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छत्तीसगढ़ : सी-विजिल एप पर आईं 100 शिकायतें

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रायपुर।

चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद 18 मार्च से अभी तक सी-विजिल एप पर कुल 100 शिकायतें आईं हैं। इन पर तत्परता से कार्रवाई की जा रही है। 36 पर आवश्यक कार्रवाई की जा चुकी है, 45 रद कर दी गई हैं, क्योंकि वे बिना प्रमाण की थीं या अपूर्ण जानकारी वाली थी। एक पर निराकरण की कार्रवाई जारी है। सबसे अधिक बिना अनुमति के बैनर-पोस्टर लगाने की शिकायतें हैं। सी-विजिल एप से प्राप्त शिकायतों में सबसे अधिक बस्तर से 15 शिकायतें हैं। इसके बाद कबीरधाम 12 और रायपुर से 11 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इस एप्लीकेशन में नया फीचर भी जोड़ा गया है। अब शिकायतकर्ता अपनी शिकायत पर की गई कार्रवाई से अवगत हो सकते हैं। साथ ही इस पर कोई सुझाव हो तो वह भी दर्ज किया जा सकता है। विभागीय जानकारी के मुताबिक शिकायतों में प्रत्याशी समर्थकों द्वारा वस्तु वितरण, अनाधिकृत तौर पर बैनर-पोस्टर लगाने संबंधी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों के आधार पर निगरानी दल द्वारा जब्ती की कार्रवाई की गई है।

Chhattisgarh : टारगेट से पिछड़ा आयकर विभाग, चार दिन में जुटाने हैं 2000 करोड़

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रायपुर। वित्तीय वर्ष 2018-19 समाप्त होने में केवल चार दिन का समय बचा है और आयकर विभाग अपने टारगेट से काफी पीछे है। सूत्रों के अनुसार अभी भी विभाग को लगभग 2000 करोड़ से अधिक जुटाने हंै और इसके लिए विभाग व्यापारी वर्ग पर लगातार तिरछी नजर बनाए हुए है। बताया जा रहा है कि आयकर विभाग का इस साल का टारगेट 6400 करोड़ है।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि अभी की स्थिति में आयकर विभाग अपने टारगेट से 25 से 30 फीसद पीछे चल रहा है और इसे पूरा करने में ही लगा हुआ है। बताया जा रहा है कि इसके लिए विभाग द्वारा इस बार भी अधिकारी व्यक्तिगत रूप से करदाताओं को आगाह कर रहे हैं तथा कर विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है कि वे जागरूक करें।

आप इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर जाकर खुद भी रिटर्न भर सकते हैं। रिटर्न भरने के लिए आपके पास पैन नंबर होना चाहिए। अगर आप पहली बार रिटर्न भर रहे हैं तो आपको इस वेबसाइट पर अपना अकाउंट बनाना होगा। लॉग इन करने के बाद आप सही आइटीआर फॉर्म को चुनें। वहीं पर आपको सात आइटीआर फॉर्म दिखेंगे। रिटर्न फाइल करने से पहले आप पैनाल्टी और ब्याज जरूर भरें।

अगर आप लेट रिटर्न भरेंगे तो आपको 10 हजार रुपए तक की पैनाल्टी देनी होगी। आपकी कोई टैक्स देनदारी बनती हो या नहीं, आपको ये पैनाल्टी देनी होगी। देरी से रिटर्न भरने पर आपको टैक्स रिफंड पर ब्याज की सुविधा भी नहीं मिलेगी।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि टारगेट पूरा करने विभाग भी बड़ी तेजी के साथ अपने बकायादारों की संपत्ति नीलामी भी कराने लगा है। इसके लिए उसने बहुतों को नोटिस भी दे दिया है। इसके साथ ही अभी भी सराफा व रियल इस्टेट के बड़े-बड़े कारोबारियों के साथ ही नर्सिंग होम व राइस मिलरों पर विशेष नजर है।

एक-एक व्यापारी संगठन को भेजा जा चुका है नोटिस

सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग की ओर से इस बार एक-एक व्यापारिक संगठन को नोटिस भेजा जा चुका है और सभी से कहा गया है कि ईमानदारी से 31 मार्च के पहले अपना टैक्स भरें। हालांकि 15 मार्च तक जमा होने वाले एडवांस टैक्स में विभाग ने काफी वसुली भी की। उसके बाद भी बताया जा रहा है कि अभी टारगेट से पीछे चल रहा है।

खंगाले जा रहे पिछले साल के भी रिकार्ड

सूत्रों के अनुसार इस साल टारगेट से काफी पीछे देखते हुए आयकर विभाग इस साल के साथ ही पिछले साल के भी रिटर्न को खंगाल रहा है और इस आधार पर ही करदाताओं को नोटिस भेज रहा है। अभी तक की स्थिति में पांच हजार से भी अधिक को नोटिस भी भेजा जा चुका है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार पिछले साल और इस साल के रिटर्न मिलान के बाद बहुत से टैक्स चोर पकड़े जा रहे हैं।

लेट हुए तो नहीं कर पाएंगे रिटर्न फाइल

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 मार्च, 2019 है। आपको एसेसमेंट साल 2018-19 और वित्तवर्ष 2017-18 के लिए रिटर्न फाइल करना है। आपको इस तारीख तक रिटर्न फाइल कर देना चाहिए। आइटीआर फाइल करने के लिए टैक्स पेयर्स को आईटी विभाग लगातार संदेश भेज रहा है।

अगर आप 31 मार्च तक आइटीआर फाइल नहीं करेंगे तो आप एसेसमेंट साल 2018-19 के लिए रिटर्न फाइल नहीं कर पाएंगे।अगर आप रिटर्न नहीं भरते हैं तो टैक्स अधिकारी आपके खिलाफ कार्रवाई शुरू करेंगे।

अगर आपने कम आय दिखाई है तो टैक्स देनदारी का 50 फीसदी पेनल्टी के तौर पर देना होगा। वहीं आइटीआर फाइल नहीं करने पर 276सीसी के तहत तीन महीने से दो साल तक की जेल हो सकती है। अगर टैक्स देनदारी 25 लाख रुपए से ज्यादा है तो सजा छह महीने से लेकर सात साल तक हो सकती है।



Chhattisgarh : दो धारा में फंसे सिंहदेव, प्रतिष्ठा लगी है दांव पर

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रायपुर। लोकसभा की चुनावी लहर में प्रदेश के एक मंत्री टीएस सिंहदेव ऐसे हैं, जो दो धाराओं में फंसे हैं। एक तरफ तो वे न केवल सरगुजा लोकसभा सीट, बल्कि सरगुजा संभाग की सभी 14 विधानसभा सीटों की कमान संभाले हुए हैं। दूसरी तरफ, सिंहदेव के कंधे पर ओडिशा की भी जिम्मेदारी है। उनकी दोनों जगहों पर प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।

प्रत्याशियों की घोषणा के बाद कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री से लेकर सभी 11 मंत्रियों ने अपने प्रभार वाले जिलों और लोकसभा सीटों का मोर्चा संभाल लिया है। ताबड़तोड़ सभा और दौर चल रहा है। इन सबसे ज्यादा व्यस्तता और जिम्मेदारी सिंहदेव पर है।

मुख्यमंत्री बघेल ने उन्हें सरगुजा लोकसभा का प्रभारी बनाया है, लेकिन इस पूरे संभाग में आने वाली विधानसभा सीटों पर भी कांग्रेस को जिताने की जिम्मेदारी उन्हीं पर है। सरगुजा लोकसभा सीट के अंतर्गत आठ विधानसभा सीट प्रेमनगर, भटगांव, अंबिकापुर, प्रतापपुर, रामानुजगंज, सामरी, लुण्ड्रा, सीतापुर आती है, जबकि सरगुजा संभाग की बाकी छह सीट दो लोकसभा सीटों में बंटी हुई है।

रायगढ़ लोकसभा सीट में जशपुर, कुनकुरी, पत्थलगांव और कोरबा लोकसभा सीट में भरतपुर-सोनहट, मनेंद्रगढ़, बैकुण्ठपुर विधानसभा सीट आती है। विधानसभा चुनाव 2018 में संभाग की सभी 14 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी सिंहदेव को मिली थी। सिंहदेव के नेतृत्व में कांग्रेस को सभी सीटों पर जीत मिली, लेकिन कांग्रेस और सिंहदेव के लिए लोकसभा चुनाव चुनौती है।

इसका कारण यह है कि राज्य बनने के बाद हुए तीन लोकसभा चुनाव में हर बार कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। अब संभाग की सारी विधानसभा सीटें कांग्रेस के कब्जे वाली हैं, तो सिहंदेव पर जिम्मेदारी है कि वे इस बार भाजपा के किले में सेंध लगाएं। दूसरी तरफ, सिंहदेव को ओडिशा भी देखना है।

एक माह पहले ही राहुल गांधी ने उन्हें ओडिशा का प्रभारी बनाया है। ओडिशा के प्रभारी जितेंद्र सिंह भी हैं, लेकिन वे खुद चुनाव लड़ रहे हैं। सिंहदेव छत्तीसगढ़ के पहले ऐसे नेता हैं, जिन्हें पार्टी हाईकमान ने दूसरे राज्य का प्रभारी बनाया है। ओडिशा में पिछले चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई थी, लेकिन सिंहदेव की कोशिश है कि वे अच्छा परफॉर्मेंस देकर न केवल अपना, बल्कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस का भी राष्ट्रीय स्तर पर कद बढ़ाने में सफल हों।

पुनिया, बघेल ने बाकी सीट पर भी सभा करने कहा

सिंहदेव पर पहले से जिम्मेदारी ज्यादा है और अब छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कह दिया है कि उन्हें सरगुजा के अलावा बाकी 10 लोकसभा सीटों पर भी सभाएं करनी हैं। सिंहदेव ने सरगुजा से निकलकर लोकसभा चुनाव की पहली सभा मंगलवार को बस्तर सीट के किंजोली गांव में की।

30-30 सभाओं का रखा लक्ष्य

सिंहदेव ने ‘नईदुनिया” से चर्चा में कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 30-30 चुनावी सभा करने का लक्ष्य रखा है। ओडिशा में अब तक सात सभा हो चुकी है। चार या पांच अप्रैल को राहुल गांधी की भुवनेश्वर में सभा है। उसके बाद सरगुजा संभाग और प्रदेश की बाकी सीटों को फोकस किया जाएगा।

हर सीट पर बनी हुई है टीम

सिंहदेव ने कहा कि सरगुजा संभाग में पार्टी के सक्रिय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की टीम बनी हुई है, जिसने विधानसभा चुनाव में बहुत अच्छे से काम किया। लोकसभा चुनाव में भी वही टीम ग्राउंड लेवल पर काम कर रही है। तीन अप्रैल को संभाग के नेताओं-कार्यकर्ताओं की बैठक भी रखी है, जिसमें आगे की रणनीति पर बात होगी।



छत्तीसगढ़ : मॉडल आंचल हत्याकांड का सुराग ढूंढने पहुंची गुरुर पुलिस

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धमतरी/गुरुर 

। मॉडल आंचल यादव हत्याकांड से पर्दा उठाने के लिए गुरुर पुलिस सक्रिय हो गई है। धमतरी पुलिस और क्राइम ब्रांच के सहयोग से धमतरी में सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, क्योंकि मृतका धमतरी के विवेकानंद नगर में रहती थीं। इसके अलावा मृतका के फेसबुक अकाउंट को भी खंगालने की तैयारी है। अज्ञात आरोपित के खिलाफ जुर्म दर्ज कर लिया है।

गुरुर थाना क्षेत्र के ग्राम धानापुरी की नहर में 26 मार्च को आंचल की लाश रस्सी व पत्थर से बंधी मिली थी। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने पंचनामा कर शव का पोस्टमार्टम कराया। सिटी कोतवाली धमतरी पुलिस ने मृतिका आंचल के भाई को अंतिम संस्कार के लिए उनकी लाश सौंपी। मामले की तहकीकात के लिए धमतरी पहुंची गुरुर पुलिस को सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद फिलहाल कोई सुराग नहीं मिला है।

पेट पर धारदार हथियार से वार

पुलिस के अनुसार मृतिका के गले में मोटी रस्सी बंधी हुई थी। पेट पर धारदार हथियार से वार और शरीर पर चोट के कई निशान थे। लाश कहां से लाई गई, आंचल को क्यों मारा गया जैसे सवालों के जवाब पुलिस ढूंढ रहीं है। अब आरोपित तक पहुंचने के लिए पुलिस आंचल के फेसबुक एकांउट भी खंगालेगी। उनके फेसबुक साथियों की संख्या हजारों में है, ऐसे में वहीं से पुलिस को कुछ सुराग हाथ लग सकता है। कुछ अन्य स्तरों पर भी जांच जारी है।

ब्लैकमेलिंग में हुई गिरफ्तार

कुछ दिनों पहले रायपुर के सिविल लाइन थाने में ब्लैकमेलिंग और सेक्स स्कैंडल का मामला सामने आया था। बार नवापारा के रेंजर उदय सिंह ठाकुर की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने आंचल को गिरफ्तार किया था। उस पर रेंजर को ब्लैकमेल कर पांच करोड़ रुपए मांगने का आरोप था। वहीं आंचल ने रेंजर पर शादी का प्रलोभन देकर दैहिक शोषण का आरोप लगाया था।



छत्तीसगढ़ : चंदा मांगकर लड़ते थे चुनाव, अब वोट के लिए देते हैं पैसा

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दुर्ग। जीवन के अस्सी बसंत पार कर चुके गिरधारी नगर दुर्ग निवासी अर्जुन लाल साहू का कहना है कि समय के साथ सब कुछ बदल गया। चुनाव प्रचार के साथ मतदान की प्रक्रिया भी हाईटेक हो गई। रिटायर्ड बीएसपी कर्मी अर्जुन लाल साहू ने बताया कि उन्होंने अपना पहला वोट भिलाई में डाला था। तब चुनाव को लेकर लोगों में आज की तरह उत्सुकता देखने को नहीं मिलती थी।

समय के साथ चुनाव की तस्वीर ही नहीं प्रक्रिया भी बदल गई है। लोग इवीएम में वोट डालेंगे और चंद घंटे में ही चुनाव परिणाम आ जाएगा, ऐसा कभी नहीं सोचा था। पार्टी के नेता एक-दो रुपये का चंदा काटकर लोगों को सदस्य बनाते थे और चंदा से मिले पैसों से ही चुनाव लड़ते थे। आज नेता वोट लेने के लिए पैसे बांट रहे हैं।

पहले होता था शोर, अब दिखती है खामोशी

पहले चुनावों में उम्मीदवार और उनके समर्थक अपनी पार्टी और अपनी बात करतेे थे। इसके अलावा दीवार लेखन और लाउडस्पीकर से प्रचार किया जाता था। चारों ओर चुनाव का शोर सुनाई देता था। लोग चुनाव और उसके मुद्दे पर चर्चा करते थे, लेकिन आज लोग इस पर चर्चा करने से भी परहेज करते हैं। आज जमाना ऐसा आ गया है जहां चुनाव प्रचार के नाम पर व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं।

Chhattisgarh : किसानों के खातों में नहीं पहुंच पाई बीमा राशि

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रायपुर। रायपुर संभाग के लोकसभा क्षेत्रों के अंतर्गत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना नौकरशाही की उदासीनता और तकनीकी पेच में उलझ गई। रायपुर समेत प्रदेशभर में फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों के खाते में लगभग 600 करोड़ की राशि ट्रांसफर करना है, लेकिन अब तक सिर्फ 314 करोड़ 36 लाख 63 हजार की राशि दो लाख 580 किसानों के खातों में पहुंची है।

बाकी खरीफ वर्ष 2018-19 के फसल बीमा दावे के भुगतान की कार्रवाई चल रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो चुनावी प्रक्रियाओं के अलावा लिंकअप में दिक्कतें आने के कारण किसानों के खाते में राशि ट्रांसफर करने में विलंब हुआ है।

बीमा कंपनियों द्वारा बीमा दावा भुगतान राशि की गणना अभी की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ वर्ष 2016 से लागू की गई है।

प्रदेश के लगभग 21 जिलों में ईफको-टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड व छह जिलों में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

रायपुर में खरीफ मौसम की तुलना में रबी फसल का रकबा बहुत कम है। रायपुर को छोड़कर बलौदाबाजार, धमतरी, भाटापारा आदि जिले इनमें शामिल हैं। इस तरह से लगभग राज्य के कुल 12 लाख 94 हजार 169 किसानों ने फसल बीमा कराया है।

कृषि संचालनालय के अधिकारियों ने बताया कि खरीफ वर्ष 2018-19 में रायपुर में 16 हजार किसानों को 25 करोड़, बलौदाबाजार जिले में 25 हजार 586 किसानों को 33 करोड़ 48 लाख, दुर्ग जिले में 13 हजार 379 किसानों को 15 करोड़ 46 लाख, धमतरी में 18 हजार किसानों को 12 करोड़ आठ लाख रुपये का वितरण किया जाना है। अन्य जिलों में फसल बीमा दावा भुगतान की कार्रवाई चल रही है।

लक्ष्य से पिछड़े

किसानों के खाते में मार्च तक फसल बीमा की राशि पहुंच जानी थी। इसके बावजूद भुगतान किसानों को नहीं दिया गया था। इधर, कृषि संचालनालय के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि जल्द ही बीमा कंपनियां रायपुर में शेष राश्ाि देंगी। फसल बीमा दावा राशि संबंधित बैंक शाखाओं को जारी कर दिया जाएगा।

केस- 01 

दो साल से नहीं मिला लाभ

रायपुर से सटे तिल्दा ब्लॉक के दो ग्राम पंचायत तुलसी (मानपुर) और नकटी के 147 किसानों को दो साल पहले खरीफ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का भुगतान अब तक नहीं मिला है। बताया जाता है कि फसल बीमा पोर्टल में गलत एंट्री के कारण उन्हें यह नुकसान उठाना पड़ रहा है।

केस- 02 

बीमा राशि के लिए लगा रहे चक्कर 

वर्ष 2017 खरीफ धान के तहत ग्राम तुलसी के 90 और नकटी के 57 किसानों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के तिल्दा शाखा के प्राथमिक कृषि सहकारी समिति सरफोंगा पं.क्र. 758 में बीमा की प्रीमियम राशि जमा की थी। फसल कटाई प्रयोग आंकड़ों के अनुसार फसल क्षतिपूर्ति 25400.24 रुपयं हेक्टेयर के हिसाब से बीमा क्षतिपूर्ति राशि दोनों गांवों का करीब 40 लाख भुगतान होना चाहिए थी, लेकिन बीमा क्षतिपूर्ति राशि नहीं मिली है।



Chhattisgarh : सात लोकसभा क्षेत्र के लिए नामांकन आज से

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रायपुर। लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के लिए 28 मार्च को अधिसूचना जारी हो रही है। दो चरणों की नामांकन दाखिले की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू ने बताया कि अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रदेश में तीसरे और अंतिम चरण में सात लोकसभा क्षेत्रों के लिए नामांकन करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

तीसरे चरण के लिए प्रत्याशी अपना नामांकन चार अप्रैल तक अवकाश को छोड़कर कार्यालयीन दिवसों में प्रात: 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक दाखिल होंगे। पांच अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी। प्रत्याशी आठ अप्रैल तक नामांकन पत्र वापस ले सकते हैं।

इस चरण में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जांजगीर, रायगढ़, कोरबा व सरगुजा क्षेत्रों के मतदाता 23 अप्रैल को वोट देंगे। तीसरे चरण में एक करोड़ 17 लाख 48 हजार 439 मतदाता हैं। इसमें 63 लाख 84 हजार 735 पुस्र्ष, 53 लाख 63 हजार 102 महिला और 602 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं।



Indore lok sabha seat: सुमित्रा महाजन बोलीं- इंदौर से पीएम मोदी चुनाव लड़ें तो कैसा रहेगा?

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इंदौर

लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम इंदौर लोकसभा सीट के लिए आगे बढ़ाकर नया पासा फेंका है। मंगलवार को भाजपा कोर कमेटी की बैठक के बाद उन्होंने लोकसभा सीट के लिए प्रधानमंत्री के नाम का जिक्र छेड़ा तो दूसरे नेता चौंक गए। ताई ने इसे सामान्य चर्चा का हिस्सा बताया है। उधर भाजपा कोर कमेटी ने भी इस तरह के किसी प्रस्ताव को प्रदेश संगठन को भेजने से इनकार किया है।

संगठन की आगामी गतिविधियों के लिए मंगलवार दोपहर भाजपा कार्यालय में कोर कमेटी की बैठक हुई। इसमें लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन भी शामिल हुईं। बैठक खत्म होने के बाद महाजन ने कहा कि ‘इंदौर सीट भाजपा की परंपरागत सीट है। यहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लड़ें तो कैसा रहेगा?’ इस पर भाजपा नगर अध्यक्ष गोपी नेमा ने हामी भरते हुए कहा कि यदि ऐसा हुआ तो अच्छा हो जाएगा।

ताई की तरफ से हुई इस पेशकश के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। महाजन ने इस बारे में कहा कि यह चर्चा बैठक का हिस्सा नहीं थी और यह बात मैंने मजाकिया लहजे में कही थी। उधर भाजपा नगर अध्यक्ष नेमा ने कहा कि कोर कमेटी की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी को इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाने का प्रस्ताव नहीं भेजा गया है।

हर वार्ड में ताई लेंगी बैठकें

भाजपा की अब तक जारी सूची में महाजन का नाम नहीं है लेकिन वे संसदीय क्षेत्र में सक्रिय हैं। कमेटी बैठक में तय हुआ कि ताई हर मंडल के वार्डों के पदाधिकारियों की बैठक लें। ताई ने पहली बैठक मंगलवार को विस क्षेत्र क्रमांक 2 में ली। बैठकों का दौर 13 अप्रैल तक चलेगा।



Lok Sabha Election: लालकृष्ण आडवाणी को टिकट नहीं, सिंधी समाज नाराज

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लोकसभा चुनावों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। उम्मीदवारों की सूची जैसे-जैसे सामने आती जा रही हैं, नाराजगी के स्वर भी तेज होते जा रहे हैं। हमेशा भाजपा का झंडा थामकर खड़ा रहने वाला सिंधी समाज इस बार खासा नाराज है। कारण है समाज के एक भी प्रतिनिधि को लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया है। बीते चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी गांधीनगर से सांसद थे। इस बार उनका टिकट काटने के बाद अब तक घोषित नामों में किसी समाजजन को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है।

पदाधिकारियों के अनुसार सिंधी मतदाताओं की प्रदेश और आसपास के राज्यों में सर्वाधिक संख्या इंदौर और भोपाल में है। बावजूद इसके विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने समाज के उम्मीदवारों को मौका नहीं दिया। अब समाज की कोर कमेटी टिकट वितरण के बाद बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय करेगी। सिंधी समाज के पदाधिकारियों ने पिछले दिनों दिल्ली पहुंचकर भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा उठाया था। समाज ने आपत्ति लेते हुए कहा था कि समाज को प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाना ठीक नहीं है। समाज जनसंघ के गठन से ही भाजपा के साथ खड़ा है। इस पर भाजपा पदाधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया था कि आगे कहीं एडजस्ट कर दिया जाएगा।

समाज पदाधिकारियों के अनुसार इंदौर विधानसभा चार और भोपाल के बैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है। मध्यप्रदेश में करीब 14 लाख सिंधी मतदाता हैं। प्रदेश के 30 जिलों की 50 विधानसभाओं में भी सिंधी समाज के प्रभावी वोट हैं। इंदौर में सवा लाख व भोपाल में डेढ़ लाख मतदाता हैं। रीवा, कटनी, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, बुरहानपुर, खंडवा में भी अच्छी संख्या में समाज के मतदाता है। गुजरात व राजस्थान के इलाकों में प्रभावी संख्या की वजह से समाज दावेदारी करता रहा है।

भाजपा से नाराजगी को भुनाने में जुटी कांग्रेस

सिंधी समाज की इस नाराजगी को भुनाने के प्रयास कांग्रेस ने भोपाल में शुरू कर दिए हैं। दरअसल बैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र में सिंधी मतदातओं की संख्या खासी अधिक है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां से सिंधी उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया था जबकि कांग्रेस ने सिंधी उम्मीदवार को मैदान में उतारा था। अब जबकि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भोपाल से प्रत्याशी बनाया है। भाजपा में यहां से उम्मीदवार को लेकर मंथन चल रहा है। कांग्रेस साढ़े चार लाख मुस्लिम और करीब डेढ़ लाख सिंधी मतदाताओं को लुभाने में जुटी है। कांग्रेस नेताओं ने सिंधी समाज के पदाधिकारियों से संपर्क कर भाजपा की वादाखिलाफी और कांग्रेस द्वारा समाज के पदाधिकारी को विधानसभा चुनाव में टिकट दिए जाने को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।

आडवाणी को राज्यसभा में भेज दो

दिल्ली में भाजपा के पदाधिकारियों से चर्चा हुई है। समाज ने मांग की है कि आडवाणी को राज्यसभा में भेजें और भारत रत्न दे दें। 50 हजार एंग्लोइंडियन में से दो को राज्यसभा में भेज देते हैं तो सिंधी समाज से एक सीट तो राज्यसभा के लिए देना चाहिए। – श्रीकांत भाटिया, पूर्व उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय सिंधी भाषा एवं विकास परिषद

पार्टी टिकट नहीं देगी तो समाज अपना स्टैंड तय करेगा। हमारी कोर कमेटी की मीटिंग होने वाली है। उसमें फैसला कर सार्वजनिक करेंगे। -भगवानदेव इसरानी, सिंधु पंचायत के अध्यक्ष व पूर्व प्रमुख सचिव मप्र विधानसभा

उपेक्षा ठीक नहीं…

पिछली बार भी एक ही सीट मिली थी आडवाणी को। अब तक जो सीट घोषित हुई है उसमें से समाज को एक भी सीट नहीं दी गई है। जनसंघ के गठन के दौरान ही 30 प्रतिशत से ज्यादा सिंधी समाज के लोग साथ थे। अब भी 80 प्रतिशत से ज्यादा समाज का वोट भाजपा को ही जाता है। हम अमित शाह से चर्चा करेंगे कि सिंधी समाज की उपेक्षा ठीक नहीं है। – घनश्याम कुकरेजा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय सिंधु सभा नागपुर

हर स्तर पर समाज को साथ लेकर चल रही भाजपा

सिंधी समाज हमेशा भाजपा से जुड़ा रहा है। जहां-जहां आवश्यकता हुई हर स्तर पर संगठन और सत्ता में उचित स्थान मिला है। सिंधी समाज राष्ट्रवादी समाज है, उन्होंने भारत के विभाजन के दर्द को सहा है। अपने पुरुषार्थ से समाज ने देश में स्थान बनाया है। पार्टी हमेशा उनके साथ है, उपेक्षा का सवाल ही पैदा नहीं होता।– कैलाश विजयवर्गीय, राष्ट्रीय महासचिव भाजपा



छत्तीसगढ़ : जहां किला फतह करने में कांग्रेस को लग गए 23 वर्ष

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रायपुर। स्टील सिटी भिलाई की पहचान विश्वव्यापी है। यह इलाका दुर्ग संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है जो भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक कहा जाता रहा है। यही वजह है कि दुर्ग का किला फतह करने में कांग्रेस को 23 वर्ष लग गए। 1996 से 2009 तक लगातार पांच चुनावों में भाजपा ने यहां से जीत दर्ज की। इस दौरान 2009 में इस सीट और यहां की सांसद सरोज पांडेय के नाम पर एक अनोख वर्ल्ड रिकार्ड दर्ज हुआ।

ऐसा नहीं है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन खराब था। पार्टी इस संसदीय क्षेत्र में शामिल नौ विधानसभा सीटों में से कुछ पर लगातार जीत दर्ज करती रही है। इसके बावजूद लोकसभा चुनाव में बढ़त नहीं बना पा रही थी। इस बार कांग्रेस ने प्रतिमा चंद्राकर के स्र्प में महिला प्रत्याशी को मैदान में उतारा है तो भाजपा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रिश्तेदार और परंपरागत प्रतिद्वंद्वी विजय बघेल को टिकट दिया है।

ताम्रध्वज ने खत्म किया था वनवास

दुर्ग संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के वनवास को ताम्रध्वज साहू ने 2014 के आम चुनाव में खत्म किया था। साहू ने लोकसभा चुनाव में नौ में से पांच सीटों पर बढ़त के साथ जीत दर्ज की थी।

भाजपा ने बघेल पर खेला दांव

भाजपा ने इस बार इस सीट से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रिश्तेदार विजय बघेल को मैदान में उतारा है। विजय 2008 के विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल को हरा चुके हैं।

विधानसभा में बराबरी, लोकसभा में एकतरफा

2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान इस संसदीय क्षेत्र में विधानसभा की कुल आठ सीटें थीं। 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के खाते में चार-चार सीट थीं, लेकिन लोकसभा में भाजपा ने एकतरफा आठों सीटों पर बढ़त बनाई। 2008 में कांग्रेस चार और भाजपा पांच विधानसभा सीट जीती, लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को केवल तीन सीटों पर बढ़त मिली।

ताराचंद ने बनाया भाजपा का अभेद किला

दुर्ग संसदीय क्षेत्र को ताराचंद साहू ने भाजपा के लिए अभेद किला बना दिया। साहू 1996 में कांग्रेस के प्यारेलाल बेलचंद को हरा कर संसद पहुंचे। इसके बाद से लगातार चार बार चुने गए और 2009 तक सांसद रहे। 2009 में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया।

बघेल से लेकर चौबे तक सब हारे

भाजपा के ताराचंद साहू ने इस सीट से कांग्रेस के भूपेश बघेल (मौजूदा मुख्यमंत्री) से लेकर प्रदीप चौबे (मंत्री रविंद्र चौबे के भाई) तक को मात दी। प्रदीप चौबे पहले 1999 में ताराचंद से फिर 2009 में सरोज पाण्डेय से परास्त हुए।

गिनीज और लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हुआ नाम

दुर्ग लोकसभा सीट और वहां से 2009 में सांसद बनी सरोज पांडेय के नाम एक अनोख रिकार्ड है। यह रिकार्ड गिनीज और लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड दर्ज है। दरअसल दुर्ग की महापौर रहते सरोज पांडेय ने 2008 का विधानसभा चुनाव लड़ा। वैशालीनगर सीट से वे चुनकर विधानसभा पहुंचीं। इसके चार-पांच महीने के बाद हुए लोकसभा चुनाव (2009) में पार्टी ने उन्हें दुर्ग लोकसभा से टिकट दे दिया। इस चुनाव में भी सरोज जीत गईं। एक ही समय पर महापौर, विधायक और सांसद रहने वाली वे पहली महिला बन गईं।

यह रहा था परिणाम

वर्ष 2003 2004 2008 2009 2013 2014 2018

भाजपा 04 08 05 06 07 04 01

कांग्रेस 04 00 04 03 02 05 08

लोकसभा चुनावों में वोट शेयर

वर्ष भाजपा कांग्रेस

2004 50.24 42.17

2009 31.27 30.17

2014 44.43 45.79