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पाकिस्तानी ‘जासूस ड्रोन’ मारा गया, राजस्थान सीमा पर 24 घंटे के भीतर पाक की दूसरी ‘नापाक’ साजिश नाकाम

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बॉर्डर पर पाकिस्तान अपनी हकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक तरफ जहां पाकिस्तानी आर्मी सीमा पर सीजफार का उल्लंघन कर रही है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी जासू ड्रोन भारत की सीमा में घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं। राजस्थान में सीमा पर 24 घंटे के बीतर सेना ने पाकिस्तान के दो जासूस ड्रोन को मार गिराया है।

राजस्थान के गंगानगर सेक्टर में बीएसफ के जवानों ने भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे एक और पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया है। रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है। राजस्थान में रक्षा विभाग के जन संपर्क अधिकारी कर्नल संबित घोष ने बताया, “शनिवार की रात को गंगानगर सेक्टर में करीब 7.30 बजे एक मानव रहित वाहन की घुसपैठ की खबर मिली थी। ड्रोन पर हमला कर उसे गिरा दिया गया।” राजस्थान सीमा पर शनिवार को पाकिस्तानी जूस ड्रोन द्वारा 24 घंटे के भीतर यह दूसरी घुसपैठ की कोशिश थी।

इससे पहले शनिवार सुबह करीब 5 बजे गंगानगर के पास हिंदूमलकोट सीमा पर एक अन्य ड्रोन ने भी भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश की थी। जिसे देखते ही जवानों ने गोलीबारी शुरू कर दी और मार गिराया था।

पाकिस्तान पिछले 11 दिनों में राजस्थान सीमा पर 4 ड्रोन भेज चुका है। इससे पहले 26 फरवरी को बारमर सीमा पर एक ड्रोन को सेना ने मार गिराया था। वहीं, 4 मार्च को एक अन्य पाकिस्तानी जासूस ड्रोन को सुखोई लड़ाकू विमान ने मार गिराया था।

जैसलमेर जिला के पुलिस अधीक्षक किरन कंग ने कहा कि शनिवार को ही सुरक्षा एजेंसियों ने एक संदिग्ध जासूस को गिरफ्तार किया था। उसकी पहचान जैसलमेर के सोनू गांव निवासी फतान खान के रूप में हुई है।

उधर, जम्मू-कश्मीर में सीमा पर पाकिस्तानी आर्मी की ओर से सीजफायर का उल्लंघन जारी है। एक बार फिर पाकिस्तानी आर्मी ने पुंछ सेक्टर के कृष्णा घाटी में सीजफायर का उल्लंघन किया है। भारतीय सेना ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया है। इससे पहले शनिवार को भी सीमा पर तीन जगहों पर पकिस्तान की ओर से सीजफायर का उल्लंघन किया गया था।

‘पाकिस्‍तान के पास युद्ध लड़ने की क्षमता नहीं, आतंक को देता है पनाह’ : CISF समारोह में बोले PM मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 50वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में हिस्सा ले रहे हैं. इसके लिए वह गाजियाबाद के इंदिरापुरम में सीआईएसएफ के 5वें बटालियन कैंप पहुंचे हैं. पीएम मोदी को यहां गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. वहीं पीएम मोदी ने यहां सीआईएसएफ के जवानों को सम्‍मानित भी किया.

पीएम मोदी ने इस दौरान सीआईएसएफ को 50वें स्‍थापना दिवस समारोह की बधाई दी. उन्‍होंने देश के वीर जवानों को नमन भी किया. उन्‍होंने पाकिस्‍तान पर निशाना साधते हुए कहा कि पड़ोसी देश के पास युद्ध लड़ने की क्षमता नहीं है. पाकिस्‍तान आतंकवाद को पनाह देता है. जब आतंक का घिनौना रूप अलग-अलग रूपों में प्रकट होता हो, ऐसे में देश की सुरक्षा अपने आप में बड़ी चुनौती होती है. यहां मैं उस ऊर्जा को महसूस कर पा रहा हूं, जो देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है.

पीएम मोदी ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की. 

पीएम मोदी भारतीय वायुसेना के हेलीकाप्टर से आयोजन स्थल पर पहुंचे. उन्‍होंने सबसे पहले कैंप के परिसर में शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की.

सीआईएसएफ को दी बधाई
पीएम मोदी ने कहा कि स्वर्ण जयंती के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचने के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई. एक संगठन के नाते आपने जो 50 वर्ष पूरे किए हैं वो प्रशंसनीय उपलब्धि है. सीआईएसएफ से जुड़े आप सभी लोगों ने राष्ट्र की संपदा को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई है. नए भारत की नई और आधुनिक व्यवस्थाओं को सुरक्षित करने के लिए आप निरंतर आगे बढ़ रहे हैं.

उन्‍होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के सपनों को साकार करने में सीआईएसएफ एक महत्वपूर्ण इकाई है. 50 साल तक लगातार हजारों लोगों ने आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इसे विकसित किया है, तब जाकर ऐसा संगठन बनता है.

बेटियों का अभिनंदन
पीएम मोदी ने कहा कि सीआईएसएफ में अन्‍य केंद्रीय बलों की तुलना में बेटियों की संख्‍या काफी ज्‍यादा है. मैं इसके लिए उन बेटियों का और उनके मां-पिता का अभिनंदन करता हूं. उन्‍होंने मेट्रो और एयरपोर्ट में सीआईएसएफ सुरक्षा की बात करते हुए कहा कि एक संगठन को सुरक्षा देना, जहां 30 लाख तक लोग आते हों, जहां हर चेहरा अलग हो, सबका व्यवहार अलग हो. ये काम किसी वीआईपी को सुरक्षा देने से कई गुना बड़ा काम है.

बखूबी निभाई है जिम्‍मेदारी
देश में ही नहीं विदेश में भी जब मानवता संकट में आई है तब CISF ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है. आपदाओं की स्थिति में भी आपका योगदान हमेशा से सराहनीय रहा है. केरल में आई भीषण बाढ़ में आपने राहत, बचाव के काम में दिन रात एक करके हजारों लोगों का जीवन बचाने में मदद की.

कांग्रेस के उम्मीदवार जमानत गंवा बैठेंगे : केजरीवाल

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 दिल्ली में अपने दम पर चुनाव लड़ने के कांग्रेस के ऐलान के बाद मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को पार्टी को ‘अहंकारी’ करार देते हुए दावा किया कि चुनाव में उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,मुस्तफाबाद में एक जनसभा में केजरीवाल ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने कांग्रेस को गठबंधन करने के लिए राजी करने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं समझ पायी। उन्होंने दावा किया, कांग्रेस लोकसभा चुनाव में दिल्ली में अपनी जमानत गंवा बैठेगी।

लोकसभा चुनाव 2019: आज शाम 5 बजे हो सकता है तारीखों का ऐलान

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चुनाव आयोग आज शाम 5 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा. इस दौरान वह आगामी लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है. बताया जा रहा है कि ये चुनाव अप्रैल-मई में 7-8 चरणों में कराए जा सकते हैं.

इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि चुनाव आयोग पहले की तरह ही आंध्र प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ करा सकता है.

3 जून को खत्म हो रहा है मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल

मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल 3 जून को खत्म हो रहा है. लोकसभा चुनाव कार्यक्रम का ऐलान होते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी. इसके बाद सरकार नीतिगत फैसले नहीं ले सकेगी.

जम्मू-कश्मीर के लिए यह संभावना

जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग हो चुकी है, इसलिए चुनाव आयोग मई में खत्म हो रही 6 महीने की समयसीमा के अंदर वहां भी चुनाव कराने के लिए बाध्य है. ऐसे में माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ होंगे. मगर भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव के चलते राज्य के जटिल सुरक्षा हालात को ध्यान रखते हुए ही इस बारे में कोई फैसला किया जाएगा.

पहले चरण की वोटिंग के लिए मार्च के आखिर तक आएगा नोटिफिकेशन: सूत्र

न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पहले चरण की वोटिंग के लिए मार्च के आखिर तक नोटिफिकेशन जारी हो सकता है और इसके लिए वोटिंग अप्रैल के पहले हफ्ते में हो सकती है.

आज शाम चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस

चुनाव आयोग आज शाम 5 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा. इस दौरान वह आगामी लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है.

विवेचना : रेज़ांग ला की वो लड़ाई जहां 113 भारतीय सैनिकों की हुई थी मौत

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1962 में चीन के साथ हुई लड़ाई में अदम्य साहस का प्रदर्शन करने के लिए मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया

बात फ़रवरी 1963 की है. चीन से लड़ाई ख़त्म होने के तीन महीने बाद एक लद्दाख़ी गड़ेरिया भटकता हुआ चुशूल से रेज़ाग ला जा पहुंचा. एकदम से उसकी निगाह तबाह हुए बंकरों और इस्तेमाल की गई गोलियों के खोलों पर पड़ी. वो और पास गया तो उसने देखा कि वहाँ चारों तरफ़ लाशें ही लाशें पड़ी थीं…. वर्दी वाले सैनिकों की लाशें.

जानीमानी सैनिक इतिहासकार और भारतीय सेना के परमवीर चक्र विजेताओं पर मशहूर किताब ‘द ब्रेव’ लिखने वाली रचना बिष्ट रावत बताती हैं, ‘वो गड़ेरिया भागता हुआ नीचे आया और उसने भारतीय सेना की एक चौकी पर इसकी सूचना दी. जब सैनिक वहाँ पहुंचे तो उन्होंने देखा कि हर मृत भारतीय सैनिक के शरीर पर गोलियों के कई-कई ज़ख्म थे. कई अभी भी अपनी राइफ़लें थामे हुए थे. नर्सिंग असिस्टेंट के हाथ में सिरिंज और पट्टी का गोला था.”

उन्होंने कहा, “किसी की राइफ़ल टूट कर उड़ चुकी थी, लेकिन उसका बट उसके हाथों में ही था. हुआ ये था कि लड़ाई ख़त्म होने के बाद वहाँ भारी हिमपात हो गया और उस इलाके को ‘नो मैन्स लैंड’ घोषित कर दिया गया. इसलिए वहाँ कोई जा नहीं पाया.”

रचना बिष्ट कहती हैं, “लोगों को इनके बारे में पता ही नहीं था कि इन 113 लोगों के साथ हुआ क्या था. लोगों को यहाँ तक अंदेशा था कि वो युद्धबंदी बन गए हैं. तब तक इनके नाम के आगे एक तरह का बट्टा लग गया था. उनको कायर करार कर दिया गया था. उनके बारे में मशहूर हो गया था कि वो डर कर लड़ाई से भाग गए थे.”

वो कहती हैं, “दो तीन लोग जो बच कर आए उनका लोगों ने हुक्का-पानी बंद कर दिया था. यहाँ तक कि उनके बच्चों को स्कूलों से निकाल दिया गया. एक एनजीओ को बहुत बड़ा अभियान चलाना पड़ा कि वास्तव में ये लोग हीरो थे, कायर नहीं थे.”

कभी नहीं देखी थी बर्फ़

1962 में 13 कुमाऊँ को चुशूल हवाईपट्टी की रक्षा के लिए भेजा गया था. उसके अधिकतर जवान हरियाणा से थे जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में कभी बर्फ़ गिरते देखी ही नहीं थी. उन्हें दो दिन के नोटिस पर जम्मू कश्मीर के बारामूला से वहाँ लाया गया था. उन्हें ऊँचाई और सर्दी में ढ़लने का मौका ही नहीं मिल पाया था. उनके पास शून्य से कई डिग्री कम तापमान की सर्दी के लिए न तो ढ़ंग के कपड़े थे और न जूते. उन्हें पहनने के लिए जर्सियाँ, सूती पतलूनें और हल्के कोट दिए गए थे.

मेजर शैतान सिंह ने अपने जवानों को पहाड़ी के सामने की ढलान पर तैनात कर दिया था. 18 नवंबर, 1962 को रविवार का दिन था. ठंड रोज़ की बनिस्बत कुछ ज़्यादा पड़ रही थी और रेज़ांग ला में बर्फ़ भी गिर रही थी.

ऑनरेरी कैप्टेन सूबेदार राम चंद्र यादव

उस लड़ाई में ज़िंदा बच निकलने वाले ऑनरेरी कैप्टेन सूबेदार राम चंद्र यादव जो आजकल रेवाड़ी में रहते हैं, याद करते हैं, “तड़के साढ़े तीन बजे अचानक एक लंबा बर्स्ट आया ड-ड-ड-ड-ड. पूरा पहाड़ी इलाका उसके शोर से गूंज गया. मैंने मेजर शैतान सिंह को बताया कि 8 प्लाटून के सामने से फ़ायर आया है. चार मिनट बाद हरि राम का फ़ोन आया कि 8-10 चीनी सिपाही हमारी तरफ़ बढ़ रहे थे.”

वो कहते हैं, “जैसे ही वो हमारी रेंज में आए, हमारे जवानों ने लंबा बर्स्ट फ़ायर किया है. उस में चार-पांच चीनी तो उसी समय ख़त्म हो गए और बाकी वापस भाग गए. इसके बाद मैंने अपनी लाइट मशीन गन को मोर्चे के अंदर वापस बुला लिया है. ये सुन कर मेजर साहब ने कहा कि जिस समय का हमें इंतेज़ार था, वो आ पहुंचा है. हरि राम ने कहा आप चिंता मत करिए. हम सब जवान तैयार हैं. हमने मोर्चा पकड़ लिया है.”

रेज़ांग ला

चारों तरफ़ से चीनी हमला

7 पलटन के जमादार सुरजा राम ने अपने कंपनी कमांडर को इत्तला दी कि चीन के क़रीब 400 सैनिक उनकी पोस्ट की तरफ़ बढ़ रहे हैं. तभी 8 पलटन ने भी रिपोर्ट किया कि रिज की तरफ़ से करीब 800 चीनी सैनिक भी उनकी तरफ़ बढ़ रहे हैं.

मेजर शैतान सिंह ने आदेश दिया कि जैसे ही चीनी उन की फ़ायरिंग रेंज में आएं, उन पर फ़ायरिंग शुरू कर दी जाए.

सूबेदार राम चंद्र यादव बताते हैं, “जब चीनी 300 गज़ की रेंज में आए तो हमने उन पर फ़ायर खोल दिया. क़रीब 10 मिनट तक भारी फ़ायरिंग होती रही. मेजर शैतान सिंह बार बार बाहर निकल जाते थे. मैं उन्हें आगाह कर रहा था कि बाहर मत जाइए क्योंकि कोई भरोसा नहीं कि चीनियों की कब ‘शेलिंग’ आ जाए.”

वो कहते हैं, “सुरजा राम ने रेडियो पर बताया कि हमने चीनियों को वापस भगा दिया है. हमारे सारे जवान सुरक्षित हैं. उन्हें कोई चोट नहीं लगी है. हम ऊँचाई पर थे और चीनी नीचे से आ रहे थे. ये बात हो ही रही थी कि चीनियों का पहला गोला हमारे बंकर पर आ कर गिरा. मेजर शैतान सिंह ने फ़ौरन फ़ायरिंग रुकवा दी. फिर उन्होंने 3 इंच मोर्टार चलाने वालों को कोडवर्ड में आदेश दिया ‘टारगेट तोता.’ हमारे मोर्टार के गोलों से चीनी घबरा गए और ये हमला भी नाकाम हो गया.”

भारतीय सैनिकों के पास सिर्फ़ लाइट मशीन गन और .303 राइफ़लें

जब चीनियों द्वारा सामने से किए गए सारे हमले नाकामयाब हो गए तो उन्होंने अपनी योजना बदल डाली. सुबह साढ़े चार बजे उन्होंने सभी चौकियों पर एक साथ गोले बरसाने शुरू कर दिए. 15 मिनट में सब कुछ ख़त्म हो गया. हर तरफ़ मौत और तबाही का मंज़र था.

रचना बिष्ट रावत बताती हैं, “पहला हमला उन्होंने नाकामयाब कर दिया था. ढलान के इधर-उधर चीनियों की लाशें पड़ी हुई थीं जो उन्हें ऊपर से दिखाई दे रही थीं. लेकिन फिर चीनियों ने मोर्टर फ़ायरिंग शुरू कर दी. ये हमला 15 मिनट तक चला होगा.”

वो कहती हैं, “भारतीय जवानों के पास सिर्फ़ लाइट मशीन गन्स और .303 की राइफ़ले थीं जो कि ‘सिंगिल लोड’ थी. यानी हर गोली चलाने के बाद उन्हें फिर से ‘लोड’ करना पड़ता था. इतनी सर्दी थी कि जवानों की उंगलियाँ जम गई थीं.”

उन्होंने बताया, “15 मिनट के अंदर चीनियों ने भारतीय बंकरों में बरबादी फैला दी. उनके बंकर उजड़ गए. तंबुओं में आग लग गईं और जवानों के शरीरों के अंग कट कर इधर उधर जा गिरे. मगर इसके बाद भी मेजर शैतान सिंह अपने जवानों का हौसला बढ़ाते रहे. जब धुँआ छंटा तो जवानों ने देखा कि ‘रिज’ के ऊपर हथियारों से लदे याक और घोड़े चले आ रहे हैं. कुछ क्षणों के लिए जवानों ने सोचा कि उन्हीं की अल्फ़ा कंपनी उनके बचाव के लिए आ रही है. वो बहुत खुश हुए पर जब उन्होंने दूरबीन लगा कर ग़ौर से देखा तो वो चीनी सैनिक निकले. तब चीनियों का तीसरा हमला शुरू हुआ और उन्होंने आ कर एक-एक सैनिक को मार दिया.”

ऑनरेरी कैप्टेन सूबेदार राम चंद्र यादव

मेजर शैतान सिंह की आंतें बाहर आईं

इस बीच मेजर शैतान सिंह की बाँह में ‘शेल’ का एक टुकड़ा आ कर लगा. उन्होंने पट्टी करवा कर अपने सैनिकों का नेतृत्व करना जारी रखा. वो ‘रिज’ पर थे तभी उनके पेट पर एक पूरा ‘बर्स्ट’ लगा. हरफूल ने लाइट मशीन गन से चीन के उस सैनिक पर फ़ायर किया जिसने शैतान सिंह पर गोली चलाई थी.

हरफूल को भी गोली लगी और उन्होंने गिरते हुए रामचंद्र से कहा कि मेजर साब को दुश्मन के हाथों मत लगने देना. मेजर शैतान सिंह अत्यधिक ख़ून बह जाने के कारण बार बार बेहोशी की हालत में चले जा रहे थे.

सूबेदार राम चंद्र यादव इस मुश्किल समय में उनके साथ थे और उन चंद लोगों में से एक हैं जिन्होंने उन्हें ज़िदा देखा था.

यादव याद करते हैं, “मेजर साब ने मुझसे कहा रामचंद्र मेरे पेट में बहुत दर्द हो रहा है. मेरी बेल्ट खोल दो. मैंने उनकी कमीज़ में हाथ डाला. उनकी सारी आंतें बाहर आ गई थीं. मैंने उनकी बेल्ट नहीं खोली, क्योंकि अगर मैं ऐसा करता तो सब कुछ बाहर आ जाता. इस बीच लगातार फ़ायरिंग हो रही थी. बेहोश हो गए मेजर शैतान सिंह को फिर होश आया.”

यादव कहते हैं, “उन्होंने टूटती सांसों से कहा मेरा एक कहना मान लो. तुम बटालियन में चले जाओ और सब को बताओ कि कंपनी इस तरह लड़ी है. मैं यहीं मरना चाहता हूँ. ठीक सवा आठ बजे मेजर साब के प्राण निकले.”

वो याद करते हैं, “इस बीच मैंने देखा कि चीनी सैनिक हमारे बंकरों में घुस रहे हैं और 13 कुमाऊँ के सैनिकों और चीनियों के बीच हाथों से लड़ाई हो रही है. हमारे एक साथी सिग्राम ने गोलियाँ ख़त्म हो जाने के बाद चीनियों को एक दूसरे के सिर लड़ा कर मारा. एक चीनी को उसने पैर पकड़ कर चट्टान पर दे मारा. इसके बाद 7 प्लाटून का एक सिपाही भी ज़िंदा नहीं बचा और न ही कैद हुआ.”

ऑनरेरी कैप्टेन सूबेदार राम चंद्र यादव के रेवाड़ी स्थित घर पर बीबीसी संवाददाता रेहान फ़ज़ल

मेजर शैतान सिंह को एक पत्थर के सहारे लिटाया

चारों तरफ़ लाशें ऐसे बिखरी पड़ी थीं जैसे वो कपड़े की गुडियाएं हों. मेजर शैतान सिंह का टेंट बुरी तरह से तहसनहस हो चुका था. उनके दोस्त चिमन का सिर धड़ से अलग पड़ा था.

मंडोला गाँव के महेंदर सिंह की टांगें बुरी तरह से कुचली जा चुकी थीं. मैने सूबेदार यादव से पूछा कि इस लड़ाई में 13 कुमाऊँ के 124 में से 113 जवान मारे गए. आप किस तरह इस भयानक हमले में बच पाए?

यादव ने बताया, “मैं मामूली ज़ख़्मी था और पूरी तरह से होश में था. लेकिन मेरे दिमाग़ में हरफूल की वो बात दौड़ रही थी कि मेजर साब की लाश चीनियों के हाथ नहीं पड़नी चाहिए. मैंने उनको ज़ोर से अपनी बाहों में लिया और उनके साथ एक खड्ड में लुढ़क गया. फिर मैं उन्हें अपनी पीठ पर लाद कर क़रीब 800 मीटर तक चला. फिर एक बड़े पत्थर के पास मैंने मेजर शैतान सिंह को लिटा दिया. ठीक सवा आठ बजे मेजर साब के प्राण निकले.”

वो कहते हैं, “मैंने उनके दस्ताने वहीं छोड़ दिए और उन के ऊपर बर्फ़ डाल दी, ताकि चीनी उन्हें देख नहीं पाएं. मैं नीचे क्वार्टर मास्टर के पास ये सोच कर आया कि कुछ लोगों को साथ ला कर मेजर साब की लाश ले जाउंगा. लेकिन जब मैं नीचे आया तो वहाँ हर जगह आग लगी हुई थी. हमारे ही लोगों ने उसे जला दिया था. उन्हें आदेश मिला था कि सब कुछ नष्ट करके चुशूल में बटालियन हेडक्वार्टर लौट आएं. तभी मुझे एक जीप आती दिखाई दी. मैं उस पर बैठा और वो जीप मुझे ले कर नीचे हेडक्वार्टर ले आई.”

रचना बिष्ट के साथ बीबीसी स्टूडियो में रेहान फ़ज़ल

सिर्फ़ नाम के ही शैतान

मेजर शैतान सिंह का जन्म 1 दिसंबर, 1924 को जोधपुर ज़िले के बनासर गाँव में हुआ था. उनका नाम भले ही शैतान सिंह हो, लेकिन उनके साथी बताते हैं कि वो भारतीय सेना के सबसे नेक इंसानों में से एक थे.

रचना बिष्ट रावत बताती हैं, “मेजर शैतान सिंह भी एक फ़ौजी परिवार से थे. उनके पिता एक सैनिक अधिकारी थे. उन्हें ओबीई मिला हुआ था. वो बहुत शरीफ़ आदमी थे. आमतौर से योद्धाओं की छवि होती है कि वो बहुत ख़ूंखार होते हैं. लेकिन उनके साथ ऐसा कुछ नहीं था.”

वो बताती हैं, “वो अपने जवानों के साथ रहने में यकीन करते थे. जब वो ख़ाली होते तो साथ मिल कर ऑल इंडिया रेडियो पर ख़बरें सुना करते थे. हर जगह चीन से हार की ख़बरें आ रही थी. सुन कर उनका ख़ून खौल जाता था. वो मेजर शैतान सिंह से कहा करते थे, ‘साहब जब हमें मौका मिलेगा तो हम जम कर लड़ेंगे.’ मेजर मुस्करा देते थे. लेकिन जब लड़ाई का मौका आया तो उनके नेतृत्व की वजह से ही एक भी जवान ने चीनियों को अपनी पीठ नहीं दिखाई.”

आख़िरी जवान और आखिरी गोली तक लड़ाई

रेज़ांग ला की लड़ाई को भारतीय सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक माना जाता है, जब एक इलाके का रक्षण करते हुए लगभग सभी जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी.

रचना बिष्ट रावत बताती हैं, “रेज़ांग ला की लड़ाई इसलिए बड़ी लड़ाई थी क्योंकि 13 कुमाऊँ के जवानों को जो आदेश मिले थे, उन्होंने उसे आख़िरी दम तक पूरा किया. उनको उनके ब्रिगेडियर टीएन रैना (जो बाद में थलसेनाध्यक्ष बने) ने लिखित आदेश दिया था कि उन्हें आख़िरी जवान और आख़िरी गोली तक लड़ते रहना है. उन्होंने इस आदेश का अक्षरश: पालन किया. ”

वो कहती हैं, “सिर्फ़ 124 जवान वहाँ तैनात थे. क़रीब एक हज़ार की संख्या में चीनियों ने उन पर हमला किया था. 114 जवान वहाँ मारे गए. पांच को युद्धबंदी बना लिया गया. उनमें से एक की मौत हिरासत में हुई. जब मैं इस विषय पर शोध कर रही थी तो मैंने 13 कुमाऊँ से उस लड़ाई में मरने वाले सैनिकों के नाम मांगे, तो उन से मेरे लैप-टॉप की तीन शीट्स भर गईं. ये सोच कर मेरी आँखें भर आईं कि कितने लोगों ने इस लड़ाई में अपनी ज़िंदगी की शहादत दी थी. ये लड़ाई सुबह साढ़े तीन बजे शुरू हुई थी और सवा आठ बजे ख़त्म हो गई थी पर मुख्य लड़ाई आख़िरी घंटे में ही हुई थी.”

परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह

मेजर शैतान सिंह को परमवीर चक्र

रेज़ांग ला में लड़ने वाली सी कंपनी का हर जवान हीरो था. अदम्य साहस दिखाने के लिए मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया.

सूबेदार रामचंद्र यादव कहते हैं, “अगर ये चार्ली कंपनी शहीद नहीं हुई होती तो लेह, करगिल, जम्मू कश्मीर सब ख़तरे में पड़ जाते. इसी ने रोका चीनियों को. जब उनका इतना नुकसान हो गया तो उसने खुद युद्ध-विराम किया. हमने युद्ध-विराम नहीं करवाया था.”

यादव कहते हैं, “अब मैं आपको बताता हूँ कि लड़ाई से चार दिन पहले हमारे पास संदेश आया कि तुम पीछे हट जाओ. मेजर शैतान सिंह ने कहा कि मैं इसका पालन तभी कर पाउंगा, जब मैं अपने जवानों से बात कर लूँ. उन्होंने मेरी राय पूछी. मैंने कहा ‘साब जवान मर जाएगा, लेकिन इस पोस्ट को छोड़ेगा नहीं.’ फिर मेजर साब हर प्लाटून में गए. वो जहाँ भी गए, वहाँ जवाब मिला कि हम मर जाएंगे और दुश्मन को इसी जगह खा जाएंगे, लेकिन दूसरी जगह नहीं जाएंगे.”

ब्रिगेडियर टीएन रैना ने अपने हाथों से जवानों की चिता को आग दी, जो बाद में थल सेनाध्यक्ष बने

यादव कहते हैं, “तीनों प्लाटूनों की सहमति मिलने के बाद मेजर शैतान सिंह ने कहा कि मेरा भी यही इरादा है. उन्होंने ब्रिगेडियर टीएन रैना को संदेश भेज दिया कि ये कंपनी इस जगह से पीछे नहीं हटेगी.”

लड़ाई ख़त्म होने के तीन महीने बाद मेजर शैतान सिंह के पार्थिव शरीर को जोधपुर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. बाकी सैनिकों की सामूहिक चिताएं, रेज़ांग ला में बटालियन हेडक्वार्टर के सामने जलाई गईं.

उनकी याद में स्मारक अब भी वहाँ खड़ा है.

रायपुर : घटिया निर्माण करने वाली निर्माण एजेंसियों के विरुद्ध किए जाएंगे कड़े दण्ड प्रावधान : मुख्यमंत्री श्री बघेल : मुख्यमंत्री ने गुणवत्ता सुनिश्चित करने मुख्य सचिव को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि प्रदेश में घटिया निर्माण करने वाली निर्माण एजेंसियों के विरुद्ध कड़े दण्ड प्रावधान किए जाएंगे। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव श्री सुनील कुजूर को सभी संबंधित विभागों और विषय विशेषज्ञों से चर्चा कर आगामी 15 दिनों में कार्ययोजना का प्रारुप प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य के सीमित और बहुमूल्य संसाधनों का पूर्ण सदुपयोग किया जाना काफी आवश्यक है, जिससे आम जनता को इनका अधिकतम लाभ पहुंचाया जा सके। किसी भी दशा में स्तरहीन निर्माण कार्य किए जाने पर अंकुश लगाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा है कि विगत वर्षों में सड़क, भवन, बांध, एनीकट इत्यादि जैसे विभिन्न निर्माण कार्यों में हजारों करोड़ रुपए व्यय किए जा चुके हैं, किन्तु निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए किसी स्पष्ट नीति के अभाव में अनेक स्थानों में गुणवत्ताविहीन निर्माण किए जाने की घटनाएं सामने आयी हैं। स्तरहीन निर्माण कार्यों से राज्य को बड़ी क्षति उठानी पड़ती है तथा आम जनता के बीच अविश्वास की भावना उत्पन्न होती है। निर्माण कार्य के गुणवत्ता परीक्षण के लिए ‘स्वतंत्र एजेंसियों’ की सहायता भी ली जा सकती है। राज्य के शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालयों, निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठित महाविद्यालयों और पॉलीटेक्निक महाविद्यालयों के अनुभवी प्राध्यापकों की सेवाएं ली जा सकती है।

CM श्री भूपेश बघेल बोले- जिला कलेक्टर समस्या मूलक क्षेत्रों में पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए तैयार करें कार्य योजना

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के सभी जिलों में पेयजल की दृष्टि से समस्या मूलक क्षेत्रों को चिन्हांकित कर वहां पेयजल की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ में लगभग 1250 मिलीमीटर औसत वर्षा प्रतिवर्ष होती है। वर्षा की दृष्टि से छत्तीसगढ़ राज्य सौभाग्यशाली है, लेकिन गर्मी की ऋतु में राज्य के अनेक हिस्सों में आम जनता को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है, इस समस्या का समाधान आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि यथा संभव प्रयास किया जाए कि आगामी ग्रीष्म ऋतु में पेयजल संकट कम से कम हो तथा आगामी तीन वर्षों में इसका स्थायी समाधान हो सके। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप मुख्य सचिव श्री सुनील कुजूर जिला कलेक्टरो को जारी  निर्देशों में कहा है कि शासन के विभिन्न विभागों द्वारा जल संरक्षण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद भी राज्य के अनेक जिलों में भू-जल स्तर गिरता जा रहा है। इस समस्या का समाधान किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने अपने निर्देश में कहा है कि सभी जिला कलेक्टर अपने जिलों में पेयजल की दृष्टि से समस्या मूलक क्षेत्रों को चिन्हांकित कर कार्ययोजना तैयार करें, जिसमें इस वर्ष वर्षा ऋतु के पूर्व किए जाने वाले जल संरक्षण के कार्य, आगामी दो-तीन वर्षों में किए जाने वाले कार्य, विभिन्न विभागों के पास उपलब्ध राशि तथा अतिरिक्त राशि की आवश्यकता संबंधी जानकारी शामिल हो।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति और जनजातियों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति लिए की निर्धारित सीमा को बढ़ाने या समाप्त करने की मांग की

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार से अनुसूचित जाति और जनजातियो के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति लिए निर्धारित ढाई लाख रुपये की सीमा को बढ़ाने या सीमा को समाप्त करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री ने भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावर चंद गहलोत को लिखे गए पत्र में कहा है कि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यर्थियों के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय और सामाजिक अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 2 लाख 50 हजार रुपये की आय सीमा निर्धारित है। समय समय पर सर्व आदिवासी समाज और राज्य अनुसूचित जन जाति आयोग द्वारा इस आय सीमा में वृृद्धि करने अथवा इसे समाप्त करने की मांग की जाती रही है। मुख्यमंत्री ने श्री गहलोत से अनुसूचित जाति और जनजाति के विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द ही पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा में वृृद्धि करने अथवा इसे समाप्त करने का आग्रह किया है और इस संबंध में संबंधितो को निर्देशित करने का आग्रह किया है।

छत्तीसगढ़ : आध्यात्म मार्ग अपना कर समाज को कल्याण की ओर ले जाएं : डॉ. चरणदास महंत : श्री रावतपुरा सरकार यूनिवर्सिटी का वार्षिक उत्सव

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छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आज यहां श्री रावतपुरा सरकार यूनिवर्सिटी के वार्षिक उत्सव समारोह में उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यहां के विश्वविद्यालय में भौतिक शिक्षा के अलावा आध्यात्मिक ज्ञान भी दिया जा रहा है। पढ़ाई के बाद का जीवन काल बहुत कठिन होता है। इस कठिन रास्ते पर सफल होने के लिए आध्यात्मिक शिक्षा भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी आध्यात्म के मार्ग को अपना कर समाज को कल्याण की ओर ले जाए।

विधानसभा अध्यक्ष ने परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार के चरणों में सादर नमन करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय का पहला वार्षिक उत्सव कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि संत ,लोक कल्याण के लिए समाज को कुछ न कुछ देना चाहते है। समय-समय पर कठिनाई आने से किसी भी विद्यार्थियों को हताश और निराश होने की जरूरत नहीं है। कठिन परिश्रम और मेहनत से जीवन में सफलता अवश्य मिलेगी। डॉ. महंत ने कहा कि श्री रावतपुरा सरकार ने विश्वविद्यालय में रोजगार मूलक शिक्षा देकर विद्यार्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान किए है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह ने कहा कि कॉलेज के वार्षिक उत्सव कार्यक्रम का इंतजार विद्यार्थियों को लम्बे समय से रहता है। वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि स्कूल और कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थी अच्छे पदो पर पहुंच कर राज्य और समाज की सेवा करते है। इस विश्वविद्यालय में विभिन्न संकायों की शिक्षा दी जा रही है। डॉ. प्रेमसाय सिंह ने कहा कि हमें आध्यत्मिक शिक्षा की ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

अतिथियों द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और श्री रावतपुरा सरकार के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। वार्षिक उत्सव समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अंकुर अरूण कुलकर्णी, श्री रावतपुरा सरकार यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के उपाध्यक्ष डॉ. जे.के. उपाध्याय, कैम्पस डायरेक्टर श्री अतुल तिवारी, समाचार पत्र लोकमाया के संपादक श्री अशोक भटनागर सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह का दौरा कार्यक्रम

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स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह कल 10 मार्च को अम्बिकापुर और सूरजपुर जिले के प्रवास पर रहेंगे और वहां आयोजित स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। डॉ. प्रेमसाय सिंह 10 मार्च को सुबह आठ बजे रेल से अम्बिकापुर पहुंचेंगे और वहां से सुबह 10 बजे सूरजपुर जिले के विकासखण्ड प्रतापपुर के ग्राम महुवारीपारा रेवटी पहुंचकर आयोजित स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अम्बिकापुर लौट आएंगे। डॉ. सिंह अम्बिकापुर से रात्रि 9.30 बजे रापुर के लिए प्रस्थान करेंगे।