अनिवार्य नहीं होता, उसे स्‍वेच्‍छा से लिया जा सकता है.’

क्रिकेटर का नाम जानकर दंग रह जाएंगे आप, इस भारतीय क्रिकेटर ने अपनी ही पड़ोसन से की थी भाग कर शादी

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आज हम आपको उस भारतीय क्रिकेटर के बारे में बताएंगे जिसने अपनी ही पड़ोसन भाग कर शादी की है उस क्रिकेटर का नाम सौरव गांगुली है।

भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तानों में से एक है सौरव गांगुली सौरव गांगुली को अपने ही पड़ोस में रहने वाली लड़की से प्यार हो गया था सौरव गांगुली को जिस लड़की से प्यार हुआ उसका नाम डोना है।

सौरव गांगुली और डोना की प्रेम कथा किसी बॉलीवुड स्टोरी से कम नहीं है जब सौरव के घर वाले शादी के लिए राजी नहीं हुए तो इन्होंने डोना से भागकर कोर्ट मैरिज कर ली शादी के कुछ समय बाद इनके परिवार वाले भी राजी हो गए इसके बाद सौरव गांगुली ने दोबारा पूरे रीति-रिवाजों के साथ डोना से शादी की इनकी शादी एक सफल शादी पाई जाती है।

सौरव गांगुली ने बहुत समय तक भारतीय क्रिकेट की सेवा की है और टीम का सफल नेतृत्व किया है सौरव गांगुली दादा के नाम से पहचाने जाते हैं।

क्राइम : पति ने पत्नी को जुए में दांव पर लगाया, जीत गए दोस्त फिर मिलकर किया गैंगरेप

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यूपी के जौनपुर से पति द्वारा अपनी पत्नी को जुए में दांव पर लगाने की खबर आ रही है. पति पर आरोप है कि उसने जुए में रुपए खत्म हो जाने के बाद अपनी पत्नी को ही दांव पर लगा दिया. इसके बाद पति के दोस्तों ने महिला के साथ गैंगरेप किया. महिला की शिकायत पर जब पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया तो पीड़िता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तब जाकर मामले में कार्रवाई हुई.

कोर्ट ने पहली नजर में मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को गैंगरेप का केस दर्ज करने का आदेश दिया. साथ ही पुलिस को फरमान जारी किया है कि एफआईआर दर्ज कर उसकी कॉपी कोर्ट में सौंप दें.

ये पूरा मामला जफराबाद थाना का है. जहां पीड़ित महिला के पति को जुए की लत थी. एक दिन दोस्तों के साथ जुआ खेलते हुए पति के पास पैसे खत्म हो गए तो उसने अपनी पत्नी को ही दांव पर लगा दिया. दांव पर लगाने के बाद पति के दोस्तों ने महिला के साथ गैंगरेप किया.

महिला ने घटना कि शिकायत जब पुलिस से की तो उन्होंने केस दर्ज करने से मना कर दिया. इससे आहत हो कर महिला अपने मायके रहने चली गई. अब कोर्ट के आदेश के बाद महिला को इंसाफ मिलने की उम्मीद जागी है. 

रामपुर के नवाब खानदान की प्रॉपर्टी का अब क्या होगा?

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उस इमारत के ज़्यादातर कमरे बंद हैं और गलियारों में अंधेरा फैला रहता है. छत पर लगे बर्मा के पैनल चटक और उखड़ रहे हैं. नवाबों की तस्वीरें एक कमरे में पड़ी धूल खा रही हैं. बेल्जियन शीशों से बने झूमरों की चमक खो चुकी है. छज्जों पर चमगादड़ों का बसेरा हो गया है. डायनिंग हॉल के फर्श पर रखी एक फ्रेंच पेंटिंग के पास कोई कॉकरोच मरा पड़ा दिखता है. फर्श से तमाम कालीन उठ चुके हैं. ये रही रामपुर के नवाबी महल की उस इमारत की तस्वीर, जिसे देखकर कभी आखिरी वायसराय माउंटबैटन ने कहा था कि ‘ये तो न्यूयॉर्क के किसी होटल जैसी भव्य इमारत है’. इस इमारत के बाहर अरसे से बोर्ड टंगा है ‘यहां घूमना मना है’.

उत्तर प्रदेश के रामपुर की रियासत अरसे पहले ही उजड़ चुकी है, लेकिन नवाबी खानदान के कुछ लोग अब भी यहां आते जाते रहते हैं और उनमें से गिनती के यहां रहते भी हैं. नवाबी महल और उससे जुड़ी दूसरी इमारतों में नवाबी खानदान के कुछ लोगों के रहने की एक बड़ी वजह रही है, प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा. जी हां, इसी प्रॉपर्टी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला बदलते हुए कहा है कि आखिरी नवाब के बाद जिसे गद्दी सौंपी गई थी, सिर्फ उसका ही नहीं बल्कि नवाब के सभी वंशजों का प्रॉपर्टी पर हक होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ‘ये राजा, सिर्फ नाम के राजा हैं. इनका कोई साम्राज्य रहा और न ही कोई प्रजा’. रामपुर के शाही खानदान में प्रॉपर्टी का क्या झगड़ा रहा? इसके साथ रामपुर के शाही खानदान के बारे में और दिलचस्प बातें भी जानिए. 

आठ भाई बहनों ने किया था दावारामपुर के आखिरी नवाब रज़ा अली खान थे, जिनकी मृत्यु 1966 में हुई थी. रज़ा अली खान की पोती नगहत आबिदी काफी अरसे दिल्ली में रहीं. आबिदी के हवाले से मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ शाही खानदान में कायदा ये था कि नवाब का जो उत्तराधिकारी होगा, संपत्ति का मालिक वही होगा. रज़ा अली खान के बाद आबिदी के पिता मुर्तज़ा अली खान को नवाब की गद्दी सौंपी गई थी. लेकिन, हुआ ये कि 1971 में सरकार में प्रिवी पर्स खत्म कर दिए और रजवाड़ों के बचे-खुचे तमाम ​अधिकार छिन गए. वैसे भी आज़ादी के बाद रजवाड़े सिर्फ नाम के ही रह गए थे.

प्रिवी पर्स खत्म किए जाने के बाद मुर्तज़ा अली खान की नवाब की उपाधि भी खत्म की गई, लेकिन उनकी संपत्ति पर हक नहीं छीना गया. लेकिन, इस तरह के क़ानूनों के चलते मुर्तज़ा के आठ भाई बहनों ने संपत्ति पर हक मांगा. जब नवाबी नहीं रही, तो नवाबी कायदे क्यों रहें? आखिरी नवाब रज़ा अली खान की कोई वसीयत भी नहीं थी इसलिए आठ भाई बहनों ने मुकदमा ठोका और संपत्ति में हिस्सेदारी चाही. 2002 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुर्तज़ा के हक़ में फैसला दिया था कि जिसे गद्दी सौंपी गई थी, संपत्ति उसकी ही रहेगी. जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब संपत्ति का बंटवारा आठ से ज़्यादा हिस्सों में होने की संभावना है. ऐसे में, किसके हिस्से क्या आएगा, ये तो वक़्त की बात है, लेकिन नवाबी खानदान की वर्तमान पीढ़ी रामपुर की प्रॉपर्टी होल्ड करने के बारे में कितना सोच रही है, ये जानने लायक बात है. वर्तमान पीढ़ी के कई सदस्य बरसों से रामपुर छोड़ चुके हैं. आबिदी खुद दिल्ली में रहीं, उनके भाई मोहम्मद अली खान बरसों से गोवा में रहे.

मोहम्मद ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके हक़ में गया यानी प्रॉपर्टी की हिस्सेदारी नहीं हुई तो इस प्रॉपर्टी के साथ बहुत कुछ किए जाने का इरादा था. लेकिन, अब चूंकि फैसला बदल गया है इसलिए इस प्रॉपर्टी को कितना सहेजा जाएगा, कितना इसे हैरिटेज टूरिज़्म में बदला जाएगा या बेच दिया जाएगा, ये अभी कहना जल्दबाज़ी होगी.

नवाबी खानदान के कई लोग देश की आज़ादी के बाद से ही राजनीति में जुड़े रहे हैं और अब भी जुड़े हैं. कोई मंत्री तो कोई विधायक रह चुका है. ऐसे में इस खानदान के कुछ लोग राजनीतिक प्रतिनिधित्व के कारणों से रामपुर में रुकने का मन बना सकते हैं. रही बात नवाबी खानदान की संपत्ति की, तो इमारतों, ज़मीनों, खेतों और ज्वैलरी के रूप में प्रॉपर्टी का बड़ा हिस्सा है.

2014 के लोकसभा चुनाव में इस खानदान के काज़िम अली खान बतौर प्रत्याशी मैदान में थे, तब उन्होंने जो हलफनामा दिया था, उसके हिसाब से वो तब 55 करोड़ की ज़मीनों और तकरीबन 76 लाख की ज्वैलरी के मालिक थे. गौरतलब है कि अदालत में चल रहे प्रॉपर्टी केस में काज़िम अली खान हिस्सा मांगने वाले पक्ष में शामिल हैं.

संक्षेप में जानें रामपुर नवाबों का इतिहास
रामपुर की नवाबी पश्तून से 18वीं सदी में भारत आए रोहिल्ला पठानों के नवाब फैज़ुल्लाह खान ने की थी. बाद में ये रामपुर एस्टेट कला, खानपान और नवाबों के दब्बू या हुकूमत के साथ सहयोगात्मक रवैये को लेकर चर्चाओं में बनी रही. मिर्ज़ा गालिब, बेग़म अख़्तर, तानसेन के वारिसों को यहां पनाह मिलती रही. इस रियासत के लिए दावा किया जाता है क्योंकि यहां भारत की गंगा जमुनी तहज़ीब को सहेजा गया. यहां हमेशा से हिंदुओं और मुसलमानों की तकरीबन बराबर आबादी रही लेकिन कभी कोई बहुत बड़ा दंगा फसाद नहीं हुआ.

मुर्तज़ा अली खान बहादुर और मुराद अली खान बहादुर इस खानदान के आखिरी दो वारिस थे, जिनसे 1971 में नवाबत छीनी गई थी. इसके बाद से ही 200 साल शानो-शौक़त से जगमगाए रामपुर के शाही खानदान के जलवे पर दिनोंदिन धुंधलका गहराने लगा. अब रामपुर के इस नवाबी खानदान के कई महल, इमारत तकरीबन उजड़े या वीरान हैं. नूर महल जैसी कुछ इमारतों में अब भी शाही खानदान के कुछ सदस्य रहते हैं, जिनमें मुर्तज़ा के भाई मरहूम ज़ुल्फिकार अली खान उर्फ मिक्की मियां की बीवी नूर बानो और उनके बेटे ​काज़िम अली खान शामिल हैं.

जानिए कीमत और फीचर्स, महिंद्रा ने बहुत सस्ते में लांच किया ये दमदार स्कूटर

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महिंद्रा ने भारतीय बाजार में दो स्कूटर को अपडेट के साथ उतार दिया है ओर अब इन दोनों ही गस्टो स्कूटर में सीबीएस जैसा फीचर देखने को मिलेगा। कंपनी ने अपने गस्टो 110 और गस्टो 125 स्कूटर में बहुत ज्यादा बदलाव करके इसे उतारा है।

कंपनी ने अब सीबीएस फीचर के साथ महिंद्रा ने गस्टो 110 और गस्टो 125 भारत में नई कीमत के साथ उतारा है। अगर आप नई महिंद्रा गस्टो 110 डीएक्स सीबीएस को खरीदना चाहते हैं तो आपको 50,996 रुपए देने होंगे और जबकि गस्टो 110 वीएक्स सीबीएस के लिए 55,660 रुपए है। नई महिंद्रा गस्टो 125 सीबीएस को 58,137 रुपए की कीमत के साथ बाजार में उतारा है।

भारत सरकार ने सेफ्टी से जुड़ा एक नया नियम लागु किया और इसके बाद सभी कंपनियां नई टू व्हीलर्स में कम्बाइन ब्रेकिंग सिस्टम को दे रही है। इसका माइलज भी अच्छा होने का दावा किया जा रहा है।

RBI ने देश में बैंकिंग सेवाएं देने की दी अनुमति, अब भारत में अपनी सेवाएं देगा ये चाइनीज बैंक

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को बैंक आफ चाइना को देश में नियमित बैंक सेवाएं देने की अनुमति दे दी। केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘हम बैंक आफ चाइना लि. को भारतीय रिजर्व बैंक कानून, 1934 की दूसरी अनुसूची में शामिल करने का परामर्श देते हैं।’

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), एचडीएफसी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और आईसीआईसीआई बैंक समेत सभी वाणिज्यिक बैंक दूसरी अनुसूची में शामिल हैं। इस अनुसूची में आने वाले बैंकों को RBIके नियमों का अनुपालन करना होता है। एक अन्य अधिसूचना में आरबीआई ने कहा कि ‘जन स्माल फाइनेंस बैंक लि.’ को भी दूसरी अनुसूची में शामिल किया गया है।

इसके अलावा रॉयल बैंक आफ स्कॉटलैंड के नाम को बदलकर ‘नेटवेस्ट मार्केट पीएलसी’ किया गया है। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि ‘नेशनल आस्ट्रेलिया बैंक’ को बैंकिंग नियमन कानून के तहत बैंक कंपनी की सूची से हटा दिया है। बैंक को दूसरी अनुसूची से बाहर कर दिया गया है।

उन्‍नाव केस: पार्टी ने कहा-विधायक निष्‍कासि‍त, यूपी BJP अध्यक्ष के बयान से सेंगर पर सस्‍पेंस खत्‍म

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 उन्‍नाव रेप मामले के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के बारे में यूपी बीजेपी अध्‍यक्ष के बयान से एक बार सस्‍पेंस बन गया. हालांकि बाद में पार्टी ने साफ कर दिया कि उन्‍नाव रेप मामले में आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी से निष्‍कासित कर दिया गया है. नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने अपने पहले कानपुर प्रवास के दौरान मीडिया के सामने कहा-कुलदीप सिंह सेंगर अभी पार्टी से निष्काषित नहीं हुए हैं. बाद में उन्‍होंने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि केंद्रीय नेतृत्‍व ने उन्‍नाव विधायक को पार्टी से निष्‍कासित कर दिया है.

गौरतलब है कि गुरुवार दोपहर विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के बीजेपी से निष्‍कासित कर दिए जाने की खबरें सामने आई थीं. इसके बाद देर शाम यूपी बीजेपी ने भी लिख‍ि‍त बयान जारी कर कह दिया कि विधायक को पार्टी से निलंबि‍त कर दिया गया है.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने बार-बार दिया एक ही बयान 
फिलहाल यूपी की सीतापुर जेल में बंद सेंगर के सवाल पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह का कहना था कि सेंगर को 2018 में निलंबित किया गया था और अभी निलंबन ही जारी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ये कार्यवाही महेंद्र नाथ पांडेय के कार्यकाल में की गई थी. क्या कुलदीप को पार्टी से निष्काषित किए जाने का सवाल दोहराए जाने पर उन्होंने कहा कि वे एक ही स्टेटमेंट दे रहे हैं कि “कुलदीप निलंबित चल रहे हैं और अभी सीबीआई जांच चल रही है.”

सीबीआई ने दर्ज कर लिया है केस 
गौरतलब है कि रविवार को रेप पीड़िता की कार में ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिसमें उसकी मौसी और चाची की मौत हुई थी जबकि वह गंभीर रूप से घायल हुई थी. ट्रक-कार की टक्कर के बाद बलात्कार के मामले में पहले से जेल में बंद बीजेपी से सस्‍पेंड विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर हत्या का भी आरोप लगा है. सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज किया है.

जम्मू-कश्मीर में 10,000 जवान भेजने के बाद फिर से भेजे जा रहे 25,000 और जवान

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जम्मू-कश्मीर में 25,000 जवान और भेजे जाने की ख़बर सामने आई है. इससे पहले केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने घाटी में 100 कंपनियों को भेजने की बात कही थी. पैरामिलिट्री फोर्स के इन जवानों को घाटी में और सैनिक भेजने के लिए सरकार की ओर से मौखिक आदेश जारी किए गए हैं. सूत्रों ने बताया है कि सिर्फ पिछले 4 दिनों में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) की 281 कंपनियां जम्मू-कश्मीर में पहुंच चुकी हैं. बता दें कि करीब एक हफ्ते पहले सरकार ने जम्मू-कश्मीर में 10,000 अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की बात कही थी. जिसके बाद से ही जम्मू-कश्मीर में इतनी बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती को लेकर सवाल उठने और कयास लगाए जाने का दौर शुरू हो गया था.

पिछले हफ्ते ही तैनात की गई थी 100 कंपनियां
पिछले सप्ताह सरकार ने 100 कंपनियां तैनात किए जाने के पीछे आतंकवाद विरोधी कार्रवाई को और मजबूती देने की वजह बताई थी. इसमें सीआरपीएफ की 50, बीएसएफ की 10, एसएसबी की 30, आईटीबीपी की 10 कंपनियां तैनात की जाने वाली थीं. बताते चलें कि बुधवार को ही जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अनुच्छेद 35A को हटाने की अटकलों से साफ इंकार कर दिया था. उन्होंने स्पष्ट किया था कि इस तरह की कोई भी योजना नहीं है. 
इस दौरान अमरनाथ यात्रा को भी 4 अगस्त तक के लिए रोक दिया गया है. सरकार का कहना है कि खराब मौसम के चलते ऐसा किया गया है. हालांकि मौसम विभाग ने मौसम में किसी बड़े बदलाव की बात नहीं कही है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि यात्रा की सुरक्षा में लगे कुछ जवानों की भी लोकेशन बदली गई है और उन्हें घाटी में सुरक्षा पर लगाया गया है. अमरनाथ यात्रा में करीब 400 टुकड़ी यानि 40 हजार जवानों की तैनाती की गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घाटी में तैनात जवानों से किसी भी आपात स्थिति से निपटने को तैनात रहने को भी कहा गया है.

सेना प्रमुख बिपिन रावत भी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए गुरुवार को श्रीनगर पहुंचे. वे अगले दो दिन कश्मीर में ही रहेंगे. पिछली बार 10 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती भी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के जम्मू-कश्मीर दौरे से लौटने के बाद की गई थी.