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पूर्व सीएम रमन के बेटे अभिषेक को नहीं मिली चिटफंड फर्जीवाड़ा मामले में हाई कोर्ट से राहत

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 छत्तीगसढ़ के चिटफंड फर्जीवाड़ा मामले में हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पुत्र पूर्व सांसद अभिषेक सिंह को राहत देने से इन्कार कर दिया है।

निचली अदालत के आदेश पर चिटफंड घोटाले में प्रदेश के कई थानों में पुलिस ने पूर्व सांसद अभिषेक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है। इन मुकदमों को निरस्त कराने की मांग संबंधी याचिका उन्होंने हाई कार्ट में दायर की है।

बुधवार को हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने याचिका पर फैसला सुनाया। इससे पहले हाई कोर्ट ने अभिषेक सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए 22 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पूर्व गृहमंत्री समेत कई अफसरों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज

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छत्तीसगढ़ में भाजपा शासनकाल में हुए चिटफंड घोटाला मामले में अंबिकापुर, महासमुंद के बाद अब रायपुर के न्यू राजेंद्रनगर थाने में दो कंपनियों सनसाइन इंफ्राबिल्ड कार्पोरेशन लिमिटेड और सांई प्रसाद के खिलाफ अलग-अलग धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। एफआइआर में पूर्व गृृहमंत्री रामसेवक पैकरा समेत आधा दर्जन आइएएस और एक आइपीएस के नाम भी शामिल हैं। यह कार्रवाई जिला न्यायालय के आदेश पर की गई है।

आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट और सेबी की रोक के बावजूद चिटफंड कंपनियों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। उल्टा, शासन की कंपनियों से मिलीभगत रही।

पुलिस के मुताबिक महासमुंद जिले के खल्लारी में प्रकरण दर्ज करने के बाद केस डायरी रायपुर के न्यू राजेंद्रनगर पुलिस थाना को भेजी गई, इसमें पुलिस ने सनसाइन इंफ्राबिल्ड के डायरेक्टर बनवारी लाल बघेल, वकील सिंह बघेल, संजीव सिंह, सुरेंदर सिंह बघेल, धरम सिंह कुशवाहा, राजीव गिरी व अन्य के साथ ही पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा, आइएएस रीना बाबा साहब कंगाले, सिद्घार्थ कोमल परसेदी, अमृतलाल ध्रुवे, भीम सिंह और नीलकंठ टेकाम के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।

भविष्य में ऐसे होगा लेन-देन ढूंढ़े नहीं मिलेंगे एटीएम, पढ़े पूरी ख़बर

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क्या आपको याद है कि पैसे निकालने के लिए पिछली बार आप कब बैंक गए थे. शायद लंबा अरसा बीत गया होगा. एटीएम ने हमारी जिंदगी कितनी आसान कर दी है. अब पैसे निकालने के लिए बैंकों की लंबी-लंबी कतार में नहीं लगना पड़ता. ये सब गुजरे जमाने की बात हो गई है. छोटे-छोटे शहर-कस्बों तक में एटीएम की सुविधा मिलने लगी है. लेकिन जितनी तेजी से एटीएम की संख्या बढ़ी है, अब वो उतनी ही तेजी से घटने वाली है. जी हां आने वाले दिनों में हो सकता है आपको एटीएम ढूंढ़ने के लिए काफी चक्कर लगाने पड़ें.

आने वाले वक्त में एटीएम ढूंढ़ना मुश्किल हो सकता है. बैंकों के लिए एटीम के रखरखाव और उसकी महंगी मशीनों का खर्च उठाना मुश्किल पड़ रहा है. सख्त रेग्युलेशन की वजह से बैंक एटीएम की संख्या कम करते जा रहे हैं. रिजर्व बैंक के एक आंकड़े से तो यही पता चलता है. एटीएम से ट्रांजेक्शन की संख्या बढ़ी है लेकिन पिछले 2 साल में एटीएम की संख्या में कमी आई है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़े के मुताबिक प्रति एक लाख लोगों पर भारत में एटीएम की संख्या ब्रिक्स देशों की तुलना में पहले से ही काफी कम है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया समय-समय पर एटीएम को लेकर बैंकों को गाइडलाइंस जारी करता रहा है. पिछले साल भी सुरक्षा के लिहाज से सेंट्रल बैंक ने गाइडलाइंस जारी किए थे. इन सबकी वजह से बैंकों को बार-बार एटीएम के सॉफ्टवेयर और बाकी पार्ट्स अपडेट करने पड़ रहे हैं. इससे एटीएम के रखरखाव का खर्च बढ़ा है. इसलिए कई बैंकों ने अपने एटीएम की संख्या कम कर दी है.

why indian banks shutting down their ATMs RBI reports on atm use
एटीएम का रखरखाव काफी खर्चीला हो चुका है

क्यों कम होती जा रही है एटीएम की संख्या?
विशेषज्ञ मानते हैं कि विदेश की तुलना मे हमारे यहां पहले से ही एटीएम की संख्या काफी कम है. इसमें और कमी आना चिंताजनक है. एटीएम ऑपरेटर्स को एटीएम चलाने के लिए जो फीस दी जा रही है वो कम है और बिना अप्रूवल के वो इसमें बढ़ोतरी भी नहीं कर सकते. एटीएम ऑपरेटर्स, जिसमें बैंक के साथ थर्ड पार्टी भी शामिल है, वो एटीएम से किसी डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड के जरिये कैश निकालने पर 15 रुपये का इंटरचेंज फीस वसूल करती है.

इंटरचेंज फीस बड़ा फैक्टर है. अब हालत ये है कि बैंक अपने एटीएम लगाने की बजाय इंटरचेंज फीस देकर किसी दूसरे बैंक का एटीएम इस्तेमाल करना ज्यादा आसान मानती है. इसके जरिये बैंक एटीएम के रखरखाव में होने वाले खर्च को बचा रहा हैं. इंटरचेंज फीस बढ़ाना भी कोई उपाय नहीं है. क्योंकि इसका बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है.

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विदेशकी तुलना में हमारे यहां पहले से ही कम है एटीएम की संख्या

बैंकिंग सेक्टर में सुधार के बाद बढ़ा एटीएम पर भार
2014 के बाद स्थितियां ज्यादा विकट हुई हैं. जब मोदी सरकार करीब 35.5 करोड़ लोगों को बैंकिंग सिस्टम में लेकर आई. सरकार के बैंकिंग सेक्टर में सुधार की वजह से भी एटीएम पर भार बढ़ा है. सरकार की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम की वजह से भी एटीएम का इस्तेमाल बढ़ा है.

पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने अपने एटीएम की संख्या कम की है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 5 एसोसिएट बैंक को अपने साथ मिला लिया. 2018 की पहली छमाही में एसबीआई ने करीब 1 लाख आउटलेट बंद कर दिए. डिजिटाइजेशन के बाद बैंक अपने और ब्रांच बंद करने वाला है.

मोबाइल बैंकिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसकी वजह से भी एटीएम की संख्या कम होगी. पिछले 5 साल में मोबाइल बैंकिंग पांच गुना रफ्तार से बढ़ी है. विशेषज्ञ बताते हैं कि एटीएम खत्म हो जाएंगे ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी लेकिन ये हकीकत है कि एटीएम घाटे का सौदा हो चुका है. और घाटे के सौदे में कोई निवेश नहीं करता.

मिलिए उन महिला वैज्ञानिकों से जिन्होंने भारत के स्पेसक्राफ्ट को मंगल और चंद्रमा पर पहुचाया

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मंगलयान से लेकर चंद्रयान तक इसरो के अंतरिक्ष यानों को ऊंची उड़ाने देने के पीछे कई महिला वैज्ञानिकों का हाथ है. जानिए अंतरिक्ष विज्ञान में काम करने वाली प्रमुख महिला वैज्ञानिकों के बारे में खास बातें.

चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग के पीछे अगर किन्हीं दो महत्वपूर्ण महिलाओं का हाथ है तो उनमें एक वनिता मुथैया हैं. वो अभी चंद्रयान-2 की परियोजना निदेशक हैं. उन्हें इसके अलावा कई मिशनों का अच्छा अनुभव हैं.

वनिता के अलावा चंद्रयान-2 को सफल बनाने के पीछे दूसरा प्रमुख नाम रित करिधाल का है. लखनऊ की निवासी रितु ने 1997 में इसरो ज्वाइन की थी. चंद्रयान के अलावा मंगलयान प्रोजेक्ट की भी वो डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर रहीं.

एन वालारमति उन चंद महिला वैज्ञानिकों में से एक हैं, जो बीते 3 दशकों से इसरो का हिस्सा हैं. रडार इमेजिंग में विशेषज्ञ वालारमति को इनसैट 2A, आईआरएस, आईसी, आईआरएस-आईडी जैसे मिशनों का अनुभव है.

जीसैट-12 और जीसैट-10 की सफल लॉन्चिंग कराने वाली टीके अनुराधा 1982 से इसरो से जुड़ी हुईं हैं. वो कम्युनिकेशन सैटेलाइट क्षेत्र की विशेषज्ञ हैं. फिलहाल इसरो में वो जियोसैट प्रोग्राम निदेशक का पद संभाले हुए हैं.

वीआर ललितांबिका साल 1989 में इसरो का हिस्सा बनीं थीं. इसरो के बहुप्रतीक्षित फ्यूचर प्रोजेक्ट गगनयान की वो मिशन डायरेक्टर भी हैं. उन्होंने ASLV, PSLV, GSLV और RLV जैसे मिशनों का अनुभव है.

इसरो में एक सख्त छवि वाली सीता सोमसुंदरम फिलहाल प्रोग्राम निदेशक के पद पर कार्यरत हैं. सीता के पास मिशन मंगलयान की जिम्मेदारी थी. उन्हें सीवी रमन यंग साइंटिस्ट और बेस्ट वूमन साइंटिस्ट जैसे अवॉर्ड से नवाजा गया है.

मीनल संपत मिशन मार्स परियोजना में उप निदेशक के पद पर कार्यरत हैं. वो अंतरिक्ष यान में लगने वाले उपकरणों में विशेषज्ञ हैं. मिशन मार्स के कलर कैमरा बनाने के पीछे भी मीनल का योगदान था.

मौमिता दत्ता ने साल 2004 में इसरो में ज्वाइन किया था. उन्हें ऑसियन सैट, रिसोर्स सैट, चंद्रयान-1 और मार्स जैसे मिशन का अनुभव है. उन्हें ऑप्टिकल आईआर सेंसर, पेलोड उपकरण में विशेषज्ञता हासिल है.

नाबालिग नौकरानी से दिल्‍ली पुलिस हैड कॉन्‍स्‍टेबल ने किया दुष्‍कर्म

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दिल्‍ली में सुरक्षा के लिए वर्दी पहनने वाले एक दिल्‍ली पुलिस के हैड कॉन्‍स्‍टेबल ने अपनी नौकरानी को ही हवस का शिकार बना डाला. बाहरी दिल्‍ली के मुंडका इलाके में हैड कॉन्‍स्‍टेबल अमर सिंह चौहान ने घर में काम करने वाली 14 साल की नाबालिग कामवाली से दुष्‍कर्म किया.

बताया जा रहा है कि जिस वक्‍त दुष्‍कर्म किया गया चौहान की पत्‍नी घर पर नहीं थी. वह भी पुलिस विभाग में ही कार्यरत है. जानकारी के मुताबिक तीस हजारी कोर्ट में सुरक्षा देने के लिए तैनात अमर सिंह ने 23 जुलाई की सुबह नौकरानी को धमकी दी और उसके साथ बलात्‍कार किया. आरोपी पर पॉक्‍सो के तहत मामला दर्ज किया गया है. फिलहाल आरोपी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है.

डॉक्टरों ने महिला के पेट से निकाले 1.5 किलो ज्वैलरी, 90 सिक्के, गहने चुराकर खा जाती थी महिला

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पश्चिम बंगाल में एक महिला के पेट से इतने गहने और सिक्के निकले कि डॉक्टर भी हैरान रह गए. एक डॉक्टर ने बताया कि पश्चिम पंगाल की बीरभूमि जिले के सरकारी अस्पताल में मानसिक रूप से अस्थिर महिला के पेट से डेढ़ किलो गहने और सिक्के निकाले गए.

रामपुरहाट के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सर्जरी विभाग के प्रमुख सिद्धार्थ विस्वास ने कहा कि 26 साल की महिला के पेट से 5 और 10 रुपये के 90 सिक्के निकाले हैं. गहने ज्यादातर तांबा और पीतल के बने थे, लेकिन कुछ सोने के भी हैं.

महिला की मां के मुताबिक उन्होंने नोटिस किया कि अपने घर से गहने गायब हो रहे थे. लेकिन जब हम पूछताछ करते तो वह रोने लगती. हम उस पर नजर रखते थे. मगर किसी तरह वह इन सबको निगलने में सफल हो जाती थी. वह पिछले दो महीनों से ठीक नहीं थी. हम उसे विभिन्न निजी डॉक्टरों के पास ले गए थे, मगर उस पर दवाइयों का कोई असर नहीं हो रहा था.

खाना खाने के बाद करती थी उल्टी

महिला की मां ने कहा कि मेरी बेटी मानसिक रूप से अस्वस्थ है. पिछले कुछ दिनों से वह खाना खाने के बाद उल्टी कर दी थी. उसने कहा कि उसकी बेटी को उसके भाई की दुकान से सिक्के मिले हैं.

बता दें कि महिला को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने लगभग एक सप्ताह तक विभिन्न परीक्षण करने के बाद बुधवार को उसका ऑपरेशन किया.

जानिए क्यों ये शख्स डालता था रेलवे के खाने में छिपकली

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ट्रेन में बैठने के बाद अक्सर लोगों को जिस चीज की चिंता रहती है वह है इंडियन रेलवे का खाना. रेलवे के खाने को लेकर अक्सर लोग चिंतित रहते हैं की वे ये खाना खाए या नहीं. खाने को लेकर असावधानी बरतने का एक केस बुधवार को सामने आया है. रेलवे को एक व्यक्ति ने बिरयानी में छिपकली निकलने की कंप्लेंट की थी. इसके बाद रेलवे अधिकारियों ने एक्शन लिया जिसमें ये सामने आया है कि ऐसा एक शख्स जानबूझकर कर रहा है. ऐसा करने के पीछे उसका मकसद रेल में फ्री खाना है. इस शख्स को अब पुलिस ने पकड़ लिया है.

जानिए क्या है पूरा मामला?
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, ऐसी कई शिकायतें आ जाने के बाद जबलपुर के सीनियर डिवीजनल कॉमर्शियल मैनेजर बसंत कुमार शर्मा को शक हुआ. थोड़ी जांच करने पर पता चला कि एक ही शख्स है, जिसने कई बार खाने में छिपकली निकलने की शिकायत की थी.

रेलवे अधिकारियों ने जब इस शख्स को पकड़ा तो पता चला कि सुरेंद्र पाल नाम का ये शख्स 70 साल से ज्यादा की उम्र का एक बुजुर्ग है और ये कुछ वक्त से ये ट्रिक्स अपना रहा था. वो फ्री में खाना खाने के लिए अपने ही खाने में छिपकली डाल देता था.

इस शख्स ने समोसे में छिपकली निकलने की शिकायत भी की थी
इस शख्स ने एक बार अपने समोसे में छिपकली निकलने की शिकायत की थी. फिर इसने एक बार अपनी बिरयानी में छिपकली निकलने की शिकायत की. इससे डीसीएम बसंत कुमार शर्मा को शक हुआ और उन्होंने रेलवे डिवीजन को इस शख्स की फोटो भेजकर अलर्ट किया.

मामला समझ आने पर रेलवे अधिकारियों ने सुरेंद्र पाल को पकड़ा और पूछताछ की. उसने अपनी गलती कबूल की और खुद को बल्ड कैंसर का मरीज बताया. उसने ये भी कहा कि वो मानसिक रूप से अस्वस्थ है. अधिकारियों को अभी ये स्पष्ट नहीं है कि वो मानसिक रूप से अस्वस्थ है या नहीं लेकिन उन्होंने उसे भरोसा दिलाया है कि अगर उसने दोबारा ऐसा नहीं किया तो वो उसे किसी भी तरह की सजा नहीं देंगे.

BJP ने सांसदों को जारी किया व्हिप, आज लोकसभा में पेश होगा तीन तलाक बिल

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लोकसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को ट्रिपल तलाक बिल पेश किया जाएगा. भारतीय जनता पार्टी ने व्हिप जारी कर अपने सांसदों को संसद में पेश होने का निर्देश जारी किया है. उधर कांग्रेस पार्टी ने भी इसके मद्देनज़र लोकसभा और राज्यसभा में सांसदों के लिए अगले दो दिन उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी कर दिया है. इससे पहले संसद में बजट सत्र के पांचवें दिन 21 जून को ही इस विधेयक का मसौदा पेश किया गया था जिस पर विपक्षी दलों ने कड़ा ऐतराज जताया था.

बिल पर सरकार ने किया है ये दावा
सरकार ने इस बिल को लेकर दावा किया है कि तीन तलाक का विधेयक मुस्लिम महिलाओं को लिंग समानता प्रदान करेगा और न्‍याय सुनिश्चित करेगा. यह विधेयक विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा में मदद करेगा और उनके पति द्वारा ‘तलाक-ए-बिद्दत’ से तलाक लेने से रोकेगा.

क्या है इस बिल के प्रावधान

तीन तलाक विधेयक के तहत जिस मुस्लिम महिला को तलाक दिया गया है, उसकी जानकारी के आधार पर मजिस्‍ट्रेट की इजाजत से अपराध को कठोर बनाया गया है. विधेयक में मजिस्‍ट्रेट को आरोपी को जमानत पर रिहा करने से पहले उस विवाहित मुस्लिम महिला की बात सुनने का प्रावधान किया गया है, जिसे तलाक दिया गया है.

तीन तलाक विधेयक में इसमें विवाहित मुस्लिम महिलाओं और उनके आश्रित बच्‍चों को गुजारा-भत्‍ता देने की व्‍यवस्‍था है. इस विधेयक में अपराध को संज्ञेय बनाने का प्रस्‍ताव है, यदि पुलिस थाने के प्रभारी को उस विवाहित मुस्लिम महिला या उसके किसी नजदीकी रिश्‍तेदार द्वारा अपराध होने के संबंध में सूचना दी जाती है, जिसे तलाक दिया गया है.
तीन तलाक विधेयक के अनुसार तीन तलाक की परिपाटी को निरस्‍त और गैर-कानूनी घोषित किया गया है. इसे तीन वर्ष के कारावास और जुर्माने के साथ दंडनीय अपराध माना गया है.

निष्प्रभावी हो गया था ये बिल
मई में 16वीं लोकसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद पिछला बिल निष्प्रभावी हो गया था क्योंकि यह राज्यसभा में लंबित था. दरअसल, लोकसभा में किसी विधेयक के पारित हो जाने और राज्यसभा में उसके लंबित रहने की स्थिति में निचले सदन (लोकसभा) के भंग होने पर वह विधेयक निष्प्रभावी हो जाता है.

सावन के इस पावन महीने में घूम आइये भगवान शिव के ये प्रसिद्ध मंदिर

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अभी श्रावण मास चल रहा है. इस माह में देवों के देव महादेव अर्थात भगवान शिव की पूजा की जाती है. हर सोमवार शिवालयों के बाहर बेलपत्र लिए भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है. ज्यादातर शिवभक्त इस महीने कांवड़ लेकर देवघर जाते हैं, लेकिन भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जहां शिव की पूजा अर्चना होती है.

पशुपतिनाथ मंदिर

मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में बसा यह इकलौता पशुपतिनाथ का मंदिर है. यह स्थित पशुपतिनाथ की प्रतिमा करीब सवा सात फीट ऊंची है. कहते हैं यहां सच्चे मन मांगी हुई मनोकामनाएं जरूर पूर्ण होती हैं.

लिंगराज मंदिर

भुवनेश्वर में स्थित यह सबसे बड़े मंदिरों में शुमार है. सावन महीने में सुबह से ही शिवभक्त महानदी से पानी भरकर पैदल मंदिर तक आते हैं. माना जाता है कि इसके पानी से कई तरह की शारीरिक बीमारियां दूर होती हैं.

जूनागढ़

सावन के महीने में यहां साधुओं और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है. यहां तक की दुनिया के अलग-अलग हिस्से से लोग मंदिर में जल चढ़ाने आते हैं. गुजरात में स्थित जूनागढ़ की शिवरात्रि काफी प्रसिद्ध है.


तुंगनाथ मंदिर

उत्तराखंड में स्थित यह मंदिर दुनिया की सबसे ऊंची मंदिर है, जो बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर के बीच स्थित है. मंदिर के प्रवेश द्वार पर जहां भगवान शिव के प्रिय ‘नंदी’ की मूर्ति विराजमान है. वहीं द्वार के दाईं ओर भगवान गणेश की मूर्ति है.

जिम करने के साथ इन्हें भी खाएं, वजन घटाने में मददगार साबित होंगे ये 5 फल

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मोटापा आज के समय की एक बड़ी समस्या है. ज्यादातर लोग मोटापे से परेशान हैं. खासतौर पर शहरी लोग. मोटापा कम करने के लिए बहुत से लोग जिम में खूब पसीना बहाते हैं लेकिन फिर भी उनका मोटापा कम नहीं होता है. जानते हैं क्यों? क्योंकि एक्सरसाइज से ज्यादा जरूरी खाने-पीने की आदतों में सुधार करना है.

गलत खानपान, गलत समय पर खाना और जरूरत से ज्यादा खाना आपकी सारी मेहनत पर पानी फेर सकता है. बहुत से लोग वजन कम करने के लिए फलों में शुगर ज्यादा होने की वजह से उन्हें अपनी डाइट से बाहर रखते हैं लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. फलों में बहुत से पोषक तत्व होते हैं जो आपके लिए बेहद जरूरी हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे फलों के बारे में बताएंगे जिनसे आपको बहुत सारे पोषक तत्व मिलेंगे और साथ ही आपके वजन को कम करने में मदद भी करेंगे.

आड़ू

आड़ू में ज्यादा कार्ब नहीं होता. 100 ग्राम आड़ू में केवल 10 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है. इसके अलावा आड़ू का ग्लाइकेमिक इंडेक्स भी कम होता है. ये वजन घटाने के लिए काफी उपयोगी है.

खरबूज 

खरबूज तो आप खूब खाते ही होंगे. खरबूज वजन घटाने के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है. जो लोग वजन कम करने में लगे हैं वो इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. 100 ग्राम खरबूज में केवल 8 ग्राम कार्बोहाइड्रेट मौजूद होता है.

स्ट्रॉबेरी
स्ट्रॉबेरी वजन घटाने के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर स्ट्रॉबेरी में बहुत कम कार्ब होते हैं. यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर डेटा (USDA) के मुताबिक 100 ग्राम स्ट्राबेरी में केवल 8 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है. इससे काफी आसानी से वजन कम किया जा सकता है.

तरबूज

तरबूज सुनकर तो कई लोगों के मुंह से पानी ही आ जाता है. क्या आप जानते हैं कि तरबूज भी वजन घटाने में मददगार साबित हो सकता है. तरबूज भी एक ऐसा फल है जिसमें बहुत कम कैलोरी होती है. USDA के अनुसार, 100 ग्राम तरबूज में केवल 8 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है.

ब्लैकबेरी 

जिनको वजन घटाना है वो ब्लैकबेरी भी इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन इसके लिए एक चीज का ध्यान रखना होगा कि इसका सेवन कभी किसी चीज के साथ या किसी चीज में मिलाकर न करें. 100 ग्राम ब्लैकबेरीज में केवल 10 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है.