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हो सकती है बड़े पैमाने पर तबाही, कोलकाता में आ सकता है विनाशकारी भूकंप

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महानगर कोलकाता और आसपास के इलाकों में तगड़े भूकंप के झटके लग सकते हैं. पश्‍चिम बंगाल के कई हिस्सों समेत पूर्वोत्तर में आये कम तीव्रता वाले भूकंपों के झटकों के बाद कोलकाता में भूकंप आने की आशंका बढ़ गयी है. ऐसी आशंका आइआइटी खड़गपुर के भूविशेषज्ञ ने जतायी है. विशेषज्ञों ने कोलकाता के साथ सॉल्टलेक, दक्षिणेश्वर व बरानगर में भूकंप आने की आशंका जतायी है.


उनके मुताबिक भूकंप आया तो बड़े पैमाने पर तबाही हो सकती है. भूविशेषज्ञों के मुताबिक, गत रविवार को पुरुलिया, बांकुड़ा में भूकंप के झटके महसूस किये गये थे, जिनकी तीव्रता कम थी. इससे पहले असम, अरुणाचल, सिलीगुड़ी में भी झटके महसूस किये गये थे.विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे झटकों के बाद बड़े झटके की संभावना बढ़ जाती है.

आइआइटी, खड़गपुर के जियोलॉजी व जियोफिजिक्स के प्रोफेसर शंकर कुमार नाथ के मुताबिक, रविवार को पुरुलिया में आये भूकंप का केंद्र जमीन के 10 किलोमीटर नीचे था. हाल ही में देश भर में आये ज्यादातर भूकंपों का केंद्र जमीन के 10 किलोमीटर भीतर आया है. उनके शोध के मुताबिक, दो महीने के भीतर कोलकाता तथा आस-पास के इलाकों में भूकंप का बड़ा झटका आ सकता है. प्रोफेसर शंकर ने बताया कि भविष्य में भूकंपरोधी निर्माण करने की जरूरत है.

डॉक्टर-अस्पताल और सर्जरी का झंझट खत्म, घर बैठे ठीक हो जाएंगे दिल के मरीज, जिंदगी भर रहेंगे जवान

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बचपन में बच्चे एक दूसरे का कान पकड़ कर जोर से बोलते थे ‘कनमन टू’…इस कनमन टू की अवाज कान से सीधे दीमाग के भीतर जाती थी और झनझनाहट के साथ पूरे शरीर में फुरफुरी छूट जाती थी। यह एक ऐसी गुदगुदी होती थी जिसका अनुभव हर किसी को अच्छा लगता था। बचपन में यह हरकत…शैतानियों में गिनी जाती थी, लेकिन इंग्लैण्ड की लीड्स यूनिवर्सिटी ने एक शोध के माध्यम से कहा है कि कान में गुदगुदी करने से न केवल ज्यादा समय तक जवानी बरकरार रह सकती है बल्कि दिल से लेकर दीमाग तक के गंभीर रोगों से भी मुक्ति मिल सकती है।

लीड्स यूनिवर्सिटी के शोध पत्र में कान की गुदगुदी को वेगस नर्व स्टिमुलेशन कहा है। इस शोध में दावा किया है कान में गुदगुदी करने से ब्लड प्रेशर हार्ट डिसीज के ट्रीटमेंट के अलावा शरीर की आंतरिक नियंत्रण प्रणाली को पुन: व्यवस्थित किये जाने में भी मदद मिल सकती है। इतना ही नहीं कान में गुदगुदी से मेटाबोलिक सिस्टम में भी बैलेंस बनाया जा सकता है। शोध कर्ताओं का कहना है कि यह एक ऐसी थैरेपी है जिसमें न तो दवाओं की जरूरत है और न ही किसी ऑप्रेशन की। इस शोध से जुड़े एक चिकिस्ता वैज्ञानिक बीट्राइस ब्रेदरटन का कहना है कि अभी तक कान में गुदगुदी करने से जो आश्चर्य जनक परिणाम सामने आये हैं वो तो कुछ भी नहीं हैं। यह ऐसी थैरेपी है जिससे जीवन को बिना किसी खास खर्च के जीवन को लंबे समय तक निरोग बनाया जा सकता है। दीमाग के सोचने समझने की क्षमता को और शरीर की क्रियाशीलता को कई गुना तक बढ़ाया जा सकता है।

ब्रेदरटन ने कहा है कि इससे पहले भी कुछ चिकित्सक डिप्रेशन और मिर्गी जैसे रोगों के उपचार में वेगस नर्व के इलेक्ट्रिक स्टिमुलेशन का उपयोग कर चुके हैं।

मिनरल वाटर की चुस्कियां लेकर कभी उसके पीछे लिखा नंबर पढ़ा है..नहीं तो इसे पढ़ें

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पहली बात कभी-कभी हेडलाइन सिर्फ न्योते का लिफाफा नहीं होती कि देखने दौड़ पड़े.. लिफाफा इतना सुंदर है तो नोट भी बड़ा होगा। अरे! पहले हेडलाइन पढ़ो फिर स्टोरी पढ़ो। तभी तो समझ में आएगा कि मामला क्या है। तो आज हम आपको बताएंगे कि जो प्लास्टिक के बोतल, केन और बर्तन आप यूज करते हैं आखिर वो सुरक्षित हैं भी या नहीं।दिमाग मत लगाओ जो हम लिखने वाले हैं उसे मन लगा के पढ़ना।प्लास्टिक के बोतल, केन, बाल्टी, बच्चों के खिलौने सहित प्लास्टिक की सभी चीज पर त्रिभुज के अंदर एक नंबर दिखता है। इसे रेज़ीन आइडेंटीफिकेशन कोड कहते है। ज्यादातर ये तली में नजर आता है। कुछ में अगल बगल भी होता है।इसका मतलब होता है राल। साइंस पढ़े हो तो समझ लो इसे पदार्थ कहते हैं। प्लास्टिक कई पदार्थ से मिलकर बनती है। आइडेंटीफिकेशन कोड बोले तो पहचान का संकेत।

कोडिंग इस लिए आरंभ की गई ताकि रिसाइकिल करने वाले को पता चल सके कि फला प्लास्टिक फला रेज़ीन से बना है। और इसे कैसे रिसाइकिल करना है।वैसे काम की बात बता दें ये कोड कंपनी अपने लिए बनाती है तुम कहीं लीगल यूज मत कर लेना।

रेजीन आइडेंटिफिकेशन कोड 1:इस कोड वाला ‘प्लास्टिक पॉलिमर’ कपड़ा उद्योग में इस्तेमाल होता है। इससे बनने वाले कंटेनर में बाहर की हवा अंदर जा ही नहीं सकती। ठीक वैसे ही जैसे जब मंदिर में भगवान के सोने का समय होता है तो उनके मैनेजर (पुजारी जी की बात कर रहे हैं) हमें घुसने नहीं देते। दरवाजे पर ही रोक लेते हैं.. नो इंट्री टाइप। इससे अंदर रखा भोज्य पदार्थ अपनी अंतिम डेट से पहले खराब नहीं होता। इस तरह के रेजीन का प्रयोग कोल्ड ड्रिंक की बोतल, जार वगैरा में में किया जाता है।इनमें रखा माल एक्सपायरी डेट से एक हफ्ते पहले ही प्रयोग में ले लेना चाहिए वर्ना डाक्टर की जरुरत पड़नी ही है।

रेजीन आइडेंटिफिकेशन कोड 2:ये दूध, पानी, जूस और दवा की बोतलों पर नजर आता है।

रेजीन आइडेंटिफिकेशन कोड 3:अब ये कोड नजर नहीं आता है। स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए ये सबसे बुरा था। लेकिन आज भी इसका प्रयोग जोर शोर से चल रहा है। कहीं नजर आ जाए तो पर्यावरण मंत्री की ट्विटर पर तस्वीर चेप देना बहुत शाबासी मिलेगी। वैसे चीन से आए खिलौनों में इसे आसानी से देखा जा सकता है।

रेजीन आइडेंटिफिकेशन कोड 4: ये कोड ब्रेड, मिठाइयों की पैकिंग टोमेटो केचप की बोतल में नजर आता है।

रेजीन आइडेंटिफिकेशन कोड5:इस कोड को केचप, दही, डब्बाबंद पनीर, स्ट्रॉ, बोतल के ढक्कन, बच्चों की बोतलों पर देखा जा सकता है।आजकल की जो हेलिकॉप्टर मां हैं वो विशेष ध्यान दें। घंटों बच्चे की फीडर खौला के उनको लगता है न कि मैं बड़ी काबिल हूं। तो आज से मान लो तुम डम्बो हो। तुम्हारा ऐसा करना बच्चे के लिए बहुत खतरनाक है। आगे से गर्म मत करना।

रेजीन आइडेंटिफिकेशन कोड 6:ये कोड पैकेजिंग, हेलमेट, डिस्पोजेबल गिलास प्लेट्स में नजर आता है। हम बताएंगे नहीं कि इसके प्रयोग से कौन ही बिमारी होती है। लेकिन माता रानी की कसम अभी से ही खा लो कि डिस्पोजेबल गिलास प्लेट्स में कुछ भी खाना नहीं है।

रेज़ीन आइडेंटीफिकेशन कोड 7:ये जो कोड है ये उसपर नजर आता है जिसके बारे में पता ही नहीं होता कि ये किस प्लास्टिक से बना है।

विशेष तौर पर दिमाग में बैठा लो 1, 3, 6 और 7 कोड वाले प्लास्टिक से बने डब्बों से अपने को और अपनों को बचा कर रखना है।

क्या मशहूर अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने इस्लाम कबूल कर लिया?

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बांग्ला भाषा में रिकॉर्ड किया गया ये वीडियो 27 जुलाई को पोस्ट किया गया था जिसमें ये बताया गया कि जब सुनीता अंतरिक्ष में गईं तो उन्हें दो बिंदु दिखाई दिए. फिर जब सुनीता ने टेलीस्कोप से देखा तो वो मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल मक्का और मदीना थे. वीडियो में आगे दावा किया गया है कि जैसे ही सुनीता अंतरिक्ष से लौटीं तो उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया. इस पोस्ट को अब तक 86 हजार से ज्यादा लोगों ने देखा है और करीब 5500 से ज्यादा लोगों ने साझा किया है.

दावे की पड़ताल

हमने कीवर्ड सर्च के जरिए इस दावे की पड़ताल शुरु की. जब हमने कीवर्ड ‘Sunita Williams converted to islam’ सर्च किया तो हमें इस दावे की सच्चाई पता चलनी शुरू हो गई. इस कीवर्ड के जरिए हमें साल 2010 में ट्रैवल मैगजीन कॉन्डेनेस्ट को दिए सुनीता विलियम्स का एक इंटरव्यू मिला.

इसमें सुनीता से पूछा गया कि ऐसी अफवाहें हैं कि अंतरिक्ष से मक्का-मदीना देखने के बाद आपने इस्लाम कबूल कर लिया है.

सुनीता ने जवाब दिया, ‘मुझे नहीं पता कि ये कहां से शुरू हुआ, ऐसा नहीं कि मैं किसी धर्म को नहीं मानती या मुझे धर्म पसंद नहीं है. मेरे पिता हिंदू हैं. मैं कृष्ण, राम और सीता को समझकर बड़ी हुई हूं. मेरी मां क्रिश्चन हैं जिसका मतलब है कि मैं जीसस को समझती हूं. ये मेरी व्यक्तिगत पसंद है. इसका नासा से कोई लेना देना नहीं है. मेरा मानना है कि भगवान हैं, वो हमें एक खुश और जिंदादिल जिंदगी जीने की प्रेरणा दे रहे हैं, ये मेरी सोच है.’

सुनीता विलियम्स का ये बयान साफ करता है कि उन्होंने मक्का-मदीना वाली कोई चीज कभी नहीं कही थी. कुछ ऐसे ही सवाल 2 अप्रैल 2013 को भी उनसे पूछे गए जब वो भारत आईं थीं. यहां उन्होंने विस्तार से अपनी अंतरिक्ष यात्रा की जानकारी दी.

इंडिया टीवी के साथ एक इंटरव्यू में सुनीता ने बताया था कि वो अंतरिक्ष में अपने साथ गीता और उपनिषद लेकर क्यों गई थीं.

इस्लाम कबूल करने की अफवाह 2008 से ही रह-रहकर उड़ती रही है. पाकिस्तान के एक ब्लॉगर से सबसे पहले ये अफवाह उड़ी थी.

खुद सुनीता के बयानों से साफ है कि उन्होंने कभी इस्लाम कबूल नहीं किया और ऐसा दावा बेबुनियाद है.

स्वभाव से जुड़े राज़ व्यक्ति का ब्लड ग्रुप बताता है…

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आपको अपना ब्लड ग्रुप पता ही होगा। ब्लड ग्रुप सिर्फ यही नहीं बताता है कि आपकी सेहत कैसी ब्लड ग्रुप यह भी बताता है कि आपकी पर्सनलिटी कैसी है उसके बारे में कई सारी जानकारी भी बताता है। शायद ही आप सबको यह पता होगा कि ब्लड ग्रुप आपके व्यक्तित्व, पसंद, काम, जीवन से जुड़ी हर तरह की जानकारी देता है। हम सबको यह पता है कि ब्लड ग्रुप अलग-अलग होता है उसी तरह से हर इंसान का व्यवहार भी अलग होता है।हम किसी के भी व्यक्ति के स्वभाव के बारे में हम उसके ब्लड ग्रुप से पता लगा सकते हैं। चलिए आपको बताते हैं कि आपके ब्लड ग्रुप में कुछ खास बातें।

1. A ब्लड ग्रुप
टाइप ए ब्लड ग्रुप के लोग एक अच्छे रोल मॉडल बनते हैं। क्योंकि इनमें सफलता प्राप्त करने का बहुत जुनुन होता है। इस ब्लड ग्रुप के लोग सबको साथ लेकर चलना पसंद करते हैं। इस ब्लड ग्रुप के लोग स्वभाव से कोमल, रेस्पोंसिबल, सेंसेटिव और जीवन में अच्छे दोस्त साबित होते हैं। इस ग्रुप के लोगों कि खास बात यह होती है कि ये लोग खुद से पहले दूसरों के बारे में सोचते हैं। ऐसे लोग ज्यादा सोचने की वजह से जल्दी तनाव में आ जाते हैं।

2. B ब्लड ग्रुप
टाइप बी ब्लड ग्रुप वाले लोग दूसरों के साथ जल्दी घुल मिल जाते हैं, यानी ये लोग काफी फ्रेंडली होते हैं। इस ब्लड ग्रुप के लोग थोड़ा स्वार्थी होते हैं, क्योंकि ये लोग दूसरों की मदद करने में ज्यादा विश्वास नहीं रखते। बी ब्लड ग्रुप के लोग काफी मेहनती होते हैं. ये लोग जीवन में हर चीज को अपनी मेहनत से ही प्राप्त करना चाहते हैं। इस ब्लड ग्रुप के लोग सच बोलने में विश्वास रखते हैं। ये लोग ज्यादा जिद्दी होते हैं, जो आसानी से किसी बात के लिए नहीं मानते।

3. AB ब्लड ग्रुप
इस ब्लड ग्रुप के लोग ज्यादातर शांत स्वभाव के होते हैं। ये बहुत ही स्मार्ट और इंटेलिजेंट होते हैं। इस ब्लड ग्रुप के लोग आसानी से किसी पर भरोसा नहीं करते। ये लोग बहुते अच्छे और सच्चे दोस्त बनते हैं। ये लोग बहुत साफ दिल के होते हैं। जैसे मन से होते हैं वैसे ही खुद को दर्शाते हैं।

4. O ब्लड ग्रुप
इस ब्लड ग्रुप के लोग बहुत ज्यादा पॉजिटिव और कॉंफिडेंट होते हैं। इस ब्लड ग्रुप के लोगों में एक अच्छा लीडर बनने के सबसे ज्यादा गुण होते हैं। ये लोग बहुत ज्यादा मेहनती होते हैं। इन लोगों में सबसे ज्यादा सफलता हासिल करने का जुनुन होता है। ये लोग दूसरों को खुश रखने में विश्वास रखते हैं। ये लोग अच्छे साथी बनते हैं।

इसे खाने से खत्म हो जाते हैं ये रोग, नाम जानकर हैरान रह जाओगे

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बबुल का पेड़ जिसे स्थानीय भाषा में देशी कीकर कहा जाता है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार इस पेड़ में भगवान विष्णु का निवास माना जाता है।प्राचीन समय में इस पेड की पुजा की जाती थी । इस पेड़ को काटना महापाप माना जाता है। जिस जगह यह पेड होता है वह जगह अत्यंत शुभ मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में यह पेड़ पाया जाता है कि वह घर हमेशा धन धान्य से परिपूर्ण रहता है। यह पेड़ एक मात्र पश्चिमी राजस्थान में पाया जाता है इस पेड़ की गिनती दुर्लभ क्षेणी में होती है ।बबूल का गोद औषधीय गुणों से भरपूर होता है तथा अनेक रोगों के उपचार में काम आता है बबूल की हरी पतली टहनियां दातून के काम आती हैं।बबूल का गोद उतम कोटि का होता है जो औषधीय गुणों से भरपूर होता है तथा सेकडो रोगों के उपचार में काम आता है ।बबूल की दातुन दांतों को स्वच्छ और स्वस्थ रखती है। बबूल की लकड़ी का कोयला भी अच्छा होता है। हमारे यहां दो तरह के बबूल अधिकतर पाए और उगाये जाते हैं। एक देशी बबूल जो देर से होता है और दूसरा मासकीट नामक बबूल. बबूल लगा कर पानी के कटाव को रोका जा सकता है। जब रेगिस्तान अच्छी भूमि की ओर फैलने लगता है, तब बबूल के जगंल लगा कर रेगिस्तान के इस आक्रमण को रोका जा सकता है।

इसके फायदे जानकर चौंक जाएंगे-
1) कमर दर्द में बबूल की छाल, फली और गोंद को बराबर मात्रा में पीस लें। फिर इसकी एक चम्मच मात्रा को दिन में 3 बार सेवन करने से कमर दर्द में राहत मिलती है। सिर दर्द में पानी में बबूल की गोंद घिसकर लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
2) खांसी में बबूल की गोंद को मुंह में रखकर चूसने से खांसी ठीक हो जाती है। यदि शरीर का कोई हिस्सा जल गया हो तो बबूल के गोंद को पानी में घोलकर शरीर के जले हुए हिस्से पर लगाने से जलन दूर हो जाती है। मधुमेह में बबूल के गोंद का पाउडर गाय के दूध के साथ दिन में 3 बार लेने से आराम मिलता है।
3) शारीरिक शक्ति को बढ़ाने के लिए बबूल के गोंद को घी के साथ तलकर उसमे दोगुनु मात्रा में चीनी मिला दें। इसे रोजाना 20 ग्राम की मात्रा को मुंह में रखकर चूसने से शरीर में ताकत का संचार होता है।

रोज सुबह उठकर बासी मुंह इसे पी लो, चेहरे की चमक बढ़ जाएगी कई गुना और बुढ़ापा रहेगा दूर

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चेहरा कई प्राणियों के सिर के सामने वाली ओर पाया जाने वाला भाग है जिसमें कई ज्ञानेन्द्रियां उपस्थित होती हैं, हालांकि हर प्राणी का चेहरा नहीं होता। स्तनधारियों में आमतौर पर मुख पर नाक, कान, मुँह (जिसमें स्वाद-बोध रखने वाली जिह्वा होती है) और आँखें होती हैं। मानव व अन्य स्तनधारी इनसे अपनी भावनाएँ भी प्रकट करते हैं, तथा इसे एक-दूसरे को पहचानने व मौखिक संचार के लिए भी प्रयोग करते हैं।

रोज सुबह उठकर हल्दी वाला पानी पीने से होते हैं। जबरदस्त फायदे, हल्दी वाला गुनगुना पानी पीने दिमाग तेज होता है। रोज सुबह के समय यदि आप हल्दी का गुनगुना पानी पीते हैं। तो इससे खून में होने वाली गंदगी साफ होती है। और दिल की बीमारियों से बचाव होता है।अगर आपके चेहरे पर कील मुंहासे हैं। खुजली होती हो या दाद खाज हो तो आप रोज सुबह खाली पेट गुनगुना हल्दी वाला पानी पीना शुरू कर दीजिये।

दोस्तों लीवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए हल्दी का पानी किसी औषधि से कम नही है। हल्दी का पानी लीवर के सेल्स को फिर से ठीक करता है, हल्दी और पानी के मिले हुए गुण लीवर को संक्रमण से बचाते हैं। हार्ट की समस्या से परेशान लोगों को हल्दी वाला पानी पीना चाहिए। हल्दी खून को गाढ़ा होने से बचाती है। जिससे हार्ट अटैक की सम्भावना कम हो जाती है।
जब आप हल्दी के पानी में नींबू मिलाकर पीते है। तब ये शरीर के अंदर जमा विषैले पदार्थों को निकाल देता है। जिसके पीने से शरीर पर बढ़ती हुई उम्र का असर नजर नही आता है। और बुढ़ापे के लक्षण दूर रहते हैं। हल्दी में फ्री रेडिकल्स होते हैं। जो सेहत और सौन्दर्य को बढ़ाते हैं। इसीलिए हर रोज हल्दी वाला पानी पीने से चेहरे की चमक कई गुना बढ़ जाती है। और झुर्रियां, आँखों के नीचे के काले घेरे धीरे धीरे दूर हो जाते हैं।

जानिए दुनिया की सबसे महंगी चाय के बारे में, भारत की इस पुरानी कंपनी ने बेची 70,501 रुपये की एक किलो चाय

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असम के चाय उद्योग के लिए यह बेहतरीन समय है. मैजान टी एस्टेट की गोल्डन टिप 70,501 रुपये प्रति किलो की कीमत पर पूरे विश्व में सर्वाधिक दामों पर बिकने वाली चाय बन गई है. दुनिया की सबसे पुरानी चाय कंपनी असम कंपनी इंडिया लिमिटेड ने सीजन की सबसे अच्छी गुणवत्ता वाली इस डिज़ाइनर चाय को 31 जुलाई को गुवाहाटी के चाय नीलामी सेंटर में ऑनलाइन नीलामी द्वारा बेचा.केवल एक साल पहले ही खरीदे गए चाय बागान ने “ओल्ड इज गोल्ड ” यानी “जो पुराना है वही अच्छा है” को चरितार्थ करते हुए इस कंपनी को एकदम फायदेमंद स्थिति में ला दिया. गोल्डन टिप चाय ने अभी एक दिन पहले ही 30 जुलाई को मनोहारी गोल्ड टी के बनाए 50,000 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है.

राज्य के 200 साल पुराने चाय उद्योग में हर बार नया रिकॉर्ड बनना एक परंपरा जैसी हो गई है. अभी कल ही के साथ दुनिया की सबसे महंगी चाय बनकर उभरी थी और महज़ 24 घंटों के अंदर ही मैजान टी एस्टेट की गोल्डन टिप चाय विशेषज्ञों के लिए एक नया क्रेज बन गई.

रूढ़िवादी शुद्ध रूप से सुनहरे धागों वाली चाय ने सुबह 31 जुलाई को गुवाहाटी नीलामी सेंटर में हुई नीलामी में 70,501 रुपये प्रति किलो की भारी भरकम कीमत वसूल कर ली.

अपने उत्पाद की सर्वाधिक कीमत मिलना विश्व की सबसे पुरानी चाय कंपनी के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने जैसा है. इस चाय कंपनी को 1839 में रॉयल चार्टर ऑफ़ दी ब्रिटिश एम्पायर द्वारा सम्मिलित किया गया था.

दूसरे फ्लश के दौरान पैदा की गई चाय एक कुटीर उद्योग का उत्पाद है जोकि बहुत दुर्लभ है और यह हाथों से तराशी हुई चाय विशेष तौर पर चाय के चुनिंदा नस्ल के पौधों से बनाई जाती है.सुगंध में अनोखी और स्वाद में कड़क मैजान गोल्डन टिप पीने में सबसे अलग और अनोखे प्रकार का अनुभव देती है. अनूठे पेय पदार्थ जैसा इसका स्वाद देशी चाय के पौधों से आता है जो तकरीबन सौ साल पुराने हैं.

आमतौर पर चाय के पौधे 50 सालों के बाद उखाड़ दिए जाते हैं क्योंकि इनसे मिलने वाली पैदावार कम हो जाती है. मैजान टी एस्टेट ने लगभग 40 किलो गोल्डन टिप चाय उगाई थी जिसमें दो किलो की नीलामी की गई.

यहां इस बात का ज़िक्र करना ज़रूरी है कि अबू धाबी में व्यापार कर रहे पदमश्री बीआर शेट्टी के निवेश की बदौलत असम कंपनी लिमिटेड ने असम के 14 चाय बागान हासिल किए थे.

इन चाय बागानों में से दस बागान असम के चाय बहुल ऊपरी हिस्से में थे जिन्हें कंपनी ने असम चाय की गुणवत्ता सुधरने की पहल के साथ साथ श्रमशक्ति और नए ताज़ा प्रयोगों की कमी से जूझ रहे असम के चाय उद्योग में नए प्राण फूंकने के लिए हासिल किया था.

अपनी डोमोरडोलोंग चाय के लिए जो कंपनी चार्ट में 185 पोजीशन पर थी वह अपनी मदहोश कर देने वाली खुशबू से भरी सीटीसी चाय के चलते केवल एक साल के समय में नंबर वन पोजीशन पर आ चुकी है.

असम के पूरे चाय उद्योग के लिए यह बड़े गौरव की बात है हालांकि यह समय वह है की चाय उद्योग मात्रा पर नहीं बल्कि गुणवत्ता पर अपना ध्यान केंद्रित करे.

अब समय आ गया है कि असम की चाय का स्वाद न केवल चाय प्रेमियों की स्वाद कलियों को गुदगुदाए बल्कि विश्व में अपना एक स्थान भी बनाए. यहां बताना जरूरी है की 750 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष उपयोग के साथ भारत चाय के प्रयोग की इस सूची में सबसे नीचे है.

आधा मानसून सीज़न खत्म, क्या हैं देश में सूखे और बारिश के हालात?

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भारत में जून से सितंबर तक चार महीने मानसून का मौसम रहता है और 31 जुलाई के दिन इस सीज़न के दो महीने पूरे हो चुकने के बाद आइए जायज़ा लेते हैं कि देश में सूखे और बारिश को लेकर क्या हालात हैं. जून में सामान्य से कम बारिश के चलते बेहद खराब हालात रहे थे और देश के कई हिस्सों में सूखे का संकट गहरा चुका था.  जुलाई में इतनी राहत मिल चुकी है कि देश में सूखे का या जलसंकट खत्म हो गया है? जानिए हां, तो कैसे और नहीं, तो अब क्या स्थिति है.

मानसून के पिछले कुछ दिनों में हम देख चुके हैं कि मुंबई समेत गुजरात, बिहार, असम जैसे राज्यों के कुछ हिस्सों में बाढ़ का कहर टूटा. बारिश से आपदा खड़ी हुई, तो क्या ये मान लेना चाहिए कि ज़रूरत से ज़्यादा बारिश हो चुकी है और देश से सूखे का संकट खत्म हो गया है? नहीं, बारिश की ज़रूरत कहां थी और कहां कितनी हुई, ये इस बात पर निर्भर करता है. आइए, पहले बीते दो महीनों में बारिश के आंकड़ों का जायज़ा लेते हैं.

जुलाई में हो चुकी है भरपाई
मौसम विभाग ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उनके मुताबिक 31 जुलाई तक हुई बरसात के बाद देश में जून जुलाई के दो महीनों में होने वाली कुल बरसात से सिर्फ 9 फीसदी कम बरसात हुई है. यानी जून में बरसात की बेरुखी जो देश ने देखी थी, उसकी भरपाई जुलाई में हो गई. बीते एक हफ्ते में यानी 25 से 31 जुलाई के बीच जितनी बारिश देश में हुई है, वह इस हफ्ते के पिछले 50 सालों के औसत से 42 फीसदी ज़्यादा रही है. अगले कुछ समय में भी अच्छी बारिश होने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है.पिछले एक हफ्ते में देश के ज़्यादातर राज्यों में सामान्य या उससे ज़्यादा बारिश हुई है. पिछले हफ्ते में सिर्फ केरल में बारिश की भारी कमी रही. साथ ही, तमिलनाडु, बिहार, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में कुछ कम बारिश हुई. बाकी पूरे देश में बारिश भरपूर हुई. (मौसम विभाग के पिछले हफ्ते की बारिश के नक्शे में पीले और नारंगी रंग में दिख रहे राज्यों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है जबकि हरे रंग में दर्ज राज्यों में सामान्य और नीले रंग में दर्ज राज्यों में सामान्य से ज़्यादा बारिश हुई है.)

सूखे से संबंधित जो ताज़ा डेटा जारी हुआ है, उसके अनुसार बीते 26 जुलाई तक स्थिति ये रही कि देश में 46 फीसदी हिस्सों में सूखे का संकट बना हुआ है. ‘असामान्य रूप से सूखे’ से लेकर ‘भीषण सूखे’ की श्रेणियों में ये 46 फीसदी हिस्सा बंटा हुआ है. ड्रॉट अर्ली वॉर्निंग सिस्टम के मुताबिक़ एक महीने पहले तक 18.03 हिस्से को ‘चिंताजनक सूखे’ की चपेट में दर्ज किया था, जो जुलाई में 19.68 फीसदी हो गया है.

सूखे और जलसंकट से जुड़ी खबरों में चेन्नई सुर्खियों में रहा था. मानसून के दो महीने बीत जाने के बावजूद यहां हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ है. यूएन डिस्पैच की 29 जुलाई की खबर के मुताबिक चेन्नई इस साल ऐसे भयावह जलसंकट की चपेट में बना हुआ है, जितना कभी नहीं था.

दूसरी ओर, सब-नेशनल वॉटर स्ट्रेस इंडेक्स ने हाल में, एक लिस्ट जारी करते हुए भारत के 20 सबसे बड़े शहरों में से 11 को जलसंकट की ‘एक्स्ट्रीम रिस्क’ श्रेणी में रखा है और इनमें से 7 को ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में. इस इंडेक्स के मुताबिक़ दिल्ली, चेन्नई, बेंगलूरु, हैदराबाद, नाशिक, जयपुर, अ​हमदाबाद और इंदौर ‘एक्स्ट्रीम रिस्क’ श्रेणी में शुमार हैं, जहां जलसंकट अब भी भयावह है.

जानिए रोचक जानकारी, क्या सेहत के लिए बेहतर है शाकाहार?, पढ़े पूरी ख़बर

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पशु प्रेम के चलते आज के समय में शाकाहार चलन में है. साल 2008, में यूनाइटेड किंगडम (UK) में 350 फीसदी ऐसे लोग थे जो शाकाहार के फायदे के बारे में लोगों को जागरुक कर रहे थे. शाकाहार के लिए लोगों की वजह अलग अलग हो सकती है लेकिन इसमें कहीं न कहीं पर्यावरण के प्रति प्रेम, धार्मिक विश्वास और पशु प्रेम भी एक कारण है. ज्यादातर लोग स्वस्थ रहने के लिए अच्छी डायट लेना पसंद करते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर ठीक तरीके से साग-सब्जियों का सेवन किया जाए तो यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद है. आइए जानते हैं किस तरह से शाकारी डायट आपकी सेहत के लिए फायदेमंद है.

शुरुआती कुछ हफ़्तों में:
अगर आपने भी शाकाहारी डायट की शुरुआत की है तो शरीर में काफी ऊर्जा और स्फूर्ति का एहसास होता है. इससे आपके शरीर को विटामिन, मिनरल और उचित मात्रा में फाइबर मिलता रहता है. जैसे जैसे समय बीतता जाएगा आप महसूस करेंगे कि इससे आपकी सेहत में काफी सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं और आपको पेट से जुड़ी कई परेशानियों से राहत मिलती जा रही है.

शाकाहारी डायट लेने के कुछ महीने बाद आप यह देखेंगे कि आपके चेहरे पर कील मुहांसे कम होते जा रहे हैं. हालांकि ऐसा सबके साथ नहीं होगा. इस स्टेज पर आपकी बॉडी में विटामिन डी की कमी हो सकती है. इसकी वजह है कि आपने मांसाहार छोड़ दिया है. हड्डियों, दांतों और मसल्स की मजबूती के लिए विटामिन डी काफी आवश्यक है. इसकी कमी से कैंसर, दिल के रोग, माइग्रेन और तनाव जैसे रोग हो सकते हैं.

छह माह से लेकर कई साल बाद तक:
एक साल तक वेज डायट फॉलो करने पर, शरीर में विटामिन डी की मात्रा कम हो सकती है. यह पोषक तत्व रकत के सही बहाव और नर्व सेल (तंत्रिका कोशिकाओं) के ठीक तरीके से काम करने के लिए जिम्मेदार हैं. विटामिन बी-12 अधिकतर एनिमल प्रोडक्ट्स में ही पाया जाता है. इसकी कमी से सांस लेने में तकलीफ, थकान, कमजोर याददाश्त और हाथ और पैरों में कंपकपाहट जैसी समस्या हो सकती है.