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स्वास्थ्य मंत्रा : तेजी से कम करना है वजन, पिएं खीरे का सूप!

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खानपान का हमारी फिटनेस पर काफी प्रभाव पड़ता है. कई बार ठीक तरह से भोजन न कर पाने के कारण मोटापा बढ़ने की समस्या सामने आती है. कई बार ऑफिस चेयर पर बैठे बैठे पेट इतना ज्यादा निकल जाता है जितना कि उस वक्त अंदाजा नहीं होता है. इसलिए बेहतर है कि शुरुआत से ही आप अपने खानपान और बैठे उठने की आदत पर ध्यान दें. मोटापा कम करने के लिए व्यायाम करना तो फायदेमंद है ही साथ ही इसके साथ खानपान में भी कुछ बदलाव करने जरूरी होते हैं. आइए जानते हैं आज कि किस तरह आप खीरे के सूप से कम कर सकते हैं अपना मोटापा…

अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक़, खीरे में कई पोषक तत्व और पानी की प्रचुर मात्रा होती है. इसमें फॉस्फोरस, B-6, राइबोफ्लेविन, मैग्नीशियम, फोलेट, कैल्शियम, जिंक और विटामिन के, विटामिन सी पाए जाते हैं. यह पेट में जाकर बहुत भारी भी नहीं करता हैं और पेट भरा हुआ भी महसूस होता है. यही कारण है कि खीरा खाने के बाद भूख कम लगती है और वजन नियंत्रित रहता है.

खीरा के सेवन से आपकी बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थ पसीने के माध्यम से शरीर से बाहर आ जाते हैं. अगर आप सूप या जूस बनाने की जहमत नहीं उठाना चाहते हैं तो खाने के साथ सलाद के रूप में भी खीरे का सेवन कर सकते हैं. इसमें मौजूद फाइबर पेट साफ़ करने में मदद करता है. खीरे की तासीर काफी ठंडी होती है. आप चाहें तो खीरे के सूप को घर पर भी तैयार कर सकते हैं. इसे भी

इस सूप के सेवन से बॉडी की चया पचया दर बढ़ जाती है जिससे कि पाचन तंत्र बेहतर रहता है और मोटापा भी कम होता है. आप चाहें तो इस सूप में दही, खीरे, सौंफ, पानी, नींबू और भुनी हुई सौंफ का पाउडर डालकर इसे और ज्यादा स्वादिष्ट बना सकते हैं.

केंद्र ने ठुकराई निलंबन रद्द करने की अर्जी, मुश्किलों में निलंबित IPS मुकेश गुप्ता

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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान घोटाले मामले में फंसे निलंबित डीजी मुकेश गुप्ता की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुकेश गुप्ता की निलंबन के खिलाफ दायर अर्जी को खारिज कर दिया है. केंद्र की ओर से ये कहा गया है कि निलंबन के 45 दिन गुजरने के बाद उन्होंने अर्जी की है. अब इस मामले में सुनवाई नहीं की जा सकती.

देर से की अर्जी 

मिली जानकारी के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय से राज्य शासन को एक चिट्‌ठी भेजकर इसकी जानकारी दी गई है. बताया जा रहा है कि मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय से चिट्‌ठी आई है. बता दें कि डीजी मुकेश गुप्ता पर नान घोटाला मामले की जांच में अवैध रूप से फोन टेपिंग का आरोप है और उन्हे निलंबित भी कर दिया गया है. निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से फिर से बहाल करने की मांग की थी. अब केंद्र ने उनकी अर्जी नामंजूर कर दी है. बताया जा रहा है कि अखिल भारतीय सेवा( अनुशासन एवं अपील) के नियम 17 के तहत परीक्षण के बाद केंद्रीय मंत्रालय ने अपील खारिज की है. 

भुगतने पड़ सकते है अंजाम, भूलकर भी न छूएं शरीर के इन अंगों को

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बहुत सारे लोगों को खाली समय में बैठे बैठे अपने आंख, कान, नाक या शरीर के किसी भी अंग को टच करने या खुजलाने की आदत होती है. वह इस बात से अंजान होते हैं कि हमारे शरीर के बहुत सारे अंग ऐसे होते हैं जिन्हें छूना उन्हें भारी पड़ सकता है. इतना ही नहीं इन्हें छूने से इंफेक्शन होने का खतरा भी बना रहता है. लोगों की इस गंदी आदत के वह बीमार भी पड़ सकते हैं. आइए आपको बताते हैं कि शरीर के वह कौन से अंग हैं जिन्हें छूना आपको भारी पड़ सकता है. आपके लिए वो खतरनाक साबित हो सकते हैं.

आंखें

खाली समय में हम में से कई सारे लोगों को आंखों को छूने या मसलने की आदत होती है. कुछ लोगों का हाथ बार बार उनकी आंखों पर चला जाता है. जैसा आप सब जानते हैं कि आंखे बहुत सेंसेटिव होती हैं, जो बहुत आराम से इंफेक्शन को पकड़ सकती है. आंखों को रगड़ते समय हमारे हाथों और नाखूनों में जो कीटाणु होते हैं वह आसानी से आंखों में चले जाते हैं. इसलिए कभी भी आखों को बिना बात के टच करने की गलती न करें.

एनल 

एनल में बहुत ज्यादा मात्रा में बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जिससे शरीर के दूसरे अंगों में इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाता है. एनल को छूना बीमारियों को न्योता देना है. यह सुपर सेंसटिव एरिया है. यह आपको बहुत अधिक बीमार कर सकता है.

नाक

बहुत सारे लोग अपनी नाक को उंगली से साफ करते हैं, पर उन्हें ये नहीं मालूम होता कि इस तरह वह अपनी नाक को साफ करने के बजाय उसे और गंदा कर रहे हैं. आपको बता दें कि नाक को उंगली से साफ करते वक्त आपके हाथों के जरिए कीटाणु नाक में प्रवेश कर लेते हैं. ऐसा करने से नेजल इंफेक्शन और फंगल इंफेक्शन हो सकता है. अगर नाक साफ करनी है तो उसका सबसे सही तरीका है कि आप सेनेटाइजर टिश्यू का इस्तेमाल करें.

मुंह

अपने आस पास आपने बहुत से लोगों को देखा होगा जिन्हें नाखून खाने और मुंह में हाथ डालने की गंदी आदत होती है, लेकिन अगर आप भी उन में से एक हैं तो सावधान हो जाएं. भले ही आपने हाथ अच्छे से साफ कर रखे हों, पर हाथों में बैक्टीरिया स्किन से चिपके होते हैं, जो आपके मुंह में चले जाते हैं और आपको बीमार कर सकते हैं.

इन 23 नामों पर दांव खेल सकती है कांग्रेस, निगम-मंडलों में नियुक्ति पर सस्पेंस बरकरार

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छत्तीसगढ़ में 15 सालों तक सत्ता का वनवास भोगने वाली कांग्रेस पार्टी साल 2018 के अंत में जैसे ही सत्तासीन हुई निगम-मंडल में नियुक्ति को लेकर नेता और कार्यकर्ताओं में उम्मीद जाग गई थी. लेकिन विधानसभा के ठीक बाद लोकसभा चुनाव के चलते निगम-मंडलों में नियुक्तियों को टाला दिया गया. बताया जा रहा है कि अब कांग्रेस की सरकार बनने के करीब सात महीने बाद कांग्रेस ने निगम मंडल में नियुक्तियां तय कर दी है, जिसकी औपचारिक घोषणा भी जल्द कर दी जाएगी. जानकारी के मुताबिक पहली सूची में प्रदेशभर के 23 नामों को शामिल किया गया है. इस पहली सूची में प्रदेश के पांचों संभाग के नेताओं का नाम शामिल किया गया है.

  1. रामगोपाल अग्रवाल- अध्यक्ष- खनिज विकास निगम
  2. डॉ किरणमयी नायक – अध्यक्ष – नागरिक आपूर्ति निगम
  3. शैलेष नितिन त्रिवेदी- अध्यक्ष- गृह निर्माण मंडल
  4. मलकीत सिंह गेंदू – अध्यक्ष – पर्यटन मंडल
  5. एजाज ढ़ेबर- उपाध्यक्ष- पर्यटन मंडल
  6. जितेंद्र मुदलियार – उपाध्यक्ष  पर्यटन मंडल
  7. फूलोदेवी नेताम- अध्यक्ष- महिला आयोग
  8. पंकज शर्मा – अध्यक्ष – मंडी बोर्ड
  9. भवानी शंकर शुक्ल- अध्यक्ष- युवा आयोग
  10. सुरेंद्र शर्मा – अध्यक्ष – बीज निगम
  11. आरपी सिंह- अध्यक्ष- पाठ्य पुस्तक निगम
  12. विकास तिवारी – अध्यक्ष – भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार मंडल
  13. 13.अटल श्रीवास्तव- अध्यक्ष- सीएसआईडीसी
  1. अजय अग्रवाल – अध्यक्ष – वन विकास निगम
  2. जतीन जायसवाल- उपाध्यक्ष- वन विकास निगम
  3. अमरजीत छाबड़ा – उपाध्यक्ष – वन विकास निगम
  4. सफी अहमद- अध्यक्ष- ऊर्दू अकादमी
  5. नरेश डाकलिया – अध्यक्ष – मार्कफेड
  6. महेंद्र छाबड़ा- अध्यक्ष- राज्य भंडार गृह निगम
  7. हर्षद मेहता – अध्यक्ष – वेबरेज कॉर्पोरेशन
  8. दीपक दुबे (रायपुर)- अध्यक्ष- रायपुर विकास प्राधिकरण
  9. विभा साहू – अध्यक्ष – समाज कल्याण बोर्ड
  10. कविता साहू- अध्यक्ष- निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम

राजनीतिक बयानबाजी भी जोरों पर:

कांग्रेस में गुटबाजी की खबरें आती रही है, मगर निगम-मंडल नियुक्ति की सूची से ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि पार्टी आला कमान ने नेताओं के बीच संतुलन साधने की पूरी कोशिश की है. इस पूरे मामले में कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि कांग्रेस आला कमान और मुख्यमंत्री जो भी फैसला लेंगे पार्टी कार्यकर्ताओं को मंजूर होगा. देरी वाली कोई स्थिति नहीं है. जो भी फैसला होगा वो स्वीकार किया जाएगा. वहीं बीजेपी प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव का कहना है कि आंतरिक गुटबाजी कांग्रेस में बढ़ा है. ऐसी स्थिति में निगम-मंडलों में नियुक्ति कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगी. वहीं राजनीतिक विश्लेषक रविकांत कौशिक का मानन है कि सभी को खुश करना पार्टी के लिए एक चुनौती हो सकती है.

छत्तीसगढ़ के मुखिया भूपेश बघेल को मिली नरेन्द्र मोदी सरकार में ये बड़ी जिम्मेदारी

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केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. सीएम बघेल को भारत के मध्य क्षेत्रीय परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया है. भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अन्तर्राज्य परिषद सचिवालय द्वारा इसकी सूचना जारी कर दी गई है. आगामी 7 जुलाई से एक साल तक सीएम भूपेश बघेल के पास ये जिम्मेदारी होगी.

गौरतलब है कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत उत्तर, मध्य, दक्षिण, पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रीय परिषदों का गठन किया गया है.वर्तमान में मध्य क्षेत्रीय परिषद में छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड और मध्यप्रदेश राज्य शामिल हैं. केन्द्रीय गृह मंत्री सभी क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष होते हैं. प्रत्येक क्षेत्रीय परिषद में शामिल राज्य के मुख्यमंत्री को रोटेशन में परिषद का उपाध्यक्ष बनाया जाता है, जिनका कार्यकाल एक वर्ष का होता है.

यूपी सीएम के पास थी ये जिम्मेदारी
बता दें कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मध्य क्षेत्रीय परिषद के उपाध्यक्ष थे, जिनका कार्यकाल बीते 6 जुलाई को समाप्त हो गया है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अब मध्य क्षेत्रीय परिषद के उपाध्यक्ष होंगे. क्षेत्रीय परिषदें संबंधित क्षेत्रों के संतुलित सामाजिक-आर्थिक विकास के साथ ही अंतर राज्यीय समस्याओं को हल करने में परिषद में शामिल राज्यों के बीच और केन्द्र के साथ स्वस्थ्य वातावरण निर्माण में एक उच्च स्तरीय सलाहकार मंच स्थापित करती हैं. 

धोनी को आतंक प्रभावित दक्षिण कश्मीर में मिली ड्यूटी, एमएस धोनी सेना की ‘खतरनाक’ विक्‍टर फोर्स से जुड़े

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टेरिटोरियल आर्मी में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र सिंह धोनी आतंकवाद प्रभावित दक्षिण कश्मीर में बुधवार को सेना के साथ जुड़ गए जहां वह अन्य सैनिकों की तरह गश्त, गार्ड ड्यूटी और बाकी काम करेंगे. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान 15 अगस्त तक 106 टीए बटालियन (पैरा) के साथ रहेंगे और सैनिकों की तरह काम करेंगे. बता दें कि टेरिटोरियन आर्मी मुख्‍य सेना का ही अंग है. यह सेना को स्‍थायर ड्यूटी में मदद करती है और प्राकृतिक आपदाओं और जरूरी सेवाओं को बनाए रखने में मदद करती है. शोपियां-अनंतनाग में तैनात है विक्‍टर फॉर्स 
सेना के अधिकारियों ने कहा, ‘लेफ्टिनेंट कर्नल धोनी यहां पहुंच गए और यूनिट से जुड़ गए.’यूनिट आतंकवाद प्रभावित दक्षिण कश्मीर में विक्टर फोर्स के साथ जुड़ेंगे. धोनी जिस यूनिट से जुड़े हैं वह कश्‍मीर के सबसे ज्‍यादा आतंक प्रभावित जिलों जैसे शोपियां और अनंतनाग में काम करती है. विश्व कप विजेता कप्तान 38 बरस के धोनी के सेना को दो सप्ताह सेवाएं देने के अनुरोध को पिछले सप्ताह सेना मुख्यालय ने मंजूरी दी थी.

धोनी को 2011 में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद रैंक मिली थी. वह क्वालीफाइड पैराट्रूपर भी है और पांच पैराशूट ट्रेनिंग जंप कर चुके हैं. धोनी को भारत का तीसरा उच्चतम नागरिक सम्मान पद्म भूषण मिल चुका है.

विश्व कप में भारतीय टीम के सेमीफाइनल से बाहर होने के बाद धोनी के संन्यास की अटकलें लगाई जा रही थी. धोनी ने दो महीने पैराशूट रेजिमेंट को देने के लिये बोर्ड से ब्रेक मांगा था. वह भारतीय टीम के वेस्टइंडीज दौरे का हिस्सा नहीं है. 
जम्‍मू कश्‍मीर में आतंकवाद बढ़ने के बाद सेना की राष्‍ट्रीय राइफल्‍स का गठन किया गया. इसका मुख्‍य काम आतंक विरोधी ऑपरेशन चलाना है. इस रेजीमेंट में सेना की बाकी सभी रेजीमेंट से जवान कश्‍मीर ड्यूटी के लिए शामिल किए जाते हैं. राष्‍ट्रीय राइफल्‍स की पांच यूनिट है और सभी कश्‍मीर घाटी व जम्‍मू संभाग की अलग-अलग जगहों पर तैनात है.

यह यूनिट इस प्रकार है-
रोमियो फॉर्स- राजौरी और पुंछ में तैनात.
डेल्‍टा फॉर्स- डोडा में तैनात.
विक्‍टर फॉर्स- अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और बड़गाम में तैनात.
किलो फॉर्स- कुपवाड़ा, बारामुल्‍ला और श्रीनगर में तैनात.
यूनिफॉर्म फॉर्स- उधमपुर और बनिहाल में तैनात.

नाम जानकर चौंक जाएंगे आप, पकड़े गए थे संजय दत्त इस अभिनेत्री के साथ होटल के कमरे में

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संजय दत्त बॉलीवुड इंडस्ट्री के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में से एक हैं। उन्होंने अब तक अपने फिल्मी करियर में बहुत से सुपरहिट फिल्में दी हैं। संजय दत्त का जीवन काफी विवादों से घिरा रहा है। आज हम आपको बॉलीवुड की एक अभिनेत्री के बारे में बताने जा रहे हैं, जो एक समय संजय दत्त के साथ होटल के एक ही कमरे में पकड़ी गई थी। तो आइए जानते हैं वह अभिनेत्री कौन है।

संजय दत्त ने अपनी पहली शादी अभिनेत्री रिचा शर्मा से की थी। लेकिन शादी के कुछ साल बाद कैंसर के कारण रिचा शर्मा की मौत हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने अभिनेत्री रिया पिल्लई से दूसरी शादी की थी। इसी दौरान संजय दत्त का नाम बहुत सी लड़कियों के साथ जुड़ा था। खबरों के मुताबिक एक समारोह के दौरान संजय दत्त की मुलाकात अभिनेत्री सुष्मिता सेन से हुई थी। इस मुलाकात के बाद वह दोनों एक दूसरे के काफी करीबी दोस्त बन गए थे। उनकी दोस्ती का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि, वह दोनों एक दूसरे से चोरी छुपे मिला करते थे।

खबर के मुताबिक एक समय सुष्मिता सेन विदेश गई थी। इसी दौरान संजय दत्त उनसे मिलने के लिए लंदन पहुंच गए थे। कहा जाता है कि संजय दत्त सुष्मिता सेन की होटल में उन्हीं के कमरे में रुके हुए थे। इस बात का खुलासा उस वक्त हुआ जब एक रिपोर्टर सुष्मिता सेन का इंटरव्यू लेने उनके रूम तक पहुंच गया था। जब रूम का दरवाजा खुला तो संजय दत्त सुष्मिता सेन का हाथ थाम कर बैठे थे। अगले ही दिन ये तस्वीरें मीडिया की सुर्खियां बन गई थी, जिसके बाद संजय दत्त और उनकी दूसरी पत्नी रिया पिल्लई अलग हो गए। फिलहाल संजय दत्त अपनी तीसरी पत्नी मान्यता दत्त के साथ अपना जीवन खुशी से बिता रहे हैं।

इमरान सरकार ने लिया पाकिस्तान में रोटी-नान सस्ती करने के लिए यह फैसला

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पाकिस्तान में रोटी और नान की कीमतें कम करने के लिए प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार ने सड़क किनारे वाले तंदूरों के लिए गैस दरों में की गयी बढ़ोत्तरी को वापस ले लिया है. नकदी संकट से जूझ रही पाकिस्तान सरकार के गैस दरों को बढ़ाने के फैसले का चौतरफा विरोध हुआ था.

पाकिस्तान विदेशी मुद्रा भंडार की कम आपूर्ति और गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है. इसी महीने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान को तीन वर्ष में छह अरब डॉलर का ऋण मुहैया कराने पर सहमति जतायी है. ताकि देश की अर्थव्यवस्था को सतत वृद्धि के रास्ते पर वापस लाया जा सके और लोगों की आजीविका का स्तर सुधारा जा सके.

पाकिस्तान में कई कड़े सुधार शुरू
पाकिस्तान ने कड़े आर्थिक सुधार शुरू किए हैं. इनमें पेट्रोल, गैस और अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ाए हैं. इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ा है. प्रधानमंत्री खान की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक समन्वय समिति की बैठक में तंदूरों के लिए गैस की पुरानी दरों को लागू करने का निर्णय किया गया. यह निर्णय देशभर में नान और रोटियों की कीमत को कम रखने के लिए किया गया है.

मौजूदा समय में देश के विभिन्न शहरों में नान की कीमत 12 से 15 रुपये तक है, जबकि गैस और आटे का दाम बढ़ाए जाने से पहले नान की कीमत 8 से 10 रुपये के बीच थी.सरकार का कहना है कि देशभर में एक विस्तृत सर्वेक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गैस दरों में कमी का लाभ लोगों तक पहुंचे.

आज जारी होगी PM-किसान की तीसरी किस्त, किसानों के बैंक अकाउंट में आएंगे 2-2 हजार रुपये

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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम की तीसरी किस्त आज से जारी होनी शुरू हो जाएगी. यह इस साल की अंतिम किस्त होगी. अब तक देश के 6 करोड़ 15 लाख किसानों के बैंक अकाउंट में पहली और दूसरी किस्त के 2-2 हजार रुपये भेजे जा चुके हैं. स्कीम की शुरुआत 24 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी के गोरखपुर से की थी. उसी दिन पहली किस्त भेजी गई थी, जबकि मार्च में दूसरी किस्त जानी शुरू हुई लेकिन लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद गति धीमी हो गई थी. इस स्कीम के तहत सीधे किसानों के अकाउंट में 87 हजार करोड़ रुपये भेजे जा रहे हैं.

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक इस समय सिर्फ 5.58 करोड़ किसानों को पहली और 3.41 करोड़ को दूसरी बार पैसा मिला है. जबकि देश में 14.5 करोड़ किसान परिवार हैं. राज्य सरकार के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से ज्यादातर किसान मोदी सरकार की इस स्कीम से अभी वंचित हैं. कई राज्यों में किसानों को राजनीतिक वजहों से अभी तक पैसा नहीं मिल सका है. दोनों सरकारों ने अपने यहां के किसानों के नाम केंद्र सरकार को नहीं भेजे. जबकि केंद्र सरकार पैसे देने को तैयार बैठी है.

लोकसभा चुनाव से पहले जब यह स्कीम शुरू हुई थी तो इसके लिए सिर्फ लघु एवं सीमांत किसान योग्य थे. लेकिन चुनाव बाद सरकार ने इसे बढ़ाकर सभी 14.5 करोड़ किसानों के लिए लागू कर दिया. इसलिए इसका साल भर का बजट 75 हजार करोड़ से आगे बढ़ गया. मोदी सरकार को उम्मीद है कि इस स्कीम के तहत सालाना 6-6 हजार रुपये पाने से किसानों की स्थिति बेहतर होगी. छोटे किसान खेती के लिए कर्ज लेने पर मजबूर नहीं होंगे और उनकी आय बढ़ेगी. 

कुछ किसानों पर शर्त लागू

केंद्र सरकार ने सभी किसानों के लिए स्कीम लागू कर दी है फिर भी कुछ शर्तें लागू हैं.

>>एमपी, एमएलए, मंत्री और मेयर को भी लाभ नहीं दिया जाएगा, भले ही वो किसानी भी करते हों.>>केंद्र या राज्य सरकार में अधिकारी एवं 10 हजार से अधिक पेंशन पाने वाले किसानों को लाभ नहीं.

>>पेशेवर, डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, वकील, आर्किटेक्ट, जो कहीं खेती भी करता हो उसे लाभ नहीं मिलेगा.

>>पिछले वित्तीय वर्ष में इनकम टैक्स का भुगतान करने वाले इस लाभ से वंचित होंगे.

>>हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार के मल्टी टास्किंग स्टाफ/चतुर्थ श्रेणी/समूह डी कर्मचारियों लाभ मिलेगा.

अगर आपको इस स्कीम का लाभ नहीं मिल रहा है तो कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन करवाइए. लेखपाल से संपर्क करिए. वह वेरीफिकेशन करेगा कि आप किसान हैं या नहीं? सभी ब्लाकों पर भी एंट्री हो रही है. इसके लिए रेवेन्यू रिकॉर्ड, बैंक अकाउंट नंबर, मोबाइल नंबर देना होगा.

अगर आप इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र हैं और कोई अधिकारी आपका नाम इसमें शामिल नहीं कर रहा है तो सबसे पहले अपने राज्य के जन सुनवाई पोर्टल पर उसकी शिकायत करें. वहां से भी सुनवाई न हो तो केंद्रीय कृषि मंत्रालय के किसान हेल्प डेस्क (PM-KISAN Help Desk) को ई-मेल Email (pmkisan-ict@gov.in) करें.

वहां से भी न बात बने तो इस सेल के नंबर 011-23381092 (Direct HelpLine) पर फोन करके अपनी समस्या बता दें. इसके लिए कृषि मंत्रालय के किसान कल्याण सेक्शन के फोन नंबर 011-23382401 पर भी संपर्क किया जा सकता है.

जानिए आखिर क्‍यों जिंदगी भर दुनिया से अपना बायां हाथ छिपाती रहीं मीना कुमारी

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भारत की सबसे बेमिसाल अदाकारा मीना कुमारी की कहानी आज भी तैरेंगी. आज के ही एक अगस्त 1933 को मीना कुमारी का जन्म हुआ था. जब उनकी महज 19 साल की थी तभी लेखक-डायरेक्टर कमाल अमरोही से उनकी शादी हो गई. लेकिन उनके पति ने उन पर इतनी निगरानी की, मौके-बे-मौके उनसे मारपीट और गाली-गलौज भी किया. उनकी जिंदगी में धर्मेंद्र, अशोक कुमार, गुलजार जैसी हस्तियों का नाम जुड़ता रहा. महज 39 साल की आयु में 31 मार्च 1972 को दुनिया से चल बसीं. मीना कुमारी के बारे में लिखी-पढ़ी जानी वाली कहानियों में इस बात का जिक्र कम ही मिलता है कि उन्होंने जिंदगी भर लोगों से अपना बायां हाथ क्यों छिपाए रखा.

मीना कुमारी की मुड़ी उंगली की कहानी
मीना कुमारी के बायें हाथ की सबसे छोटी उंगली मुड़ी हुई थी. इसके पीछे की कहानी एक इंटरव्यू में कमाल अमरोही के बेटे ताजदार अमरोही बताते हैं. वे बताते हैं कि 21 मई 1951 को मीना कुमारी महाबलेश्वर से बॉम्बे (अब मुंबई) लौट रही थीं तभी उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया. यह एक्सीडेंट जोरदार था. कई दिनों तक वे अस्पताल में रहीं. और उनका बायां हाथ जख्मी हो गया. तो छोटी उंगली टूटकर टेढी हो गई. उसका शेप बदलकर गोल हो गया.

असल में मीना कुमारी का असली नाम ‘महजबीं बानो’ था. पाकीजा, साहब बीवी और गुलाम जैसी फिल्मों और इनके गानों के जरिये आज भी दर्शक उन्हें याद करते रहते हैं. मीना कुमारी ने कमाल अमरोही से शादी की थी. जिनसे उनकी मुलाकात 1952 में फिल्म ‘तमाशा’ के सेट पर हुई थी. इस वक्त कमाल अमरोही अपनी फिल्म ‘अनारकली’ के लिए एक्ट्रेस की तलाश कर रहे थे. लेकिन कमाल अमरोही और मीना कुमारी का यह बहुचर्चित किस्सा बहुत सारे उतार-चढ़ावों से भरा रहा. दोनों की शादी हुई और अलगाव भी. 
उत्तर प्रदेश के अमरोहा से आने वाले कमाल अमरोही ने फिल्मों की कहानी लिखी, गाने लिखे और फिल्में डायरेक्ट भी कीं. कमाल अमरोही के हुनर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कमाल ने फिल्म ‘मुगल-ए-आज़म’ के डायलॉग लिखे. ‘आएगा आने वाला’ जैसे गाने लिखे और ‘रजिया सुल्तान’ जैसी फिल्म खुद डायरेक्ट की. कमाल अमरोही के चलते ही फिल्म की कहानी लिखने वाले को भी फिल्मों में क्रेडिट मिलने लगा था, जैसे गीतकारों के लिए यह क्रेडिट वाला काम साहिर ने किया था.

राजदार बताते हैं कि इसलिये मीना कुमारी हमेशा हमारा हाथ कैमरे से छिपाये रखती थीं. उन्होंने आगे करियर में जितनी भी फिल्में कीं. उन्होंने अपनी उंगली को छिपाये रखा. वे अपना बायां हाथ शूट के दौरान अक्सर दुपट्टे या साड़ी से छिपाती थीं ताकि कैमरे पर उनकी मुड़ी हुई उंगली न दिखे.