साऊथ इंडस्ट्री में एक से बढ़कर एक खूबसूरत एक्ट्रेस है जिनका पूरा देश दीवाना है आज हम आपको साऊथ की उन एक्ट्रेस के बारे में बताते है जिन्होंने अपनी खूबसूरती से लोगो को अपना दीवाना बना रखा है।
1 नित्या मेनन:साऊथ की खूबसूरत एक्ट्रेस नित्या मेनन काफी खूबसूरत है उन्होंने अभी तक शादी नहीं की है उनकी उम्र 36 साल है लेकिन उन्हें देखके आप उनकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकते।
2 कीर्ति सुरेश :कीर्ति सुरेश ने अपनी एक्टिंग के दम पर अपनी अलग ही पहचान बनाई है वो ऐसी एक्ट्रेस है जिन्होंने अभी तक फिल्मो में कोई बोल्ड सीन नहीं दिया है लेकिन फिर भी वो लाखो फेन्स के दिलो पर राज करती है कीर्ति की उम्र 26 साल है और उन्होंने अभी तक शादी नहीं की है।
3 तमन्ना भाटिया :साऊथ और बॉलीवुड की एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया ने कई फिल्मो में काम किया है उन्होंने अपनी एक्टिंग के दम पर अपनी अलग ही पहचान बनाई है तम्मना काफी खूबसूरत है लेकिन उन्होंने अभी तक शादी नहीं की है तमन्ना के लाखो फेन्स है।
बॉलीवुड सेलेब्स जो भी करें उनकी हर एक हलचल पर नजर होती है. अब हाल में अजय देवगन ने भगवान शिव की पूजा की. वह तो पूजा करने बैठे थे. उन्हें क्या पता था कि एक तस्वीर पर बवाल ही हो जाएगा. दरअसल भगवान शिव के भक्त अजय देवगन ने पूजा के वक्त टीशर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए थे. अब अजय को ये लुक कैजुअल लगा होगा. लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स को ये पसंद नहीं आया.
इंटरनेट पर अजय देवगन को अपने कपड़ों के लिए ट्रोल किया जाने लगा. लोगों की सलाह थी कि मंदिर के लिए ये कपड़े ठीक नहीं थे. अब एक तरफ जहां लोग अजय देवगन को ट्रोल करने की कोशिश कर रहे थे. तो वहीं अजय देवगन के फैन्स उन्हें सपोर्ट करने के लिए बैठे थे. भाटिया नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, तुम नास्तिक लोग बताओगे अब किसको क्या पहनना चाहिए.
ज्यादातर लोगों ने अजय देवगन की तस्वीर पर ‘हर हर महादेव’ लिखा. लेकिन कुछ शरारती लोग ऐसे थे जो इस तस्वीर पर ‘बोलो जुबां केसरी’ लिख रहे थे. प्रोफेशनल फ्रंट पर बात करें तो अजय फिलहाल ‘भुज: द प्राइड इंडिया’ की शूटिंग कर रहे हैं. ये शूटिंग मांडवी में चल रही है. इसी दौरान अजय देवगन श्री नागनाथ महादेव मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे. बस यहीं से कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं.
मध्य प्रदेश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू कर दिया गया है. इसकी घोषणा के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी जल्द से जल्द इस एक्ट को लागू करने की मांग उठने लगी है. जानकारी के मुताबिक स्टेट बार काउंसिल ने इस एक्ट को लागू करने की मांग की है. इस दिशा में पहल नहीं होने पर अधिवक्ता संघ ने आंदोलन की चेतावनी भी दे दी है.
स्टेट बार काउंसिल के चेयरमैन प्रभाकर सिंह चंदेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रैक्टिस करने वालों अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि जल्द से जल्द एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए. इस संबंध में पहले भी राज्य सरकार से कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
उन्होंने कहा कि काउंसिल का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलेगा और उनसे एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग करेगा. जल्द से जल्द इस दिशा में पहल नहीं होने पर काउंसिल के नेतृत्व में प्रदेश के सभी अधिवक्ता संघ और विभिन्न अदालतों में प्रैक्टिस करने वाले करीब 27 हजार अधिवक्ता काम बंद रखते हुए आंदोलन करेंगे. बता दें कि सामान्य सभा की बैठक 13 जुलाई 2019 को आयोजित की गई थी. इसमे कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के बाद राज्य सरकार से इस संबंध में मांग करने का प्रस्ताव पारित किया गया था.
रेलवे यात्रियों के लिए अच्छी खबर, अब रेल यात्रियों को जेनरल टिकट बुकिंग कराने के लिए लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। रेलवे ने हाल ही में एक नई मोबाइल एप्लीकेशन (एप) लॉन्च की है। जिसकी मदद से मोबाइल के जरिए ही जनरल (अनारक्षित श्रेणी) टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट खरीदा जा सकता है। रेलवे की इस एप्लीकेशन का नाम Unreserved Ticketing System है, जिसे शॉर्ट में UTS एप नाम दिया गया है।
एप एंड्रॉइड और आईफोन दोनों तरह के मोबाइल यूजर्स के लिए उपलब्ध है। इससे जहां टिकट काउंटर पर लगने वाली भीड़ से मुक्ति मिल जाएगी, वहीं पेपरलेस मुहिम में मदद मिलेगी। इस एप्लीकेशन का इस्तेमाल करने के लिए GPS को ऑन करना होगा। स्टेशन के आसपास के पांच किलोमीटर के दायरे में टिकट बुक किया जा सकता है। यात्रियों को काउंटर पर लाइन लगाकर अनारक्षित (जनरल) टिकट खरीदने की झंझट से छुटकारा दिलाने के लिए यूटीएस पेपरलेस मोबाइल टिकटिंग ऐप शुरू हो चुकी है। इससे यात्रियों को रेलवे टिकट काउंटर से कुछ दूर टिकट मिल सकेगा।
एक मशहूर कहावत है कि रोजाना “एक सेब खाएं और डॉक्टर से दूरी बनाएं” लेकिन इस कहावत के उलट आपको ये जानकर हैरानी होगी कि एक सेब के अंदर करीब 10 करोड़ बैक्टीरिया मौजूद होती है और इन्हें खाते हुए सावधानी नहीं बरतने से आपकी जान भी जा सकती है। जी हां, फाइबर से भरपूर और हेल्दी एप्पल भी आपको बीमार कर सकते हैं। इन्हें खाते वक्त जरा सी लापरवाही आपके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। तो अगली बार जब आप सेब (Apple) खाएं, तो यह याद रखिए कि आप करीब 10 करोड़ बैक्टीरिया (Bacteria) खाने जा रहे हैं।
हाल ही में सेब पर हुई एक रिसर्च में ये बात सामने आई कि सेब में पाएं जाने वाले बैक्टीरिया हानिकारक या लाभदायक हैं, यह इस बात पर र्निभर करेगा कि सेब का पैदावार किस तरह से की गई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि सेब में अधिकांश बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं लेकिन यह इस पर निर्भर करता है कि आप किस तरह का सेब खाते हैं या सेब आर्गेनिक है या नहीं।
शोधकर्ताओं ने इस बात पर ध्यान दिया है कि जैविक रूप से उगाए गए सेब में परंपरागत रूप से उगाए गए सेब की तुलना विविध प्रकार और संतुलित बैक्टीरिया होते हैं जो उसे स्वास्थ्यकारी और स्वादिष्ट बनाते हैं। एक अध्ययन में परंपरागत रूप से भंडाररित और खरीदे गए सेबों और ताजा आर्गेनिक सेबों के बीच बैक्टीरिया की तुलना की गई। नीचे थोड़ा छितराया हुआ स्टेम, पील, गुदा, बीज और कैलिक्स (पुंजदल) -जहां फूल होता है, का अलग से विश्लेषण किया गया।
कुल मिलाकर यह पाया गया कि परंपरागत और आर्गेनिक दोनों सेबों में बैक्टीरिया की संख्या समान थी। शोध में सामने आया है कि प्रत्येक सेब के घटकों को औसत रूप से एक साथ रखने पर, नुमान लगाया कि 240 ग्राम सेब में करीब 10 करोड़ बैक्टीरिया हैं। अधिकांश बैक्टीरिया बीज में पाए गए और बाकी के अधिकतर फ्लेश में थे। अगर सेब खाते वक्त इसके बीज कोष को हटा दें तो इन बैक्टीरिया की संख्या में 1 करोड़ तक की कमी आ जाएगी।
शोध में बताया गया है कि ताजा और जैविक रूप से प्रबंधित सेबों में परंपरागत रूप से प्रबंधित सेबों की तुलना में महत्वपूर्ण रूप से अधिक विविधता, सम और विशिष्ट बैक्टीरिया का समुदाय पाया जाता है। बैक्टीरिया का विशिष्ट समूह जो स्वास्थ्य पर संभावित रूप से असर डालने के लिए जाने जाते हैं, का भी मूल्यांकन जैविक सेब के पक्ष में किया गया। शोधकर्ताओं ने शोध के दौरान पाया कि बीमार कर देने वाले बैक्टीरियों का समूह ‘इसचेरिचिया-शिंगेला’ परंपरागत रुप से पैदा किए गए सेबों में पाया गया है लेकिन जैविक सेबों में इसकी उपस्थिति नहीं थी।
पृथ्वी पर हर जनजाति का अलग रहन-सहन, खान-पान और परंपरा होती है. लेकिन कुछ ऐसी रहस्यमई जनजाति होती है जो अपने अजीबोगरीब तरीके कारण पूरे विश्व में प्रसिद्ध रहती है. ऐसी ही एक जनजाति के बारे में आज हम बात करेंगे जो पूर्वी अफ्रीका के इथोपिया में रहती है, यह जनजाति विश्व की सबसे खतरनाक जनजाति मानी जाती है. यहां के लोग मानते हैं कि किसी को मारे बिना जिंदा रहने से अच्छा है मर जाना.
सूडान बॉर्डर स्थित ओमान वैली और साउथ कोरिया में इस जनजाति का बसेरा है. यह जनजाति मुर्सी नाम से जानी जाती है जिसकी आबादी लगभग 10000 है.
इस जनजाति की महिलाओं को लेकर एक अजीब परंपरा है, जो चर्चा में रहती है. यहां के लोग मानते हैं कि बुरी नजर से बचने के लिए बॉडी मॉडिफिकेशन करना जरूरी है. इस प्रक्रिया के लिए वह महिलाओं के निचले होंठ में लकड़ी या मिट्टी की डिस्क बना देते हैं.
15-16 साल की लड़कियां के काट देते हैं होंठ
इस कबीले में ‘लिप प्लेट’ के नाम से महिलाओं की बॉडी मॉडिफिकेशन के लिए होंठ काट देते है. यहाँ की महिलाये इस मॉडिफिकेशन के लिए दुनिया भर के पर्यटकों में आकर्षण का केंद्र बनी रहती है. यहां जब लड़की की उम्र 15 से 16 साल की हो जाती है तो उसके होंठ काटने की प्रथा है. यह प्रथा अफ्रीका की मुर्सी, छाई और तिरमा जनजाति में अब भी चालित है.
इसलिए लगाते हैं डिस्क
इस जनजाति के लोग महिलाओं के निचले होठ में डिस्क लगाने के पीछे एक अजीबोगरीब कारण देते हैं. इनका मानना है कि ऐसा करने से महिला की सुंदरता कम हो जाती है, जिस कारण वो कम आर्कषक दिखती है. महिला के बदसूरत होने पर वो गुलाम खरीदने बेचने वाले व्यापारियों से बचाति है. यहां के लोग मानते हैं कि महिला की सुरक्षा के लिए ऐसा किया जाता है.
ऐसे पहनाई जाती है डिस्क
यहां की महिलाओं के साथ मिलकर लड़की की मां लड़की की उम्र 15-16 साल हो जाने पर उस के निचले होंठ को काट देती है. जब तक घाव पकता है तो उसमें एक लकड़ी का टुकड़ा फंसा दिया जाता है, फिर कुछ महीने बाद 12 सेंटीमीटर व्यास की डिस्क लगा दी जाती है, जो जीवन पर्यंत उस लड़की के हॉट में लगी रहती है.
मारने पर मिलती है सुंदर बीवी
यहां के लोग कबीले में सम्मानजनक पोजीशन पाने के लिए एक दूसरे को मौत के घाट भी उतार देते हैं. यहाँ दो लोग आपस में लड़ते हैं और जो जीतता है उसे सुंदर बीवी मिलती है. इस जनजाति के लोग लड़ाई से पहले जानवरों का खून पीते हैं जिससे वो मोटा और ताकतवर बनने का प्रयास करते हैं. यहां पर जब दो इंसान लड़ते हैं तो उनकी हार जीत का फैसला मौत से ही होता है.
सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार पाठक ने बुधवार को फोन से केंद्र व राज्य सरकार की ओर से चलायी जा रही स्वास्थ्य योजनाओं से संबंधित आम नागरिकों के सवालों का जवाब दिया. फोन वार्ता कार्यक्रम सुबह11 बजे से दोपहर 01 बजे तक सिविल सर्जन कार्यालय-कैंप दो में हुआ. लोगों को विभिन्न योजनाओं से लाभ लेने के तरीकों को विस्तार से समझाया गया.
जवाब : आयुष्मान भारत योजना के तहत आप अपने परिवार के सभी सदस्यों के लिए कुल पांच लाख रुपये तक का इलाज एक वित्तीय वर्ष में करा सकते हैं. यह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है. सभी लाल व पीला राशन कार्डधारी इस योजना से जुड़ने के लिए योग्य हैं. मगर ध्यान रहे कि इस योजना का लाभ तभी मिलेगा, जब मरीज अस्पताल में 24 घंटे से अधिक समय के लिए भर्ती होता है. यह योजना ओपीडी (मात्र डॉक्टर से सलाह-मशवरा) लेने पर मान्य नहीं है.
आशुतोष कुमार : आयुष्मान भारत के तहत ऑपरेशन हुआ है, तो क्या पुन: ऑपरेशन करवा सकते हैं?
जवाब : बिल्कुल करवा सकते हैं. आयुष्मान भारत योजना के तहत कुल 05 लाख रुपये केंद्र सरकार सभी लाल व पीला राशन कार्डधारी को इलाज करवाने के लिए दे रही है. अगर आपके कार्ड में पहले ऑपरेशन के बाद भी राशि शेष है, तो आगे भी बिल्कुल इलाज करवा सकते हैं.
दीपक कुमार : आयुष्मान भारत कार्ड कहां बनेगा? इसका हेल्पलाइन नंबर क्या है?
जवाब : आयुष्मान भारत के तहत गोल्डेन कार्ड सभी निबंधित अस्पतालों में मौजूद आयुष्मान मित्रों द्वारा मुफ्त बनाया जाता है. साथ ही सभी प्रज्ञा केंद्र पर भी आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डेन कार्ड बनाया जा रहा है. इस योजना के बारे में कोई भी विस्तृत जानकारी लेने के लिए सरकार द्वारा टॉल फ्री नंबर 18003456540 उपलब्ध है.
जवाब : इस योजना के तहत कुल 26 अस्पताल बोकारो जिले में निबंधित हैं.
जवाब : बोकारो जिले में कुल 3,80,615 गोल्डेन कार्ड निर्गत हो चुका है. साथ ही योजना के तहत कुल 11094 लोगों का मुफ्त इलाज किया जा चुका हैं.
देश भर में 73वां स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को जोर-शोर से मनाने की तैयारियां जारी हैं। लेकिन आपको जानकर हैरत हो सकती है कि मध्य प्रदेश के मंदसौर शहर के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मन्दिर में आजादी का सालाना पर्व बुधवार को ही मना लिया गया।
दरअसल, इंदौर से लगभग 250 किलोमीटर दूर मंदसौर में शिवना नदी के किनारे के इस प्राचीन मंदिर में स्वतंत्रता दिवस हिन्दू पंचांग के आधार पर मनाया जाता है। यह अनूठी परंपरा तीन दशक से भी ज्यादा समय से चली आ रही है।
पशुपतिनाथ मन्दिर के पुरोहितों और यजमानों की संस्था ‘ज्योतिष एवं कर्मकांड परिषद’ के अध्यक्ष उमेश जोशी ने बताया कि 15 अगस्त 1947 को जब देश अंग्रेजी राज से आजाद हुआ, तब हिंदू पंचांग के मुताबिक श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी थी।लिहाजा भगवान शिव के मन्दिर में हर साल इसी तिथि के अनुसार विशेष पूजा-पाठ कर स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने बताया, ‘इस बार यह तिथि (श्रावण कृष्ण चतुर्दशी) आज (बुधवार) पड़ी। लिहाजा हमने अपनी परंपरा के अनुसार पशुपतिनाथ मन्दिर में स्वतंत्रता दिवस मनाया।’
जोशी ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस पर भगवान शिव का विशेष श्रृंगार कर पूजा की गयी। इस दौरान दूर्वा (पूजन में प्रयोग होने वाली खास तरह की घास) के जल से अष्टमुखी शिवलिंग का अभिषेक किया गया और देशभक्ति के नारे लगाते हुए सबकी खुशहाली की प्रार्थना की गई।
उन्होंने बताया कि मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को स्वतंत्रता दिवस मनाने की परंपरा वर्ष 1985 से जारी है।
देश की पहली प्राइवेट ट्रेन को सफल बनाने के मकसद से रेलवे मंत्रालय में चर्चा जारी है. इस बैठक में प्राइवेट प्लेयर ऑपरेटेड ट्रेन के रेवेन्यू मॉडल पर विचार किया गया. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्राइवेट प्लेयर ट्रेन दिल्ली-गाजियाबाद-मुरादाबाद-बरेली-शाहजहांपुर-हरदोई-लखनऊ वाले रूट पर चल सकती है. वर्तमान में मुरादाबाद-बरेली रूट पर इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा नहीं हुआ है. जानकारी के मुताबिक, IRCTC देश की पहली प्राइवेट प्लेयर को तेजस ट्रेन सौंप सकती है. तेजस ट्रेन बेहद शानदार और तमाम आधुनिक सुविधाओं से लैस है.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, लखनऊ दिल्ली रूट पर यह ट्रेन एक दिन छोड़कर चलेगी. ऐसा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि फिलहाल इस रूट पर चल रही इंटरसिटी या डबल डेकर ट्रेन के हितों के साथ टकराव ना हो. माना जा रहा है कि प्राइवेट ट्रेन में ज्यादा स्टॉपेज हो सकते हैं, ताकि हर स्टॉप पर यात्री डिमांड को पूरा किया जाए और प्राइवेट प्लेयर को कमाई भी हो सके.
बैठक में डायनामिक किराये को लेकर भी चर्चा हुई. डायनामिक किराये का मतलब है डिमांड के हिसाब से किराया तय करना. लेकिन, रेलवे इसके पक्ष में नहीं है क्योंकि रेलवे के खुद के लागू किये डायनामिक किराए की व्यवस्था बहुत ज्यादा सफल नहीं रहा है. सूत्रों के मुताबिक, IRCTC 12-14 लाख रुपए रोजाना के हिसाब से लीज पर ट्रेन प्राइवेट प्लेयर को दे सकती है. रेलवे को उम्मीद है कि प्राइवेट प्लेयर से रेलवे को 8-10 लाख रुपए की कमाई हो सकती है.
होते है ये जबदस्त फायदे- 1) शास्त्रों में कहा गया है कि रोजाना अपने से बड़ों के अभिवादन से आयु, यश, विद्या और बल में बढ़ोतरी होती है। यही वजह है कि आज के इस दौर में भी बहुत से लोग रोजाना अपने से बड़ों का पैर जरूर छूते हैं। 2) ऐसा माना जाता है कि पैर के अंगूठे से भी शक्ति का संचार होता है। मनुष्य के पांव के अंगूठे में प्रसारित करने वाली शक्ति होती है और जब कोई व्यक्ति ऐसे में किसी व्यक्ति के पैर छूता है तो इसका सकारात्मक असर व्यक्ति पर पड़ता है। 3) यह एक प्रकार की एक्सरसाइज भी है। अपने से बड़ों के पैर छूने के दौरान आप कसरत की मुद्रा में होते है। रोजाना ऐसा करने से शरीर लचीला भी बनता है। 4) दोस्तों प्रणाम करने का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे हमारे अंदर का अहंकार कम होता है। इन्हीं कारणों से बड़ों को प्रणाम करने की परंपरा को नियम और संस्कार के रूप में दिया गया है।