प्रदेश में ट्रैफिक थानों की चेकिंग के नाम पर होने वाली वसूली पर जल्द रोक लगेगी। पुलिस चेकिंग के दौरान लाइसेंस और अन्य कागजात न होने पर चालान तो करेगी पर वसूली नहीं करेगी। यह जांच भी सिपाही, एसआई या टीआई नहीं कर पाएगा। अब वाहन चेकिंग का अभियान डीएसपी स्तर के अफसर ही करेंगे।
गृहमंत्री बोले- अवैध वसूली रोकने को लिया गया है निर्णय
गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने बताया कि अब प्रदेश में ट्रैफिक पुलिस की जांच के नए नियम बनाए गए हैं। अब चौक-चौराहों पर दोपहिया वाहनों की जांच डीएसपी स्तर के अफसर ही कर सकेंगे। गलती पाए जाने पर सिर्फ चालान काटा जाएगा, नकद राशि नहीं ली जाएगी।
गृहमंत्री साहू ने कहा कि अवैध वसूली रोकने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसको लेकर एसपी कार्यालय में विशेष कक्ष भी बनेगा। यातायात विभाग का महकमा अपने मूल कार्यो में सजग रहे और बिगड़ती यातायात में सुधार हो।
इससे पहले पीसीसी मुख्यालय में मिलिए मंत्री से कार्यक्रम में कांग्रेस पदाधिकारियो- कार्यकर्ताओ ने गृह मंत्री साहू से इस संबंध में जमकर शिकायत की। बता दें कि पिछले दिनों पीसीसी की बैठक में भी कुछ नेताओं से सीधे सीएम बघेल से भी ट्रैफिक पुलिस के व्यवहार की शिकयत की थी।
गृह मंत्री बोले-व्यवस्था को लागू करने में कोई दिक्कत नहीं होगीगृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने भास्कर से कहा कि अब तक जो होता रहा है उससे पुलिस की छवि खराब होती रही है। अब हमने नया मेकेनिजम बनाने का फैसला किया है। सभी आईजी और एसपी से कहा है कि वे अपने स्तर पर आदेश जारी करें। सभी जिलों में पर्याप्त संख्या में डीएसपी उपलब्ध हैं। इस व्यवस्था को लागू करने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
सिरदर्द से परेशान 19 साल की बालिका को ठीक करने का झांसा देकर अनाचार करने के आरोपी बैगा को कोर्ट ने धारा 376 के (2)(ट) के तहत दस साल सश्रम कारावास व एक हजार रुपये अर्थदंड और धारा 506 (2) के तहत तीन साल सश्रम कारावास व 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश मधु तिवारी की अदालत ने दिया। घटना 26 जून 2016 की रात दस बजे की है। आरोपी बैगा दीपचंद पटेल मूलत: ओडिसा निवासी है और वह नंदिनी थाना अंतर्गत गोढ़ी में रहता था और झाड़-फूंक करता था।
शादी के लिए लड़के वाले आए, उसी दिन सिरदर्द
सहायक लोक अभियोजन पुष्पलता पाढ़ी ने बताया, पीड़िता को सिरदर्द की शिकायत थी। शादी के लिए जिस दिन लड़का देखने आया उसी दिन सिरदर्द होने लगा। तब बालिका के माता-पिता उसे लेकर आरोपी बैगा के पास गए। उसने झाड़-फूंक किया और पीड़िता के कपड़े के पीछे दो टूटी हुई चूड़ी निकाल कर यह कहा कि इसे बाहरी हवा लगी है। इसलिए इसके पहने हुए कपड़े तालाब में फेंक दे।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इस आधार पर दिया फैसला कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि झाड़फूंक से आरोपी इलाज कर रहा था। जिससे वह अपने प्रभाव में लेकर पीड़िता के साथ जबरदस्ती दुष्कर्म करने संबंधी तथ्य प्रमाणित है। डॉ विनिता धुर्वे की मुलाहिजा रिपोर्ट प्रादर्श पी-10 में पुिष्ट हुई है । बताने पर उसके पागल हो जाने और मार देने की धमकी देकर अपराध किया गया। साक्षी के रूप में पीड़िता की माता-पिता, बहन द्वारा जो बयान दिया गया।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने हरेली तिहार पर छत्तीसगढ़ के सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा है कि आज के समय की चुनौती है कि हम अपने संस्कृति को बचाएं।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ी में कहा है कि छत्तीसगढ़ के सब्बो निवासी मन ला हरेली तिहार के बहुत बहुत बधाई । उन्होंने कहा हमर छत्तीसगढ़ के कृषि संस्कृति के अनुसार हरेली हा पहली तिहार ए। गांव-गंवई के जिनगी मा खेती के स्थान महतारी असन होथे . खेती हा महतारी असन हमर भरन पोसन करथे . एखरे सेती सावन के अमावस के ए तिहार हा जन जन के जिनगी से जुड़ जथे।
मुख्यमंत्री ने कहा हरेली हा हमर धरती माता के हरियाली के संदेस लेके आथे, अउ संग में हमर संस्कृति के संदेस घलो लेके आथे। हमर सामने ए समय चुनौती हे कि हम अपन संस्कृति ला कइसे बचाबो. आप मन के सरकार हा इही बात ला सोच के हरेली तिहार के छुट्टी देके फैसला करीस हे। आवव, हम अपन परंपरा ला, नवा जीवन देबर हरेली ला खूब धूम धाम से मनावन। गोठान के साफ सफाई करन. गऊ माता अउ पसुधन के जतन करन. नांगर, रापा, कुदारी के पूजा करन अउ गुड़-चीला के भोग चढ़ावन , लइका-जवान मन गेंड़ी चढ़ैं. गांव देहात के पारंपरिक खेल कूद के आयोजन करन. हरेली के रंग ला उत्साह ले भरना हे ।
मुख्यमंत्री ने कहा भाई बहिनी अउ सब्बो सियान मन से मनुहार करत हंव कि आवव एक नवा सुरुआत करन अउ हरेली ला हम अपन बर अउ नवा पीढ़ी बर छत्तीसगढ़ के संस्कृति के पहिचान बनावन. हमन छत्तीसगढ़ म नरवा, गरुवा, घुरुवा, बारी योजना सुरु करे हन, उखरो उद्देस्य इही हे. मोला विस्वास हे कि इही योजना हा छत्तीसगढ़ के चारो चिन्हारी ला फेर से जीवन दीही अउ हम सबके सपना साकार होही।
छत्तीसगढ़ के अंतागढ़ टेप के प्रमुख गवाह फिरोज सिद्दीकी पर FIR दर्ज कर लिया गया है. जानकारी के मुताबिक पुलिस ने सिद्दीकी पर ब्लैकमेलिंग और वसूली का आरोप लगा है. राजधानी रायपुर के घर की पुलिस ने तलाशी ली और कई सामान जब्त किया. इसके साथ ही दूसरे स्थान पर भी पुलिस ने छापा मारा. फिलहाल फिरोज सिद्दीकी सिविल लाइन पुलिस की हिरासत में है. सिद्दीकी को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने एक प्रेसवार्ता भी ली. इसमे पुलिस ने एक बड़ा खुलासा भी किया है. पुलिस के मुताबिक फिरोज सिद्दीकी ने एक कांग्रेस नेता से 1 करोड़ की फिरौती मांगी थी. उगाही करने पर नेता ने पुलिस से मामले की शिकायत कर दी.
फिरोज सिद्दीकी की गिरफ्तारी को लेकर एसपी आरिश शेख ने प्रेसवार्ता की. जानकारी देते हुए एसपी ने कहा कि फिरोज सिद्दीकी के दूसरे ठिकाने पर भी छापा मारा गया है. एसपी ने कहा कि 3 जगहों पर पुलिस ने छापा मारा है. सिविल लाइन, तेलीबांधा और माना थाना क्षेत्र में सर्चिंग की गई है. तलाशी के बाद सीडी, कंप्यूटर और पेन ड्राइव पुलिस ने जब्त कर लिया है.
एसपी आरिश शेख ने बताया कि फिरोज सिद्दीकी के खिलाफ कांग्रेसी नेता पप्पू फरिश्ता ने शिकायत दर्ज कराई है. पप्पू फरिश्ता की शिकायत पर ही पुलिस ने धारा 384 के तहत वसूली के लिए धमकाने के आरोप में शिकायत दर्ज की है. फिरोज सिद्दीकी पर एक करोड़ 90 लाख रुपए की उगाही के लिए धमकाने का आरोप है. 25 लाख रुपए पप्पू फरिश्ता दे दी थी. इसके बाद कांग्रेस नेता को धमकाया जा रहा था जिसकी शिकायत की गई
भारत दूषित पानी की समस्या से लंबे अरसे से जूझ रहा है. बदलते वक्त के साथ ये समस्या बढ़ती ही जा रही है. एक तो पानी की कमी ने भीषण संकट के हालात पैदा किए हैं. वहीं दूषित पानी की वजह से पानी होते हुए भी वो पीने लायक नहीं होता. देश में ऐसे कई इलाके हैं, जहां दूषित पानी पीकर लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. उसमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी तक शामिल है. आमतौर पर दूषित पानी को पीने लायक बनाने के लिए पानी को ट्रीट किया जाता है. घरों में पानी को फिल्टर करने के लिए आरओ लगाए जाते हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बिल्कुल प्राकृतिक तरीके से भी पानी को फिल्टर किया जा सकता है. प्रकृति ने खुद ऐसी व्यवस्था की है कि दूषित पानी को साफ किया जा सकता है.
दूषित पानी में कई तरह के जहरीले तत्व मिले होते हैं. लेकिन सबसे खतरनाक है आर्सेनिक. आर्सेनिक इतना जहरीला होता है कि पानी में इसके मिले होने की वजह से कैंसर जैसी भयानक बीमारी तक हो सकती है. देश में कई ऐसे इलाके हैं, जहां आर्सेनिकयुक्त पानी पीने से लोग बीमार हो रहे हैं. खासतौर पर गंगा के मैदानी इलाकों के भूजल में आर्सेनिक पाया जाता है. आमतौर पर ऐसे इलाकों में पानी को ट्रीट करके उसे पीने लायक बनाया जाता है. लेकिन ट्रीटमेंट की प्रक्रिया काफी खर्चीली होती है.
पानी से आर्सेनिक निकालने की एक बिल्कुल प्राकृतिक प्रक्रिया के बारे में वैज्ञानिकों ने पता लगाया है. नए शोध में एक ऐसे पौधे के बारे में पता लगाया गया है, जो पानी से आर्सेनिक को सोख लेता है. पानी से आर्सेनिक निकालने की ये बिल्कुल प्राकृतिक और सस्ती प्रक्रिया है. जादवपुर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एनवायरमेंटल स्टडीज ने शोध किया है. शोध में पता चला है कि जलीय पौधा पिस्टिया स्ट्रैटियोटिस पानी से आर्सेनिक सोखने की क्षमता रखते हैं. ये पौधे पानी से बड़ी मात्रा में आर्सेनिक सोख सकते हैं.
रिसर्च में पता चला है कि पिस्टिया स्ट्रैटियोटिस पानी से आर्सेनिक को सोखकर बायोरेमेडिएशन करता है. इसके पौधे के मेटाबोलिज्म में भी बदलाव आता है. ये आर्सेनिक की मात्रा के साथ बदलता रहता है. इसी बदलाव से ये पता चलता है कि पौधे ने कितनी मात्रा में आर्सेनिक सोखी है.जादवपुर विश्वविद्यालय के शोध में कहा गया है कि ऐसे कई जलीय पौधे हैं, जो आर्सेनिक, पारा और फ्लोराइड जैसे पानी में मिले होने वाले जहरीले तत्व को सोख सकते हैं. पिस्टिया स्ट्रैटियोटिस एक ऐसा ही पौधा है. ये बंगाल के ग्रामीण इलाकों में पाया जाता है. यहां के तालाबों, पोखरों और जलाशयों में ये बड़ी संख्या में मिल जाते हैं. इस इलाके में ये पौधे अपनेआप उग आते हैं. जादवपुर यूनिवर्सिटी ने इस पौधे को लेकर शोध किया तो ये हैरान करने वाली जानकारी सामने आई.
दूषित पानी की समस्या को खत्म कर सकता है ये पौधा
जिन इलाकों के पानी में आर्सेनिक की तय मात्रा से ज्यादा पाया जाता है, वहां के तालाबों, पोखरों और जलाशयों में इस पौधे को उगाकर आर्सेनिकयुक्त पानी की समस्या से निजात पाई जा सकती है. शोध में इस बात का भी पता चला है कि कितने दिन में पिस्टिया स्ट्रैटियोटिस ने कितनी मात्रा में आर्सेनिक सोख लिया.
शोधकर्ताओं ने जानकारी दी है कि 10 पीपीबी आर्सेनिकयुक्त पानी से एक पौधे ने 28 दिन में करीब 61.42 फीसदी आर्सेनिक सोख लिया. वहीं पानी में अगर 100 पीपीबी आर्सेनिक मिला हुआ हो तो पौधे ने 28 दिन में करीब 38.22 फीसदी आर्सेनिक निकाल दिया.
पानी से आर्सेनिक निकालने के लिए अब तक पानी को ट्रीट किया जाता है. ये लंबी और खर्चीली प्रक्रिया होती है. लेकिन सिर्फ एक पौधे की मदद से पानी को आसानी से ट्रीट किया जा सकता है.
हमारे देश के भूजल में आर्सेनिक मिला होना एक बड़ी समस्या है. देश के 12 राज्यों के करीब 96 जिलों के भूजल में आर्सेनिक पाया जाता है. वाटर एंड सैनिटेशन मिनिस्ट्री के एक आंकड़े के मुताबिक देश के 1.47 फीसदी लोग पानी में आर्सेनिक के खतरे से जूझ रहे हैं.
इसमें पश्चिम बंगाल का हाल सबसे बुरा है. बंगाल के 9756 इलाकों के भूजल में आर्सेनिक मिले होने की समस्या है. खासतौर से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, बर्दवान, हावड़ा, हुगली, कूचबिहार, दक्षिण दिनाजपुर और उत्तरी दिनाजपुर के भूजल में आर्सेनिक होने की समस्या ज्यादा बड़ी है. यहां की जमीन से निकला पानी पीने लायक नहीं होता है. आर्सेनिक तय मात्रा से ज्यादा पाई जाती है. एक पौधा इस इलाके की एक बड़ी समस्या को आसानी से सुलझा सकता है.
रिटायरमेंट के बाद पैसे की चिंता हर किसी को होती है. घर खर्च कैसे चलेगा इसके बारे में सोचकर ही इंसान परेशान रहता है. आपकी इसी परेशानी को दूर करने के लिए मोदी सरकार ने खास पेंशन स्कीम शुरू की है. जहां निवेश कर आप अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं.
आज हम आपको मोदी सरकार की एक ऐसी ही पेंशन स्कीम के बारे में बता रहे हैं जिसमें अपने भविष्य को सुरक्षित करने के साथ ज्यादा पेंशन भी पा सकते हैं. इसमें आपको 1000 रुपये लगाकर 2 लाख रुपये मिलेंगे. साथ ही, जीवनभर 5000 रुपये पेंशन मिलेगी.
एनपीएस एक पेंशन प्रोडक्ट है और 2004 में सरकारी कर्मचारियों के लिए इसे शुरू किया गया था. लेकिन, बाद में 2009 में आम लोगों के लिए इसे खोल दिया गया. 2011 में कॉरपोरेट्स कर्मचारियों को इसमें निवेश की मंजूरी मिली.मान लीजिए आप 25 साल तक इस स्कीम में हर महीने 1000 रुपये लगाते हैं. जिस पर आपको 8 फीसदी का इंटरेस्ट मिलता है तो आपका टोटल पेंशन वेल्थ 9.49 लाख तो हो जाएगा.
जिसमें से आप 40 फीसदी यानी 1.89 लाख रुपये निकाल सकते हैं. बाकी बचे पैसे आपको पेंशन के तौर पर हर महीने मिलेंगे. इस लिहाज से आपको हर महीने 5,062 रुपये मिलेंगे.18-65 साल तक की उम्र वाला कोई भी शख्स इसमें निवेश कर सकता है.
एनपीएस, परंपरागत पेंशन स्कीम्स से अलग है. इस पेंशन फंड के निवेशकों का पैसा शेयर और बॉन्ड मार्केट में लगाया जाता है. मुनाफा बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर होता है. एनपीएस में लॉन्ग टर्म निवेश फायदेमंद होता है. एनपीएस में नियमित निवेश से अच्छा मुनाफा होता है.
ये हैं अशोक भाटी। इनके पास एक नहीं बल्कि पूरी 25 डिग्री और डिप्लोमा हैंं। दुनिया में सबसे अधिक पढ़ा-लिखा शख्स होने का दावा भी करते हैं। पढ़ाई के दौरान गोल्ड मेडल हासिल कर चुके हैं। लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड तक में इनका नाम दर्ज है। पढ़ाई के अलावा इनकी जो खास बात है वो हर किसी को चौंका देने वाली है।
लूणी रेलवे स्टेशन पर लगाते हैं ठेला
दरअसल, इतना पढ़ा-लिखा होने के बावजूद अशोक भाटी किसी खास ओहदे पर नहीं है। ये नौकरी नहीं करते बल्कि ठेला लगाते हैं। राजस्थान के जोधपुर जिले के लूणी रेलवे स्टेशन पर अशोक भाटी से रसगुल्ले के ठेले पर मुलाकात की जा सकती है। डिग्रीधारी होकर भी ठेला लगाने पर भाटी को कोई मलाल नहीं है। 63 वर्षीय अशोक भाटी बताते हैं कि इंसान को काम करना चाहिए। इसमें कुछ छोटा या बड़ा नहीं होता है। मुझे ठेला लगाने में कोई परेशान नहीं बल्कि खुशी है कि मैंने दिल की सुनी और ज्यादा दिमाग नहीं लगाया।
युवाओं को प्रेरित करने के लिए डिग्रियां लगाईं
अशोक भाटी बताते हैं कि उन्होंने अपने ठेले के चारों तरफ डिग्रियों को डिस्प्ले कर रखा है। यह कदम इसलिए उठाया ताकि डिग्रियों को देखकर युवा पीढ़ी कहीं भटके नहीं। उनमें पढ़ने-लिखने और काम करने का संदेश जाए। लूणी रेलवे स्टेशन पर जो भी नए यात्री आते हैं, वो अशोक भाटी की पढ़ाई और ठेले पर लगी डिग्रियों का पुलिंदा देख दंग रह जाते हैं।
26वीं डिग्री के लिए दी परीक्षा
अशोक भाटी के डिग्री हासिल करने का सिलसिला रुका नहीं है। अब वे 26वीं डिग्री के लिए एग्जाम दे चुके हैं और 27वीं डिग्री की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही अपने ठेले के काम को लेकर भी इनका जोश व जज्बा कम नहीं हुआ है। लूणी रेलवे स्टेशन पर जब ट्रेन रुकती है तो अन्य ठेला संचालकों के तरह अशोक भाटी रसगुल्ले बेचने की आवाज लगाते मिल जाएंगे।
बैंक में लगी थी बाबू की नौकरी
अशोक भाटी ने बताया कि यह हमारा पुश्तैनी काम है। मेरी सरकारी नौकरी भारतीय स्टेट बैंक में क्लर्क पद पर लगी थी। उन दिनों जोधपुर से लूणी के बीच यातायात के साधन कम थे। घर की जिम्मेदारियों को देखते हुए सरकारी नौकरी की बजाय पुश्तैनी काम को ही आगे बढ़ाने का फैसला लिया और लूणी रेलवे स्टेशन पर ठेला लगाना शुरू कर दिया। अशोक भाटी को बैज नंबर 786 के नाम से भी जाना जाता है। रेलवे स्टेशन पर इनके तीन ठेले हैं, जिनसे उनके पूरे परिवार को पाल रहे हैं। अशोक भाटी के पास वकालत, पत्रकारिता, अकाउंटेंट, एग्रीकल्चर डिप्लोमा आदि की कुल 25 डिग्री हैं।
छत्तीसगढ़ की लोक परम्परा के अनुसार मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल हरेली तिहार को धूमधाम से मनाएँगे। सिविल लाईन स्थित मुख्यमंत्री निवास में हरेली एक अगस्त के अवसर पर सुबह 9 बजे हरेली जोहर का आयोजन किया गया है।
मुख्यमंत्री द्वारा इस अवसर पर कृषि यंत्रों की पूजा करेंगे। वे हल उठाकर हरेली यात्रा की शुरूआत करेंगे। वे सावन झूले में बहनों से मुलाकात भी करेंगे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों द्वारा सुआ, कर्मा, ददरिया और गेड़ी नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। हरेली गीत भी गाए जाएंगे। यह आयोजन सुबह 9 बजे से होगा।
मुख्यमंत्री निवास में आज जनचौपाल भेंट-मुलाकात का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल सहित मंत्री श्री रविन्द्र चौबे, मंत्री डॉं. शिव कुमार डहरिया, महापौर श्री प्रमोद दुबे ने भी यहां आए नागरिकों से भेंट मुलाकात की और उनसे बातचीत करते हुए उनकी बातों, समस्याओं और कठिनाइयों को सुनते हुए उन पर आवश्यक कार्यवाही करने की पहल की। मुख्यमंत्री स्वयं चलकर यहां आए एक-एक निःशक्तजन तक पहुँचे और उनसे मुलाकात कर बातचीत की। मुख्यमंत्री ने जहाँ पीड़ितों से बातचीत करते हुए उनका हौसला बढ़ाया वही जरूरत पड़ने उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता दी और संजीवनी जैसी विभिन्न योजनाओं से सहायता देने के निर्देश दिए।
कैंसर से प्रभावित को संजीवनी से सहायता दिलाने के निर्देश जनचौपाल में अपने गले के कैंसर की बीमारी से लड़ रहे श्री अनूप गुप्ता अपनी पत्नी और बेटी के साथ मुलाकात की और बताया कि पैसा की कमी के कारण नया रायपुर के एक निजी कैंसर चिकित्सालय द्वारा उनका ईलाज नहीं किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने उन्हें संजीवनी योजना से लाभान्वित करने के तत्काल निर्देश दिए और अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही करने को कहा।
बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद अमेरिका में कानूनी दांवपेंच में फंस सकती है। पतंजलि के दो शरबत ब्रांड पर अमेरिका बिक्री पर रोक लगा सकता है। इसके अलावा अमेरिकी खाद्य विभाग पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ केस करने पर विचार कर रहा है। अगर इस मामले पतंजलि दोषी मानी जाती है तो उस पर करीब 3 करोड़ रुपये का जुर्माना लग सकता है।
ये है पतंजलि पर अमेरिका में आरोप
अमेरिकी स्वास्थ्य नियामक यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफडीए) की एक रिपोर्ट के अनुसार पतंजलि आयुर्वेद के दो शर्बत ब्रांड पर में अलग-अलग दावे की बात सामने आई है। यूएसएफडीए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पतंजलि भारत में बेचे जा रहे शर्बत उत्पादों के लेबल पर अलग दावे करती है और अमेरिका निर्यात किए जाने वाले शरबत में उसके दावे अलग हैं। वहीं पतंजलि अमेरिका और भारत के लिए इस शरबत की पैकिंग भी अलग-अलग करती है।
भारत भी लगा सकता है जुर्माना
अगर अमेरिका में पतंजलि पर लगाए गए आरोप सही पाए गए तो भारत में भी इस कंपनी पर जुर्माना लगाया जा सकता है। अमेरिका में अगर पतंजलि पर लगे आरोप सही पाए गए तो करीब 5 लाख अमेरिकी डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा पतंजलि के अधिकारियों को 3 साल तक की सजा भी हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो भारत में भी पतंजलि पर जुर्माना लगाया जा सकता है। भारत में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 के तहत कंपनी अगर गलत ब्रांडिंग और गलत दावों के साथ उत्पाद बेचने के आरोप में दोषी पाई जाती है तो उस पर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
पहली बार देश में ऑफर लेकर आई पतंजलि
पतंजलि आयुर्वेद ने पहली बार स्पेशल ऑफर पेश किए हैं। इन ऑफरों के तहत 50 फीसदी छूट दी जा रही है। वहीं कुछ उत्पादों पर 3 सामान खरीदने पर 3 सामान फ्री दिए जा रहे हैं। इससे पहले पतंजलि ने कभी भी ऑफर नहीं दिए थे। इन ऑफर का फायदा फूड कैटेगरी के तहत जूस, आटा, तेल, ओट्स और रेडी टू ईट फूड्स जैसे सामानों को खरीदने पर मिलेगा। इसके अलावा शैंपू, फेसवॉश और अन्य पर्सनल केयर उत्पाद पर कॉम्बो ऑफर का फायदा उठाया जा सकता है। हालांकि यह ऑफर देश के चुनिंदा शहरों में ही दिए जा रहे हैं।
घटती बिक्री से कंपनी परेशान
पतंजलि की बिक्री पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रही है। पतंजलि ने घटती बिक्री से निकलने के लिए ऑफर का सहारा लिया है। इन ऑफराें की जानकारी विभिन्न मीडिया में सामने आई है। इस घटती बिक्री के चलते पतंजलि के पास पिछला स्टॉक भी जमा हो गया। कंपनी चाहती है कि यह स्टॉक जल्द से जल्द निकल जाए। पतंजलि के उत्पादों की बिक्री पिछले दो साल से कम हो रही है। वहं पतंजलि आयुर्वेद ने वित्त वर्ष 2017 की तुलना में वित्त वर्ष 2018 में 10 फीसदी आमदनी में गिरावट की बात भी अपनी रिपोर्ट में बताई थी।
कंपनी ने माना घट रही बिक्री
पतंजलि आयुर्वेद के मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण ने हाल ही में मीडिया में स्वीकार किया था कि कंपनी सुस्ती के दौर से गुजर रही है। उनका कहना था कि कंपनी की ग्रोथ बहुत धीमी हुई है। आचार्य बालकृष्ण ने कहा था कि ग्रामीण इलाकों में स्लोडाउन की वजह से बिक्री प्रभावित हुई है और पतंजलि को भी इसका सामना करना पड़ रहा है। हालांकि बालकृष्ण ने कहा था कि कंपनी स्लोडाउन के प्रभाव से धीरे-धीरे बाहर निकल रही है। उन्होंने कहा कि हर्बल और नेचुरल प्रॉडक्ट्स की मांग बढ़ रही है और जल्द ही इसकी खपत बढ़ेगी।