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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की केंद्रीय मंत्री श्री चिराग पासवान के साथ अहम मुलाकात, राज्य में खाद्य प्रसंस्करण को मिलेगी नई दिशा..

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रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री श्री चिराग पासवान से उनके कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान छत्तीसगढ़ से जुड़े अनेक जनहित विषयों पर रचनात्मक और सार्थक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से राज्य में खाद्य सुरक्षा, कृषि-आधारित उद्योगों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM) संस्थान की स्थापना छत्तीसगढ़ में की जाए, ताकि राज्य के युवाओं को आधुनिक खाद्य तकनीक, उद्यमिता तथा नए रोजगारों से संबंधित उच्चस्तरीय प्रशिक्षण का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि कृषि दृष्टि से छत्तीसगढ़ एक मजबूत राज्य है और यहां ऐसे संस्थान से हजारों छात्रों, किसानों तथा खाद्य-आधारित उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री श्री चिराग पासवान ने इस प्रस्ताव को अत्यंत सकारात्मक रूप से लेते हुए कहा कि वे इस विषय पर हर संभव सहयोग देंगे और इसे गंभीरता से विचार में लेंगे।

मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने यह अनुरोध भी किया कि वर्ल्ड फूड इंडिया के रीजनल समिट का आयोजन रायपुर में किया जाए। उन्होंने कहा कि रायपुर की समृद्ध खाद्य परंपरा, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी और विविधता ऐसे आयोजन के लिए आदर्श गंतव्य बनाती है। यह फेस्टिवल क्षेत्रीय पाक-परंपराओं को वैश्विक पहचान देगा और नए खाद्य-आधारित उद्यमों के लिए बड़े अवसर उत्पन्न करेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह आयोजन दिल्ली के वर्ल्ड फूड इंडिया अथवा गुवाहाटी के नॉर्थ ईस्ट फूड फेस्ट की तर्ज पर हर दो वर्ष में आयोजित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में खाद्य वस्तुओं की जांच के लिए फूड टेस्टिंग लैब तथा खाद्य उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए फूड इर्रेडिएशन यूनिट स्थापित की जानी हैं, जिनके लिए राज्य केंद्र से सहयोग चाहता है। उन्होंने कहा कि धान तथा फल–सब्जी आधारित उद्योगों में बड़े निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को व्यापक गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने जानकारी दी कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को विशेष महत्व दिया गया है और निवेशकों को अनेक अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इसी के अंतर्गत Drools कंपनी द्वारा छत्तीसगढ़ में ₹1,000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है, जिससे लगभग 3,000 लोगों को रोजगार मिलेगा और इसका लाभ ग्रामीण व आदिवासी समुदायों तक पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को राइस ब्रान ऑयल हब के रूप में विकसित करना है, जिससे तेल आयात पर निर्भरता कम होगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को सुदृढ़ समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ और विकसित भारत 2047 का सपना इन्हीं प्रयासों के माध्यम से साकार होगा।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, सचिव श्री राहुल भगत तथा इन्वेस्टमेंट कमिश्नर श्रीमती रितु सेन उपस्थित थीं।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ पेवेलियन का किया अवलोकन; हस्तशिल्प, वन-उत्पाद और पारंपरिक कला ने खींचा देश-विदेश के खरीदारों का ध्यान…

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रायपुर : भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में आज छत्तीसगढ़ पेवेलियन आकर्षण का केंद्र बना रहा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के पेवेलियन का भ्रमण कर विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने  पेवेलियन में प्रदर्शित उत्पादों और नवाचारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ वैश्विक व्यापार मंचों पर लगातार अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, वनोपज आधारित उत्पाद और पारंपरिक कला वैश्विक बाजार में अपनी विशेष पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि “देश-विदेश के खरीदारों के बीच छत्तीसगढ़ी उत्पादों की बढ़ती मांग स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और हमारे कारीगरों के सम्मान को नई दिशा दे रही है। यह ‘आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़’ के हमारे संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।”

उन्होंने पवेलियन में प्रदर्शित कोसा सिल्क, धातु-शिल्प, ढोकरा कला, प्राकृतिक वन-आधारित उत्पाद, मिलेट-आधारित फूड प्रोडक्ट्स और सूक्ष्म उद्यमों के अभिनव मॉडल की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने पेवेलियन में बस्तर की समृद्ध विरासत और कलाकृतियों के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने डिजिटल टीवी पर प्रसारित डॉक्यूमेंट्री ‘बदलता बस्तर (आमचो बस्तर)’  का अवलोकन करते हुए कहा कि डॉक्यूमेंट्री में आज का नया बस्तर स्पष्ट दिखाई देता है। बस्तर बदल चुका है, और यह डॉक्यूमेंट्री उसी परिवर्तन का जीवंत अवलोकन कराती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य  सरकार जनजातीय और ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने के लिए विभिन्न योजनाओं और संस्थागत समर्थन को निरंतर मजबूत कर रही है।

इस अवसर पर उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, श्रीमती कमलेश जांगड़े एवं अन्य जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी उपस्थित थे।

देश की राजधानी में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का भव्य प्रदर्शन; लोक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति में भारत मंडपम में दिखी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छटा..

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रायपुर : राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आज छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परंपराओं का अद्भुत संगम दिखाई दिया। 44वें भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले  में छत्तीसगढ़ रजत जयंती वर्ष के अवसर पर  आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों ने अपनी पारंपरिक नृत्य-शैली और विविध लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पूरे वातावरण में उत्साह, ऊर्जा और आनंद भर दिया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, रायपुर लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, जांजगीर-चांपा लोकसभा सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, कांकेर लोकसभा सांसद श्री भोजराज नाग सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दीप प्रज्वलन कर की। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ पवेलियन का अवलोकन किया तथा विभिन्न स्टॉलों में प्रदर्शित कला-कृतियों, हस्तशिल्प और उत्पादों को देखा। उन्होंने कलाकारों और उद्यमियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की तथा उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश की राजधानी में “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” की गूंज सुनकर प्रत्येक छत्तीसगढ़ वासी गर्व से भर उठता है। 

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा रायपुर में देश के पहले डिजिटल जनजातीय संग्रहालय के लोकार्पण का उल्लेख करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ कला, संस्कृति और परंपराओं की समृद्ध भूमि है, जहाँ तीज-त्योहार, लोक-नृत्य और पारंपरिक कलाएँ आज भी उसी उत्साह और गरिमा के साथ संरक्षित हैं। उन्होंने मिलेट्स उत्पादन, स्थानीय हस्तशिल्प और जनजातीय परंपराओं को राज्य की असीम संभावनाओं का प्रतीक बताया तथा कहा कि राज्य सरकार कलाकारों के संरक्षण, आर्थिक सहयोग और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को और सशक्त बना रही है। मुख्यमंत्री ने देशवासियों को छत्तीसगढ़ आने तथा इसकी सादगी, सांस्कृतिक संपन्नता और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करने के लिए आमंत्रित किया।

सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक-कलाओं की एक से बढ़कर एक झलक प्रस्तुत की।गौरा-गौरी, भोजली, राउत नाचा, सुआ नृत्य, पंथी और करमा नृत्य जैसी लोक-शैली की सजीव प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मोहित कर लिया। सुआ नृत्य की गीतमय अभिव्यक्ति, राउत नाचा की जोशीली लय, पंथी की आध्यात्मिक छटा और करमा की मनभावन प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की विविधता और लोक परंपराओं की गहराई को प्रभावी रूप से सामने रखा। पूरे कार्यक्रम के दौरान दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा,  छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा, विधायक श्री संपत अग्रवाल, श्री प्रबोध मिंज, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्य सचिव श्री विकास शील,  पर्यटन, संस्कृति एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव श्री रोहित यादव, सीएसआईडीसी के महाप्रबंधक श्री विश्वेश कुमार, संस्कृति विभाग के संचालक श्री विवेक आचार्य, खादी ग्रामोद्योग सचिव श्री श्याम धावड़े, इन्वेस्टमेंट कमिश्नर श्रीमती ऋतु सैन, आवासीय आयुक्त श्रीमती श्रुति सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान 

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प्राईस सपोर्ट स्कीम के तहत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 एवं रबी वर्ष 2026-27 उपार्जन के लिए अवधि निर्धारित

कृषि मंत्री श्री नेताम ने एकीकृत किसान पोर्टल में अपने फसल रकबे का पंजीयन कराने किसानों से की अपील

रायपुर: कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा गतवर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम आशा) के तहत प्राईस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के अंतर्गत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अधिसूचित फसलें अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन एवं रबी विपणन वर्ष 2026-27 हेतु अधिसूचित फसलें चना, मसूर एवं सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्राथमिक सहकारी समिति (पैक्स) के माध्यम से उपार्जन किया जा रहा है। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने प्रदेश के किसानों से एकीकृत किसान पोर्टल में अपने फसल रकबे का पंजीयन कराने की अपील की है।

खरीफ फसलें मूंग, उड़द, मूंगफली एवं सोयाबीन की उपार्जन अवधि 01 दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 एवं अरहर फसल हेतु 15 फरवरी 2026 से 15 मई 2026 है तथा रवी फसलें सरसों हेतु उपार्जन अवधि 15 फरवरी 2026 से 15 मई 2026 एवं चना, मसूर फसल हेतु उपार्जन अवधि 01 मार्च 2026 से 30 मई 2026 है।

कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने किसानों से अपील करते हुए कहा है कि खरीफ फसलें अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन के उत्पाद के विक्रय हेतु अपने नजदीकी सहकारी समितियों में जाकर एकीकृत किसान पोर्टल में अपने फसल रकबे का अनिवार्य रूप से पंजीयन करावें। अधिक जानकारी हेतु कृषि विभाग के मैदानी अमले एवं जिले के उप संचालक कृषि से संपर्क करें।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने हाउसिंग बोर्ड की 2060 करोड़ की लागत वाली आवासीय परियोजनाओं का किया शुभारंभ…

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”राज्य के 26 जिलों में हाउसिंग बोर्ड की 55 परियोजनाओं से बनेंगे 12 हजार से अधिक किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण आवास, शंकर नगर बीटीआई ग्राउण्ड में 3 दिवसीय राज्य स्तरीय आवास मेला शुरू”

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर के शंकर नगर स्थित बीटीआई ग्राउण्ड में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय आवास मेले में छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की 2060 करोड़ की आवासीय परियोजनाओं का शुभारंभ किया। यह 55 परियोजना राज्य के 26 जिलों में शुरू होंगी, जिनके माध्यम से 12 हजार से अधिक किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण मकानों का निर्माण किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने हाउसिंग बोर्ड के एआई चैट बॉट और पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इसके माध्यम से उपभोक्ताओं को हाउसिंग बोर्ड की आवासीय परियोजनाओं की जानकारी सहजता से मिल सकेगी।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, विधायक श्री अनुज शर्मा, अध्यक्ष गृह निर्माण मंडल श्री अनुराग सिंहदेव, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष श्री जतीन साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की टीम बहुत बेहतर है। राज्य के लोगों को किफायती और गुणवत्तापूर्ण मकान उपलब्ध कराने के लिए नवाचार के साथ आगे बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने हाउसिंग बोर्ड के 790 करोड़ रूपए के कर्ज को अदा कर बोर्ड को कर्ज मुक्त कर दिया है ताकि बोर्ड बेहतर रणनीति के साथ काम करें। उन्होंने जरूरतमंदों एवं आवासहीनों को पक्का मकान दिए जाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ही नहीं वरन पूरे देश में संचालित प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 2 वर्षों में छत्तीसगढ़ राज्य में इस योजना के तहत 26 लाख लोगों को आवासों की मंजूरी दी गई। सबका आवास बन रहा है। पीएम जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए 32 हजार तथा बस्तर में आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए 15 हजार आवास की मंजूरी दी गई है।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर राज्य स्तरीय आवास मेले में आवास बुकिंग का प्रमाण पत्र, हाउसिंग बोर्ड के उपभोक्ताओं को आवास की चाबी तथा फ्री होल्ड मकान का प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के कार्यों की सराहना की और कहा कि बोर्ड की वर्तमान टीम, हाउसिंग के क्षेत्र में अच्छा काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आवास मेले की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब से मेला शुरू हुआ है रोड पर जाम लग गया है और टैªफिक व्यवस्था संभल नहीं रही है। उन्होंने राज्य में जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और कहा कि इसके लिए उन्होंने बजट में 14 हजार करोड़ रूपए का प्रावधान किया। डॉ. सिंह ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड की सभी परियोजनाओं को जिलों में अच्छा प्रतिसाद मिलेगा।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी ने हाउसिंग बोर्ड के काम-काज को बेहतर बनाने तथा उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिए गए फैसलों के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की विशेष पहल से छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड 790 करोड़ रूपए के कर्ज से मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि साल भर के भीतर हाउसिंग बोर्ड ने 672 करोड़ का बिजनेस किया है। लैंड डायवर्सन एवं फ्री होल्ड की रियायत सरकार ने देकर हाउसिंग बोर्ड और उपभोक्ताओं को राहत दी है। श्री चौधरी ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड उपभोक्ताओं की डिमांड के आधार पर आवासीय परियोजनाओं के निर्माण का काम शुरू करेगा।

कार्यक्रम को हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंहदेव ने भी सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हाउसिंग बोर्ड राज्य के सभी जिलों में मकान का निर्माण करेगा। हम अगले चरण में सभी विधानसभा क्षेत्रों में भी आवासीय परियोजनाएं लॉन्च करेंगे।

गौरतलब है कि बीटीआई ग्राउंड में यह राज्य स्तरीय आवास मेला 25 नवम्बर तक चलेगा। मेले के पहले दिन सुबह से ही मेला ग्राउंड में हाउसिंग बोर्ड की आवासीय परियोजनाओं की जानकारी लेने और आवास बुक कराने के लिए लोगों का हुजुम उमड़ पड़ा था। शंकर नगर टर्निंग प्वाइंट से खम्हारडीह जाने वाली रोड पर जाम की स्थिति निर्मित हो गई थी।

“दिल्ली धमाके की जांच में डॉक्टरों के बाद हथियार सप्लाई करने वाला इलेक्ट्रीशियन गिरफ्तार, SIA ने लिया एक्शन”

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दिल्ली कार धमाके के बाद जैश के पोस्टर और लॉकर से AK47 बरामद होने तक रोज नए-नए खुलासे हो और भारत विरोधी साजिश रचने वाले आंतकियों की गिरफ्तारियां हो रही हैं. इस सिलसिले में स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने श्रीनगर के बटमालू इलाके से पुलवामा के रहने वाले तुफैल नियाज को गिरफ्तार किया है.

एसआईए की टीम ने श्रीनगर के व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल से AC टेक्नीशियन को गिरफ्तार किया, जिस पर आरोप है कि उसने ही डॉ. उमर को हथियार दिए थे.

कौन है तुफैल?

तुफैल इलेक्ट्रीशियन का काम करता है. आतंकवाद में शामिल होने के लिए पहले भी दो बार जेल की सज़ा काट चुका है. सूत्रों से पता चला है कि दिल्ली ब्लास्ट का मास्टरमाइंड डॉ. उमर 2018 में श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उसी के इलाके में एक घर किराए पर लिया था.

माना जा रहा है कि डॉ. उमर और तुफैल पहली बार तभी संपर्क में आए थे. सूत्रों के मुताबिक, GMC मेडिकल कॉलेज में डॉ. आदिल के लॉकर से बरामद हथियार का इंतज़ाम तुफैल ने किया था और डॉ. उमर को दिया था, जिसने फिर हथियार डॉ. आदिल के पास रख लिया. SIA अभी इस मामले में तुफैल से पूछताछ कर रही है.

अधिकारियों ने बताया कि पुलवामा के इंडस्ट्रियल एस्टेट में AC टेक्नीशियन के तौर पर काम करने वाले भट को पुलवामा से हिरासत में लिया गया और पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया. जांच में सामने आया है कि लाल किले पर हुए धमाके का सुसाइड बॉम्बर, डॉ. उमर फारूक, GMC श्रीनगर में MBBS की पढ़ाई करते हुए, बटमालू में उसी जगह किराएदार के तौर पर रह रहा था, जहां नियाज रहता है. माना जा रहा है कि इसी नजदीकी की वजह से उनका संपर्क हुआ होगा.

कहां तक पहुंची जांच?

जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि तुफैल ने शायद एक पाकिस्तानी हैंडलर से हथियार खरीदा होगा, जिसका अभी तक पता नहीं चल पाया है. हैंडलर की पहचान और आने-जाने के तरीके का पता लगाने के लिए तलाश जारी है. वहीं तुफैल के माता-पिता ने कहा, उसे 11 नवंबर को पुलवामा में तब गिरफ्तार किया गया था जब वह वहां एक फैक्ट्री में काम कर रहा था. तुफैल की मां, नाजा बानो और उसके पिता का कहना है कि उसे पहले भी दो बार गिरफ्तार किया जा चुका है. एक बार, उसके पास से एक बंदूक मिली थी. डॉ. उमर उसी इलाके में रहता था, लेकिन उन्हें उसके संपर्क के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

माता-पिता ने कहा कि उन्होंने डॉ. उमर को यहां दो बार देखा है, 2018 में, जब वह किराएदार थे, लेकिन वह मुझे डॉक्टर जैसे नहीं लगे. अगर हमारा बेटा इसमें शामिल है तो उसे सज़ा दो लेकिन हमें अभी पता है कि वह इसमें शामिल नहीं है.

किसने साधी चुप्पी?

इस बीच, ऐसी खबरें हैं कि SIA ने एक डॉक्टर को भी हिरासत में लिया है, जिसकी पहचान डॉ. मुनीब उल इस्लाम, MBBS और MD, पड्डर, शोपियां के रहने वाले हैं, जो अभी श्रीनगर के बोन एंड जॉइंट हॉस्पिटल में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर काम कर रहे हैं. डॉक्टरों की हिरासत के बारे में अधिकारी अभी चुप हैं.

“Karnataka Politics: सिद्धारमैया या DKS, कर्नाटक में हो गया फैसला! तोते ने भविष्यवाणी कर बताया कौन बनेगा CM?”

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कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों सत्ता को लेकर जबरदस्त संघर्ष चल रहा है. क्या सिद्धारमैया राज्य के सीएम बने रहेंगे या उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को प्रमोट कर सीएम बनाया जाएगा, इसे लेकर अटकलें लगातार तेज हो रही हैं.

कांग्रेस में चल रही इस खींचतान पर बीजेपी भी व्यंग्य बाण छोड़ने में पीछे नहीं है. पार्टी ने कांग्रेस सरकार पर व्यंग्यात्मक हमला बोलते हुए पारंपरिक ‘पैरट फॉर्च्यून टेलिंग’ का अनोखा तरीका अपनाया. इसमें तोते से भविष्यवाणी करवाकर किसी व्यक्ति का कथित भविष्य जानने की कोशिश की जाती है.

सिद्धारमैया या DKS में कौन बनेगा सीएम?

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मांड्या में सड़क किनारे बैठे एक भविष्यवक्ता और उसके तोते के जरिए एक राजनीतिक नाटक रचा, जिसका वीडियो बाद में वायरल हो गया. वीडियो में कुछ भाजपा कार्यकर्ता तोते से यह ‘भविष्यवाणी’ कराते दिख रहे कि कर्नाटक का भविष्य किसके हाथ में बेहतर रहेगा – सिद्धारमैया या डी.के. शिवकुमार के.

इसके लिए उन्होंने तोते के सामने दो कार्ड रखे, जिसमें से एक का उसे चयन करना था. फिर तोते ने ‘चम्बू’ (एक पारंपरिक धातु का बर्तन जिसमें पानी रखा जाता है) वाला कार्ड चुना. इसके बाद जब पूछा गया कि क्या डी.के. शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री बनेंगे, तो तोते ने ‘फूल’ वाला कार्ड चुना.

‘कांग्रेस सरकार ने जनता के हाथ में ‘खाली चम्बू’ थमाया’

इस प्रतीकात्मक चयन के बहाने BJP ने कांग्रेस पर तीखा व्यंग्य कसा. पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना था कि कांग्रेस सरकार ने जनता के हाथ में ‘खाली चम्बू’ थमा दिया है’ और ‘फूलों से कान भर दिए हैं’. उनके कहने का मतलब ये था कि जनता को केवल भ्रमित किया गया है और उसे वास्तविक विकास या स्थिरता नहीं मिली. यह टिप्पणी कांग्रेस में सत्ता को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान पर तीखा तंज था.

उधर सत्ता संघर्ष में डी.के. शिवकुमार पूरी ताकत से मैदान में डटे हुए हैं. बागलकोट में उनके समर्थकों ने अपने नेता के समर्थन में बिल्कुल अलग ही रणनीति अपनाई. उन्होंने अपने नेता के लिए विशेष पूजा का आयोजन किया. इसके लिए डी.के. शिवकुमार की तस्वीर को मंदिर में रखकर उनके जल्द ही मुख्यमंत्री बनने की कामना की.

दोनों के बीच सत्ता को लेकर चल रही खींचतान

बताते चलें कि डी. शिवकुमार समर्थक कहते आए हैं कि पिछले चुनावों से पहले सिद्धारमैया और डीके के बीच में समझौता हुआ था कि दोनों के बीच सत्ता ढाई-ढाई साल के लिए बंटेगी. वहीं सिद्धारमैया लगातार इस बात पर अड़े हैं कि वे अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, चाहे DKS गुट कितनी भी बार नेतृत्व परिवर्तन की मांग करे.

कुल मिलाकर, कर्नाटक की राजनीति इस समय तोते की चुनी हुई भविष्यवाणियों की तरह ही अनिश्चित और दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है. सत्ता की कुर्सी आखिर किसके हाथ में जाएगी, यह फिलहाल राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक पहेली बनी हुई है.

पंजाब में राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज, अकाली दल का विरोध, आर्टिकल 240 क्या कहता है?

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संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार 131वां संविधान संशोधन विधेयक-2025 पेश करने वाली है। इस प्रस्ताव के तहत चंडीगढ़ को पंजाब के राज्यपाल के संवैधानिक दायरे से हटाकर एक अलग प्रशासक यानी लघु राज्यपाल (LG) नियुक्त किया जाएगा।

।वर्तमान में पंजाब का राज्यपाल ही चंडीगढ़ का प्रशासक होता है। इस योजना के सामने आने के साथ ही पंजाब की राजनीतिक हलचलों में तेजी आ गई है।

सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत लाया जाएगा। इसका मतलब है कि राष्ट्रपति सीधे इस केंद्र शासित प्रदेश के लिए कानून बना सकेंगे, ठीक वैसे ही जैसे अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप और दादरा-नगर हवेली जैसे बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में होता है।

पंजाब में राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज

इस प्रस्ताव के खिलाफ आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने विरोध जताया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे पंजाब की पहचान पर हमला बताते हुए कहा, ‘BJP की केंद्र सरकार द्वारा संविधान संशोधन के माध्यम से चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को खत्म करने की कोशिश सिर्फ एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि पंजाब की पहचान और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। फेडरल ढांचे की धज्जियां उड़ाकर पंजाबियों के हक छीनना बेहद खतरनाक है।

केजरीवाल ने आगे कहा, ‘जिस पंजाब ने देश की सुरक्षा, अन्न, पानी और मानवता के लिए हमेशा बलिदान दिया, आज उसी पंजाब को उसके हिस्से से वंचित किया जा रहा है। यह केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि पंजाब की आत्मा को चोट पहुंचाने जैसा है। चंडीगढ़ पंजाब का है और पंजाब का ही रहेगा।’ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस कदम को ‘पंजाब के हितों के खिलाफ साजिश’ बताया और कहा कि चंडीगढ़ पंजाब के गांवों को उजाड़कर बनाया गया था, इसलिए उसका हक केवल पंजाब को ही है।

अकाली दल का विरोध

शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि यह संविधान संशोधन बिल पंजाब के खिलाफ है और उन्होंने इसकी रणनीति तय करने के लिए कोर कमेटी की आपातकालीन बैठक बुलाई। उन्होंने कहा, ‘चंडीगढ़ पर पंजाब का हक किसी भी हालत में समझौते लायक नहीं है। अकाली दल हर स्तर पर इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाएगा।’

आर्टिकल 240 क्या कहता है?

आर्टिकल 240 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वह कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जरूरी नियम और कानून बना सकें। इसके तहत राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम या रेगुलेशन पुराने कानून या संसद द्वारा बनाए कानून को बदल या समाप्त भी कर सकते हैं। वर्तमान में यह नियम अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव और पुदुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हैं। इस संशोधन से चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिलेगा और राष्ट्रपति को सीधे कानून बनाने का अधिकार मिलेगा। इस प्रस्ताव के चलते पंजाब में राजनीतिक विरोध तेज हो गया है और इसे लेकर अगले कुछ हफ्तों में विवाद जारी रहने की संभावना है।

“Gold-Silver Price Today: एक हफ्ते में इतना महंगा हुआ सोना, चांदी के दाम में आई बड़ी गिरावट, जानें आज का लेटेस्ट रेट”

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भारतीय शेयर बाजार में पिछले हफ्ते जिस तरह भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, उसी तरह सोने की कीमतों में भी तेज़ बदलाव आया। बाजार में अनिश्चितता बढ़ने के साथ ही निवेशकों का रुझान गोल्ड की तरफ बढ़ा और इसका असर सीधे दामों पर दिखा।

24 कैरेट सोना 760 रुपये और 22 कैरेट 700 रुपये महंगा पिछले एक हफ्ते में सोने के दामों में अच्छी बढ़त देखी गई।

➤ 24 कैरेट सोना: 760 रुपये बढ़ा

➤22 कैरेट सोना: 700 रुपये महंगा

➤ 23 नवंबर को दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड का रेट 1,25,990 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गोल्ड का भाव मजबूत है और यह 4061.91 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड हो रहा है।

बड़े शहरों में सोने के दाम देश के चार बड़े शहरों में सोने के रेट लगभग एक समान रहे:

दिल्ली➤ 24 कैरेट: 1,25,990 रुपये/10 ग्राम ➤ 22 कैरेट: 1,15,500 रुपये/10 ग्राम

मुंबई, चेन्नई और कोलकाता ➤ 22 कैरेट: 1,15,350 रुपये/10 ग्राम ➤ 24 कैरेट: 1,25,840 रुपये/10 ग्राम ➤ चांदी 5,000 रुपये सस्ती हुई सोने के उलट इस हफ्ते चांदी के दामों में काफी गिरावट आई।

➤ 23 नवंबर को चांदी का रेट 1,64,000 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जो एक हफ्ते में करीब 5,000 रुपये कम है। ➤ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सिल्वर का वायदा भाव कमजोर होकर 49.56 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

MCX पर गोल्ड-सिल्वर का हाल वायदा बाजार (MCX) में भी सोने की चमक बढ़ी:

गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट

➤ 14 नवंबर: 1,23,561 रुपये/10 ग्राम

➤ 22 नवंबर (शुक्रवार):  1,24,191 रुपये/10 ग्राम ➤ यानी हफ्ते में अच्छी बढ़त देखी गई।

सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट

➤14 नवंबर: 1,56,018 रुपये/किलो ➤ 22 नवंबर: 1,54,151 रुपये/किलो

प्राचार्यों को कुत्तों की निगरानी की ड्यूटी, शिक्षकों में बवाल, राजनीतिक घमासान- कांग्रेस का तंज, शिक्षा विभाग के आदेश पर बढ़ता विरोध…

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दुर्ग: छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग का एक अजीबोगरीब आदेश सामने आने के बाद प्रदेश में शिक्षकों और राजनीतिक दलों में नाराज़गी तेज हो गई है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने एक आधिकारिक निर्देश जारी करते हुए सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों और हेडमास्टरों को स्कूल परिसर में घूमने वाले आवारा कुत्तों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंप दी है।

आदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन कुत्तों की गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी खतरे की स्थिति में नगर निगम / नगर पंचायत / जनपद पंचायत के डॉग कैचर को तुरंत सूचना दें। शिक्षकों में भारी विरोध ‘हम शिक्षक हैं या डॉग कंट्रोल टीम?’ इस आदेश के जारी होते ही शिक्षा जगत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

प्राचार्यों और हेडमास्टरों ने कहा कि, वे पहले से ही SIR, प्रशासनिक काम, शैक्षिक कार्यों और कई अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ उठा रहे हैं। अब उन पर ‘कुत्तों की निगरानी’ जैसी जिम्मेदारी डाल दी गई है। इससे स्कूलों में पढ़ाई और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होंगे। एक हेडमास्टर ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि ‘क्या अब शिक्षक कुत्ते पकड़वाने का काम भी करेंगे? शिक्षा विभाग असल ज़रूरतों को छोड़कर अनावश्यक आदेशों में उलझ गया है।’

राजनीतिक घमासान- कांग्रेस का तंज

इस निर्देश को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गर्म हो गई है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा, कि ‘बीजेपी सरकार में अब स्कूल प्राचार्यों को श्वान प्रभार दे दिया गया है। शिक्षा सुधार तो नहीं हुआ, लेकिन शिक्षकों को कुत्तों की निगरानी में जरूर लगा दिया गया है।’

शिक्षा विभाग के आदेश पर बढ़ता विरोध

आदेश के बाद शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे इस मुद्दे पर जल्द ही एक सामूहिक आपत्ति दर्ज कराएंगे। इस विवादित आदेश ने छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।