खेल-खेल में इंसान कब मौत के मुंह में चला जाए इससे जुड़े कई दर्दनाक किस्से अक्सर सुनने में आते हैं। ऐसा ही एक हादसा यूपी के पीलीभीत में हुआ है। अपने दोस्तों के साथ लुकाछुपी खेलते-खेलते पांच साल का बच्चा एक आइसक्रीम ट्रॉली में अंदर छिप गया। इसके बाद उसका दम घुटने लगा और मासूम की मौत हो गई। बच्चे का नाम अथर्व गुप्ता(5) है जो नर्सरी में पढ़ता था।
बच्चे के पिता अजय गुप्ता व्यापार मंडल कमेटी के अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि रविवार को उनके बेटे को मामूली चोट लग गई थी, जिसके कारण उन्होंने उसे सोमवार को स्कूल नहीं भेजा। अथर्व अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर खेल रहा था। माधोटांडा पुलिस ने बताया, काफी समय बीत जाने के बाद परिवारवालों ने अथर्व को ढूंढना शुरू किया और घर के बाहर उसकी तलाश में जुट गए। परिवार के एक सदस्य ने इत्तफाक से घर के बाहर खड़ी आइसक्रीम ट्रॉली का आइस चेंबर खोला तो होश उड़ गए उसमें अथर्व की लाश पड़ी हुई थी।
एसएचओ उमेश सिंह ने बताया कि अथर्व अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था जब यह हादसा हुआ है। अभी तक परिवारवालों की तरफ से कोई तहरीर नहीं दी गई और न ही शव का पोस्टमॉर्टम किया गया।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में छोटी काशी नाम से विख्यात गोला गोकरणनाथ में भगवान शिव, धरती से कुछ नीचे विराजमान हैं। यहां पौराणिक शिवलिंग स्थापित है। मान्यता है कि इस शिवलिंग को सतयुग में लंका के राजा रावण द्वारा लाया गया था। पुराणों में भी इसका उल्लेख मिलता है।रावण ने 12 साल तक भगवान शिव की तपस्या की।
भगवान शिव ने प्रसन्न होकर जब वरदान मांगने को कहा तो रावण ने कहा कि वह उसके साथ चलें और लंका में रहें। भगवान शिव ने कहा कि यदि तुम मुझे लंका ले जाना चाहते हो तो ले चलो पर याद रखना कि जहां भी भूमि स्पर्श हो जाएगा, मैं वहीं स्थापित हो जाऊंगा। रावण सहमत हो गया। भगवान शिव नेपत्थर का रूप(शिवलिंग) लेलिया था।
शिवलिंग को लेकर रावण जब इस क्षेत्र से जा रहा था तभी भगवान ने रावण को तीव्र लघुशंका की इच्छा जागृत कर दी। रावण ने एक ग्वाले को शिवलिंग दे दिया और लघुशंका करने लगा। इस बीच भगवान ने अपना भार बढ़ाना आरंभ कर दिया। भार बढ़ने के कारण ग्वाले ने शिवलिंग को भूमि पर रख दिया। रावण ने शिवलिंग को उठाने का काफी प्रयास किया, लेकिन असफल रहा। क्रोध में आकर रावण ने अपने अंगूठे से शिवलिंग को जोर से दबाया, जिसका निशान शिवलिंग पर आज भी विद्यमान है। हर साल श्रावण मास में यहां लाखों भक्त शिवलिंग के दर्शन के लिए आते हैं।
सिखों की पहली और प्रमुख पहचान उनकी पगड़ी होती है, जिसे पग भी कहा जाता है. सिर्फ उत्तर भारत ही नहीं बल्कि पूरे देश और दुनिया के कई हिस्सों में सिखों की खासी आबादी इस पगड़ी की वजह से अलग पहचानी जाती है और समय समय पर इस पगड़ी को लेकर विवाद से भी दो-चार होती है. सिखों की पगड़ी जैसी आज है, क्या हमेशा से वैसी ही रही है? कैसे ये पग सिखों की पहचान बनती चली गई? इन तमाम सवालों के जवाब में इतिहास की परतें खंगालती एक किताब प्रकाशित हुई है, जिसमें दावा किया गया है कि पगड़ी का इतिहास करीब 4 हज़ार साल पुराना है और दुनिया की कई सभ्यताओं में फैला हुआ है.
अमित अमीन और नरूप झूटी लिखित किताब ‘टर्बन्स एंड टेल्स’ के कुछ अंशों के ज़रिये आप ये समझ सकते हैं कि पगड़ी कैसे सिखों की विकास यात्रा में रूप और आकार बदलकर वर्तमान स्वरूप तक पहुंची. इस किताब के मुताबिक़ पगड़ी की ठीक ठीक शुरूआत को लेकर कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन पगड़ी जैसा एक पहनावा 2350 ईसा पूर्व में एक शाही मैसोपोटामियन शिल्प में दिखाई देता है. माना जाता है कि इस पहनावे का यह सबसे पहले का नमूना है. ये भी समझा जाता है कि अब्राहमी धर्मों से पहले भी यह पहनावा प्रचलित था.
आइए जानें, सिखों की पग का दिलचस्प इतिहास क्या रहा और कैसे ये पग भारत पहुंची. फिर कैसे इस पग को वो स्वरूप मिला, जो आज प्रचलन में है.
भारत, मध्य पूर्व, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में धूप, बारिश और ठंडी हवाओं से बचने के लिए पग पहनने का चलन शुरू हुआ था. कुछ इलाकों में केवल आस्थावानों को पग पहनने की इजाज़त थी तो कुछ इलाकों में अलग संस्कृति के चलते नास्तिकों को अलग रंग की पग पहनने की व्यवस्था रही. उदाहरण के लिए आठवीं सदी में इजिप्ट और सीरिया में ईसाई नीली, यहूदी पीली और समारी लाल जबकि मुस्लिम सामान्य तौर से सफेद पगड़ी पहना करते थे.
16वीं सदी में मुग़ल साम्राज्य से पहले भारत में, सामान्य तौर पर केवल शाही परिवारों या उच्च अधिकारियों को ही पगड़ी पहनने की इजाज़त रही थी. ये सामाजिक प्रतिष्ठा और उच्च वर्ग का प्रतीक था. खास तौर से हिंदू संप्रदाय में, निम्न मानी जाने वाली जातियों को पगड़ी पहनने की इजाज़त नहीं थी. इस्लामी शासन में इस व्यवस्था में बदलाव शुरू हुआ. बाद में, जब औरंगज़ेब का शासन काल आया तब एक खास आबादी को अलग पहचानने के लिए इस पगड़ी का इस्तेमाल शुरू हुआ.
औरंगज़ेब ने गैर मुस्लिमों, खास तौर से सिखों की आबादी को पहचानने के लिए पगड़ी की व्यवस्था की. औरंगज़ेब ने जब सिखों के गुरु तेग बहादुर को मौत के घाट उतारा, तब उनके बेटे गोबिंद ने खालसा पंथ की स्थापना की और सिखों के लिए पग पहनना अनिवार्य किया. ये पग शासन के विरोध के साथ ही, सिखों की आज़ादी और समानता का प्रतीक बनी.
ब्रिटिश राज में हुए पग में कई बदलाव 1845 में जब पंजाब में ब्रितानिया हुकूमत ने पैठ बनाई तब पगड़ी के चलन में कई बदलावों का सिलसिला शुरू हुआ. पहले पग को सिख सिपाहियों को अलग करने के लिए इस्तेमाल किया गया. अंग्रेज़ों को सलीक़ा पसंद था इसलिए उन्होंने एक ख़ास आकार और सिमिट्री वाली पग का चलन शुरू किया. शुरूआत में ये पग केन्याई स्टाइल की रही और फिर बाद में इसका रंग रूप और बदलता रहा. इस पग में चक्कर लगाने की परंपरा भी अंग्रेज़ों ने ही शुरू करवाई.
अंग्रेज़ों की वजह से ही सिखों ने अपनी दाढ़ी को बांधना भी शुरू किया था. अस्ल में, अंग्रेज़ी बंदूक चलाते समय खुली दाढ़ी में आग लगने की आशंका रहती थी इसलिए सिपाहियों को हिदायत थी कि वो दाढ़ी को ठोड़ी के पास बांधें. ये सिलसिला ऐसा चला कि आज भी कई सिख इस नियम का पालन करते हैं.
आज़ादी के बाद पग को लेकर क्या बदलाव हुए? अंग्रेज़ी राज से आज़ादी मिलने के बाद भारत में कई धर्मों ने अपनी पहचानों को लेकर विचार शुरू किया. हिंदुओं ने पगड़ी पहनना छोड़ा क्योंकि आज़ादी के समय दंगों में उन्हें सिख समझकर हमले का शिकार होना पड़ रहा था. वहीं, पाकिस्तान में मुस्लिमों ने भी पगड़ी पहनना छोड़ दी. भारत में जहां पगड़ी एक समय हर वर्ग की सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी रही थी, वहीं आज़ादी के बाद केवल सिखों ने इसे अनिवार्य ढंग से अपनाए रखा.
विदेशों में सिखों की पहचान और विवाद भारत से सिख ब्रिटेन या पश्चिमी देशों में गए तो उन्हें पहले-पहल सम्मान मिला और उनकी सैन्य क्षमताओं के लिए उन्हें मान दिया गया. वहां भी सिखों ने पगड़ी को अपना अनिवार्य पहनावा बनाए रखा लेकिन समय समय पर इससे विवाद जुड़े. ब्रिटेन में कभी बस ड्राइवर को ड्यूटी के समय पग पहनने से रोकने की कोशिश हुई, कभी स्कूल में सिख छात्रों की पग पर प्रतिबंध की तो कभी हेलमेट कानून के चलते पग पहनने की प्रथा खत्म करने की कोशिशें हुईं लेकिन सिखों के डटे रहने के बाद अब ब्रिटेन के कानून में सिखों के लिए पग को अनिवार्य माना जा चुका है. अन्य कई देशों में भी पग स्वीकार है लेकिन कभी कभी अब भी इसे लेकर विवाद खड़े होते रहते हैं.
रियाद। सऊदी अरब रोजगार के मामले में भारतीयों को बड़ा झटका देने की तैयारी में है। सऊदी अरब अथॉरिटीज ने हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में आने वाली नौकरियों को सिर्फ अपने नागरिकों के लिए ही रखने की योजना बना रही है। अगर सब-कुछ ठीक रहा तो इस वर्ष के अंत में सऊदी अरब में बस यहां के नागरिकों को ही हॉस्पिटैलिटी के सेक्टर में नौकरियां मिलेंगी। विदेशियों को सऊदी अरब हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में प्रतिबंधित करने की तैयारी में है और निश्चित तौर पर यह भारतीयों के लिए बड़ा झटका है। सऊदी अरब की लेबर मिनिस्ट्री की ओर से शुक्रवार को इस फैसले के बारे में ऐलान किया गया है।
29 दिसंबर से लागू हो जाएगा फैसला
इस फैसले के तहत सऊदी अरब के रिसॉर्ट्स, थ्री स्टार या इससे ज्यादा स्टार्स वाले होटलों और फोर स्टार इससे ज्यादा कैटेगरी वाले होटल अपार्टमेंट्स पर मिनिस्ट्री का फैसला लागू होगा। फ्रंट डेस्क जॉब्स से लेकर मैनेजमेंट तक की पोजिशंस पर बस सऊदी अरब के नागरिकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा ड्राइवर्स, डोरमैन और पोर्ट्स के लिए नौकरियां अपवाद मानी जाएंगी। जिन और दूसरी नौकरियों के लिए विदेशियों की एंट्री बैन होगी उसमें रेस्टोरेंट होस्ट और हेल्थ क्लब सुपरवाइजर शामिल हैं। सऊदी अरब इस समय अपनी टूरिज्म इंडस्ट्री को डेवलप करने की कोशिश कर रहा है और साथ ही बेरोजगारी की समस्या से भी जूझ रहा है। पिछले वर्ष सऊदी अरब में बेरोजगारी की दर 13 प्रतिशत थी।
सऊदी अरब की कड़ी नीतियां सिरदर्द
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को यहां पर कड़ी नीतियों का पालन करना पड़ता है जिसमें उन विदेशियों को हटाने की नीति भी शामिल है जो यहां के कई प्राइवेट सेक्टर्स में अपना दबदबा रखते हैं। अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि इस तरह की नीतियां सऊदी अरब जैसे देश में नौकरियों के अवसर पैदा करने में कारगर साबित होंगी जो सस्ते विदेशी मजदूरों पर निभर है। वहीं, कुछ बिजनेस सेक्टर में इस बात की शिकायत है कि वहां पर सिर्फ सऊदी नागरिकों को वरीयता देने से उन्हें महंगी दरों पर लोगों को काम पर रखना पड़ता है। कहा जा रहा है कि यह फैसला 29 दिसंबर से लागू हो जाएगा। बहुत से होटलों में अभी से सऊदी अरब के लोगों को फ्रंट डेस्क जॉब के लिए रिक्रूट किया जाने लगा है।
फ्लोरिडा की एक महिला शनिवार सुबह उस समय हैरान रह गई जब उसने अजीब की आवाज सुनी। इसके बाद जब वो उठी और स्विमिंग पूल की ओर नजर घुमाया तो उसे 7 फुट का मगरमच्छ दिखाई दिया। महिला का नाम केरी किब्बे है जो कि फ्लोरिडा के पोर्ट चार्लोट में रहती है। घटना के बाद उसने सीएनएन न्यूज चैनल से बात करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से अप्राकृतिक है।
महिला ने बात करते हुए कहा है कि मैं चिंतित थी कि अगर स्विमिंग पूल से बाहर निकल गया तो क्या होता। महिला ने अपने फेसबुक पर इस घटना के बारे में अपनी बात रखी है और कई फोटो भी शेयर की है जिसमें स्विमिंग पूल में मगरमच्छ का फोटो भी है, जो कि हैरान करने वाला है। इसके महिला ने घटना की सूचना वन विभाग को दी।
जिसके बाद मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने मगरमच्छ को पकड़कर ले गए। ताकि उसे जंगल में छोड़ा जाए। किब्बे ने सीएनएन को बताया कि वो शहर के बीच में रहती है लेकिन राज्य जंगली राज्य की तरह है। महिला ने कहा कि उसने सांप, गोफर कछुए, बाज उल्लू जैसे कई जानवरों को देखा है। बता दें कि फ्लोरिडा में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है जबकि किसी स्विमिंग पूल में मगरमच्छ देखने को मिला है। पिछले साल भी इस तरह से की घटना सामने आई थी जब ऑरलैंडो के एक व्यक्ति ने अपने स्विमिंग पूल में 6 फीट का मगरमच्छ पाया था।
कर्नाटक सरकार ने राज्य में टीपू जयंती नहीं मनाए जाने का फैसला किया है। राज्य की नई भाजपा सरकार ने आदेश जारी कर टीपू जयंती समारोह राजकीय स्तर पर नहीं माने का निर्णय लिया है। राज्य में पिछली कांग्रेस सरकार ने हर साल 10 नवंबर को टीपू जयंती मनाने का ऐलान किया था लेकिन अब राज्य सरकार की तरफ से ऐसा कोई समारोह नहीं किया जाएगा। भाजपा नेता के जी बोपैया ने टीपू जयंती को सरकारी समारोह के तौर पर नहीं मनाए जाने की मांग रखी थी।
कर्नाटक में 2015 में उस समय की सिद्धारमैया सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के विरोध के बावजूद टीपू जयंती पर सरकारी कार्यक्रम और समारोह आयोजित कराने का फैसला किया था। लेकिन अब कर्नाटक की नई भाजपा सरकार की तरफ से कहा गया है कि राज्य में टीपू जयंती मनाने की कभी परंपरा नहीं रही है और इसलिए सरकार ने इससे जुड़े सरकारी कार्यक्रम आयोजित नहीं करने का फैसला किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने राज्य सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश सरकार के निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी पर भगवाकरण की राजनीति का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी अपने स्तर पर टीपू जयंती मनातेी रहेगी।
सोशल मीडिया में एक पोस्ट कई दिनों से वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि सऊदी के एक मुफ्ती ने एक विचित्र फतवा जारी करते हुए कहा है कि भूख लगने पर पति अपनी पत्नियों को खा सकते हैं। इस दावे के साथ कथित मौलवी और ‘द मिरर’ की एक खबर की तस्वीर भी शेयर की जा रही है।
क्या है वायरल पोस्ट फेसबुक पेज We Support Republic पर दर्शन भवसार नाम के यूजर ने एक पोस्ट शेयर किया- यह दुनिया का शीर्ष मुस्लिम मौलवी है! अजीज बिन अब्दुल्ला। इसने फतवा जारी कर कहा कि ‘भूख लगने पर अपनी पत्नियों को खा सकते हैं पति।
क्या है सच
वेबदुनिया ने सबसे पहले ‘ द मिरर ‘ की वह खबर सर्च की, तो पाया कि यह खबर 2015 की है न कि अभी की। इस खबर में फतवे के बारे में लिखा गया था कि पति अपनी पत्नी को भूख लगने पर खा सकता है।
साथ ही, हमें ‘ इंडिया टुडे ‘ की 2015 की एक रिपोर्ट भी मिली। जब इस रिपोर्ट को पूरा पढ़ा तो आखिरी पैराग्राफ में लिखा था कि मुफ्ती ने इस तरह के फतवे से इनकार किया है। रिपोर्ट में यह भी लिखा गया कि इस फतवे की बात को व्यंग्यात्मक तरीके से कहा गया था।
दरअसल, यह फतवा मोरक्को के एक व्यंग्यकार ब्लॉगर इसराफेल अल-मगरिबी का एक सटायर आर्टिकल था। यहीं से यह खबर फैलती चली गई। वेबदुनिया की पड़ताल में पाया गया है कि वायरल खबर एक व्यंग्यात्मक लेख था, जिसे 2015 में ही खारिज कर दिया गया था लेकिन अभी भी यह सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है।
दोस्तों इनके सोशल मीडिया अकाउंट की बात की जाए तो सिर्फ इंस्टाग्राम पर ही 7.5 लाख लॉगइन को फॉलो करते हैं और यह गिनती दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है यह अपने फैंस के लिए रोजाना नई नई पोस्ट शेयर करती रहती हैं जिससे कि दिन में 10000 से भी ज्यादा फॉलोअर्स इन के रोज बढ़ रहे हैं।
दोस्तों आने वाले समय में यह नई वेब सीरीज तमिल तेलुगू गुजराती और बॉलीवुड फिल्मों में भी अपना अभिनय करती हुए आपको नजर आएंगी। दोस्तों अन्वेषी जैन एक मल्टी टैलेंटेड हैं क्योंकि इनका अभिनय नहीं और मॉडलिंग एंकरिंग लाजवाब है। दोस्तों एक्टिंग की दुनिया में इन्होंने अपना पहला कदम सन 2018 में “गन्दी बात 2” से रखा था। इसके बाद देखते ही देखते इनकी लोकप्रियता बढ़ती ही गई और आज यह गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च की जाने वाली एक्टर बन गई।
आज हम आप लोगो को Bollywood के उन सितारों के बारे मे बताने जा रहे हैं, जिन्होंने फिल्म की शूटिंग के दौरान भूत का अनुभव कर चुके हैं, आप मे से ऐसे बहुत से लोग हैं जो कि भूतों पर विशवास नही करते है, पर आप सभी को बता दें कि आज हम आप लोगो को जिन सितारों के बारे मे बताने जा रहे हैं, वो भि भूतो पर विशवास नही करते थे, पर जब से इस लोगो के साथ ये हुआ है, तब से ये Bollywood सितारे भी भूतों पर विशवास करने लग गएं हैं।
रणवीर सिंह
आप सभी रणवीर सिंह को तो जानते ही होंगे बता दें कि रणवीर सिंह को भी भूतों पर विशवास नही था, पर आप सभी को बता दें कि जिस दिन रणवीर सिंह बाजीराव मस्तानी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे तो उस दौरान उनके सेट के पीछे वाली दीवार पर सफ़ेद धूल जम गई, और फिर देखते ही देखते वो धूल बदलकर पेशवा बाजीराव जैसा हो गयी जिसे देखने के बाद रणवीर सिंह बहुत डर गए।
सरोज खान
आप सभी सरोज खान को तो जानते ही होंगे, आप सभी को बता दें कि शूटिंग के बाद सरोज खान एक होटल रूम में सोने गयी जहां उन्हे अपने कमरे के ठीक ऊपर सामान खिसकाने की अवाज़े आ रही थी, तभी सरोज खान ने इन आवोज़ों से परेशान होकर होटल मैनेजर को फ़ोन किया तो फ़ोन डेड था, फिर सरोज खान नीचे गई और होटल के मैनेजर को बताया कि उनके कमरे के ऊपर समान खिसकाने की आवाज़े आ रही है, होटल के मैनेजर ने बताया कि उनके कमरे के ऊपर कोइ कमरा नही है, ये सुन्ने के बाद सरोज खान बहुत डर गई और तुरंत वहां से दूसरे होटल मे चली गई।
नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी
आप सभी नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी तो जानते ही होंगे, आप सभी को बता दें कि नवाज़ुद्दीन अपनी फिल्म आत्मा की शूटिंग कर रहे थे उस दौरान नवाज़ुद्दीन के पीछे एक फोटो फ्रेम था जो अपने आप हिल रहा था, ये देखने के बाद नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी समझ गए कि वो घर हॉन्टेड है।
बारिश के मौसम में सांप-बिच्छू निकलने की घटनाएं आम होती हैं, लेकिन एक ही जगह अचानक 200 सांप (King Cobra) निकल आए यह हैरान कर देने वाली बात है। दरअसल, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में कुछ ऐसी घटना सामने आई है, जहां एक किसान के घर में 200 जहरीले सांप और अंडे पाए गए। मानो सांपों ने किसान के घर पर कब्जा कर रखा हो।यह नजारा देख किसान तो हैरान था ही, वहीं पूरे गांव के लोग दहशत में आ गए और सोच में पड़ गए कि आखिर एक साथ 200 सांप कहां से आ गए।
दरअसल, यह मामला दुर्ग के ग्राम पंचायत पौहा के आश्रित ग्राम भैसबोड़ का है। इसी गांव में रहने वाले एक किसान के घर में शाम को उस वक्त हड़कंप मच गया जब घर में पहले एक सांप निकला, फिर दूसरा कुछ देर बाद ही तीसरा और फिर अनगिनत सांप निकलने लगे। एक के बाद एक इतने सांपों को निकलता देख परिवार के लोग सन्न रह गए।
यह खबर जंगल की आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई। एक साथ इतने सांप निकलने की खबर मिलते ही एक ओर लोग डरे हुए थे तो कुछ इस नजारे को देखने के लिए किसान के घर की ओर निकल पड़े। देखते-देखते किसान के घर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। लेकिन जब रात होने लगी तो सभी लोग अपने-अपने घर चले गए। उसके बाद किसान का परिवार रात भर सांप की दहशत में सारी रात जाग के गुजार दी।
सुबह होते ही किसान ने नोवा नेचर की टीम को बुलाया और बताया कि घर में तीन दर्जन से अधिक सांप निकल चुके हैं। नोवा नेचर ने जब पूरे घर में अपनी नजर दौड़ाई। उनकी नजर मकान के पुराने दीवार पर जा टिकी। स्नेक कैचर की टीम ने वह दीवार को ढहाने की बात कही। लोगों ने दीवार को गिराया तो उसमे सैकड़ों सांप देख कर सभी की आंख खुली की खुली रह गई।
स्नेक कैचर की टीम ने करीब तीन दर्जन जहरीले सांपों और सैकड़ों अंडों को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया। सैकड़ों सांपों के एक साथ निकलने की घटना से पूरा परिवार अब तक दहशत में है। इस घर से इतने सांप निकलने के बाद से परिवार के लोग अभी तक दहशत में हैं।